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                <title>electric vehicles - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>electric vehicles RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जापान को मार्कस द्वीप के पास मिला रेयर अर्थ रिच मड, टोक्यो में खुशी की लहर, गहराई से दुर्लभ खनिजों को निकालने का दुनिया में पहली बार परीक्षण </title>
                                    <description><![CDATA[जापान ने 6,000 मीटर गहराई से रेयर अर्थ युक्त तलछट निकाली। ‘जादुई कीचड़’ खोज से चीन पर निर्भरता घटाने और घरेलू खनन की उम्मीदें बढ़ीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-finds-rare-earth-rich-mud-near-marcus-island-wave/article-142120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान ने रेयर अर्थ की खोज पर बड़ी सफलता का ऐलान किया है। जापान को अपने एक द्वीप से दुर्लभ खनिज वाले गहरे समुद्र के तलछट को सफलतापूर्वक ड्रिल करके निकालने में कामयाबी मिली है। इसे जापान की रेयर अर्थ रिच मड (जादुई कीचड़) कहा जा रहा है। इसने जापान की रेयर अर्थ से जुड़ी उम्मीदों को बढ़ा दिया है। जापानी सरकार को उम्मीद है कि इससे रेयर अर्थ के लिए उनकी चीन पर निर्भरता कम हो जाएगी। जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, गहरे समुद्र में ड्रिलिंग करने वाले जहाज चिक्यू ने मिनमिटोरिशिमा (मार्कस द्वीप) के पास 6,000 मीटर (19,700 फीट) की गहराई से तलछट सफलतापूर्वक इकट्ठा किया। इतनी गहराई से दुर्लभ खनिजों को निकालने का यह परीक्षण दुनिया में पहली बार हुआ है।</p>
<p><strong>जापान ने द्वीप पर खोजा जादुई कीचड़</strong></p>
<p>ताकाइची ने कहा है कि यह जापान में घरेलू स्तर पर दुर्लभ खनिजों के औद्योगीकरण की दिशा में पहला कदम है। हम किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए दुर्लभ खनिजों के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला हासिल करने की दिशा में प्रयास करेंगे। इस समय रेयर अर्थ की ग्लोबल सप्लाई पर चीन का प्रभाव है। जापानी आधिकारियों ने बताया है कि उनका रिसर्च जहाज चिक्यू 12 जनवरी को टोक्यो से रवाना होकर 1,900 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में मिनमिटोरिशिमा द्वीप पहुंचा। उसने 30 जनवरी को रिकवरी आॅपरेशन शुरू किया और 1 फरवरी को इनोवेटिव ओशन डेवलपमेंट ने समुद्र तल से दुर्लभ तलछट के सफल निष्कर्षण का ऐलान किया।</p>
<p><strong>कीचड़ में क्या-क्या छुपा है</strong></p>
<p>शुरूआती जांच से पता चलता है कि कीचड़ में डिस्प्रोसियम और नियोडिमियम हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट के लिए महत्वपूर्ण हैं। गैडोलिनियम और टर्बियम भी मिले हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल इमेजिंग और रक्षा तकनीक में उपयोग होते हैं। टर्बियम और मोनाजाइट के नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए पेरिस की लैब भेजा गया है। जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रवक्ता ने कहा कि निष्कर्षण तीन अलग जगहों पर किया गया। जहाज के 15 फरवरी को शिमिजु बंदरगाह पर लौटने के बाद रासायनिक और व्यावसायिक विश्लेषण किया जाएगा। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि दुर्लभ पृथ्वी भंडार की कुल मात्रा और उनकी आर्थिक व्यवहार्यता निर्धारित करने के लिए और रिसर्च जरूरी है।</p>
<p><strong>अगले साल शुरू होगा खनन</strong></p>
<p>जापान ने संकेत दिए हैं कि कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं आती है तो अगले साल फरवरी में बड़े पैमाने पर समुद्री खनन परीक्षण शुरू हो जाएगा। निष्कर्षण से लेकर अलगाव और शोधन तक की पूरी प्रक्रिया व्यवहार्य और लागत प्रभावी साबित हुई तो जापान बहुत बड़े स्तर खनन का काम कर सकता है। चीन इस समय वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी आपूर्ति पर पूरी तरह हावी है। चीन ने हाल ही में जापान पर कई निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में जापान को चीन पर निर्भरता कम करने के लिए विकल्पों की तलाश है। जापान ने लगातार मिनमिटोरिशिमा के पास दुर्लभ पृथ्वी भंडारों का सर्वेक्षण किया है। हालिया सफलता से उसकी उम्मीद बढ़ गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:33:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान गैस हरित ऊर्जा में बनेगी प्रमुख भागीदार: सीएनजी-पीएनजी के साथ एलएनजी, ईवी और सीबीजी नेटवर्क की दिशा में कदम, नीमराणा में एलएनजी प्लांट निर्माणाधीन</title>
                                    <description><![CDATA[आरएसजीएल सीएनजी-पीएनजी के साथ एलएनजी, सीबीजी और ईवी नेटवर्क विकसित करेगा। नीमराणा में एलएनजी प्लांट निर्माणाधीन, कोटा में सीबीजी पायलट शुरू हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-gas-will-become-a-major-partner-in-green-energy/article-141835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(17)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड (आरएसजीएल) ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी भूमिका को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सीएनजी-पीएनजी सेवाओं के साथ अब आरएसजीएल एलएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) नेटवर्क विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है।</p>
<p>प्रमुख सचिव माइंस एवं चेयरमेन आरएसजीएल टी. रविकान्त ने बताया कि राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरएसजीएल अपने पारंपरिक कार्यक्षेत्र का विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि नीमराणा में राज्य का पहला एलएनजी प्लांट निर्माणाधीन है, जो शीघ्र ही तैयार होगा।</p>
<p>टी. रविकान्त मंगलवार को राजस्थान स्टेट गैस की 46वीं संचालक मंडल बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने जानकारी दी कि कोटा में पायलट आधार पर सीबीजी की आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही जयपुर, कोटा एवं एक्सप्रेस-वे पर एलएनजी आउटलेट स्थापित करने तथा जयपुर के आसपास 300 से 400 किलोमीटर क्षेत्र में ईवी नेटवर्क विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एलएनजी, सीबीजी और ईवी नेटवर्क के विकास से आमजन को सस्ती, स्वच्छ और हरित ऊर्जा की सहज उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।</p>
<p>राजस्थान स्टेट गैस के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह ने बताया कि नीमराणा में एलएनजी प्लांट के तैयार होने से लंबी दूरी के वाहनों, खनन क्षेत्रों और औद्योगिक इकाइयों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने अथवा समन्वय के माध्यम से गैस उपलब्ध कराने और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ईवी स्टेशन स्थापित करने की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। पायलट परियोजनाओं के माध्यम से संभावनाओं के अनुरूप नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।</p>
