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                <title>terrorism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>terrorism RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली जालंधर-अमृतसर में हुए आईईडी विस्फोटों की जिम्मेदारी: राज्य में हाई अलर्ट, भारत का शिकंजा कसता देख ISI में खलबली,</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के जालंधर (BSF मुख्यालय) और अमृतसर (आर्मी कैंप) में मंगलवार रात हुए धमाकों से हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियां IED और ग्रेनेड हमले की जांच कर रही हैं। खालिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा जिम्मेदारी लेने और धमकी भरे पोस्ट के बाद राज्य में हाई अलर्ट जारी है। पुलिस सीसीटीवी और संदिग्धों के जरिए साजिशकर्ताओं की तलाश में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/khalistan-liberation-army-took-responsibility-for-ied-blasts-in-jalandhar-amritsar/article-152832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/klf.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। पंजाब में मंगलवार रात दो अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा प्रतिष्ठानों के पास हुए धमाकों के बाद राज्य में हाई अलर्ट जारी किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। पहली घटना जालंधर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) मुख्यालय के बाहर और दूसरी अमृतसर के खासा इलाके में एक आर्मी कैंप के पास हुई। इन घटनाओं ने सुरक्षा बलों और पंजाब पुलिस को बहु-एजेंसी जांच के लिए प्रेरित किया है। हालांकि अब तक इन विस्फोटों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p>पहला धमाका रात करीब 8:15 बजे जालंधर में हुआ, जहां बीएसएफ पंजाब मुख्यालय के गेट के बाहर खड़ी एक स्कूटर में विस्फोट हो गया। इसमें इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी) के इस्तेमाल की बात कही जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इसके कुछ घंटों बाद, रात करीब 10:30 बजे अमृतसर के खासा स्थित आर्मी कैंप के पास एक और विस्फोट की खबर मिली। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धमाके की आवाज 1.5 किलोमीटर दूर तक सुनी गई और इसका प्रभाव इतना तेज था कि पास की दीवारें तक हिल गईं।</p>
<p>जालंधर में हुए धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन खालिस्तान लिबरेशन आर्मी (केएलएफ) ने एक पोस्ट शेयर कर ली है। हालांकि, पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही। पोस्ट में लिखा है कि “पांच मई 2026 को रात आठ बजे पंजाब में जालंधर के फ्रंटियर हेडक्वार्टर बीएसएफ एक आइईडी हमला किया गया। केएलएफ (खालिस्तान लिबरेशन आर्मी) आज हमले की जिम्मेदारी लेती है, जिसके दौरान दो बीएसएफ सिपाही मारे गए और तीन जख्मी हो गए। यह हमला ऑपरेशन नवा सवेरा का हिस्सा है, जो कि तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारे भाई शहीद रणजीत सिंह के खून का बदला पूरा नहीं होता और खालिस्तान आजाद नहीं होता।“</p>
<p>पोस्ट में आगे लिखा है, “एक बार फिर केएलएफ डीआईजी संदीप गोयल को चेतावनी देती है कि आप, आपका परिवार और आपके रिश्तेदार हमारा निशाना हैं। शहीद रणजीत सिंह के खून का बदला आपके करीबियों और प्यारे लोगों के खून से लिया जाएगा। गोयल परिवार ने बहुत सारे अत्याचार किए हैं। हम इतना खून बहाएंगे कि सब कुछ लाल दिखाई देगा। विशेष की वीडियो जल्द ही जारी की जा रही है।”<br />जालंधर में पीएपी चौक के पास रात लगभग आठ बजे स्कूटी के पास धमाका हुआ। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, एक आतंकी पीएपी चौक की ओर से रॉन्ग साइड से पैदल आता दिखा। वह सीधे उस स्थान तक पहुंचा, जहां फुटपाथ पर एक्टिवा खड़ी थी। युवक ने पॅलीथीन में लिपटा पैकेट वहां छोड़ा और बस अड्डे की ओर दौड़ लगा दी। इसके कुछ सेकेंड में धमाका हो गया। धमाका जिस एक्टिवा में हुआ वह बीएसएफ के पूर्व जवान कश्मीर सिंह (गांव गढ़ा) की है। उनका इकलौता बेटा गुरप्रीत सिंह कूरियर बॉय का काम करता है। वह रात को एक्टिवा खड़ी कर हेडक्वार्टर के अंदर पार्सल देने गया था। गुरप्रीत को पुलिस ने बीएसएफ हेडक्वार्टर में हिरासत में ले लिया है।</p>
<p>एजेंसियों को आशंका है कि आगे उसका साथी इंतजार कर रहा था और वह किसी वाहन में बैठकर भाग गया। फोरेंसिक टीम को मौके से बम के फटे हिस्से मिले हैं। आज मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर आने वाले हैं। उससे पहले यह वारदात हो गई। वहीं, अमृतसर में भी आर्मी कैंप खासा के गेट नंबर 5 और 6 के बाहर भी रात करीब 11 बजे ग्रेनेड अटैक हुआ। इसमें केवल टीन शेड को नुकसान पहुंचा है। एजेंसियां मामलों की जांच में जुट गई है।</p>
