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                <title>सूखी घास व कचरा, गर्मी में आग का खतरा </title>
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                        <![CDATA[हर साल हो रही आग लगने की घटनाएं,शहर में ट्रांसफार्मरों के पास लगा है कचरे का अम्बार।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dry-grass-and-waste-pose-fire-hazard-during-summer/article-147989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)41.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा। आने वाले तीन महीने अप्रैल से जून में तापमान अधिक होने पर गर्मी भी भीषण पड़ती है। ऐसे में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों में लगने वाली आग से आमजन अधिक प्रभावित होते हैं। हालत यह है कि ट्रांसफार्मरों के आस-पास कचरा व सूखी घास आग का बढ़ना कारण बनते हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए बिजली कम्पनी ने एक निर्धारित दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाए हुए हैं। वहीं आमजन को इसके खतरे से बचाने के लिए सभी ट्रांसफार्मर को जमीन से काफी ऊंचाई पर रखा गया है। साथ ही इनकी सुरक्षा के लिए उनके चारों तरफ लोहे की जाली की फेसिंग भी की हुई है। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर ट्रांसफार्मर के आस-पास लोगों द्वारा कचरा डालने व वहां उगी सूखी घास गर्मी में आग लगने का बड़ा कारण बन रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">यहां है बुरी स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">शहर में वैसे तो सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर हैं। उनमें से कई जगह ऐसी हैं जहां ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरा व सूखी घास है। जिनमें थोक फल सब्जीमंडी के बाहर हो या फर्नीचर मार्केट शॉपिंग सेंटर, नई धानमंडी के पास मोटर मार्केट हो या किशोर सागर तालाब की पाल। बंगाली कॉलोनी छावनी समेत कई अन्य स्थानों पर यही हालत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">मुख्य मार्गों पर लगा रही सीमेंट जाली</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर लगे ट्रांसफार्मरों पर तो सीमेंट की जाली लगाई जा रही है। जिससे न तो कोई उनमें आसानी से घुस सकेगा। साथ ही उन जालियों से कचरा भी अंदर नहीं फेका जा सकता। जिससे आग लगने का खतरा भी कम हो गया है। लेकिन कॉलोनियों व अंदरूनी क्षेत्रों के ट्रांसफार्मरों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सभी जगह सुरक्षा, सफाई निगम का जिम्मा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निजी बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी ट्रांसफार्मरों पर कम्पनी की ओर से लोहे की रैलिंग से सुरक्षा की हुई है। ट्रांसफार्मर भी जमीन से ऊपर हैं। जिससे करंट का खतरा भी नहीं है। लेकिन इनके आस-पास सूखी घास व कचरा लोग ही डाल रहे हैं। कई बार कचरे में आग लगने पर वह पैनल के माध्यम से ट्रांसफार्मर तक पहुंच जाती है। जिससे नुकसान का खतरा रहता है। कचरा व घास की सफाई का जिम्मा निगम कर्मचारियों का है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सफाई होने के बाद डाला जाता है कचरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी मोतीलाल चौधरी ने बताया कि बरसात के समय में ट्रांसफार्मर के आस-पास घास उग जाती है। साथ ही कचरा भी लोग डाल देते हैं। हालांकि निगम की ओर से उसकी सफाई की जाती है। लेकिन कई बार तारों में करंट के चलते सफाई कर्मी ट्रांसफार्मर के नजदीक सफाई नहीं कर पाते। प्रयास करेंगे कि ट्रांसफार्मर के आस-पास भी अच्छी तरह सफाई हो और वहां कचरा एकत्र ही नहीं हो जिससे आग का खतरा बने।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">तापमान अधिक होने से लगती है आग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि अप्रैल से जून के तीन महीने में तापमान अधिक होने से गर्मी पड़ती है। ऐसे में कई बार सूखी घास व कचरे में आग लग जाती है। घास व कचरा ट्रांसफार्मर के नजदीक होने से उससे ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है। जिससे लाइट बंद कर आग बुझाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार लोग जलती वस्तु डाल देते हैं। जिससे भी आग लग जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:21:08 +0530</pubDate>
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                <title>कहीं वाटर नहीं तो कहीं कूलर ही गायब, भीषण गर्मी में बदहाल शहर के वाटर कूलर</title>