<p>संचालक मंडल की बैठक में वित्त सचिव (राजस्व) कुमार पाल गौतम, गेल गैस के प्रतिनिधि संजय सिंह तथा आरएसएमएम की प्रबंध निदेशक प्रज्ञा केवलरमानी ने अपने सुझाव दिए। बैठक में उप महाप्रबंधक विवेक रंजन, विवेक श्रीवास्तव, मुख्य वित्त अधिकारी दीप्तांशु पारीक, उप प्रबंधक आईटी गगनदीप राजोरिया एवं कंपनी सचिव विनिता सोनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 17:53:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने कनाडा को दी 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी, चीन के साथ व्यापार समझौते पर दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से व्यापार समझौते पर कनाडा को चेतावनी दी, कहा ऐसा करने पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाएंगे, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो सकती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-threatens-canada-with-100-percent-tariff-warns-on-trade/article-140776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कनाडा को चीन के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर धमकी देते हुए कहा कि अगर कनाडा ने ऐसा किया तो उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति कनाडा और चीन के बीच हुए इस व्यापार समझौते को चीन द्वारा अपने निर्यात को कनाडा के रास्ते अमेरिका भेजने का एक जरिया मानते हैं।</p>
<p>ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, चीन कनाडा को पूरी तरह से निगल जाएगा, उसे पूरी तरह से नष्ट कर देगा, जिसमें उसके कारोबार, सामाजिक ताना-बाना और जीवन शैली का विनाश भी शामिल है।</p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में, बीजिंग का दौरा किया था और एक प्रारंभिक व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी जिसके तहत कनाडा को बेची जाने वाली चीनी इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ कम किया जाएगा, जिसके बदले में चीन ने कनाडाई कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई थी।</p>
<p>कनाडाई उत्पादों पर इतने ऊंचे टैरिफ लगाने से अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखलाएं, जिनमें रक्षा उत्पादन श्रृंखलाएं भी शामिल हैं, बाधित हो सकती हैं क्योंकि परंपरागत रूप से दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों के लिए पुर्जे और सहायक उपकरण बनाकर एक-दूसरे की आपूर्ति प्रणालियों में योगदान करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 13:24:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंक्शन व ढेहर के बालाजी रेलवे स्टेशन पर मिलेगा बैटरी स्वैप चार्जिंग स्टेशन : चार्ज खत्म होने पर नहीं होगी परेशानी, लॉ-बैटरी देकर ले जा सकेंगे फुल चार्ज बैटरी </title>
                                    <description><![CDATA[वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कृष्ण कुमार मीना ने बताया कि जयपुर जंक्शन व ढेहर के बालाजी रेलवे स्टेशन पर बैटरी स्वैप चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/battery-swap-charging-station-will-be-available-at-balaji-railway/article-105062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(4)25.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल पर यात्री सुविधा में विस्तार करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए बैटरी स्वैप चार्जिंग स्टेशन की सुविधा चालू करने जा रहा है। अब उन्हें जयपुर जंक्शन व ढेहर के बालाजी स्टेशन पर आते-जाते समय बैटरी के चार्ज खत्म होने की परेशानी नहीं होगी। अब वो अपने व्हीकल की लॉ-बैटरी देकर दूसरी फुल चार्ज बैटरी ले जा सकेंगे।</p>
<p>वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कृष्ण कुमार मीना ने बताया कि जयपुर जंक्शन व ढेहर के बालाजी रेलवे स्टेशन पर बैटरी स्वैप चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जल्द ही यह सुविधा आमजन के लिए शुरू हो जाएगी। लोगों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए प्रति यूनिट के हिसाब से चार्ज देना होगा। उक्त फर्म केवल स्वत: निर्मित बैटरी के लिए ही यह सुविधा प्रदान करेगी। हर दिन 900 लोग इस सुविधा का फायदा लें सकेंगे, दोनों स्टेशनों पर एक-एक बैटरी स्वैप चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। </p>
<p>इसमें बैटरी स्वैप और चार्जिंग दोनों की सुविधा उपलब्ध होगी, लेकिन आमजन को केवल बैटरी स्वैप की ही सुविधा मिलेगी। इस स्टेशन पर चार-चार यूनिट बनाई जाएगी, जिसमें 16 घंटे में 1800 से ज्यादा बैटरी चार्ज हो सकेगी। इसका 900 से ज्यादा लोगों को लाभ मिल सकेगा। दोनों रेलवे स्टेशन पर बैटरी स्वैप चार्जिंग स्टेशन के लिए स्थान चिन्हित कर लिया गया है। स्टेशन पर बिजली कनेक्शन के लिए राज्य सरकार को फाइल भेजी गई है। जैसे ही कनेक्शन मिल जाएगा तत्काल बैटरी चार्जिंग स्टेशन का काम शुरू हो जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 17:51:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>इलेक्ट्रिक वाहनों की दौड़ पर चार्जिंग और मरम्मत लगा रही ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[सार्वजनिक स्थानों पर बेटरी चार्जिंग की सुविधा शुरू होने के बाद शहर में ई बाइक की बिक्री में इजाफा होगा अभी 30 फीसदी का इजाफा हो चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/charging-and-repairing-brakes-on-the-race-of-electric-vehicles/article-54863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/electric-vahano-ki-daud-pr-charing-or-marammat-lga-rhi-brake...kota-news-18-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में पिछले तीन सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। सरकार की ओर से पर्यावरण को बेहतर बनाने और परिवहन के लिए सस्ता विकल्प मुहैया कराने के मकसद से इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले दो साल से पेट्रोल डीजल के दामों हो रही लगातार बढ़ोतरी के चलते लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की ओर रुझान बढ़ा है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों डिमांड का अंदाजा इस से लगा सकते है कि जून में खूले एक ई रिक्शा शो रूम ढाई महीने में ही 60 से अधिक ई रिक्शा बेच दिए हैं। शहर में करीब एक दर्जन से अधिक इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहनों के शो रूम है। सरकार की ओर से दी जा रही पांच हजार रुपए तक छूट दी जा रही जिसके चलते  लोगों रुझान बढ़ा है। ईवी एक्सपर्ट रामचंद्र ने बताया कि  ई वाहनों की बिक्री बढ़ने में दो बाधाए लोगों इसको खरीदने से रोक रही है एक तो शहर में पेट्रोल पंप की तर्ज पर चार्जिंग पॉइन्ट की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। दूसरा इन वाहनों की मरम्मत के लिए हर जगह मिस्त्री नहीं होने से वाहन खराब होने पर उसे शो रूम में ले जाना ही विकल्प है। जिससे इसकी बिक्री 30 फीसदी तक ही पहुंची है। ये दोनों बाधाओं का निस्तारण हो जाए तो शहर में ई वाहन की 70 से 80 फीसदी तक पहुंच जाए। दूसरा सरकार की ओर से दिए जा रहे  प्रोत्साहन वाहनों और इनके कंपोनेंट को ज्यादा मिलता दिखाई दे रहा है। महंगे होने के बावजूद सप्लाई होने वाले करीब 25 फीसदी दोपहिया और करीब 10 फीसदी तिपहिया वाहनों में बैटरी या कंपोनेंट के जल्द खराब होने की शिकायतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल </strong><br />- 65 ईवी कार<br />- 4264  इलेक्ट्रिक वाहन। <br />- 3750 से अधिक ई स्कूटर<br />- 341 ई रिक्शा<br />- 300 लोडिंग ई रिक्शा<br />- 50 लोडिंग वाहन</p>
