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                            <item>
                <title>राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई: आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, भ्रामक AI कंटेंट गंभीर विषय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी बदलने पर राजनीतिक आलोचना जायज है, लेकिन फर्जी आवाज और भ्रामक एआई (AI) कंटेंट बेहद गंभीर विषय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hearing-in-delhi-high-court-on-raghav-chadhas-petition-criticism/article-154601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग की थी। राघव चड्ढा का कहना है कि एआई तकनीक के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी नेता के राजनीतिक फैसले की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी बदलने के फैसले पर व्यंग्य या आलोचना को सीधे पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने फर्जी वीडियो,नकली आवाज और भ्रामक एआई कंटेंट को गंभीर विषय बताया। अदालत ने फिलहाल मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इस याचिका में अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के भारत सरकार के आदेश को ट्विटर ने दी कानूनी चुनौती, बताया अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। ट्विटर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने से जुड़े भारत सरकार के कुछ फैसलों को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी ने इस मामले से वाकिफ कुछ सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर ने कुछ अधिकारियों की तरफ से अधिकार के कथित दुरुपयोग को कानूनी चुनौती दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/twitter-challenges-indian-government-s-order-to-remove-objectionable-content--says-it-violates-freedom-of-expression/article-13722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/twitter.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ट्विटर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने से जुड़े भारत सरकार के कुछ फैसलों को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी ने इस मामले से वाकिफ कुछ सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर ने कुछ अधिकारियों की तरफ से अधिकार के कथित दुरुपयोग को कानूनी चुनौती दी है। आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के आदेश की न्यायिक समीक्षा की ये कोशिश इस अमेरिकी कंपनी और भारत सरकार के बीच टकराव में एक और कड़ी साबित होगी।<br /><br /><strong>खालिस्तान समर्थकों पर सरकार ने एक्शन को कहा</strong> <br />दरअसल भारत सरकार ने ट्विटर को उन अकाउंट्स के खिलाफ ऐक्शन लेने को कहा है जो खालिस्तान समर्थक हैं। सरकार ने उन पोस्ट्स पर भी कार्रवाई करने को कहा है जिन्होंने किसानों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी गुमराह करने वाली और झूठी सूचनाएं फैला रहे थे। इसके अलावा कोरोना वायरस महामारी से निपटने को लेकर सरकार की आलोचना करने वाले कुछ ट्वीट्स पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है।<br /><br /><strong>सरकार के आदेश का पूरी तरह नहीं किया पालन</strong><br />भारत सरकार पहले ही कह चुकी है कि ट्विटर समेत बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों ने कंटेंट हटाने के अनुरोध पर कार्रवाई नहीं की है। पिछले महीने आईटी मिनिस्ट्री ने ट्विटर को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह कुछ आदेशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर ने अपने खिलाफ कार्रवाई होने के डर से इस हफ्ते सरकार के आदेशों को पालन किया है।<br /><br /><strong>कानून सम्मत नहीं हैं सरकार के आदेश</strong><br />ट्विटर ने न्यायिक समीक्षा की मांग करते हुए दलील दी है कि कुछ रिमूवल आॅर्डर भारत के आईटी ऐक्ट के प्रावधानों पर खरे नहीं उतरते हैं। हालांकि, ट्विटर ने इसका स्पष्ट तौर पर जिक्र नहीं किया है कि वह किस या किन रिमूवल आॅर्डर की न्यायिक समीक्षा चाहता है। आईटी ऐक्ट के तहत सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा समेत कुछ अन्य वजहों से कुछ कंटेंट तक लोगों की पहुंच खत्म करने का अधिकार है।<br /><br /><strong>ट्विटर ने अभिव्यक्ति की आजादी का दिया हवाला</strong><br />भारत में करीब 2.4 करोड़ यूजर्स वाले ट्विटर ने ये भी दलील दी है कि कुछ आॅर्डर्स में कंटेंट के लेखक को नोटिस तक नहीं दिया गया। इसमें ये भी कहा गया है कि कुछ पोस्ट राजनीतिक दलों के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट किए गए हैं। इनको ब्लॉक करना एक तरह से अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है।<br /><br />पिछले साल की शुरूआत में शुरू हुआ टकराव<br />भारत सरकार और ट्विटर के बीच तब टकराव बढ़ा जब पिछले साल की शुरूआत में माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने सरकार के एक आदेश पर पूरी तरह अमल से इनकार कर दिया था। सरकार ने कुछ अकाउंट्स के खिलाफ ऐक्शन लेने को कहा था जो सरकार-विरोधी किसान आंदोलन के बारे में कथित तौर पर झूठी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 14:10:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>इंटरनेट पर आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड करने पर घर पहुंचेगी पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में अब कोई भी व्यक्ति इंटरनेट के जरिए आपत्तिजनक कंटेंट, वीडियो, फोटो अपलोड कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करता है, तो ऐसे लोगों पर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-will-do-action-at-objectionable-content/article-6433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/cyber.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में अब कोई भी व्यक्ति इंटरनेट के जरिए आपत्तिजनक कंटेंट, वीडियो, फोटो अपलोड कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करता है, तो ऐसे लोगों पर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। पहले पुलिस समझाने के लिए उसके घर जाएगी। उसके परिजनों से बात करेगी। इसके बाद भी यदि संबंधित व्यक्ति ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ साइबर एक्ट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने साइबर सुरक्षा के तहत निगरानी रखना शुरू कर दिया हैं। पुलिस मुख्यालय में एडीजी स्तर के अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p><strong>बच्चों से संबंधित कंटेंट को प्राथमिकता</strong><br />जानकारी के अनुसार इंटरनेट से नाबालिग से संबंधित कंटेंट को डाउनलोड कर बड़ी संख्या में देखा और वायरल किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय ने इसे रोकने और डाउनलोड करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को प्राथमिकता में रखा है। इसके लिए एक ‘साइबर डोम’ तैयार होगा, जिसके जरिए निगरानी रखी जाएगी।</p>
<p><strong>ऐसे मजबूत होगा तंत्र</strong><br />हाल ही में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में हर जिले में साइबर पुलिस स्टेशन खोलने की घोषणा की है, जिसमें थानाप्रभारी डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी होंगे और चार सीआई जांच अधिकारी के तौर पर तैनात होंगे। साथ ही अलग से पुलिसकर्मी भी होंगे। साइबर अपराधों की रोकथाम, डिजिटल इकोसिस्टम की साइबर खतरों से सुरक्षा मजबूत करने और आमजन को जागरूक करने के लिए 50 करोड़ रुपए की लागत से सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी की स्थापना की जाएगी। इस पर पुलिस मुख्यालय ने काम शुरू कर दिया है।</p>
<p>प्रदेश में यदि अब कोई भी इंटरनेट से आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड करेगा, तो उसके खिलाफ पुलिस पहले समझाइश करेगी और यदि फिर भी नहीं माना तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही टीमें निगरानी करना शुरू कर देंगी। <br /><strong>- एमएल लाठर, डीजीपी, राजस्थान</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 09:55:24 +0530</pubDate>
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