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                <title>हरियालो राजस्थान अभियान : स्टूडेंट्स और शिक्षक ग्रीष्मावकाश पर, पौधरोपण के लिए गड्ढ़े खोदेगा कौन</title>
                                    <description><![CDATA[अवकाश के बीच पौधारोपण की तैयारी , 21 जून तक ग्रीष्मावकाश, शिक्षक-विद्यार्थी असमंजस में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-hariyalo-rajasthan--campaign--with-students-and-teachers-on-summer-vacation--who-will-dig-the-pits-for-tree-plantation/article-156168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  राज्य सरकार के हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधरोपण को लेकर शिक्षा विभाग के एक पत्र ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के बीच शिक्षकों व विद्यार्थियों की नींद उड़ा दी है। पत्र के अनुसार 20 जून से पहले स्कूल परिसर, खेल मैदान व आसपास खाली जगहों पर पौधरोपण के लिए गड्ढ़े खुदवाए जाने हैं। विभाग का यह आदेश आते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी भी असमंजस में पड़ गए। दरअसल, विभाग मानसून से पूर्व स्कूल परिसर, खेल मैदानों में पौधे लगाने के लिए गड्ढ़े खुदवाने के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। ताकि, मानसून में बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सके।इधर, शिक्षक संघों ने विभाग के इस आदेश पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब स्कूलों में 21 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश है तो 20 जून से पहले पौधरोपण के लिए गड्ढ़े कौन खोदेगा।</p>
<p><strong>उप शासन सचिव व निदेशक ने जारी किए निर्देश</strong><br />शिक्षा (ग्रुप-1) उप शासन सचिव आलोक जैन ने स्कूल शिक्षा परिषद के आयुक्त एवं शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर जिलावार चिह्नित स्थान एवं पौधारोपण अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद शिक्षा निदेशक ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशक व सीडीईओ को अभियान के क्रियान्वयन के दिशा-निर्देश दिए हैं, कि सरकारी स्कूलों में पौधरोपण के लिए 20 जून से पहले ही गड्ढ़े तैयार करवा लें, ताकि मानसून शुरू होते ही बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सके।</p>
<p><strong>तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, देखरेख की जिम्मेदारी भी मिलेगी</strong><br />पौधरोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए 'नो-बैग डे' पर विद्यार्थियों और शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे पौधों के संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। निदेशालय ने सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों से जिलेवार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौधों की उपलब्धता, नर्सरियों की पहचान तथा पौधरोपण के लिए चयनित स्थलों का विवरण निर्धारित प्रारूप में तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>यहां से होगी पौधों की उपलब्धता</strong><br />अभियान के लिए पौधों की व्यवस्था वन विभाग की नर्सरियों, स्थानीय पंचायतों, नगर निकायों, कॉपोर्रेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सहयोग, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्कूलों के इको क्लब तथा अन्य उपलब्ध स्रोतों से की जाएगी।</p>
<p><strong>संस्था प्रधान एवं शिक्षक असमंजस में</strong><br />20 जून तक सभी सरकारी स्कूलों में पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदने हैं। वर्तमान में स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण ना तो शिक्षक और ना ही विद्यार्थी आ रहे हैं। ऐसे में यह गड्ढ़े कौन खोदेगा। इसको लेकर संस्था प्रधान एवं शिक्षक परेशान हैं।</p>
<p><strong>अभिभावक बोले-शैक्षणिक दिनों में हो गतिविधियां</strong><br />अभिभावकों का मानना है कि पौधरोपण अभियान बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करेगा, लेकिन इसके लिए गतिविधियां अवकाश के बजाय नियमित शैक्षणिक दिनों में आयोजित की जानी चाहिए ताकि अधिकतम विद्यार्थी शामिल हो सकें।</p>
<p><strong>ग्रीष्मावकाश के बाद करवाएं गड्ढ़े</strong><br />वर्तमान में सरकारी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण स्कूल बंद हैं। ऐसे में हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधारोपण के लिए 20 जून तक गड्ढ़े तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके कारण असमंजस की स्थिति बन गई है। इस तिथि को आगे बढ़ाया जाएं ताकि सभी शिक्षक व विद्यार्थी हरियालो राजस्थान अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके और अधिक से अधिक पौधे लगाएं जा सकें।<br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>
