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                <title>terrorism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>terrorism RSS Feed</description>
                
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                <title>दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: लश्कर कमांडर शब्बीर अहमद लोन गिरफ्तार, बांग्लादेश में बैठकर आईएसआई के इशारे पर बनाया मॉड्यूल</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार कमांडर शब्बीर अहमद लोन को बांग्लादेश सीमा से दबोच लिया है। लोन ढाका से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का मॉड्यूल चला रहा था। पुलिस अब 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' के मास्टरमाइंड शेख सज्जाद गुल की तलाश में छापेमारी तेज कर रही है, जो कई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-success-of-delhi-police-lashkar-commander-shabbir-ahmed-lone/article-148422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shabbir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने बंगलादेश सीमा के पास से एक समन्वित कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा (लश्कर ) के कमांडर शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि लोन ढाका के बाहरी इलाके में स्थित एक गुप्त ठिकाने से लश्कर का एक मॉड्यूल चला रहा था। यह सफलता दो महीने की कड़ी मशक्कत भरी खोज के बाद मिली, जिसकी निगरानी खुद दिल्ली पुलिस के आयुक्त सतीश गोलचा कर रहे थे।</p>
<p>अतिरिक्त आयुक्त प्रमोद कुशवाहा, सहायक आयुक्त ललित नेगी और निरीक्षक सुनील राजैन के नेतृत्व में गठित विशेष कार्यबल लोन की गतिविधियों पर तब से ही बारीकी से नज़र रख रहा था, जब खुफिया जानकारी से यह संकेत मिला था कि वह दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें संगठन में भर्ती करने में शामिल है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उसे 2007 में आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2019 में ज़मानत मिलने के बाद वह देश से भागकर बंगलादेश चला गया था। तब से, वह एक लगातार खतरा बन गया था, उसने एक ऐसा आतंकी नेटवर्क खड़ा कर लिया था जिसने राजधानी की आतंकवाद-विरोधी दस्ता और दूसरी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को हमेशा हाई अलर्ट पर रखा।</p>
<p>हालाँकि, लोन इस बड़ी पहेली का सिर्फ़ एक हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियाँ साथ ही एक और फ़रार आतंकी सरगना शेख सज्जाद गुल का पता लगाने की कोशिशें तेज़ कर रही हैं, जिसके राष्ट्रीय राजधानी से तार जुड़े हैं। गुल को पहली बार 2002 में दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्टेशन पर पकड़ा गया था और उसके बाद 2003 में दोषी ठहराए जाने के बाद उसने तिहाड़ जेल में एक दशक से ज़्यादा समय बिताया। दस साल की सज़ा पूरी करने के बाद, उसे 2017 में रिहा कर दिया गया और माना जाता है कि उसी समय वह पाकिस्तान भाग गया था। अब खुफिया सूत्रों से पता चला है कि गुल लश्कर की एक गुप्त शाखा, 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) में एक अहम ओहदे पर पहुँच गया है। इस संगठन पर कई हमलों की साज़िश रचने का आरोप है, जिनमें पहलगाम का चर्चित आतंकी हमला भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:28:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर पाकिस्तान को महत्व देना भारत की कूटनीतिक विफलता: जयराम रमेश ने खड़े किए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को 'ब्रोकर' बनाना आपत्तिजनक है। जयराम ने डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वर्तमान विदेश नीति पर सवाल उठाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/giving-importance-to-pakistan-on-restoration-of-peace-in-west/article-147949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली के वास्ते मध्यस्थ के रूप में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना था कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह देने, परमाणु अप्रसार नियमों के उल्लंघन और ए. क्यू. खान नेटवर्क के जरिए परमाणु प्रसार में शामिल रहा है। उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही नागरिकों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने आसिम मुनीर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद पाकिस्तान विश्व मंच पर और प्रासंगिक बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया "हमारी सरकार की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियों के कारण एक अस्थिर देश को 'ब्रोकर' की भूमिका मिल गई है, जो भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 14:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लाल किला विस्फोट मामला: एनआईए ने की कश्मीर में कई जगहों पर छापेमारी, कई डॉक्टरों सहित 11 लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लाल किला कार विस्फोट मामले में सोमवार को कश्मीर के श्रीनगर, बारामूला और कुलगाम सहित 6 ठिकानों पर छापे मारे। 