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                <title>conservation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>conservation RSS Feed</description>
                
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                <title>मन की बात में जनभागीदारी को बताया राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत, मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों संग सुना कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर यूपीएससी (UPSC) एवं आईएफएस (IFS) 2025 के नव-चयनित अभ्यर्थियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का 135वां संस्करण सुना। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण और वोकल फॉर लोकल पर जोर दिया। सीएम ने जनभागीदारी को विकसित भारत की सबसे बड़ी पूंजी बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-mann-ki-baat-public-participation-was-said-to-be/article-158318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/bhajan-lal1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा एवं भारतीय वन सेवा परीक्षा-2025 में चयनित राजस्थान के अभ्यर्थियों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 135वां संस्करण सुना। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, कार पूलिंग, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के लाभ, असम में हरगिला पक्षी संरक्षण, नागालैंड में फुटबॉल और फुटसल लीग, नालंदा विश्वविद्यालय में शास्त्रार्थ परंपरा के पुनर्जीवन, संस्कृत विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा साइंस पाठ्यक्रम, मेघालय के जीवित रूट ब्रिजों के संरक्षण और मध्यप्रदेश में महिलाओं द्वारा प्लास्टिक कचरे से ईको-ब्रिक्स बनाने जैसे विषयों का उल्लेख किया।</p>
<p>उन्होंने 'कैच द रेन' अभियान के जरिए जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और आगामी गणेश उत्सव में स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित मिट्टी की मूर्तियां अपनाकर वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने की अपील भी की। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'मन की बात' से समाज में हो रहे सकारात्मक नवाचारों और प्रेरक प्रयासों की जानकारी देशभर के लोगों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी की शक्ति को भारत की सबसे बड़ी पूंजी बताया है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
<p>इस अवसर पर ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं कार्मिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, सिविल सेवा एवं भारतीय वन सेवा परीक्षा में चयनित अभ्यर्थी तथा उनके परिजन उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:32:54 +0530</pubDate>
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                <title>सरिस्का की ऐतिहासिक सफलता, अब देशभर के टाइगर रिजर्व अपनाएंगे राजस्थान मॉडल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान का सरिस्का दुनिया में बाघ पुनर्स्थापन (Tiger Relocation) की सबसे सफल मिसाल बन गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने शिरकत की। सरिस्का में बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर 56 हो चुकी है, जो अब अन्य अभयारण्यों के लिए रोल मॉडल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/historic-success-of-sariska-now-tiger-reserves-across-the-country/article-158303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sariska.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान में कभी बाघों से पूरी तरह खाली हो चुका सरिस्का अब दुनिया में बाघ पुनर्स्थापन की सबसे सफल मिसाल बनकर उभरा है। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के 18 वर्ष पूरे होने पर रविवार को सरिस्का बाघ अभयारण्य राष्ट्रीय स्तर के मंथन का केंद्र बना, जहां देशभर के बाघ संरक्षण विशेषज्ञ, वरिष्ठ वन अधिकारी और वैज्ञानिक जुटे। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला "बाघ पुनर्स्थापन : अवसर एवं चुनौतियां" का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया।</p>
<p>कार्यशाला में राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (आईबीसीए) के महानिदेशक, विभिन्न राज्यों के प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, क्षेत्रीय निदेशक और देश के प्रमुख वन्यजीव वैज्ञानिक शामिल हुए। इस दौरान सरिस्का मॉडल के आधार पर देश के अन्य बाघ-विहीन और कम बाघ घनत्व वाले बाघ अभयारण्य पुनर्स्थापन की रणनीति पर मंथन हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरिस्का का 18 वर्षों का सफर ऐतिहासिक रहा है। बेहतर निगरानी, मजबूत प्रबंधन और उत्कृष्ट आवास संरक्षण के कारण सरिस्का वर्तमान में देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रत्येक बाघ अभयारण्य की अपनी अलग परिस्थितियां हैं और जहां बाघों की संख्या नहीं बढ़ रही है वहां विशेष रणनीति अपनाई जाएगी। यादव ने कहा कि बाघ संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण, पक्षी संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति पर्यटन को भी समान महत्व देना होगा। बाघ अभयारण्य से जुड़े ग्रामीणों के कौशल विकास पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है ताकि संरक्षण और आजीविका दोनों मजबूत हों। उन्होंने बताया कि सरिस्का परियोजना के 20 वर्ष पूरे होने पर बड़ा राष्ट्रीय आयोजन किया जाएगा।</p>