<p><strong>पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी से डिमांड बढ़ी</strong><br />इलेक्ट्रिक वाहन विक्रेता अजय शर्मा ने बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम में बेलगाम बढोतरी के कारण ई बाइक, ई रिक्शा और ई स्कूटी की डिमांड बढ़ गई है। अभी ई दोपहिया वाहनों की 15 दिन की वेटिंग चल रही है। सार्वजनिक स्थानों पर बेटरी चार्जिंग की सुविधा शुरू होने के बाद शहर में ई बाइक की बिक्री में इजाफा होगा अभी 30 फीसदी का इजाफा हो चुका है। शहर में अब तक करीब 5 हजार 6 हजार से अधिक दो पहिया व तीन पहिया व चौपहिया वाहन सड़को पर दौड़ रहे है। पेट्रोल डीजल के दाम में बढोतरी के बाद से इलेक्ट्रिक व्हीकल का चलन बढ़ रहा है। यही वजह है कि अब जीवाश्म र्इंधन से चलने वाली कारें बनाने वाली कंपनिया ईवी बनाने लगी है। दो पहिया वाहन मैन्युफैक्चर 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। </p>
<p><strong>नवज्योति लगातार उठाता रहा है ई -बसों की मांग</strong><br />कोटा सार्वजनिक परिवहन और यातायात को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए मोदी केबिनेट ने बुधवार को पीएम ई बस योजना को मंजूरी प्रदान की है। इस योजना के तहत देश के 169 में से प्रथम चरण में 100 शहरों में लगभग 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इस योजना से देश में पारंपरिक कौशल वाले लोगों को समर्थन मिलेगा। ई- बस चलाने की जरूरत  को लेकर दैनिक नवज्योति पिछले दो वर्ष से इस मामले को लगातार उठाता रहा है। दैनिक नवज्योति ने वर्ष 2022 में 18 मई को विशेष समाचार प्रकाशित कर ई बसों को चालू करने से जनता को होने वाले फायदे बताए थे। इसी प्रकार दैनिक नवज्योति ने 6 अप्रेल 2023 को लगातार तीन दिन तक 7 अप्रेल, 9 अप्रेल को  ई बसों की जरूरत, फायदे, क्या परेशानी है। लोगों के सामने अपॉर्चयुनिटी क्या-क्या हैं। सभा संभावनों को तलाशते हुए विशेष समाचार प्रकाशित किए थे। ई बसें यदि कोटा शहर में भी चलती हैं तो इससे काफी फायदा होगा। यहां के शिल्पकार,  मूर्तिकार, कुम्हार, सुनार, औजार बनाने वाले, आटोमोबाइल में काम करने वाले कामगारों को नया रोजगार मिलेगा। इसके साथ कोटा घरेलू बाजार के साथ वैश्विक बाजार से भी जुडने की संभावनाएं बनेंगी।  </p>
<p><strong>ई-व्हीकल छह साल से सड़कों पर, फिर भी चार्जिंग सुविधा नहीं </strong><br />ईवी यूजर कुन्हाडी निवासी उमेश व्यास ने बताया कि तिपहिया ई-व्हीकल तो शहर में करीब 6 साल से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। लेकिन अभी तक शहर में पेट्रोल पंप जैसे ईवी चार्जिंग पाइंट नहीं बने जिससे वाहनधारियों को लंबी दूरी का सफर सोच समझ कर तय करना होता है। शहर में बैटरी स्वेपिंग सेंटर बन जाए तो लोगों बेहतर सुविधा मिलेगी। कई दोपहिया वाहनों की बैटरी कमजोर पाई जा रही है, इनमें लीड एसिड बैटरी के तीन साल और लीथियम आयन बैटरी के 5 साल तक चलने का दावा किया जाता है, लो स्पीड वाले व्हीकल की गति 25 किमी प्रतिघंटा और माइलेज 40 से 50 किमी के आसपास बताया जाता है। कुछ वाहन 60 तक का माइलेज देते हैं। ऐसे में लंबी दूरी जाने के लिए वाहनधारी को सोचना पड़ता है। बिना चार्जिंग के गाड़ी लेकर चले गए रास्ते में बेटरी खत्म हो गई तो उसे चार्जिंग करने के लिए कोई पाइंट नहीं है। </p>
<p><strong>मरम्मत के लिए नहीं है जगह जगह मिस्त्री </strong><br />ईवी विक्रेता रामचंद्र ने बताया कि शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी बढ़ रही है लेकिन सबसे बड़ी बाधा यहां ग्राहको ये आ रही है कि एक तो वाहनों की मरम्मत के लिए अभी मिस्त्री नहीं है। कंपनी में इसकी मरम्मत और बेटरी का काम होता है। दूसरी बड़ी समस्या ये है कि इसके चार्जिंग पाइंट नहीं है। मध्यप्रदेश, दिल्ली, नागपुर, महाराष्टÑ में ईवी वाहनों के लिए पेट्रोल पंप के जैसे हर 10 किमी पर चार्जिंग पाइंट है। जिससे इन प्रदेशों में इनकी बिक्री बढ़ी है। कोटा में सार्वजनिक रूप से ईवी चार्जिंग पाइंट नहीं है। शहर में चार पांच स्थानों पर ईवी को चार्ज किया जाता है। वो पाइंट या तो होटल, पार्किंग एरिया या सर्विस सेंटर है या फिर ईवी विक्रेता का शो रूम जहां ये सुविधा आॅन रिकवेस्ट मिल रही है। कोटा में यदि जगह-जगह सस्ते चार्जिंग स्टेशन बनाए जाते तो ई-व्हीकल उपयोगकतार्ओं को सुविधा मिल सकती और यह पर्यावरण के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>शहर में चल रहे अनाधिकृत रूप से चार्जिंग सेंटर</strong><br />ई रिक्शा चालक असलम अंसारी ने बताया कि शहर में ई रिक्शा की लगातार बढोतरी हो रही है। घर से सुबह ई रिक्शा चार्ज करके लाते है तो दिन में तीन चार ट्रीप तक तो कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन बाद चार्जिंग के लिए  पाइंट ढूंढना पड़ता है। बार बार घर जाकर तो चार्ज नहीं कर सकते है। शहर में छावनी, सिटी मॉल के सामाने की होटल की पार्किंग में,एरोड्रम चौराहा, थेगडा रोड स्थित एक  रिसोर्ट, गढ पैलेस के पास चार्जिंग पाइंट है लेकिन ये सभी अनाधिकृत है यहां 21 रुपए से 25 रुपए यूनिट तक लेते है। एक बार चार्ज करने के लिए पांच से छह यूनिट खर्च आता है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रिकल वाहनों का यह है फायदा</strong><br />ई-रिक्शा डीलर अब्बास अली ने बताया कि शहर में दो साल से लेक्ट्रिकल वाहनों की डिमांड बढ़ गई है। सबसे ज्यादा ई-रिक्शा, स्कूटी, बाइक की मांग ज्यादा है। इसमें महंगे पेट्रोल से तो निजात मिलती ही है साथ ही वायु और ध्वनी प्रदूषण नहीं फैलाती है। कंपनी को तरसे शोरूम पर फ्री चार्जिंग की सुविधा है। घर पर चार्जिंग स्टेशन लगा सकते हैं। 10 घंटे में फुल चार्ज में बाइक व स्कूली वाहन 60 से 70 किमी व ईवी कार  220 से 250 किमी चलते हैं। कोटा के बाहर ले जाना संभव नहीं है। कारण की अभी रोड पर जगह जगह चार्जिंग स्टेशन नहीं लगे हुए है। ईवी कार की कीमत बहुत अधिक है। इसके अलवा कोटा में अभी कार चार्जिंग के पॉइंट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2023 17:46:00 +0530</pubDate>
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                <title>120 रुपए में 250 किमी दौड़ाओ इलेक्ट्रिक कार</title>
                                    <description><![CDATA[आरटीओ से मिले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से जून 2022 तक शहर में ईवी व्हीलर की कुल संख्या 1233 थी, जो 5 अप्रेल 2023 तक बढ़कर 4 हजार 164 वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों का कम कीमत में ज्यादा एवरेज लोगों को लुभा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electric-car-can-run-250-km-in-120-rupees/article-42051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/666-copy12.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड पहले के मुकाबले अब तेजी से बढ़ने लगी है। कम कीमत में ज्यादा एवरेज लोगों को लुभा रहा है। एक ही साल में ही कारों की संख्या  13 से बढ़कर 62 हो गई। वहीं, टू-व्हीलरों की संख्या 1200 से 3000 पार कर गई।   यदि, एवरेज की बात करें तो इलेक्ट्रिक कार 1 रुपए में 1 किमी दौड़ रही है तो टू-व्हीलर 32 रुपए में 150 किमी का सफर तय कर रहा है। आरटीओ से मिले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से जून 2022 तक शहर में ईवी व्हीलर की कुल संख्या 1233 थी, जो 5 अप्रेल 2023 तक बढ़कर 4 हजार 164 वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं। </p>
