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                <title>soil - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भरतपुर में चंबल परियोजना की पाइप लाइन डालने के दौरान हादसा : मिट्टी ढहने से चार की मौत, 6 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान में भरतपुर के गहनौली थाना क्षेत्र में जंगी के नगला के पास रविवार को चंबल परियोजना की पाइप लाइन डालने के दौरान मिट्‌टी ढहने से एक युवक और 3 महिलाओं की मौत हो गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/four-killed-by-killing-soil-in-bharatpur-6-injured/article-118884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(11)3.png" alt=""></a><br /><p>भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर के गहनौली थाना क्षेत्र में जंगी के नगला के पास रविवार को चंबल परियोजना की पाइप लाइन डालने के दौरान मिट्‌टी ढहने से एक युवक और 3 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य घायल हो गए।</p>
<p>पुलिस सूत्रों ने बताया कि जंगी के नगला के पास सुबह पाइप लाइन के लिए की गई खुदाई में निकली पीली मिट्‌टी को भरने के लिए 15 महिला पुरूष करीब 10 फुट गहरे गड्‌ढे में उतरे थे। इसी दौरान मिट्‌टी भरभराकर उनके ऊपर गिर गई। इस पर ग्रामीणों ने तुरंत फावड़ों से खुदाई करके मिट्‌टी में दबे सभी लोगों को निकाल लिया और उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि अस्पताल में अनुकूल (22), योगेश कुमारी (25), विनोद देवी (55) और विमला देवी (45) को चिकित्सकों ने मृतक घोषित कर दिया। जबकि घायलों में 4 को उनके परिजन निजी अस्पताल ले गए दिनेश (38) और जयश्री (50) को भर्ती कर लिया गया। 5 अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jun 2025 16:36:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से जैविक तत्व हो रहे समाप्त, घटने लगा है फसलों का उत्पादन</title>
                                    <description><![CDATA[ क्षेत्र में खेतों की मिट्टी की सेहत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। पोषक तत्वों की लगातार कमी के कारण फसलों का उत्पादन घटने लगा है और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/organic-elements-are-being-depleted-due-to-the-use-of-chemical-fertilizers/article-113890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। क्षेत्र में खेतों की मिट्टी की सेहत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। पोषक तत्वों की लगातार कमी के कारण फसलों का उत्पादन घटने लगा है और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर होने के चलते उपज में भी पोषक तत्वों की कमी देखी जा रही है। इसके अलावा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी में जरूरी जैविक तत्व समाप्त हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से जैविक खाद और कम्पोस्ट खाद का उपयोग न करने के कारण मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा तेजी से घट रही है। कई खेतों की मिट्टी की जांच रिपोर्ट में कार्बनिक स्तर 0.10 प्रतिशत से भी कम पाया गया है, जबकि उपयुक्त खेती के लिए यह स्तर कम से कम 0.75 प्रतिशत होना जरूरी है। कार्बनिक तत्वों के शून्य स्तर पर आने की स्थिति में खेत बंजर हो जाते हैं और खेती करना लगभग असंभव हो जाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पहले की तुलना में अब गेहूं और चने लहसुन की पैदावार कम हो गई है। खाद की मात्रा बढ़ाने के बावजूद उत्पादन नहीं बढ़ रहा। किसानो को जैविक तरीकों से खेती करने पर ध्यान देना चाहिए और सरकार को किसानों को आर्थिक मदद पर ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- प्रेम सिंह मीणा, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन  </strong></p>
<p>मिट्टी की सेहत को बनाए रखने के लिए किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की जरूरत है। लगातार एक ही प्रकार की फसल लेने और रासायनिक खादों पर निर्भरता मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रही है। <br /><strong>- ओमप्रकाश मीणा, सहायक कृषि अधिकारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 18:20:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ऑनलाइन का दावा हवा हवाई, खेत की मिट्टी सोना उगलेगी या हवा, नहीं जान पा रहे</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले की बात करें तो यहां पर केवल 5 हजार किसान ही इससे लाभान्वित हो पाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/online-claim-is-like-wind--not-able-to-know-whether-the-soil-of-the-field-will-spew-out-gold-or-the-wind/article-72576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/online-ka-dawa-hawa-hawai,-khet-ki-mitti-sona-uglegi-ya-hawa,-nhi-jaan-pa-rhe...kota-news-13-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि विभाग की ओर से मिट्टी की सेहत घर बैठे ऑनलाइन पता लगाने के दावों की हवा निकल गई है। हालत यह है कि प्रदेश में सिर्फ 48 हजार किसान ही अब तक मिट्टी की सेहत के बारे में ऑनलाइन जानकारी ले पाए हैं। खेतों में मिट्टी कितनी उपजाऊ है, इसकी जानकारी किसानों को ऑनलाइन देने का दावा कृषि विभाग कर रहा है। लेकिन प्रदेश भर के सिर्फ 48 हजार किसानों को ही इसका फायदा मिला है। वहीं कोटा जिले की बात करें तो यहां पर केवल 5 हजार किसान ही इससे लाभान्वित हो पाए हैं। </p>
<p><strong>सैम्पल अधिक, प्रयोगशालाओं की क्षमता कम</strong><br />सरकार के निर्देश पर इस साल मार्च माह के अंत तक तीन लाख सैम्पल लेने का लक्ष्य दिया गया था। इसके बाद प्रदेश में 2 लाख से अधिक सैम्पल ले लिए गए, लेकिन प्रदेश में स्थित प्रयोगशालाओं की क्षमता कम होने से अभी तक केवल 48 हजार सैम्पल की जांच रिपोर्ट ही ऑनलाइन हो पाई है। कोटा जिले में केवल दो प्रयोगशालाएं हैं। यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों की है। इस कारण अधिकांश सैम्पल की जांच रिपोर्ट ऑनलाइन नहीं हो पाई है। इससे किसानों को सैम्पल की जांच कराने का फायदा नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p><strong>यह होती है प्रक्रिया</strong><br />कृषि पर्यवेक्षकों की ओर से किसानों का पंजीयन किया जाता है। इसके बाद उसे सॉयल हैल्थ कार्ड ऐप पर ऑनलाइन किया जाना है। प्रयोगशालाओं में प्राप्त मिट्टी के नमूनों की जांच कर सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल पर जांच परिणामों को डालना है। यह कार्ड कृषि पर्यवेक्षक किसानों को उपलब्ध कराते हैं। जिनको कार्ड नहीं मिला, वे सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल पर लॉग इन कर मोबाइल नम्बर दर्ज कर कार्ड की जानकारी ले सकते हैं।</p>
<p><strong>इनकी हो रही जांच</strong><br />कृषि विभाग की ओर से जो जांच की जा रही है उसमें मिट्टी की ईसी (विद्युत चालकता), पीएच, जैविक कार्बन, फास्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म पोषक तत्वों में जस्ता, लोहा, तांबा, मैगनीज, सल्फर आदि शामिल हैं।  वर्ष 2015 में सॉयल हैल्थ कार्ड योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर उसकी पोषकता का पता लगाना और उसे ऑनलाइन करना था। योजना के तहत इस साल मार्च अंत तक तीन लाख किसानों के खेतों से मिट्टी के सैंपल लेकर उसे ऑनलाइन करने का लक्ष्य दिया गया हैं। </p>
<p><strong>पोर्टल पर ऐसे मिलेगी जानकारी</strong><br />सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में तीन लाख किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर ऑनलाइन करने का लक्ष्य दिया है। जबकि हकीकत यह है कि गिने-चुने किसानों को ही घर बैठे मिट्टी के उपजाऊपन के बारे में जानकारी मिल पा रही है। जिन किसानों के सॉयल हैल्थ कार्ड ऑनलाइन हो चुके। वे सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल पर जाकर फार्मर कॉर्नर में मोबाइल नंबर डालकर कार्ड खोल सकते हैं। मिट्टी कितनी उपजाऊ है, उसमें कितने पोषक तत्व हैं और कौन-कौन से पोषक तत्व डालकर मिट्टी को उपजाऊ बनाया जा सकता है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />रबी सीजन में सरसों की बुवाई से पहले कृषि विभाग ने उसके खेत से मिट्टी की जांच के लिए सैम्पल लिया था। अभी तक उसकी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन नहीं हो पाई है। अब तो सरसों की फसल भी खेत में तैयार हो चुकी है। जांच रिपोर्ट समय पर मिलने पर ही फायदा हो सकता है।<br /><strong>- त्रिलोक कुमार, किसान </strong></p>
<p>खेतों से मिट्टी के सैंपल लेकर उसका डाटा ऑनलाइन करवाया जा रहा है। प्रयास है जल्द से जल्द सभी का डाटा ऑनलाइन हो और किसानों को कार्ड बनने से फायदा मिले। अब तक करीब पांच हजार नमूनों की जांच ऑन लाइन की गई है।<br /><strong>- रमेश चंडक, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 17:22:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किसान खराब कर रहे माटी की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[ फसलों में अधिक पैदावार पाने के फेर में किसान गोबर तथा वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद) के बजाय धड़ल्ले से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे खेतों में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/farmers-are-spoiling-the-health-of-the-soil/article-30628"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/kissan-kharab-kar-rahe-maati-ki-sehat...kota-news..24.