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                <title>child labor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारतीय बाल श्रम समस्या व समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ी संख्या उन बच्चों की है, जो स्कूल जाने के बजाय खेतों, कारखानों और शहरी घरों में घरेलू सेवक या नौकर के तौर पर मजदूरी कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/indian-child-labor-problem-and-solution/article-117742"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer95.png" alt=""></a><br /><p>दुनिया में बच्चों की सबसे बड़ी आबादी भारत में है। देश की 37 प्रतिशत आबादी 18 साल से कम उम्र के बच्चों की, जिनकी संख्या लगभग 44.20 करोड़ है, लेकिन इनमें एक बड़ी संख्या उन बच्चों की है, जो स्कूल जाने के बजाय खेतों, कारखानों और शहरी घरों में घरेलू सेवक या नौकर के तौर पर मजदूरी कर रहे हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में पांच से 14 वर्ष की आयु के कुल एक करोड़ दस लाख बच्चे बाल मजदूर थे। यानी प्रतिशत के हिसाब से भले ही नहीं, लेकिन संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा बाल मजदूर भारत में हैं। अगर हम बच्चों को देश का भविष्य मानें तो उनकी इतनी बड़ी आबादी का स्कूल जाने की उम्र में खेतों, कारखानों व ढ़ाबों में मजदूरी करना कई सवाल खड़े करता है। खासतौर से उस स्थिति में जहां बाल मजदूरी को रोकने के लिए दुनिया के सबसे प्रगतिशील कानून हों और तथा पुनर्वास एवं क्षतिपूर्ति के लिए सावधानी से बनाई गई योजनाएं हों।</p>
<p>संविधान के अनुच्छेद 24 में 14 साल से कम उम्र के बच्चों से खानों, कारखानों और किसी भी जोखिम भरे खतरनाक उद्योगों में काम नहीं कराया जा सकता। आजादी के तुरंत बाद 1948 में भारत सरकार ने कारखाना कानून के जरिए 15 साल से कम उम्र के बच्चों के कारखानों में काम करने पर पाबंदी लगा दी। इसके बाद 1952 में खान अधिनियम के जरिए बच्चों के खदानों में काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया। फिर 1973 में बाल श्रम निषेध कानून और 1976 में बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन के लिए बंधुआ मजदूरी प्रणाली अधिनियम लागू किया गया। इसके बाद बाल श्रम की रोकथाम के उपाय सुझाने के लिए बनी गुरुपद समिति की सिफारिशों पर 1986 में बाल श्रम अधिनियम पारित किया गया, जो 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का जोखिम भरा काम लेने पर पाबंदी लगाता है। इसके बाद बाल श्रम संशोधन अधिनियम 2016 पारित किया। इसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम लेने और जोखिम भरे काम व व्यवसाय में 18 साल के से कम उम्र के बच्चों से काम लेने को दंडनीय अपराध बनाया गया। गुरुपद समिति की सिफारिशों पर बाल मजदूरों के पुनर्वास के लिए 1988 में केंद्र सरकार ने राष्टÑीय बाल श्रम परियोजना शुरू की, जो फिलहाल देश के 21 राज्यों के 314 जिलों में लागू की जा रही है। </p>
<p>एनसीएलपी एक समग्र योजना है, जो बाल मजदूरी से मुक्त कराए गए बच्चों के स्कूल में दाखिले और उनके परिवारों को उनकी आय में सुधार के लिए वैकल्पिक साधन प्रदान करने में सहायता करती है। इसमें बाल मजदूरों के लिए विशेष स्कूल या पुनर्वास केंद्र खोलने के लिए जिला परियोजना सोसायटी को वित्तीय मदद दी जाती है। </p>
<p>अपने बच्चों से बाल मजदूरी बंद कराने वाले परिवारों को वजीफा भी दिया जाता है। इस परियोजना ने अब तक 12 लाख बच्चों को बचाया है, लेकिन अप्रैल 2021 से इस योजना को समग्र शिक्षा अभियान में शामिल कर दिया गया और साफ कर दिया गया कि न तो किसी विशेष प्रशिक्षण केंद्र खोलने के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी और न ही केंद्रों में किसी बच्चे को दाखिला दिया जाएगा। अगर बंधुआ बाल मजदूरों की बात करें तो जांच और सत्यापन के बाद बच्चा या बच्ची अगर बंधुआ मजदूर घोषित की जाती हैं, तो उसे एक रिहाई प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। ऐसे में यदि आरोपी को अदालत से सजा होती है, तो बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास की केंद्र की योजना के तहत पीड़ित बच्चा 3 लाख रुपए तक के मुआवजे का हकदार है, अगर वह जाहिरा तौर पर किसी प्लेसमेंट एजेंसी में यौन शोषण या ट्रैफिकिंग से पीड़ित हुआ हो तो। