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                <title>enrollment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - अब शिक्षक करेंगे हाउस होल्ड सर्वे, बढ़ाएंगे नामांकन</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षक विद्यालय आएंगे और डोर टू डोर घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---now-teachers-will-do-household-survey--will-increase-enrollment/article-111049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए अब शिक्षक हाउस होल्ड सर्वे करेंगे। इसी के साथ प्रवेशोत्सव के प्रथम चरण का आगाज हो गया है। ऐसे में अब शिक्षक विद्यालय आएंगे और डोर टू डोर घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करेंगे। हालांकि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 जुलाई से होगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने गत 8 अपे्रल को इस बार प्रवेशोत्सव में देरी से सरकारी स्कूलों का घटेगा नामांकन...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राजस्थान सकूल शिक्षा परिषद ने प्रवेशोत्सव को लेकर आदेश जारी किए। </p>
<p><strong>प्रवेशोत्सव का पहला चरण 9 मई तक </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सत्र 2025 -26 के लिए प्रवेशोत्सव के पहले चरण का आगाज मंगलवार से हो चुका है, जो 9 मई तक जारी रहेगा। इस दौरान शिक्षक घर-घर जाकर हाउस होल्ड सर्वे करेंगे और 3 से 18 वर्ष आयु के सभी बच्चों का चिन्हीकरण कर 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आंगनबाड़ियों में तथा 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिया दिलाएंगे। </p>
<p><strong>अनामांकित व ड्रॉप आउट बच्चों पर रहेगा फोकस </strong><br />शिक्षक नेता मोहर सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग के आदेशानुसार प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान नामांकन वृद्धि, अनामांकित व ड्रॉपआउट बच्चों एवं प्रवासी श्रमिकों के बच्चों एवं बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों तथा गाड़ी लुहार/घुमंतु परिवारों के बच्चों को विद्यालय में नामांकित करने पर विशेष फोकस रहेगा। शिक्षा से वंचित इन चिन्हित बालक-बालिकाओं की प्रविष्टि प्रत्येक शिक्षक द्वारा शाला दर्पण शिक्षक ऐप के माध्यम से की जानी है।</p>
<p><strong>प्रवेश महोत्सव का होगा आयोजन </strong><br />नव प्रवेशित विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन के लिए 8 मई से 10 मई तक विद्यालयों में प्रवेश महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विद्यार्थियों के अभिभावकों को आमंत्रित कर विद्यालय की प्रवेश समिति के साथ परिचित करवा कर प्रवेश ा्रक्रिया को पूर्ण किया जाएगा।</p>
<p><strong>दो चरणों में होगा डिजिटल प्रवेशोत्सव </strong><br /><strong>प्रथम चरण: </strong><br />- हाउस होल्ड सर्वे (बच्चों का चिन्हीकरण) - 15 अप्रैल से 9 मई तक। <br />- नामांकन अभियान (सीआरसी मॉड्यूल में प्रविष्टि) - 10 से 16 मई तक<br /><strong>द्वितीय चरण: </strong><br />- पुन: हाउस होल्ड सर्वे (शेष रहें बच्चों का चिन्हीकरण) - 1 जुलाई से 24 जुलाई तक। <br />- नामांकन अभियान 25 जुलाई से 18 अगस्त तक रहेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति का जताया आभार</strong><br />15 अप्रैल से प्रवेशोत्सव के आगाज किए जाने का विभाग का निर्णय स्वागत योग्य है। समय पर प्रवेशोत्सव शुरू होने से सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने में मदद मिलेगी।  गवर्नमेंट स्कूलों में प्रवेशोत्सव में देरी को लेकर दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर उच्चाधिकारियों को नामांकन में कमी से अवगत कराकर अलख जगाई। जिसका ही नतीजा है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रवेशोत्सव शुरू किए जाने के आदेश जारी किए। इसके लिए दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। <br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:31:07 +0530</pubDate>
