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                <title>water shortage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water shortage RSS Feed</description>
                
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                <title>बूंद-बूंद को तरसा पाकिस्तान : भारत के रुख से पाकिस्तान में टेंशन, आईएसआई हेडक्वार्टर पहुंचे शहबाज शरीफ, चिनाब नदी का प्रवाह रोके जाने से पानी की भारी किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की ओर से पाकिस्तान में चिनाब नदी का प्रवाह रोके जाने के बाद नदी का जलस्तर कई गुना कम हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-crafted-drop-drop-india-reached-tension-isi-headquarters-in-pakistan/article-113262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)28.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। भारत की ओर से पाकिस्तान में चिनाब नदी का प्रवाह रोके जाने के बाद नदी का जलस्तर कई गुना कम हो गया है, जिससे इस्लामाबाद में पानी की किल्लत हो गई है। भारत ने इस्लामाबाद को सूचित किए बिना जम्मू के बगलिहार और सलाल पनबिजली बांधों के माध्यम से पाकिस्तान में चिनाब नदी का प्रवाह रोक दिया, जिससे पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा पाकिस्तान में हाहाकार मच गया है। </p>
<p>डॉन ने बताया कि पाकिस्तान में पंजाब के सियालकोट स्थित मारला हेडवर्क्स में दर्ज चिनाब का जलस्तर रविवार को 35,000 क्यूसेक से घटकर सोमवार सुबह लगभग 3,100 क्यूसेक रह गया। पंजाब सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि रविवार को निर्णय लेने के बाद भारत ने चिनाब नदी के बहाव को पाकिस्तान की ओर लगभग रोक दिया है। वर्तमान में वे चिनाब बेसिन में अपने बांधों/जलविद्युत परियोजनाओं को भरने के लिए हमारे पानी का उपयोग कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 10:23:27 +0530</pubDate>
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                <title>डिमांड से दोगुना 51.50 करोड़ लीटर पानी की प्रतिदिन सप्लाई, फिर भी हलक सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[हैड क्षेत्र में पानी का दुरुपयोग से टेल मे नहीं पहुंच रहा पानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/supply-of-51-50-crore-liters-of-water-daily--double-the-demand--still-throats-are-dry/article-107322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(3)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जलदाय विभाग कोटा शहर में प्रतिदिन 51.50 करोड़ लीटर शुद्ध पानी सप्लाई कर रहा है। इसके बावजूद अंतिम छोर पर बसे लोग प्यासे हैं। जबकि, यह पानी 15 लाख शहरवासियों की डिमांड से दो गुना है, फिर भी पानी की किल्लत बनी  है। सवालों के जवाब खोजने के लिए दैनिक नवज्योति ने जल अधिकारियों व जानकारों से बात की तो जल वितरण व्यवस्था अव्यवस्थित होना बड़ा कारण सामने आया। हुआ यूं, जलदाय विभाग शहर  के तीन बड़े पम्प हाउस अकेलगढ़, मिनी अकेलगढ़ सकतपुरा व श्रीनाथपुरम से फुल कैपेसिटी से कुल 515 एमएलडी पीने का पानी सप्लाई कर रहा है, जो लीटर में 51.50 करोड़ होता है। इसके बावजूद अंतिम छोर पर बसे लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। कारण यह है, पम्प हाउस के आसपास हैड क्षेत्रों में पानी का दुरुपयोग हो रहा है, यहां लोग अपनी जरूरत से ज्यादा पानी खर्च कर रहे हैं, जिस पर लगाम लगाने की नियंत्रण व्यवस्था नहीं है। वहीं, कई जगहों पर वॉल व पाइपलाइनों में रिसाव होने से छिजत में पानी व्यर्थ बह रहा है। जिसे रोक लिया जाए तो अंतिम छोर तक पानी की कमी नहीं होगी।  </p>
<p><strong>किस पम्प हाउस से कितना पानी हो रहा रिलीज</strong><br />रावतभाटा रोड स्थित अकेलगढ़ से प्रतिदिन 320 एमएलडी यानी 32 करोड़ लीटर पानी सप्लाई होता है। वहीं, मिनी अकेलगढ़ सकतपुरा से 160 एमएलडी यानी 16 करोड़ लीटर तथा श्रीनाथपुरम पम्प हाउस से 35 एमएलडी यानी 3 करोड़ 50 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है। इस तरह प्रतिदिन 51.50 करोड़ लीटर पानी की शहरभर में आपूर्ति की जाती है। शहरवासियों को इतना शुद्ध पानी प्रतिदिन उपलब्ध करवाने के लिए चम्बल से पानी लिफ्ट करने से लेकर बिजली, मशीन मेंटिनेंस, क्लोरिन, बिलिचिंग, एलम सहित कर्मचारियों व अधिकारियों की तनख्वाह पर करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ता है। एक रिसर्च के मुताबिक एक समान्य परिवार दिनभर में करीब 750 लीटर पानी रोजमर्रा के काम में बर्बाद कर देता है। जबकि, यह वो पानी है, जिसका इस्तेमाल पीने व खाना बनाने में नहीं किया जाता है।</p>