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में किसानों के अधिक फसल उत्पादन की चाह में अंधाधुंध यूरिया उपयोग करने के चलन ने खेतों की भूमि बंजर होने का खतरा पैदा कर दिया है। अधिक यूरिया खाद डालने से खेतों में जमीन की उर्वरता कम होने के साथ जमीन में पथरीली गांठें बनने लगी हैं। कृषि विभाग के अनुसार इस साल रबी की फसल में जिले के किसानों ने आवश्यकता से सात हजार मीट्रिक टन अधिक खाद खेतों में डाल दिया है। यूरिया खाद भी एक मुश्त डाल रहे हैं। जबकि इसे जरूरत के मुताबिक भी तीन चरण में डालना होता है। सामान्यत: जिले में इस फसल में जहां 35 हजार एमटी यूरिया की जरूरत होती है, जबकि 40 से 45 हजार एमटी तक डाला जा रहा है। जानकारों का मानना है कि जमीन पर बनने लगी पथरीली गांठों को फिर से पहले जैसा करने के लिए प्राचीन खेती के तरीके कारगर हो सकते हैं। इसमें देसी खाद का उपयोग बढ़ाना होगा।</p>
<p><strong>मिट्टी जांच में किसान नहीं दिखाते रुचि</strong><br />खेत की मिट्टी की हर किसान को जांच करानी चाहिए। इससे पता चलता है कि मिट्टी में कौनसे तत्व की कमी है। किसान स्वयं मिट्टी परीक्षण में रुचि नहीं दिखाते हैं। वर्ष भर में केवल 100-150 किसान ही अपने खेत की मिट्टी को परीक्षण के लिए लेकर आते हैं। जबकि टारगेट पूरा करने के लिए कृषि पर्यवेक्षक ही मिट्टी के नमूने लेकर पहुंचते हैं। पूर्व में हुई मिट्टी परीक्षण में सामने आया था कि अधिकांश में आर्गेनिक खाद की कमी है। वहीं रासायनिक खाद भरपूर मात्रा में उपयोग किया गया है। इससे प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं।</p>
<p><strong>नाइट्रोजन-जिंक की सबसे अधिक कमी</strong><br />मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के अधिकारियों के अनुसार फसलों में अधिक पैदावार पाने के फेर में किसान गोबर तथा वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद) के बजाय धड़ल्ले से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे खेतों में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। वे नाइट्रोजन, फास्फोरस का वातावरण से ट्रांसफॉर्मेशन नहीं कर पाते हैं। इस कारण पौधों को प्राकृतिक पोषक तत्व मिलने के बजाय रासायनिक उर्वरक पर ही निर्भर रहना पड़ता है। क्षेत्र में सबसे अधिक नाइट्रोजन तथा जिंक की कमी है। नाइट्रोजन की कमी पूरी करने के लिए यूरिया खाद तो डाल देता है, लेकिन जिंक महंगी होने के कारण उसका उपयोग नहीं करता है। </p>
<p><strong>यह है तरीका खाद डालने का</strong><br />जानकारों के मुताबिक यूरिया खाद को खेतों में तीन चरणों में डालना होता है। सरसों की एक हैक्टेयर फसल में 30 किलो नाइट्रोजन, 75 किलो यूरिया, 15 किलो सल्फर, 40 किलो डीएपी डालना होता है। इसमें सबको मिलाकर 50 प्रतिशत तो बुवाई से पहले और 25-25 प्रतिशत सिंचाई और अंतिम चरण में देना होता है। जबकि किसान सबको पहले ही एक साथ डाल रहा है।</p>
<p><strong>यह होता है रासायनिक खाद उपयोग का नुकसान</strong><br />1.     मृदा प्रदूषण<br />2.     मृदा उर्वरता क्षमता में कमी से सूक्ष्म जीवों की संख्या में कमी<br />3.     मृदा पीएच मान में बदलाव (अम्लीय व क्षारीय)<br />4.     ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि</p>
<p><strong>बढ़ता जा रहा है पीएच स्तर</strong><br />कृषि विभाग की मिट्टी जांच अनुसंधान केन्द्र जिले के प्रत्येक खेतों से मिट्टी के नमूने ले रहा है। इसमें जिले में पीएच स्तर बढ़ रहा है। जिले में पीचएच 7.5 होना चाहिए, जो अब बढ़कर 8.5 पहुंच गया है। हालांकि यह इतना ज्यादा नहीं है, लेकिन इसे रोका नहीं गया और स्तर अधिक हो गया तो जमीन खेती लायक नहीं रहेगी। उसमें लवण बढ़ जाएगा और वहां खेती नहीं होगी। अधिकारियों ने बताया कि अनुसंधान केन्द्र की ओर से एक बीघा खेत से करीब 6 नमूने लिए जाते हैं। इनकी जांच के बाद मिट्टी की उत्पादन क्षमता का पता चलता है। इस साल जिले में रबी की बुवाई का लक्ष्य 3 लाख से अधिक हैक्टेयर में रखा गया है। कृषि विभाग के मुताबिक इसमें 35 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की जरूरत है, जबकि किसान इससे अधिक 40 से 45 एमटी तक खाद का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है......</strong><br />यूरिया की जगह देसी खाद महंगा पड़ता है। जिससे किसानों को आर्थिक हानि होती है। उसकी जगह यूरिया का उपयोग किया जाता है।<br /><strong>-हरिसिंह गुर्जर, किसान, जाखडोंद</strong></p>
<p>फसलों की वृद्धि के लिए खेतों में यूरिया खाद का उपयोग किया जाता है। यूरिया खाद फसलों में देने से पौधे तेजी से विकास करते हैं। जिससे फसल की पैदावार अच्छी होती है।<br /><strong>-गब्बू, किसान, अरंडखेड़ा</strong></p>
