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                <title>पहले अंडर पास बनाया, नई सीसी पर कार्य शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर विकास न्यास द्वारा अनंतपुरा चौराहे से स्टेशन तक की रोड को ट्रेफिक लाइट सिग्नल फ्री बनाने के उद्देश्य से गोबरिया बावड़ी चौराहे पर करीब 29 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास का निर्माण कराया गया है। शहर के तीनों अंडरपास में इस अंडरपास को सबसे बेहतर बताया जा रहा था। न्यास द्वारा इस अंडरपास को शुरू किए अधिक समय भी नहीं हुआ कि उससे पहले ही इस अंडरपास में सीपेज का पानी भरने लगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/first-made-underpass--then-dug-new-cc-road--now-build-it-back/article-22124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/a-1-copy8.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास द्वारा शहर में विकास के नाम पर जनता के धन की जिस तरह से बर्बादी की जा रही है उसका एक नमूना हैं गोबरिया बावड़ी का अंडरपास। नव निर्मित अंडरपास की सीसी रोड पर फिर से कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए अंडरपास में दोनों तरफ से आवागमन को बंद किया हुआ है। नगर विकास न्यास द्वारा अनंतपुरा चौराहे से स्टेशन तक की रोड को ट्रेफिक लाइट सिग्नल फ्री बनाने के उद्देश्य से गोबरिया बावड़ी चौराहे पर करीब 29 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास का निर्माण कराया गया है। शहर के तीनों अंडरपास में इस अंडरपास को सबसे बेहतर बताया जा रहा था। न्यास द्वारा इस अंडरपास को शुरू किए अधिक समय भी नहीं हुआ कि उससे पहले ही इस अंडरपास में सीपेज का पानी भरने लगा। न्यास अधिकारियों व इंजीनियरों द्वारा काफी प्रयास के बाद भी सीपेज का पानी आना नहीं रूका। आखिरकार न्यास अधिकारियों को अंडरपास के दोनों तरफ का रास्ता बंद करना पड़ा। </p>
<p><strong>मजबूती के नाम परबनाई सीसी सड़क</strong><br />हालत यह है कि अंडरपास में मजबूती के लिए बनाई गई सीसी रोड को ड्रिल मशीनों से खोदा जा रहा है। दोनों तरफ से आधे से अधिक रोड को खोद दिया गया है। बुधवार को भी सीसी रोड को खोदने का काम किया जा रहा था। जिससे रोड के नीचे का हिस्सा नजर आने लगा। वहीं सीसी रोड में काम लिए गए सरिये भी मौके पर पड़े निर्माण की गुणवत्ता पर आंसू बहा रहे हैं। कुछ समय पहले तक तो सीपेज के समाधान के लिए सीसी रोड को जोड़ को ही खोदा गया था। जिसे जाली लगाकर सही करने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन समस्या गम्भीर व बड़ी होने से उसका समाधान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में फिर से दोनों तरफ की पूरी सड़कों को खोदा जा रहा है। मौके पर खुदी सड़क की हालत से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनता के करोड़ों रुपए को किस तरह से ट्रेफिक सुविधा के नाम पर बर्बाद किया गया है। </p>
<p><strong>नहीं आई इंजीनियरों की तकनीक काम</strong><br />न्यास द्वारा अंडरपास का निर्माण तो कराया गया। लेकिन उसके निर्माण में न्यास इंजीनियर हो या संवेदक के इंजीनियर किसी की इंजिनियरिंग काम  काम आई। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जनता को अंडरपास की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। तकनीकी खामी मानकर न्यास अधिकारियों द्वारा पल्ला झाड़ा जा रहा है। </p>
<p><strong>साइड रोड से निकल रहे वाहन</strong><br />अंडरपास से होकर गुजरने के रास्ते को दोनों तरफ से बंद किया हुआ है। अंडरपास की सड़क खोदने का काम किया जा रहा है। ऐसे में एरोडम से अनंतपुरा जाने और अनंतपुरा से एरोड्राम की तरफ जाने वाले वाहन साइड की रोड से ही निकल रहे हैं। ऐसे में जो भी वाहन वहां से गुजर रहा है वह न्यास अधिकारियों से लेकर इंजीनियरों तक को भला-बुरा कहते हुए ही सुना जा सकता है। </p>