<p><strong>सिर्फ लक्ष्य नहीं, संसाधन भी जरूरी</strong><br />पौधरोपण के लिए गड्ढ़े तैयार करना, पौधे जुटाना, उनकी सुरक्षा और सिंचाई सुनिश्चित करना बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए स्पष्ट कार्ययोजना और संसाधनों की आवश्यकता है। सरकार का प्रयास सराहनीय है लेकिन इसे व्यवहारिक बनाने के लिए यह तैयारी ग्रीष्मावकाश के बाद से की जानी चाहिए ताकि, शिक्षक व विद्यार्थी सामूहिक रूप से अभियान का हिस्सा बन सके।<br /><strong>-नवल सिंह, शिक्षक</strong></p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले-अभियान से जुड़ने का मिले मौका</strong><br />पौधरोपण जैसे अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। यदि, स्कूल खुलने के बाद पौधरोपण की तैयारी हो हमें भी अभियान से जुड़ने का अवसर मिलेगा। लेकिन, ग्रीष्मावकाश के दौरान अधिकांश छात्र बाहर छुट्टियों पर हैं। ऐसे में पौधरोपण से पूर्व की तैयारियों में भाग लेने के लिए जरूरी है कि यह प्रक्रिया ग्रीष्मावकाश के बाद की जाए।<br /><strong>-नरेंद्र प्रजापति, छात्र नयापुरा</strong></p>
<p>पौधरोपण केवल कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने का अवसर है। यदि विद्यार्थियों को पौधे लगाने, उनकी वृद्धि मापने और संरक्षण की जिम्मेदारी दी जाए तो यह व्यवहारिक शिक्षा का भी हिस्सा बन सकता है। लेकिन, यह काम गर्मियों की छुट्टियों के बाद होना चाहिए।<br /><strong>-पवन नागर, पंकज कुश्वाह, छात्र बोरखेड़ा</strong></p>
<p>कोटा जिले को 3 लाख 84 हजार 600 पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। 20 जून से पूर्व गड्ढ़े तैयार करने के लिए ग्राम पंचायत, शिक्षक, विभाग के मंत्रालिक कर्मचारियों व स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। ग्रीष्मावकाश चल रहा है, किसी पर कोई दबाव नहीं है, स्कूल के आसपास रहने वाले विद्यार्थी स्वेच्छा से आकर श्रमदान कर सकते हैं।<br /><strong>-आशा मंडावत, संभागीय संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>विद्यालय के आसपास रहने वाले विद्यार्थी, स्काउट-गाइड, एनएसएस के बच्चे स्वेच्छा से आकर श्रमदान कर सकते हैं। वहीं, अभिभावकों, स्वयंसेवी संस्थाओं से भी सम्पर्क कर सहयोग लिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर विभाग से प्रस्ताव लेकर मनरेगा श्रमिकों की मदद से भी गड्ढ़े तैयार करवाए जा सकते हैं।<br /><strong>-स्नेहलता शर्मा, मुख्य ब्लॉक शिक्षाधिकारी कोटा शहर</strong><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:12:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मानसून सीजन में करीब 7 करोड़ पेड़ लगाने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षा विभाग ने तो दो करोड़ वृक्षारोपण का अभियान चलाया था और वन विभाग के पास प्रमुख तौर पर जिम्मेदारी रहने से इतने पौधे लगाए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/claim-of-planting-about-7-carore-trees-in-monsoon-season/article-91121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार की एक रिपोर्ट में सभी विभागों, नगरीय निकायों, प्राइवेट कंपनियों और जनसहयोग से प्रदेशभर में करीब सात करोड़ पेड लगाए जाने का दावा किया गया है। सबसे ज्यादा वृक्षारोपण वन विभाग, शिक्षा विभाग और राज्य नरेगा विभाग ने लगाए हैं। इन तीनों विभागों ने करीब पौने पांच करोड़ पेड़ लगाए हैं। वहीं, सरकारी कागजों की इस रिपोर्ट का असर अब देखना बाकी है। इतना वृक्षारोपण होने के बाद इनका सरवाइवल प्रतिशत अगले कुछ महीनों में देखने के बाद हकीकत पता चलेगी। राज्य सरकार ने हाल ही में प्रदेश में वृक्षारोपण अभियान के तहत लगे पौधों की रिपोर्ट बनाई। प्रदेशभर के 50 जिलों में वृक्षारोपण की रिपोर्ट में महज दो विभाग वन और शिक्षा विभाग ही दो करोड़ से अधिक आंकडा पार कर पाए। शिक्षा विभाग ने तो दो करोड़ वृक्षारोपण का अभियान चलाया था और वन विभाग के पास प्रमुख तौर पर जिम्मेदारी रहने से इतने पौधे लगाए गए।</p>
<p>वृक्षारोपण कार्यक्रम में सरकारी विभागों के अलावा प्राइवेट कंपनियों ने भी सीएसआर फंड के जरिए वृक्षारोपण करने का दावा किया है। सभी तरह की कुल 18 श्रेणी में करीब सात करोड़ तक पहुंच चुके इस वृक्षारोपण के आंकडों की हरियाली अब धरातल पर कितने दिन तक नजर आएगा, यह आगामी महीनों में पता चल पाएगा। राज्य में नरेगा विभाग के माध्यम से भी एक करोड़ से अधिक पेड़ लगाए गए, लेकिन कई वृक्षारोपण कार्यक्रम शिक्षा और राजीविका में शामिल होने से आंकडे इधर उधर हो गए। कई जगह तेज बारिश से जलभराव के कारण कुछ विभागों का आंकडा शून्य भी रहा। जोधपुर में नरेगा विभाग, वन विभाग, राजीविका, उद्यानिकी,पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग की तरफ से एक भी पेड नहीं लगाया गया। कई विभाग कुछ जिलों में वृक्षारोपण में शून्य आंकडा लिए हुए हैं।</p>