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                <title>कही घी घणां कही न मुट्ठीभर चणा: गोरधनपुरा में 4 बच्चों को पढ़ा रहे 6 शिक्षक, गौणदी में 2 बच्चों पर दो शिक्षक </title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षकों की कमी से अध्यापन बाधित। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/somewhere-there-is-a-lot-of-ghee-and-somewhere-there-is-a-handful-of-chana/article-96227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। इटावा में सरकारी शिक्षा का सिस्टम भी अलग ही इटावा ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था के लिए हालात इस कदर है कि कही नामांकन है छात्रों का लेकिन शिक्षक नहीं है और कही नामांकन नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक है। ऐसी स्थिति में इटावा क्षेत्र में सरकारी सिस्टम की खामी नजर आती है जो शिक्षा व्यवस्था की पोल को खोल रही है। कही जर्जर भवन में स्कूल चल रहे है, कही विद्यार्थी भी नहीं होने के बाद भी स्कूल बन रहे हैं। क्षेत्र में हाड़ौती की वह कहावत चरितार्थ हो रही है कि कही घी घणों कही न मुट्ठी भर चना वाली हो रही है। इटावा ब्लॉक में 199 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और सीनियर सेकेंड्री स्कूल है। जिसमे 18773 बालक और बालिकाओं का नामांकन है और अध्ययन करती है। क्षेत्र के 199 स्कूलों में शिक्षकों के 1505 पद है जिसमे से 1223 कार्यरत है और 282 पद खाली चल रहे हैं। </p>
<p><strong>गोरधनपुरा में 4 बच्चों को पढ़ा रहे 6 शिक्षक</strong><br />इटावा ब्लॉक के खातौली ग्राम पंचायत के गोरधनपुरा गांव में करीब 50- 60 घरों की बस्ती है, लेकिन गांव के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 4 बच्चों का दाखिला है उनको पढ़ाने के लिए भी 6 शिक्षक कार्यरत है। यह स्थिति गोरधनपुरा की नहीं है, इस तरह के 17 विद्यालय है जिनमें बच्चों से ज्यादा शिक्षक हैं, तो कही बच्चे ही नहीं है, लेकिन स्कूल को खोलने के लिए ही शिक्षक है। </p>
<p><strong>इटावा उच्च प्राथमिक द्वितीय में नामांकन</strong><br />इटावा नगर के गेता रोड पर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में 285 बच्चों का नामांकन है । शिक्षा विभाग ने 14 पद स्वीकृत कर रखे लेकिन आधे पद खाली है। प्रधानाध्यापक  सहित 7 पद रिक्त है। ऐसे में विद्यालय में पढ़ाई  नहीं हो पाती जिसके चलते नामांकन बढ़ नहीं रहा। इटावा तरह राजकीय सीनियर विद्यालय इटावा में 1052 बच्चों का नामांकन है 44 पद स्वीकृत है लेकिन 30 ही नियुक्त है 14 पद रिक्त है। राजकीय सीनियर विद्यालय निमोला में 373 नामांकन है 17 पद स्वीकृत हैं लेकिन 10 ही कार्यरत हे 7 रिक्त है। यही स्थिति सीनियर विद्यालय पीपल्दा में 11 पद रिक्त है। इसी तरह  ढ़ीपरी चंबल, महात्मा गांधी करवाड़, सीनियर विद्यालय रामपुरिया धाबाई , बम्बुलियाकला,  डूंगरली विद्यालयों की है। इसके साथ संस्कृत विद्यालयों की भी यही स्थिति है जिसके चलते क्षेत्र में जहा नामांकन है वहां शिक्षकों की कमी होने के चलते पढ़ाई नहीं हो पा रही ।</p>