10 नवंबर 2025 को हुए इस धमाके में 11 मौतें हुई थीं। अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों और संदिग्धों के नेटवर्क को खंगाल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/red-fort-blast-case-nia-raids-many-places-in-kashmir/article-147493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nia.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के पास पिछले साल 10 नवंबर को हुए कार विस्फोट मामले की चल रही जांच के तहत कश्मीर भर में कई जगहों पर छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ये छापे श्रीनगर, बारामूला, कुपवाड़ा और कुलगाम जिलों में छह जगहों पर उन लोगों से जुड़े ठिकानों पर मारे गए, जिन्हें धमाके के पीछे के "आतंकी मॉड्यूल" के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने बारामूला जिले के रफीबाद के रहने वाले डॉ. बिलाल नसीर मल्ला के घर पर तलाशी ली, जिसे इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। कुपवाड़ा जिले के लंगाते इलाके में भी एक और तलाशी ली गई। श्रीनगर के नौगाम इलाके और दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में भी चार जगहों पर छापे मारे गए।</p>
<p>आज मारे गए इन छापों के बारे में एनआईए की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जांच एजेंसी ने बम धमाके की जांच के दौरान अब तक कई डॉक्टरों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी भी इस आत्मघाती धमाके में मारा गया था।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, राष्ट्रीय राजधानी के लाल किला इलाके के पास 10 नवंबर, 2025 को एक भीड़भाड़ वाले इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार में धमाका हो गया था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी और 32 अन्य घायल हो गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:06:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काबुल नरसंहार: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर लगाया 400 लोगों की हत्या का आरोप, पाकिस्तानी सरकार ने किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमले का आरोप लगाया है, जिसमें 400 लोगों की मौत हो गई। तालिबान ने इसे "मानवता के विरुद्ध अपराध" बताया, जबकि पाकिस्तान ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। सीमा पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghanistan-accused-pakistan-of-killing-400-people-pakistani-government-rejected/article-146787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-attacked1.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सेना पर राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमला करने का आरोप लगाया, जिसमें कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी मंगलवार को अल जजीरा ने दी। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को झूठा और जनमत को गुमराह करने वाला बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उसने सोमवार को केवल काबुल और नांगरहार प्रांत में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। </p>
<p>अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के अनुसार, काबुल के उमर व्यसन उपचार अस्पताल पर हमला स्थानीय समयानुसार सोमवार रात लगभग नौ बजे (16:30 जीएमटी) हुआ। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अस्पताल में 2,000 बिस्तरों की क्षमता है और इस हमले में इमारत के बड़े हिस्से नष्ट हो गए। उन्होंने आगे कहा, दुर्भाग्यवश, मृतकों की संख्या अब तक 400 तक पहुंच चुकी है और लगभग 250 अन्य लोग घायल हुए हैं। बचाव दल वर्तमान में घटनास्थल पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने एवं पीड़ितों के शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।</p>
<p>अफगान सरकार के एक अन्य प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने अस्पताल हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया है। उन्होंने एक्स पर कहा कि अफगान सरकार ऐसे कृत्य को सभी स्वीकृत सिद्धांतों एवं मानवता के विरुद्ध अपराध मानती है।</p>