<p>किसास अधिक पैदावार के कारण रासायनिक खाद को प्रयोग कर रहे हैं। इनको मिट्टी का परीक्षण कराकर फिर खाद का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए किसान गोष्ठी कराकर लगातार समझाइश की जाती है। किसान रासायनिक तथा गोबर व वर्मी कम्पोस्ट का अनुपात 60:40 रख सकते हैं। इससे उनकी फसल भी बढ़ेगी। साथ ही पौधों को प्राकृतिक पोषक तत्व भी मिलेंगे। वहीं मृदा का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।<br /><strong>-पिन्टूलाल, सहायक कृषि अधिकारी, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Nov 2022 14:32:28 +0530</pubDate>
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                <title>जानिए, राजस्थान की माटी में जन्मे उन सितारों के बारे में जिनसे संगीत की दुनिया सजी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान का रंग और उसकी महक यहां के संगीत के घरानों से निकल कर पूरी दुनिया में फैली है। एक फनकार थे खेमचंद प्रकाश, जिन्होंने दुनिया को लता मंगेशकर और किशोर कुमार से मिलवाया। सुजानगढ़ में जन्मे खेमचंद ने लता से फिल्म महल (1949) में आएगा आने वाला गवाकर उनको प्रसिद्ध किया तो किशोर कुमार से जिद्दी (1948) में मरने की दुआएं क्यूं मांगूं, जीने की तम्मना कौन करे गवाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/know-about-the-stars-born-in-the-soil-of-rajasthan/article-12707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/world--music-day.jpg" alt=""></a><br /><p> <br /><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान का रंग और उसकी महक यहां के संगीत के घरानों से निकल कर पूरी दुनिया में फैली है। एक फनकार थे खेमचंद प्रकाश, जिन्होंने दुनिया को लता मंगेशकर और किशोर कुमार से मिलवाया। सुजानगढ़ में जन्मे खेमचंद ने लता से फिल्म महल (1949) में आएगा आने वाला गवाकर उनको प्रसिद्ध किया तो किशोर कुमार से जिद्दी (1948) में मरने की दुआएं क्यूं मांगूं, जीने की तम्मना कौन करे गवाया। दान सिंह संगीतकार खेमचंद के चेले थे, जिनका माय लव का तेरे प्यार का गम क्या ही मशहूर हुआ। जयपुर में 15 अप्रैल, 1918 को जन्मे इकबाल हुसैन उर्फ हसरत जयपुरी की, जिनके गाने राज कपूर की फिल्मों का आईना थे। सारंगा तेरी याद में, ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ज्योत से ज्योत जगाते चलो गानों से देश ही नहीं विदेशों में पहचान बनाने वाले गीतकार पंडित भरत व्यास चूरू से थे।</p>
<p><br />हुनर आवाज का हो तो हर इंसान दिल से जुड़ जाता है। ऐसे ही जादुई आवाज के मालिक थे गजल सम्राट मेहदी हसन, राजस्थान के झुंझुनूं जिला मुख्यालय से 11 किलोमीटर दूर मलसीसर रोड पर स्थित गांव लूणा की मिट्टी से हमेशा मेहदी हसन की खुशबू आती रहेगी। मुबारक बेगम भारत की हिन्दी फिल्मों में पार्श्व गायिका रही। इनका जन्म चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे में हुआ था। उन्होंने 1950-70 के दशक के बीच सैकड़ों गीतों और गजलों को आवाज दी थी। फिल्म हमारी याद आएगी का सदाबहार गाना कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आएगी मुझको अपने गले लगा लो ओ मेरे हम राही और हम हाल-ए-दिल गीत गाए थे। नींव का वो पत्थर, जिस पर संगीत का घराना खड़ा होता है ऐसे थे पंडित शिवराम जो जोधपुर में जन्मे। वो जब याद आए ,‘बड़े प्यार से मिलना सबसे दुनिया में इंसान रे गीत खूब लोकप्रिय हुए। फोक गीतों में सबसे पहला नाम याद आता है रेशमा का। दमादम मस्त कलंदर और लंबी जुदाई जैसे गीत उनकी पहचान थे उनका जन्म राजस्थान में बीकानेर में बंजारा परिवार में हुआ था, रेगिस्तानी मिट्टी और बंजारों की मस्ती पूरी शिद्दत से महसूस होती है फिल्म हीरो के गीत, ‘चार दिनां दा प्यार हो रब्बा बड़ी लंबी जुदाई’ से।</p>
<p><br />फोक और इला अरुण राजस्थान की शान है। जोधपुर में जन्मी इला अरुण ने बॉलीवुड में कई गीत गाए हैं। फिल्म खलनायक का ‘चोली के पीछे क्या है’ के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का फिल्म फेयर पुरस्कार जीता। गजल वो दरिया है, जहां जज्बातों में डूब कर दिलो से जुड़ा जाता है। गजल गायक पदमश्री जगजीत सिंह का जन्म राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित श्रीगंगानगर में हुआ था, उनकी गाई गजलें सरहदों से परे थी ‘वो कागज की कश्ती’ आज भी बचपन की मासूमियत से जोड़े रखती है।</p>