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                        <![CDATA[इन वाटर कूलरों के चालू नहीं होने से पानी भी गर्म आ रहा है जो पानी पीने लायक ही नहीं है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-coolers-are-in-a-state-of-disrepair-in-the-scorching-heat/article-146230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक :</strong> शॉपिंग सेंटर में एक्सिस बैंक के पास वाटर कूलर का स्ट्रक्चर बना हुआ है। वर्ष 2018 में करीब 88 हजार रुपए की लागत से यहां वाटर कूलर लगाया गया था। अब वहां पानी के लिए टंकी तो रखी हुई है। लेकिन कूलर ही नहीं है। जिससे आमजन वहां गर्मी में ठंडा पानी पी सके।</p>
<p><strong>दृश्य दो : </strong>फर्नीचर मार्केट में बड़ा भारी वाटर कूलर व्यापार संघ की ओर से लगाया गया था। जिससे यहां आने वाले लोगों को ठंडा पानी मिल सके। लेकिन वर्तमान में यह पूरी तरह की बदहाल हो चुका है। जिससे इसका पीने के पानी के रूप में नहीं विज्ञापन बोर्ड के रूप में उपयोग हो रहा है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन :</strong> गुमानपुरा में मल्टीपरपज स्कूल की चार दीवारी के सहारे एक वाटर कूलर तो लगा हुआ है। लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि वह आमजन के लिए पीने के पानी के रूप में उपयोग नहीं आ रहा है। जिससे इसके होने न होने का फिलहाल कोई लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर के उन वाटर कूलरों की स्थिति बताने के लिए जिनकी वर्तमान में भीषण गर्मी पड?े पर सबसे अधिक जरूरत है। जबकि उनकी स्थिति ऐसी है कि वे उपयोग लायक ही नहीं है। ऐसे शहर में सैकड़ों वाटर कूलर हैं। जिनमें से अधिकतर चालू हालत में नहीं हैं। कहीं पानी की टंकी नहीं हैं तो कहीं पानी की टंकी है तो उसे ठंडा करने वाली मशीन ही नहीं है। कहीं टंकी और मशीन है तो पानी ठंडा नहीं आ रहा है। जिससे इस भीषण गर्मी में लोग इन वाटर कूलरों का पानी नहीं पी पा रहे हैं।शहर में गर्मी तेज पड?े और आगामी दिनों में मौसम को देखते हुए एक दिन पहले ही जिला कलक्टर ने पीने के पानी समेत छाया और लोगों को गर्मी से राहत के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>हर जगह बदहाली</strong><br />शहर में वैसे तो जगह-जगह पर और हर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर वाटर कूलर लगे हुए हैं। फिद्दर चाहे वह विधायक कोष से लगाए गए हों या नगर निगम के माध्यम से। किसी समाजसेवी द्वारा या स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यापार संघों के माध्यम से लगे हों। मुख्य मार्गों पर लगे हों या धार्मिक स्थान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या फिर पार्क व बाजारों में लगे हों। सभी जगह लगे वाटर कूलरों में से अधिकतर बदहाली का शिकार हो रहे हैं। नए शहर के अंतिम छोर से लेकर स्टेशन तक सभी जगह पर वाटर कूलर लगे हुए हैं।</p>
<p><strong>तापमान 38 डिग्री तो उबल रहा पानी</strong><br />वाटर कूलर का मतलब ठंडा पानी है। लेकिन जिस तरह से शहर में अभी 38 डिग्री से अधिक तापमान चल रहा है। ऐसे में जहां नलों में व टंकी का पानी ही गर्म व उबल रहा है। वहीं इन वाटर कूलरों के चालू नहीं होने से उनका पानी भी गर्म आ रहा है। जिससे अधिकतर वाटर कूलरों का पानी पीने लायक ही नहीं है।</p>
<p><strong>लगाने के बाद ध्यान ही नहीं</strong><br />जानकारों के अनुसार किसी स्वयंसेवी संस्था या समाजसेवी द्वारा अपने परिजनों की स्मृति या विशेष अवसरों पर वाटर कूलर लगा तो दिए जाते हैं। जिससे कुछ समय तक तो वे सही रहते हैं। लेकिन उसके बाद उनका कोई ध्यान नहीं रखता। जिससे कभी बिजली कनेक् शन नहीं मिलने या कभी नल गायब होने, पानी नहीं मिलने या टंकी की सफाई नहीं होने समेत कई कारणों से कुछ ही समय में वे वाटर कूलर काम में लेने लायक ही नहीं रहते।</p>
<p><strong>गर्मी से पहले होने चाहिए चालू</strong><br />लोगों का कहना है कि वाटर कूलर का साल में सबसे अधिक उपयोग गर्मी के इन तीन महीनों में ही होता है। जब गर्मी में ही वाटर कूलर खराब या बंद हैं तो उनके होने न होने का कोई लाभ ही नहीं है। नगर निगम या संबंधित एजेंसी को गर्मी से पहले ही इनकी मेंटेनेंस करवाकर चालू हालत में करने चाहिए। जिससे गर्मी में इनका उपयोग हो सके।</p>
