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                <title>conservation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>conservation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ऊर्जा बचत के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा कदम : ईवी कार से पहुंचे सचिवालय कपिल मिश्रा, वर्क फ्रॉम होम पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने ऊर्जा बचत का संदेश देने के लिए ईवी कार का उपयोग किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने 'मेट्रो मंडे' और दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे कड़े कदम उठाए हैं। व्यापारियों और अधिकारियों ने भी ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने के इस राष्ट्रीय दायित्व में अपना समर्थन दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/energy-conservation-is-not-just-an-option-but-a-national/article-153981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kapil-mishra.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है। कपिल मिश्रा ऊर्जा संरक्षण का सन्देश देने के लिए आज ईवी कार चलाकर दिल्ली सचिवालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार दिल्ली वासियों के सहयोग से ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली में मेट्रो मंडे, दो दिन वर्क फ्रॉम होम और न्यूनतम गाड़ियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने सभी मंत्रीगण और अधिकारीगण भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे और अपने लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि श्रम मंत्रालय से एडवाइजरी भी जारी की गई है और इसे लेकर आज सुबह से उन्होंने दिल्ली के कई व्यापारियों एवं उद्योगपतियों से चर्चा भी की है। सभी लोग स्वतः प्रेरणा से प्रधानमंत्री के आह्वान के साथ खड़े हैं और वर्क फ्रॉम होम और इलेक्ट्रिक पॉलिसी को लागू कर रहे हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है। प्रधानमंत्री की देशवासियों से ईंधन बचत और ऊर्जा के जिम्मेदार उपयोग की अपील की गई तथा दिल्ली सरकार और दिल्ली वासी इसे पूरा करने के लिए संकल्पित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला: बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में विकसित होंगे चंदन वन, अधिकारियों को निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उच्च गुणवत्ता वाले पौधारोपण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के वन क्षेत्र का विस्तार करना और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-decision-of-bhajanlal-government-instructions-issued-to-sandalwood-forest/article-152555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में वन क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर वन एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में चंदन के पौधों का चयन उच्च गुणवत्ता का हो और उनकी सुरक्षा व उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पौधारोपण अभियान की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं, ताकि निर्धारित समय पर प्रभावी ढंग से अभियान संचालित किया जा सके।</p>
<p>बैठक में मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण और वन विकास अत्यंत आवश्यक है। बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:35:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वन्यजीव संरक्षण: राजस्थान में 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ संख्या 721,  8 प्रतिशत की वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में तेंदुओं की संख्या 51.5% बढ़कर 721 हो गई है। सरिस्का और रणथंभौर जैसे अभयारण्य इस वृद्धि के प्रमुख केंद्र रहे। देशभर में तेंदुओं की कुल आबादी अब 13,874 तक पहुँच गई है, जो सफल वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों का एक सुखद परिणाम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-number-of-leopards-increased-in-india-with-a-51/article-152522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/समवख्चंतक.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  फरवरी 2024 में जारी 'भारत में तेंदुओं की स्थिति, 2022 रिपोर्ट' ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्साहजनक तस्वीर पेश की। देशभर में तेंदुओं की संख्या 2018 के 12,852 से बढ़कर 2022 में 13,874 हो गई। जो करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस सूची में मध्य प्रदेश 3,907 तेंदुओं के साथ शीर्ष स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु भी प्रमुख राज्यों में शामिल हैं।  