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                            <item>
                <title>कृषक कल्याण एवं कृषि विकास: किश्तों की राशि एक अप्रेल, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक एकमुश्त जमा कराए जाने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दिए जाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में कृषि यंत्रों, तारबंदी, बीज, सिंचाई और डेयरी विकास हेतु हजारों करोड़ के अनुदान की घोषणा। लाखों किसान, पशुपालक और ग्रामीण उद्यमी लाभान्वित होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-100-interest-rebate-if-the-amount-of-farmer/article-142834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा पावर, टिलर, डिस्क, कल्टीवेटर आदि के लिए 160 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार कृषक लाभान्वित होंगे साथ ही, आगामी वर्ष 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स की 96 करोड़  रुपए की लागत से स्थापना की जाएगी। नीलगाय, जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आगामी वर्ष 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 किया जाना प्रस्तावित है।आधुनिकतम तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के आधार पर खेती करने में आसानी एवं क्षमता विकास के लिए उठाएं जाएंगे विभिन्न कदम</p>
<p><strong>एग्री स्टैक पीएमयू का होगा गठन</strong></p>
<ul>
<li>आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस के लिए 33 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन के लिए मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित हैै। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपए का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />  <br />छोटे बाजरे की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि छोटे बाजरे के 100 हेक्टेयर क्षेत्रा में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से कृषि भूमि के पोषक तत्वों पर होने वाले प्रभावों का आंकलन तथा मृदा उर्वरा शक्ति के प्रबन्धन के लिए आगामी वर्ष एक लाख 92 हजार मृदा नमूनों की जांच की जानी प्रस्तावित है।  </li>
<li>प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में इस के लिए लगभग 270 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय किया जाएगा। </li>
<li>कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रा में एआई/एमएल का वृहद स्तर पर उपयोग किए जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक पीएमयू का गठन किया जाएगा। राज किसान साथी पोर्टल 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के ऑनलाइन मॉडयूल का उन्नयन किया जाएगा।  </li>
<li>कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर एक्सपोजर विजिट करवाई जाएगी। मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादकों व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को किट, वर्कशॉप व एक्सपोजर विजिट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
<li>डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली राज-एम्स विकसित की जाएगी। इसके अन्तर्गेत कृषि में एआई/एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस के लिए 77 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। </li>
<li>उन्नत तकनीक के ग्रीन हाउस-पॉलीहाउस/शेडनेट, लो टनल, प्लास्टिक मल्च उपलब्ध करवाने के लिए आगामी वर्ष 4 हजार कृषकों को 200 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए औषधीय पौधों व मसाला फसलों तथा फूल व सब्जी आदि की खेती संवर्द्धन के लिए विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। ये कार्य हैं- </li>
<li>कृषि जोत भूमि के निरन्तर घटते जा रहे आकार को देखते हुए सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन वृद्धि के लिए वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। </li>
<li>उद्यानिकी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कृषकों को अनुदानित 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।  </li>
<li>पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषकों को ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों के उन्नत बीज व आदान उपलब्ध कराये जायेंगे।  </li>