<p>दादाबाड़ी निवासी महेश खींची का कहना है कि जो भी संस्था या व्यक्ति वाटर कूलर लगवाए उसकी जिम्मेदारी है उसकी मेंटेनेंस की भी व्यवस्था करे। महावीर नगर निवासी राकेश नागर ने बताया कि गर्मी में दूर दराज से आने वाले लोग विशेष रूप से महिलाएं या मजदूर वर्ग के लोग वाटर कूलर का पानी पीते हैं। लेकिन उन्हें वर्तमान में अधिकतर जगह पर इन वाटर कूलरों का गर्म पानी पीना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम सीमा क्षेत्र चाहे शहर हो या कैथून तक के ग्रामेण इलाकों में करीब आठ सौ वाटर कूलर लगे हुए हैं। इनमें विधायक कोष, नगर निगम या अन्य माध्यमों से लगाए गए वाटर कूलर शामिल हैं। इनकी मेंटेनेंस का टेंडर कर दिया है। पहले सिंगल बिड आने से उसे निरस्त करना पड़ा था। दोबारा से टेंडर किया है जो एक सप्ताह के भीतर खुल जाएगा। साथ ही निगम के माध्यम से वाटर कूलरों का सर्वे कराया जा रहा है। जिनकी शिकायत आ रही है उन्हें फिलहाल निगम स्तर पर चाली किया जा रहा है। दो साल के लिए मेंटेनेंस का करीब दो करोड़ रुपए से अधिक का टेंडर किया गया है।<br /><strong>- सचिन यादव, अधिशाषी अभियंता(विद्युत), नगर निगम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक, चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</title>
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                        <![CDATA[नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fire-engines-will-not-be-seen-in-the-narrow-streets-this-time-either/article-145962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही शहर में जहां आग लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना है। वहीं निगम की ओर से आग पर काबू पाने की तैयारी तो की गई है लेकिन तंग गलियों में आग लगने पर वहां आग बुझाने के लिए अभी भी निगम के फायर अनुभाग के पास फायर बाइक नहीं आई है। जिससे इस बार भी बिना फायर बाइक के ही गर्मी निकालनी पड़ेगी। नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। 30 छोटी बड़ी और दो हाइड्रोलिक दमकलें भी हैं। जिनसे बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाई जा सकती है। करोड़ों रुपए की लागत वाली बड़ी-बड़ी दमकलें तो हैं। लेकिन मात्र 5 से 7 लाख रुपए कीमत वाली फायर बाइक नहीं हैं। जिससे पुराने शहर की तंग गलियों में आग लगने पर वहां बड़ी दमकलों के नहीं पहुंचने पर आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कोटा में चार फायर बाइक की आवश्यकता होने पर राज्य सरकार को इसकी डिमांड भेजी हुई है। नगर निगम कोटा के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि वैसे तो निगम के पास हर तरह की दमकलें हैं। लेकिन तंग गलियों वाले इलाकों में आग लगने पर कई बार समस्या आती है। उसके लिए फायर बाइक की जरूरत पड़ती है। कोटा में चार फायर बाइक की डिमांड राज्य सरकार को भेजी हुई है। वहां स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर जब भी फायर बाइक क्रय की जाएंगी। वहां से कोटा भी आएंगी।</p>
<p><strong>दो और फायर स्टेशनों के लिए मिली जमीन</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग के पास शहर में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। जिनमें सब्जीमंडी, श्रीनाथपुरम्, भामाशाहमंडी, रानपुर , कैथून और स्टेशन रोड स्थित खेड़ली फाटक में तो फायर स्टेशन हैं। जबकि नदी पार और बारां रोड पर भी फायर स्टेशन की आवश्यकता है। इसके लिए नगर निगम की ओर से केडीए को जमीन आवंटन के लिए पत्र लिखा गया था। जिसके बाद केडीए की ओर से कुन्हाड़ी और बारां रोड पर जमीन भी चिन्हित कर दी गई है। अब निगम की ओर से उन पर फायर स्टेशन बनाया जाना है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार से उसके लिए बजट आने पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>जयपुर में 20 हैं लेकिन उपयोग नहीं</strong><br />सूत्रों के अनुसार जयपुर में करीब 19 से 20 फायर बाइक हैं। जो नगर निगम ने करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की लागत से वर्ष 2018 में क्रय की थी। उनमें से अधिकतर फायर बाइक का उपयोग ही नहीं हो रहा है। वे वहां धूल फांक रही हैं या उनका आग बुझाने के अलावा अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है। नगर निगम जयपुर के सीएफओ गौतम लाल ने बताया कि जयपुर में फायर बाइक पहले से ही हैं। जरूरत पडे पर उनका उपयोग किया जाता है। फिलहाल नई फायर बाइक क्रय करने की जानकारी नहीं है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 14:38:33 +0530</pubDate>
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                <title>देशी फ्रिज की वापसी : रंग-बिरंगे और नल युक्त मटके कर रहे आकर्षित </title>