<p>ऐसे ही राजस्थान के रंगों में रंगे हैं उस्ताद अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन जयपुर से दो भाई हैं जो क्लासिकी गजल गायकी करते हैं, क्लासिकी ठुमरी पहली एलबम गुलदस्ता है जो बहुत कामयाब रहा। ऐसे ही एक जोड़ी है चाचा-भतीजा दिलीप सेन-समीर सेन की आईना और ये दिल्लगी के गीत तो बहुत ही मशहूर हुए ‘ओले-ओले-ओले’। यशराज चोपड़ा, इन्हें तानसेन ही बुलाते थे।वो गायिका जिनके गीत शहद से भी मीठे हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जन्मी श्रेया घोषाल का पालन पोषण राजस्थान के रावतभाटा में हुआ था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 15:00:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : जलदाय विभाग चेता, सड़क पर फैली मिट्टी को उठाना किया प्रारंभ </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने के बाद और एसडीएम बलबीर सिंह चौधरी के निर्देश के बाद  विभाग ने सक्रिय होकर शुक्रवार को  जगह जगह पड़े अनावश्यक मिट्टी के ढेरों को उठाना प्रारंभ कर दिया हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-supply-department-started-lifting-the-soil-spread-on-the-road/article-11900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/r1.jpg" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। कस्बे में शुक्रवार को प्रकाशित दैनिक नवज्योति में  सड़क खोदकर जिम्मेदार अधिकारी भूले, कस्बे वासियो का निकलना  हो रहा मुश्किल...  शीर्षक से खबर प्रकाशित के बाद जलदाय विभाग चेता हैं। जलदाय विभाग ने नवज्योति में प्रकाशित खबर को गंभीरता से लिया और सड़क पर फैली मिट्टी को हटवाना शुरु करवाया। <br /><br /> कस्बे में पिछले एक महीने से पेयजल योजना को लेकर पाइप लाइन बिछाई कार्य प्रगति पर चल रहा हैं पाइप लाइन बिछाई के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे  में विभाग द्वारा वापस ठीक प्रकार से मरम्मत नही की जा रही हैं जिसके आमजन आने व जाने में  भारी असुविधा महसूस रहा था। ग्रामीण नेमीचंद चांदीजा, रामपाल सैनी, राजू सुमन,पारी बाई माली ने प्रशासन से उचित कार्यवाही की मांग की थी। मामले पर खबर प्रकाशित के बाद और एसडीएम बलबीर सिंह चौधरी के निर्देश के बाद  विभाग ने सक्रिय होकर शुक्रवार को  जगह जगह पड़े अनावश्यक मिट्टी के ढेरों को उठाना प्रारंभ कर दिया हैं। मिट्टी का एक  स्टोक किया जा रहा हैं ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उपयोग लिया जा सके ।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 14:29:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> पुलिया की मिट्टी में दबने से मजदूर की मौत, परिजनों ने शव लेने से किया इंकार</title>
                                    <description><![CDATA[ परिजनों और रिश्तेदारों ने शव लेने से इनकार कर दिया। परिजन और ग्रामीण परिवार को उचित मुआवजा देने और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी की मांग पर अड़ गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/laborer-dies-due-to-being-buried-in-the-soil-of/article-11510"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/6-june-bhod-11.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong> गंगापुर सिटी।</strong> सेवा गांव में पुलिया निर्माण के दौरान मिट्टी में दबने से एक मजदूर की मौत हो गई थी। पुलिस ने रविवार रात को शव अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने सोमवार सुबह शव का पोस्टमार्टम करवाया, लेकिन परिजनों और रिश्तेदारों ने शव लेने से इनकार कर दिया। परिजन और ग्रामीण परिवार को उचित मुआवजा देने और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी की मांग पर अड़ गए। साथ ही ठेकेदार के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाने की बात कही।</p>
<p><br />लोगों ने मांग पूरी नहीं होने पर शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करने और रास्ता जाम करने की चेतावनी दी। दरअसल रविवार शाम को मिट्टी धंसने से सुल्तानपुरा निवासी अजय बैरवा (20) पुत्र मुरारीलाल बैरवा मिट्टी के नीचे दब गया। इसके बाद वहां काम कर रहे दूसरे मजदूरों और ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मिट्टी में दबे अजय को बाहर निकाला और उसको गंगापुर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया।</p>
<p> सुबह अजय के परिजन, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में समाज के लोग गंगापुर हॉस्पिटल पहुंचे और शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने परिजनों से बात कर शव का पोस्टमार्टम करवाया। इसके बाद एक बार फिर परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीणों ने शव लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी और सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की। वजीरपुर सरपंच मुकेश बैरवा ने कहा कि उनकी मांग पूरी होने पर ही शव लिया जाएगा। उन्होंने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करने और रास्ता जाम करने की चेतावनी दी।