<p>डिलीवरी बॉय गुरप्रीत सिंह उर्फ क्रिस ने पुलिस पूछताछ में बताया- मैं पार्सल देने नहीं, बल्कि लेने आया था। मैंने एक्टिवा फुटपाथ पर खड़ी की और गेट पर पार्सल लेने के लिए फौजी को कॉल किया। मैं इंतजार कर रहा था, तभी एक युवक पास से निकला। कुछ देर बाद धमाका हो गया। उसने बताया- मैं घबराकर गेट की ओर भागा। बीएसएफ कर्मी मौके पर पहुंचे। धमाके में एक्टिवा की नंबर प्लेट उछलकर गिर गई और स्कूटी में आग लग गई। इसके बाद पुलिस ने मुझे हिरासत में लिया। एक महिला अधिकारी ने खुद को एसपी बताया और मुझे अंदर ले जाया गया। मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<p>गुरप्रीत के पिता कश्मीर सिंह ने कहा कि उनका 22 वर्षीय बेटा तीन महीने पहले ही इस काम पर लगा था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा पूरी तरह बेगुनाह है और उन्हें उससे मिलने नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि एक फौजी का बेटा कभी देश के खिलाफ नहीं जा सकता। वह आतंकी नहीं हो सकता। रात में ही जांच एजेंसियां बीएसएफ से रिटायर्ड कश्मीर सिंह के गढ़ा स्थित सड़क मोहल्ला पहुंचीं। यहां गुरप्रीत के बारे में जानकारी जुटाई गई। पता चला कि वह अपने ममेरे भाई को घर छोड़कर सीधे बीएसएफ चौक आया था। जांच के बाद टीम वापस लौट गई।</p>
<p>अमृतसर आर्मी कैंप पर धमाके को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोहेल मीर कासिम ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि बाइक पर सवार दो नकाबपोशों ने विस्फोटक को हवा में उछालते हुए आर्मी कैंप की तरफ फेंका। दीवार के साथ लगते ही जोरदार धमाका हुआ। धमाके से चारदीवारी पर सेना क्षेत्र को कवर करने के लिए लगाई गई टीन शेड ढह गईं। गेट नंबर 6 और 7 के बीच की दीवार को भी थोड़ानंबर 6 और 7 के बीच की दीवार को भी थोड़ा नुकसान हुआ है। धमाके की आवाज सुनते ही सैन्य अधिकारी और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी।</p>
<p>अमृतसर के पुलिस अधीक्षक आदित्य वॉरियर ने बताया कि रात 10:50 बजे खासा कैंट के पास धमाके की सूचना मिली थी। बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) और फॉरेंसिक (एफएसएल) टीम ने मौके से नमूने एकत्र किए हैं जिन्हें परीक्षण के लिए भेजा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 12:29:49 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की बदलती मानसिकता का वैश्विक संदेश दिया है। अब भारत कूटनीतिक बयानों के बजाय निर्णायक सैन्य कार्रवाई में विश्वास रखता है। रक्षा निर्यात में 62% की रिकॉर्ड वृद्धि और एआई (AI) आधारित युद्धक प्रणालियाँ नए और सशक्त भारत की पहचान बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/operation-sindoor-gave-a-message-to-the-world-about-the/article-152209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने भूभाग पर आतंकवादी हमलों के बाद अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता तक सीमित नहीं है बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद का कोई भी कृत्य सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमलों और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक विकृत और विक्षिप्त मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या इसे नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उचित ठहराने के प्रयास किए जाते हैं। यह अत्यंत खतरनाक है और एक प्रकार से आतंकवादियों को आड़ प्रदान करता है ताकि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें। आतंकवाद केवल राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, इसके कई आयाम हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों पर काम करें।"</p>
<p>पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने पर श्री सिंह ने कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक ही समय पर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। हालांकि आज भारत को विश्व स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार के आईटी यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का केंद्र माना जाता है।" रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की एकजुटता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एकजुट होकर और एकीकृत योजना के तहत कार्य किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करती, बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों पर और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया, और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने कहा, "इस अभियान के दौरान हमने अत्यंत सटीकता के साथ केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे खिलाफ हमला किया था। हमने अभियान इसलिए नहीं रोका कि हमारी क्षमताएं समाप्त हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर समाप्त किया। हम लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता और अचानक संकट के समय अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का सैन्य-औद्योगिक ढांचा लगातार यह साबित करता रहा है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और रसद की मांगों को भी पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत ने परमाणु हमले की धमकी या दबाव में आए बिना अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। उन्होंने कहा, "यह नई विश्व व्यवस्था है, यह नए वैश्विक युग का नया भारत है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को रूपांतरित किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यद्यपि यह अभियान केवल 72 घंटों के भीतर समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले की तैयारी व्यापक और लंबी थी। उन्होंने बताया कि भारत की अतिरिक्त क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता अब प्रतिरोधक नीति के अभिन्न अंग बन चुके हैं।राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप वैश्विक धारणा में उल्लेखनीय बदलाव और स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा ,"कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। </p>
<p>आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। हम इन मानकों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" जर्मनी की अपनी हाल की यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख कंपनियां हमारे निजी रक्षा उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति केवल उसकी सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करने की योग्यता से भी सुदृढ़ हुई है।</p>
<p>प्रतिरोधक क्षमता के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी इसके महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया गया है। इससे हमारी सटीकता और प्रहार क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, वहीं अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं पहले से सक्रिय होकर खतरों को उत्पन्न होने से पहले ही निष्प्रभावी कर देती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक उपयोग किया जाता है ।"</p>
<p>एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "एआई का एक अर्थ 'ऑगमेंटेड इन्फैंट्री' भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को काफी बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपनी सेना को तकनीक-आधारित, एकीकृत युद्ध मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य से सेना ने 'रुद्र' ब्रिगेड, 'भैरव' बटालियन, 'शक्तिबाण' तोपखाना रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियों जैसे चुस्त और आत्मनिर्भर युद्धक इकाइयों की स्थापना की है, जो आधुनिक मिश्रित खतरों का तुरंत और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।"<br />हालांकि, श्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई को केवल सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नए और गंभीर खतरे उत्पन्न कर रही हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:43:33 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस का गंभीर आरोप : अमेरिका को खुश करने के लिए केंद्र सरकार ने दी पाकिस्तान को 'क्लीन चिट', बयान को बताया राष्ट्रविरोधी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री पर एससीओ बैठक में पाकिस्तान को 'क्लीन चिट' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस रुख को शर्मनाक और राष्ट्रविरोधी बताते हुए कहा कि अमेरिका को खुश करने के लिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-serious-allegation-that-to-please-america-the-central-government/article-152045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/jairam.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान को 'क्लीन चिट' दे दी है और दावा किया कि ऐसा अमेरिका को खुश करने के लिए किया गया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि निश्चित रूप से रक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार की स्वीकृति और निर्देश पर ही किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में 'क्लीन चिट' दी है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताया और सवाल किया कि सरकार को ये बताना चाहिए कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद का केन्द्र नहीं है।</p>
<p>उन्होंने सवाल किया" क्या वहां भारत के खिलाफ आतंकी शिविर नहीं चल रहे हैं और क्या मुंबई तथा पहलगाम जैसे हमलों की साजिश पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने नहीं रची थी।" जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के प्रति सरकार का यह रुख अमेरिका को खुश करने और चीन के सामने संतुलन साधने की नीति का हिस्सा है। उन्होंने 19 जून 2020 को चीन को लेकर दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि रक्षा मंत्री का यह भी उसी तरह का चौंकाने वाला रुख है। उन्होंने रक्षा मंत्री के बयान को राष्ट्रविरोधी करार दिया। जयराम रमेश ने एससीओ की बैठक में रक्षा मंत्री के भाषण के वीडियाे का एक हिस्सा भी पाेस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि आतंकवाद का न कोई देश होता है और न कोई धर्म।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 18:40:14 +0530</pubDate>