<p><strong>प्रदूषण मुक्त शहर के लिए जरूरी ई- व्हीकल्स</strong><br />शहरों में प्रदूषण की स्थिति खतरनाक मानकों तक पहुंच रही है। यदि शहरों को प्रदूषण मुक्त करना है तो इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। ये सिर्फ टू व्हीलर व कारों से नहीं होगा। इसके लिए सिटी परिवहन में बसों की संख्या भी बढ़ानी होगी।</p>
<p><strong>जानिए, कितने चार्ज पर कितना चलता है वाहन</strong><br />ईवी कम्पनी प्रतिनिधियों के अनुसार, किसी भी ई- व्हीकल्स का एवरेज स्पीड और बैट्री के पैरामीटर पर निर्भर करता है। यानी, बैट्री जितनी किलोवाट की होगी एवरेज उतना अधिक बढ़ जाएगा। इसमें मोटर कितनी किलावॉट की है, यह भी माइलेज को लेकर महत्वपूर्ण होता है। </p>
<p><strong>स्कूटर : </strong>अभी तक जो कंपनियां इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में लाई हैं, उनका दावा है कि एक चार्ज में स्कूटर 90 से 150 किमी तक चल जाता है। एक बार बैट्री फुल चार्जिंग होने में 4 से 5 घंटे का समय लग जाता है। <br /><strong>फायदा :</strong> एक बार बैट्री फुल चार्ज होने में 3 से 4 यूनिट बिजली खर्च होती हैं। प्रति 8 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से 4 यूनिट बिजली में 32 रुपए खर्च होते हैं। ऐसे में 32 रुपए में 150 किमी की दुरी तय कर सकते हैं। पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ईवी वाहनों का खर्चा 10 गुना कम आता है।  </p>
<p><strong>कार : </strong>वर्तमान में शहर में तीन कार कम्पनियां ही इलेक्ट्रिक कार उतारी हैं। कार की बैट्री एक बार में फुल चार्ज होने में 4 से 5 घंटे का समय लेती है। 400 किलोवॉट की बैट्री वाली कार 453 किमी का सफर तय करती है। <br /><strong>फायदा : </strong>इलेक्ट्रिक कार 1 रुपए में एक किमी चलती है। बैट्री फुल चार्ज करने में करीब 14 से 15 यूनिट बिजली खर्च होती है, यानी 120 रुपए में 300 किलोवॉट की बैट्री वाली कार से 250 किमी का सफर तय कर सकते हैं। </p>
<p><strong>थ्री-व्हीलर :</strong> इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बैट्री फुल चार्ज होने में 4 से 5 घंटे का समय लेती है। एक बार फुल चार्ज होने पर 80 से 100 किमी की दूरी तय की जा सकती है। <br /><strong>फायदा :</strong> ई-रिक्शा व आॅटो दो तरह की बैट्री वाले आते हैं, जिसमें 1 व 4 बैट्री वाले थ्री व्हीलर शामिल हैं। इनकी बैट्री चार्ज होने में औसतन 5 से 7 यूनिट बिजली खर्च होती है। यानी 50 से 55 रुपए में करीब 80 किमी का सफर तय कर सकते हैं। थ्री व्हीलर की श्रेणी में ई-कार्ट, लोडिंग वाहन, ई-रिक्शा, आॅटो शामिल हैं। </p>
<p><strong>कमाई से खुश, ई-रिक्शा व आॅटो चालक</strong><br />45 से 50 रुपए के खर्च पर दिनभर में 1200 रुपए की आमदनी हो रही है। मेंटिनेंस भी नहीं है। एक बार बैट्री फुल होने पर करीब 80 से 100 किमी तक रिक्शा चलता है। हालांकि, लोड बढ़ने पर बैट्री जल्दी गर्म हो जाती है। <br /><strong>- देवव्रत, ई-रिक्शा चालक</strong></p>
<p>कोचिंग संस्थान से रिटायर्ड होने के बाद 3 लाख 80 हजार का इलेक्ट्रिक आॅटो खरीदा। सिंगल बैट्री वाला आॅटो है, 3 यूनिट बिजली खर्च पर बैट्री फुल चार्ज होती है और 30  रुपए में 12 से 1500 रुपए प्रतिदिन कमा रहे हैं। जीरो मेंटिनेंस से अच्छी बचत हो रही है। <br /><strong>- रामस्वरूप, आॅटो चालक  </strong></p>
<p><strong>अब पेट्रोल की टेंशन नहीं</strong><br />पूर्व में घर से कार निकालने से पहले पेट्रोल की चिंता सताती थी लेकिन जब से इलेक्ट्रिक कार खरीदी तब से पेट्रोल की टेंशन खत्म हो गई। अब एक बार बैट्री फुल चार्ज होने पर 5 दिन तक शहर में आसानी से 170 किमी तक घूम सकते हैं।  वहीं, लोडिंग, लपक, स्पीड में पेट्रोल व इलेक्ट्रिक कार में कोई अंतर नहीं। हालांकि, जिले से बाहर जाने के दौरान  चार्जिंग के बारे में सोचना पड़ता है। <br /><strong>- कपिल जैन, कार चालक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Apr 2023 14:36:12 +0530</pubDate>
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                <title>चार्जिंग का संकट रोक रहा ईवी की रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से नहीं बढ़ने का सबसे बड़ा कारण चार्जिंग की चिंता है। इसके लिए शहर में चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग सेंटर बनाए जाने जरूरी हैं। चार्जिंग स्टेशन तो सार्वजनिक महत्व की हर जगह पर होने चाहिए। इसके अलावा पेट्रोल पंप पर उपलब्ध स्थानों पर ये स्टेशन बनाए जा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/charging-crisis-stopping-the-pace-of-ev/article-41933"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/charging-ka-sankat-rok-raha-ev-ki-raftaar..kota-news..6.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की बढ़ती मंहगाई पर ब्रेक लगाने को ईवी व्हीकल्स, विकल्प तो बने हैं, लेकिन रफ्तार नहीं पकड़ सके। चार्जिंग और बैटरी स्वेपिंग स्टेशन नहीं  होने से कोटा शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही, जितनी तेजी से फ्यूल वाहन बढ़े हैं। हालांकि, आॅटो मोबाइल इंडस्ट्री में ईवी मार्केट तेजी से ग्रोथ कर रहा है। एक ही साल में तीन गुना इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ी गई है। लेकिन, पांच सालों का ओवरआॅल मार्केट देखें तो अभी ईवी चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2018 से अब तक शहर में कुल 4 हजार से अधिक वाहन बिक चुके हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या टू-व्हीलर की है। वहीं, ई-कार्ट यानी छोटे थी-व्हीलर, ई-रिक्शा 200 से ज्यादा हैं। जबकि, ईवी-कारों की बात करें तो साढ़े पांच साल में सबसे कम मात्र 62 कारें ही बिकी हैं। जबकि, ईवी विकल्स पेट्रोल-डीजल और सीएनजी खर्च के मुकाबले 10 गुना सस्ता है।  इसका सबसे बड़ा कारण ई-चार्जिंग व बैट्री स्वेपिंग स्टेशन नहीं होना है। हालांकि, कुछ कार निर्माता कम्पनियों ने ही अपने वाहनों के लिए शहरभर में पांच ई-चार्जिंग स्टेशन बनाए हैं। </p>
<p><strong>पेट्रोल से 10 गुना सस्ता है ईवी </strong><br />ईवी टीम लीडर अभिषेक जेसवाल व मैनेजर शैलेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि पेट्रोल के बढ़ते दामों से चिंतित  हर कोई बढ़ते फ्यूल प्राइज की वजह से कार की माइलेज को लेकर चिंतित है। सामान्य कार में एक किमी का सफर तय करने में ही दस से 15 रुपए खर्च हो जाते हैं। अगर कहीं 200 किमी जाना पड़े तो दो से ढाई हजार रुपए फ्यूल पर ही खर्च हो जाएंगे। वहीं, अगर यही सफर इलेक्ट्रिक कार से किया जाए तो एक किमी का सफर तय करने में महज एक रुपए खर्च होगा। जबकि 200 किलोमीटर का सफर सिर्फ 200 रुपए में हो जाएगा। इससे जेब पर दस गुणा भार कम पड़ेगा। साथ ही इस बात का सुकून भी होगा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कम खर्च पर लंबी दूरी तय की। </p>