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                        <![CDATA[सेहत और संस्कृति दोनों का हो रहा बचाव।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/return-of-desi-fridge--colourful-and-tap-fitted-pots-are-attracting-people/article-111531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। गर्मी की दस्तक के साथ ही छीपाबडौद कस्बे की गलियों में एक पुरानी लेकिन बेहद भरोसेमंद परंपरा की वापसी देखने को मिल रही है। मिट्टी से बने मटके और मटकी  जिन्हें आम बोलचाल में देशी फ्रिज कहा जाता है। इन दिनों कस्बे में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। तेज धूप और बढ़ते तापमान ने जहां बिजली से चलने वाले फ्रिज की सीमाएं उजागर कर दी हैं। वहीं ये देसी मटके एक बार फिर ठंडक की तलाश में लोगों की पहली पसंद बन गए हैं।</p>
<p><strong>मिट्टी में छुपी ठंडक की ताकत</strong><br />बिजली से मुक्त और पूरी तरह प्राकृतिक मटके-मटकी न केवल शरीर को राहत पहुंचाते हैं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार मटके का पानी शरीर की गर्मी को संतुलित करता है और पाचन में सहायक होता है। यह गले को नुकसान नहीं पहुंचाता और शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करता है।</p>
<p><strong>ट्रेडिशन बनी आधुनिक जरूरत</strong><br />एक ओर जहां बिजली की कटौती और महंगे बिल लोगों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। वहीं मटका एक सस्ता, टिकाऊ और ऊर्जा रहित विकल्प बनकर उभरा है। न कोई बिजली की जरूरत, न कोई रखरखाव—बस ठंडी मिट्टी की सौंधी खुशबू और प्राकृतिक ठंडक।</p>
<p><strong>कला को मिला नया जीवन</strong><br />इस देसी फ्रिज की बढ़ती मांग ने कुम्हारी कला में फिर से जान फूंक दी है। कई कुम्हार परिवार जो इस पेशे से दूर हो चुके थे। अब फिर से चाक पर लौट आए हैं। यह न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है बल्कि पर्यावरण की रक्षा की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है। जब मौसम सख्त हो और शरीर को राहत की जरूरत हो, तब आधुनिक मशीनों से हटकर परंपरा की ओर लौटना ही समझदारी है। मटका न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि जीवन में मिट्टी की सादगी और संस्कृति की गरिमा भी लौटाता है। इस गर्मी देशी फ्रिज की यही सादगी हर दिल को भा रही है।</p>
<p><strong>कीमत सस्ती, सेहत भारी</strong><br />मटकों की कीमत 50 रुपये से लेकर 350 रुपये तक जा रही है। यह दाम उनके आकार, डिजाइन और सुविधाओं पर निर्भर करते हैं। मटके के साथ अब रंगीन कवर, ढक्कन और नल जैसे आकर्षक फीचर्स भी मिलने लगे हैं। </p>
<p><strong>गली-नुक्कड़ों पर सजी स्टॉल </strong><br />कस्बे के कई मौहल्लों में इन दिनों कुम्हार समाज के लोग रंग-बिरंगे मटकों के स्टॉल सजाए खड़े हैं। कहीं पर चिकनी मिट्टी के साधारण मटके बिक रहे हैं तो कहीं आधुनिक डिजाइन वाले नल युक्त मटके ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। जैसे ही तापमान 38 डिग्री पार हुआ। इन मटकों की मांग में अचानक उछाल आ गया।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />लोग अब मटका सिर्फ पानी रखने के लिए नहीं बल्कि सेहत और संस्कृति दोनों को बचाने के लिए भी खरीद रहे हैं।<br /><strong>- कुंजबिहारी प्रजापति, दुकानदार। </strong></p>
<p>देसी मटके एक बार फिर ठंडक की तलाश में लोगों की पहली पसंद बन गए हैं। गर्मी के चलते देसी मटकी और मटकों की बिक्री में इजाफा हुआ है। <br /><strong>- गोलू कुम्हार, दुकानदार। </strong></p>
<p>मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, जो शरीर की गर्मी को संतुलित करता है और पाचन में सहायक होता है। यह गले को नुकसान नहीं पहुंचाता और बर्फ या फ्रिज के पानी की तुलना में स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद है। मिट्टी के बर्तन न सिर्फ  सेहतमंद, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी हैं।<br /><strong>- डॉ. पवन मेघवाल, आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 17:21:22 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में गर्मी का सितम : कल से राहत की उम्मीद, 7 जिलों में तेज गर्मी पड़ने का येलो अलर्ट जारी </title>
