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                <title>असर खबर का :  जैविक उत्पाद परीक्षण लैब तैयार, जांच के लिए खत्म होगा इंतजार, समय और खर्च दोनो की होगी बचत</title>
                                    <description><![CDATA[एग्री क्लिनिक में भी फसल व मिट्टी की निशुल्क जांच और परामर्श मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--organic-product-testing-lab-ready--the-wait-for-testing-ends--saving-both-time-and-money/article-160661"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)83.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को वैज्ञानिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कोटा जिले को जल्द बड़ी सौगात मिलने वाली है। रावतभाटा रोड पर बनाई जा रही जैविक उत्पाद परीक्षण प्रयोगशाला (ऑर्गेनिक प्रोडक्ट टेस्टिंग लैब) का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। भवन लगभग तैयार हो चुका है और अब इसमें आवश्यक आधुनिक उपकरण व अन्य संसाधन स्थापित किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला शुरू होने के बाद किसानों को अपने जैविक उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए बाहरी राज्यों की प्रयोगशालाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अभी तक कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ सहित हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को जैविक उत्पादों के नमूनों की जांच के लिए दूरदराज की प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे रिपोर्ट मिलने में कई दिन या कई बार सप्ताह लग जाते थे। नई प्रयोगशाला शुरू होने के बाद जांच प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी होगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।</p>
<p><strong>जैविक उत्पादों की बढ़ेगी विश्वसनीयता</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रयोगशाला में अनाज, दालें, मसाले, फल, सब्जियां और अन्य जैविक उत्पादों के नमूनों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। यहां उत्पादों की गुणवत्ता, निर्धारित जैविक मानकों का पालन, रासायनिक अवशेषों की स्थिति सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए जाएंगे। इससे किसानों को अपने उत्पादों की प्रमाणिकता साबित करने में आसानी होगी और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर परीक्षण सुविधा उपलब्ध होने से जिले में जैविक खेती को नया प्रोत्साहन मिलेगा। अधिक किसान जैविक उत्पादन की ओर आकर्षित होंगे और उन्हें प्रमाणन की प्रक्रिया में भी सुविधा मिलेगी। इससे हाड़ौती क्षेत्र के जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>इधर एग्री क्लिनिक भी बनेगा मददगार</strong><br />इसके अलावा अब जिला मुख्यालय में एग्री क्लीनिक की स्थापना की गई है। इस एग्री क्लीनिक के माध्यम से किसानों की फसल संबंधी परेशानियों और शंकाओं का आसान समाधान हो सकेगा। यहां परीक्षण सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। एग्री क्लीनिक तबेला हाउस परिसर में शुरू किया गया है। यहां आवश्यक संसाधन, परीक्षण की व्यवस्थाएं एवं स्टाफ की उपलब्धता भी कर दी गई है। वर्ष 2024 -25 की बजट घोषणा अंतर्गत यह एग्री क्लीनिक स्थापित किया गया है। यहां किसान फसल में कीट आदि के प्रकोप या पोषण की समस्या के लिए आ सकते हैं। मिट्टी में भी किसी प्रकार की समस्या है तो एग्री क्लीनिक पर परामर्श लिया जा सकता है। इसके लिए पौधे अथवा मिट्टी के सजीव नमूने लाकर यहां निशुल्क जांच कराई जा सकती है। यह सुविधा निशुल्क प्रदान की जाएगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जैविक उत्पादों की जांच के लिए हाड़ौती क्षेत्र में प्रयोगशाला नहीं होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 25 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार किया गया था। इसमें बताया था कि सरकार एक ओर तो जैविक खेती को प्रोत्साहन देने का दावा करती है वहीं दूसरी ओर इसके लिए संसाधन नहीं बढ़ा रही है। यहां जैविक खेती के नमूनों की जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं होने से नमूनों को राजस्थान से बाहर भेजना पड़ता है। इससे किसानों को जांच परिणाम के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। यहीं कारण है कि सरकार की ओर से जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के बाद भी काश्तकार इससे नहीं जुड़ पा रहे हैं।</p>