<p><strong>गौणदी में 2 बच्चों पर दो शिक्षक , डेढ़ दर्जन स्कूलों की यही हालत</strong><br />गणेशगंज ग्राम पंचायत की गौणदी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 2 शिक्षक हैं। वही पढ़ाने के लिए भी सरकार ने दो अध्यापक लगा रखे है। इसके अलावा पुराना भवन जर्जर होने के चलते नया भवन का निर्माण भी चल रहा है। विद्यालय के शिक्षक रामगोपाल मीना बताते है कि विद्यालय का भवन जर्जर है, वही इटावा नजदीक होने के कारण ज्यादातर बच्चे इटावा पढ़ने जाते है। इसलिए विद्यालय में नामांकन नहीं बढ़ पा रहा है। इसी तरह फरेरा में 2 बच्चों पर 1 शिक्षक है। शेरगंज में 2 बच्चों पर 2 शिक्षक है। हनुमानपुरा में 4 बच्चे, शहनाहली में 4 नामांकन, माधोनगर 5, जयनगर में 7, खेड़ली नोनेरा में 7, सब्जीपुरा में 7, मीना रोहिली 8, आरामपुरा में 9, बम्बुलिया खुर्द 9, किशनपुरा में 10,कोल्हूखेड़ा में 10 बच्चों के स्कूलों में नामांकन है। </p>
<p><strong>स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं</strong><br />ब्लॉक के शहनावदा ग्राम पंचायत के कंवरपुरा और निमोला ग्राम पंचायत के शेरगढ़ स्कूल में किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं है। नामांकन शून्य है लेकिन फिर भी शिक्षक लगा रखे है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />क्षेत्र में 1505 पद शिक्षकों के स्वीकृत हैं, जिनमें 282 रिक्त है। 18773 बच्चों का 199 स्कूलों में नामांकन है। जिन विद्यालयों में नामांकन कम है वहां नियुक्त शिक्षकों को नामांकन बढ़ाने के लिए निर्देशित किया हुआ है। अगर ऐसे विद्यालयों में नामांकन नहीं  बढ़े तो भविष्य में मर्ज होंगे। जहां शिक्षक कम है वहां नोडल प्रभारी को व्यवस्थार्थ लगाने को लेकर भी निर्देशित किया हुआ है । वही सभी विषयों से उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है। <br /><strong>- इंदु हाडा, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी इटावा ब्लॉक</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं ग्रामीणं</strong><br />गौणदी गांव करीब 100 घरों की बस्ती है, लेकिन इस गांव के स्कूल भवन की बिल्डिंग जर्जर हो गई थी, जिसके चलते ग्रामीण बच्चे नहीं भेजते। नवीन भवन का कार्य चल रहा है, जल्द ही पूर्ण हो जाएगा। वही इटावा नजदीक होने के कारण ग्रामीण निजी विद्यालय में भेज देते हैं। अभी गत दिनों ग्रामीणों की बैठक लेकर नामांकन बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की थी। <br /><strong>- हेमंत बैरवा, सरपंच गणेशगंज</strong></p>
<p>पीपल्दा विद्यालय में  400 के करीब बच्चे हैं, लेकिन 23 पद शिक्षकों के स्वीकृत होने के बाद भी 12 ही कार्यरत है, 11 रिक्त है जिसके चलते विद्यालय में अध्ययन नहीं हो पाता। रिक्त पदों को भरा जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई हो सके और निजी विद्यालय में नहीं जाना पड़े।<br /><strong>- नरोत्तम विकट, पीपल्दा ग्रामीण</strong></p>
<p>गोर्वधनपुरा करीब 60-70 घरों की बस्ती है, लेकिन यहां से खातौली नजदीक है, सरकारी स्कूल में पढ़ाई कम होती है। अध्यापक भी समय पर नहीं आते ऐसे में लोग बच्चों को स्कूल में नहीं भेजते। साथ स्कूल के अंदर बाउंड्री में जंगली पेड़ पौधे लगे हुए हैं । <br /><strong>- महेंद्र नागर ग्रामीण  गोवर्धनपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 15:39:22 +0530</pubDate>
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                <title>प्रवेशोत्सव के नाम फिर आंकड़ों का खेल</title>