<p><strong>यह जनता के पैसों की बर्बादी है</strong><br />सवाल है कि यूआईटी क ेइंजीनियर और संवेदकों के इंजीनियर क्या कर रहे हैं।  29 करोड़ रुपए की लागत से इस अंडरपास का निर्माण कराया गया। जिसमें जनता की सुविधा के लिए सड़क पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अंडरपास में पानी भरेगा यह सिम्पल बात है। अंडरपास बना रहे हैं तो पानी निकासी का इंतजाम पहले करना चाहिए। लेकिन इंजीनियर अंधाधुंध काम करा रहे हैं। ऐसे गैर जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई कर  सड़क खुदाई के पैसों के साथ इस कार्य के दुबारा निर्माण का सारा पैसा इन लोगों से वसूल करना चाहिए। <br /><strong>- अवधेश सिंह, निवासी दादाबाड़ी </strong></p>
<p><strong>यह किसका विकास</strong><br />यह शहर का विकास नहीं इस कार्य की जिम्मेदारी लेने वाले लोगों का विकास चल रहा है। चार दीवारी का सौन्दर्यीकरण हो या लाइटिंग, पौधों की सजावट पर अधिक फोकस रखा गया।  सड़क को फिर से खोदना पड़ रहा है।  नए सिरे से सीसी रोड बनाने में जो समय लगेगा उतने समय तक और जनता को अंडरपास की सुविधा का लाभ नहीं मिल पाएगा। धन की बर्बादी अलग हो रही है। <br /><strong>- इश्हाक मोहम्मद, मिस्त्री निवासी प्रेम नगर </strong></p>
<p><strong>दूसरे अंडर पास में भी है खामी</strong><br />झालावाड रोड से निकलने वाले अधिकतर वाहन चालकों का कहना है कि जिस तरह की हालत गोबरिया बावड़ी अंडरपास की हुई है। उसी तरह की हालत कुछ समय बाद अन्य अंडरपास की भी हो सकती है। अंडरपास में सीपेज का पानी आने से रोकना मुश्किल है। न्यास अधिकारियों ने अंडरपास की सजावट पर अधिक ध्यान दिया। जबकि सड़क पर नहीं। साथ ही काम को देखकर इसमें भ्रष्टाचार की झलक नजर आ रही है।<br /><strong>- कैलाश शर्मा, महावीर नगर निवासी </strong></p>
<p><strong>जनता के हित का नहीं रखा ध्यान</strong><br />न्यास शहर के विकास की सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी है। यदि वही सही ढंग से काम नहीं करेगी तो जनता को लाभ कैसे मिल पाएगा। गोबरिया बावड़ी क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यूआईटी ने अंडरपास निर्माण के लिए क्षेत्र के कई घरों व दुकानदारों को यहां से उजाड़ दिया। साथ ही काम भी सही ढंग से नहीं किया। <br /><strong>- रफीक अहमद, गोबरिया बावड़ी निवासी </strong></p>
<p><strong>न्यास सचिव से नहीं हो सकी बात</strong><br />गोबरिया बावड़ी अंडरपास की सड़क को फिर से खोदने और इसके कब तक ठीेक  होने के संबंध में नगर विकास न्यास के सचिव राजेश जोशी से बात करना चाहा। लेकिन दिन में वे कोर्ट की कार्रवाई में और फिर बैठकों में व्यस्त रहे। शाम के समय उनका मोबाइल स्विच आॅफ हो गया। जिससे इस संबंध में उनसे बात नहीं हो सकी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Sep 2022 14:38:35 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा समेत तीन रेल मंडलों के 73 स्टेशनों पर बनेंगे छोटे पार्क</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रेन में यात्रा करते वक्त अब यात्रियों को ट्रैक की तरफ से खुशबू आएगी। इसके लिए रेलवे द्वारा ट्रैक किनारे पीपीपी मोड पर सुगंधित पौधे और खुशबूदार घास लगवाई जाएगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/small-parks-will-be-built-at-73-stations-of-three-railway-divisions-including-kota/article-19705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/kota-sahit-3-rail-mandals-73-stations-park..kota-news-20.