<p>जिले में जैविक उत्पाद परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। यहां रावतभाटा रोड पर यह लैब तैयार की गई है जिसमें शीघ्र ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और कार्य शुरू किया जाएगा।<br /><strong>-अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 12:26:54 +0530</pubDate>
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                <title>प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा हस्त निर्मित वस्तुओं का बाजार</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार की ओर से अमृता हाट का आयोजन कर लोगों को एक बाजार मुहैया कराया लेकिन बाजार के माल से हमारे माल की तुलना कर लोग नहीं खरीद रहे है। मशीनों से निर्मित माल बल्क में तैयार होने से उनकी लागत कम आती है और वह सस्ता बिकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/handmade-goods-market-lagging-behind-in-competition/article-33041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/pratispardha-mei-pichad-raha-hastha-nirmit-vastuo-ka-bazar...kota-news-22.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के दशहरा मैदान में चल रहे संभाग स्तरीय अमृता हाट मेले में प्रदेशभर के महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्कृष्ट हस्तनिर्मित उत्पादों की 110 दुकानें लगाई हुई।  लेकिन इन हस्त निर्मित वस्तुओं की लागत बाजार में बिक रही मशीनों से तैयार सामग्री से ज्यादा होने से मेले में महिलाएं  बाजार में बिकने वाली वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बेहतर सामग्री बाजार की मशीन से तैयार की गई सामग्री से महंगी  होने लोग कम खरीद रहे है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का कहना है कि सरकार की ओर से अमृता हाटा का आयोजन कर हम लोगों को एक बाजार मुहैया कराया लेकिन बाजार के माल से हमारे माल की तुलना कर लोग नहीं खरीद रहे है। मशीनों से निर्मित माल बल्क में तैयार होने से उनकी लागत कम आती है और वह सस्ता बिकता है। हमारा माल हाथों से तैयार होता है। इसमें हमारा श्रम लगता है लेकिन लोग इसकी क्रद नहीं समझते है। इसलिए माल बेचना मुश्किल हो रहा है। </p>
<p><strong>हस्त निर्मित वर्क का नहीं है बाजार</strong><br />बूंदी जिले से मेले में कुंदन पेटिंग दुकान लगाने आई स्वयं सहायता समूह महिला दयावंती सैन ने बताया कि हस्त निर्मित सामग्री का बाजार नहीं होने से लोग इनको महंगा बताकर नहीं खरीदते है। मैने कुंदन पेटिंग तैयार की है। 1500 से 2000 हजार रुपए की लागत की है। यहीं कुंदन पेटिंग  बाजार में 1200 रुपए उपलब्ध है ऐसे में हमारे द्वारा तैयार की गई पेटिंग को कौन खरीदेगा। जबकि हमारी पेटिंग में वर्क कार्य ज्यादा है। सरकार अमृत हाट मेले की तरह बाजार उपलब्ध कराए और हमारे माल की लागत कम करने का प्रशिक्षण दिया जाए तो बाजार से प्रतिस्पर्द्धा कर सकते है। नहीं तो रोजी रोटी चलना भी मुश्किल होगा</p>
<p><strong>उत्पादन उत्कृष्ट, खरीदार नहीं </strong><br />मेले में आई  किरण गहलोत ने बताया कि आज के बाजारीकरण के युग में घरेलु उत्पादों के कद्रदान नहीं है। जबकि हमारा हस्त निर्मित माल बाजार के माल से उत्कृष्ट है लेकिन इसकी लागत अधिक आने से लोग इसको महंगा कहकर नहीं खरीदते है। बाजारीकरण के युग में महिला स्वयं सहायता समूह के उत्पादों का भली-भांति प्रचार-प्रसारआवश्यकता।</p>
<p><strong>मार्केटिंग का मिले प्रशिक्षण</strong><br />मोबिना बानू ने बताया कि स्वयं सहायता समूह को जिला और ग्रामीण स्तर उनकी योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। बाजार की डिमांड वाली वस्तुओं का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता जिससे महिलाए माल नहीं बेच पाती है। मार्केटिंग का प्रशिक्षण मिले और लागत कम करने के टीप्स मिले तभी माल बिकेगा। अभी हस्तनिर्मित वस्तुओं की लागत ज्यादा आ रही है।</p>