<p><strong>जरूरी है, चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वेपिंग सेंटर </strong><br />इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से नहीं बढ़ने का सबसे बड़ा कारण चार्जिंग की चिंता है। इसके लिए शहर में चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग सेंटर बनाए जाने जरूरी हैं। चार्जिंग स्टेशन तो सार्वजनिक महत्व की हर जगह पर होने चाहिए। इसके अलावा पेट्रोल पंप पर उपलब्ध स्थानों पर ये स्टेशन बनाए जा सकते हैं। बैटरी स्वैपिंग सेंटर भी एक बेहतर विकल्प है। यहां पुरानी बैटरी चार्जिंग पर लगाकर सेंटरसे फुल चार्ज बैटरी वाहन में लगा सकते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों में दिलचस्पी बढ़ाने के लिए पहले ये सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हों। वर्तमान में चार्जिंग स्टेशन पर बैट्री चार्ज के लिए निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ता है। हालांकि पेट्रोल की अपेक्षा में यह काफी सस्ता है। </p>
<p><strong>2025 तक बूम पर होगा ईवी मार्केट</strong><br />ई-स्कूटर शोरूम मैनेजर शैलेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि 2025 तक यह मार्केट बूम पर होगा। कम्पनियां इस क्षेत्र में सुधार को लेकर तेजी से रिसर्च कर रही है, जो खामियां आ रही हैं, उन्हें दूर करने के प्रयास में जुटी हैं। लोगों के विश्वास जीतने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। कम्पनियां द्वारा ई-चार्जिंग और स्वेपिंग स्टेशन की उपलब्धता बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। हालांकि, शहर में अभी इलेक्ट्रिक व्हीकल का वो क्रेज नहीं है, जो महानगरों में देखा जा रहा है। यहां साढ़े पांच सालों में 4 हजार ही ई वाहन रजिस्टर हुए हैं। जबकि पेट्रोल-डीजल व सीएनजी वाहनों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा हैं।  </p>
<p><strong>यह बरतें सावधानियां</strong><br />- ईवी शोरूम मैनेजर शैलेंद्र व शुभम के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के रखखराव के दौरान कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है।<br />- ड्राइव करने के तुरंत बाद वाहन की बैट्री चार्ज न करें, आधा घंटे रेस्ट देने के बाद ही चार्जिंग लगाएं।<br />- तेज पानी के प्रेशर से वाहन न धोएं, इससे वायरिंग में प्रोबलम हो सकती है। <br />- इलेक्ट्रिक वाहनों को आग व ज्यादा हीट वाले स्थानों से दूर रखें। <br />- बैट्री को 100 प्रतिशत चार्ज न करें, अधिकतम 90 से 95 प्रतिशत ही चार्ज करें। </p>
<p><strong>पांच साल में 4 हजार से अधिक ईवी  बिके</strong><br />परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 से 5 अप्रेल 2023 तक शहर में कुल 4 हजार 164 वाहन ही बिक पाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दुपहिया वाहनों की हैं। जिसमें 3 हजार 530 स्कूटर, 281 ई-रिक्शा आॅटो, 251 ई-कार्ड यानी छोटे थ्री-व्हीलर व 40 गुडस यानी लोडिंग वाहन ही रजिस्टर हुए हैं। वहीं, कारों की संख्या सबसे कम हैं। हालांकि, लोडिंग वाहनों से अधिक है।</p>
<p><strong>शहर में  पांच चार्जिंग स्टेशन </strong><br />ई कार  चालकों के लिए शहर में पांच जगहों पर चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें सिटी मॉल के सामने हॉटल की पार्किंग में, थेगड़ा रोड स्थित रिसोर्ट में, नया नोहरा स्थित रिसोर्ट, श्रीनाथपुरम व टिपटा गढ़ पैलेस के पास  बनाए गए हैं। यहां 21 रुपए प्रति यूनिट चार्ज किया जाता है। उन्होंने बताया कि सभी स्टेशन हॉटल व रिसोर्ट परिसर में ही बनाए गए हैं, क्योंकि चार्जिंग के दौरान उपभोक्ता को सभी तरह की सुख-सुविधाएं मिल सके। </p>
<p><strong>शहर में चल रहीं 62 ई-कार</strong><br />आरटीओ में 62 ई कारें ही पंजीकृत हुई हैं। हालांकि, ईवी सेक्टर में कार गत वर्ष से ही लॉन्च हुई हैं। ऐसे में डेढ़ साल में 62 कारों का बिकना आॅटो मोबाइल इंडस्ट्री में अच्छी शुरुआत मानी जा रही है। कार कम्पनी के ईवी टीम लीडर अभिषेक जेसवाल का कहना है कि आज के टाइम में यह सबसे ज्यादा बूम करने वाली इंडस्ट्री है। इसमें लगातार इनोवेशन हो रहे हैं। जल्द ही लग्जरी कारें भी ईवी में देखने को मिलेगी। </p>
<p><strong>ईवी को लेकर उठते सवाल, विशेषज्ञों के जवाब</strong><br /><strong>द.</strong> कोटा का तापमान 45 से 50 तक पहुंच जाता है, ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों में शोर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है?<br /><strong>अ. </strong>वाहन सिक्योरिटी फिचर से लैसे होते हैं। इनमें बैट्री मैनेजमेंट सिस्टम होता है। बैट्री में लगे प्रत्येक सेल की मॉनिटरिंग करता है। <br />तेज धूप में वाहन खड़े रहने पर कोई दिक्कत नहीं लेकिन लगातार रनिंग के दौरान परेशानी न हो, इसलिए बैट्री मैनेजमेंट सिस्टम हीट को कूलडाउन करने के लिए सप्लाई बंद कर देता है। <br /><strong>द.</strong> बारिश के दिनों में वायरिंग में पानी चला गया तो?<br /><strong>अ.</strong> वाहन की डिजाइन इस तरह से की गई है कि सभी वायरिंग व बैट्री अंडरकवर होती है। फिर भी संभावित खतरों से बचने के लिए बैट्री चेम्बर को पूरी तरह से कवर किया गया है, जिससे रोड पर जमा पानी भी बैट्री या वायरिंग तक नहीं पहुंच पाता।<br /><strong>द.</strong> बीच रास्ते में वाहन बंद हो जाए तो क्या करें?<br /><strong>अ.</strong> इस समस्या से बचने के लिए कुछ टू-व्हीलर कम्पनियों ने उपभोक्ताओं को रिमूवल बैट्री की सुविधा दी है। इसके तहत चालक बैट्री को निकाल कर किसी भी दुकान या रिश्तेदार के घर चार्ज कर सकता है। <br /><strong>द.</strong> बैट्री की लाइफ कितनी होती है?<br /><strong>अ.</strong> दुपहिया व चारपहिया वाहनों की बैट्री की लाइफ अलग-अलग होती है। टू व्हीलर की बैट्री चार्जिंग व डिस चार्जिंग साइकिल पर निर्भर करती है। 1200 साइकिल के बाद बैट्री की लाइफ कम होने लगती है। यानी, 4 साल तक बैट्री की लाइफ रहती है। वहीं, कार में 1 लाख 60 किमी के बाद या 8 साल चलाने के बाद बैट्री के सेल रिपेयर करने की जरूरत होती है। <br /><strong>द.</strong> टू व्हीलर की बैट्री कितने की आती है?<br /><strong>अ.</strong> इसकी बैट्री 40 से 60 हजार की आती है लेकिन इसकी जरूरत चार साल बाद पड़ती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं ई-कार चालक</strong><br /><strong>अनुभव : </strong>आॅवरआॅल इलेक्ट्रि कार का अनुभव अच्छा रहा। अब तक 1200 किमी गाड़ी चला चुका हूं, परेशानी नहीं हुई। लेकिन, राजस्थान में चार्जिंग स्टेशन की कमी  से बाहर जाने में थोड़ा डर लगता है। हाल ही में कोटा से देहरादून का 800 किमी सफर तय किया था। जिसमें पहली चुनौती दौसा तक पहुंचने तक की थी, क्योंकि, राज्य का पहला चार्जिंग स्टेशन वहीं है। बैट्री फुल होने पर 320 किमी का सफर कर सकता था लेकिन कोटा से दौसा की दूरी 285 किमी थी, वहां पहुंचने पर यदि चार्जिंग स्टेशन पर कोई तकनीकी खामी होती तो परेशानी हो जाती। वहीं, राज्य से बाहर कई स्टेशन पर कहीं चार्जर काम  नहीं कर रहा था तो कुछ जगहों पर बिजली नहीं थी। ऐसे में परेशानी हुई। <br /><strong>सुझाव :</strong> कार कम्पनियों को पेट्रोल पम्प की तरह चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने चाहिए। साथ ही पम्प पर भी इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं, राजस्थान से बाहर के चार्जिंग स्टेशनों का नियमित रखरखाव होना चाहिए। साथ ही स्टेशनों पर सोलर होना चाहिए ताकि, बिजली बंद होने की समस्या न हो।     <strong> -कपिल जैन</strong></p>