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2017 से 2024 के बीच विभिन्न राज्य सरकारों ने 3341 बच्चों को बंधुआ मजदूरी करते पाया और उन्हें रिलीज सर्टीफिकेट जारी किए। इन बच्चों के लिए मुआवजे की रकम 100 करोड़ से भी ज्यादा बैठती है और यह राशि केंद्रीय बजट से दी जानी है। लेकिन स्थिति यह है कि बंधुआ बाल मजदूरों को क्षतिपूर्ति योजना के तहत आवंटित राशि 2023-24 के बजट में आबंटित 20 करोड़ रुपए से घटाकर इस बार 6 करोड़ कर दी गई है। </p>
<p>ऐसे में यदि बच्चे से बंधुआ मजदूरी कराने के आरोपी को सजा हुई और हर बच्चे को 3 लाख रुपए का मुआवजा मिला तो 6 करोड़ रुपए की इस राशि से महज 200 बंधुआ बाल मजदूरों का पुनर्वास हो सकता है। बाकी बचे 3141 बंधुआ बाल मजदूरों को संविधान में दी गई गारंटी के बावजूद न्याय से वंचित रहना पड़ेगा। बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन और पुनर्वास राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना और केंद्र की अन्य योजनाओं के अधीन विषय हैं। सबसे पहले लोगों को समझाना होगा कि बाल श्रम सिर्फ कानूनन अपराध नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति भी अपराध है। इसके लिए नागरिक संगठनों और सभी हितधारकों के साथ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियानों की जरूरत है।</p>
<p><strong>-डॉ. शैलेंद्र पंड्या</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jun 2025 11:50:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>चूड़ी कारखाने में बालश्रम कराने वाले सात लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[ बच्चों ने बताया कि उनको गांव से लाने के बाद घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। सुबह सात से रात 12 बजे तक लगातार चूड़ी बनाने का काम करवाया जाता था। खाना भी कम दिया जाता। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/seven-arrested-for-child-labor-in-bangle-factory/article-35450"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/10-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शास्त्री नगर थाना पुलिस ने शनिवार को चूड़ी कारखाने में बालश्रम करवाकर बच्चों का शोषण करने वाले सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें चार पुरुष और तीन महिलाएं हैं। इनक कब्जे से 25 बालश्रमिक मुक्त कराए गए हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे 14 साल से कम उम्र के हैं। आरोपितों के कब्जे से बालश्रम से संबंधित हिसाब-किताब के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार सीतारा खातून (35) लेवडन बिहार, सफीना खातून (45), मोहम्मद निजामुद्दीन (38), मोहम्मद गुलाम रब्बानी (31), मोहम्मद मजीद (45), मोहम्मद इम्तियाज (38) और शबनम परवीन (20) है। ये सभी आरोपी शास्त्रीनगर स्थित नाहरी का नाका के रह ने वाले हैं। थानाप्रभारी दिलीप सिंह शेखावत ने बताया कि बीते शुक्रवार को सूचना मिली कि शास्त्रीनगर की व्यास कॉलोनी में बबलू के मकान में बच्चों की मानव तस्करी कर बालश्रम कराया जा रहा है। इस सूचना पर पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने दबिश दी तो वहां ग्राउंड व फर्स्ट फ्लोर पर 25 बालश्रमिक मिले। आरोपितों ने टीम को देखकर दरवाजा नहीं खोला। दरवाजा तोड़कर जब पुलिस ने अंदर जाने की कोशिश की तो आरोपितों ने बच्चों को पीछे के रास्ते बाहर निकालने लगे।  आरोपित बिहार निवासी एक ही परिवार के आपसी रिश्तेदार हैंं, जो किराए का मकान लेकर पिछले 3-4  साल से नाबालिग बच्चों को प्रलोभन देकर लाते थे। <br /><br /><strong>17 घंटे करवाते थे काम</strong><br />बच्चों ने बताया कि उनको गांव से लाने के बाद घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। सुबह सात से रात 12 बजे तक लगातार चूड़ी बनाने का काम करवाया जाता था। खाना भी कम दिया जाता। काम नहीं करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है और ठंडे पानी से नहलाया जाता था। सभी बच्चों को एक ही तौलिए से नहाने के काम में लिया जाता। छोटे सी जगह एक जगह सभी को रखा जाता है और बाहरी लोगों से सम्पर्क नहीं करने देते थे।     </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Jan 2023 11:41:50 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों की समस्या को दूर करने के लिए सरकार है संकल्पित : गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बच्चों की समस्या को दूर करने के लिए सरकार संकल्पित है। सरकार ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/child-labor-not-should-be--says-gehlot/article-12944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aa-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बच्चों की समस्या को दूर करने के लिए सरकार संकल्पित है। सरकार ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए है। सात संकल्प अगर समाज अपना ले, तो बच्चों का भविष्य बन सकता है। बाल मजदूरी और बाल हिंसा नहीं होनी चाहिए। कोरोना काल में लोगों के रोजगार छीन रहे थे, तो बच्चों के लिए पैकेज घोषित किया। गहलोत सीएमआर पर बाल संरक्षण संकल्प यात्रा के प्रदेश स्तरीय शुभारंभ पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एनजीओ पर मेरा विश्वास है। कुछ सरकारें एक्टिविस्ट को पसंद नहीं करती है, लेकिन मेरी सरकार एक्टिविस्ट को प्रोत्साहन देती है।  </p>
<p>गवर्नेंस में एनजीओ की भूमिका बड़ी होती है, ये जो काम कर सकते है, वह सरकार नहीं कर सकती। सरकार के पास वित्त व इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है,  लेकिन भाव तो एनजीओ के पास होता है। इसलिए एनजीओ को प्रोत्साहन देना चाहिए है। हमारी सरकार उनके अनुभवों का उपयोग करेगी। गहलोत ने कहा कि बच्चे ही देश का भविष्य है। कई बच्चें मजबूरी में स्कूल छोड़ देते है।  सरकार व एनजीओ को मिलकर इस पर सर्वे करना चाहिए। हमारी सरकार कई अहम स्कीम लेकर आई। बिना जागरुकता व प्रचार के उसका लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार की योजनाओं में एनजीओ का इन्वॉल्मेंट होना चाहिए। युवा प्रेरक योजना में 2 हजार युवाओं का चयन किया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि सरकार ने अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने का अभिनव काम किया। अब इन स्कूलों में प्रवेश के लिए सिफारिश होती है। तीन साल में सरकार ने कई अहम फैसले किए है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 14:22:46 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों से बाल श्रम कराने वाले अभियुक्तों को 14 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-2 महानगर द्वितीय ने बच्चों से जबरन बाल श्रम कराने और चूडियां बनवाने वाले अभियुक्तों शेरजहां और असद को 14 साल की सजा सुनाई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/14-year-sentenced-at-accused-who-make-children-do-child-labor/article-6623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/court-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-2 महानगर द्वितीय ने बच्चों से जबरन बाल श्रम कराने और चूडियां बनवाने वाले अभियुक्तों शेरजहां और असद को 14 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त पर 2 लाख 82 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि चाइल्ड हेल्पलाइन की सूचना पर गलता गेट थाना पुलिस ने 2019 में अजंता विहार कॉलोनी के एक आवास में दबिश दी थी, जहां नौ से 14 साल के चार बच्चे चूड़ी बनाते मिले थे।</p>
<p>बच्चों ने बताया कि अभियुक्त उनसे सुबह छह बजे से लेकर रात 12 बजे तक श्रम कराते है। इसके अलावा उन्हें बंद कमरे में रखा जाता है और न भोजन देते है। इसके अलावा परिजनों से बात करने की मांग करने पर उनके साथ मारपीट भी की जाती है। यदि कोई बच्चा बीमार हो जाए, तो उसका इलाज भी नहीं कराया जाता। इस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से अभियुक्त शेरजहां को गिरफ्तार किया। पुलिस ने कुछ दिनों बाद असद को गिरफ्तार कर दोनों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 12:29:58 +0530</pubDate>
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