<p>राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि सरिस्का में बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर 56 तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है और जल्द ही यह आंकड़ा 60 तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बाघ संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार से राजस्थान के लिए भी चीता परियोजना स्वीकृत करने की मांग रखी। एनटीसीए के सदस्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2004 में सरिस्का से बाघों के पूरी तरह समाप्त होने के बाद जो चूक हुई, उसे सुधारते हुए 2008 में दुनिया का पहला वैज्ञानिक बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू किया गया। अब सरिस्का केवल बाघों का संरक्षण क्षेत्र नहीं बल्कि "स्रोत क्षेत्र" बन चुका है, जहां से भविष्य में बाघ अन्य अभयारण्यों तक पहुंच सकेंगे।</p>
<p>उन्होंने इस सफलता का श्रेय तत्कालीन एनटीसीए सचिव राजेश गोपाल, फील्ड डायरेक्टर पी. सोमशेखर और वैज्ञानिक प्रबंधन को दिया। इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव ने कहा कि बाघ पुनर्स्थापन का प्रयास रूस में सफल नहीं हो सका, लेकिन राजस्थान ने इसे दुनिया के सामने सफल मॉडल के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचा, प्रभावी निगरानी और शिकार पर नियंत्रण सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सितंबर में सरिस्का में 32 देशों के वन्यजीव विशेषज्ञों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित होगा।</p>
<p>कार्यशाला में बताया गया कि भारत वर्तमान में विश्व के करीब 70 प्रतिशत जंगली बाघों का संरक्षण कर रहा है। देश में 58 बाघ अभयारण्य में करीब 3,682 बाघ हैं। पिछले एक दशक में बाघ अभयारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो चुकी है और संरक्षित क्षेत्र 84 हजार 450 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं बल्कि पूरे जंगल और जैव विविधता का आधार है। इसलिए आवास पुनर्स्थापन, शिकार आधार मजबूत करने, वन्यजीव गलियारों, पुनर्प्रवेश, वन्यजीव स्थानांतरण और वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला में चीता परियोजना पर भी विशेष विचार-विमर्श हुआ।</p>
<p>दो दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त सुझावों के आधार पर देश के बाघ-विहीन और कम बाघ घनत्व वाले क्षेत्रों के लिए नई वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे एनटीसीए, राज्य वन विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय और मजबूत होगा और बाघ संरक्षण में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को नई मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:01:14 +0530</pubDate>
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                <title>प्रकृति को बचाने के लिए प्रोजेक्ट हरा-भरा 8.0 के अंतर्गत किया बीजारोपण </title>
                                    <description><![CDATA[ईको रेस्क्यूर्स और शरण्या फाउंडेशन ने जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व में 'प्रोजेक्ट हरा-भरा 8.0' के तहत धामण घास के बीजों का रोपण किया। सेवानिवृत्त वन अधिकारी महेश विजयवर्गीय के मार्गदर्शन में 65 वॉलिंटियर्स और बच्चों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य जंगली जानवरों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना और हरियाली बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-save-nature-seeds-were-planted-under-project-hara-bhara-80/article-158301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jhalana.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ईको रेस्क्यूर्स फाउंडेशन एवं शरण्या फाउंडेशन की ओर से झालाना लेपर्ड रिजर्व क्षेत्र, जयपुर में 'प्रोजेक्ट हरा-भरा 8.0' के अंतर्गत धामण घास के बीजों की टिकड़ी का बीजारोपण किया गया। जिससे जंगली जानवरों को पर्याप्त मात्रा में घास उपलब्ध हो सके। संस्था का उद्देश्य जंगलों में खत्म होती हुई हरियाली को वापस लाना है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संस्था के सचिव डॉ गौरव ने बताया कि बीजारोपण किस तरह किया जाता है, इसकी पूरी जानकारी सेवानिवृत्ति वन अधिकारी महेश विजयवर्गीय ने सभी वॉलिंटियर्स को दी। इस कार्यक्रम में 40 बच्चों सहित लगभग 65 वॉलिंटियर्स ने भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:33:22 +0530</pubDate>