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                        <![CDATA[ प्रदेश में फिलहाल भीषण और आग उगलती गर्मी का दौर जारी है। तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/summer-in-the-state-is-expected-to-relieve-relief-from/article-111322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/temprature-heat-garmi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में फिलहाल भीषण और आग उगलती गर्मी का दौर जारी है। तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है। अधिकांश जिलों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। ऐसे में आमजन का हाल बेहाल है। मौसम विभाग ने आज 7 जिलों में तेज गर्मी पड़ने का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं 20 अप्रैल से प्रदेश में तेज गर्मी और लू से राहत मिलने की उम्मीद जताई है।</p>
<p>20 अप्रैल से हवाओं की दिशा बदलेगी और राजस्थान में पश्चिमी हवाओं की जगह उत्तरी हवा का प्रभाव बढ़ने लगेगा। इससे दिन के तापमान में गिरावट होगी और लोगों को तेज गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने 22 अप्रैल तक तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट होने का अनुमान जताया है और तेज गर्मी से राहत मिलने की संभावना जताई है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>कार्यालयों में आमजन के लिए लगे वाटर कूलर आधे बंद, आधे चालू</title>
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                        <![CDATA[अधिकारी - कर्मचारी पी रहे कैम्पर का पानी ।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-coolers-installed-for-the-general-public-in-offices-are-half-closed--half-are-on/article-109664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/2557rtrer-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का सीजन शुरु होने के साथ ही पानी और छाया की डिमांड पहले से अधिक हो गई है। शहर के अलावा सरकारी कार्यालयों में भी लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तो है लेकिन वह आधी अधूरी है। गर्मी का सीजन शुरु होने के साथ ही आमजन के लिए सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर छाया पानी की व्यवस्था के लिए प्रशासन  को व्यवस्थाएं करनी है। एक दिन पहले जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने अधिकारियों की बैठक लेकर सभी को छाया पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया था। उसके बाद सरकारी कार्यालयों में पानी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। नगर निगम के राजीव गांधी प्रशासनिक भवन को फिलहाल ए-बी और सी ब्लॉक में बांटा हुआ है। जिसमें से ए ब्लॉक में कोटा दक्षिण और बी व सी में कोटा उत्तर निगम के कार्यालय संचालित हो रहे है।  नगर निगम भवन के बी व सी ब्लॉक में हर फ्लोर पर दोनों तरफ दो-दो वाटर कूलर लगाए हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि जहां तीसरी मंजिल पर सबसे अधिक पानी की जरूरत है वहां के वाटर कूलर बंद है। वहीं दूसरे व पहले फ्लोर के वाटर कूलरों में भी कोई चालू है तो कोई बंद। किसी का नल ही गायब है। वहीं निगम के ए ब्लॉक में ग्राउंड व प्रथम तल पर तो वाटर कूलर ही नहीं है। जबकि दूसरी व तीसरी मंजिल पर एक-एक वाटर कूलर लगे हुए हैं जो चालू हालत में है। नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही मेन गेट के पास भी एक वाटर कूलर लगा हुआ है जो चालू हालत में है। जबकि कई जगह पर मटके भी रखे हुए हैं। लोगों का कहना है कि वाटर कूलर का पानी ठंडा रहता है लेकिन उससे प्यास नहीं बुझती। जबकि मटके के पानी से प्यास बुझ जाती है और वह पानी नुकसान भी नहीं करता है।  </p>
<p><strong>केडीए में भी लगे वाटर कूलर</strong><br />इसी तरह कोटा विकास प्राधिकरण के पुराने व नव विस्तारित भवन में वाटर कूलर तो लगे हुए हैं। उनमें से पुराने भवन में प्रथम तल पर लगा वाटर कूलर बंद है। जबकि नए भवन में सभी फ्लोर पर एक-एक वाटर कूलर चालू हालत में है। नगर निगम और केडीए में लगे वाटर कूलरों का पानी अधिकतर आमजन ही पी रहे है। इसी तरह से अन्य सरकारी कार्यालयों कलक्ट्रेट समेत सभी जगह पर भी वाटर कूलर लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>कैम्परों की अधिक खपत</strong><br />हालत यह है कि चाहे नगर निगम हो या केडीए या अन्य कोई भी सरकारी कार्यालय। यहां आमजन के लिए तो वाटर कूलर है जबकि अधिकारी व कर्मचारी कैम्परों का पानी पी रहे है। सरकारी कार्यालयों में कैम्परों के पानी की भी काफी अधिक खपत है। नगर निगम कार्यालय में  तो सुबह-सुबह कैम्पर की गाड़ी भरकर आती है।  नगर निगम कोटा उत्तर आयुक्त अशोक त्यागी ने बताया कि सभी वाटर कूलर सही करने के लिए निर्देशित किया हुआ है। कोई वाटर कूलर बंद या खराब होगा तो उसे सही करवा दिया जाएगा।  आयुक्त ने बताया कि गर्मी में आमजन के लिए शहर में कई जगह पर मटकों की प्याऊ लगाई जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 16:00:54 +0530</pubDate>