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । ट्रेन में यात्रा करते वक्त अब यात्रियों को ट्रैक की तरफ से खुशबू आएगी। इसके लिए रेलवे द्वारा ट्रैक किनारे पीपीपी मोड पर सुगंधित पौधे और खुशबूदार घास लगवाई जाएगी। पहले चरण में पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ स्टेशनों के आसपास छोटे पार्क तैयार किए जाएंगे, जिनमें खुशबूदार पौधे व घास लगाई जाएगी। कोटा, भोपाल सहित रेल मंडल के 22 स्टेशनों और जोन के तीनों रेल मंडलों के 73 स्टेशन प्रोजेक्ट में शामिल किए गए हैं। इनके तहत 1200 किमी क्षेत्र को इस प्रोजेक्ट के तहत कवर किया जाएगा। 16 जोन में 15 अगस्त से शुरू हुआ काम 16 जोन में अगस्त अंतिम पखवाडे के बाद से प्रोजेक्ट की शुरूआत करने योजना है। भोपाल, जबलपुर और कोटा रेल मंडलों में ट्रैक के नजदीक लाखों एकड़ जमीन मौजूद है। इनका उपयोग नहीं हो रहा है। प्रवक्ता राहुल जयपुरियार ने बताया कि रेल मंत्रालय की हरित पहल के तहत सभी 16 जोन के तहत आने वाले रेल मंडलों में प्रोजेक्ट की शुरुआत 15 अगस्त करने की योजना है। पर्यावरण संतुलन करने की कर रहे पहल ट्रैक के आसपास पौधे लगाने से पर्यावरण संतुलन में मदद मिलेगी। जबलपुर मंडल में कटनी क्षेत्र में ट्रैक किनारे पौधे लगाने का काम पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जा रहा है। रेलवे लाइन के कुछ हिस्सों का चयन कर लिया गया है। ये पौधे लगाए जाएंगे रेलवे द्वारा सुगंधित और खुशबूदार घास, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटी और सजावटी पौधों को भी ट्रैक के किनारे लगवाया जाएगा। साथ ही रंग-बिरंगे फूलदार पौधे भी कुछ स्थानों पर स्टेशनों के नजदीक लगाए जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पौधों को ट्रैक के आसपास इस तरह से लगाएंगे कि तेज हवा, बारिश के दौरान वे टूट भी जाएं तो ट्रैक पर न पहुंचे। टूटकर गिरने के बाद भी रेल यातायात बाधित न हो और यात्रियों को परेशान नहीं होना पड़े। ट्रैक के आसपास से खुशबू और सुगंध का अहसास लगातार हो सके, इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर ये पौधे लगाए जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Aug 2022 15:58:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुरातत्व विभाग बनाएगा सिक्का संग्रहालय</title>
                                    <description><![CDATA[पुरातत्व विभाग ने ग्राम जानकीपुरा, तहसील मालपुरा, ज़िला टोंक से प्राप्त कुषाणक़ालीन एवं गुप्तक़ालीन 212 स्वर्ण मुद्राओं के साथ ही ग्राम पचेवर, तहसील मालपुरा, टोंक से प्राप्त 120 ब्रिटिशक़ालीन रजत मुद्राओं को लेने का कार्य पूरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-archeology-department-will-build-coin-museum/article-11647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/new.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p>जयपुर। पुरातत्व विभाग ने ग्राम जानकीपुरा, तहसील मालपुरा, ज़िला टोंक से प्राप्त कुषाणक़ालीन एवं गुप्तक़ालीन 212 स्वर्ण मुद्राओं के साथ ही ग्राम पचेवर, तहसील मालपुरा, टोंक से प्राप्त 120 ब्रिटिशक़ालीन रजत मुद्राओं को लेने का कार्य पूरा कर लिया है। इन सिक्कों में कुषाणक़ालीन एवं गुप्तक़ालीन शासको के सिक्के हैं। गुप्तक़ालीन शासको में समुद्रगुप्त (315 ई.- 375 ई), चंद्रगुप्त द्वितीय ( 380 ई. - 415 ई.) एवं कुमारगुप्त प्रथम ( 415 ई. - 455 ई.) के सिक्के मुख्य है। कुषाणक़ालीन सिक्कों का वजन लगभग 8 ग्राम एवं व्यास 20-22 मि.मी. है जबकि गुप्तक़ालीन स्वर्ण सिक्कों का वजन 7.5 ग्राम से लेकर 8.25 ग्राम है। पुरातत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इससे पूर्व राजस्थान के बयाना (भरतपुर) से गुप्तक़ालीन स्वर्ण मुद्राओं का सबसे बड़ा दफीना 17 फ़रवरी, 1946 को प्राप्त हुआ था, जिसमें कुल 1821 स्वर्ण मुद्राए प्राप्त हुई थी।