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                <title>राज्यपाल बागडे निमेड़ा स्थित श्री श्याम गौशाला पहुंचे, भागवत कथा में सम्मिलित हुए</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे शुक्रवार को निमेड़ा स्थित श्री श्याम गौशाला पहुंचे। उन्होंने भागवत कथा सुनी, बालाजी मंदिर में पूजा की और गायों को चारा खिलाया। राज्यपाल ने श्रद्धालुओं को सनातन मूल्यों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और वर्षा ऋतु में पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण भी किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-bagde-reached-shri-shyam-gaushala-in-nimeda-and-participated/article-158176"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/governor.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे शुक्रवार को निमेड़ा स्थित श्री श्याम गौशाला पहुंचे। उन्होंने वहां चल रही भागवत कथा सुनी और श्री बालाजी मंदिर में पूजा अर्चना कर सबके मंगल की कामना की। राज्यपाल ने गौशाला में गायों को चारा खिलाया और वहां उपस्थित भागवत कथा सुनने वालों से संवाद करते हुए भगवान श्री कृष्ण की लीला और भगवद भक्ति की सनातन भारतीय मूल्यों की उदात्त दृष्टि से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने वहीं पेड़ भी लगाया और वर्षा के मौसम में अधिक से अधिक पेड़ लगाने का आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:43:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा CSR का संबल: सवाई माधोपुर में होगा राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव ; वन विभाग और कॉर्पोरेट जगत मिलकर तलाशेंगे संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और समुदाय विकास के नए रास्ते</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान वन विभाग द्वारा 22-23 जून को सवाई माधोपुर में राज्य स्तरीय CSR कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य रणथम्भौर और सरिस्का जैसे संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और स्थानीय समुदायों के विकास के लिए कॉर्पोरेट जगत और वन विभाग के बीच सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को मजबूत करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/wildlife-conservation-will-get-the-support-of-csr-state-level/article-157638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/image1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान वन विभाग की पहल पर सवाई माधोपुर में 22 और 23 जून को राज्य स्तरीय CSR कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और स्थानीय समुदायों के सतत विकास को बढ़ावा देना है। कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग समूहों, गैर-सरकारी संगठनों, संरक्षण विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की भागीदारी रहेगी।</p>
<p>डीसीएफ मानस सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में रणथम्भौर, सरिस्का, केवलादेव, मुकुंदरा सहित प्रदेश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में CSR के जरिए किए जा सकने वाले कार्यों और नवाचारों पर विस्तृत चर्चा होगी। साथ ही सफल परियोजनाओं के अनुभव साझा किए जाएंगे तथा वन विभाग और कॉर्पोरेट क्षेत्र के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशे जाएंगे। यह पहल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:24:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 साल पुराने यूरोपीय प्रोजेक्ट पर 2023 से खर्च शून्य: जल सुधार की रिपोर्ट गौण ; 450 करोड़ का यूरोपीय संघ जल सुधार कार्यक्रम, कितनी बदली राजस्थान की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल प्रबंधन के लिए शुरू हुई 450 करोड़ की यूरोपीय संघ परियोजना सवालों के घेरे में है। 415.66 करोड़ रुपये खर्च होने और जल नीति-2010 जैसी उपलब्धियों के बावजूद, पिछले तीन वर्षों (2023-26) से व्यय शून्य बना हुआ है। विशेषज्ञ जमीनी स्तर पर इसके वास्तविक प्रभाव और रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/zero-expenditure-on-20-year-old-european-project-from-2023/article-157627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। राजस्थान में जल प्रबंधन सुधार और भूजल संरक्षण के लिए वर्ष 2006 में शुरू किया गया यूरोपीय संघ (यूरोपियन यूनियन) समर्थित स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी)द्ध एक बार फिर चर्चा में है। करीब 450 करोड़ की परियोजना को जल क्षेत्र में सुधार की बड़ी पहल बताया गया, लेकिन उपलब्ध आंकड़े से भारी निवेश के बावजूद इसके वास्तविक प्रभाव और वर्तमान स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यूरोपीय संघ ने इस परियोजना के लिए 80 मिलियन यूरो (करीब 450 करोड़ रुपए) का अनुदान स्वीकृत किया था। अब तक 61.675 मिलियन यूरो 418.83 करोड़ रुपए) जारी किए जा चुके हैं, जबकि 31 मई 2026 तक कुल खर्च 415.66 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>11 जिलों की 3,182 ग्राम पंचायतें शामिल</strong></div>
