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                <title>water conservation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water conservation RSS Feed</description>
                
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                <title>पीएम मोदी ने पेश किए विकसित भारत 2047 के लिए 9 संकल्प : जनता को संभालनी होगी कमान, सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिनिधित्व का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मांड्या में 'विकसित भारत' के लिए नौ संकल्पों का मंत्र दिया। उन्होंने जल संरक्षण, 'एक पेड़ मां के नाम', स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। पीएम ने स्वस्थ भारत के लिए प्राकृतिक खेती और योग पर जोर देते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-presented-9-resolutions-for-developed-india-2047-people/article-150541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi9.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'विकसित भारत के लिए नौ संकल्प' लेने का अनुरोध किया और कहा कि यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित भारत 2047 बनाने की यात्रा में तेजी ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरी मठ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल क्षेत्रीय सीमाओं से परे है और सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी आह्वान का प्रतिनिधित्व करती है।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की व्यक्तिगत आदतें और दैनिक विकल्प देश के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा, "यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित कर्नाटक और विकसित भारत की ओर प्रगति को तेज कर सकते हैं।" विकास को केवल सरकार संचालित प्रयास के बजाय जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि परिवर्तन की शुरुआत रोजमर्रा के व्यवहार के स्तर से होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने नदी प्रणालियों पर निर्भर क्षेत्रों में जल संरक्षण को प्रमुख प्राथमिकता बताया, और नागरिकों से सामूहिक प्रतिज्ञा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम सब जल संरक्षण और इसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लें।" पर्यावरण स्थिरता पर प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आइए हम अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाएं और धरती मां की रक्षा करें।"</p>
<p>स्वच्छता को नागरिक कर्तव्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थलों, गांवों और शहरों में साफ-सफाई बनाये रखना साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "चाहे वह धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर, स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।" आर्थिक आत्मनिर्भरता के संबंध में, प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और भारतीय उद्योगों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' दृष्टिकोण को आर्थिक सशक्तीकरण के आधार बताते हुए कहा, "आइए हम भारतीय उत्पादों को अपनाएं और अपने उद्योगों को मजबूत करें।"</p>
<p>उन्होंने राष्ट्रीय जागरूकता और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देते हुए नागरिकों से देश भर में यात्रा करने और इसकी विविधता को जानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम पूरे भारत की यात्रा करें और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देगा। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और पोषण पर मोटे अनाज को अपने आहार में शामिल करने पर जोर देते इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बढ़ता मोटापा बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गयी है। इसके साथ ही नागरिकों से तेल की खपत में 10 फीसदी की कमी का आग्रह किया। कृषि को लेकर उन्होंने किसानों से कहा, "आइए हम रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।"</p>
<p>उन्होंने शारीरिक फिटनेस पर और जोर देते हुए कहा, "योग, खेल और फिटनेस हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।" उन्होने स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय प्राथमिकता में स्थापित किये जाने की बात कही। इस मौके पर उन्होंने जनसेवा की मजबूत भावना का आह्वान करते हुए कहा, "जरूरतमंदों की सेवा समाज को मजबूत करती है और जीवन को बड़ा उद्देश्य देती है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नौ संकल्प एक व्यापक जन-भागीदारी वाले शासन मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां नागरिक स्तर पर व्यवहारिक परिवर्तन सामूहिक रूप से राष्ट्रीय परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामूहिक प्रतिबद्धता "विकसित कर्नाटक और विकसित भारत" के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।</p>
<p>इससे पहले दिन में, उन्होंने मांड्या जिले के ऐतिहासिक आदिचुंचनगिरी मठ परिसर में 'श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर' का उद्घाटन किया, जो दिवंगत संत श्री बालगांगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित एक नया आध्यात्मिक स्थल है। आदिचुंचनगिरी की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच स्थित यह 'गद्दीगे' स्मारक उस विरासत के प्रति श्रद्धांजलि है, जो दशकों से मठ की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p>शैव मत की सदियों पुरानी नाथ परंपरा के तहत निर्मित इस मंदिर को उस गुरु-शिष्य परंपरा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है जो इस संस्थान की आध्यात्मिक शृंखला को परिभाषित करती है। जैसे ही पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजे, बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र हुए, जिससे यह उद्घाटन भक्ति, विरासत