<p><strong>इन इलाकों में रहता जल संकट</strong><br />डिमांड से दोगुना पानी सप्लाई करने के बावजूद प्रेम नगर, डीसीएम, कंसुआ, रायपुरा, थेकड़ा, छावनी, संजय नगर, कोटड़ी, बजरंग नगर, बोरखेड़ा क्षेत्र, देवली अरब, आंवली, रोजड़ी, बंधा धर्मपुरा, दौलतगंज, मंडाना सहित कई इलाकों में लोग जल संकट से जूझते हैं। हालात यह हैं, गर्मियों के दिनों में इनमें से कई इलाकों में तो टैंकरों से जलापूर्ति की जाती है। </p>
<p><strong>कहीं 24 घंटे तो कहीं 6 घंटे पानी</strong><br />विभाग के अनुसार, शहर के विज्ञान नगर, दादाबाड़ी, तलवंडी, जवाहर नगर सहित कई इलाके ऐसे हैं, जहां 24 जलापूर्ति रहती है। वहीं, डीसीएम व नदीपार क्षेत्र सहित कई इलाकों में सुबह-शाम 3-3 घंटे सप्लाई की जाती है। इसके अलावा पानी का प्रेशर मध्यम से निम्न रहने से लोगों को अपनी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता। </p>
<p><strong>शहर की डिमांड से दो गुना पानी की सप्लाई</strong><br />जलदाय विभाग के अनुसार, शहर की 15 लाख आबादी को प्रतिदिन 30 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता होती है। जिसके मुकाबले विभाग द्वारा तीनों पम्प हाउस से कुल 515 एमएलडी यानी 51 करोड़ 50 लाख लीटर पानी की सप्लाई प्रतिदिन की जा रही है, जो डिमांड से दो गुना अधिक है। यदि, प्रति व्यक्ति का आंकड़ा निकाला जाए तो प्रति व्यक्ति  को प्रतिदिन 325 से 340 लीटर पानी मिल रहा है। जबकि, प्रति व्यक्ति की जरूरत 200 लीटर पानी रहती है। इसके बावजूद लोग पानी का मोल नहीं समझ रहे। जिससे जल डिस्टीब्यूशन गड़बड़ा रहा है और अंतिम छोर पर जल संकट गहरा जाता है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के तीनों पम्प हाउस से पूर्ण क्षमता से प्रतिदिन 515 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है। शहर की डिमांड से अधिक जलापूर्ति कर रहे हैं ताकि लोगों को पानी के लिए परेशानी न हो। वहीं, डीसीएम क्षेत्र में अमृत  2.0 योजना के अनुसार, 100 एमएलडी क्षमता का प्लांट बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके निर्माण के बाद से इस क्षेत्र में जल संकट की समस्या नहीं रहेगी। शहरवासियों की सुविधाओं के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।<br /><strong>- प्रकाशवीर नथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 15:16:42 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दियों में बिजली कटौती से बनी पानी की किल्लत </title>
                                    <description><![CDATA[ बिजली गुल होने पर पानी की समस्या बस्ती के लोगों को परेशानी पैदा कर देती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-shortage-due-to-power-cuts-in-winter/article-96557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। एक तरफ तो सरकार हर घर को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के नाम पर लाखों रुपए का बजट सहरिया क्षेत्र की ग्राम पंचायतो में दे रही है ताकि जल संकट से क्षेत्रवासी परेशान ना रहे। शाहाबाद पंचायत समिति क्षेत्र के गांव बिची, बेहट, कलोनी, बडारा, खांडा सहरोल,शाहपुर, गंगापुर राजपुर,धतुरिया,खटका ,गणेशपुरा,सेमली फाटक आदि ग्राम पंचायत में सरकारी ट्यूबवेल लगी हुई है जो बिजली आने पर उपयोगी साबित होती हैं और बिजली गुल होने पर अनुपयोगी शोपीस मात्र बनकर रह जाती हैं। इसके चलते इन गांवों के बाशिंदों को दैनिक आवश्यकता के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है और सर्दी के मौसम में पानी की समस्या लोगों को परेशानी का सबब बनी हुई है।</p>
<p><strong>पानी के लिए होते है लड़ाई झगडे</strong><br />अर्जुन सहरिया, बद्री सहरिया, मिलन सहरिया, बाई सहरिया रामनिवास सहरिया ने बताया कि गंगापुर सहरिया बस्ती में करीब 70-80 सहरिया परिवार निवास करते हैं। इस बस्ती में एक ट्यूबवेल लगी हुई है। जिससे लोग दैनिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए पानी लेते हैं लेकिन बिजली गुल होने पर पानी की समस्या बस्ती के लोगों को परेशानी पैदा कर देती है। दिनभर बिजली नहीं आती है तो ट्यूबवेल नहीं चलती है और बिजली आने-जाने का कोई निर्धारित समय भी तय नहीं है। ऐसे में पेयजल के लिए  कड़ी मशक्कत उठानी पड़ रही है। जब बिजली आती है तो पानी भरने को लेकर लोगों की भीड़ जमा हो जाती है और इस दौरान लड़ाई झगड़ा भी पानी को लेकर अक्सर होते रहते हैं। <br /> <br /><strong>खेतों में चल रहा पलेवा कार्य, पानी की है जरूरत</strong><br /> ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में पानी की सिंचाई पलेवा  का काम चल रहा है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में बिजली मुहैया नहीं हो पा रही है। ऐसे में दूर-दराज क्षेत्र से पानी का जुगाड़ करना पड़ता है अगर बिजली आती है तो ट्यूबबैल पर पानी भरने वालों की भीड़ लगी रहती हैं तो आवश्यकता के अनुरूप लोगों को पानी नहीं मिल पाता है। अगर ट्यूबवेल के पास पक्की