<li>प्रदेश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि मसाला फसलों का 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में विस्तार किए जाने के लिए अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लूज फ्लॉवर एवं पॉलीहाउस में डच रोज की 500 हेक्टेयर क्षेत्रा में खेती के लिए कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।  </li>
<li>राज्य में एग्रो फॉरेस्ट्री के पौधे तैयार करने के लिए जोधपुर, पाली एवं कोटा में ही टेक नर्सरी की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। </li>
<li>कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार शिक्षा तथा कृषि शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यों को और अधिक गति दिए जाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद चरणबद्ध रूप से भरे जाने प्रस्तावित हैं। आगामी वर्ष 443 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। </li>
<li>दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता के लिए मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल एवं अरण्डी आदि फसलों के 70 हजार प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, 2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अनुदानित प्रमाणित बीजों का वितरण कर लाभान्वित किया जाएगा। इन पर 135 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। </li>
<li>प्रदेश में कृषि विकास के लिए उन्नत बीज, भूमि सुधार, बायो एजेंट्स एवं छोटे बाजरे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न कार्य  </li>
</ul>
<p><strong>मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना से होगा 3 लाख कृषकों को लाभ</strong></p>
<ul>
<li>राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में बायो एजेंट्स की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।  </li>
<li>नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को बढ़ावा देने के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रा में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित एवं अनिश्चित वर्षा के कारण वर्षा जल का संग्रहण कर बिना छीजत के पानी का उपयोग सुनिश्चित किए जाने के लिए आगामी वर्ष 8 हजार डिग्गियों व 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन सहित आगामी दो वर्षों में 36 हजार फार्म पोंड्स के लिए 585 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।</li>
</ul>
<p><strong>कृषि विपणन एवं सहकारिता</strong></p>
<ul>
<li>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 35 लाख से अधिक किसान साथियों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जाने की घोषणा। इस के लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान पर व्यय किए जाएंगे।</li>
<li>दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर्स के लिए 590 करोड़ रुपए के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे। </li>
<li>एग्रो प्रोसेड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन राज गिफ्ट होगा प्रारंभ <br />प्रदेश में भण्डारण क्षमता वृद्धि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, क्षमता विकास, मण्डी विकास तथा आधारभूत संरचना निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>गोदाम निर्माण, क्षमता संवर्द्धन, मण्डी सम्बन्धी कार्य</strong></p>
<ul>
<li>वर्ष 2047 तक 30 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश में 250 मीट्रिक टन एवं 500 मीट्रिक टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा। इस के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।</li>
<li>गुराडिया माना, सरोद (डग) व लावासल (मनोहरथाना)- झालावाड़ सहित 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदाम मय चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।</li>
<li>ठीकरिया चारणान-बूंदी व गैलानी, सालरिया (झालरापाटन), बडाय (खानपुर), पाडलिया, चाडा, सुनारी (डग)- झालावाड़ सहित 200 नवगठित गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं कार्यालय भवन मय चारदीवारी निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।  </li>
<li>प्याज की फसल को खराब होने से बचाने एवं मूल्य के उतार-चढ़ाव के नियंत्रण के लिए आगामी वर्ष तीन हजार किसानों को कम लागत की प्याज भण्डारण संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
</ul>
<p><strong>मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस</strong></p>
<ul>
