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                <title>summer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>summer RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजस्थान में भीषण गर्मी का प्रकोप : बाड़मेर में पारा 46°C पार, जयपुर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में गर्मी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है; बाड़मेर 46°C के साथ सबसे गर्म रहा। पिछले 12 वर्षों का रिकॉर्ड टूटते ही कोटा और जोधपुर भी तप रहे हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की खबर दी है—28 से 30 अप्रैल के बीच आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का येलो अलर्ट जारी किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/severe-heat-wave-in-rajasthan-mercury-crosses-46%C2%B0c-in-barmer/article-151842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/heatwave.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में गर्मी लगातार अपने तेवर दिखा रही है और तापमान तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में गर्मी चरम पर रही, जहां बाड़मेर में इस सीजन का सबसे अधिक तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। पिछले 12 वर्षों में यह तीसरी बार है जब यहां तापमान 46 डिग्री के पार पहुंचा है। वहीं कोटा और जोधपुर में भी तापमान पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया है। रविवार को प्रदेश के 8 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया, जिससे लोगों को दिनभर तेज गर्मी और लू का सामना करना पड़ा।</p>
<p>शाम के समय मौसम ने कुछ राहत दी और अजमेर व जोधपुर सहित कई जिलों में आंधी के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार आज सोमवार को प्रदेश के 5 जिलों में आंधी और बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। जयपुर सहित कई जिलों में दिन और रात दोनों समय हीटवेव का असर रहने की संभावना है। हालांकि 28 से 30 अप्रैल के बीच आंधी-बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने के आसार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:43:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब-चंडीगढ़ में लू का अलर्ट : तापमान 41 डिग्री सेल्सियस, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब और चंडीगढ़ में पारा 41°C के पार पहुँच गया है, जिससे लू का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 24 अप्रैल तक भीषण गर्मी की चेतावनी दी है। बठिंडा सबसे गर्म रहा, जबकि लुधियाना और पटियाला में हीटवेव जैसे हालात हैं। 23 अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ के कारण राहत मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/loot-alert-in-punjab-chandigarh-temperature-41-degree-celsius-meteorological-department/article-151194"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/weather.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। पंजाब और चंडीगढ़ में तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने 24 अप्रैल तक लू का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहने का अनुमान है। राज्य के 21 जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जबकि बठिंडा में सबसे अधिक 41 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। लुधियाना, मोहाली, पटियाला, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब समेत सात जिलों में हीटवेव जैसे हालात बनने की आशंका है। दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक गर्मी का असर सबसे अधिक रहेगा। </p>
<p>चंडीगढ़ में 38.1 डिग्री सेल्सियस, लुधियाना में 39.4 डिग्री सेल्सियस और पटियाला में 39.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने परामर्श जारी कर लोगों को अधिक पानी पीने, धूप से बचने और हल्का भोजन करने की सलाह दी है। अस्पतालों में विशेष वार्ड और 24 घंटे स्टाफ की व्यवस्था की गयी है। मौसम विभाग के अनुसार 23 अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे मौसम में बदलाव के आसार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:37:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कापरेन में गहराया पेयजल संकट, तीन दिन से नल सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[बस स्टैंड पर लगा वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा होने से यात्री परेशान हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drinking-water-crisis-deepens-in-kapren--taps-run-dry-for-three-days/article-150921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगर पालिका क्षेत्र कापरेन में बढ़ती गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर हो गया है। शहर के कई वार्डों में पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नागरिकों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार वार्ड संख्या 24, 15 और 23 स्थित जोसया का खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से नल सूखे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों नंदकिशोर खारोल, बबलू सेन, महावीर एवं सुरेश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कभी-कभी एक-दो दिन पानी की आपूर्ति कर फिर मोटर खराब होने का बहाना बनाकर सप्लाई बंद कर दी जाती है।</p>
<p>इधर बस स्टैंड पर नगर पालिका द्वारा लगाया गया वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा है। पानी उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय निवासी राजाराम गुर्जर ने कहा कि व्यस्त स्थान पर भी मूलभूत सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जहां आमजन पानी के लिए परेशान हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से बेखबर बने हुए हैं। लोगों ने शीघ्र जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने की मांग की है।<br /> <br /><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong></p>
<p>मोटर खराब होने के कारण सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिसे अब ठीक करवा लिया गया है और पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है<br /><strong>-खुशबू मीणा, जेईएन, जलदाय विभाग </strong></p>
<p> टंकी में पानी भरवाकर जल्द ही नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा, ईओ, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:22:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : गंदगी हटा बनाए ‘जल मंदिर’, एडीएम सिटी ने किया वाटर कूलरों का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[भीड़ प्रबंधन के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--filth-cleared-to-create-a--jal-mandir---water-shrine---adm-city-inaugurates-water-coolers/article-149970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिशु एवं मातृ चिकित्सालय जेके लोन अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार और नवाचार की दिशा में शुक्रवार को अहम कदम उठाए गए। एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने अस्पताल परिसर में स्थापित किए गए तीन नए वाटर कूलरों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-वीसी रूम का प्रस्ताव मांगा और ओपीडी में भीड़ कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एडीएम ने ओपीडी और डिस्चार्ज प्रक्रिया को और सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को कम से कम समय में इलाज मिल सके।</p>
<p><strong>आस्था से स्वच्छता का संदेश</strong><br />अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि परिसर के भीतर 80-80 लीटर क्षमता वाले तीन नए वाटर कूलर लगाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए उन स्थानों को चिन्हित किया जहां पहले गंदगी रहती थी। अधीक्षक ने बताया कि इन जगहों को पूरी तरह साफ करवाकर 'जल मंदिर' के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर कांच के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है, ताकि लोग आस्था के कारण पानी पीने वाले स्थान पर गंदगी न फैलाएं।</p>
<p><strong>भामाशाह काउंटर को बाहर बनवाने का सुझाव</strong><br />एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने एनआईसीयू (NICU) और सीआईसीयू (CICU) के निरीक्षण के बाद ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ को देखा। उन्होंने भीड़ प्रबंधन हेतु सुझाव दिया कि ओपीडी ब्लॉक में दबाव कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर डोम के पास खाली पड़े स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इससे छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने वाले मरीजों को बाहर से ही लाभ मिल सकेगा और भीतर भीड़ जमा नहीं होगी।</p>