पानी टंकी का निर्माण या फिर प्लास्टिक की टकियां लगवा दी जाए तो  पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहेगा और सर्दी के मौसम में पानी की मारामारी की समस्या से निजात मिल सकती है। पानी की टंकी बनवाने की मांगवहीं बस्तीवासियों ने ट्यूबवेल के स्थान पर पानी टंकी निर्माण करवाने की क्षेत्रीय विधायक ललित मीणा से मांग की है ताकि बिजली नहीं आए, तब भी लोगों को आवश्यकता के अनुरूप पानी टंकी से पानी उपलब्ध हो सके। शाहाबाद पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत में अधिकतर पेयजल सुविधा की दृष्टि से सिंगल फेस की ट्बवेल लगी हुई है जो बिजली आने पर चलती रहती हैं लेकिन कई स्थानों पर ट्यूबवेल के पास पानी की टंकी नहीं लगी हुई है। ऐसे में पानी बिजली आने पर ट्यूबवेल से ही क्षेत्र के लोगों को मिल पाता है अगर पानी टंकीयों का निर्माण या प्लास्टिक की बड़ी टंकियां लगवा दी जाए तो पर्याप्त मात्रा में पानी टंकी से  क्षेत्र के लोगों को मिलता रहेगा और पानी की समस्या से सर्दी के मौसम में निजात मिल सकती है। लोगों ने सबंधित विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पानी टंकी निर्माण करवाने की  मांग की है।</p>
<p>पानी टंकी का निर्माण हो जाए तो बिजली जाने पर भी आसानी से पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होता रहेगा। इस मामले को अधिकारियों को गंभीरता से लेना चाहिए। <br /><strong>- अर्जुन बंजारा, ग्रामीण।</strong></p>
<p>सर्दी के मौसम में पानी की समस्या बिजली के चलते झेलनी पड़ रही है। ट्यूबवेल तो लगी हुई है लेकिन पानी स्टोरेज करने के लिए टंकी नहीं लगाई गई है। ऐसे में समस्या बनी हुई है।<br /><strong>- मिलन सहरिया, ग्रामीण।  </strong></p>
<p>गंगापुर सहरिया बस्ती में अधिकारियों को पानी टंकी का निर्माण करवाना चाहिए ताकि ग्रामीणों को बिजली जाने पर पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़े। <br /><strong>- बद्री सहरिया, ग्रामीण।</strong></p>
<p><strong>पानी के लिए भटकने को मजबूर</strong><br />गंगापुर सहरिया बस्ती में 70 - 80 परिवार हैं। बिजली के भरोसे मोटर संचालित होती है। बिजली कटौती होने से पानी की समस्या बनी हुई है पानी टंकी बनवाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्रीमती बाई सहरिया, ग्रामीण। </strong></p>
<p>बिजली कटौती पेयजल समस्या में बाधा उत्पन्न कर रही है। अगर बिजली दिनभर नहीं आती है तो पानी के लिए लोग इधर-उधर भटकते रहते हैं ट्यूबवेल पर पानी टंकी का निर्माण होना चाहिए। <br /><strong>- रामनिवास सहरिया, ग्रामीण। </strong><br />    <br />ग्राम पंचयत में जहां सिंगल फेस ट्यूबवेल लगे हुए हैं और पानी टंकी नहीं बनी है तो वहां पर पानी टंकियों का निर्माण कराया जाएगा ताकि ग्रामीणों को पर्याप्त मात्रा में बिजली जाने पर भी आसानी से पेयजल उपलब्ध हो सके।<br /><strong>- बनवारीलाल मीणा, विकास अधिकारी, शाहाबाद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 14:21:12 +0530</pubDate>
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                <title>जलदाय विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी जारी है पानी की किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[इलाके में पाइप लाइन तो मौजूद है, लेकिन उसमें जलापूर्ति ही नहीं होती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-all-the-efforts-of-the-water-department--water-shortage-continues/article-79911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jaladaye-vibhag-ki-tamam-koshisho-k-bd-bhi-jari-k-pani-ki-killat...kota-news-30-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जलदाय विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी प्रेमनगर इलाके में पानी की किल्लत अभी भी पहले जैसी बनी हुई है। लोगों को अभी भी रतजगा करना पड़ रहा है तो कहीं सड़क पर ही मोटर लगाकर पानी भरना पड़ रहा। इलाके के कई हिस्से ऐसे हैं जहां अभी भी पानी को लेकर लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है। हाल ही में जलदाय विभाग की ओर से प्रेमनगर प्रथम इलाके में पानी की समस्या के समाधान के लिए 4 इंची पाइप लाइन को बदलकर उसे मेन लाइन से इंटरचेंज किया था। लेकिन अन्य इलाकों में अभी भी पानी को लेकर स्थानीय ट्यूबवेलों और हैंडपंपों पर निर्भर हैं।</p>
<p><strong>दो बाल्टी पानी के लिए घंटों  करना पड़ता है इंतजार</strong><br />प्रेमनगर द्वितीय में तेजाजी चौक के पास की चारों गलियों में पानी का प्रेशर न के बराबर आता है। इलाके में जितना पानी आता है वो भी सुबह में सिर्फ 20 मिनट के लिए ही आता है। ऐसे में घरों की टंकियों तक में पानी नहीं भर पाता और अन्य कामों के लिए हैंडपंप और ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे ही कैला देवी मंदिर इलाके के हालात हैं। जहां पर लगी केवल एक मात्र सरकारी मोटर से पूरे इलाके के लोग पानी भरते हैं। क्योंकि इलाके में पाइप लाइन तो मौजूद है, लेकिन उसमें जलापूर्ति ही नहीं होती है।</p>