राजस्थान की बात करें तो यहां तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में जहां यह संख्या 476 थी, वहीं 2022 में बढ़कर 721 हो गई। यानी करीब 51.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार सरिस्का टाइगर रिजर्व में 167, रणथंभौर में 87, मुकुंदरा हिल्स में 49 और रामगढ़ विषधारी में 19 तेंदुए पाए गए हैं। इसके अलावा उदयपुर क्षेत्र में 56 और जयपुर के झालाना व आमागढ़ में 40 तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 13:39:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना वाटर पॉजिटिव, जल संरक्षण में नई मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट ने 1.37 लाख किलोलीटर पानी बचाकर राजस्थान का पहला "वाटर पॉजिटिव" एयरपोर्ट बनने का गौरव हासिल किया है। पुनर्चक्रण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए एयरपोर्ट ने उपभोग से अधिक जल संचयन किया। ब्यूरो वेरिटाज द्वारा प्रमाणित यह मॉडल मरूस्थलीय प्रदेश में सतत विकास की नई मिसाल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-international-airport-becomes-a-new-example-in-water-positive/article-151998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/airport.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान में जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जयपुर स्थित जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अब आधिकारिक रूप से “वाटर पॉजिटिव एयरपोर्ट” की श्रेणी में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह राजस्थान का पहला और देश के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है। एयरपोर्ट ने अप्रैल, 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 1.03 लाख किलोलीटर पानी का उपभोग किया, जबकि इसी अवधि में जल संरक्षण और पुनर्भरण उपायों के जरिए 1.37 लाख किलोलीटर पानी की बचत दर्ज की गई। यानी एयरपोर्ट ने जितना पानी इस्तेमाल किया, उससे कहीं अधिक पानी को पुनर्चक्रित और संरक्षित किया गया।</p>
<p>इस उपलब्धि के लिए ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म ब्यूरो वेरिटाज ने एयरपोर्ट को आधिकारिक एक्रेडिटेशन प्रदान किया है। एयरपोर्ट परिसर में जल संरक्षण के लिए 18 गहरे एक्वाफर रिचार्ज पिट बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल का संग्रहण कर भूजल स्तर बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल पुनर्चक्रण और भूजल पुनर्भरण जैसी योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। पानी की कमी वाले क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद एयरपोर्ट प्रशासन ने सतत प्रयासों से जल प्रबंधन का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि अन्य संस्थानों और एयरपोर्ट्स के लिए भी प्रेरणा बनेगी और जल संरक्षण के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:49:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अजमेर के जंगलों में 1–2 मई को वन्यजीव गणना, 85 से अधिक वाटर होल्स पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर वन विभाग 1 और 2 मई को जिले के 85 से अधिक वॉटर होल्स पर वन्यजीव गणना आयोजित करेगा। यह गणना 24 घंटे चलेगी, जिसमें वन कर्मी पग-मार्क और प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर आंकड़े जुटाएंगे। पुष्कर, किशनगढ़ और नसीराबाद सहित सभी क्षेत्रों के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)29.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वन विभाग की ओर से एक व 2 मई को जिले के जंगलों में वन्य जीव गणना की जाएगी। यह गणना वॉटर होल्स पद्धति से होगी। जिले के जंगलों के 85 से अधिक वाटर होल्स पर यह गणना होगी। वन कार्मिक वॉटर्स होल्स पर पानी पीने के लिए आने वाले जीवों को देखकर उनकी संख्या निर्धारित प्रपत्रों में दर्ज करेंगे। साथ भी उनके पग मार्ग, मल मूत्र को भी गणना का आधार बनाएंगे। उपवन संरक्षक पी बालामुरुगन ने बताया कि गणना 1 मई को सुबह 8:00 बजे शुरू होकर 2 मई को सुबह 8:00 बजे संपन्न होगी। अजमेर सहित ब्यावर, नसीराबाद, किशनगढ़, सरवाड़ व पुष्कर के जंगलों में वाटर होल्स पर होने वाली गणना के लिए टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम के कार्मिकों