<p><strong>ई-वीसी रूम की जरूरत पर जोर</strong><br />डिजिटल दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए एडीएम ने अस्पताल में ई-वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) रूम तैयार करने के लिए प्रस्ताव मांगा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रेनिंग, मेडिकल कोर्स और विशेषज्ञों के साथ टेस्ट रिपोर्ट साझा करने के लिए वीसी रूम की बहुत आवश्यकता है। अधीक्षक शर्मा ने बताया कि हमारे 2-3 डॉक्टर लीगल में ही लगे रहते है। वी सी रूम से हमें समय और कार्य प्रबंध्न में लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने पहले ही चेताया था</strong><br />अस्पताल परिसरों में गर्मी की शुरूआत के साथ ही मरीजाें और तीमरदारों के लिये पीने के पानी की कमीं को लेकर दैनिक नवज्याति ने ''एमबीएस में 3 प्याऊ फिर से शुरू 8 के लिये इंतजार'' प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद राजकीय एमबीएस चिकित्सालय परिसर मेंं स्थित जे के लोन शिशु एवं मातृ चिकित्सालय में आज एक साथ 3 वाटर कूलरों को जनता को समर्पित कर दिया गया।<br /> <br />गर्मी को देखते हुये मरीजों की सुविधा के लिये जन सहयोग से ठण्ड़े पानी के लिये 3 जगह व्यवस्था की है। एडीएम साहब ने हमें सुझाव दिये है। इनके बारेे में हम काम करेंगे।<br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक जे के लोन</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:02:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूखी घास व कचरा, गर्मी में आग का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[हर साल हो रही आग लगने की घटनाएं,शहर में ट्रांसफार्मरों के पास लगा है कचरे का अम्बार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dry-grass-and-waste-pose-fire-hazard-during-summer/article-147989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)41.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा। आने वाले तीन महीने अप्रैल से जून में तापमान अधिक होने पर गर्मी भी भीषण पड़ती है। ऐसे में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों में लगने वाली आग से आमजन अधिक प्रभावित होते हैं। हालत यह है कि ट्रांसफार्मरों के आस-पास कचरा व सूखी घास आग का बढ़ना कारण बनते हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए बिजली कम्पनी ने एक निर्धारित दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाए हुए हैं। वहीं आमजन को इसके खतरे से बचाने के लिए सभी ट्रांसफार्मर को जमीन से काफी ऊंचाई पर रखा गया है। साथ ही इनकी सुरक्षा के लिए उनके चारों तरफ लोहे की जाली की फेसिंग भी की हुई है। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर ट्रांसफार्मर के आस-पास लोगों द्वारा कचरा डालने व वहां उगी सूखी घास गर्मी में आग लगने का बड़ा कारण बन रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">यहां है बुरी स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">शहर में वैसे तो सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर हैं। उनमें से कई जगह ऐसी हैं जहां ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरा व सूखी घास है। जिनमें थोक फल सब्जीमंडी के बाहर हो या फर्नीचर मार्केट शॉपिंग सेंटर, नई धानमंडी के पास मोटर मार्केट हो या किशोर सागर तालाब की पाल। बंगाली कॉलोनी छावनी समेत कई अन्य स्थानों पर यही हालत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">मुख्य मार्गों पर लगा रही सीमेंट जाली</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर लगे ट्रांसफार्मरों पर तो सीमेंट की जाली लगाई जा रही है। जिससे न तो कोई उनमें आसानी से घुस सकेगा। साथ ही उन जालियों से कचरा भी अंदर नहीं फेका जा सकता। जिससे आग लगने का खतरा भी कम हो गया है। लेकिन कॉलोनियों व अंदरूनी क्षेत्रों के ट्रांसफार्मरों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सभी जगह सुरक्षा, सफाई निगम का जिम्मा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निजी बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी ट्रांसफार्मरों पर कम्पनी की ओर से लोहे की रैलिंग से सुरक्षा की हुई है। ट्रांसफार्मर भी जमीन से ऊपर हैं। जिससे करंट का खतरा भी नहीं है। लेकिन इनके आस-पास सूखी घास व कचरा लोग ही डाल रहे हैं। कई बार कचरे में आग लगने पर वह पैनल के माध्यम से ट्रांसफार्मर तक पहुंच जाती है। जिससे नुकसान का खतरा रहता है। कचरा व घास की सफाई का जिम्मा निगम कर्मचारियों का है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सफाई होने के बाद डाला जाता है कचरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी मोतीलाल चौधरी ने बताया कि बरसात के समय में ट्रांसफार्मर के आस-पास घास उग जाती है। साथ ही कचरा भी लोग डाल देते हैं। हालांकि निगम की ओर से उसकी सफाई की जाती है। लेकिन कई बार तारों में करंट के चलते सफाई कर्मी ट्रांसफार्मर के नजदीक सफाई नहीं कर पाते। प्रयास करेंगे कि ट्रांसफार्मर के आस-पास भी अच्छी तरह सफाई हो और वहां कचरा एकत्र ही नहीं हो जिससे आग का खतरा बने।