<br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 14:56:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चने में मिट्टी व कंकड़ बताकर खरीद केंद्र पर किया फेल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर के गौण मंडी यार्ड में चल रही समर्थन मूल्य चना खरीद में भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज से किसान टोकन का मैसेज आने के बाद महंगा डीजल जलाकर खरीद केंद्र पर आते हैं। यहां उनकी सही चने की फसल को मिट्टी व कंकड़ बताकर नापास किया जा रहा है।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rejected-at-the-purchase-center-by-saying-that-there-were-soil-and-pebbles-in-gram/article-10490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/chane-mei-mitti-..sultanpur-k1.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। नगर के गौण मंडी यार्ड में चल रही समर्थन मूल्य चना खरीद में भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज से किसान टोकन का मैसेज आने के बाद महंगा डीजल जलाकर खरीद केंद्र पर आते हैं। यहां उनकी सही चने की फसल को मिट्टी व कंकड़ बताकर नापास किया जा रहा है।<br /><br />बुधवार को समर्थन मूल्य चना खरीद केंद्र पर 15 से अधिक किसानों की चने की जिंस में मिट्टी व कंकड़ बताकर नापास कर दिया। जिस पर किसानों ने हंगामा कर दिया। सूचना मिलते ही सुल्तानपुर नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों से जानकारी ली। किसानों ने बताया कि समर्थन मूल्य चना खरीद केंद्र पर उनकी सही चने की जिंस को भी मिट्टी कंकड़ बताकर नापास किया जा रहा है और वापस भिजवाया जा रहा है। जबकि सफाई के बाद ही खरीद केंद्र पर लेकर आते है। खरीद केंद्र पर मौजूद चोमा मालियान निवासी हीरालाल, कोटडादीप सिंह निवासी हेमंत पारेता, बड़ौद से फरीद मोहम्मद व पीपल्दा बिरम निवासी लेखराज मीणा ने बताया कि समर्थन मूल्य पर चना का बेचान किया था। जहां सहकारी समिति द्वारा वेयरहाउस में माल जमा करवाने पर वहां सर्वेयर द्वारा उनकी सही चना फसल को भी नापास कर दिया। ऐसे में दोबारा खरीद केंद्र पर बुलाया गया।  जब समस्या को लेकर क्रय विक्रय सहकारी समिति में मुख्य व्यवस्थापक संदीप जैन के पास जाते हैं तो वह कभी कार्यालय में मिलते ही नहीं हैं। साथ में ही खरीद केंद्र पर आकर तक नहीं देखते। ऐसे में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं खरीद केंद्र अधिकारियों ने बताया कि वह किसानों का हरसम्भव माल खरीद कर रहे है। लेकिन वेयर हाउस में सर्वेयर द्वारा माल नापास करने से परेशानी आ रही है। <br /><br /><strong>पत्र लिखकर की सर्वेयर लगाने की मांग</strong><br />किसानों के आक्रोश के बाद सुल्तानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति व्यवस्थापक महेश शर्मा द्वारा क्षेत्रीय प्रबंधक राजफैड कोटा को समर्थन मूल्य खरीद केंद्र पर सर्वेयर नियुक्त करने को लेकर पत्र लिखा। उन्होंने बताया कि समर्थन मूल्य चना खरीद केंद्र पर जिंस की गुणवत्ता की जांच करने को लेकर के लिए सर्वेयर नियुक्त किया जाए जो कि एफएक्यू क्वालिटी की जिंस का निर्धारण कर सके। क्योंकि समिति कर्मचारियों को गुणवत्ता जांच का किसी भी तरह से प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में खरीद गुणवत्ता मापदण्ड सही नही होने पर वैयर हाउस से जिंस वापसी के आसार बने रहते हैं। इससे किसान भी परेशान होते हैं तो वहीं समिति का भी आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने जिस पैनल से वेयरहाउस में सर्वेयर नियुक्त किया गया है उसी पैनल से खरीद केंद्र परिसर पर भी सर्वेयर नियुक्त करने की मांग की है। ताकि केंद्र पर किसानों को परेशानी न हो। <br /><br /><strong>पानी-बिजली की नहीं है कोई व्यवस्था</strong><br />नरसिंहपुरा से चना फसल लेकर पहुंचे किसान कालूलाल ब्रह्मानंद मानव ने बताया कि खरीद केंद्र पर गौण मंडी प्रशासन की ओर से शीतल पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मजबूरन बाहर दुकानों पर जाकर बोतल कर पानी पीना पड़ता है। इसके साथ ही खरीद केंद्र पर दिन के समय बिजली नहीं आने के चलते वहां लगे सीसीटीवी कैमरे भी शो पीस साबित हो रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा। मंगलवार को समस्याएं सामने आने पर नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह द्वारा तुरंत समस्याओं का समाधान करने के लिए निर्देशित किया। <br /><br /><strong>अब तक 460 किसानों की हुई चना तुलवाई</strong><br />गौरतलब है कि किसान संगठनों द्वारा काफी प्रयास करने के बाद 29 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर चना खरीद शुरू हुई थी। जहां सुल्तानपुर खरीद केंद्र पर कुल 964 किसानों ने चना बेचान को पंजीकरण करवाया है। इनमें से शनिवार को 810 किसानों को टोकन के