<div> </div>
<div>परियोजना का उद्देश्य राज्य में जल क्षेत्र सुधार, भूजल संरक्षण, सुरक्षित पेयजल उपलब्धता और पंचायतों की भागीदारी को मजबूत करना था। इसके तहत 11 जिलों की 82 पंचायत समितियों और 3182 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि परियोजना पर 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। वित्तीय प्रगति रिपोर्ट में लगातार तीन वर्षों तक व्यय शून्य दर्शाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना के तहत तैयार किए गए जल प्रबंधन मॉडल इतने सफल रहे, तो फिर उनके विस्तार और रखरखाव पर खर्च क्यों नहीं हुआ? वहीं सरकारी दस्तावेज परियोजना की उपलब्धियों में जल नीति-2010, एक्विफर मैपिंग, जल जागरूकता अभियान, नदी बेसिन प्राधिकरण गठन और 14 अंतर.बेसिन जलांतरण योजनाओं की तैयारी को प्रमुख उपलब्धि बताते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>उठते सवाल...</strong></div>
<div> </div>
<div>
<ul>
<li>450 करोड़ की परियोजना के बावजूद जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थिति कितनी बदली, इसका स्पष्ट मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं।</li>
<li>2023-24 से लगातार तीन वर्षों तक व्यय शून्य रहना परियोजना की सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।</li>
<li>कई उपलब्धियां अध्ययन, कार्यशाला और योजनाओं तक सीमित दिखाई देती हैं, जबकि जमीनी प्रभाव के आंकड़े सीमित हैं।</li>
<li>14 जलांतरण योजनाएं बनीं, लेकिन कितनी लागू हुईं, इसका उल्लेख नहीं है।</li>
<li>परियोजना समाप्ति के बाद बनाए गए ढांचे और संस्थाओं की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।</li>
</ul>
</div>
<div><strong>परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां</strong></div>
<div> </div>
<div>
<ul>
<li>राज्य जल नीति-2010 लागू</li>
<li>3182 ग्राम पंचायतों में जल प्रबंधन योजनाएं तैयार</li>
<li>79,550 लोगों को प्रशिक्षण</li>
<li>भूजल एक्विफर मैपिंग और गुगल आधारित डेटा तैयार</li>
<li>जल चेतना यात्रा, जल मेला और जनजागरूकता अभियान</li>
<li>14 अंतर-बेसिन जलांतरण योजनाओं की तैयारी</li>
<li>जल कानूनों के सामंजस्य की पहल</li>
</ul>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:36:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस में सुदर्शन पटनायक का सम्मान, ग्रैंड सैंड मास्टर कप पाने वाले पहले भारतीय बने</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा के प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने रूस में 'रूस ग्रैंड सैंड मास्टर कप 2026' जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग और प्रकृति संरक्षण पर 3 मीटर ऊंची अद्भुत कलाकृति बनाकर यह खिताब जीता। वे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार को पाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/sudarshan-patnaik-honored-in-russia-as-first-indian-to-receive/article-156756"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sudarsan-pattnaik.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ओडिशा के प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। उन्हें रूस में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर महोत्सव में प्रतिष्ठित ‘रूस ग्रैंड सैंड मास्टर कप 2026’ से सम्मानित किया गया। इस सम्मान को प्राप्त करने वाले वह पहले भारतीय सैंड आर्टिस्ट बन गए हैं। यह पुरस्कार उन्हें सैंड आर्ट के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और ग्लोबल वार्मिंग विषय पर बनाई गई प्रभावशाली रेत की मूर्ति के लिए प्रदान किया गया। 11 जून 2026 से शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में विभिन्न देशों के 12 प्रमुख सैंड कलाकारों ने भाग लिया था। जूरी समिति ने सर्वसम्मति से पटनायक को इस सम्मान के लिए चुना।</p>