<p><strong>मेन लाइन में पानी, गलियों में सूखा</strong><br />इलाके में जलापूर्ति केवल मेन पाइप लाइन तक ही सीमित है, उसके जुड़ी पाइप लाइनों में पानी जा ही नहीं पाता है। स्थानियों ने बताया कि इलाके में मौजूद मेन लाइन में पानी की सप्लाई पूरी तरह होती है। लेकिन उसका पानी गलियों तक पहुंच ही नहीं पाता क्योंकि विभाग की ओर से पानी ना प्रेशर से पानी छोड़ा जाता है ना ज्यादा समय के लिए। इलाके के झरनेश्वर महादेव मंदिर के पास कुम्हारों का मौहल्ला में लोगों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्रेमनगर इलाके में पानी समस्या काफी सालों से मौजूद है, अधिकारियों से लेकर नेताओं तक से इसकी शिकायत कर चुके हैं। कुछ दिन के लिए समस्या का समाधान होता है फिर से वही परेशानी होने लग जाती है।<br /><strong>- बाबूलाल गुर्जर, स्थानीय</strong></p>
<p>बाल्टी भर पानी के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है, इलाके में ठीक ठाक प्रेशर से आजतक पानी नहीं आया जितनी जलापूर्ति होती है वो भी पर्याप्त रुप से नहीं होती है। पानी भरने के लिए ट्यूबवेल हैंडपंप का सहारा लेना पड़ता है।<br /><strong>- गिरिराज सुमन, स्थानीय</strong></p>
<p>प्रेमनगर की कई मेन लाइनों में पानी आता है लेकिन गलियों में न के बराबर पहुंच पाता है क्योंकि जितनी सप्लाई होती है वो मेन लाइन के लिए भी पर्याप्त नहीं है। पानी भरने के लिए भी सड़क पर मोटर लगानी पड़ती है।<br /><strong>- हितेंद्र राठौर, स्थानीय</strong></p>
<p>प्रेमनगर इलाके में पानी की पर्याप्त जलापूर्ति की जा रही है, इलाका टेल पर होने के कारण प्रेशर की समस्या रहती है जिसे ठीक करने की योजना बनाई जा रही है। अभी किसी इलाके में पानी की समस्या आ रही है तो टैंकर की संख्या बढ़ाकर जलापूर्ति की व्यवस्था की जाएगी।<br /><strong>- भारत भूषण मिगलानी, अधीशाषी अभियंता, जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 May 2024 17:00:08 +0530</pubDate>
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                <title>पेयजल सिस्टम गड़बड़ाया : पानी का प्रेशर कम, सप्लाई समय भी घटाया</title>
                                    <description><![CDATA[लोग शिकायतें लेकर जलदाय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/drinking-water-system-messed-up-water-pressure-reduced-supply-time/article-78839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(1)56.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। ऐसे में पीएचईडी का पेयजल सप्लाई सिस्टम गड़बड़ा गया है। शहर में पानी की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन सप्लाई पर्याप्त नहीं होने से शहर में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हर इलाके में निजी टैंकर चक्कर लगाते हुए नजर आ रहे हैं, और 400 से 500 रुपए प्रति टैंकर पानी बेचकर जमकर चांदी कूट रहे हैं।</p>
<p>शहर के हर इलाके में अब कम दबाव और कम समय के लिए पानी आने की शिकायतें बढ़ गई हैं। लोग शिकायतें लेकर जलदाय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। ज्यादा दिक्कत शहर के बाहरी इलाकों में है। यहां कॉलोनी के अंतिम छोर पर रहने वाले लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने से मजबूरन कई बार टैंकरों से पानी खरीदना पड़ा रहा है। वहीं विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि बीसलपुर से सप्लाई बढ़ाई जा रही है, लेकिन बढ़ती आबादी और गर्मी के कारण कुछ दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>फिलहाल ये है शहर में सप्लाई का गणित</strong><br />शहर में करीब 40 लाख की आबादी पेयजल कनेक्शन से जुड़ी है।<br />शहर में सभी स्रोतों से कुल 702 एमएलडी यानी करीब 70 करोड़ लीटर पेयजल सप्लाई प्रतिदिन हो रही है।<br />बीसलपुर परियोजना से शहर को 532 यानी करीब 53 करोड़ लीटर पानी।<br />सरकारी ट्यूबवैलों से भी 170 एमएलडी यानी 17 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है।<br />इसके अतिरिक्त सरकारी टैंकरों के 179 फेरे भी प्रतिदिन लगाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>इन इलाकों से आ रही ज्यादा शिकायतें</strong><br />शहर के झोटवाड़ा, मुरलीपुरा, विद्याधर नगर, प्रतापनगर, जगतपुरा, सांगानेर, मालवीय नगर, बापू नगर, जवाहर नगर, सांगानेर सहित कई इलाकों से इन दिनों लो प्रेशर और कम समय के लिए पानी सप्लाई की समस्याएं आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पानी कम दबाव से आता है और ऐसे में पर्याप्त पानी स्टोर नहीं कर पाते हैं और मजबूरन निजी टैंकरों से महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता है।</p>