<p><strong>अनुभव</strong><strong>: </strong>पेट्रोल-डीजल व सीएनजी की अपेक्षा इलेक्ट्रिक कार का सफर काफी सस्ता है। सिटी में पांच चार्जिंग स्टेशन है लेकिन इसकी जरूरत नहीं पड़ती।, घर पर एक बार बैट्री फुल चार्ज कर लेते हैं।  हां, सिटी से बाहर जाने पर किमी की कैल्कुलेशन करनी पड़ती है। चार्जिंग स्टेशन की कमी महसूस होती है। <br /><strong>सुझाव: </strong>इमरजेंसी में फंसने पर कार चार्ज करने के लिए पावर बैंक की सुविधा कम्पनी को देनी चाहिए। हालांकि, एक कम्पनी ने <br />अपने यूजर के लिए इस तरह की सुविधा दे रखी है।     <strong>- ऊषा  बागरोचा</strong></p>
<p><strong>अनुभव :</strong> गत वर्ष नवम्बर में इलेक्ट्रिक कार खरीदी थी, उस समय सर्विस सेंटर शहर में नहीं होने से कार को ट्रक में लोड करवाकर जयपुर भेजनी पड़ी थी, जो बुरा अनुभव रहा। लेकिन अब सर्विस सेंटर खुलने से राहत है। वहीं, बारां से लौटते वक्त दादाबाड़ी में चार्ज खत्म होने से कार बंद हो गई थी, कम्पनी के टोल फ्री नम्बर पर फोन किया लेकिन डेढ़ घंटे तक कोई टॉचिंग वाहन नहीं आया। ऐसे में परिवार के सदस्य को बुलाकर कार टॉचिंग करवानी पड़ी। इसके अलावा कोई दिक्कत नहीं आई। <br /><strong>सुझाव :</strong> इमरजेंसी में टॉल फ्री नम्बर पर फोन करने पर तुरंत मदद मिलनी चाहिए।  चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता बढ़ाई जाए।    <strong> -राजेश जैन </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वर्ष 2019 से जून 2022 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन कम हुए थे। इस दौरान टू-व्हीलर की संख्या 1220 थी जो वर्तमान में बढ़कर 3 हजार 530 हो गई है। वहीं, कारों का रजिस्ट्रेशन 13 ही हुआ था, जो 5 अप्रेल 2023 तक 62 तक पहुंच गए हैं। इस तरह अब तक शहर में कुल 4 हजार 164 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। <br /><strong>- दिनेश सागर, अतिरिक्त प्रादेशिक परिवहन अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Apr 2023 14:40:48 +0530</pubDate>
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                <title>सीएनजी नहीं अब कोटा को चाहिए ई-बसें </title>
                                    <description><![CDATA[ पेट्रोल-डीजल के महंगे होने से जहां सीएनजी वाहनों का प्रचलन बढ़ा है। उसी तरह से अब  देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन भी तेजी से बढ़ा है। स्मार्ट सिटी कोटा को ग्रीन व क्लीन सिटीे के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से यहां भी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-now-needs-e-buses-not-cng/article-33220"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/cng-nahi-ab-kota-ko-chahiye-e-buses..kota-news-24.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी बन रहे कोटा में जिस तरह से वायु व ध्वनि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उसे कम करने के लिए महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जानी चाहिए। इन बसों के चलने से शहर वासियों को सस्ती पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुविधा मिल सकेगी। कोटा में कई साल पहले नगर निगम पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए नगरीय बसों का संचालन करता था। वर्तमान में कोटा बस सर्विस लिमिटेड के माध्यम से सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। पेट्रोल-डीजल के महंगे होने से जहां सीएनजी वाहनों का प्रचलन बढ़ा है। उसी तरह से अब  देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन भी तेजी से बढ़ा है। दो पहिया व चार पहिया वाहनों के अलावा कई महानगरों में इलेक्ट्रिक बसों का भी संचालन किया जा रहा है। ऐसे में स्मार्ट सिटी कोटा को ग्रीन व क्लीन सिटीे के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से यहां भी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>शहर में 34 सिटी बसों का संचालन</strong><br />शहर में वर्तमान में 34 सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। जिनमें से अधिकतर बसें चल रही हैं। पूर्व में ये बसें कई साल तक वर्कशॉप में ही खड़ी होने से कबाड़ हो रही थी। जिनकी मरम्मत करवाकर इनका संचालन किया जा रहा है। कोटा बस सर्विस लिमिटेड द्वारा पुणे की निजी फर्म के माध्यम से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। ये बसें बड़गांव से खड़े गणेशजी तक और रानपुर से स्टेशन तक और शहर के अन्य मार्गों पर संचालित हो रही हैं। हालांकि इन बसों का किराया भी अन्य नगरीय परिवहन के वाहनों  की तुलना में कम है।  </p>
<p><strong>23 शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन</strong><br />जानकारी के अनुसार देश के 23 बड़े शहरों में करीब 777 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। जिनमें राजस्थान का कोई भी शहर फिलहाल शामिल नहीं है। केरल, लद्दाख, लखनरू, ओड़िसा, राजकोट, दिल्ली, गुजरात व महाराष्ट्र समेत कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। जानकारो के अनुसार इन बसों के संचालन से यहां वायु व ध्वनि प्रदूषण में कमी आई है। क्लीन व ग्रीन सिटी के रूप में इन बसों का संचालन किया जा रहा है। </p>
<p><strong>निगम ने चार साल पहले की थी सीएनजी बसें क्रय करने की घोषणा</strong><br />गौरतलब है कि नगर निगम के पिछले भाजपा बोर्ड ने करीब 4 साल पहले सीएनजी बसें क्रय करने की घोषणा की भी। तत्कालीन महापौर महेश विजय ने वित्तीय वर्ष 2019-20 की बजट उद्घोषणा में नगरीय परिवहन सेवा के लिए कोटा में निगम के माध्यम से 4 सीएनजी बसें क्रय करने की घोषणा की थी। हालांकि उस घोषणा के बाद बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो गया। उसकी बाद एक साल प्रशासक काल रहा। वर्तमान में दोनोंÞ निगमों में कांग्रेस के बोर्ड हैं। जिन्हें भी करीब दो साल से अधिक का समय हो गया है। लेकिन अभी तक सीएनजी बसों के क्रय करने की घोषणा मूर्त रूप नहीं ले सकी है। </p>
<p><strong>वायु व ध्वनि प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति</strong><br />पेट्रोल व डीजल वाहनों से वायु व ध्वनि प्रदूषण अधिक होने पर सीएनजी वाहनों का संचालन बढ़ा है। ऐसे में अब कोटा में भी दो पहिया व चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहन तो चलने  लगे हैं। जबकि इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जाए तो यहां भी ध्वनि व वायु प्रदूषण में कमी होने के साथ ही इससे राहत भी मिल सकती है। साथ ही यह शहर वासियों के लिए अन्य नगरीय परिवहन की तुलना में सस्ती सेवा होगी। </p>
<p>पहले नगर निगम पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बसों का संचालन करता था। जिला कलक्टर की अध्यक्षता में नगर निगम समेत कई विभाग मिलकर कोटा में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी कर सकते हैं। इसके लिए जहां रात में बसें खड़ी होती हैं वहां बैटरी  चार्जिंग पाइंट बना दिए जाएं।। जिससे वहां रातभर में बैटरी चार्ज हो जाए और दिनभर बसें चल सके। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही विकास के नए आयाम के रूप में कोटा में इलेक्ट्रिक बसें चलाकर राज्य में पहल की जा सकती है। <br /><strong>- सुमन श्रृंगी, पूर्व महापौर</strong></p>