और जन-भागीदारी के संगम में बदल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:52:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने की मछुआरा समुदाय की सराहना: बताया आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव, एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर जनभागीदारी की ताकत से बना विश्व रिकॉर्ड, जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मछुआरों को 'समुद्र का योद्धा' बताते हुए उनके आर्थिक योगदान को सराहा। उन्होंने वाराणसी में 2.51 लाख पौधे रोपने के विश्व रिकॉर्ड और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान की प्रशंसा की। पीएम ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया और छत्तीसगढ़ व त्रिपुरा के सफल मॉडलों का उदाहरण साझा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-praised-the-fishermen-community-said-that-it-is/article-148334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के मछुआरा समुदाय की सराहना करते हुए कहा है कि मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में कहा कि मछुआरे सुबह होने से पहले समुद्र में उतरकर न सिर्फ अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बंदरगाहों के विकास, बीमा योजनाओं और तकनीकी सहायता के जरिए मछुआरों का जीवन आसान बनाया जा रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले मछुआरों के लिए मौसम की जानकारी बेहद अहम होती है, इसलिए तकनीक के माध्यम से उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन प्रयासों से देश का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से समृद्ध हो रहा है और इसमें नवाचार भी बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल (सीवीड) के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं, जिससे मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भूयान का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू कर कुछ ही वर्षों में सफल व्यवसाय में बदल दिया। उनकी सफलता आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।</p>
<p>पीएम मोदी ने लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जिन्होंने मत्स्य प्रसंस्करण इकाई (फिश प्रोसेसिंग यूनिट) के साथ कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर अपने कारोबार को नई ऊंचाई दी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती छोड़कर फिश फार्मिंग अपनाई और अब बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि देशभर में ऐसे प्रयास प्रेरणादायक हैं और फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों का योगदान भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम और नवाचार देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में जनभागीदारी से एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की सराहना करते हुये बदलाव के लिये समाज की भागीदारी को सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की नींव बन जाते हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए एक विशेष अभियान का जिक्र किया, जहां मात्र एक घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए। इस उपलब्धि के साथ एक नया गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें हजारों लोगों ने एक साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भाग लेने वालों में छात्र, जवान , स्वयंसेवी संगठन और विभिन्न संस्थाओं ने अपना योगदान दिया। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया, जो जनभागीदारी की एक प्रेरक मिसाल है। पीएम मोदी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट कर सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संचय को आवश्यक बताते हुए कहा है कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और जल संकट से बचने के लिए देशवासियों को जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की आवश्यकता है। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132वीं कड़ी में कहा कि पिछले 11 वर्षों में 'जल संचय अभियान' ने लोगों को काफी जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश भर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संचय ढांचे बनाए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, तो कहीं वर्षा जल को सहेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। 'अमृत सरोवर' अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इनकी साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। मैं इस बारे में आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है।"</p>
<p>उन्होंने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव, जो लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, कभी गंभीर जल संकट से जूझ रहा था। गर्मियों में लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बाद में ग्रामीणों ने वर्षा जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। आज इस गाँव के लगभग हर घर में वर्षा जल संचयन के उपाय किए गए हैं और यह गाँव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा, "इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहाँ के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाए, जिससे वर्षा का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गाँव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है। गाँव के 400 परिवारों ने अपने घरों में सोखता गड्ढे बनाए और जल संरक्षण को जन-आंदोलन बना दिया। इससे गाँव का भूजल स्तर बढ़ा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ भी काफी कम हो गई हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 17:09:03 +0530</pubDate>