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                <title>आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए एकजुट मोर्चा समय की जरूरत: राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ बैठक को संबोधित करते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति अडिग है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/united-front-to-deal-with-terrorism-separatism-and-extremism-is/article-151941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताते हुए आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी "बुराइयों" से निपटने के लिए आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करते हुए एकजुट मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को किर्गिज़स्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के उस दृढ़ संकल्प का प्रतीक है कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायोचित दंड से अछूते नहीं रहेंगे।</p>
<p>उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी "बुराइयों" से निपटने के लिए सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करते हुए एकजुट मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश द्वारा प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद, जो किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि दोहरे मापदंडों के लिए कोई स्थान नहीं है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि एससीओ को उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए जो आतंकवादियों को सहायता, शरण और सुरक्षित ठिकाने प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, "आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का बिना किसी अपवाद के सामना करके, हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और समृद्धि के आधार स्तंभ में बदलते हैं।" आतंकवाद-रोधी प्रयासों को एससीओ का एक मूलभूत सिद्धांत बताते हुए, श्री सिंह ने कहा कि संगठन ने इस खतरे के खिलाफ साझा लड़ाई में ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा की है। उन्होंने पिछले वर्ष की तियानजिन घोषणा का उल्लेख किया, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ और सामूहिक रुख को दर्शाया, और इसे आतंकवाद तथा उसके समर्थकों के प्रति उसकी शून्य-सहिष्णुता नीति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, "सामूहिक विश्वसनीयता की वास्तविक परीक्षा निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता और कोई धर्म नहीं होता। देशों को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:36:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी, शाह और अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गये लोगों को किया याद, आतंकवाद के खिलाफ सरकार ने दोहराया दृढ़ संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने पहलगाम हमले की पहली बरसी पर शहीदों को नमन किया। सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हिंसा मुक्त जम्मू-कश्मीर के संकल्प के साथ पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-shah-and-omar-remember-those-killed-in-pahalgam/article-151273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi15.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकवादी हमले की पहली बरसी पर उसमें प्राण गंवाने वाले लोगों को याद किया है और आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प को दोहराया है। पीएम मोदी ने अपने संवेदना संदेश में मंगलवार को कहा," पिछले साल इसी दिन पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा, “ एक राष्ट्र के रूप में, हम शोक की घड़ी में एकजुट हैं और दृढ़ संकल्प हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा। हम आतंकवादियों के घिनौने मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। ”</p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकवादी हमले की पहली बरसी पर इस हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अपने लोगों को खोने का दुख और पीड़ा आज भी हर भारतीय के दिल में है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “आज के दिन हम पिछले वर्ष पहलगाम के भयावह आतंकवादी हमले में खो चुके मासूम लोगों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। अपने लोगों को खोने का दुख और पीड़ा आज भी हर भारतीय के दिल में है।”</p>