<br /><br />इनका ये है कहना……<br /><br />वर्तमान में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के विभिन्न राजकीय संग्रहालयों में विभिन्न कालो के धातु से निर्मित दो लाख से भी अधिक सिक्के संग्रहित हैं। इस दुर्लभ सिक्कों एवं उनसे सम्बंधित मुद्रा सामग्री से एक सिंगल थीम आधरित सिक्का संग्रहालय बनाने जाने पर विचार किया जा रहा है। जो पर्यटकों, इतिहासकारों एवं शोधार्थियों के लिए लाभकारी  रहेगा।- डॉ.महेंद्र खड़गावत, निदेशक, पुरातत्व विभाग<br /><br />ग्राम जानकीपुरा ज़िला टोंक से प्राप्त कुषाणक़ालीन एवं गुप्तक़ालीन सिक्कों की प्राप्ति विभाग ने की है। लगभग 1800 साल पुराने ये सिक्के इतिहासकारों, पुरातत्वविज्ञानियो, शोधार्थियों के अध्ययन, अध्यापन के साथ ही इतिहास की कड़ियों को जोड़ने में सहायक सिद्ध होंगे।- प्रिंस कुमार उप्पल, मुद्राशास्त्री, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग<br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 15:39:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहीद के नाम खेल स्टेडियम व सड़क बनाने की मांग को लेकर ग्रामीण लामबंद</title>
                                    <description><![CDATA[ जिले के ग्राम घरड़ाना खुर्द में सड़क संघर्ष समिति व तीन गांवों के ग्रामीणों का संयुक्त तत्वावधान में शहीद के नाम खेल स्टेडियम व क्षतिग्रस्त सड़क को दुबारा बनाने के मांग को लेकर गुरुवार को तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना रहा जारी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/villagers-mobilized-to-demand-construction-of-sports-stadium-and-road/article-11161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/2jhun5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>झुंझुनूं।</strong> जिले के ग्राम घरड़ाना खुर्द में सड़क संघर्ष समिति व तीन गांवों के ग्रामीणों का संयुक्त तत्वावधान में शहीद के नाम खेल स्टेडियम व क्षतिग्रस्त सड़क को दुबारा बनाने के मांग को लेकर गुरुवार को तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। तीसरे दिन  महिलाओं ने भी शामिल होकर धरने का समर्थन करते हुए प्रशासन से जल्द से सड़क व स्टेडियम बनाने की मांग की। संघर्ष समिति व ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते हुए नारेबाजी कर टूटी सड़क के गड्डो में मिट्टी डालकर विरोध जताया। समिति के संयोजक संदीप राव ने बताया कि टूटी सड़क को बनाने का काम सरकार व पीडब्लूडी विभाग का काम है लेकिन ग्रामीण परेशान होकर धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>बार-बार अवगत कराने के बाद भी नहीं हुआ समाधान</strong></span></p>
<p> ग्रामीणों व समिति के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन व सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए टूटी सड़क के गड्डों में मिट्टी डालकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ  नारेबाजी कर विरोध जताया। सरपंच उम्मेद सिंह राव ने कहा कि ग्रामीण भीषण गर्मी में शहीद के नाम से खेल स्टेडियम व क्षतिग्रस्त सड़क बनाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे है लेकिन प्रशासन की आंख तक नहीं खुल रही है। इस संबंध में कई बार अधिकारियों को अवगत करवा चुके है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन की चेतावनी</strong> </span></p>