<p> जिस तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ा है। साथ ही जब कोटा में सीएनजी व एलपीजी आधारित शमशान बनाए जा सकते हैं तो फिर इलेक् िट्रक बसों का संचालन भी किया जा सकता है। इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ ही लोगों को सस्ती परिवहन सेवा भी मिल सकेगी। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>कई बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। इन बसों के चलने से वायु व ध्वनि प्रदूषण कम होगा। इलेक्ट्रिक होने से इनकी गति भी अधिक नहीं होगी। जिससे हादसों का खतरा भी कम हो जाएगा।  कोटा में भी यदि इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होता है तो यह शहर के लिए लाभदायक ही होगा। <br /><strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>पेट्रोल व डीजल के बढ़ती कीमतों के कारण अब अधिकतर वाहन सीएनजी व इलेक्ट्रिक के चलने लगे हैं। ऐसे में कोटा में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जाए तो बेहतर होगा। शहर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने में सहायक होगा। लम्बे मार्ग पर बड़ी और छोटे मार्ग पर छोटी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा सकती हैं। निगम बोर्ड व स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठकों में भी कोटा में इन बसों के संचालन का सुझाव दिया जाएगा। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Dec 2022 15:48:04 +0530</pubDate>
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                <title>इलेक्ट्रिक वाहन ना के बराबर देते है वायु प्रदूषण </title>
                                    <description><![CDATA[देश और दुनिया में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों के टेक्नोलॉजी की आवश्यकता की जाती रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/electric-vehicles-not-give-air-pollution/article-13786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546536.jpg" alt=""></a><br /><p>देश और दुनिया में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों के टेक्नोलॉजी की आवश्यकता की जाती रही है। यह माना जाता रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहन ना के बराबर वायु प्रदूषण में योगदान देते है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि एक अध्ययन में पता चला है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को दौड़ाकर भी हम अपने देश में सिर्फ 20 फीसदी कार्बन उत्सर्जन कम कर पाएंगे, क्योंकि देश में 70 फीसदी बिजली कोयले से उत्पादित की जा रही है। शोध बताता है कि इलेक्ट्रिक कारों को हम जितना ईको-फ्रेंडली समझते है। दरअसल ये उतनी है नहीं। सोसायटी ऑफ रेयर अर्थ के मुताबिक एक इलेक्ट्रिक कार बनाने में इस्तेमाल होने वाला 57 किलो कच्चा माल (8 किलो लीथियम, 35 किलो निकिल, 14 किलो कोबाल्ट) भूमि से निकालने में 4,275 किलो एसिड कचरा व 57 किलो रेडियो एक्टिव अवशेष उत्पन्न होता है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में हुआ शोध कहता है कि 3300 टन लीथियम कचरे में से 2 फीसदी ही रिसाइकिल हो पाता है, 98 फीसदी प्रदूषण फैलाता है।</p>
<p>लीथियम दुनिया का सबसे हल्का मेटल है। यह बहुत आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ता है। इसी कारण ईवी की बैटरी में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। ग्रीन फ्यूल कहकर लीथियम का महिमामंडन हो रहा है, पर इसे जमीन से निकालने से पर्यावरण तीन गुना ज्यादा जहरीला होता है। ईवी बनाने में 9 टन कार्बन निकलता है, जबकि पेट्रोल में यह 5.6 टन है। ईवी में 13,500 लीटर पानी लगता है, जबकि पेट्रोल कार में यह करीब 4 हजार लीटर है। यदि ईवी को कोयले से बनी बिजली से चार्ज करे, तो डेढ़ लाख कि.मी. चलने पर पेट्रोल कार के मुकाबले 20 फीसदी ही कम कार्बन निकलेगा। भारत में 70 फीसदी बिजली कोयले से ही बन रही है। ऐसे में भारत के सामने परिस्थितियां बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। आज दुनिया का कोई-सा भी देश कोयले से अपनी बिजली उत्पादित करके इलेक्ट्रिक वाहन चलाकर कार्बन उत्सर्जन कम करने का ख्वाब देख रहा है तो स्वाभाविक तौर पर यह ख्वाब अधूरा रहने वाला है। इलेक्ट्रिक वाहनों को उसी देश में चलाया जाना ज्यादा सही है, जहां बिजली कोयले के मुकाबले अक्षय ऊर्जा से ज्यादा उत्पादित की जाती हो, लेकिन मौजूदा समय में हमारे देश में अधिकांश बिजली कोयले से उत्पादित होती है।</p>
<p>ऐसे में हमारे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना ज्यादा फायदेमंद रहने वाला नहीं है। उल्लेखनीय है कि पेट्रोल कार प्रति कि.मी. 125 ग्राम और कोयले से तैयार बिजली से चार्ज होने वाली इलेक्ट्रिक कार प्रति किमी 91 ग्राम कार्बन पैदा करती है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के मुताबिक, यूरोप में ईवी 69 फीसदी कम कार्बन करती है, क्योंकि यहां 60 फीसदी तक बिजली अक्षय ऊर्जा से बनती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुनियाभर की सभी दो सौ करोड़ कारें ईवी में बदल दें तो असीमित एसिड कचरा निकलेगा, जिसे निपटाने के साधन ही नहीं हैं। इस बीच सबसे बड़ा सवाल कि क्या सभी पेट्रोल-डीजल कारों को ईवी में बदलने से प्रदूषण का हल हो जाएगा। एमआईटी एनर्जी इनीशिएटिव के शोधकर्ताओं के मुताबिक, दुनिया में करीब दो सौ करोड़ वाहन हैं। इनमें एक करोड़ ही इलेक्ट्रिक हैं। अगर सभी को ईवी में बदला जाए, तो उन्हें बनाने में जो एसिड कचरा निकलेगा, उसके निस्तारण के पर्याप्त साधन ही नहीं हैं। ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढ़ाकर और निजी कारें घटाकर ही ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम कर सकते हैं। सवाल यह भी कि आखिर दुनिया में पेट्रोल कारों से ईवी सही क्यों मानी जा रही है। किसी देश में बिजली अक्षय ऊर्जा से पनपती है। उस देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाया जाना ज्यादा सही है।</p>
<p>यदि हम भारत में रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या की बात करें तो यहां आंकड़ा 10 लाख 76 हजार 420 है। और वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की यह इंडस्ट्री 150 बिलियन डॉलर यानी साढ़े ग्यारह लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी यानी आज की तुलना में यह इंडस्ट्री 90 गुना बड़ी हो जाएगी। आज इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के पीछे कई सारे फायदे प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं। इसके साथ-साथ हमें अप्रत्यक्ष नुकसान के प्रति चेतने की आवश्यकता है। यह सही है कि पॉल्यूशन से आजादी दिलाने में इन ई-वाहनों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। इसके साथ-साथ बड़ी चुनौती हमारे देश के सामने अक्षय ऊर्जा को लेकर है। भारत सरकार ने भी अक्षय ऊर्जा और ईवी को लेकर लक्ष्य तय किए हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 70 फीसदी कॉमर्शियल कारें, 30 फीसदी निजी कारें, 40 फीसदी टू-व्हीलर व 80 फीसदी थ्री-व्हीलर वाहनों को इलेक्ट्रिक करना है।        </p>