मैसेज जारी कर दिए गए हैं। वही सोमवार तक कुल 460 किसानों का 19 हजार कट्ठा चना खरीदा जा चुका है। जानकारी मुताबिक यहां पर 1 दिन में 60 किसानों को चना बेचान के टोकन जारी हो रहे हैं। जिनमें से महज 40 किसान खरीद केंद्र पर पहुंच रहे हैं। इसमें भी आधे से ज्यादा किसानों की चना मे कंकड़ बता कर उसे नापास किया जाने से किसान खासा परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 15:14:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दहमीकलां में जेडीए की भूमी पर अवैध मिट्टी खनन जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मिट्टी से भरे ओवरलोड डंपर बन रहे हादसे का कारण,]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--bagru--illegal-soil-mining-continues-on-jda-s-land-in-dahmikalan--illegal-mining-of-soil-worth-lakhs-done-till-now/article-7867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/136.jpg" alt=""></a><br /><p>बगरू। निकटवर्ती दहमीकलां ग्राम में प्रशासन की लचर कार्य प्रणाली के चलते ओवर लोड मिट्टी से भरे डंपर बेखौफ होकर गाॅव की सड़कों पर से अंधी रफ्तार से गुजर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा ओवरलोड मिट्टी से भरे डंपरों पर कार्रवाई नहीं किए जाने की उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जेडीए जोन 12 के दहमीकलां ग्राम में अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद है कि जेडीए की बेशकीमती जमीन पर वर्षों से कब्जा व अतिक्रमण कर रखे थे, लेकिन अब जेेडीए की भूमी से अवैध खनन करवाया जा रहा है। इससे अतिक्रमणकारियों के चाँदी हो रही है, अब तक लाखों रूपये की मिट्टी का खनन किया जा चुका हैं। प्रतिदिन सैकड़ों ओवरलोड मिट्टी से भरे डंपर गाॅव की बीच में से निकलते हैं व कई बार डंपरो से बडे हादसे भी हो चुके हैं। वर्तमान में दहमीकलां ग्राम के खसरा नम्बर 750 पर अवैधन मिट्टी खनन जारी है। ज्यादातर अवैध खनन दहमीकलां के लाम्बा की ढाणी, डाबर डेहरा की ढाणी, गुर्जर मोहल्ला, बिचुन कोलोनी व 600 फीट रोड के अलावा दहमीखुर्द नदी क्षेत्र से होता है। डंपरो से गाॅव की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, ओवरलोड डंपर कब्जाशुदा जमीनो से अवैध खनन करते है, यथास्थिति कोर्ट स्टे के बावजूद न्यायालय की अवहेलना कर अवैध मिट्टी खनन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार ग्रामीणों व स्थानीय पंचायत प्रशासन द्वारा कई बार जेडीए को अवगत करवाया जा चुका, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण अवैध जेडीए अधिकारियों की मिट्टी खनन माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगा रहें हैै।</p>
<p><br /><strong>अधिकारी नही करते कार्रवाई</strong><br />ओवरलोड मिट्टी से भरे डंपर बगरू पुलिस थाने के सामने से बेखौफ होकर प्रति दिन निकलते है। लेकिन ओवर लोड मिट्टी से भरे इन डंपरों पर पुलिस प्रषासन व अन्य अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नही की जाती है। हालांकि कभी कभार दिखावे के लिए मिट्टी से भरे डंपरों पर चैकिंग के नाम पर रोका जाता है, तथा बगैर कार्रवाई के चलता कर दिया जाता है।</p>
<p><br /><strong>अफसरों की मिलीभगत से हो रहा है मिट्टी का परिवहन</strong><br />ओवरलोड व बगैर लायल्टी के मिट्टी का परिवाहन करने वालो पर स्थानीय प्रशासन ही नही खनिज विभाग के जिला स्तरीय अफसर भी मेहरवान है। बताया जा रहा है कि अफसरों की सांठगांठ से ही मिट्टी का अवैध कारोबार धडल्ले से जारी है।</p>
<p><br /><strong>ट्रैक्टर ट्राॅलियों से भी होता है मिट्टी का परिवहन</strong><br />दहमीकलां सहित बगरू कस्बे में भी सुबह के समय में 20 से 30 की संख्या में मिट्टी से भरी ट्रालियां आती है। इनके पास ना तो रायल्टी होती है और ना ही वाहन के वैध कागजात, इसके बाद भी मिट्टी का काला कारोबार बेखौफ चल रहा है।</p>
<p><br /><strong>इनका कहना.....</strong><br />1.    मेरे पास भी ग्रामीणों की शिकायतें आई है, पंचायत क्षेत्र की सड़के मिट्टी से भरे ओवरलोड डंपरो से क्षतिग्रस्त हो गई है, ओवरलोड डंपरो से कई बार हादसे भी हो चुके हैं, पंचायत द्वारा इस संबंध मे कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नही हुई है। -गणेश कुमावत, सरपंच, ग्राम पंचायत दहमीकलां<br />2.    मामले की जांच कर, संख्त कार्यवाही की जाएगी। जगत राजेश्वर सिंह, जोन उपायुक्त, जेडीए जोन12</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 18:07:35 +0530</pubDate>