<p><strong>प्रति व्यक्ति 135 से 140 लीटर की जरूरत, मिल रहा 100 लीटर से भी कम<br /></strong>सीवरेज सुविधा वाले शहरों में पानी के तय मानकों के अनुसार जयपुर शहर में 135 से 140 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की उपलब्धता का प्रावधान है। लेकिन इन मानकों के अनुरूप सप्लाई नहीं हो रही है। वास्तविकता की बात करें तो प्रति व्यक्ति 100 लीटर से भी कम पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की उपलब्धता है। जिसका बढ़ा कारण लो प्रेशर है। </p>
<p><strong>ये बोले जिम्मेदार<br /></strong>जयपुर क्षेत्र द्वितीय के अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अमिताभ शर्मा ने कहा कि शहर में बढ़ती आबादी और गर्मी के कारण पानी की मांग बढ़ी है। इन दिनों पॉवर कट के कारण भी कई बार सप्लाई गड़बड़ा रही है। मांग बढ़ने पर समय समय पर बीसलपुर से पानी की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। मांग का आंकलन कर फिर आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 11:14:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जलदाय विभाग ने प्रेशर बढ़ाने को आरपीएस कॉलानी में लगाए बूस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के कई इलाकों में आज भी जलापूर्ति के लिए आधारभूत संरचना नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-supply-department-installed-boosters-in-rps-colony-to-increase-pressure/article-78772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jaladaye-vibhag-ne-pressure-bdhane-ko-rps-colony-me-lgaye-booster...kota-news-21-05-2024.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जलदाय विभाग की ओर से जिन इलाकों में पानी की किल्लत आ रही वहां जलापूर्ति को थोड़ा बेहतर करने के लिए कदम उठाए गए। जिसमें नए कोटा के क्षेत्रों में टैंकरों की संख्या बढ़ान के साथ वल्लभनगर, साजीदेहड़ा और गुमानपुरा के इलाकों में पानी के दबाव को बढ़ाने के लिए दो नई मोटरें लगाई गई हैं। जहां नए कोटा में टेंकरों की संख्या बढ़ाकर 205 से 270 और औद्योगिक क्षेत्र में 60 से 90 कर दी है। </p>
<p><strong>आरपीएस कॉलोनी स्थित जलाशय में लगाई मोटर </strong><br />पिछले कई दिनों से शहर के साजीदेहड़ा, वल्लभनगर, अशोका कॉलानी, बंजारा बस्ती, मराठा बस्ती और गुमानपुरा के कुछ इलाकों में पानी के दबाव को लेकर समस्य बनी हुई थी। स्थानीय निवासी आए दिन प्रेशर की समस्या को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों शिकायत कर रहे थे। ऐसे में दबाव की समस्या को खत्म करने के लिए जलदाय विभाग ने आरपीएस कॉलोनी स्थित उच्च जलाशय में 15-15 हॉर्स पावर के दो बूस्टर पंप लगाए हैं। जिनसे इन इलाकों में पानी का दबाव ठीक हो सकेगा।</p>
<p><strong>इधर बढ़ाई टैंकरों की संख्या</strong><br />शहर के कई इलाकों में आज भी जलापूर्ति के लिए आधारभूत संरचना नहीं है। जिन इलाकों में पाइप लाइन नहीं है या जो टेल पर मौजूद हैं। उनमें जलापूर्ति के लिए जलदाय विभाग टैंकरों का सहारा ले रहा है। जिनकी पहले संख्या 265 थी जिसे बढ़ाकर अब 360 कर दिया है। जलदाय विभाग के अनुसार कोटा के आंवली रोजड़ी में 100, नयागांव में 100, बरढ़ा बस्ती में 50, नए कोटा में 20 अतिरिक्त वहीं औद्योगिक क्षेत्र की जेके चौकी के लिए 30 टैंकर बढ़ाकर अब 90 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है।</p>
<p><strong>यहां कर दी व्यवस्था वहां अब भी वही हालात</strong><br />जलदाय विभाग की ओर से भले ही टैंकरों की संख्या बढ़ा दी हो लेकिन कई इलाकों तक टैंकर पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। शहर के प्रेमनगर व कंसुआ आॅर्फोडेबल आवासीय योजना, रायपुरा, नया नोहरा, कुन्हाड़ी के बापू कॉलानी, मड़िया बस्ती और बालिता रोड पर अभी निवासी पानी को लेकर ईधर उधर भटकने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />बूस्टर लगाने के बाद पानी का दबाव ठीक हो गया है, पहले घरों में बूस्टर लगाने पर भी पानी नहीं आ रहा था। विभाग को इसके लिए कोई स्थान समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- प्रकाश तापड़िया, वल्लभ नगर</strong></p>
<p>विभाग की ओर से बढ़ाए गए टैंकर जनता तक पहुंच ही नहीं पा रहे प्रेमनगर आर्फोडेबल में पानी की अभी समस्या बनी हुई है विभाग की ओर से एक या दा टैंकर आते हैं जिनसे 10 घरों का भी पानी नहीं भर पाता है।<br /><strong>- महावीर गौत्तम, प्रेमनगर अर्फोडेबल कॉलानी</strong></p>