                                    <description><![CDATA[तो भी पिछले सत्रों के की बराबरी नहीं हो पाएगी। ऐसे में क्या शिक्षा विभाग खाली अपनी पीठ थपथपाने के लिए आंकड़ों का खेल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/game-of-figures-again-in-the-name-of-praveshotsav/article-82279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/praveshotsav-ke-naam-phir-ankadon-ka-khel...kota-news-21.06.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । प्रदेश के स्कूलों में 24 जून से नया सत्र शुरू होने वाला है। शिक्षा विभाग की ओर नए सत्र में होने वाले प्रवेशोत्सव को लेकर तैयारियों भी शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित हुई बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच कई बिंदुओं पर चर्चा की गई जिसमें प्रमुख बिंदु सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने का रहा। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार विभाग ने सभी सरकारी विद्यालयों में पिछले सत्र की तुलना में इस सत्र में 20 फीसदी अधिक नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ताकि अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ सकें। लेकिन पिछले दो सत्रों के आंकड़ों पर गौर करें तो सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ने के स्थान पर घटा है। </p>
<p><strong>पिछले तीन साल में घटा नामांकन</strong><br />कोटा जिले सभी सरकारी विद्यालयों को मिलाकर कुल 1 हजार 56 विद्यालय संचालित हैं। विभाग की ओर से हर साल जारी होने वाली रिपोर्ट के आंकड़े ही विभाग के दावों की पोल खोल देते हैं। इन सभी विद्यालयों में नामांकन की स्थिति पर गौर करें तो विभाग के खुद के आंकडें बताते हैं कि पिछले तीन सत्रों से इन विद्यालयों में नामांकन कम होता जा रहा है, जिसमें हर कक्षा वर्ग शामिल हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कोटा के सरकारी विद्यालयों में सत्र 2021-22 के दौरान सभी कक्षाओं को मिलाकर कुल 1 लाख 84 हजार 949 था, जो सत्र 2022-23 के दौरान घटकर 1 लाख 74 हजार 852 रह गया। वहीं शाला दर्पण के अनुसार जिले के सरकारी विद्यालयों में गत सत्र 2023-24 के दौरान विद्यार्थियों की कुल संख्या 1 लाख 12 हजार 337 है। विभाग की ही रिपोर्ट के अनुसार विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, जो चिंताजनक बनी हुई है।</p>
<p><strong>20 फीसदी नामांकन बढ़ाने के बाद भी नहीं होगी भरपाई</strong><br />सरकारी विद्यालयों में घटते नामांकन को रोकने के लिए विभाग की ओर से हर साल प्रवेशोत्सव मनाया जाता है। लेकिन विद्यालयों में नामांकन बढ़ने के स्थान पर घटता जा रहा है। जिसका जवाब विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। वहीं दूसरी ओर अगर विभाग की ओर से इस सत्र के दौरान पिछली बार की तुलना में 20 फीसदी नामांकन बढ़ा भी दिया जाएगा। तो भी पिछले सत्रों के की बराबरी नहीं हो पाएगी। ऐसे में क्या शिक्षा विभाग खाली अपनी पीठ थपथपाने के लिए आंकड़ों का खेल रहा है।</p>
<p><strong>शिक्षकों और सुविधाओं की कमी सबसे बड़ा कारण</strong><br />शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ही कोटा के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के करीब 2 हजार पद खाली पड़े हैं। जिनमें कई पद ऐसे हैं जो कठिन माने जाने वाले विषयों से जुड़े हैं। कोटा जिले में 564 तृतीय श्रेणी, 4245 द्वितीय श्रेणी और 275 पद प्रथम श्रेणी के खाली पड़े हैं। इनमें संस्कृत, विज्ञान, भौतिकी, गणित के शिक्षकों के पद सबसे ज्यादा खाली हैं। इसके अलावा कई विद्यालयों में आज भी मूलभूत सुविधाएं मौजूद नहीं है। जो भी नामांकन घटने का एक बड़ा कारण है।</p>
<p><strong>विद्यार्थी का कहना है</strong><br />मेरा नामांकन कंसुआ सरकारी स्कुल में था मुझे संस्कृत भाषा में पढ़ाई करनी थी। लेकिन विद्यालय में संस्कृत का कोई अध्यापक ही नहीं है। इसलिए मजबूरी में दुसरी जगह प्रवेश लेना पड़ा।<br /><strong>-रामकरण योगी, कंसुआ</strong></p>