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">तापमान अधिक होने से लगती है आग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि अप्रैल से जून के तीन महीने में तापमान अधिक होने से गर्मी पड़ती है। ऐसे में कई बार सूखी घास व कचरे में आग लग जाती है। घास व कचरा ट्रांसफार्मर के नजदीक होने से उससे ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है। जिससे लाइट बंद कर आग बुझाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार लोग जलती वस्तु डाल देते हैं। जिससे भी आग लग जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:21:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कहीं वाटर नहीं तो कहीं कूलर ही गायब, भीषण गर्मी में बदहाल शहर के वाटर कूलर</title>
                                    <description><![CDATA[इन वाटर कूलरों के चालू नहीं होने से पानी भी गर्म आ रहा है जो पानी पीने लायक ही नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-coolers-are-in-a-state-of-disrepair-in-the-scorching-heat/article-146230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक :</strong> शॉपिंग सेंटर में एक्सिस बैंक के पास वाटर कूलर का स्ट्रक्चर बना हुआ है। वर्ष 2018 में करीब 88 हजार रुपए की लागत से यहां वाटर कूलर लगाया गया था। अब वहां पानी के लिए टंकी तो रखी हुई है। लेकिन कूलर ही नहीं है। जिससे आमजन वहां गर्मी में ठंडा पानी पी सके।</p>
<p><strong>दृश्य दो : </strong>फर्नीचर मार्केट में बड़ा भारी वाटर कूलर व्यापार संघ की ओर से लगाया गया था। जिससे यहां आने वाले लोगों को ठंडा पानी मिल सके। लेकिन वर्तमान में यह पूरी तरह की बदहाल हो चुका है। जिससे इसका पीने के पानी के रूप में नहीं विज्ञापन बोर्ड के रूप में उपयोग हो रहा है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन :</strong> गुमानपुरा में मल्टीपरपज स्कूल की चार दीवारी के सहारे एक वाटर कूलर तो लगा हुआ है। लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि वह आमजन के लिए पीने के पानी के रूप में उपयोग नहीं आ रहा है। जिससे इसके होने न होने का फिलहाल कोई लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर के उन वाटर कूलरों की स्थिति बताने के लिए जिनकी वर्तमान में भीषण गर्मी पड?े पर सबसे अधिक जरूरत है। जबकि उनकी स्थिति ऐसी है कि वे उपयोग लायक ही नहीं है। ऐसे शहर में सैकड़ों वाटर कूलर हैं। जिनमें से अधिकतर चालू हालत में नहीं हैं। कहीं पानी की टंकी नहीं हैं तो कहीं पानी की टंकी है तो उसे ठंडा करने वाली मशीन ही नहीं है। कहीं टंकी और मशीन है तो पानी ठंडा नहीं आ रहा है। जिससे इस भीषण गर्मी में लोग इन वाटर कूलरों का पानी नहीं पी पा रहे हैं।शहर में गर्मी तेज पड?े और आगामी दिनों में मौसम को देखते हुए एक दिन पहले ही जिला कलक्टर ने पीने के पानी समेत छाया और लोगों को गर्मी से राहत के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>हर जगह बदहाली</strong><br />शहर में वैसे तो जगह-जगह पर और हर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर वाटर कूलर लगे हुए हैं। फिद्दर चाहे वह विधायक कोष से लगाए गए हों या नगर निगम के माध्यम से। किसी समाजसेवी द्वारा या स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यापार संघों के माध्यम से लगे हों। मुख्य मार्गों पर लगे हों या धार्मिक स्थान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या फिर पार्क व बाजारों में लगे हों। सभी जगह लगे वाटर कूलरों में से अधिकतर बदहाली का शिकार हो रहे हैं। नए शहर के अंतिम छोर से लेकर स्टेशन तक सभी जगह पर वाटर कूलर लगे हुए हैं।</p>
<p><strong>तापमान 38 डिग्री तो उबल रहा पानी</strong><br />वाटर कूलर का मतलब ठंडा पानी है। लेकिन जिस तरह से शहर में अभी 38 डिग्री से अधिक तापमान चल रहा है। ऐसे में जहां नलों में व टंकी का पानी ही गर्म व उबल रहा है। वहीं इन वाटर कूलरों के चालू नहीं होने से उनका पानी भी गर्म आ रहा है। जिससे अधिकतर वाटर कूलरों का पानी पीने लायक ही नहीं है।</p>