<p>वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया। एक्स पर एक पोस्ट में, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमलों में काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों के सैन्य प्रतिष्ठानों एवं आतंकवादी समर्थन अवसंरचना को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का उपयोग निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई लक्षित कार्रवाई सटीक एवं सावधानीपूर्वक थी ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो। मंत्रालय ने कहा कि अफगान प्रवक्ता मुजाहिद का दावा पाकिस्तान विरोधी भावना भड़काने और तालिबान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के लिए अवैध समर्थन को छिपाने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p>पाकिस्तान की ओर से ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवाद से निपटने के प्रयासों को तुरंत तेज करने के आह्वान के कुछ घंटों बाद आईं। पाकिस्तान काबुल पर सशस्त्र समूहों, विशेष रूप से पाकिस्तानी तालिबान को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है  जिसके बारे में उसका कहना है कि वह पाकिस्तान में हमले करता है।</p>
<p>इससे पहले, अफग़ान अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को दक्षिण-पूर्वी अफग़ानिस्तान में हुई गोलीबारी में दो बच्चों सहित चार लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुस्तगफर गुरबाज ने कहा कि पाकिस्तान से दागे गए मोर्टार के गोले खोस्त प्रांत के गांवों में गिरे और कई घरों को नष्ट कर दिया। दोनों देशों के बीच पिछले महीने उस समय झड़प शुरू हुई जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जिसमें इस्लामाबाद ने सशस्त्र समूहों को निशाना बनाने की बात की। अफगानिस्तान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाबी हमला किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल ईस्ट जंग: इराक के ड्रोन हमले में फ्रांसीसी सैनिक की मौत, कई अन्य घायल, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[इराक के एरबिल में हुए ड्रोन हमले में फ्रांसीसी सैनिक अर्नाड फ्रियोन शहीद । राष्ट्रपति मैक्रों ने हमले की निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है और इस क्षेत्र में जारी युद्ध की आड़ में सैनिकों को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/middle-east-war-french-soldier-killed-in-iraq-drone-attack/article-146344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/franch.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। इराक के एरबिल इलाके में ड्रोन हमले के दौरान एक फ्रांसीसी सैनिक मारा गया है और कई अन्य घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि इराक के एरबिल इलाके में एक ड्रोन हमले के दौरान एक फ्रांसीसी सैनिक मारा गया है और कई अन्य घायल हुए हैं। उन्होंने मारे गये सैनिक का नाम चीफ वारंट ऑफिसर अर्नाड फ्रियोन का नाम बताया। वह अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से मारे जाने वाले पहले फ्रांसीसी सैनिक हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया पर लिखा, उनके परिवार और उनके साथी सैनिकों के प्रति मैं पूरे देश की ओर से अपना स्नेह और एकजुटता व्यक्त करना चाहता हूँ। हमारे कई सैनिक घायल हुए हैं। फ्रांस उनके और उनके प्रियजनों के साथ खड़ा है।</p>
<p>फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस इलाके में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे फ्रांसीसी सैनिकों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा, इराक में उनकी मौजूदगी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के सख्त दायरे का हिस्सा है। ईरान में चल रहा युद्ध के दौरान ऐसे हमलों को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:56:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल में छिप नहीं पाएंगे भारतीय अपराधी, दोनों देशों में बड़ा समझौता, एफएटीएफ से काठमांडू को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। इससे जाली नोटों, आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ जांच तथा साक्ष्य जुटाने में दोनों देशों को सीधी मदद मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indian-criminals-will-not-be-able-to-hide-in-nepal/article-143874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत के अपराधी अक्सर अपराध करने के बाद नेपाल भाग जाते हैं। यही नहीं नेपाल के अंदर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा नेटवर्क है जो जाली नोटों के कारोबार को बढ़ावा देता है। इससे नेपाल भारत विरोधी तत्वों का अड्डा बन गया है। अब कई सालों की बातचीत के बाद नेपाल और भारत के बीच आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौता हो गया है। इसे अब दोनों देश आपराधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के मामले में एक-दूसरे की मदद करेंगे। इस समझौते पर काठमांडू में हस्ताक्षर किया गया। नेपाल इस समय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ग्रे लिस्ट में है और उसे उम्मीद है कि इस समझौते के बाद वह इससे निकल सकेगा। नेपाल ने इसी तरह का समझौता एक और पड़ोसी देश चीन के साथ भी किया हुआ है।</p>