<p><strong>हर साल करोड़ों पेड़, लेकिन कुछ ही दिनों में हरियाली गायब</strong><br />प्रदेश में हर साल करोड़ों पौधे लगाने का दावा किया जाता है, लेकिन मानसून खत्म होने के कुछ दिनों बाद ही यह धरातल पर यह हरियाली आंकडों के लिहाज से नजर नहीं आती। इसकी वजह है कि अधिकांश विभागों के वृक्षारोपण में खानापूर्ति करने से पेडों क सरवाइल परसेंट बहुत कम होता है। इस बार भी कई जगह पौधों की जगह टहनियों को रोपने, सूखे पेडों को फिर से रोपने, केवल फोटो खिंचाने के लिए पौधें का उपयोग जैसी घटनाएं सामने आर्इं। सरकार के हर साल लगाए करोडों पेडों का यदि सरवाइवल परसेंट सही हो जाए, तो राजस्थान में कई साल पहले घना जंगल बन गया होता, लेकिन कागजी सिर्फ फाइलों में ही नजर आती है।</p>
<p>नरेगा विभाग के माध्यम से प्रदेशभर में करीब एक करोड़ पौधे लगाए गए हैं। वृक्षारोपण के बाद उनका सरवाइल परसेंट हमने पिछले कुछ सालों में सुधारा है। नरेगा कर्मियों के माध्यम से हम पौधों की सुरक्षा करने में लगे हुए हैं,जल्दी ही धरातल पर परिणाम नजर आएंगे।<br /><strong>- अरविन्द सक्सेना, अधीक्षण अभियंता, राज्य नरेगा विभाग</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Sep 2024 11:23:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रीन नेशनल हाईवे में राजस्थान टॉप, अब तक एनएच के किनारे 46.48 लाख पौधे लगे</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 10,789.72 किलोमीटर है। केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में यह जानकारी मुहैया करवाई गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-top-in-the-national-highway--now-till-46-48-lakh-tree-palnt-of-the-corner/article-88210"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy30.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केन्द्र ने नेशनल हाईवे को हरा-भरा बनाने के लिए वर्ष 2015 में हरित राजमार्ग नीति जारी की थी। इस पॉलिसी के तहत अब तक राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 402.28 लाख पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से सर्वाधिक पौधे राजस्थान में 46.48 लाख तथा 35.04 पौधे मध्य प्रदेश और 10.44 लाख पौधे बिहार में लगाए गए है। इसके अलावा केरल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में सबसे कम पौधे लगाए गए हैं। राजस्थान से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 10,789.72 किलोमीटर है। केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में यह जानकारी मुहैया करवाई गई हैं।</p>
<p><strong>हितधारकों की भागीदारी से वृक्षारोपण</strong><br />हरित राजमार्ग पॉलिसी के तहत ग्रीन हाईवे बनाने में हितधारकों की भागीदारी से वृक्षारोपण करवाया गया। इसमें पेड़दार मार्ग और मध्य भाग में पौधे लगाए गए। हालांकि नए हाईवे विकसित करने के लिए काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या के तीन गुणा तक संबंधित संवेदक को पेड़ लगाना जरूरी होता है। इससे भी हरित नेशनल हाईवे को बढ़ावा मिला हैं।</p>
<p><strong>अब तक राज्यों में लगाए गए पौधों की स्थिति</strong><br />पॉलिसी जारी होने के बाद अब तक राज्यों में लगाए गए पौधों में से आंध प्रदेश में 20.01 लाख, असम में 7.81 लाख, बिहार में 10.44 लाख, छत्तीसगढ़ में 8.11 लाख, दिल्ली में 24.70 लाख, गुजरात में 20.02 लाख, हरियाणा में 20.27 लाख, हिमाचल प्रदेश में 3.00 लाख, जम्मू और कश्मीर में 3.02 लाख, झारखंड में 8.12 लाख, कर्नाटक में 25.32 लाख, केरल में 2.20 लाख, मध्य प्रदेश में 35.04 लाख, महाराष्टÑ में 36.19 लाख, ओडिशा में 19.45 लाख, पंजाब में 18.52 लाख, राजस्थान में 46.48 लाख, तमिलनाडु में 21.67 लाख, तेलंगाना में 12.80 लाख, उत्तर प्रदेश में 36.91 लाख, उत्तराखंड में 6.69 लाख, पश्चिम बंगाल में 15.59 लाख अर्थात कुल 402.28 लाख पौधे लगाए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 13:15:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में किया जागरुक </title>