<p>अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव रामचंद्र कुलहरी ने आंदोलन का समर्थन कर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 9 साल से सड़क गड्ढों में तब्दील होकर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। पिछली भाजपा सरकार व वर्तमान कांग्रेस सरकार के किसी भी जन प्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। संघर्ष समिति व ग्रामीणों ने शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी। इस मौके पर सरपंच उम्मेद राव, सरजीत राव, पूर्व सरपंच निहाल सिंह, प्रीतम राव, राजेन्द्र राव, रमेश कुमार घरड़ाना कलां, हवासिंह, धर्मपाल, अनूप, सियाराम, रामसिंह, रणदीप, रोहिताश, आनंदपाल, उमराव सिंह, अंकित, संजय, विधाधर, उम्मेद सिंह हवलदार, हवा सिंह, राजेन्द्र पूनिया सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झुंझुनूं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 14:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पांच साल से आशियाने का इंतजार कर रहे 300 परिवार </title>
                                    <description><![CDATA[  नगर विकास न्यास एक तरफ तो बिल्डरों व धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा है। उन्हें डेढ़ साल में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए अपनी ही एक आवासीय योजना को पांच साल में भी अमली जामा नहीं पहना सका है। न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योजना में करीब 300 परिवार आशियाने का पांच साल से इंतजार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/300-families-waiting-for-shelter-for-five-years/article-9869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546545465.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास एक तरफ तो बिल्डरों व धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा है। उन्हें डेढ़ साल में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए अपनी ही एक आवासीय योजना को पांच साल में भी अमली जामा नहीं पहना सका है। न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योजना में करीब 300 परिवार आशियाने का पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में नगर विकास  न्यास द्वारा देवली अरब रोड़ पर पार्थ अपार्टमेंट नाम से आवासीय योजना लांच की गई थी।  मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत  वर्ष 2015 में बनी इस योजना में आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग व अल्प आय वर्ग के परिवारों को आवास उपलब्ध करवाने थे। न्यास की इस योजना में बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किए। न्यास ने लॉटरी भी निकाल दी। लेकिन उसके बाद न्यास के अधिकारियों ने उस योजना की तरफ देखा तक नहीं। जबकि जिन लोगों के नाम लॉटरी में निकले थे वे न्यास कार्यालय व अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर थक गए। लेकिन न्यास अधिकारी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही देते रहे, मकान नहीं दे सके। <br /><br /><strong>296 आवास बनने हैं योजना में</strong><br />न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योेजना में 296 मकान बनने हैं। इनमें से आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 216 और अल्प आय वर्ग के लिए 80 मकान शामिल हैं। इस योजना में जी प्लस 3 योजना के तहत मकान बनने हैं। <br /><br /><strong>वर्ष 2017 में लांच की थी योजना</strong><br />नगर विकास न्यास के तत्कालीन चैयरमेन राम कुमार मेहता व सचिव मोहनलाल यादव के समय में वर्ष 2017 में यह योजना लांच की गई थी। 17 जनवरी 2017 को योजना में आवेदन जमा करना शुरू किया गया था। जिसमें आवेदन जमा करवाने की अंतिम तिथि 18 फरवरी थी। बड़ी संख्या में लोगों ने 300 रुपए में आवेदन पुस्तिका खरीदी थी। दो तरह के आवासों में से छोटे आवासों के लिए दो हजार रुपए व बड़े आवासों के लिए साढ़े तीन हजार रुपए प्रशासनिक शुल्क के रूप में भी जमा किए थे। साथ ही छोटे आवासों के 10 हजार व बड़े आवासों के 20 हजार रुपए  भी जमा कराए थे। गरीबों की लाखों रुपए की राशि से यूआईटी ने कमाई कर ली।  