<p><strong>आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग </strong></p>
<p>नेपाल के विधि, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय में आयोजित एक समारोह के दौरान मंगलवार को आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता पर समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य आपराधिक मामलों से संबंधित जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग को मजबूत करना है।</p>
<p><strong>नेपाल और भारत के बीच नई प्रत्यर्पण संधि पर क्या है अपडेट?</strong></p>
<p>नेपाली कानून मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है, जिसमें साक्ष्य संग्रह, सूचना साझाकरण और जांच तथा अदालती कार्यवाही के दौरान सक्षम अधिकारियों के बीच समन्वय शामिल है। नेपाल और भारत के बीच साल 2005 में इसी तरह का आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण समझौता हुआ था। हालांकि अब आपराधिक मामलों में समझौता हो गया है लेकिन नई प्रत्यर्पण संधि को लेकर अभी बातचीत जारी है।</p>
<p><strong>समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा</strong></p>
<p>इस कानूनी समझौते का उद्देश्य जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े आपराधिक मामले में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाया जाएगा। भारत की ओर से नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा ताकि आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को किया जा सके। इस समझौते की मदद से मानव तस्करी, ड्रग्स की तस्करी, वित्तीय अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और संगठित अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। इसकी मदद से अधिकारी और जांच एजेंसियां इन विषयों की प्रभावी तरीके से जांच कर सकेंगी। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में इससे पहले प्रत्यर्पण संधि हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत और नेपाल के बीच होने जा रहा बड़ा समझौता: ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने के लिए म्युचुअल लीगल असिस्टेंस करार तैयार, चुनाव से पहले होंगे हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल के बीच एमएलए समझौता जल्द साइन होगा। यह ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने, जांच, सबूत साझा करने और कानूनी सहयोग को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-big-agreement-is-going-to-be-signed-between-india/article-142401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच कानूनी सहायता को लेकर एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। करार तैयार हो चुका है अब दोनों देशों के अधिकारी समझौते पर साइन करने के लिए तारीख तय कर रहे हैं। इस कानून पर पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान सहमति बनी थी। नेपाली मीडिया ने बताया है कि कई वर्षों की बातचीत के बाद इस समझौते पर दोनों देश पहुंचे हैं, जिससे पता चलता है कि ये समझौता कितना पेचीदा है। इस समझौते का नाम वी​वीक्यू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने और दोनों देशों की कानूनी संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान, जांच सबूतों को साझा करने, अभियोजन में सहयोग और आपराधिक जांच में कॉर्डिनेशन को आसान बनाने के लिए आपराधिक मामलों पर एमएलए पर साइन करने के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। यह समझौता दोनों पक्षों को ट्रांसनेशनल अपराधों की जांच करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। चूंकी दोनों देशों के नागरिक बगैर वीजा के एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं, इसलिए ये कानून काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>भारत नेपाल के बीच बड़ा कानूनी सहायता समझौता </strong></p>