                                    <description><![CDATA[सफलता से प्रेरित होकर फाउंडेशन टीम फिर से उसी मॉडल को दोहरा रही है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण और समुदाय पर स्थायी और सकारात्मक प्रभाव डालना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/awareness-about-the-importance-of-environmental-protection/article-86055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/6644-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसके फाउंडेशन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए बागा का बास, चौमू में लगभग 2000 पौधे लगाएं। इस कार्यक्रम में एसके फाउंडेशन के अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाई। फाउंडेशन द्वारा इसी तरह का वृक्षारोपण महोत्सव वर्ष 2019 में भी किया गया था, जिसके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। तब जो 3000 पौधे लगाए गए थे, वे अब पूरी तरह से विकसित हो गए हैं और स्थानीय ग्रामीणों को कई प्रकार के लाभ भी प्रदान कर रहे हैं। बहुत से ग्रामीण अब इन पेड़ों के माध्यम से अपनी आजीविका तक चला रहे हैं। इस सफलता से प्रेरित होकर फाउंडेशन टीम फिर से उसी मॉडल को दोहरा रही है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण और समुदाय पर स्थायी और सकारात्मक प्रभाव डालना है।</p>
<p>इस मुहिम के लिए फाउंडेशन के ट्रस्टी एवम प्रेसिडेंट यश सेतिया ने कहा कि हमारा उद्देश्य न केवल व्यावसायिक विकास करना है, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए भी काम करना है। हमें विश्वास है कि यह छोटा सा प्रयास हमारे शहर को अधिक हरित और स्वच्छ बनाने में मदद करेगा। इस कार्यक्रम को स्थानीय लोगों के सहयोग से आयोजित किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया। इससे इलाके में हरियाली को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jul 2024 18:26:29 +0530</pubDate>
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                <title>अभ्युथानम फाउंडेशन के सदस्यों ने किया पौधारोपण </title>
                                    <description><![CDATA[ भांकरी ने बताया कि वृक्ष मानव का आधार है। पिछले वर्षो की भांती इस वर्ष भी पूरे जिले में 21 हजार पौधे लगाएं जाएंगे एवम इनके सरंक्षण की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/abhyuthanam-foundation-members-planted-of-the-treesaplings%C2%A0/article-83331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देव गिरी पर्वत स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर प्रांगण में पौधारोपण किया गया। अभ्युथानम फाउंडेशन के सदस्य लोकेश शर्मा भांकरी ने बताया कि वृक्ष मानव का आधार है। पिछले वर्षो की भांती इस वर्ष भी पूरे जिले में 21 हजार पौधे लगाएं जाएंगे एवम इनके सरंक्षण की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। इसकी शुरुआत नीलकंठ महादेव मंदिर प्रांगण में 11 पौधे लगाकर की गई। प्रत्येक पौधे के पोषण की जिम्मेदारी टीम के सदस्यों को दी गई।</p>
<p>इस दौरान नीलकंठ समिति अध्यक्ष रोशन जोशी, विकाश शर्मा, विष्णु मीना, विशाल जोशी, रोहित मीना, श्याम सुंदर खेड़ला, गोलू सिकरोली, अलीजा शेख, मोहरसिंह गुर्जर, रोहित शर्मा, मंजीत सिंह, रामकेश बैरवा, गजराज प्रजापत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 15:57:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एसबीआई की अमृत वाटिका स्थापित, लगाए छायादार वृक्ष </title>
                                    <description><![CDATA[मिश्रा की अगुवाई में कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने वृक्षारोपण किया। अमृत वाटिका में छायादार वृक्ष लगाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/officers-planted-tree-of-the-sbi/article-58398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/untitled-1-copy42.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) जयपुर मंडल एवं वृक्षावली संस्था के सयुंक्त तत्वधान में एसबीआई अधिकारी आवासीय कॉलोनी में वृक्षारोपण कर एवं फुलवाड़ी बनाकर अमृत वाटिका की स्थापना की गई। अमृत वाटिका का उद्घाटन भारतीय स्टेट बैंक, जयपुर मण्डल के मुख्य महाप्रबन्धक  राजेश कुमार मिश्रा ने किया। मिश्रा की अगुवाई में कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने वृक्षारोपण किया। अमृत वाटिका में छायादार वृक्ष लगाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Sep 2023 10:33:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लोकमंच की ओर से पौधरोपण कार्यक्रम </title>