को गणना का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। गणना के दिन अधिकारियों की टीम वॉटर होल्स का औचक निरीक्षण भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:15:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भीषण गर्मी में वन्यजीवों को राहत: झालाना, आमागढ़ और बीड पापड़ में रोज ट्यूबवेल से भर रहे जलस्रोत; वन्यजीव गणना की तैयारियां भी तेज </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के झालाना, आमागढ़ और बीड पापड़ लेपर्ड रिजर्व में वन्यजीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन किया गया है। भीषण गर्मी के बीच 40 से अधिक वाटर प्वाइंट्स को रोजाना ट्यूबवेल से भरा जा रहा है। वन विभाग ने अगले महीने होने वाली वन्यजीव गणना के लिए भी इन जलस्रोतों पर निगरानी तेज कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-to-wildlife-in-the-scorching-heat-water-sources-are/article-151485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jhalana.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तेज गर्मी के बीच वन विभाग ने जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं। झालाना लेपर्ड रिजर्व, आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व और बीड पापड़ लेपर्ड रिजर्व में लेपर्ड, हायना, नीलगाय सहित कई प्रजातियों के लिए बनाए गए वाटर प्वाइंट्स इन दिनों जीवनरेखा बने हुए हैं। वन विभाग की टीम रोजाना ट्यूबवेल के जरिए इन जलस्रोतों को भर रही है, ताकि भीषण गर्मी में वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े। जानकारी के अनुसार झालाना के तीन जोन में करीब 17, आमागढ़ में 11 और बीड पापड़ लेपर्ड रिजर्व में 7 से 8 वाटर प्वाइंट्स बनाए गए हैं।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि तापमान बढ़ने के साथ जल स्रोतों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे वन्यजीवों की आवाजाही भी इन क्षेत्रों में बनी रहती है और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। वहीं, अगले महीने प्रस्तावित वन्यजीव गणना को लेकर भी विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वाटर प्वाइंट्स के आसपास गतिविधियों पर नजर रखकर आंकड़े जुटाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे वन्यजीवों की सटीक संख्या और स्थिति का आकलन किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:51:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जल दिवस पर विशेष...''बढ़ती मांग, घटते स्रोत, गहराता जल संकट'': डार्क जोन में डूबता प्रदेश, गर्मियों में टैंकर राज और सूखते स्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल संकट विकराल हो गया है; राज्य के पास देश का मात्र 1.16% सतही जल है। 299 में से केवल 38 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं, जबकि भूजल दोहन 150% तक पहुँच चुका है। 'जल जीवन मिशन' से कनेक्शन तो बढ़े, लेकिन 350 करोड़ लीटर की भारी मांग और घटता जलस्तर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-water-day-increasing-demand-decreasing-sources-deepening/article-147402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/world-water-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद जल संकट की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। भौगोलिक विषमताओं के कारण यहां जल संसाधन विरासत में ही सीमित मिले। राज्य के पास मात्र 1.16 प्रतिशत सतही जल उपलब्ध है। यही असंतुलन आज गहराते जल संकट की जड़ बन चुका है। लगातार सूखा, घटती वर्षा, बढ़ती आबादी और अनियंत्रित विकास ने हालात को विकराल बना दिया है। राज्य के अधिकांश ब्लॉक अब डार्क जोन में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। 55 प्रतिशत ग्रामीण आबादी आज भी भूजल पर निर्भर है, लेकिन यह पानी भी कई जगह खारा और स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त हो चुका है। गर्मियों में 150 से अधिक शहरों और 15 हजार गांवों में पानी का संकट खड़ा हो जाता हैं। जलदाय मंत्री कन्हैया लाल के अनुसार सरकार की प्राथमिकता हर घर को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। </p>
<p>राज्य के 222 शहरों और कस्बों में पेयजल योजनाएं संचालित हैं। जयपुर जैसे बड़े शहर में ही सात लाख कनेक्शन हैं। 28 प्रतिशत शहरों को सतही जल और 50 प्रतिशत को भूजल से पानी मिल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 60 शहरों में रोजाना सिर्फ  एक बार पानी आता है, जबकि 30 से अधिक शहरों में दो दिन में एक बार सप्लाई हो रही है। गर्मी के दिनों में यह संकट और विकराल हो जाता है, जिससे आमजन को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong></p>