<p><strong>लगाने के बाद ध्यान ही नहीं</strong><br />जानकारों के अनुसार किसी स्वयंसेवी संस्था या समाजसेवी द्वारा अपने परिजनों की स्मृति या विशेष अवसरों पर वाटर कूलर लगा तो दिए जाते हैं। जिससे कुछ समय तक तो वे सही रहते हैं। लेकिन उसके बाद उनका कोई ध्यान नहीं रखता। जिससे कभी बिजली कनेक् शन नहीं मिलने या कभी नल गायब होने, पानी नहीं मिलने या टंकी की सफाई नहीं होने समेत कई कारणों से कुछ ही समय में वे वाटर कूलर काम में लेने लायक ही नहीं रहते।</p>
<p><strong>गर्मी से पहले होने चाहिए चालू</strong><br />लोगों का कहना है कि वाटर कूलर का साल में सबसे अधिक उपयोग गर्मी के इन तीन महीनों में ही होता है। जब गर्मी में ही वाटर कूलर खराब या बंद हैं तो उनके होने न होने का कोई लाभ ही नहीं है। नगर निगम या संबंधित एजेंसी को गर्मी से पहले ही इनकी मेंटेनेंस करवाकर चालू हालत में करने चाहिए। जिससे गर्मी में इनका उपयोग हो सके।</p>
<p>दादाबाड़ी निवासी महेश खींची का कहना है कि जो भी संस्था या व्यक्ति वाटर कूलर लगवाए उसकी जिम्मेदारी है उसकी मेंटेनेंस की भी व्यवस्था करे। महावीर नगर निवासी राकेश नागर ने बताया कि गर्मी में दूर दराज से आने वाले लोग विशेष रूप से महिलाएं या मजदूर वर्ग के लोग वाटर कूलर का पानी पीते हैं। लेकिन उन्हें वर्तमान में अधिकतर जगह पर इन वाटर कूलरों का गर्म पानी पीना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम सीमा क्षेत्र चाहे शहर हो या कैथून तक के ग्रामेण इलाकों में करीब आठ सौ वाटर कूलर लगे हुए हैं। इनमें विधायक कोष, नगर निगम या अन्य माध्यमों से लगाए गए वाटर कूलर शामिल हैं। इनकी मेंटेनेंस का टेंडर कर दिया है। पहले सिंगल बिड आने से उसे निरस्त करना पड़ा था। दोबारा से टेंडर किया है जो एक सप्ताह के भीतर खुल जाएगा। साथ ही निगम के माध्यम से वाटर कूलरों का सर्वे कराया जा रहा है। जिनकी शिकायत आ रही है उन्हें फिलहाल निगम स्तर पर चाली किया जा रहा है। दो साल के लिए मेंटेनेंस का करीब दो करोड़ रुपए से अधिक का टेंडर किया गया है।<br /><strong>- सचिन यादव, अधिशाषी अभियंता(विद्युत), नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इस बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक, चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fire-engines-will-not-be-seen-in-the-narrow-streets-this-time-either/article-145962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही शहर में जहां आग लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना है। वहीं निगम की ओर से आग पर काबू पाने की तैयारी तो की गई है लेकिन तंग गलियों में आग लगने पर वहां आग बुझाने के लिए अभी भी निगम के फायर अनुभाग के पास फायर बाइक नहीं आई है। जिससे इस बार भी बिना फायर बाइक के ही गर्मी निकालनी पड़ेगी। नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। 30 छोटी बड़ी और दो हाइड्रोलिक दमकलें भी हैं। जिनसे बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाई जा सकती है। करोड़ों रुपए की लागत वाली बड़ी-बड़ी दमकलें तो हैं। लेकिन मात्र 5 से 7 लाख रुपए कीमत वाली फायर बाइक नहीं हैं। जिससे पुराने शहर की तंग गलियों में आग लगने पर वहां बड़ी दमकलों के नहीं पहुंचने पर आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कोटा में चार फायर बाइक की आवश्यकता होने पर राज्य सरकार को इसकी डिमांड भेजी हुई है। नगर निगम कोटा के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि वैसे तो निगम के पास हर तरह की दमकलें हैं। लेकिन तंग गलियों वाले इलाकों में आग लगने पर कई बार समस्या आती है। उसके लिए फायर बाइक की जरूरत पड़ती है। कोटा में चार फायर बाइक की डिमांड राज्य सरकार को भेजी हुई है। वहां स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर जब भी फायर बाइक क्रय की जाएंगी। वहां से कोटा भी आएंगी।</p>
<p><strong>दो और फायर स्टेशनों के लिए मिली जमीन</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग के पास शहर में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। जिनमें सब्जीमंडी, श्रीनाथपुरम्, भामाशाहमंडी, रानपुर , कैथून और स्टेशन रोड स्थित खेड़ली फाटक में तो फायर स्टेशन हैं। जबकि नदी पार और बारां रोड पर भी फायर स्टेशन की आवश्यकता है। इसके लिए नगर निगम की ओर से केडीए को जमीन आवंटन के लिए पत्र लिखा गया था। जिसके बाद केडीए की ओर से कुन्हाड़ी और बारां रोड पर जमीन भी चिन्हित कर दी गई है। अब निगम की ओर से उन पर फायर स्टेशन बनाया जाना है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार से उसके लिए बजट आने पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>जयपुर में 20 हैं लेकिन उपयोग नहीं</strong><br />सूत्रों के अनुसार जयपुर में करीब 19 से 20 फायर बाइक हैं। जो नगर निगम ने करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की लागत से वर्ष 2018 में क्रय की थी। उनमें से अधिकतर फायर बाइक का उपयोग ही नहीं हो रहा है। वे वहां धूल फांक रही हैं या उनका आग बुझाने के अलावा अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है। नगर निगम जयपुर के सीएफओ गौतम लाल ने बताया कि जयपुर में फायर बाइक पहले से ही हैं। जरूरत पडे पर उनका उपयोग किया जाता है। फिलहाल नई फायर बाइक क्रय करने की जानकारी नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 14:38:33 +0530</pubDate>