                                    <description><![CDATA[लोकमंच के अध्यक्ष नीरज पांथरी ने बताया कि मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने सेक्टर के निवासियों से अपील की है कि सभी लोग एक-एक पेड़ अवश्य लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/peoples-took-oath-of-the-security-of-plants/article-53863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/untitled-1-copy7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लोकमंच मानसरोवर की ओर से 113 सेक्टर स्थित केशव उद्यान पार्क एवं सेक्टर 115 स्थित रामदेव पार्क में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गोपाल शर्मा उपस्थित रहे। पार्क में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 50 से अधिक पौधे लगाए गए, जिसमें नीम, अशोक, आंवला, करंज सहित अन्य पौधे शामिल रहे। कार्यक्रम में शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ्य हवा के लिए पेड़ लगाने बहुत ज़रूरी है। इसलिए अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। </p>
<p>लोकमंच के अध्यक्ष नीरज पांथरी ने बताया कि मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने सेक्टर के निवासियों से अपील की है कि सभी लोग एक-एक पेड़ अवश्य लगाए। इसके साथ ही उन्होंने वहां मौजदू लोगों के साथ पौधों की सुरक्षा करने की शपथ ली। कार्यक्रम में म्हारा घरां पधारो समिति अध्यक्ष रतन कट्टा, गोवर्धन कुमावत, सत्यनारायण तांबी, अभिषेक सक्सेना, मनीष गोड़, विक्रम सिंह, योगेश खत्री, विजय खत्री, अजय, दीनदयाल, रामदास गुप्ता, राजेश लखवानी, कपिल मंगलानी, मनीष, ईश्वरदास, किरण शर्मा, दुर्गा देवी, चंद्रा असवानी, रीटा, गायत्री देवी, माया खत्री, रमेश सैनी, विक्रम सिंह, शंकर दुलानी, राजीव द्विवेदी, प्रभा देवी, देवेश्वरी देवी, आनंद, राजकुमार, अधिक , गीता देवी, मनीष सहित करीब 70 अधिक लोग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2023 13:42:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वृक्षारोपण से जरूरी है लगे हुए वृक्षों को बचाना</title>
                                    <description><![CDATA[आज आवश्यकता इस बात की है आप लाखों करोड़ों पौधों को भले ही न रोपें, आप चाहे एक ही पौधे को लगाए पर वो एक पौधा वृक्ष बनने तक जीवित रहना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/it-is-necessary-to-save-the-planted-trees-from-tree/article-52185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/b-story-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>जैसे ही मानसून की वर्षा शुरू होती है, पूरी धरती हरियाली से चहक उठती है। मरू भूमि भी, भीष्ण गर्मी में तपने के बाद चैन की सांस लेती है। यह सब प्रकृति की देन है और प्रकृति का अपना एक चक्र है। मनुष्य ने अपनी असीमित लालसाओं के वशीभूत होकर अंधाधुंध वृक्षों की कटाई कर डाली, जिसके कारण जंगलों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया। भारतीय पादप विज्ञानी जगदीश चंद्र बसु जिन्होंने सबसे पहले यह सिद्ध किया कि पेड़-पौधे हमारी तरह श्वसन करते हैं। वो भी हमारी तरह दर्द और खुशी महसूस करते है, उन्हें भी भूख और प्यास की अनुभूति होती है। हिंदू धर्म ग्रंथों और शास्त्रों में भी वृक्षों की महिमा का उल्लेख मिलता है। बड़, पीपल, तुलसी आदि पेड़-पौधों को पूजनीय माना जाता है। पीपल को वृक्षों का राजा कहते हैं। इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए- मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु, सखा शंकरमेवच। पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम, वृक्षराज नमस्तुते।<br /><br />आज जिस तरह का पारिस्थितिक असंतुलन देखने को मिल रहा है, जिस तरह से निरंतर पृथ्वी के तापमान में  वृद्धि दर्ज की जा रही है, प्राकृतिक चक्र असंतुलित होते जा रहे हैं, इन सबका कारण है घटती वृक्षों की संख्या। वृक्ष, पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  मानसून के आरंभ होने के साथ ही वन महोत्सव कार्यक्रम भी जोर-शोर से शुरू हो जाते है। राजनीतिक दल, सामाजिक संस्थाएं और वन विभाग के बीच ज्यादा से ज्यादा पौधों को रोपे जाने की एक होड़ सी लग जाती है। रोपे जाने वाले पौधों की संख्या सैकड़ों हजारों तक सीमित नहीं रहती बल्कि यह संख्या लाखों करोड़ों में पहुंच जाती है। मुझे इन आंकड़ों को देखकर आश्चर्य होता है कि हमें तो घर के छोटे से गार्डन में लगे दस से बीस पौधों की देखरेख करने में पसीने छूट जाते हैं। ऐसी स्थिति में इन लाखों करोड़ों रोपे गए नए पौधों की देखरेख कौन करता होगा?<br /><br />परंतु वास्तविकता इससे से कोसों दूर है। प्राय: देखा गया है कि संस्थाएं और दल वन महोत्सव के दौरान पौधा रोपण का कार्यक्रम आयोजित करते हैं, मुख्य अतिथि को आमंत्रित किया जाता है, पांच दस पौधे सांकेतिक रूप से रोपे जाते हैं, फोटो खींची जाती है, थोड़ा भाषण आदि होता है यह बताने लिए की वृक्ष हमारे लिए क्या करते हैं। बचे हुए पौधे, कार्यक्रम में आए अन्य लोगों के रहमों-करमों पर छोड़कर, आयोजक वहां से विदा हो जाते हैं। अब बचे हुए पौधों में से कितने पौधे लगाए गए और कितने रोपे जाने के अभाव में वहीं पड़े-पड़े मर गए,इसका कोई लेखा-जोखा किसी के पास नहीं होता। अगले दिन समाचार पत्रों में यह पौधारोपण कार्यक्रम समाचारों की सुर्खियां बन जाता है।