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                <title>20 से ज्यादा जिलों में पारा तीस पार, फरवरी में ही सर्दी फुर्र, दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का अहसास</title>
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                        <![CDATA[प्रदेश में सबसे अधिक तापमान बाड़मेर में 33 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सबसे कम माउंट आबू में 5.8 डिग्री दर्ज किया गया। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-more-than-20-districts-mercury-across-the-thirty-in/article-103961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer41.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब सर्दी का असर धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का अहसास बढ़ गया है। सुबह-शाम की सर्दी अभी बरकरार है, लेकिन दिन में तापमान लगातार बढ़ने से फरवरी में ही अपे्रल माह जैसी गर्मी का अहसास हो रहा है। इसका असर मंगलवार को प्रदेश के करीब दो दर्जन जिलों में देखने को मिला। राजधानी जयपुर सहित ज्यादातर जिलों में मंगलवार को दिन का तापमान 30 डिग्री के पार दर्ज किया गया। रात का तापमान भी औसत 12 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>बाड़मेर में पारा 33 डिग्री </strong><br />इस बीच प्रदेश में सबसे अधिक तापमान बाड़मेर में 33 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सबसे कम माउंट आबू में 5.8 डिग्री दर्ज किया गया। जयपुर सहित अधिकांश शहरों में पारा औसत से 5 डिग्री ऊपर दर्ज होने से दिन में गर्मी महसूस होने लगी है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या </strong><br />मौसम विशेषज्ञों ने अगले चार दिन प्रदेश में इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान जताया है। 15 फरवरी से दिन और गर्म होने तथा सुबह-शाम की भी सर्दी कम होने की संभावना है। जयपुर मौसम केन्द्र ने राजस्थान में 14 फरवरी तक मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है। इस दौरान उत्तर से आने वाली सर्द हवा का प्रभाव रहेगा, जिससे दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव होने की संभावना है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 09:19:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों के लिए तैयारी शुरू, हर अधीक्षण अभियंता को गंभीर पेयजल संकट वाले 10 स्थानों का करना होगा चयन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जलदाय विभाग ने गर्मियों में किसी तरह पीने के पानी की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparations-begin-for-summer-every-superintending-engineer-will-have-to/article-98440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/119.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जलदाय विभाग ने गर्मियों में किसी तरह पीने के पानी की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने सभी अधीक्षण अभियंता को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी 10 जगह चिन्हित करने को कहा है, जहां ग्रीष्म ऋतु में अक्सर पेयजल की समस्या रहती हैं, जिससे आगामी ग्रीष्म ऋतु में इन समस्याओं का समाधान समय रहते हुए किया जा सके।</p>
<p>इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में टैंकर के माध्यम से पेयजल का परिवहन किया जाना है, ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए प्रस्ताव मांगे गए है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछली बार मानसून की अच्छी-आवक होने के कारण इस बार ज्यादातर क्षेत्रों में पीने की पानी की समस्या नहीं रहेगी। पिछले साल करीब 10 हजार गांव और डेड सो से अधिक शहरों में पानी का संकट रहा था, जिनमे टैंकरों से पानी की सप्लाई की गई थी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 15:22:43 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में कहर बरपा रही आग उगलती गर्मी, टूटा 10 साल का रिकॉर्ड  </title>