<p>भारत और नेपाल के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, ऐसे में दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों को लंबे समय से अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने में कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान बातचीत से जुड़े एक अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को कहा है कि एमएलए में एक ऐसा समझौता शामिल है जो आतंकवाद, तस्करी, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे ट्रांसनेशनल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तेज, व्यवस्थित सहयोग को सक्षम बनाता है। इस समझौते पर साइन होने के बाद अपराधियों का पता लगाने, सबूत जमा करने, अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने और एक दूसरे की जांच एजेंसियों को संदिग्धों के बयान को दर्ज करने का अधिकार देगी। </p>
<p><strong>भारत यात्रा के दौरान साइन की चर्चा</strong></p>
<p>काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि फिलहाल मामला इस पेंच पर फंसा हुआ है कि इस समझौते को मार्च में नेपाल में होने वाले चुनाव से पहले साइन कर लिया जाए या चुनाव के बाद। नेपाल विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि हम इस पर चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले विदेश मंत्री बालनंद शर्मा की फरवरी के पहले हफ्ते में भारत यात्रा के दौरान समझौते पर साइन करने की चर्चा हुई थी। लेकिन यात्रा स्थगित कर दी गई और अगर चुनाव से पहले समझौते पर साइन करने को लेकर सहमति बनती है, तो कानून मंत्री अनिल सिन्हा नेपाल सरकार की ओर से समझौते पर साइन कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इस्लामाबाद बम धमाके को लेकर कश्मीर में शिया-समुदाय का विरोध प्रदर्शन: प्रदर्शनकारियों ने लगाए पाकिस्तान विरोधी नारे, नमाजियों पर हुए हमले की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद शिया मस्जिद आत्मघाती हमले में 31 मौतों के बाद कश्मीर के शिया इलाकों में शांतिपूर्ण विरोध हुए, पाकिस्तान विरोधी नारे लगे, पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई गई और निंदा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/shia-community-protests-in-kashmir-over-islamabad-bomb-blasts-protestors/article-142311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)6.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। पाकिस्तान के इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती बम धमाके में 31 लोगों की मौत के बाद कश्मीर के कई शिया-बहुल इलाकों में शुक्रवार रात विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।  </p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि बारामूला के चैनाबल पट्टन, श्रीनगर के इमामबाड़ा जादीबल एवं हरवान और बांदीपोरा के इंदरकोट-सुंबल में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाते हुए नमाजयिों पर हुए हमले की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने पीड़तिों के साथ संवेदना व्यक्त करते हुए सांप्रदायिक हिंसा की निंदा की। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और देर रात प्रदर्शनकारी अपने-अपने घर लौट गए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जुम्मे की नमाज़ के दौरान एक मस्जिद खदीजतुल कुबरा में विस्फोट से कम से कम 31 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 169 अन्य घायल हो गये। अधिकारियों के अनुसार मरने वालों में इस्लामाबाद पुलिस महानिरीक्षक के एक चचेरे भाई भी शामिल हैं, जिनका नाम हसन है। यह धमाका तरलाई इलाके में इमामबाड़ा के द्वार पर हुआ, जब नमाजी नमाज के लिए अंदर जा रहे थे।  हमलावर ने मस्जिद में जबरन घुसने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर रोके जाने के बाद उसने अपने विस्फोटक जैकेट में धमाका कर खुद को उड़ा दिया। जांचकर्ताओं ने हमलावर को आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जोड़ा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 10:01:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगान तालिबान ने आतंकी समूहों की सहायता वाले आरोपों को किया खारिज, कहा पड़ोसी देशों से संचालित</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने विदेशी आतंकी समूहों को मदद देने के आरोप नकारे। कहा, इस्लामिक स्टेट ने पड़ोसी देशों में ठिकाने बनाए, अफगानिस्तान पूरी तरह सुरक्षित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghan-taliban-rejects-allegations-of-supporting-terrorist-groups-says-operated/article-142149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान में सक्रिय विदेशी आतंकवादी समूहों को किसी भी प्रकार की सहायता देने के आरोपों को खारिज कर दिया। उसने आरोप लगाया कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने पड़ोसी देशों में ठिकाने स्थापित किए हैं, जो पाकिस्तान की ओर एक अप्रत्यक्ष इशारा है। तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई देशों द्वारा तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान से कथित आतंकवादी गतिविधियों के बारे में व्यक्त की गई चिंताओं का जवाब देते हुए गुरुवार को कहा कि अफगानिस्तान सुरक्षित है और इस्लामी अमीरात में कोई विदेशी या दुष्ट समूह मौजूद नहीं है।</p>