<p>सरकारी विद्यालय में नामांकन तो है लेकिन केमिस्ट्री और फिजिक्स सब्जेट हैं और इनके लिए विद्यालय में पर्याप्त लैब नहीं है। इसकी वजह से काफी परेशानी होती है।<br /><strong>-सुनील मीणा, बोराबास</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नामांकन कम होना चिंताजनक है जिसे बढ़ाने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इस बार विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। वहीं नामांकन बढ़ाने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर सम्मानित करने की योजना बनाई है। वहीं जो बच्चे ड्रॉप कर गए हैं उन्हें भी पुन: प्रवेश दिलाने की कोशिश की जाएगी। <br /><strong>-के के शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jun 2024 15:34:59 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीए कोर्स का हो गया बुरा हाल, लगातार घट रहा नामांकन </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) से जुड़े सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में एमबीए कोर्स का बुरा हाल है। प्रदेश के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों से छात्र मैनेजर बनने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि पिछले साल एमबीए कोर्स में छात्रों की बड़ी संख्या में बेरुखी सामने आई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-interested-in-mba--enrollment-is-decreasing-continuously/article-11216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/universirty.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) से जुड़े सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में एमबीए कोर्स का बुरा हाल है। प्रदेश के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों से छात्र मैनेजर बनने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि पिछले साल एमबीए कोर्स में छात्रों की बड़ी संख्या में बेरुखी सामने आई। हालात यह है, रीप व आरमेट काउंसलिंग होने के बाद भी एमबीए में हजारों सीटें खाली रह गई। आरटीयू से जुड़े सभी सरकारी व निजी कॉलेज-यूनिवर्सिटियों में वर्ष 2008-09 में जहां 5 हजार 818 विद्यार्थियों का नामांकन था वहीं यह संख्या घटकर वर्ष 2020-21 में मात्र 1094 ही रह गई। इन 14 सालों में जहां एमबीए का ग्राफ लगातार गिरा वहीं बीटेक से भी बच्चों का मोह भंग हुआ है। इन वर्षों में 16 हजार से ज्यादा नामांकन घट गए हैं। इसके अलावा अन्य टेक्निकल कोर्सों का भी यही हाल है। <br /><br /><strong>एक हजार से ज्यादा एमबीए की सीटें खाली</strong><br />जानकार बताते हैं, राजस्थान इंजीनियरिंग प्रोसेज (रीप) व राजस्थान मैनेजमेंट एप्टीट्यूट टेस्ट (आरमेट) काउंसलिंग में पिछले साल भी एमबीए कोर्स में दाखिला लेने के लिए छात्रों ने रूचि नहीं दिखाई। प्रदेश के सरकारी व निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में वर्ष 2021-22 में एमबीए की 2 हजार से अधिक सीटों पर महज 1 हजार सीट पर ही छात्रों ने दाखिला लिया। हालांकि अभी वर्ष 2022-23 के लिए आरटीयू में एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं किया गया है। जानकारों के मुताबिक इस बार शुरूआत से ही एमबीए कोर्स में छात्रों का बहुत कम रूझान नजर आ रहा है। <br /><br /><strong>बीटेक का भी बुरा हाल </strong> <br />मैनेजमेंट ही नहीं इंजीनियरिंग के भी बुरे हाल हैं। वर्ष 2008-09 में जहां 25 हजार 244 विद्यार्थियों का नामांकन था वहीं यह संख्या घटकर वर्ष 2020-21 में 8 हजार 988 रह गई। यानी इन वर्षों में 16 हजार 256 छात्र कम हो गए। नाम न छापने की शर्त पर बीटेक छात्रों ने बताया कि इस समस्या के पीछे आरटीयू प्रशासन की लेटलतीफी जिम्मेदार है। हम अभी तीसरे सेमेस्टर में हैं और अभी तक