<p>पटनायक की तीन मीटर ऊंची कलाकृति में पृथ्वी के दो विपरीत रूपों को दर्शाया गया था। एक ओर पर्यावरणीय क्षरण और सूखती धरती का चित्रण था, जबकि दूसरी ओर वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण के जरिए बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई गई थी। पुरस्कार समारोह के दौरान रूस की जनरल डायरेक्टर अलेना अलेक्जेंड्रोवना ने उन्हें ग्रैंड सैंड मास्टर कप और पदक प्रदान किया। सुदर्शन पटनायक अपनी रेत कलाकृतियों के माध्यम से सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रेट निकोबार परियोजना: जयराम ने रक्षा मंत्री को लिखा पत्र, कहा- आईएनएस बाज रनवे विस्तार पर करें पुनर्विचार </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार हवाई अड्डा परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने आगाह किया कि नई साइट से घने जंगल, शोम्पेन जनजाति क्षेत्र और कछुओं के रहवास नष्ट होंगे। रमेश ने इसके बजाय आईएनएस बाज के रनवे विस्तार का सुझाव दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/great-nicobar-project-jairam-wrote-a-letter-to-the-defense/article-156734"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jairam-ramesh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव एवं राज्य सभा सदस्य जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के तहत प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के संदर्भ में पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंता जतायी है। रमेश ने आईएनएस बाज के मौजूदा रनवे के पूर्ण विस्तार पर पुनर्विचार करने का राजनाथ सिंह से आग्रह किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने 16 मई को भी रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि ग्रेट निकोबार में गांधी नगर-शास्त्री नगर क्षेत्र में नया हवाई अड्डा बनाने के बजाय कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के रनवे का विस्तार किया जाये, जिससे रणनीतिक जरूरतें पूरी होने के साथ पर्यावरणीय नुकसान भी कम होगा।</p>
<p>उन्होंने इस पत्र में भी कहा है कि प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए 115 मीटर ऊंची दो वनाच्छादित पहाड़ियों को काटना पड़ेगा तथा लगभग 225 एकड़ संरक्षित वन और 130 एकड़ डीम्ड फॉरेस्ट प्रभावित होंगे, जो शोम्पेन जनजाति के पारंपरिक क्षेत्र का हिस्सा हैं। उन्होंने दावा किया कि परियोजना से कछुओं के अंडे देने वाले समुद्री तट, प्रवाल भित्तियां और संकटग्रस्त निकोबार मेगापोड पक्षी के रहवास पर भी असर पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि परियोजना के कारण 234 पूर्व सैनिक परिवारों को पुनर्वास के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित और वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया है। पत्र की प्रति पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को भी भेजी गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:07:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रणथम्भौर पहुंचे PCCF अरिजीत बनर्जी : बाघ और घड़ियाल संरक्षण व्यवस्थाओं का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व और पालीघाट का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने बाघों की मॉनिटरिंग, चम्बल नदी में घड़ियाल नेस्टिंग स्थलों और सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की। बनर्जी ने फील्ड स्टाफ की सराहना करते हुए वन्यजीव आवास सुधार और वैज्ञानिक प्रबंधन के निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/pccf-arijit-banerjee-reached-ranthambore-took-stock-of-tiger-and/article-156262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/अरिजीत-बनर्जी.png" alt=""></a><br /><p>सवाई माधोपुर। राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) अरिजीत बनर्जी ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व एवं पालीघाट क्षेत्र का दो दिवसीय विस्तृत निरीक्षण एवं भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने बाघ संरक्षण, वन्यजीव आवास प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, गश्ती व्यवस्था तथा घड़ियाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।</p>
<p>भ्रमण के प्रथम दिवस बनर्जी ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के विभिन्न महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने वन्यजीव आवासों, प्राकृतिक जल स्रोतों, एनीकटों, वन्यजीवों के लिए विकसित जल प्रबंधन संरचनाओं, कैमरा ट्रैप मॉनिटरिंग व्यवस्था तथा क्षेत्र में संचालित संरक्षण गतिविधियों का निरीक्षण किया। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों से बाघों की वर्तमान स्थिति, उनके विचरण क्षेत्र, मॉनिटरिंग प्रणाली, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम तथा आवास सुधार कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान उन्होंने फील्ड स्टाफ द्वारा किए जा रहे नियमित गश्त कार्य, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, वन अपराध नियंत्रण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे उपायों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं कार्मिकों को संरक्षण कार्यों में निरंतर सतर्कता एवं वैज्ञानिक प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए।</p>