<p><strong>- अली खान</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 11:21:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दावे से अधिक स्पीड होने पर कंपनी पर 100 करोड़ का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[बैटरी चलित इलेक्ट्रिक टू व्हीलर वाहनों में यदि कम्पनी के दावे से अधिक स्पीड मिली, तो वाहन निर्माता कम्पनी पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना और एक साल की सजा तक मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-fine-of-100-crore-on-company-for-high-speed-in-electric-vehicles/article-12896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/grey-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बैटरी चलित इलेक्ट्रिक टू व्हीलर वाहनों में यदि कम्पनी के दावे से अधिक स्पीड मिली, तो वाहन निर्माता कम्पनी पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना और एक साल की सजा तक मिलेगी। वाहन डीलर पर भी एक लाख रुपए और एक साल की जेल हो सकती है। प्रदेश में बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों में कम्पनी दावे से बढ़कर स्पीड,वजन और मोटर क्षमता रखने के मामलों में अब परिवहन विभाग सख्ती दिखाएगा। अभी 25 किमी प्रति घंटा से कम स्पीड वाली गाड़ियां,0.25 किलोवाट से कम क्षमता वाली मोटर और बैटरी को छोड़कर 60 किलो वजन तक गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। विभाग को जानकारी मिली है कि इलेक्ट्रिक गाड़ी निर्माता कम्पनियां रजिस्ट्रेशन से बचने की आड़ में वाहनों की गति, बैटरी क्षमता, बिजली मोटर और गाड़ी का वजन वास्तविक दावे से अधिक रख रही हैं।</p>
<p>खरीदार को गुमराह करके ऐसे वाहन बेचना अपराध होता है। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग की जांच में यदि कम्पनी के घोषित मापदण्डों का उल्लंघन मिला तो वाहन निर्माता कम्पनी पर 100 करोड़ रुपए और एक साल की जेल का सजा का प्रावधान लागू होगा। वाहन डीलर पर भी एक लाख रुपए और एक साल जेल का प्रावधान सख्ती से लागू होगा।</p>
<p>विभागीय अधिकारियों को ऐसे इलेक्ट्रिक वाहनों की वास्तविक गति, बैटरी क्षमता, बिजली मोटर और गाडी वजन की जांच करने के निर्देश दिए हैं। कम्पनी के दोषी पाए जाने पर तय प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- कन्हैयालाल स्वामी, आयुक्त, परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 10:19:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए खुशखबरी..... क्या है खास पढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में अब ई व्हीकल खरीदने पर सरकार दुपहिया वाहनों को 5 से 10 हजार प्रति वाहन एवं तिपहिया वाहनों को 10 से 20 हजार प्रति वाहन अनुदान दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--good-news-for-those-who-buy-electric-vehicles------what-is-special-read/article-10339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ashok1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में अब ई व्हीकल खरीदने पर सरकार दुपहिया वाहनों को 5 से 10 हजार प्रति वाहन एवं तिपहिया वाहनों को 10 से 20 हजार प्रति वाहन अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में ई-व्हीकल्स को मोटर व्हीकल टैक्स के दायरे से भी बाहर रखा गया है। नई नीति में ई-व्हीकल विक्रेताओं को सभी प्रकार का पुनर्भरण 7 दिनों में करने का प्रावधान किया गया है।<br /><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (एसजीएसटी) को मंजूरी दी है। साथ ही, ऐसे वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन देने के लिए प्रस्तावित एकमुश्त अंशदान और एसजीएसटी पुनर्भरण के लिए 40 करोड़ के अतिरिक्त बजट प्रावधान को स्वीकृति दी है। इस नीति के लागू होने से प्रदेश में डीजल-पेट्रोल के वाहनों द्वारा होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।  मुख्यमंत्री ने वर्ष 2019-20 के बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति लाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार सभी प्रकार के ई-व्हीकल्स के संचालन को प्रोत्साहन देने के लिये प्रतिबद्ध है। घोषणा के अनुसार इन वाहनों के क्रेताओं को एसजीएसटी का पुनर्भरण किए जाने के साथ ही, ऐसे वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन देने के लिए एकमुश्त अनुदान के रूप में बैटरी क्षमता अनुसार अनुदान दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 15:35:09 +0530</pubDate>
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                <title>तेल की बढ़ती कीमतों से राहत देते इलेक्ट्रिक वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[तेल की बढ़ती कीमतों के चलते शहरवासियों का के्रज अब इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। बाजार में अब साइकिल से लेकर लग्जरी चौपहिया वाहन भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में आ चुके हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/electric-vehicles-give-relief-from-rising-oil-rate/article-7283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/electric-vehicle-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तेल की बढ़ती कीमतों के चलते शहरवासियों का क्रेज अब इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। बाजार में अब साइकिल से लेकर लग्जरी चौपहिया वाहन भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में आ चुके हैं। जयपुर जिले की बात की जाए तो अब तक 9 हजार 153 दुपहिया और चौपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन हो चुका है। वहीं जिले में करीब 20 हजार ई रिक्शा व गुड्स वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।  सरकार के इन वाहनों पर सब्सीडी बढ़ाने से भी अब लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने लगे हैं। वहीं यदि वाणिज्यिक वाहनों की बात की जाए तो शहर में 20 हजार से अधिक सवारी और मालवाहक ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। कम लागत और प्रदूषण को देखते हुए रोडवेज प्रशासन भी ई-बस लाने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p>जयपुर जिले में इन दिनों इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज बढ़ा है। जिले के सात परिवहन कार्यालयों में अब तक 9 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। <br /><strong>- राजेश वर्मा, आरटीओ जयपुर </strong></p>
<p><strong>ई-साइकिल का पंजीकरण नहीं</strong><br />वैसे तो परिवहन विभाग में दुपहिया, तिपहिया और चौपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण किया जाता है, लेकिन इससे ई-साइकिल को दूर रखा है। शहर में 20 हजार रुपए से लेकर 55 हजार रुपए तक की ई-साइकिल मौजूद हैं। इन्हें इलेक्ट्रिक और मैन्युअल दोनों तरीके से चलाया जा सकता है।</p>
<p><strong>जिले में अब तक पंजीकृत वाहन</strong><br /><strong>परिवहन कार्यालय                रजिस्ट्रेशन दुपहिया    चौपहिया        ई-रिक्शा/ गुड्स</strong><br />झालाना                                        7965              707                  00    <br />जगतपुरा                                          00              142            19570<br />विद्याधर नगर                                  28                 2                  00<br /> शाहपुरा                                           67                 3                  73<br />चौंमू                                                88                 6                  13<br />दूदू                                                  23                 1                  12<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 10:00:32 +0530</pubDate>
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