पहले सेमेस्टर का रिजल्ट घोषित ही नहीं किया। इसके अलावा र्प्याप्त प्लेसमेंट भी नहीं कराया जा रहा। <br /><br /><strong>औंधे मुंंह गिरा बीटेक के प्रति रुझान</strong> <br />आरटीयू से मिले आंकड़ों के अनुसार शुरुआती 8 सालों में बीटेक स्टूडे्ंटस की पहली पसंद थी लेकिन आखिरी के 6 सालों में यह पसंद नापसंद में बदल गई। दरअसल, वर्ष 2008 से 2015 तक बीटेक में छात्रों का नामांकन तेजी से बढ़ा लेकिन 2016 से 21 तक विद्यार्थियों की संख्या अर्श से फर्श तक पहुंच गई। <br /><br /><strong>अर्श से फर्श पर पहुंचा होटल मैनेजमेंट</strong><br />होटल मैनेजमेंट की बात करें तो इसकी स्थिति सबसे बुरी है। आरटीयू से जुड़ा यह प्रदेश का पहला कॉलेज है जो भरतपुर जिले में है। वर्ष 2008 में 180 विद्यार्थियों का नामांकन था जो साल दर साल घटकर 2021 में 0 हो गया है। हालात यह हो गए कि इस कोर्स के लिए ढूंढने से भी बच्चे नहीं मिल रहे। जानकारों के अनुसार, इस कोर्स के विद्यार्थियों को अपेंडशिप, प्लेसमेंट, प्रैक्टिकल टैÑनिंग, लाइव सेशन नहीं मिल पाया। इंस्टीट्यूट बच्चों से मोटी फीस तो लेते हैं लेकिन कोर्स के अनुरूप सुविधाएं नहीं दे पाते।<br /><br /><strong>एमटेक और एमसीए में तेजी से गिरा नामांकन</strong><br />एमटेक में भी समय के साथ छात्रों का रूझान कम होता गया। आरटीयू को मिलाकर प्रदेश के 26 कॉलेजों में 1402 सीटों पर एमटेक कराया जा रहा है, जहां पिछले साल मात्र 444 छात्रों ने ही एडमिशन लिया। एज्युकेशन से जुड़े लोगों के अनुसार शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से बच्चों को क्वालिटी कंटेंट नहीं मिल पा रहा। जिससे व्यवहारिक समझ नहीं बढ़ने और रोजगार नहीं मिलने से छात्रों का रुझान तेजी से घटा है। इधर, एमसीए मास्टर डिग्री की भी यही कहानी है, वर्ष 2008 में जहां 1068 छात्रों का नामांकन था जो 2009 से 2014 तक तेजी से बढ़ा। हालांकि इन 6 सालों में नामांकन की संख्या घटती-बढ़ती रही लेकिन वर्ष 2015 से यह आंकड़ा तेजी से गिरा और 2021 में 484 ही रह गया। हैरानी की बात यह है, कि एक भी सरकारी कॉलेज में एमसीए नहीं कराया जा रहा। आरटीयू से मान्यता प्राप्त 17 प्राइवेट कॉलेजों में 1170 सीटों पर यह कोर्स कराया जा रहा है। ऐसे में पिछले साल तक 686 सीटें खाली रह गई। <br /><br /><strong>स्कोलर्स की संख्या बढ़ी</strong><br />कॉलेज-यूनिवर्सिटियों में जितनी तेजी से डिग्री कोर्सज में नामांकन घटा उतनी ही रफ्तार से स्कोलर्स की संख्या भी बढ़ी। वर्ष 2009-10 में जहां पीएचडी में 2 नामांकन थे वहीं 2020-21 में यह आंकड़ा 35 तक पहुंच गया। हालांकि वर्ष 2017 -18 में सबसे ज्यादा 90 स्कोलर्स का नामांकन हुआ। <br /><br /><strong>क्वालिटी कंटेंट की कमी</strong> <br />राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) में एमबीए की 60 सीटें हैं, जो हमेशा फुल रहती है। हालांकि आरटीयू से जुड़े अन्य कॉलेजों में नामांकन घटा है। इसका सबसे बड़ा कारण क्वालिटी कंटेंट और पर्याप्त प्लेसमेंट की कमी है। वहीं, प्राइवेट कॉलेजों में फैकेल्टी  की सैलरी कम होती है, ऐसे में क्वालीफाई टीचर नहीं मिल पाते। जबकि, आरटीयू में अधिकतर प्रोफेसर आईआईटी क्वालिफाइड हैं। हमने च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम लागू किया है। जिसके तहत छात्रों को फाइनेंस के साथ एचआर में भी स्पेशलाइजेशन करवाया जा रहा है। यह सिस्टम पूरे राजस्थान में सबसे पहले आरटीयू ने लगाया है। <br /><strong>-धीरज कुमार पवोलिया, डीन अकेडमिक अफेयर्स आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 15:44:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>केंद्रीय विद्यालयों में नामांकन मेें एमपी कोटा समाप्त करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों के कोटे से विद्यार्थियों के होने वाले नामांकन की व्यवस्था को समाप्त करने की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bharatiya-janata-party-s-sushil-kumar-modi-demanded-to-end-the-system-of-enrollment-of-students-from-the-quota-of-mps-in-kendriya-vidyalayas-in-the-rajya-sabha/article-6730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/vikyalaya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सुशील कुमार मोदी ने शुक्रवार को राज्यसभा में केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों के कोटे से विद्यार्थियों के होने वाले नामांकन की व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Mar 2022 16:14:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदेश के 3433 राजकीय माध्यमिक और 395 बालिका विद्यालय होंगे सीनियर में क्रमोन्नत</title>
                                    <description><![CDATA[ क्रमोन्नत विद्यालय सत्र 2022-23 से प्रारंभ होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/3433-government-secondary-and-395-girls--schools-of-the-state-will-be-upgraded-to-senior--government-has-issued-instructions--school-wise-enrollment-will-have-to-be-sent-along-with-the-proposal/article-6574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ss.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के 3433 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों और 395 राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय सीनियर सैकेंडरी में क्रमोन्नत होंगे। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया तेज कर दी है। इन 3828 विद्यालयों से विभाग ने सूचनाएं मांगी थी। इसके बाद विभाग ने आगामी कवायद शुरू कर दी है। सरकार ने निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे की विभाग आगामी शैक्षणिक सत्र में इन स्कूलों को क्रमोन्नत कक्षा में पढ़ाई शुरू कर सकेंगे। <br /><br />    क्रमोन्नत विद्यालय सत्र 2022-23 से प्रारंभ होंगे। <br />    स्वीकृति के वर्ष सुविधानुसार कक्षा 11 व 12 एक साथ प्रारंभ की जा सकती है। <br />    इन विद्यालयों में कला संकाय एवं संकाय के अंतर्गत तीन ऐच्छिक विषयों का निर्धारण विद्यार्थियों की आवश्यकता एवं रूचि के आधार पर विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति (एसडीएमसी) से प्रस्ताव प्राप्त कर प्रारंभि किया जाए। <br />    स्टाफिंग पैटर्न के अनुसार नव क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रथम वर्ष में केवल ऐच्छिक विषय के व्याख्याता ही देय होंगे। अनिवार्य विषय हिन्दी व अंग्रेजी के शिक्षण के लिए व्याख्याता के स्थान पर वरिष्ठ अध्यापक दिए जाएंगे। <br />    नवक्रमोन्नत विद्यालयों में नव सृजित व्याख्याताओं के पदों को भरे जाने तक वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग में ओप्रेट किया जाएगा, लेकिन इन पदों की गणना सीधी भर्ती व पदोन्नति के लिए व्याख्याता संवर्ग में ही किया जाएगा। <br />    क्रमोन्नत करने से पूर्व विद्यालय का नाम, स्तर, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति आदि के नामों की जांच होगी। <br />    क्रमोन्नत विद्यालयों में पर्याप्त नामांकन होने पर सृजित करने वाले पदों एवं समाप्त किए जाने वाले पदों के प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र भिजवाने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 12:51:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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