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                <title>संसद में सग्राम: शिवराज सिंह चौहान का पलटवार, बोले-मोदी सरकार की पहलों से खेती में शुष्क क्षेत्रों का योगदान 29 से बढ़ कर 39 प्रतिशत हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में बताया कि मोदी सरकार के प्रयासों से शुष्क और वर्षा-निर्भर क्षेत्रों का खाद्यान्न योगदान 29% से बढ़कर 39% हो गया है। जलवायु-अनुकूल 3,236 किस्मों के विकास और जल संरक्षण तकनीकों से किसानों की आय में प्रति एकड़ ₹6,000 की वृद्धि हुई है। पंजाब के पराली प्रबंधन और 'जीरो टिलेज' मॉडल की भी सराहना की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sagram-shivraj-singh-chauhan-countered-in-parliament-and-said-that/article-148133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shivraj-singh-chouhan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्य सभा में बताया कि मोदी सरकार के प्रयासों से देश में शुष्क और वर्षा‑निर्भर क्षेत्रों में खाद्यान्न उत्पादन में 82 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई और कुल राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में शुष्क क्षेत्रों का योगदान 29 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत तक हो गया है। शिवराज सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न सदस्यों के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए बताया कि देश में लगभग 48 प्रतिशत कृषि शुष्क या वर्षा पर निर्भर है और मौजूदा सरकार ने इसकी उपज बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में इनका योगदान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के दौर में खाद्यान्न उत्पादन तो तेजी से बढ़ा, लेकिन शुष्क (ड्राईलैंड) क्षेत्र अपेक्षाकृत अछूते रह गए थे।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि हैदराबाद स्थित केंद्रीय बरानी/शुष्क कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा चलायी जा रही समन्वित परियोजनाओं से किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के प्रभाव के तृतीय‑पक्ष मूल्यांकन में यह सामने आया कि मौसम आधारित सलाह से किसानों की आय में औसतन 6,000 रुपये प्रति एकड़ की वृद्धि हुई है। खेत‑तालाब, चेक‑डैम, स्टॉप‑डैम, बोरी‑बंधन जैसी जल संरक्षण तकनीकों के कारण प्रति खेत‑तालाब लगभग 73,895 रुपये तक अतिरिक्त आय दर्ज की गई। संस्थान के 18 मुख्य, 1 उप और 9 स्वायत्त केंद्र हैं। इसके अलावा 25 मुख्य और 5 स्वायत्त केंद्र भी देशभर में स्थापित हैं, जिनमें महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के क्षेत्र भी शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में फसल अनुसंधान संस्थानों ने पिछले 10-11 वर्षों में 3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्मों का विकास किया है, जो कम पानी, अधिक तापमान और अधिक सर्दी जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हैं। पंजाब से जुड़े एक सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हरित क्रांति के दौर से ही पंजाब के किसानों ने अपने परिश्रम से देश के अन्न भंडार भरे, भुखमरी मिटाने का काम किया और पूरे देश के लिए मिसाल कायम की।</p>
<p>कृषि मंत्री ने साथ ही यह चिंता भी साझा की कि अत्यधिक उत्पादन के दबाव, अधिक पानी वाली किस्मों और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग के कारण पंजाब सहित कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम तथा सेकेंडरी और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के स्तर में गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को दोषी बताना ठीक नहीं है। पंजाब के किसान स्वयं पराली प्रबंधन व नई पद्धतियाँ अपनाने में आगे हैं। कृषिमंत्री ने गत 27 नवम्बर को मोगा जिले के अपने दौरे का उल्लेख किया जहाँ रन सिंह वाला गाँव और आस‑पास के गाँवों में किसान खेती की बिना जुताई किये ही सीधे बीज लगा रहे थे और ज़ीरो टिलेज जैसी तकनीकों से बिना पराली जलाए खेती का सफल प्रयोग होते देखे गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 16:13:13 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण का किया आह्वान, देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर नागरिकों से जल संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है और यह हमारे ग्रह के भविष्य को तय करता है। भारत की 18% आबादी के पास केवल 4% मीठा पानी है, इसलिए जल जीवन मिशन और वर्षा जल संचयन जैसे सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट को मात दी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-called-for-water-conservation-on-world-water-day/article-147413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर नागरिकों से जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का आग्रह किया और जीवन को बनाए रखने और ग्रह के भविष्य को आकार देने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। एक्स पर पोस्ट किए गए अपने एक संदेश में, प्रधानमंत्री ने ज़िम्मेदार उपयोग और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल हमारा जीवन है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। उन्होंने देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने और उसका ज़िम्मेदारी से उपयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आह्वान किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस अवसर पर सतत जल प्रबंधन की दिशा में कार्य कर रहे लोगों एवं समुदायों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज का दिन उन लोगों की सराहना करने का भी दिन है जो सतत प्रथाओं में संलग्न हैं, जागरूकता को बढ़ावा देते हैं और संरक्षण की संस्कृति को पोषित करते हैं।”</p>
<p>विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक जल संकट और मीठे जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। प्रति वर्ष विश्व की सरकारें, संगठन और समुदाय इस दिन का उपयोग जल संबंधी चुनौतियों, जैसे कि जल की कमी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।</p>