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                <title>देशी फ्रिज की वापसी : रंग-बिरंगे और नल युक्त मटके कर रहे आकर्षित </title>
                                    <description><![CDATA[सेहत और संस्कृति दोनों का हो रहा बचाव।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/return-of-desi-fridge--colourful-and-tap-fitted-pots-are-attracting-people/article-111531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। गर्मी की दस्तक के साथ ही छीपाबडौद कस्बे की गलियों में एक पुरानी लेकिन बेहद भरोसेमंद परंपरा की वापसी देखने को मिल रही है। मिट्टी से बने मटके और मटकी  जिन्हें आम बोलचाल में देशी फ्रिज कहा जाता है। इन दिनों कस्बे में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। तेज धूप और बढ़ते तापमान ने जहां बिजली से चलने वाले फ्रिज की सीमाएं उजागर कर दी हैं। वहीं ये देसी मटके एक बार फिर ठंडक की तलाश में लोगों की पहली पसंद बन गए हैं।</p>
<p><strong>मिट्टी में छुपी ठंडक की ताकत</strong><br />बिजली से मुक्त और पूरी तरह प्राकृतिक मटके-मटकी न केवल शरीर को राहत पहुंचाते हैं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार मटके का पानी शरीर की गर्मी को संतुलित करता है और पाचन में सहायक होता है। यह गले को नुकसान नहीं पहुंचाता और शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करता है।</p>
<p><strong>ट्रेडिशन बनी आधुनिक जरूरत</strong><br />एक ओर जहां बिजली की कटौती और महंगे बिल लोगों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। वहीं मटका एक सस्ता, टिकाऊ और ऊर्जा रहित विकल्प बनकर उभरा है। न कोई बिजली की जरूरत, न कोई रखरखाव—बस ठंडी मिट्टी की सौंधी खुशबू और प्राकृतिक ठंडक।</p>
<p><strong>कला को मिला नया जीवन</strong><br />इस देसी फ्रिज की बढ़ती मांग ने कुम्हारी कला में फिर से जान फूंक दी है। कई कुम्हार परिवार जो इस पेशे से दूर हो चुके थे। अब फिर से चाक पर लौट आए हैं। यह न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है बल्कि पर्यावरण की रक्षा की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है। जब मौसम सख्त हो और शरीर को राहत की जरूरत हो, तब आधुनिक मशीनों से हटकर परंपरा की ओर लौटना ही समझदारी है। मटका न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि जीवन में मिट्टी की सादगी और संस्कृति की गरिमा भी लौटाता है। इस गर्मी देशी फ्रिज की यही सादगी हर दिल को भा रही है।</p>
<p><strong>कीमत सस्ती, सेहत भारी</strong><br />मटकों की कीमत 50 रुपये से लेकर 350 रुपये तक जा रही है। यह दाम उनके आकार, डिजाइन और सुविधाओं पर निर्भर करते हैं। मटके के साथ अब रंगीन कवर, ढक्कन और नल जैसे आकर्षक फीचर्स भी मिलने लगे हैं। </p>
<p><strong>गली-नुक्कड़ों पर सजी स्टॉल </strong><br />कस्बे के कई मौहल्लों में इन दिनों कुम्हार समाज के लोग रंग-बिरंगे मटकों के स्टॉल सजाए खड़े हैं। कहीं पर चिकनी मिट्टी के साधारण मटके बिक रहे हैं तो कहीं आधुनिक डिजाइन वाले नल युक्त मटके ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। जैसे ही तापमान 38 डिग्री पार हुआ। इन मटकों की मांग में अचानक उछाल आ गया।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />लोग अब मटका सिर्फ पानी रखने के लिए नहीं बल्कि सेहत और संस्कृति दोनों को बचाने के लिए भी खरीद रहे हैं।<br /><strong>- कुंजबिहारी प्रजापति, दुकानदार। </strong></p>
<p>देसी मटके एक बार फिर ठंडक की तलाश में लोगों की पहली पसंद बन गए हैं। गर्मी के चलते देसी मटकी और मटकों की बिक्री में इजाफा हुआ है। <br /><strong>- गोलू कुम्हार, दुकानदार। </strong></p>