<p>जल प्रबंधन विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में जल संकट केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की विफलता भी है। यदि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और फसल चक्र में बदलाव जैसे उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।</p>
<p><strong>ग्रामीण उम्मीद: नल कनेक्शन बढ़े, पानी कहां से आएगा</strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन तेजी से बढ़े हैं। 2019 से पहले जहां केवल 11 लाख घरों में नल थे, अब यह संख्या बढ़कर 58 लाख तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि दिखने में बड़ी है, लेकिन असली चुनौती पानी की उपलब्धता है। वर्तमान में विभाग के पास 130 करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध है, जबकि भविष्य में 350 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। </p>
<p>प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन हो रहा है। 214 ब्लॉक अतिदोहित है। 1984 में दोहन 35 प्रतिशत, 1995 में 58 प्रतिशत, 2004 में 125 प्रतिशत, 2013 में 139 प्रतिशत, 2020 में 150 प्रतिशत और 2023 में 149 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 1984 में 236 में से 203 ब्लॉक सुरक्षित थे, जो स्थिति 2023 में 299 में से 38 ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में रहे।</p>
<p><strong>जल आपूर्ति की स्थिति</strong></p>
<p><strong>श्रेणी                                              आंकड़े</strong><br />कुल शहर/कस्बे                                 222<br />कुल उपभोक्ता                                   35 लाख<br />जयपुर में उपभोक्ता                            07 लाख<br />ग्रामीण नल कनेक्शन                          11 लाख<br />(2019 तक)    <br />वर्तमान नल कनेक्शन                          58 लाख<br />वर्तमान जल उपलब्धता                       130 करोड़ लीटर प्रतिदिन<br />अनुमानित आवश्यकता                       350 करोड़ लीटर प्रतिदिन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉर्बेट नेशनल पार्क में दिखा दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी''लॉन्ग टेल मिनिवेट'',पक्षी प्रेमियों में उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[रामनगर के कॉर्बेट नेशनल पार्क में दुर्लभ लॉन्ग टेल मिनिवेट पक्षी देखा गया। इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और सुरक्षित वन्य आवास का संकेत मानी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rare-and-beautiful-bird-long-tail-minivet-seen-in-corbett/article-141099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>रामनगर। उत्तराखंड के रामनगर में कॉर्बेट नेशनल पार्क में एक बेहद आकर्षक और  दुर्लभ पक्षी ''लॉन्ग टेल मिनिवेट' देखा गया है, जिसने पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों का ध्यान खींचा है। वन्य जीव प्रेमी संजय छिम्वाल बताते हैं कि कॉर्बेट और इसके आसपास के जंगलों में अब तक करीब 600 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की जा चुकी हैं। यह क्षेत्र पक्षी अवलोकन के लिए बेहद खास माना जाता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जो पक्षी देखा गया है, वह लॉन्ग टेल मिनिवेट है, जो अपनी खूबसूरती और रंगों के कारण अलग पहचान रखता है।</p>
<p>संजय के अनुसार लॉन्ग टेल मिनिवेट आमतौर पर पेड़ों की ऊँची चोटियों पर रहना पसंद करता है और जमीन पर बहुत कम उतरता है। इसका मुख्य भोजन कीड़े-मकोड़े होते हैं, जिससे यह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि इस पक्षी में सेक्सुअल डाइमॉफरजिम स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है, यानी नर और मादा के रंग-रूप में फर्क होता है। नर लॉन्ग टेल मिनिवेट चटक लाल रंग का होता है, जबकि मादा हल्के पीले-हरे रंग की दिखाई देती है। आमतौर पर पक्षियों में नर का रंग ज्यादा चमकीला होता है, ताकि वह मादा को आकर्षित कर सके, और यही विशेषता इस पक्षी में भी देखने को मिलती है।</p>