<p>अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की हार का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इस आतंकी समूह ने हमारे पड़ोसी देशों में अपने ठिकाने बना लिए हैं। मुजाहिद ने देशों द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि ये चिंताएं संयुक्त राष्ट्र में तालिबान के प्रतिनिधित्व की कमी के कारण उत्पन्न हुई हैं।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने किसी भी पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया, जहां उनके अनुसार इस्लामिक स्टेट खोरासान ने कथित तौर पर शरण ली थी लेकिन तालिबान अधिकारियों ने एक से अधिक बार पाकिस्तान पर इस्लामिक स्टेट के गुर्गों को पनाह देने, सहायता करने, प्रशिक्षण देने एवं वित्तपोषण करने का आरोप लगाया है।</p>
<p>बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सत्र में, संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी, अलेक्जेंडर जुएव ने चेतावनी दी कि इस्लामिक अमीरात में आईएस-केपी क्षेत्र और उससे परे दोनों जगह सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है, जो तालिबान द्वारा बार-बार किए गए उन दावों के विपरीत है कि उसने देश के भीतर इसे हरा दिया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट का खतरा लगातार बना हुआ है और इसके लिए तत्काल समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि यह खतरा अफगानिस्तान से परे पश्चिम और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक फैल रहा है और यहां तक कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच रहा है। पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने तालिबान पर आतंकी समूहों की सहायता करने और उन्हें बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब से इस्लामी समूह काबुल में सत्ता में वापस लौटा है, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच अलगाववादियों जैसे आतंकवादी संगठनों को नई ताकत मिली है।</p>
<p>उन्होंने काबुल पर इन समूहों को सुरक्षित पनाह देने और अफगान क्षेत्र में परिचालन की स्वतंत्रता प्रदान करने का आरोप लगाया, जिसका उपयोग उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ विभिन्न हमले करने के लिए किया। अहमद ने इस्लामाबाद के बयान को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी देशों में से एक रहा है और उसे कई नुकसान उठाने पड़े हैं, जिनमें 90,000 से अधिक लोगों की जान जाना और अवसंरचना एवं समग्र आर्थिक विनाश शामिल है।</p>
<p>चीन के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और उइघुर आतंकवादियों जैसे आतंकी समूहों की मौजूदगी एवं गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की और तालिबान से कार्रवाई करने का आग्रह किया। काबुल के शहर-ए-नाव जिले में एक चीनी रेस्तरां पर आईएसआईएस के हमले का उल्लेख करते हुए, चीन के राजदूत ने कहा कि अफगान धरती पर आतंकवादी गतिविधियां बढ़ रही हैं और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नाइजर सुरक्षा बलों का दावा: एक हफ्ते में 47 आतंकवादियों की मौत और 21 अन्य गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[नाइजर सुरक्षा बलों ने हवाई-जमीनी अभियानों में 47 आतंकवादी मारे, 21 गिरफ्तार किए। हथियार बरामद हुए। नियामे एयर बेस पर हमले की कोशिश नाकाम हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/niger-army-claims-47-terrorists-killed-in-a-week-and/article-142059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>नियामे। नाइजर के रक्षा और सुरक्षा बलों ने बुधवार को कहा कि उन्होंने 26 जनवरी से एक फरवरी के बीच पूरे देश में लक्षित हवाई हमलों और लगातार जमीनी अभियानों के जरिए 47 आतंकवादियों को ढेर किया और 21 अन्य को गिरफ्तार किया है। </p>
<p>राष्ट्रीय टेलीविजन टेली साहेल पर प्रसारित एक साप्ताहिक सूचना बुलेटिन के अनुसार, इन अभियानों के दौरान बड़ी मात्रा में उपकरण भी बरामद किये गये, जिनमें हथियार, गोला-बारूद, वाहन और ईंधन शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने कहा कि वे नागरिकों और उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और 24 घंटे सतर्क हैं। </p>
<p>पिछले हफ्ते देश में कुल मिलाकर सुरक्षा स्थिति आम तौर पर शांत रही, हालांकि राजधानी नियामे में एयर बेस 101 पर हमले की कोशिश हुई। सुरक्षा बलों ने इसका तत्काल और जोरदार जवाब दिया और स्थिति को जल्दी ही नियंत्रण में कर लिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:43:55 +0530</pubDate>