<p>मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, जो शरीर की गर्मी को संतुलित करता है और पाचन में सहायक होता है। यह गले को नुकसान नहीं पहुंचाता और बर्फ या फ्रिज के पानी की तुलना में स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद है। मिट्टी के बर्तन न सिर्फ  सेहतमंद, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी हैं।<br /><strong>- डॉ. पवन मेघवाल, आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 17:21:22 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में गर्मी का सितम : कल से राहत की उम्मीद, 7 जिलों में तेज गर्मी पड़ने का येलो अलर्ट जारी </title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में फिलहाल भीषण और आग उगलती गर्मी का दौर जारी है। तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/summer-in-the-state-is-expected-to-relieve-relief-from/article-111322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/temprature-heat-garmi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में फिलहाल भीषण और आग उगलती गर्मी का दौर जारी है। तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है। अधिकांश जिलों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। ऐसे में आमजन का हाल बेहाल है। मौसम विभाग ने आज 7 जिलों में तेज गर्मी पड़ने का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं 20 अप्रैल से प्रदेश में तेज गर्मी और लू से राहत मिलने की उम्मीद जताई है।</p>
<p>20 अप्रैल से हवाओं की दिशा बदलेगी और राजस्थान में पश्चिमी हवाओं की जगह उत्तरी हवा का प्रभाव बढ़ने लगेगा। इससे दिन के तापमान में गिरावट होगी और लोगों को तेज गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने 22 अप्रैल तक तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट होने का अनुमान जताया है और तेज गर्मी से राहत मिलने की संभावना जताई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कार्यालयों में आमजन के लिए लगे वाटर कूलर आधे बंद, आधे चालू</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारी - कर्मचारी पी रहे कैम्पर का पानी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-coolers-installed-for-the-general-public-in-offices-are-half-closed--half-are-on/article-109664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/2557rtrer-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का सीजन शुरु होने के साथ ही पानी और छाया की डिमांड पहले से अधिक हो गई है। शहर के अलावा सरकारी कार्यालयों में भी लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तो है लेकिन वह आधी अधूरी है। गर्मी का सीजन शुरु होने के साथ ही आमजन के लिए सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर छाया पानी की व्यवस्था के लिए प्रशासन  को व्यवस्थाएं करनी है। एक दिन पहले जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने अधिकारियों की बैठक लेकर सभी को छाया पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया था। उसके बाद सरकारी कार्यालयों में पानी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। नगर निगम के राजीव गांधी प्रशासनिक भवन को फिलहाल ए-बी और सी ब्लॉक में बांटा हुआ है। जिसमें से ए ब्लॉक में कोटा दक्षिण और बी व सी में कोटा उत्तर निगम के कार्यालय संचालित हो रहे है।  नगर निगम भवन के बी व सी ब्लॉक में हर फ्लोर पर दोनों तरफ दो-दो वाटर कूलर लगाए हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि जहां तीसरी मंजिल पर सबसे अधिक पानी की जरूरत है वहां के वाटर कूलर बंद है। वहीं दूसरे व पहले फ्लोर के वाटर कूलरों में भी कोई चालू है तो कोई बंद। किसी का नल ही गायब है। वहीं निगम के ए ब्लॉक में ग्राउंड व प्रथम तल पर तो वाटर कूलर ही नहीं है। जबकि दूसरी व तीसरी मंजिल पर एक-एक वाटर कूलर लगे हुए हैं जो चालू हालत में है। नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही मेन गेट के पास भी एक वाटर कूलर लगा हुआ है जो चालू हालत में है। जबकि कई जगह पर मटके भी रखे हुए हैं। लोगों का कहना है कि वाटर कूलर का पानी ठंडा रहता है लेकिन उससे प्यास नहीं बुझती। जबकि मटके के पानी से प्यास बुझ जाती है और वह पानी नुकसान भी नहीं करता है।  </p>