<p>गृहमंत्री ने कहा कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है, जिसके खिलाफ हमें एकजुट होकर लड़ना और उसे परास्त करना होगा। उन्होंने कहा," भारत आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रखेगा।” जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुलवामा आतंकवादी हमले बरसी पर कहा, “ हम आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ एकजुट हैं। जम्मू-कश्मीर को पीड़ा और निर्दोषों की मौत से मुक्त कराने की हमारी इच्छा दृढ़ है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि ऐसा दोबारा कभी न हो। ” सीएम अब्दुल्ला ने कहा, “ हम उन परिवारों के साथ भी अपनी अटूट एकजुटता व्यक्त करते हैं जिन्होंने एक साल पहले उस कायरतापूर्ण हमले में अपने प्रियजनों को खो दिया।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: लश्कर कमांडर शब्बीर अहमद लोन गिरफ्तार, बांग्लादेश में बैठकर आईएसआई के इशारे पर बनाया मॉड्यूल</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार कमांडर शब्बीर अहमद लोन को बांग्लादेश सीमा से दबोच लिया है। लोन ढाका से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का मॉड्यूल चला रहा था। पुलिस अब 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' के मास्टरमाइंड शेख सज्जाद गुल की तलाश में छापेमारी तेज कर रही है, जो कई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-success-of-delhi-police-lashkar-commander-shabbir-ahmed-lone/article-148422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shabbir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने बंगलादेश सीमा के पास से एक समन्वित कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा (लश्कर ) के कमांडर शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि लोन ढाका के बाहरी इलाके में स्थित एक गुप्त ठिकाने से लश्कर का एक मॉड्यूल चला रहा था। यह सफलता दो महीने की कड़ी मशक्कत भरी खोज के बाद मिली, जिसकी निगरानी खुद दिल्ली पुलिस के आयुक्त सतीश गोलचा कर रहे थे।</p>
<p>अतिरिक्त आयुक्त प्रमोद कुशवाहा, सहायक आयुक्त ललित नेगी और निरीक्षक सुनील राजैन के नेतृत्व में गठित विशेष कार्यबल लोन की गतिविधियों पर तब से ही बारीकी से नज़र रख रहा था, जब खुफिया जानकारी से यह संकेत मिला था कि वह दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें संगठन में भर्ती करने में शामिल है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उसे 2007 में आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2019 में ज़मानत मिलने के बाद वह देश से भागकर बंगलादेश चला गया था। तब से, वह एक लगातार खतरा बन गया था, उसने एक ऐसा आतंकी नेटवर्क खड़ा कर लिया था जिसने राजधानी की आतंकवाद-विरोधी दस्ता और दूसरी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को हमेशा हाई अलर्ट पर रखा।</p>
<p>हालाँकि, लोन इस बड़ी पहेली का सिर्फ़ एक हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियाँ साथ ही एक और फ़रार आतंकी सरगना शेख सज्जाद गुल का पता लगाने की कोशिशें तेज़ कर रही हैं, जिसके राष्ट्रीय राजधानी से तार जुड़े हैं। गुल को पहली बार 2002 में दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्टेशन पर पकड़ा गया था और उसके बाद 2003 में दोषी ठहराए जाने के बाद उसने तिहाड़ जेल में एक दशक से ज़्यादा समय बिताया। दस साल की सज़ा पूरी करने के बाद, उसे 2017 में रिहा कर दिया गया और माना जाता है कि उसी समय वह पाकिस्तान भाग गया था। अब खुफिया सूत्रों से पता चला है कि गुल लश्कर की एक गुप्त शाखा, 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) में एक अहम ओहदे पर पहुँच गया है। इस संगठन पर कई हमलों की साज़िश रचने का आरोप है, जिनमें पहलगाम का चर्चित आतंकी हमला भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:28:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर पाकिस्तान को महत्व देना भारत की कूटनीतिक विफलता: जयराम रमेश ने खड़े किए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को 'ब्रोकर' बनाना आपत्तिजनक है। जयराम ने डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वर्तमान विदेश नीति पर सवाल उठाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/giving-importance-to-pakistan-on-restoration-of-peace-in-west/article-147949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली के वास्ते मध्यस्थ के रूप में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना था कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह देने, परमाणु अप्रसार नियमों के उल्लंघन और ए. क्यू. खान नेटवर्क के जरिए परमाणु प्रसार में शामिल रहा है। उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही नागरिकों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने आसिम मुनीर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद पाकिस्तान विश्व मंच पर और प्रासंगिक बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया "हमारी सरकार की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियों के कारण एक अस्थिर देश को 'ब्रोकर' की भूमिका मिल गई है, जो भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 14:42:00 +0530</pubDate>