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                        <![CDATA[ भीषण गर्मी से 13 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इसमें 22 साल का एक स्टूडेंट कपिल भी शामिल है जो एग्जाम देने जयपुर आया था और जैसे ही एग्जाम देकर कॉलेज से बाहर निकला वह बेहोश हो गया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fire-wreaking-havoc-in-the-state-10-year-record-broken/article-79715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(18)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में आग उगलती गर्मी अपना कहर लगातार बरपा रही है। मई महीने में चूरू में पारा 8 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर 50.5 डिग्री पर पहुंच गया। इससे पहले एक जून 2019 को पारा 50.8 पहुंच गया था। जानकारी के अनुसार भीषण गर्मी से 13 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इसमें 22 साल का एक स्टूडेंट कपिल भी शामिल है जो एग्जाम देने जयपुर आया था और जैसे ही एग्जाम देकर कॉलेज से बाहर निकला वह बेहोश हो गया। यहां से उसे जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रथमदृष्टया चिकित्सकों ने युवक की मौत का कारण गर्मी बताया है। वहीं टोंक में पति पत्नी समेत पांच लोगों की मौत हुई है। पाली में भी एक हैड कांस्टेबल की गर्मी से मौत होने की जानकारी मिली है। उदयपुर जिले के कुराबड़ थाना क्षेत्र के छोटा भल्लो का गुड़ा निवासी महिला की मौत हुई है। भरतपुर शहर के अटल बंद थाना इलाके में और भरतपुर शहर के सुभाष नगर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। बारां जिले में हरनावदा शाहजी क्षेत्र में दो लोगों की, कस्बे के ही बोरखेड़ी रोड पर एक व्यक्ति की, पाली के पुनायता औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री के कमरे में एक मजदूर का शव मिला है। श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट में गर्मी और लू के कारण एक श्रमिक की मौत की खबर है। हालांकि इन सभी मौतों की फिलहाल चिकित्सा विभाग और प्रशासन ने हीट स्ट्रोक या हीट वेव से होने की पुष्टि नहीं की है। </p>
<p><strong>चूरू में आसमां से बरसी आग, जयपुर में भी टूटा रिकॉर्ड </strong><br />भीषण गर्मी के बीच तापमान रोजाना नए रिकॉर्ड बना रहा है। मंगलवार को प्रदेश का चूरू जिला देश ही नहीं, बल्कि विश्व का सबसे गर्म जिला बन गया। चूरू में गर्मी ने पिछले आठ साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया और यहां पारा 50.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं इससे पहले 19 मई, 2016 को चूरू में अधिकतम तापामन 50.2 डिग्री दर्ज किया गया था। वहीं राजधानी जयपुर में भी गर्मी का पिछले 10 साल का रिकॉर्ड टूटा है और यहां मंगलवार को भीषण गर्मी और लू के कहर के बीच अधिकतम तापमान 46.6 डिग्री दर्ज किया गया। यहां बीती रात का तापमान 33.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले जयपुर में दस साल पहले मई माह में इतना तापमान रिकॉर्ड किया गया था। जयपुर में देर शाम कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हुई। वहीं पिलानी में भी तापमान 49 डिग्री दर्ज किया गया जो इससे पहले 25 साल पहले रिकॉर्ड किया था। </p>
<p><strong>अब आगे क्या</strong><br />29 मई से पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में और 30 मई से पश्चिमी राजस्थान के कुछ भागों में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस गिरावट होने की संभावना है। जून के प्रथम सप्ताह में राज्य के ज्यादातर भागों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास दर्ज होने की संभावना है। वहीं 30 और 31 मई को एक नया विक्षोभ भी सक्रिय हो सकता है। इसके असर से जयपुर संभाग के कुछ इलाकों में आंधी चलने के साथ बारिश होने की संभावना है। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 10:20:15 +0530</pubDate>
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                <title>गर्मियों में प्रभारी करेंगे स्कूलों का दौरा, रिपोर्ट आधार पर शैक्षणिक गुणवत्ता पर होंगे फैसले</title>
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                        <![CDATA[प्रभारियों की रिपोर्ट पर अध्ययन करने के बाद जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में कई महत्वपूर्ण सुझाव लागू किए जाएंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-charge-will-visit-schools-in-summer-and-decisions-will-be/article-78700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/shiksha-sankul2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा विभाग ने विभागीय अधिकारियों को गर्मी के महीनों में जिलेवार प्रभारी बनाकर स्कूलों के शैक्षणिक गुणवत्ता वाली रिपोर्ट तैयार करने के लिए भेजा है। सभी जिलों की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के लिए सुधार करने वाले कदम उठाएगा। </p>