<p>संजय ने आगे बताया कि कॉर्बेट क्षेत्र में कई पक्षी दुर्लभ श्रेणी में आते हैं, जिनकी विशेष सूची (वॉचर लिस्ट) तैयार की जाती है। इस सूची में हॉर्नबिल, बार्बेट और वुडपेकर जैसे पक्षियों के साथ-साथ मिनिवेट भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे पक्षियों का दिखना इस बात का संकेत है कि कॉर्बेट का जंगल आज भी जैव विविधता के लिए सुरक्षित और समृद्ध है। कॉर्बेट में लॉन्ग टेल मिनिवेट का दिखना न केवल पक्षी प्रेमियों के लिए बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 17:55:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान के रास्ते होते हुए हजारों किलोमीटर का सफर तय कर बीकानेर पहुंचे कई देशों से 10,000 गिद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[बीकानेर के जोहड़बीड़ में रूस, मंगोलिया और कजाकिस्तान से करीब 10,000 प्रवासी गिद्ध पहुंचे हैं। पिछले पांच वर्षों में इन पक्षियों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय आकर्षण बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/10000-vultures-from-many-countries-reached-bikaner-after-traveling-thousands/article-138488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bikaner.png" alt=""></a><br /><p>बीकानेर। राजस्थान में इस समय कुछ ऐसे मेहमानों ने डेरा डाला हुआ है, जो कि 10-20 किलोमीटर का सफर तय करके नहीं आएं बल्कि 10,000 किलोमीटर का सफर तय करके आए हैं। हम बात कर रहे हैं दुनिया के अलग अलग देशों से आए हुए गिद्धों के बारे में, जिन्होंने आजकल राजस्थान के बीकानेर को अपना डेरा बनाया हुआ है। बता दें कि ये पक्षी रूस, आर्मेनिया, पाकिस्तान, मंगोलिया और कजाकिस्तान के रास्ते होते हुए यहां पहुंचे हैं।</p>
<p>एक्सपर्ट की मानें तो पिछले पांच सालों में राजस्थान में आने वाले विदेशी पक्षियों की संख्या में इजाफा हुआ है। साल 2020 में राजस्थान में करीब 4-5 हजार गिद्ध आए थे, लेकिन इस बार ये संख्या सीधे 10,000 पर पहुंच गई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 18:40:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान&quot; की कल से शुरुआत, दो दिन प्रभार वाले जिलों में रहेंगे मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA["वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" का कल से शुभारंभ होगा, जो 20 जून 2025 तक प्रदेशभर में संचालित होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vande-ganga-water-conservation-jan-abhiyan-will-start-tomorrow-from/article-116338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। "वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" का कल से शुभारंभ होगा, जो 20 जून 2025 तक प्रदेशभर में संचालित होगा। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण, और स्वच्छता को बढ़ावा देना है।</p>
<p>सरकार के निर्देशानुसार, सभी जिलों में विभिन्न विभागों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जल संरक्षण और स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत जागरूकता रैलियां, वर्कशॉप और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जनहितकारी गतिविधियां होंगी।</p>
<p>साथ ही, राज्य के सभी मंत्री 5-6 जून को अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करेंगे और अभियान की प्रगति का जायजा लेंगे। इस दौरान मंत्री सुनिश्चित करेंगे कि अभियान की सफलता के लिए समर्पित प्रयास किए जाएं। मंत्रिमंडल सचिवालय के शासन सचिव डॉ. जोगा राम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे मंत्री को इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए  पूर्ण सहयोग प्रदान करें। "वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" राज्य में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jun 2025 13:24:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व वन्यजीव दिवस : विद्यार्थियों एवं वन्यजीव प्रेमियों को दी वन्यजीवों की जानकारी, संरक्षण पर साझा किए विचार</title>