<li>प्रदेश में मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दृष्टि से आगामी वर्ष राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस का आयोजन किया जायेगा।  </li>
<li>अलवर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑनियन, श्रीगंगानगर में सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर किन्नू तथा बांसवाड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मैंगो खोले जाएंगे।</li>
<li>आमजन को जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर, कोटा व उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>कृषि जिन्सों के प्रोसेसिंग, व्यवसाय एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदेश के चयनित जिलों में 2 हजार कृषकों, प्रोसेसर्स व्यापारियों व निर्यातकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।  </li>
</ul>
<p>नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी-बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर, कृषि उपज अनाज मण्डी में आवश्यक विकास कार्य-नदबई-भरतपुर, कोटपूतली-कोटपूतली बहरोड़, लोसल (धोद)-सीकर, राजलदेसर-चूरू थोक सब्जी मण्डी-नोखा-बीकानेर, सब्जी मण्डी-सवाई माधोपुर, बयाना-भरतपुर अनार मण्डी जीवाणा-जालोर में मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा। गौण मण्डी यार्ड, मूंडवा-नागौर में विशिष्ट पान-मैथी यार्ड तथा आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य ग्रामीण हाट (झालरापाटन)-झालावाड़ के लिए 10 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p><strong>समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र होंगे शुरू </strong></p>
<ul>
<li>उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त ग्रोसरी एवं अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाये जाने के लिए नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र शुरू किए जाएंगे। </li>
<li>दूरदराज से कृषि उपज की बिक्री के लिए कृषि उपज मण्डियों में आने वाले किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शेड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों मेंअन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। </li>
</ul>
<p><strong>पशुपालन एवं डेयरी: 200 ग्राम पंचायतों में खोले जाएंगे पशु चिकित्सा उपकेन्द्र  </strong></p>
<p>न्यूनतम 3 हजार पशुधन वाली पशु चिकित्सा संस्था विहीन ग्राम पंचायतों में से गहनौली (नदबई)-भरतपुर, धांधोला (जहाजपुर), बांगोलिया (रायपुर)-भीलवाड़ा, पावली (राशमी)-चित्तौड़गढ़, गढ़ोरा (सिकराय)-दौसा, रतनपुरा (संगरिया) -हनुमानगढ़, सामोर (आंधी)-जयपुर, आलवाड़ा (सायला)-जालोर, रेवासा दलेलपुरा (नावां)-डीडवाना कुचामन, संगतडा-सलूम्बर, 17 एमडी (घड़साना) -श्रीगंगानगर सहित 200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जायेंगे। </p>
<p>ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 3 हजार पशुधन की अनिवार्यता को प्राथमिकता देते हुए चतरपुरा (बानसूर)-कोटपूतली बहरोड़, मालपुर (गोविन्दगढ़)-अलवर, लीडी (पीसांगन)-अजमेर, बामडला (सेड़वा)-बाड़मेर, नवलपुरा (लाखेरी)-बूंदी, कौरेर-डीग, घोटािद (सागवाड़ा)-डूंगरपुर, मांडियाई खुर्द (तिंवरी)-जोधपुर, कितलसर (डेगाना), हरसोलाव (मेड़तासिटी)-नागौर, डाबरकलां, सिरोही, टोडा का गोठडा, सावतगढ़ (देवली)-टोंक, तलावड़ा (खण्डार)-सवाई माधोपुर, गोमावाली (विजयनगर)- श्रीगंगानगर, खिवाड़ा (राणी)-पाली सहित 25 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रा में 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा शहरी क्षेत्रा में 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 2 हजार पशुधन की पात्राता रखने वाले उपरेड़ा (बनेड़ा)-भीलवाड़ा, बिलोठी (सेवर)-भरतपुर, थांवला, राजमहल, चांदली (देवली)-टोंक, बान्दनवाड़ा (भिनाय)-अजमेर, अजबपुरा (नारायणपुर), बुद्ध विहार-अलवर, द्वारापुरा (बांदीकुई)-दौसा, जखराना-कोटपूतली बहरोड़, कठोती (जायल)-नागौर, कोटडी सिमारला (श्रीमाधोपुर)-सीकर, भालेरी (तारानगर)-चूरू, नेवरी व इन्द्रपुरा (उदयपुरवाटी)-झुंझुनूं सहित 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन- जमवारामगढ़-जयपुर, खेतड़ी-झुंझुनूं, फलौदी बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, झालरापाटन-झालावाड़ के भवन निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p>प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारे द्वारा गठित राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा। </p>