<p>भारत में विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन इसके पास विश्व के मीठे पानी के संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है और इसके कई क्षेत्रों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन जैसी सरकारी पहलों और बारिश जल संचयन और कुशल सिंचाई को बढ़ावा देने वाले अभियानों ने इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश की है लेकिन विशेषज्ञ जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल देते हैं।</p>
<p>जलवायु विषमता के तीव्र होने और पानी की मांग बढ़ने के साथ, संरक्षण की आवश्यकता और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है और नीति निर्माताओं और नागरिकों दोनों से इस आवश्यक संसाधन की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान से बदली जल संरक्षण की तस्वीर, प्रदेश में बनी 14,500 से अधिक जल संरचनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान प्रदेश में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘कैच द रेन’ अभियान से प्रेरित इस पहल के तहत राजस्थान में जल को सहेजने की परम्परा को नई मजबूती मिली। राज्य में अब तक 14,500 से अधिक जल संरक्षण और रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/picture-of-water-conservation-changed-from-karmabhoomi-to-matribhoomi-campaign/article-135520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान प्रदेश में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘कैच द रेन’ अभियान से प्रेरित इस पहल के तहत राजस्थान में जल को सहेजने की परम्परा को नई मजबूती मिली है। राज्य में अब तक 14,500 से अधिक जल संरक्षण और रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिला है। अभियान का उद्देश्य प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मातृभूमि से जोड़ते हुए जल संरक्षण के कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए भामाशाहों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) और क्राउड फंडिंग के माध्यम से चार वर्षों में लगभग 45,000 संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>प्रदेश के 41 जिलों की 11,195 ग्राम पंचायतों में ई-पंचायत मोबाइल एप के माध्यम से 42,081 रिचार्ज स्थलों का चयन किया गया, जिनमें से बड़ी संख्या में कार्य पूर्ण हो चुके हैं। अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है।<br />इसके साथ ही ‘वंदे गंगा जल संरक्षण–जन अभियान’ के माध्यम से जलाशयों की सफाई, मरम्मत और पौधारोपण जैसे कार्यों को भी गति मिली है, जिससे प्रदेश में जल संरक्षण आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 18:32:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर व्यक्ति को जल संरक्षण से है जोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[भूजल ने कई दशकों से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह लाखों नलकूपों के माध्यम से ‘हरित क्रांति’ की सफलता सुनिश्चित करने में प्रमुख संचालक सिद्ध हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/man-connected-with-water-conservation/article-7154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/water-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>भूजल ने कई दशकों से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह लाखों नलकूपों के माध्यम से ‘हरित क्रांति’ की सफलता सुनिश्चित करने में प्रमुख संचालक सिद्ध हुआ है। यह सीमित संसाधन वर्तमान में 60 प्रतिशत से अधिक कृषि की सिंचाई, 85 प्रतिशत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और 50 प्रतिशत से अधिक शहरी जल आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करता है। राष्ट्रपति द्वारा 29 मार्च को जल शक्ति अभियान कैच द रेन-2022 का शुभारम्भ किया गया था। यह तीसरा वर्ष है, जब देश वर्षा जल के संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए एक जन आंदोलन का मिशन मोड में आयोजन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और उनकी प्रेरणा से, जल शक्ति अभियान को पहली बार वर्ष 2019 में सभी को ‘वर्षा के लिए तैयार करने’ के विजन के साथ शुरू किया गया था, ताकि हम वर्षाजल का अधिक से अधिक भण्डारण और उपयोग कर सकें तथा हमारे भूजल भंडार को फिर से भरा भी जा सके।</p>
<p>भूजल को कभी-कभी अदृश्य संसाधन कहा जाता है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है। यह ज्यादातर मामलों में नि:शुल्क है और उन लोगों को उपलब्ध है, जो इन स्रोतों तक पहुंच पाते हैं, या जिनके पास इसे प्राप्त करने के साधन मौजूद हैं। यह झीलों, आर्द्रभूमि और जंगल जैसे महत्वपूर्ण पारितंत्र को बनाए रखता है। भारत दुनिया में भूजल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और उपलब्ध वैश्विक संसाधनों के एक चौथाई से अधिक का उपयोग करता है। भूजल ने कई दशकों से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह लाखों नलकूपों के माध्यम से ‘हरित क्रांति’ की सफलता सुनिश्चित करने में प्रमुख संचालक सिद्ध हुआ है। यह सीमित संसाधन वर्तमान में 60 प्रतिशत से अधिक कृषि की सिंचाई, 85 प्रतिशत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और 50 प्रतिशत से अधिक शहरी जल आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करता है। भूजल के बढ़ते उपयोग और पुनर्भरण से अधिक दोहन के परिणामस्वरूप इस मूल्यवान संसाधन के भण्डार में महत्वपूर्ण कमी आयी है। बड़े पैमाने पर आजीविका के नुकसान से लेकर प्रवासी लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता में कमी से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों तक, जल-संकट का गंभीर प्रभाव पड़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि यह वर्षा के पैटर्न को अनिश्चित बनाता है और भूजल पुनर्भरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। वर्तमान में, देश के लगभग एक तिहाई भू-जल संसाधन विभिन्न स्तरों के संकट झेल रहे हैं। छोटे एवं सीमांत किसान, महिलाएं और समाज के कमजोर वर्ग, भूजल की कमी और दूषित जल का सबसे ज्यादा नुकसान सहते हैं।</p>