<p>दो दिवस बनर्जी ने पालीघाट क्षेत्र का दौरा कर चम्बल नदी तंत्र में संचालित घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रमों का निरीक्षण किया। उन्होंने घड़ियाल नेस्टिंग स्थलों, हाल ही में हैच हुए घड़ियाल शिशुओं की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र एवं संरक्षण गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने घड़ियालों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा एवं संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया तथा अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग जारी रखने के निर्देश दिए।</p>
<p>इस अवसर पर उन्हें रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन, वन्यजीव बचाव एवं उपचार, आवास विकास, सामुदायिक सहभागिता तथा संरक्षण शिक्षा से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। उन्होंने संरक्षण कार्यों में लगे अधिकारियों एवं वन कार्मिकों की प्रतिबद्धता, समर्पण एवं कठिन परिस्थितियों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान के वेटलैंड्स पर हाईकोर्ट सख्त, 46 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों की हालत पर लिया स्वत: संज्ञान </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने वेटलैंड्स को 'प्रकृति की किडनी' बताते हुए उनके संरक्षण के लिए ऐतिहासिक स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रदूषण और अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए सरकार से प्रदेश के 46,748 वेटलैंड्स की जीआईएस मैपिंग और जिला-वार वर्तमान स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/high-court-strict-on-rajasthans-wetlands-took-suo-motu-cognizance/article-156234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक पहल करते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वेटलैंड्स केवल जलभराव क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण, जैव विविधता, भूजल संरक्षण और जलवायु संतुलन की आधारशिला हैं। इनकी उपेक्षा आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। हाईकोर्ट की अवकाश खंडपीठ में न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश रेखा बोराणा ने आदेश में कहा , वेटलैंड्स को प्रकृति की किडनी कहा जाता है क्योंकि वे भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में लगभग 46,748 वेटलैंड यूनिट्स मौजूद हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम को ही वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार अनेक वेटलैंड्स प्रदूषण, अतिक्रमण, सीवरेज के पानी, ठोस कचरे के निस्तारण और सिकुड़ते जल क्षेत्र जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यह समस्या केवल कुछ जलाशयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में वेटलैंड्स की पहचान, अधिसूचना, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इससे जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास, भूजल स्तर और जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।  हाईकोर्ट ने सरकार से जिला-वार वेटलैंड्स की सूची, उनकी वर्तमान स्थिति, अधिसूचित और गैर-अधिसूचित वेटलैंड्स का विवरण, जीआईएस मैपिंग, सीमांकन, अतिक्रमण, प्रदूषण, सीवरेज प्रवाह और संरक्षण योजनाओं की जानकारी मांगी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:54:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मोदी ने भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों पर डाला प्रकाश, कहा- 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत की समृद्ध जैव विविधता पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयासों से चीता, हिम तेंदुआ और स्लॉथ बीयर जैसी प्रजातियों का पुनरुद्धार हुआ है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रतिवर्ष 1.19 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जुड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-environment-day-prime-minister-modi-threw-light-on-indias/article-156050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की समृद्ध जैविक विविधता का उल्लेख करते हुए वन्यजीव संरक्षण एवं वन विस्तार में देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि निरंतर प्रयासों ने देश भर में कमजोर प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में मदद की है। पीएम मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत अपनी विशाल जैव विविधता और विविध पारिस्थितिक तंत्रों पर गर्व करता है जो असंख्य प्रजातियों के साथ-साथ लाखों आजीविका का समर्थन करते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में हमें अपनी जैविक विविधता पर बहुत गर्व है। हमारे विविध पारिस्थितिकी तंत्र अनगिनत प्रजातियों और आजीविका का समर्थन करते हैं।" सरकार की संरक्षण पहलों का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने लुप्तप्राय और कमजोर वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा के उद्देश्य से विशेष पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों की सफलता की बात की । उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुओं, स्लॉथ बीयर और चीतों के संरक्षण प्रयासों ने प्रदर्शित किया है कि दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वन्यजीव आबादी और पारिस्थितिक आवासों के पुनरुद्धार में कैसे योगदान दे सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "विशेष पुनर्प्राप्ति में हमारे प्रयास भी उल्लेखनीय रहे हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुए, स्लॉथ बीयर और चीता के संरक्षण प्रयासों ने इस बात की झलक दी है कि निरंतर प्रतिबद्धता वन्यजीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में कैसे मदद कर सकती है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने पिछले साल शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के प्रभाव का भी हवाला दिया, जो नागरिकों को अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस पहल ने देश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, "'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल ने हर साल लगभग 1.19 लाख हेक्टेयर जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।" यह टिप्पणी तब आई जब भारत ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है। पिछले एक दशक में, सरकार ने वन क्षेत्र को बढ़ाने, लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करने और ख़राब पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।</p>
<p>प्रमुख संरक्षण पहलों में से एक प्रोजेक्ट चीता है, जिसके तहत सात दशक से भी अधिक समय पहले देश में प्रजाति विलुप्त होने के बाद अफ्रीकी चीतों को भारत में फिर से लाया गया था। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सुरक्षा के प्रयासों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जबकि हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुओं और मध्य भारत में स्लॉथ बीयर के संरक्षण उपायों को आवास संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से तेज किया गया है। प्रधानमंत्री का संदेश विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करने वाले पोस्ट और पहल की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जो जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ बना जन आंदोलन, 5 दिनों में 7.31 लाख कार्यक्रम आयोजित </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जारी 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026' में रिकॉर्ड 3 करोड़ लोगों ने भाग लिया। 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस तक प्रदेश में वॉटर हार्वेस्टिंग सफाई, रन फॉर एन्वायर्न्मेंट और पौधारोपण जैसी विशेष गतिविधियां चलाई जाएंगी, जिससे जल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vande-ganga-water-conservation-mass-campaign-becomes-mass-movement-731/article-155660"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/secratrait4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आह्वान पर चल रहा ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026’ प्रदेशभर में जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। अभियान के तहत मात्र पांच दिनों में 7.31 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 3 करोड़ लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अभियान के अंतर्गत 3 जून को सभी जिलों में जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थानों पर विशेष नवाचार एवं अभिनव पहल के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही विद्युत ट्रांसफार्मरों के आसपास साफ-सफाई अभियान चलाया जाएगा। 4 जून को जिलों में ‘रन फॉर एन्वायर्न्मेंट’ का आयोजन होगा तथा सरकारी कार्यालयों में निर्मित रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं की सफाई कर उन्हें उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा। इसके अलावा सड़क किनारे पौधारोपण की अग्रिम तैयारियां भी की जाएंगी।</p>
<p>जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से निबंध एवं नारा लेखन, चित्रकला, खेलकूद प्रतियोगिताएं तथा नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जाएगा। वहीं विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को वन क्षेत्रों में जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई, तुलसी पौधों का वितरण, नर्सरियों में विशेष स्वच्छता कार्यक्रम और चयनित स्थानों पर ईको-फ्रेंडली आर्ट गतिविधियां आयोजित होंगी। अभियान के तहत जिलों में नदी-नालों के अपशिष्ट जल के परिष्करण के लिए एसटीपी एवं सीईटीपी संयंत्रों की आवश्यकता और उपलब्धता का आकलन कर प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा और पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:07:22 +0530</pubDate>
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