<p>सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।</p>
<p>दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। </p>
<p>विकसित राजस्थान @2047 के लिए प्रदेश में मिल्क प्रोसेसिंग कैपेसिटी 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व मिल्क प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने, मिल्क प्लांट्स की स्थापना, अपग्रेडेशन एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे। </p>
<p><strong>दुग्ध केन्द्र/संयंत्रा की स्थापना/संवर्द्धन कार्य  </strong></p>
<ul>
<li>ग्रामीण क्षेत्र में आगामी वर्ष होगी एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों स्थापना</li>
<li>आगामी वर्ष, ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </li>
<li>बारां तथा सिरोही में के 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जएगा।  </li>
<li>जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढ़ीकरण करते हुए क्षमता 30 हजार लीटर से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन की जायेगी। इस पर 25 करोड़ रुपये का व्यय होगा।  </li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रा में दुग्ध व दुग्ध उत्पादों के विपणन के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिए 500 डेयरी बूथ आवंटित किये जाएंगे।</li>
<li>एक लाख पशुपालकों को वेल्यू एडेड दुग्ध आधारित उत्पाद- शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि तैयार किये जाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में मुर्गीपालन तथा गो उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे, जिनमें मुर्गीपालन/गोशाला संवर्द्धन सम्बन्धी विभिन्न कार्य प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली आदि में हैचरी, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधायुक्त बैक यार्ड के 35 पॉलट्री के 35 क्लस्टर्स महिला शक्ति पोल्ट्री समूह के माध्यम से स्थापित किये जायेंगे। इसके अन्तर्गत प्रति ब्सनेजमत 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में पॉलट्री, फीड यूनिट स्थापित की जाएगी।  </li>
<li>गोशालाओं द्वारा उत्पादित गोकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवायी जाएंगी।  </li>
<li>गो उत्पादों को प्रोत्साहन देने व आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगायी जाएगी।  </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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                <title> कोटा संभाग में जैविक खेती का बढ़ा  रुझान</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती संभाग में पिछले 5 वर्षों में ऑर्गेनिक (जैविक ) खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है। कोटा बूंदी झालावाड़ बारां जिलों में करीब 15 हजार से अधिक किसान जैविक खेती कर अपनी आय को दुगना कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/increased-trend-of-organic-farming-in-kota-division/article-7224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/9_new.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती संभाग में पिछले 5 वर्षों में ऑर्गेनिक (जैविक ) खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है। कोटा बूंदी झालावाड़ बारां जिलों में करीब 15 हजार से अधिक किसान जैविक खेती कर अपनी आय को दुगना कर रहे हैं।  कोटा जिले की बात करें तो यहां 5000 से अधिक किसान जैविक खेती के कृषि विभाग से प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुके हैं । इन किसानों के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट इन दोनों बाजार में खासी धूम मचा रहे हैं । बूंदी जिले के नैनवां, हिंडौली क्षेत्र में करीब 2500 हैक्टेयर में किसान जैविक खेती कर अपनी आय को दुगुना कर रहे हैं। आॅर्गेनिक सब्जियों, दालों, अनाज में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व और बिना पेस्टीसाइड के उत्पादन मिलने से लोग आॅर्गेनिक उत्पाद महंगे होने के बावजूद पसंद कर रहे हैं। अभी ऑर्गेनिक उत्पादन का बाजार नहीं होने से 1250 किसान एक समूह बनाकर अपना उत्पादन बेच रहे हैं। समूह ने जैविक उत्पादन को बेचने के लिए सप्ताह में तीन दिन होम डिलीवरी सर्विस देना शुरू किया है। कोटा, बूंदी में किसानों को इसको अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।