<p><strong>बस इतनी सी सरकारी सहायता </strong><br />महिलाओं को बेहतर उत्पाद को बेचने के लिए महिला एवं अधिकारिता विभाग की ओर से अमृता हाटा बाजार का आयोजन किया जाता है। जिसमें उनके दुकान लगाने, आवास की व्यवस्था नि:शुल्क की जाती है। जिससे उनकी तैयार की गई वस्तुओं की लागत नहीं बढ़े और उनको दुकान लगाने के किराया बिजली पानी की व्यवस्था नि:शुल्क की जा रही है। कलक्टर ने भी इस प्रकार के मेले हर 3 माह में आयोजित करने का सुझाव दिया। अतिरिक्त आयुक्त अंबा लाल मीणा ने भी नगर निगम मेला आयोजन में सक्रिय भूमिका निभााने औरउन्होंने प्लास्टिक पर प्रतिबंध को देखते हुए महिला समूह को कपड़े के थैले भी तैयार कर जागरुकता लाने में सहयोग करने के लिए कहा है। स्वयं सहायता समूह की हस्त निर्मित वस्तुओं प्रशिक्षण दिया जाता है। इनको बाजार में प्रतिस्पर्द्धा के लिए तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। <strong>- मनोज मीणा, उपनिदेशक महिला एवं अधिकारिता विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Dec 2022 16:27:07 +0530</pubDate>
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                <title>सात समंदर पार पहुंचे बेबी रानी के फूड प्रॉडक्ट </title>
                                    <description><![CDATA[शून्य से शिखर तक का सफर यूं ही आसान नहीं होता इस सफर में सफल उद्यमी बनने की राह को परिस्थितियां कई बार डिगा देती हैं।  लेकिन थेगड़ा निवासी बेबी रानी सैनी की लगातार मेहनत के चलते आज उनका सहायता समूह विदेशों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/baby-rani-food-products-reached-across-the-seven-seas/article-6587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/baby-rani-food-product.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शून्य से शिखर तक का सफर यूं ही आसान नहीं होता इस सफर में सफल उद्यमी बनने की राह को परिस्थितियां कई बार डिगा देती हैं।  लेकिन थेगड़ा निवासी बेबी रानी सैनी की लगातार मेहनत के चलते आज उनका सहायता समूह विदेशों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। बेबीरानी के सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ब्यूटीशियन के रूप में अपने हाथो से  दो पैसे की कमाई करने वाली यह महिला कृषि विज्ञान केन्द्र कोटा में अब मास्टर ट्रेनर के रूप महिलाओं को आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखा रही है। <br /><br />बेबीरानी बताती है कि सफर की शुरूआत  एक दशक पहले हुई थी। परिवार के आर्थिक हालात कमजोर थी। केवीके से ब्यूटीपार्लर ओर सिलाई  का काम  सीखने से कुछ आय मिली तो दूसरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी भाग लेनी लगी। आज, शिव शक्ति फूड प्रॉडक्ट सात समंदर पार अपनी पहचान बना चुके है। उल्लेखनीय है  कि बेबीरानी द्वारा तैयार किए जा रहे आंवला, सहजन और सोयाबीन के खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद दुबई, आॅस्ट्रेलिया और अमेरिका तक पहुंच चुके है और बेबीरानी को पहचान दे रहे है। उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण उत्पाद व्यवसाय से प्रतिमाह 25-30 हजार रूपए की आय मिल जाती है। विदेशी बेबीरानी के उत्पादों के दीवाने हो चुके है। एक कृषि मजदूर की बेटी को जब ऐसी सफलता मिलती है, तो बेबीरानी को उद्यमी बनाने वाले कृषि वैज्ञानिक भी अपने में गौरव की अनुभूति का अनुभव करते हैं। <br /><br /><strong>महिलाओं को दे रही प्रशिक्षण</strong><br />कृषि विज्ञान केंद्र की विषय विशेषज्ञ डॉ. गुंजन सनाढ्य ने बताया कि  बेबीरानी  के खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों से हर महीने 25-30 हजार रूपए की आय प्राप्त कर रही है। उनके द्वारा तैयार किया गया महिला समूह में अब तक 100 से अधिक महिलाएं रोजगार प्राप्त कर अपने जीवन को ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास कर रही हैं। बेबी रानी बताया कि शादी से पहले संघर्ष के कई इम्तिहान दिए है। लेकिन, कभी हौसला नहीं छोड़ा है। इसी का परिणाम है कि हर्बल उत्पाद मुझे पहचान दे रहे है। उन्होंने बताया कि शादी से पहले ब्यूटीपार्लर, सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इस तरह मेरा जुड़ाव कृषि विज्ञान केन्द्र कोटा से हुआ। उसके बाद कृषि विज्ञान केन्द्र से कई विधाओं में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किए। इन्हीं प्रशिक्षणों की बदौलत अब मैं मास्टर ट्रेनर के रूप में कृषि विज्ञान केन्द्र पर आने वाली कृषक महिलाओं को आय बढ़ोतरी के गुर सिखा रही हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 16:24:42 +0530</pubDate>
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