<br /><br />यह तो बात हुई कार्यक्रम स्थल पर मर जाने वाले पौधों की, अब अगर बात की जाए की पौधों को रोपे जाने के पश्चात कितने पौधों की उचित देखभाल की गई? शायद इसका आंकड़ा किसी के पास उपलब्ध नहीं होगा। हमारे शास्त्रों में  वृक्षों को माता-पिता तुल्य माना गया है। ऐसे में हमारी लापरवाही से मरने  वाले पौधों की हत्या का जिम्मेदार किसे माना जाए? एक पौधे को वैसी ही देखभाल की आवश्यकता होती है जैसे एक बच्चे को होती है। जब बच्चा बड़ा हो जाता है तब उसकी माता-पिता पर निर्भरता कम हो जाती है। उसी तरह जब एक पौधा बड़ा होकर वृक्ष बन जाता है तो  उसको भी देखरेख की उतनी आवश्यकता नहीं पड़ती। बस इतना ध्यान रखना होता है कि कोई उसको काटे नहीं या नुकसान न पहुंचाए।  परंतु हमारी सबसे बड़ी  समस्या यह है कि हम इन बेजुबान वृक्षों की भाषा समझ ही नहीं पा रहे हैं। हम इन्हें जीवित मानने को ही तैयार नहीं है। <br /><br />आज आवश्यकता इस बात की है आप लाखों करोड़ों पौधों को भले ही न रोपें, आप चाहे एक ही पौधे को लगाए पर वो एक पौधा वृक्ष बनने तक जीवित रहना चाहिए। तभी पौधे लगाने का वास्तविक पुण्य मिलता है। नए पौधों को लगाने से अधिक बड़ी जिम्मेदारी,  लगे हुए वृक्षों को बचाने की है। वन महोत्सव के दौरान लगाए जाने वाले नए पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी, आयोजकों को सौंपी जानी चाहिए। पौधा रोपण से पूर्व आयोजकों के लिए  वन विभाग से कार्यक्रम आयोजन और कार्यक्रम विवरण के आधार पर स्वीकृति लेनी अनिवार्य की जानी चाहिए। आयोजकों से लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी के संदर्भ में एक शपथ पत्र भी वन विभाग को अनिवार्य तौर पर लेना चाहिए ताकि कोई इन बेजुबान नवजात पौधों की हत्या न कर सकें। पिछले वर्ष यूपी सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए ऐसी समितियां बनाने की घोषणा की है जो स्थानीय स्तर पर रोपे गए पौधों के देखभाल करने का कार्य करेंगी। अन्य प्रदेशों को भी ऐसी पहल करनी चाहिए। यह देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वृक्ष लगाने के साथ-साथ वृक्षों की देखभाल करने  का नजरिया विकसित करें, तभी सही मायनों में वन महोत्सव कार्यक्रम सफल  और सार्थक हो पाएगा।<br /><br />-राजेंद्र कुमार शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 12:22:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुरेन्द्र अवाना ने एक लाख पेड़ लगाने का बनाया रिकॉर्ड </title>
                                    <description><![CDATA[ प्रतिदिन पेड़ लगाने वाले सुरेन्द्र अवाना ने जयपुर शहर, भांकरोटा, रामचंद्रपुरा, बीचून, भैराणा, बोराज, महेशवास, उगरियावास और भन्दे बालाजी सहित कई स्थानों पर पेड़ लगाए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/surendra-awana-made-record-of-planting-one-lakh-tree/article-51816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/222-copy12.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 13 साल पहले प्रतिदिन कम से कम एक पड़े लगाने का संकल्प लेकर पेड़ लगाने वाले पर्यावरण प्रेमी सुरेन्द्र अवाना ने बीचून के पास भैराणा गावं में 300 पेड़ एक साथ लगाकर एक लाख पौधे लगाने का रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान पूर्व कुलपति जेएस संधु, गोपालन विभाग के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार, पशुपालक विभाग के उपनिदेशक डॉ. लाल सिंह, पशुपालन विभाग के पूर्व निदेशक डॉ.राजेश मान, वर्ल्ड एग्रोफोरेस्ट्री के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सत्य प्रकाश मेहरा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।  </p>
<p><strong>स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति किया जागरूक किया  </strong><br />प्रतिदिन पेड़ लगाने वाले सुरेन्द्र अवाना ने जयपुर शहर, भांकरोटा, रामचंद्रपुरा, बीचून, भैराणा, बोराज, महेशवास, उगरियावास और भन्दे बालाजी सहित कई स्थानों पर पेड़ लगाए है। सरकारी स्कूलों में पौधे लगाए और स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 10:00:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आओ सभी मिलकर पेड़ लगाएं और बचाएं</title>