<br /><br />जिले में वर्तमान में करीब 2 लाख 70 हजार हैक्टेयर में किसान पारंपरिक खेती कर रहे हैं, जिसमें से 15000 हैक्टेयर में ऑर्गेनिक खेती की जा रही है। पिछले पांच साल से कृषि क्षेत्र में रासायनिक खाद के बढ़ते प्रयोग से होने वाले नुकसान को देखते हुए जीरो बजट खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है। जिले के किसान खेती में नवाचार कर अपनी आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ऑर्गेनिक खेती से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली ग्रीन हाउस गैसों को रोकने में मदद मिलती है।<br /><br />कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी, वैज्ञानिक डॉ. हरीश वर्मा ने बताया कि हरित क्रांति के बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण किसानों ने परंपरागत विधि छोड़ कर नई दिशा में कदम बढ़ाने से इसका परिणाम अब पर्यावरण प्रदूषण के रूप में दिख रहा है। कभी सेलिनाइजेशन व यांत्रिकरण के नाम पर उपजाऊ शक्ति बढ़ाने वाली विद्या आज उर्वराशक्ति को घटा रही है। मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए जैविक खेती सबसे कारगर तरीका है। इस विधि से खेती करने पर जहां जैव विविधता में वृद्धि होती है, वहीं उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी होती है।<br /><br /><strong>ऐसे हुई जैविक खेती की शुरूआत</strong><br /> किसान चौथमल सैनी ने बताया कि 7 साल पहले वह जयपुर के घराना गांव गए, वहां जैविक खेती देखी वहां से प्रेरणा मिली। इसके बाद कोटा किसान मेले में कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी लेकर सब्जियों, दालों का उत्पादन शुरू किया। जिंसों की मेचिंग चैन नहीं बनने से परेशानी होती थी, जिसके बाद ज्योतिबा फुले जैविक कार्य की कंपनी बनाई और किसानों को इससे जोड़ा। जिससे सब्जियों, जिंसों की वैरायटी तैयार हुई और बाजार तैयार किया। वर्तमान में कोटा में दो फार्म व तीन ब्रांच में माल बेचा जा रहा है। जैविक खेती में शुुरुआती दो साल तक तो उत्पादन सामान्य ही रहता है। इसके बाद उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। गेहूं जहां सामान्य खेती 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिकता है, वहीं जैविक गेहूं 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक जाता है।<br /><br /><strong>ये यह होता है फायदा</strong><br />पौष्टिकता के साथ सब्जियों में बढ़ा स्वाद, कोटा और बूंदी में अच्छा रिस्पांस<br />कोटा  निवासी किसान रामराज गुर्जर  ने बताया कि वह तीन साल से जैविक खेती कर सब्जियां उगाकर बाजार में बेच रहे हैं। ऑर्गेनिक सब्जियों का बाजार नहीं होने से घरेलू बाजार में इनको बेचा जा रहा है। रासायनिक उर्वरकों की बजाए इन सब्जियों में स्वाद और पौष्टिकता के साथ ही पेस्टीसाइड नहीं होने से लोग ज्यादा पसंद करते हैं। मिट्टी में तत्वों की आपूर्ति के लिए गोबर से तैयार किए गए जैविक खाद, बायोगैस स्लरी, नाडेप कम्पोस्ट, फास्फो कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, नीलहरित शैवाल, एजोला का प्रयोग करते हैं।<br /> बीजोपचार में भी जैविक औषधियों का प्रयोग करते हैं। पेस्टीसाइड की जगह नीम के उत्पाद का उपयोग कीड़ों के नियंत्रण में करते हैं। परजीवी, परभक्षी, सूक्ष्म जीवों का उपयोग कीटव्याधि नियंत्रण के लिए करते हैं। नीम, करंज की पत्तियां, नीम के तेल, निंबोली का उपयोग पौधों के बचाव में किया जाता है, जिससे गेहूं, सब्जियों की पौष्टिकता के साथ स्वाद बढ़ता है और यह स्वास्थ्य को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है।<br /><br /><strong>गोमूत्र व घास से तैयार होती है कीटनाशक दवाएं</strong><br />जैविक खेती करने वाले किसान धर्मराज  मीणा का कहना है कि बाजार में महंगे दामों पर मिलने वाली रासायनिक दवाओं के स्थान पर गोमूत्र, गाय के गोबर, नीम पत्ते, घास एवं आसानी से घर पर ही उपलब्ध होने वाली चीजों से कीटनाशक दवाओं को तैयार किया जाता है। जिससे पैदावार बढ के साथ-साथ विभिन्न रोगों से छुटकारा मिल जाता है।<br /><br /><strong>सब्जियों के भी मिलते हैं दोगुने दाम</strong><br />स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालने वाले रासायनिक अनाज एवं सब्जियों के स्थान पर लोग जैविक अनाज व सब्जियों को बढ़ावा दे रहे हैं। लोग किसानों से पकने से पहले ही गेहूं की बुकिंग कर जाते हैं।किसानों का कहना है कि बाजार में रासायनिक गेहूं 1800 से 2300 तक बिकता है, लेकिन जैविक गेहूं के लिए लोग चार से पांच हजार प्रति क्विटंल तक लेने को तैयार हो जाते हैं। कोटा ,झालावाड़, बारां, बूंदी जिले के अंदर धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर रुझान लोगों का बढ़ता जा रहा है।किसान प्रभु लाल साहू ने बताया कि  उसके खेत पर लोगों को रोजगार के साथ-साथ अच्छा मुनाफा मिल रहा है और इसको देखकर जैविक खेती की ओर लोग प्रेरित हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 17:46:14 +0530</pubDate>