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                <title>लाल किला विस्फोट मामला: एनआईए ने की कश्मीर में कई जगहों पर छापेमारी, कई डॉक्टरों सहित 11 लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लाल किला कार विस्फोट मामले में सोमवार को कश्मीर के श्रीनगर, बारामूला और कुलगाम सहित 6 ठिकानों पर छापे मारे। 10 नवंबर 2025 को हुए इस धमाके में 11 मौतें हुई थीं। अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों और संदिग्धों के नेटवर्क को खंगाल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/red-fort-blast-case-nia-raids-many-places-in-kashmir/article-147493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nia.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के पास पिछले साल 10 नवंबर को हुए कार विस्फोट मामले की चल रही जांच के तहत कश्मीर भर में कई जगहों पर छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ये छापे श्रीनगर, बारामूला, कुपवाड़ा और कुलगाम जिलों में छह जगहों पर उन लोगों से जुड़े ठिकानों पर मारे गए, जिन्हें धमाके के पीछे के "आतंकी मॉड्यूल" के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने बारामूला जिले के रफीबाद के रहने वाले डॉ. बिलाल नसीर मल्ला के घर पर तलाशी ली, जिसे इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। कुपवाड़ा जिले के लंगाते इलाके में भी एक और तलाशी ली गई। श्रीनगर के नौगाम इलाके और दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में भी चार जगहों पर छापे मारे गए।</p>
<p>आज मारे गए इन छापों के बारे में एनआईए की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जांच एजेंसी ने बम धमाके की जांच के दौरान अब तक कई डॉक्टरों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी भी इस आत्मघाती धमाके में मारा गया था।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, राष्ट्रीय राजधानी के लाल किला इलाके के पास 10 नवंबर, 2025 को एक भीड़भाड़ वाले इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार में धमाका हो गया था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी और 32 अन्य घायल हो गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:06:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काबुल नरसंहार: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर लगाया 400 लोगों की हत्या का आरोप, पाकिस्तानी सरकार ने किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमले का आरोप लगाया है, जिसमें 400 लोगों की मौत हो गई। तालिबान ने इसे "मानवता के विरुद्ध अपराध" बताया, जबकि पाकिस्तान ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। सीमा पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghanistan-accused-pakistan-of-killing-400-people-pakistani-government-rejected/article-146787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-attacked1.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सेना पर राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमला करने का आरोप लगाया, जिसमें कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी मंगलवार को अल जजीरा ने दी। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को झूठा और जनमत को गुमराह करने वाला बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उसने सोमवार को केवल काबुल और नांगरहार प्रांत में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। </p>
<p>अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के अनुसार, काबुल के उमर व्यसन उपचार अस्पताल पर हमला स्थानीय समयानुसार सोमवार रात लगभग नौ बजे (16:30 जीएमटी) हुआ। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अस्पताल में 2,000 बिस्तरों की क्षमता है और इस हमले में इमारत के बड़े हिस्से नष्ट हो गए। उन्होंने आगे कहा, दुर्भाग्यवश, मृतकों की संख्या अब तक 400 तक पहुंच चुकी है और लगभग 250 अन्य लोग घायल हुए हैं। बचाव दल वर्तमान में घटनास्थल पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने एवं पीड़ितों के शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।</p>
<p>अफगान सरकार के एक अन्य प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने अस्पताल हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया है। उन्होंने एक्स पर कहा कि अफगान सरकार ऐसे कृत्य को सभी स्वीकृत सिद्धांतों एवं मानवता के विरुद्ध अपराध मानती है।</p>
<p>वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया। एक्स पर एक पोस्ट में, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमलों में काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों के सैन्य प्रतिष्ठानों एवं आतंकवादी समर्थन अवसंरचना को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का उपयोग निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई लक्षित कार्रवाई सटीक एवं सावधानीपूर्वक थी ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो। मंत्रालय ने कहा कि अफगान प्रवक्ता मुजाहिद का दावा पाकिस्तान विरोधी भावना भड़काने और तालिबान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के लिए अवैध समर्थन को छिपाने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p>पाकिस्तान की ओर से ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवाद से निपटने के प्रयासों को तुरंत तेज करने के आह्वान के कुछ घंटों बाद आईं। पाकिस्तान काबुल पर सशस्त्र समूहों, विशेष रूप से पाकिस्तानी तालिबान को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है  जिसके बारे में उसका कहना है कि वह पाकिस्तान में हमले करता है।</p>