                                    <description><![CDATA[तपती दोपहर में किसी भी व्यक्ति को विश्रांति के लिए किसी सघन हरे वृक्ष की तलाश रहती है, चाहे वह पैदल, दोपहिया या चौपहिया वाहन पर सवार ही क्यों ना हो। हमें अपने और अपने वाहन को चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी से राहत पाने के लिए एकमात्र सड़क किनारे लगे वृक्षों का ही सहारा होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/all-put-the-tree/article-11260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/4-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>तपती दोपहर में किसी भी व्यक्ति को विश्रांति के लिए किसी सघन हरे वृक्ष की तलाश रहती है, चाहे वह पैदल, दोपहिया या चौपहिया वाहन पर सवार ही क्यों ना हो। हमें अपने और अपने वाहन को चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी से राहत पाने के लिए एकमात्र सड़क किनारे लगे वृक्षों का ही सहारा होता है। इसलिए उनकी तलाश में लग जाते हैं। उस समय वृक्ष और उसकी छाया नहीं मिलने पर लोगों को कोसते हैं कि अंधाधुंध कटाई और पैसा कमाने के चक्कर में लोग हरे वृक्षों को काट देते हैं और मन में स्वयं पेड़ लगाने का संकल्प ले लेते हैं। वहां से निवृत हो जीवन के अन्य कार्यों में व्यस्त होते है, तो वह  मन के द्वंद को बिसरा देते हैं और उसके बाद इस पीड़ा की जब तक याद नहीं आती, जब तक दोबारा पेड़ की जरूरत नहीं हो। परिवार, मित्रों के साथ छुट्टियां बिताने या घूमने जाने के लिए क्यों हम सभी हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित प्राकृतिक वातावरण में जाना पसंद करते हैं7 क्यों उस समय शहर से दूर प्रकृति के बीच जाना पसंद करते हैं। सुबह सड़कों की जगह पार्कों में क्यों घूमना पसंद करते हैं, क्यों मन बार-बार प्रकृति के बीच जाने के लिए लालायित रहता है, क्यों बालक, किशोर, युवा, प्रौढ़ प्रकृति में जाना चाहते हैं।</p>
<p>हम प्रयास तो करते है, लेकिन हम प्रकृति संरक्षण और वृक्षारोपण की चिंता नहीं करते।  चिंता है तो बड़ी- बड़ी गगन चुंबी इमारतों की। अगर ऐसा ही रहा, तो वो दिन दूर नहीं कि हमें ऊंची-ऊंची इमारतें तो खूब दिखेंगी, लेकिन हरे-भरे पेड़ और प्रकृति अवशेष के रूप में संग्रहालयों में ही नजर आएगी। जब हम आकड़ों को देखते हैं तो हमारी आंखें फटी रह जाती है। हम हमारी धरोहर खो रहे हैं। अभी यूएन की ताजा रिपोर्ट में जहां प्रति व्यक्ति वृक्षों की संख्या में कनाडा 8953 प्रति व्यक्ति वृक्षों के साथ श्रेष्ठ स्थान पर है। विश्व में 400 से अधिक वृक्ष प्रति व्यक्ति का औसत है। भारत में वर्तमान में केवल 28 वृक्ष प्रति व्यक्ति का आंकड़ा है, ये हमें सोचने को मजबूर कर रहा है कि गिरावट इस प्रकार जारी रही, तो वाकई वृक्ष तलाशने पर भी नहीं मिलेंगे। प्राण वायु या ऑ क्सीजन का हमारे जीवन में महत्व क्या है,यह कोविड काल ने भलीभांति परिचित करवा दिया है। उसके बावजूद आंकड़ा बढ़ने के स्थान पर लगातार कम हो रहा है। इतनी चेतावनियों के बाद भी हम इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे पा रहे? सोचते रहने और ध्यान देने का समय जा चुका है, अब वक्त है एक्शन मोड पर पूर्ण सक्रियता से आगे बढ़ने का।  ताकि हम समय रहते परिस्थितियों को संभाल सकें। गुजरे कोरोना काल के दिन याद हैं जब हम एक-एक श्वास के लिए भटकते नजर आए थे।</p>
<p>उठ जाग मुसाफि र भोर भई अब रैन कहां जो सोवत है। स्थितियों ने इशारा कर दिया है बस आगे आने वाले इस खतरे को भांप कर जहां एक ओर केवल हम पौधे लगाने का आग्रह किया करते थे, अब उसे पालने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। आज पेड़ लगाने के आंकड़ों का काम जारी है, उसे हमें उसे धरातल पर लाना होगा। पेड़ लगाने से जिम्मेदारी पूर्ण नहीं होगी बल्कि उन्हें एक बालक की तरह पाल-पोस कर बड़ा करना होगा ताकि आने वाले समय में वह हमारी रक्षा कर सकें। हमारे यहां भारतीय संस्कृति में हमेशा रक्षा के लिए बहन-भाई को जिस प्रकार अपनी रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांधती है, उसी की भांति मानव द्वारा प्रकृति पूजा के साथ वृक्षों को भी रक्षा सूत्र बांधा जाता रहा है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में वह हमारी रक्षा कर सकें।<br />भारतीय संस्कृति और परम्पराओं में हमने सदैव पृथ्वी को मां का दर्जा देकर पूजा-अर्चना की है, इसका एक ही कारण था हमारी प्रकृति पृथ्वी एक बालक के समान हमारा पोषण करती है, तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम एक पुत्र की भांति सदैव धरती माता का सम्मान और संरक्षण करे, लेकिन व्यक्तिगत स्वार्थों ने मनुष्य को इतना नीचे गिरा दिया कि उसके लिए पृथ्वी माता के संरक्षण को छोड़ उसी के दोहन में लग गए और यही कारण है कि अति दोहन की वजह से पर्यावरण के खिलाफ जाने से हमें अनेक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>इसी खतरे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस वर्ष 2022 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम केवल एक पृथ्वी के आधार पर प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना पर ध्यान केंद्रित किया है। जब संयुक्त राष्ट्र संघ को ही यह महसूस हो गया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पृथ्वी के साथ सद्भाव में रहना होगा। हमें केवल एक पृथ्वी को सर्वमान्य मानते हुए ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके  संरक्षण के लिए, तो आइए साथियों इस पर्यावरण दिवस पर अपनी धरती माता के संरक्षण के लिए कटिबद्ध हो जाएं, 135 करोड़ से अधिक संतानें मिलकर पृथ्वी माता के संरक्षण और श्रृंगार के लिए सजग हो जाएं। आओ सभी मिलकर पेड़ लगाएं। पेड़ों के संरक्षण के लिए बलशाली हों, आओ मिलकर पेड़ लगाएं, आओ मिलकर धरती मां को बचाएं।</p>