                                    <description><![CDATA[ वन्यजीव संरक्षण पर अपने विचार साझा किए। रणथंभौर बाघ परियोजना के डीएफओ रणवीर सिंह भंडारी ने वन्य जीव एवं प्रकृति के महत्व की जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world--day-shared-ideas-on-conservation-of/article-106212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर सोमवार को रणथंभौर बाघ परियोजना के सीसीएफ अनूप केआर के निर्देशन में विश्व वन्यजीव दिवस मनाया गया इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं वन्यजीव प्रेमियों के साथ वन्यजीवों की जानकारी एवं संरक्षण से जुड़ी प्रश्नोत्तरी, वन्य जीव आधारित पोस्टर प्रतियोगिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण पर अपने विचार साझा किए। रणथंभौर बाघ परियोजना के डीएफओ रणवीर सिंह भंडारी ने वन्य जीव एवं प्रकृति के महत्व की जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पृथ्वी को जीवंत बनाए रखने के लिए मनुष्य के साथ-साथ पशु पक्षी पेड़ पौधों का रहना अत्यंत आवश्यक है। वन विभाग की सोशियोलॉजिस्ट ममता साहू ने  कहा कि वन्यजीव दिवस का उद्देश्य ही विश्व स्तर पर वन्य जीवो के संरक्षण की दिशा में जागरूकता सहयोग और समन्वय स्थापित करना है। इस मौके पर  वन्यजीवों एवं वनों के संरक्षण की शपथ दिलवाई और जीव और वनों से संबंधित जानकारी देकर वन्यजीवों के महत्व को बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 14:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करने वालों का बढ़ाएं हौसला : हमारे इतिहास और संस्कृति में बसे हैं वन्य जीव, मोदी ने लोगों से की अपील </title>
                                    <description><![CDATA[हमारे यहाँ वनस्पति और जीव-जंतुओ का एक बहुत ही जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है और ये वन्य जीव हमारे इतिहास और संस्कृति में रचे-बसे हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/increase-the-encouragement-of-those-working-for-conservation/article-105271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/modi-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करने वालों का हौसला बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि यह हमारे लिए बहुत संतोष की बात है कि इस क्षेत्र में अब कई स्टार्ट अप भी उभरकर सामने आए हैं। मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि क्या आप जानते हैं कि एशियाटिक लायन, हंगुल, पिग्मी हाग और शेर की पूंछ वाला मकाक में क्या समानता है , इसका जवाब है कि ये सब दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते हैं, केवल हमारे देश में ही पाए जाते हैं। वाकई हमारे यहाँ वनस्पति और जीव-जंतुओ का एक बहुत ही जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है और ये वन्य जीव हमारे इतिहास और संस्कृति में रचे-बसे हुए हैं। </p>
<p>कई जीव-जन्तु हमारे देवी-देवताओं की सवारी के तौर पर भी देखे जाते हैं। मध्य भारत में कई जन-जातियाँ बाघेश्वर की पूजा करती हैं। महाराष्ट्र में वाघोबा के पूजन की परंपरा रही है। भगवान अयप्पा का भी बाघ से बहुत गहरा नाता है। सुंदरवन में बोनबीबी की पूजा-अर्चना होती है जिनकी सवारी बाघ है। हमारे यहाँ कर्नाटक के हुली वेशा, तमिलनाडु के पूली और केरला के पुलिकली जैसे कई सांस्कृतिक नृत्य हैं जो प्रकृति और वन्य जीव के साथ जुड़े हुए हैं। मैं अपने आदिवासी भाई-बहनों का भी बहुत आभार करूंगा क्योंकि वो वन्य जीव संरक्षण से जुड़े कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हैं। कर्नाटक के बीआरटी टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी में लगातार वृद्धि हुई है। इसका बहुत श्रेय सोलिगा जनजाति को जाता है जो बाघ की पूजा करते हैं। इनके कारण इस क्षेत्र में मानवजीव संघर्ष ना के बराबर होता है। गुजरात में भी लोगों ने गिर में एशियाटिक लायन की सुरक्षा और संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने दुनिया को दिखा दिया है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य आखिर क्या होता है। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों के कारण ही पिछले कई वर्षों में बाघ, तेंदुए, एशियाटिक लायन, गैंडा और बारहसिंघा की आबादी तेजी से बढ़ी है और भारत में वन्य जीवों की विविधता कितनी खूबसूरत है ये भी गौर करने लायक है। एशियाटिक लायन देश के पश्चिमी हिस्से में पाए जाते हैं, जबकि टाइगर का क्षेत्र है पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत वहीं गैंडा पूर्वोत्तर में मिलते हैं। भारत का हर हिस्सा ना केवल प्रकृति के लिए संवेदनशील है बल्कि वन्य जीव संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अगले महीने की शुरुआत में हम वन्य जीव संरक्षण दिवस मनाएंगे। मेरा आग्रह है कि आप वन्य जीव संरक्षण से जुड़े लोगों का हौसला जरूर बढ़ाएं। यह मेरे लिए बहुत संतोष की बात है कि इस क्षेत्र में अब कई स्टार्ट अप भी उभरकर सामने आए हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 15:04:21 +0530</pubDate>
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