<p>इस समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री की प्रेरणा से भारत सरकार ने 2019 में जल शक्ति अभियान (जेएसए) की शुरूआत की। प्रधानमंत्री ने स्वयं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा सभी पंचायतों के अग्रणी कर्मियों को पत्र लिखा एवं उनसे अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को नेतृत्व प्रदान करने का अनुरोध किया। यह मिशन मोड में एक समयबद्ध जल संरक्षण अभियान था, जिसे देश में जल-संकट झेल रहे 256 जिलों के 1,592 ब्लॉकों में जुलाई-नवंबर 2019 की अवधि के दौरान लागू किया गया था। ये ब्लॉक भूजल के सन्दर्भ में संकटग्रस्त या अत्यधिक उपयोग किये जाने की श्रेणी में आते हैं, जहां संचय होने की तुलना में भूजल को अधिक मात्रा में निकाला जा रहा था। जेएसए, भारत सरकार और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों का एक परस्पर सहयोगी प्रयास थाए जिसका संचालन जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा किया जा रहा था। इस अभियान के दौरान, भारत सरकार के अधिकारियों, भूजल विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने पांच लक्षित कार्यों के त्वरित कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए जल संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन के लिए भारत के सबसे जल-संकटग्रस्त जिलों में राज्यों और जिला अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया। जेएसए का उद्देश्य व्यापक प्रचार-प्रसार और समुदायों की भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना है।</p>
<p>जेएसए ने पांच बिन्दुओं पर ध्यान केंद्रित किया। जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन, पारंपरिक और अन्य जल निकायों का पुनरुद्धार, पानी का पुन: उपयोग और संरचनाओं का पुनर्भरण, वाटरशेड विकास और गहन वनीकरण। इसके अलावा, विशेष कार्यक्रमों में ब्लॉक जल संरक्षण योजनाओं और जिला जल संरक्षण योजनाओं का निर्माण, कृषि विज्ञान केंद्र मेलों का आयोजन, शहरी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग और सभी गांवों के लिए 3 डी रूपरेखा मानचित्रण आदि शामिल हैं।राज्यों ने कई स्रोतों से संसाधनों का इस्तेमाल किया। यह निर्धारित किया गया था कि मनरेगा निधि का कम से कम 60 प्रतिशत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन गतिविधियों, मुख्य रूप से जल संरक्षण पर खर्च किया जाना चाहिए। पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान, कैम्पा निधि, सीएसआर संसाधनों का उपयोग इन कार्यक्रमों को निधि देने के लिए किया गया था। 2019 में सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से 2.73 लाख जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण हुआ, 45,000 जल निकायों/टैंकों का पुनरूद्धार किया गया, 1.43 लाख पुन: उपयोग और पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण हुआए 1.59 लाख वाटरशेड विकास संबंधी कार्य पूरे किये गएए 12.36 करोड़ पौधे लगाये गए और 1372 ब्लॉक जल संरक्षण योजनाओं की तैयारी की गयी।</p>
<p><strong>- गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री</strong><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 14:25:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जल संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय कर रही है सरकार : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार जल संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व जल दिवस पर पानी की हर एक बूंद को बचाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि कि विश्व जल दिवस पर हम पानी की हर बूंद को बचाने के अपने संकल्प को दोहराएं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-appreciates-peoples-working-for-water-conservation/article-6526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/modi.jpg02-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार जल संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व जल दिवस पर पानी की हर एक बूंद को बचाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि कि विश्व जल दिवस पर हम पानी की हर बूंद को बचाने के अपने संकल्प को दोहराएं। मोदी ने ट्वीट किया कि हमारा देश जल संरक्षण और नागरिकों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन जैसे अनेक उपाय कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान जल संरक्षण ने जनांदलोन का रूप ले लिया है और इसके तहत समूचे देश में नये नये तरीके से प्रयास किये जा रहे हैं।</p>
<p>एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों के जीवन को आसान बनाने में जल जीवन मिशन अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है। जन-जन की भागीदारी से घर-घर नल से जल पहुंचाने का संकल्प पूरा होगा। उन्होंने जल संरक्षण के लिए काम करने वाले हर व्यक्ति तथा संगठन की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण को बढाते हुए ग्रह पर जीवन को सतत बनाने में योगदान देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि पानी की हर बूंद हमारे लोगों की मदद करती है और प्रगति में तेजी लाने का काम करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-appreciates-peoples-working-for-water-conservation/article-6526</link>
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                <pubDate>Tue, 22 Mar 2022 12:32:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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