लेकिन मकानों का इन्तजार बढ़ता ही गया। <br /><br /><strong>जमीन के विवाद ने अटकायी योजना</strong><br />सूत्रों के द्वारा नगर विकास न्यास ने जिस जमीन पर यह योजना लांच की थी। उस जमीन पर किसी एक समाज व पंथ विशेष की आपत्ति होने से विवाद चल रहा था। जिससे यह योजना अटकी हुई थी। न्यास की गलती की सजा जनता को भुगतनी पड़ रही है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि जिस समय योजना लांच की गई थी उस समय भाजपा की सरकार थी। लेकिन वर्ष 2018 में सरकार बदल कर कांग्रेस की आ गई। न्यास अध्यक्ष भी बदल गए। इस कारण से वर्तमन सरकार व न्यास अधिकारियों ने भी उस योजना में रूचि नहीं दिखाई। लेकिन मकानों का इंतजार करने वालों ने जब बार-बार न्यास अधिकारियों पर दबाव बनाया तब जाकर अब न्यास अधिकारी जागे। उन्होंने कुछ समय पहले ही आवंटन पत्र जारी किए हैं। साथ ही राशि जमा करवाना शुरू किया है। <br /><br /><strong>अभी भी खाली जमीन, निर्माण तक शुरू नहीं</strong><br />न्यास की यह योजना देवली अरब रोड पर मेन रोड के पास है। लेकिन पांच साल बीतने के बाद अभी तक भी वहां सिर्फ खाली जमीन ही है। उस जगह पर झाड़ झंखाडं उगे हुए हैं। सिर्फ चार दीवारी बनी हुई है। कुछ नींव खुदी हुई है व योजना का बोर्ड लगा हुआ है। साथ ही उस जमीन पर गोबर के छाने थापे जा रहे हैं। न्यास द्वारा जिस बिल्डर को आवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया है। उसने वहां अभी तक भी काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में यदि अब भी काम शुरू होगा तो जी प्लस 3 के 296 मकान बनने में करीब दो साल से अधिक का समय लगेगा। ऐसे में आवंटियों को अभी करीब दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है। <br /><br /><strong>पीड़ितों की जुबानी</strong><br />पार्थ अपार्टमेंट योजना में आवेदन करने वाले बालाजी नगर निवासी अमित जैन ने बताया कि उन्हें मकान की जरूरत है। न्यास की योजना में सस्ते मकान के लालच में 15 फरवरी 2017 को आवेदन के साथ 23 हजार 500 रुपए जमा करवाए थे। इसमें से 3500 रुपए प्रशासनिक शुल्क के हैं जो वापस नहीं मिलेंगे। जबकि 20 हजार रुपए मकान की लागत में शामिल हो जाएंगे। न्यास ने 5 साल से मकान नहीं दिया। न्यास कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर  काट-काट कर थक गए । कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कुछ समय पहले ही योजना के आवंटन पत्र जारी किए। दो किश्तों में 75-75 हजार रुपए के हिसाब से 1.50 लाख रुपए भी जमा करवा चुके हैं। बाकी रकम भी किश्तों में देनी है। जैन ने बताया कि अभी भी मकान की जगह खाली जमीन  है। स्वयं के मकान के इंतजार में 6 हजार रुपए महीना किराए के मकान में परिवार के साथ रह रहा हूं। नयापुरा निवासी सुरेश अग्रवाल व महावीर नगर निवासी राजेश सोनी ने बताया कि वे कई बार देवली अरब रोड पर जगह देखकर आ चुके हैं। वहां अभी तक तो काम भी शुरू नहीं हुआ है। मकान बनने में न जाने कितने साल लगेंगे।<br /><br /><strong>नहीं दिया जवाब</strong><br />योजना के बारे में जानने के लिए न्यास के विशेषाधिकारी आर.डी मीना व न्यास सचिव राजेश जोशी को दो से तीन बार फोन किए लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किए। वाट्सअप पर मैसेज किए तो उनका भी जवाब नहीं दिया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />लैंड डिस्प्यूट के कारण योजना में मकान बनाने में देरी हुई है। अब कुछ समय पहले ही वह मामला सुलझा है। बिल्डर को मकान बनाने का कार्यादेश जारी कर दिया है। साथ ही लॉटरी में निकले आवंटियों को आवंटन पत्र भी कुछ समय पहले ही जारी किए हैं। आवंटन पत्र मिलने के बाद लोगों ने राशि जमा करवाना शुरू कर दिया है। योजना में मकान बनने में करीब दो साल का समय लगेगा। <br /><strong>- आर.के. राठौर, अधीक्षण अभियंता, नगर विकास न्यास आवासीय योजना</strong><br /><br /><strong>यह थी आवासों की लागत</strong><br />न्यास द्वारा उस समय लांच की गई पार्थ अपार्टमेंट योजना में आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 4.20 लाख रुपए में और अल्प आय वर्ग के लिए 6.30 लाख रुपए आवास की लागत निर्धारित की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 15:38:37 +0530</pubDate>