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                <title>कुम्हार परिवारों पर रोजी रोटी का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[करवर क्षैत्र में  मिट्टी व ईंधन की कमी के चलते लागत ज्यादा आने लगी है और मुनाफा बहुत कम होता जा रहा है जिससे कुम्हार के घर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/livelihood-crisis-on-potter-families/article-6579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/012.jpg" alt=""></a><br /><p>करवर।  क्षैत्र में  मिट्टी व ईंधन की कमी के चलते लागत ज्यादा आने लगी है और मुनाफा बहुत कम होता जा रहा है जिससे कुम्हार के घर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए पारंपरिक धंधे को छोड़कर अन्य धंधों की ओर युवा वर्ग रुख करने लगा है। एक समय  करवर के 66 कुम्हार के परिवार मिट्टी के बर्तन तैयार करते थे लेकिन अब महज 6 परिवार ही यह काम कर रहे है।  इन परिवारों को मिट्टी भी दूर-दूर से लानी पड़ती है। क्षेत्र में कुम्हारों का मटका व्यवसाय ठप होने से उन्हें रोजी रोटी और घर परिवार की आजीविका का संचालन करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>मिट्टी के बर्तनों की जगह स्टील और एल्युमिनियम के बर्तनों ने ले ली</strong><br />एक-दो  दशक पूर्व मिट्टी के बर्तनों का क्रेज बहुत ज्यादा हुआ करता था। हर घर में गर्मी के  समय में ठंडे पानी के लिए मिट्टी से बने मटके,मटकियां,घडे देखे जाते थे। और ग्रामीण इलाकों में तो लोग खाना पकाने ओर खाना परोसने के लिए मिट्टी से बने बर्तनों का ही उपयोग किया करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ- साथ यह व्यवसाय लुप्त होने के कगार पर हैं। मौजूदा समय में रसोई में  स्टील और एलुमिनियम के बर्तनों में खाना पकाया व खाया जाने लगा है। जिसके चलते इंसान को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। आधुनिक व आर्थिक युग के दौर  में धीरे-धीरे मिट्टी के बर्तनों का चलन कम होने से इस उद्योग धंधे पर मंदी के बादल छाने लगे है। पहले घर -घर में मिट्टी से बने हुए मटकों का ही उपयोग होता था। लेकिन अब इनकी जगह वाटर कूलर और फ्रिज ने अपनी जगह बना ली , जिसके चलते रोजगार में भी कमी आई है। आज भी यह व्यवसाय आर्थिक तंगी से जूझ रहा हैं और धीरे -धीरे मिट्टी के बर्तन बनाने का मोह भंग होता जा रहा है। <br /><br />अब मिट्टी व ईधन की कमी के चलते लागत ज्यादा आने लगी है और मुनाफा बहुत कम होता जा रहा है जिससे घर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए पारंपरिक धंधे को छोड़कर अन्य धंधों की ओर युवा वर्ग रुख करने लगा है। - <strong>पप्पू लाल कुम्हार, कारीगर</strong><br /><br />धीरे -धीरे मिट्टी के बर्तनों की खरीद कम होने से परंपरा लुप्त होती जा रही है और युवा पीढ़ी मिट्टी के बर्तन बनाने से मुंह मोड रही है, क्योंकि इसमे अच्छा मुनाफा नहीं मिल रहा और अन्य काम की ओर युवा वर्ग रुख करने लगा है।  - <strong>सोजी लाल कुम्हार,कारीगर</strong><br /><br />मिट्टी कला से जुड़े हुए उद्योगों के लिए सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही है साथ ही  एनजीओ भी हुनर हाट बाजार लगाकर इनको प्रमोट करते रहते हैं। सरकार भी ऐसे उद्योगों पर काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने का काम कर रही है।<br /><strong>-डूंगर राम गेदर,उपाध्यक्ष  शिल्प एवं माटी कला बोर्ड राजस्थान सरकार</strong><br /><br />एक दशक पूर्व मिट्टी से जुड़े हुए व्यवसायियों को मिट्टी व र्इंधन आसानी से उपलब्ध हो जाती थी लेकिन अब मिट्टी व र्इंधन की बहुत ज्यादा समस्या होने से  हैं यह सीजनेबल व्यवसाय हो गया है।<br /><strong>- कजोड़ी लाल प्रजापत,राष्ट्रीय कुम्हार महासभा प्रदेश उपाध्यक्ष</strong><br /><br />मिट्टी से बने हुए बर्तनों में खाना बनाने व  खाना परोसने से आयरन , फास्फोरस ,कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा पाई जाती है जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है। मिट्टी के बर्तनों में होने वाले छोटे-छोटे छिद्र आग  और नमी को बराबर सकुर्लेट  करते हैं जिससे खाने के पौष्टिक तत्व सुरक्षित रहते हैं।<br /><strong>-डॉ  दिनेश कुमार शर्मा,  वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी इंद्रगढ़</strong><br /><br /> मिट्टी से बर्तन बनाने वाले व्यवसाइयों को अपना उद्योग आगे बढ़ाने के लिए  राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 3 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है ऐसे  लोग मेले या हाट बाजार में जाते हैं तो आने जाने का स्लीपर कोच का किराया भी सरकार वहन करती हैं। वहां जो इनको दुकानें आवंटित की जाती है  जिसका किराया 50% खुद को वाहन करना होता है बाकी का राजस्थान सरकार वहन करती हैं।<br /><strong>-चंद्रमोहन गुप्ता, महाप्रबंधक , जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 14:53:09 +0530</pubDate>
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