<p><strong>केडीए में भी लगे वाटर कूलर</strong><br />इसी तरह कोटा विकास प्राधिकरण के पुराने व नव विस्तारित भवन में वाटर कूलर तो लगे हुए हैं। उनमें से पुराने भवन में प्रथम तल पर लगा वाटर कूलर बंद है। जबकि नए भवन में सभी फ्लोर पर एक-एक वाटर कूलर चालू हालत में है। नगर निगम और केडीए में लगे वाटर कूलरों का पानी अधिकतर आमजन ही पी रहे है। इसी तरह से अन्य सरकारी कार्यालयों कलक्ट्रेट समेत सभी जगह पर भी वाटर कूलर लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>कैम्परों की अधिक खपत</strong><br />हालत यह है कि चाहे नगर निगम हो या केडीए या अन्य कोई भी सरकारी कार्यालय। यहां आमजन के लिए तो वाटर कूलर है जबकि अधिकारी व कर्मचारी कैम्परों का पानी पी रहे है। सरकारी कार्यालयों में कैम्परों के पानी की भी काफी अधिक खपत है। नगर निगम कार्यालय में  तो सुबह-सुबह कैम्पर की गाड़ी भरकर आती है।  नगर निगम कोटा उत्तर आयुक्त अशोक त्यागी ने बताया कि सभी वाटर कूलर सही करने के लिए निर्देशित किया हुआ है। कोई वाटर कूलर बंद या खराब होगा तो उसे सही करवा दिया जाएगा।  आयुक्त ने बताया कि गर्मी में आमजन के लिए शहर में कई जगह पर मटकों की प्याऊ लगाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 16:00:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 से ज्यादा जिलों में पारा तीस पार, फरवरी में ही सर्दी फुर्र, दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का अहसास</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में सबसे अधिक तापमान बाड़मेर में 33 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सबसे कम माउंट आबू में 5.8 डिग्री दर्ज किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-more-than-20-districts-mercury-across-the-thirty-in/article-103961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer41.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब सर्दी का असर धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का अहसास बढ़ गया है। सुबह-शाम की सर्दी अभी बरकरार है, लेकिन दिन में तापमान लगातार बढ़ने से फरवरी में ही अपे्रल माह जैसी गर्मी का अहसास हो रहा है। इसका असर मंगलवार को प्रदेश के करीब दो दर्जन जिलों में देखने को मिला। राजधानी जयपुर सहित ज्यादातर जिलों में मंगलवार को दिन का तापमान 30 डिग्री के पार दर्ज किया गया। रात का तापमान भी औसत 12 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>बाड़मेर में पारा 33 डिग्री </strong><br />इस बीच प्रदेश में सबसे अधिक तापमान बाड़मेर में 33 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सबसे कम माउंट आबू में 5.8 डिग्री दर्ज किया गया। जयपुर सहित अधिकांश शहरों में पारा औसत से 5 डिग्री ऊपर दर्ज होने से दिन में गर्मी महसूस होने लगी है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या </strong><br />मौसम विशेषज्ञों ने अगले चार दिन प्रदेश में इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान जताया है। 15 फरवरी से दिन और गर्म होने तथा सुबह-शाम की भी सर्दी कम होने की संभावना है। जयपुर मौसम केन्द्र ने राजस्थान में 14 फरवरी तक मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है। इस दौरान उत्तर से आने वाली सर्द हवा का प्रभाव रहेगा, जिससे दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 09:19:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों के लिए तैयारी शुरू, हर अधीक्षण अभियंता को गंभीर पेयजल संकट वाले 10 स्थानों का करना होगा चयन</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग ने गर्मियों में किसी तरह पीने के पानी की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparations-begin-for-summer-every-superintending-engineer-will-have-to/article-98440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/119.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जलदाय विभाग ने गर्मियों में किसी तरह पीने के पानी की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने सभी अधीक्षण अभियंता को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी 10 जगह चिन्हित करने को कहा है, जहां ग्रीष्म ऋतु में अक्सर पेयजल की समस्या रहती हैं, जिससे आगामी ग्रीष्म ऋतु में इन समस्याओं का समाधान समय रहते हुए किया जा सके।</p>
<p>इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में टैंकर के माध्यम से पेयजल का परिवहन किया जाना है, ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए प्रस्ताव मांगे गए है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछली बार मानसून की अच्छी-आवक होने के कारण इस बार ज्यादातर क्षेत्रों में पीने की पानी की समस्या नहीं रहेगी। पिछले साल करीब 10 हजार गांव और डेड सो से अधिक शहरों में पानी का संकट रहा था, जिनमे टैंकरों से पानी की सप्लाई की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 15:22:43 +0530</pubDate>
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