<p>स्कूल शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने जिलेवार लगाए प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रभार जिलों में महीने में 2 बार सरकारी स्कूलों का दौरा करें। जिसमे जिले में संचालित एक आवासीय विद्यालय भी शामिल हो। इन स्कूलों से धरातल स्तर पर मिलने वाली रिपोर्ट में शैक्षणिक स्तर की रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि नई शिक्षा नीति लागू करने से पहले जरूरी सुधार के कदम उठाए जा सकें। कुणाल ने प्रभारियों को आदेश जारी कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रम एवं महत्वपूर्ण विभागीय योजनाओं की प्रगति तथा शासकीय नीति निर्देशों की क्रियान्विति के सतत् पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदारी सौंपी है। प्रभारियों की रिपोर्ट पर अध्ययन करने के बाद जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में कई महत्वपूर्ण सुझाव लागू किए जाएंगे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 19:00:35 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी  ने ली एक युवक की जान</title>
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                        <![CDATA[ युवक भीख मांगता था और धर्मशाला के सामने ही फुटपथ पर सो जाता था।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scorching-heat-took-the-life-of-a-youth/article-78701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/global-temperature.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भीषण गर्मी और लू के कारण कोटा के भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में एक युवक की मौत हो गई। पुलिस ने सोमवार को युवक के शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। मृतक युवक  हाथरस (उप्र) का रहने वाला था और पिछले दस साल से बजरिया इलाके  में रहता था तथा भीख मांग कर अपना जीवन यापन कर रहा था तथा फुटपाथ पर ही सो जाता था। प्रदेश में लू से  मौत का यह पहला मामला है।पुलिस निरीक्षक रामकिशन गोदारा ने बताया कि  रविवार शाम को करीब छह बजे सूचना मिली  कि बजरिया में  धर्मशाला के सामने एक युवक अचेत अवस्था में पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस  उसे तुरंत एम्बूलेंस की मदद से एमबीएस अस्पताल लेकर गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषितकर दिया। मृतक  युवक की पहचान नवीन कुशवाह (44) निवासी हाथरस (उप्र)  के रूप में हुई। इसके बाद उसके परिजनों को सूचना देकर बुलाया गया। परिजनों के सोमवार को आने के बाद पोस्टमार्टम करवाकर युवक का शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने बताया कि नवीन दस साल पहले घर से निकला  फिर लौटकर कभी नहीं आया। सीआई ने बताया कि नवीन यहां रहकर भीख मांगता था और धर्मशाला के सामने ही फुटपथ पर सो जाता था। गर्मी के कारण उसकी रविवार को अचानक तबीयत खराब हुई और मौत हो गई। <br /> </p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 16:47:15 +0530</pubDate>
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                <title>गर्मियों की दस्तक के साथ ही पानी का संकट शुरू, 100 से ज्यादा शहर-कस्बों और 10 हजार गांव-ढाणी में पेयजल की आने लगी डिमांड</title>
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                        <![CDATA[ प्रदेश में हर साल की तरह गर्मियों की दस्तक देने के साथ ही पानी का संकट शुरू हो गया है। राज्य के 100 शहर और 10 हजार गांव ढाणी में पानी का संकट सामने आ रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-the-arrival-of-summer-water-crisis-started-demand-for/article-74512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में हर साल की तरह गर्मियों की दस्तक देने के साथ ही पानी का संकट शुरू हो गया है। राज्य के 100 शहर और 10 हजार गांव ढाणी में पानी का संकट सामने आ रहा है। जलदाय विभाग आकस्मिक कार्य योजना के तहत इन प्रभावित क्षेत्रों में पानी का टैंकरों से परिवहन करवाने में जुटा है ।पेयजल व्यवस्था के लिए सभी जिला कलेक्टरों को 50-50 लाख की अतिरिक्त राशि मुहैया करवाई गई है ताकि जरूरत पड़ने पर जिले में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 05 Apr 2024 15:16:22 +0530</pubDate>
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