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                <title>ऑर्गेनिक कलर्स से खेलें इको फ्रेंडली होली  </title>
                                    <description><![CDATA[होली के लिए ऑर्गेनिक रंगों को हम घर में ही बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन सा रंग कैसे बनता है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/play-eco-friendly-holi-with-organic-colors/article-6315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holi6_new.jpg" alt=""></a><br /><p>रसायन युक्त रंगों की बजाय ऑर्गेनिक कलर्स हमारी होली में चार चांद लगा सकते हैं। होली के लिए ऑर्गेनिक रंगों को हम घर में ही बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन सा रंग कैसे बनता है?<br /><br /><span style="color:#ffff00;background-color:#000000;"><strong>पीला रंग</strong></span>: थोड़ी सी हल्दी में बेसन मिलाकर ऑर्गेनिक पीला रंग पाएं। गीला पीला रंग बनाने के लिए पानी में हल्दी को घोल लें और बेधड़क होली खेलें। इसके अलावा आप पीले रंग के फूलों को सुखाकर भी पीला रंग पा सकते हैं। लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें कि हल्दी ले रहे हैं तो रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली हल्दी के डिब्बे का इस्तेमाल न करें। इसके लिए नई, पैकेट बंद हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>सूखा लाल रंग</strong></span>: सूखा लाल गुलाल बाजार से खरीदने की बजाय लाल चंदन का इस्तेमाल करें। अड़हल के फूल सी रंगत भला सिंथेटिक रंगों में कहां मिलती है। अड़हल के फूलों को सुखाकर उसका पाउडर बनाए और देखें कि यह कैसी रंगत देता है। इसमें थोड़ा मैदा मिलाकर इसे ज्यादा भी किया जा सकता है। सूखे के अलावा गीला लाल रंग बनाने के लिए लाल चंदन के पाउडर को थोड़ी देर पानी में उबालने के बाद इस लाल रंग पानी से जमकर होली खेलें। पानी की फुहार से ही वातावरण सुगंधमय तो होगा ही। त्वचा पर कोई दाग धब्बा पड़ने का खतरा भी नहीं होगा। अनार के दानों को पानी में उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है। वैसे लाल रंग बेहतर स्वास्थ्य का भी परिचायक होता है यानी आप लाल रंग के जरिये दूसरों तक यह बेहतर स्वास्थ्य का संदेश पहुंचा सकते हैं। खैर! होली के मामले में लाल रंग सबसे चटखदार होता है। इसलिए ऑर्गेनिक होली खेलनी है तो इस रंग को जरूर आजमाएं।</p>
<p><br /><span style="color:#008000;"><strong>हरा रंग</strong> </span>: रंगीली होली में हरा रंग खास महत्व रखता है। वैसे यह रंग पर्यावरण का सूचक भी माना जाता है। आप मेंहदी या हिना पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। हिना पाउडर या मेहंदी को मैदे या आटे में मिलाकर होली खेलने के लिए हरा रंग तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा पालक, धनिया, पुदीना और अन्य हरी सब्जियों को सुखाएं। इन्हें पीसकर हरा रंग बन जाता है।</p>
<p><br /><span style="color:#800000;"><span style="color:#ff6600;"><strong>मजेंटा</strong></span>:</span> मजेंटा रंग के लिए बीट रूट यानी चुकंदर इसके लिए बेस्ट रहता है। होली के कुछ दिनों पहले ही बीट रूट को सुखा लें। जब यह पूरी तरह सूख जाए तो इसे पीस लें। यह पाउडर की तरह बारीक हो जाएगा जो कि होली को रंगीन बनाने में काम आएगा। अगर हल्का मजेंटा पाना चाहते हैं तो थोड़ी और मेहनत करें यानी प्याज के छिलकों को आधा लीटर पानी में उबाल लें इससे हल्का मजेंटा रंग तैयार हो जाएगा।</p>
<p><br /><strong><span style="color:#993366;">जामुनी</span></strong> : जामुनी रंग पाने के लिए काले अंगूरों को या जामुन को उबाला जा सकता है। ध्यान रखें कि पानी ठंडा हो जाने के बाद ही रंगीन पानी का इस्तेमाल करें। कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि इन रंगों को घर पर बनाकर आप बेहद खूबसूरत अंदाज में रंग रंगीली होली खेल सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आॅर्गेनिक रंगों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 15:16:42 +0530</pubDate>
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