<p>इससे पहले, अफग़ान अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को दक्षिण-पूर्वी अफग़ानिस्तान में हुई गोलीबारी में दो बच्चों सहित चार लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुस्तगफर गुरबाज ने कहा कि पाकिस्तान से दागे गए मोर्टार के गोले खोस्त प्रांत के गांवों में गिरे और कई घरों को नष्ट कर दिया। दोनों देशों के बीच पिछले महीने उस समय झड़प शुरू हुई जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जिसमें इस्लामाबाद ने सशस्त्र समूहों को निशाना बनाने की बात की। अफगानिस्तान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाबी हमला किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल ईस्ट जंग: इराक के ड्रोन हमले में फ्रांसीसी सैनिक की मौत, कई अन्य घायल, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[इराक के एरबिल में हुए ड्रोन हमले में फ्रांसीसी सैनिक अर्नाड फ्रियोन शहीद । राष्ट्रपति मैक्रों ने हमले की निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है और इस क्षेत्र में जारी युद्ध की आड़ में सैनिकों को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/middle-east-war-french-soldier-killed-in-iraq-drone-attack/article-146344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/franch.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। इराक के एरबिल इलाके में ड्रोन हमले के दौरान एक फ्रांसीसी सैनिक मारा गया है और कई अन्य घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि इराक के एरबिल इलाके में एक ड्रोन हमले के दौरान एक फ्रांसीसी सैनिक मारा गया है और कई अन्य घायल हुए हैं। उन्होंने मारे गये सैनिक का नाम चीफ वारंट ऑफिसर अर्नाड फ्रियोन का नाम बताया। वह अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से मारे जाने वाले पहले फ्रांसीसी सैनिक हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया पर लिखा, उनके परिवार और उनके साथी सैनिकों के प्रति मैं पूरे देश की ओर से अपना स्नेह और एकजुटता व्यक्त करना चाहता हूँ। हमारे कई सैनिक घायल हुए हैं। फ्रांस उनके और उनके प्रियजनों के साथ खड़ा है।</p>
<p>फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस इलाके में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे फ्रांसीसी सैनिकों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा, इराक में उनकी मौजूदगी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के सख्त दायरे का हिस्सा है। ईरान में चल रहा युद्ध के दौरान ऐसे हमलों को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:56:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल में छिप नहीं पाएंगे भारतीय अपराधी, दोनों देशों में बड़ा समझौता, एफएटीएफ से काठमांडू को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। इससे जाली नोटों, आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ जांच तथा साक्ष्य जुटाने में दोनों देशों को सीधी मदद मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indian-criminals-will-not-be-able-to-hide-in-nepal/article-143874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत के अपराधी अक्सर अपराध करने के बाद नेपाल भाग जाते हैं। यही नहीं नेपाल के अंदर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा नेटवर्क है जो जाली नोटों के कारोबार को बढ़ावा देता है। इससे नेपाल भारत विरोधी तत्वों का अड्डा बन गया है। अब कई सालों की बातचीत के बाद नेपाल और भारत के बीच आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौता हो गया है। इसे अब दोनों देश आपराधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के मामले में एक-दूसरे की मदद करेंगे। इस समझौते पर काठमांडू में हस्ताक्षर किया गया। नेपाल इस समय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ग्रे लिस्ट में है और उसे उम्मीद है कि इस समझौते के बाद वह इससे निकल सकेगा। नेपाल ने इसी तरह का समझौता एक और पड़ोसी देश चीन के साथ भी किया हुआ है।</p>
<p><strong>आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग </strong></p>
<p>नेपाल के विधि, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय में आयोजित एक समारोह के दौरान मंगलवार को आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता पर समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य आपराधिक मामलों से संबंधित जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग को मजबूत करना है।</p>
<p><strong>नेपाल और भारत के बीच नई प्रत्यर्पण संधि पर क्या है अपडेट?</strong></p>