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                <title>बलोच विद्रोहियों के पास एडवांस्ड हथियार, पाक सेना टक्कर नहीं ले सकती : रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ</title>
                                    <description><![CDATA[पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में माना कि बलूच विद्रोहियों के पास अमेरिकी हथियार, राइफलें और नाइट विजन डिवाइस हैं, जिनके आगे पाक सेना कमजोर पड़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/baloch-rebels-have-advanced-weapons-pakistan-army-cannot-compete-with/article-141996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कबूला है कि पाकिस्तानी फौजियों के पास हथियारों की कमी है। उन्होंने कहा कि बलूच विद्रोहियों के पास ऐसे अमेरिकी हथियार हैं जो पाकिस्तानी सेना के पास भी नहीं है। उन्होंने कहा कि ये विद्रोही बलूचिस्तान में हमले कर रहे हैं और अफगानिस्तान से समर्थन पा रहे हैं। पाक रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी संसद में कहा कि विद्रोहियों के पास महंगी राइफलें और नाइट विजन डिवाइस हैं। एक राइफल की कीमत 20 लाख रुपए तक है, जबकि थर्मल वेपन साइट्स चार से पांच हजार डॉलर की हैं। कुल मिलाकर उनके सैन्य उपकरणों की कीमत बीस हजार डॉलर के करीब है।</p>
<p><strong>पाक सेना बागी बलूचों के आगे पस्त</strong></p>
<p>आसिफ ने माना कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल बलूच विद्रोहियों के आगे पस्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान बहुत बड़ा इलाका है और विद्रोहियों की तकनीक काफी एडवांस है। उन्होंने दावा किया कि ये राइफलें और नाइट विजन डिवाइस अमेरिकी हथियार है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि विद्रोहियों का नेतृत्व अफगानिस्तान में है और वहां से उन्हें मदद मिल रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के नेतृत्व में ये विद्रोही मुख्य रूप से पाकिस्तानी पंजाबियों को निशाना बना रहे हैं। पाकिस्तान बीएलए के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई करेगा।</p>
<p><strong>बलूचिस्तान में क्यों है ऐसी स्थिति?</strong></p>
<p>पाकिस्तान बलूच अलगाववादी विद्रोह से दशकों से जूझ रहा है। यह प्रांत अफगानिस्तान और ईरान से सटा हुआ है और खनिजों से भरा है। यहां सुरक्षा बलों, विदेशियों और गैर-स्थानीय पाकिस्तानियों पर अक्सर हमले होते हैं। बीएलए को अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इस संगठन ने हाल के वर्षों में अन्य प्रांतों से आए पाकिस्तानियों और विदेशी ऊर्जा कंपनियों पर हमले तेज कर दिए हैं। पिछले साल इसी संगठन 450 यात्रियों से भरी ट्रेन पर हमला किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:34:50 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, बलूचिस्तान में 92 आतंकवादी ढ़ेर</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों ने आतंक रोधी अभियानों में 92 आतंकवादी मारे। हालिया हिंसा नाकाम हुई, नागरिकों-सैनिकों की मौत के बीच अभियान तेज रखे जाएंगे, सरकार सख्त रुख।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-success-for-security-forces-in-pakistan-92-terrorists-killed/article-141539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने शनिवार को देश के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में 92 आतंकवादियों को मार गिराया और आतंकवादियों के बुरे इरादे को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। सेना ने एक बयान में यह जानकारी दी है। बयान में कहा गया है कि आतंकवादियों ने कल पूरे प्रांत में कई आतंकवादी गतिविधियां कीं, और कहा कि हमलों का मकसद स्थानीय लोगों के जीवन और बलूचिस्तान के विकास में रुकावट डालना था।</p>
<p>सेना ने कहा कि ग्वादर और खारान जिलों में 18 निर्दोष नागरिक 15 सैनिक मारे गए। बयान में आगे कहा गया, पिछले दो दिनों में इन सफल अभियानों के साथ, बलूचिस्तान में चल रहे अभियानों में मारे गए आतंकवादियों की कुल संख्या 133 हो गई है और इनमें से 41 शुक्रवार को प्रांत में मारे गए।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि इन इलाकों में लगातार आतंक रोधी अभियान चलाए जा रहे हैं, और इन आतंकवादी कामों को अंजाम देने वालों और उन्हें मदद देने वालों को सजा दी जाएगी। सेना ने कहा कि खुफिया रिपोर्ट ने साफ तौर पर पुष्टि की है कि ये हमले पाकिस्तान के बाहर से काम कर रहे आतंकवादी समूह के नेताओं ने करवाए और उन्हें निर्देशित किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 14:27:47 +0530</pubDate>
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