<p>टैंकर बढ़ाने के बाद एक दो बार तो सही से आए लेकिन फिर से उनके फेर कम हो गए हैं। विभाग को टैंकरों की सही से मॉनिटरिंग करनी चाहिए।<br /><strong>- नितिन गुर्जर, नयागांव</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वल्लभनगर, साजीदेहड़ा और गुमानपुरा के कुछ इलाकों में प्रेशर को लेकर समस्या थी जिसके लिए जलाशय पर बूस्टर लगा दिए हैं। साथ ही टैंकरों की संख्या और फेर भी बढ़ा दिए हैं। जहां भी पानी की समस्या आ रही है वहां टैंकर के माध्यम से जलापूर्ति की जाएगी।<br /><strong>- श्याम महेश्वरी, अधीशाषी अभियंता, जलदाय विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 May 2024 15:31:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गांव-शहरों में पानी की किल्लत, 80 शहर और 3000 गांवों में  टैंकरों से आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[जिले से लेकर स्टेट कंट्रोल पर पानी की समस्या को लेकर शिकायतें दर्ज हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-shortage-in-villages-and-cities-supply-through-tankers-in/article-78663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/chambal-kinare-sukha-halak-smart-city-tanker-ke-hawale...kota-news-13.05.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तापमान में बढ़ोतरी के साथ गांव-शहरों में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। 80 से अधिक शहरों और 3000 गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। डिमांड ज्यादा होने के कारण टैंकर भी पानी की पर्याप्त आपूर्ति नही कर पा रहे है। जिले से लेकर स्टेट कंट्रोल पर पानी की समस्या को लेकर शिकायतें दर्ज हो रही है। राजधानी जयपुर के कई इलाकों में कम प्रैशर से पानी की आपूर्ति होने के कारण लोगों कों पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। बीसलपुर से पानी में कटौती भी परेशानी को ज्यादा बढ़ा रहा है। पीएचईडी के शासन सचिव समित शर्मा के अनुसार तापमान बढ़ने के कारण पानी की डिमांड बढ़ी है। जहां की डिमांड आ रही है, वहां पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 14:28:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>111 शहरों में 48 घंटे, 11 में 96 घंटे के अंतराल से पानी की आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग की ओर से राज्य के 251 शहरों में पीने के पानी की सप्लाई का सिस्टम बना हुआ है, लेकिन पानी की किल्लत के चलते 11 शहरों में तो चार दिन बाद भी एक बार पानी की सप्लाई बाधित हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-supply-in-111-cities-with-an-interval-of-48/article-76570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/tap-water-bisalpur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में गर्मियों की दस्तक के साथ ही पीने के पानी की डिमांड भी पहले के बजाय बढ़ने लगी है। जलदाय विभाग की ओर से राज्य के 251 शहरों में पीने के पानी की सप्लाई का सिस्टम बना हुआ है, लेकिन पानी की किल्लत के चलते 11 शहरों में तो चार दिन बाद भी एक बार पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। हालांकि विभाग ने इन शहरों में 96 घंटे के अंतराल में पानी सप्लाई का सिस्टम बना रखा है। इसके साथ ही 12 शहरों में 72 घंटे के अंतराल पर नल से पानी की आपूर्ति की जा रही हैं। 117 शहर ऐसे हैं, जिनमें एक दिन में एक बार ही पानी की आपूर्ति हो रही है।</p>
<p><strong>पांच जिलों में सामान्य से कम वर्षा</strong><br />मानसून 2023 में प्रदेश में सामान्य से 0.8 प्रतिशत अधिक (539.30 एमएम के विरूद्ध 543.73 एमएम) वर्षा हुई। दो जिलों में असामान्य, आठ जिलों में अधिक एवं 18 जिलों में सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई। 5 जिलों कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ एवं चित्तौडगढ़ से सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।</p>
<p><strong>60 फीसदी भूजल से आपूर्ति</strong><br />पानी डिमांड की 60 फीसदी पूर्ति भूजल से हो रही है, शेष सतही जल परियोजनाओं से की जा रही हैं। 2022 के सर्वे के अनुसार राज्य के 302 ब्लॉक में से 203 ब्लॉक अत्यधिक दोहित, 23 विषम एवं 29 अर्द्ध विषम ब्लॉक हैं। प्रदेश में 85 शहर और कस्बें सतही जल स्रोत एवं 89 शहर भूगर्भीय जल स्रोत पर आधारित है। शेष 77 सतही एवं भूगर्भीय दोनों जल स्रोतों पर निर्भर हैं। सात प्रमुख शहर जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, भरतपुर, कोटा एवं उदयपुर में सतही जल स्रोत से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।</p>
<p><strong>टैंकरों से आपूर्ति की व्यवस्था</strong><br />जिन शहरों में पानी सप्लाई में व्यवधान पैदा होने पर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, उनमें विभाग की ओर से टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही हैं अर्थात 32 शहरों और 2700 गांव-ढाणियों में हर दिन टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। इनकी संख्या में तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>72 घंटे में सप्लाई</strong><br />हमीरगढ़, गंगापुर (भीलवाड़ा), डीडवाना, मेडतासिटी, बासनी (नागौर), खेड़ली, बहादुरपुर, कामां (भरतपुर), मुंडावर (दौसा), विराटनगर (जयपुर), बाड़मेर, सम्दड़ी (बाड़मेर)। </p>