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                <title>पंजाब में मान</title>
                                    <description><![CDATA[होली दहन के एक दिन पहले 16 मार्च को पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने के बाद शनिवार को अपने मंत्रिमण्डल का गठन भी कर लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/mann-build-of-cabinet-after-oath/article-6439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/man-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>होली दहन के एक दिन पहले 16 मार्च को पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने के बाद अपने मंत्रिमण्डल का गठन भी कर लिया। मंत्रिमण्डल में दस मंत्रियों को शामिल किया गया है। मान ने शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले भाषण में जनता को सभी चुनावी वादों को पूरा करने का भरोसा दिलाया। आम आदमी पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कई बड़े-बड़े वादे कर रखे हैं। हालांकि यह सब जानते हैं कि इन वादों के मोर्चे पर एक साथ काम करना किसी भी सरकार के लिए आसानी नहीं, क्योंकि समृद्ध राज्य की हालत अभी बदहाल है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नशाखोरी से निजात दिलाना और किसानों की समस्याओं का हल निकालने में वक्त लग सकता है। मान मंत्रिमण्डल की पहली बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य में 25 हजार सरकारी नियुक्तियां दी जाएंगी। लेकिन बेरोजगारी के मोर्चे पर यह एक छोटा सा ही कदम है। लेकिन पंजाब की जनता ने इस बार आप पर पूरा भरोसा जताया है और पार्टी को छप्पर फाड़ जनादेश दिया है। इससे जाहिर होता है कि लोगों की अपेक्षाएं काफी हैं।</p>
<p>माना कि मान सरकार के लिए चुनौतियां तो जरूर है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जनता की अपेक्षाएं पूरी कर पाना असंभव है। सरकार चाहे घोषित सारे वादे पूरे न कर पाएं, लेकिन कुछ वादे भी अगर पूरे होते हैं तो काफी होगा। पंजाब की जनता लंबे समय से राजनीतिक दलों के छल का शिकार होती रही हैं। पूर्ववर्ती सरकारें जनता के हितों की उपेक्षाएं करती रही तभी जनता ने बड़े बदलाव का फैसला लिया। दिल्ली से बाहर आम आदमी पार्टी की पहली सरकार से अब उम्मीद की जा रही है कि जैसे केजरीवाल सरकार ने दिल्ली को बदलाव की राह दिखाई, पंजाब भी उसी लीक पर चलेगा। केजरीवाल की तरह ही मान पंजाब में काम करके दिखाएंगे। अनेकानेक चुनौतियों के साथ मान के लिए बड़ी चुनौती यह भी है कि दो बार सांसद बनने के बावजूद मान के पास सरकार चलाने का अनुभव नहीं है। दिल्ली के मुकाबले बड़े व राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक माने जाने वाले पंजाब के लोगों को केवल स्कूल-कॉलेजों व अस्पतालों के सुधार मात्र से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। राज्य के सामने भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है। एक सर्वे में राज्य को देश के भ्रष्ट राज्यों में छठे स्थान पर रखा गया है। इस पर अंकुश बड़ी चुनौती है। फिर नशे का कारोबार व्यापक है। खेती किसानी के राज्य में किसानों की समस्याओं का अंबार लगा है। अब देखना है कि मान किस तरह और किस हद तक चुनौतियों का सामना कर पाता है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 10:22:44 +0530</pubDate>
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