<p>नेपाली कानून मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है, जिसमें साक्ष्य संग्रह, सूचना साझाकरण और जांच तथा अदालती कार्यवाही के दौरान सक्षम अधिकारियों के बीच समन्वय शामिल है। नेपाल और भारत के बीच साल 2005 में इसी तरह का आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण समझौता हुआ था। हालांकि अब आपराधिक मामलों में समझौता हो गया है लेकिन नई प्रत्यर्पण संधि को लेकर अभी बातचीत जारी है।</p>
<p><strong>समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा</strong></p>
<p>इस कानूनी समझौते का उद्देश्य जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े आपराधिक मामले में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाया जाएगा। भारत की ओर से नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा ताकि आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को किया जा सके। इस समझौते की मदद से मानव तस्करी, ड्रग्स की तस्करी, वित्तीय अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और संगठित अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। इसकी मदद से अधिकारी और जांच एजेंसियां इन विषयों की प्रभावी तरीके से जांच कर सकेंगी। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में इससे पहले प्रत्यर्पण संधि हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत और नेपाल के बीच होने जा रहा बड़ा समझौता: ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने के लिए म्युचुअल लीगल असिस्टेंस करार तैयार, चुनाव से पहले होंगे हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल के बीच एमएलए समझौता जल्द साइन होगा। यह ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने, जांच, सबूत साझा करने और कानूनी सहयोग को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-big-agreement-is-going-to-be-signed-between-india/article-142401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच कानूनी सहायता को लेकर एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। करार तैयार हो चुका है अब दोनों देशों के अधिकारी समझौते पर साइन करने के लिए तारीख तय कर रहे हैं। इस कानून पर पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान सहमति बनी थी। नेपाली मीडिया ने बताया है कि कई वर्षों की बातचीत के बाद इस समझौते पर दोनों देश पहुंचे हैं, जिससे पता चलता है कि ये समझौता कितना पेचीदा है। इस समझौते का नाम वी​वीक्यू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने और दोनों देशों की कानूनी संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान, जांच सबूतों को साझा करने, अभियोजन में सहयोग और आपराधिक जांच में कॉर्डिनेशन को आसान बनाने के लिए आपराधिक मामलों पर एमएलए पर साइन करने के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। यह समझौता दोनों पक्षों को ट्रांसनेशनल अपराधों की जांच करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। चूंकी दोनों देशों के नागरिक बगैर वीजा के एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं, इसलिए ये कानून काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>भारत नेपाल के बीच बड़ा कानूनी सहायता समझौता </strong></p>
<p>भारत और नेपाल के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, ऐसे में दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों को लंबे समय से अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने में कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान बातचीत से जुड़े एक अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को कहा है कि एमएलए में एक ऐसा समझौता शामिल है जो आतंकवाद, तस्करी, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे ट्रांसनेशनल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तेज, व्यवस्थित सहयोग को सक्षम बनाता है। इस समझौते पर साइन होने के बाद अपराधियों का पता लगाने, सबूत जमा करने, अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने और एक दूसरे की जांच एजेंसियों को संदिग्धों के बयान को दर्ज करने का अधिकार देगी। </p>
<p><strong>भारत यात्रा के दौरान साइन की चर्चा</strong></p>
<p>काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि फिलहाल मामला इस पेंच पर फंसा हुआ है कि इस समझौते को मार्च में नेपाल में होने वाले चुनाव से पहले साइन कर लिया जाए या चुनाव के बाद। नेपाल विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि हम इस पर चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले विदेश मंत्री बालनंद शर्मा की फरवरी के पहले हफ्ते में भारत यात्रा के दौरान समझौते पर साइन करने की चर्चा हुई थी। लेकिन यात्रा स्थगित कर दी गई और अगर चुनाव से पहले समझौते पर साइन करने को लेकर सहमति बनती है, तो कानून मंत्री अनिल सिन्हा नेपाल सरकार की ओर से समझौते पर साइन कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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