<p><strong>यहां 96 घंटे में</strong> <br />बांदीकुई, दौसा एवं बसवा (जिला दौसा), श्रीमाधोपुर (जिला सीकर), बालोतरा, सिवाना (जिला बाड़मेर), भीनमाल (जिला जालौर), आमेट, देवगढ़ (जिला राजसमंद), मकराना, बोरावड (जिला नागौर)।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 May 2024 15:09:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>टैंकर ना घरों के बर्तन भर पा रहे ना ही लोगों के मन</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्र के कई इलाकों में पानी नहीं आ रहा है और जहां आ रहा है वहां प्रेशर कम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tankers-are-neither-able-to-fill-the-utensils-of-the-houses-nor-the-hearts-of-the-people/article-74722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/tanker-na-ghro-k-bartan-bhr-pa-rhe-na-hi-logo-k-mn...kota-news-08-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर के कई इलाकों में पानी किल्लत होना शुरू हो गई है। शहर के कई इलाकों में हर बार कमोबेश एक जैसे हालात हैं जहां या तो पानी नहीं आ रहा या जो आ रहा है उसका प्रेशर बिल्कुल नहीं है। कारणवश जहां पानी की सप्लाई नहीं है वहां लोगों को पानी के टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं, और जहां है वहां प्रेशर कम होने के चलते मोटर लगाकर पानी भरना पड़ रहा है। जिससे लोगों को सिर्फ पानी के लिए एक की जगह दो दो बिल भरने पड़ रहे हैं। शहर के प्रेम नगर इलाके में हर साल की तरह इस साल भी पानी की किल्लत होना शुरू हो गया है। क्षेत्र के कई इलाकों में पानी नहीं आ रहा है और जहां आ रहा है वहां प्रेशर कम है। जिसके लिए मोटर लगानी पड़ रही है।</p>
<p><strong>होली के दिन से सप्लाई बंद</strong><br />प्रेम नगर द्वितीय क्षेत्र के कैला देवी मंदिर की आस पास की कई गलियों में होली के दिन से पानी की सप्लाई बाधित है। कुछ में पानी आता है और कुछ में बिल्कुल भी पानी नहीं आता है। ऐसे में लोगों को पीने के पानी के लिए भी टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं। वहीं होली से पूर्व भी इस इलाके में पानी की सप्लाई बाधित थी। जिसके विरोध पर विभाग ने सप्लाई को ठीक तो किया लेकिन समस्या फिर से बन गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां रहने वाले अधिकतर लोग मजदूरी करने वाले हैं जो सुबह जल्दी निकल जाते हैं। पानी नहीं सुबह जल्दी घर के काम भी पूरे नहीं हो पाते हैं। वहीं इलाके में लगी ट्यूबवेल भी कई दिनों से खराब पड़ी है जिसे भी निगम द्वारा अभी तक ठीक नहीं कराया गया है।</p>
<p><strong>सालों से नहीं डली पाइप लाइन</strong><br />इस इलाके में वर्ष 2018 में यूआईटी द्वारा नई पाइप लाइन डाली गई थी जिसमें कई मुख्य मार्गों पर तो नई लाइन जोड़ दी गई लेकिन कुछ गलियों को छोड़ दिया गया। पूर्व में डली पाइप के पूराने होकर जगह से खराब हो चुकी है साथ ही पाइप की चौड़ाई भी ज्यादा होने के कारण पानी का प्रेशर नहीं बन पाता। कैला देवी मंदिर के पास वाली चार गलियों में नई पाइप लाइन डालने की आवश्यकता है, जिससे पानी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी।</p>
<p><strong>हर साल होती है समस्या</strong><br />इलाके में पानी की समस्या हर साल होती है, कभी कभी तो दिन भर में एक बार भी पानी नहीं आता है। जिन इलाकों में पानी की सप्लाई होती भी है तो उनमें प्रेशर बिल्कुल नहीं होता जिसके लिए मोटर लगानी पड़ती है। इस इलाके के अधिकतर लोग मजदूरी करने वाले हैं ऐसे में नल और बिजली दोनों तरफ से उन्हें दोहरी मार पड़ रही है। विभाग को कई बार इसके बारे में बता दिया है लेकिन हर साल बस आश्वासन देकर लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसने पर छोड़ दिया जाता है। पानी की समस्या के चलते इस क्षेत्र के करीब एक लाख लोगों को परेशानी भुगतनी पड़ती है। जिसका बस्ती के बसने और कॉलोनी बनने तक कोई समाधान नहीं निकाला जा सका है। पिछले 25 वर्षों से यहां की जनता पानी को लेकर आज भी मरामारी करने पर मजबूर है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />होली पर सप्लाई का समय बदला गया था उसके बाद अकेलगढ़ प्लांट में मरम्मत कार्य के चलते सप्लाई बाधित हुई जिसके बाद सभी इलाकों में सामान्य रूप से सप्लाई चालू कर दी गई थी। अगर कहीं समस्या है तो उसे ठीक कराएंगे। नई पाइप डालने के लिए सर्वे कराया जाएगा।