<p><strong>- रामदयाल सैन</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 10:42:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पेड़ से लटका मिला वृद्ध का पुराना शव</title>
                                    <description><![CDATA[ बारां जिले के शाहाबाद इलाके की घाटी में पुराने रोड के पास गुरुवार को वृद्ध का पेड़ पर फांसी के फं दे पर लटका शव मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/old-body-of-old-man-found-hanging-from-tree/article-11108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/dfagsdh45464645.jpg" alt=""></a><br /><p>शाहबाद। बारां जिले के शाहाबाद इलाके की घाटी में पुराने रोड के पास गुरुवार को वृद्ध का पेड़ पर फांसी के फं दे पर लटका शव मिला। शव मिलने की सूचना पर एसएचओ रणजीत सिंह मौके पर पहुंचे। अभी तक मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। मृतक के कुर्ते की जेब में एक कागज मिला जिसमें ओम नम: शिवाय लिखा हुआ है। एक पर्स मिला है जिसमें एक फ ोटो मिला है। जो मृतक का ही होना बताया जा रहा है। शव 10 दिन पुराना होने के कारण पहचान में नहीं आ रहा है। शाहाबाद क्षेत्र में यह पहली घटना नही है। पहले भी इस तरह के इस आदिवासी इलाके में कई शव मिल चुके है। कुछ दिन पूर्व ही पिंडावल घाटी में एक महिला की लाश बोरी में बंद मिली थी। यह लगभग तीसरी वारदात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 17:16:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मादा बंदर बच्चे को पेड़ पर ही छोड़ा </title>
                                    <description><![CDATA[जंतर-मंतर स्मारक में एक मादा बंदर बच्चे को जन्म देकर उसे पेड़ पर ही छोड़कर चली गई। इसके बाद स्मारक में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और होमगार्ड्स ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को पेड़ से नीचे उतारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-monkey-left-the-child-on-tree/article-9254"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जंतर-मंतर स्मारक में एक मादा बंदर बच्चे को जन्म देकर उसे पेड़ पर ही छोड़कर चली गई। इसके बाद स्मारक में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और होमगार्ड्स ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को पेड़ से नीचे उतारा। हुआ यूं कि दोपहर करीब 12 बजे एक मादा बंदर ने पेड़ पर बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद पेड़ से नीचे उतरी और बेसुध हो गई। उसकी यह हालत देखकर स्टाफ ने उसको रोटी खिलाई और परिंडे में पानी भरकर रख दिया। करीब एक से डेढ़ बजे के बीच मां अपने बच्चों को संभालने के बजाए नगर निगम हेरिटेज की बिल्डिंग की ओर भाग गई। बच्चा पेड़ की डाली पर लटक रहा, जिसे स्टाफ ने पेड़ के पास सीढ़ी लगाकर नीचे उतारने की कोशिश की। साथ ही ऐहतियात के तौर पर नीचे चद्दर पकड़कर होमगार्ड के जवान खड़े थे, ताकि अगर बच्चा पेड़ से नीचे गिरे तो उसे चोट ना लगे। जंतर-मंतर स्मारक के सहायक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि मादा बंदर के बच्चे को जन्म देने के बाद उसे पेड़ पर ही छोड़ गई थी। बच्चा पेड़ से नीचे ना गिरे, इसलिए उसे सावधानी से नीचे उतारा।</p>
<p><strong>बन गया आंखों का तारा</strong><br />मां के जाने पर स्टाफ ने इस बंदर के बच्चे को बोतल से पानी और दूध पिलाया। कुछ घंटों में ही वह स्टाफ की आंखों का तारा बन गया। उसे देखने वालों के चेहरों पर अजीब सी खुशी थी। होमगार्ड के जवान और स्टाफ ने बच्चे की मां को नगर निगम और बिजली बोर्ड की छत पर ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं दिखाई दी। वन्यजीवों के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं को भी इसकी सूचना दी गई। इस बीच मादा बंदर करीब 3 बजे आई और उसके पास थोड़ी देर बैठने के बाद उसे छोड़कर चली गई। अगर को मां नहीं आती है, तो बच्चे को जयपुर चिड़ियाघर छोड़ा जा सकता है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 May 2022 10:10:33 +0530</pubDate>
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