<br /><strong>- अशोक भमनावत, सहायक अभियंता, पीएचईडी कोटा</strong></p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />इस इलाके में हर साल पानी की भारी समस्या होती है कभी प्रेशर कम आता है तो कभी पानी की सप्लाई ही नहीं होती है। कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके लेकिन कोई समाधान नहीं होता है।<br /><strong>- बाबूलाल गुर्जर, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>होली के दिन भी इस क्षेत्र के कई इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं हुई जिसके कारण लोगों को नहाने के लिए भी नहर में जाना पड़ा और महिलाओं के लिए भी पानी का टैंकर मंगाना पड़ा।<br /><strong>- हीरालाल रेगर, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>जलापूर्ति पिछले 12 दिन से बाधित है, कई बार तो नलों में एक बूंद भी पानी नहीं आता है। विभाग के कर्मचारी कुछ दिन पहले समस्या ठीक करने की बात कहकर गए थे लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।<br /><strong>- आशा मेहता, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>पानी की सप्लाई नहीं होने से घर के जरूरी काम भी पूरे नहीं हो पाते हैं। नहाने धोने के लिए भी टैंकरों की मदद लेनी पड़ती है जो एक बार के 12 सौ से 15 सौ रुपए तक लेता है।<br /><strong>- भूरी बाई गुर्जर, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>इलाके में पानी की समस्या बहुत पूरानी है जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। हर बार बस आश्वासन देकर छोड़ दिया जाता है। ये खत्म हो तो अन्य कार्य समय पर कर पाए।<br /><strong>- पूजा कुमारी, स्थानीय निवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Apr 2024 17:20:41 +0530</pubDate>
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                <title>नए कोटा में लाइनों की कमी से होती है पानी की किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने कोटा में नए प्लांट से जलापूर्ति होने से नहीं होती प्रेशर की समस्या।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-water-shortage-in-the-new-kota-due-to-lack-of-lines/article-73542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/naye-kota-me-lino-ki-kami-s-hoti-h-pani-ki-killat...kota-news-23-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मियों का मौसम आने को है और शहर में पानी की किल्लत फिर देखने को मिलने वाली है। वैसे तो शहर चंबल नदी के किनारे बसा है जहां पानी की बिल्कुल भी कमी नहीं है। लेकिन इसके बाद भी 21 वीं सदी के रजतकाल में शहर के कई ईलाकों में पानी को लेकर भारी किल्लत देखने को मिलती है। जिसमें शहर का नया और पटरी पार ईलाका सबसे ज्यादा प्रभावित रहता है। जहां प्रेशर से लेकर जलापूर्ति में अनिरंतरता देखने को मिलती है। ऐसे में लाखों की आबादी वाले इन क्षेत्रों में लोग पानी को लेकर हर साल परेशानी में रहते हैं। वहीं विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास भी ना काफी साबित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पुराने में कोटा में नए प्लांट और नई लाइनों से समस्या कम</strong><br />शहर के पुराने इलाकों में जलापूर्ति का कार्य सकतपुरा स्थित 130 और 70 एमएलडी क्षमता से नए बने प्लांटों से किया जाता है। विभाग कि अधिकारियों ने बताया कि पुराने कोटा में पुरानी खराब पाइप लाइनों को बदलने के साथ नया प्लांट का निर्माण किया जा चुका है, जिससे पानी का लीकेज कम होता है। वहीं मिनी अकेलगढ़ प्लांट में आने इलाके का समुद्री स्तर, विस्तार और क्षेत्रफल कम होने के कारण जलापूर्ति करने में कम प्रेशर और संसाधनों की आवश्यकता होती है। जिस कारण पुराने कोटा में जलापूर्ति की समस्या कम देखने को मिलती है। इसके अलावा नए जल संयंत्रों में लगी मोटरों की क्षमता अधिक होने से भी पानी की सप्लाई के नए कोटा के मुकाबले कम बाधाएं आती हैं।</p>
<p><strong>नए कोटा में अव्यवस्थित वितरण और संसाधन की कमी</strong><br />शहर में सकतपुरा स्थित 130 एमएलडी के मिनी अकेलगढ़ प्लांट के निर्माण से पहले अकेलगढ़ स्थित 270 एमएलडी प्लांट से ही शहर की जलापूर्ति को पूरा किया जाता था। लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी के चलते शहर के नदी पार क्षेत्र में 130 एमएलडी के नए प्लांट का निर्माण किया गया। जिसके बाद कुछ हद तक पानी की समस्या का निदान हुआ लेकिन शहर के बढ़ते आकार और क्षेत्रफल के अनुरूप जलदाय विभाग के पाइप लाइन, पम्प हाउस जलाशय जैसे संसाधनों के न बढ़ने के कारण पानी की समस्या में इजाफा होता गया। नए कोटा क्षेत्र का विस्तार और क्षेत्रफल अधिक होने से कई इलाकों में आज भी पाइप लाइन मौजूद नहीं हैं, साथ ही जिन इलाकों में पाइप लाइन है वो पुरानी हो चुकी हैं जिनसे लीकेज की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा नए कोटा क्षेत्र के कोचिंग एरिया में जलापूर्ति के लिए उच्च जलाशय मौजूद नहीं जिससे पानी का व्यवस्थित वितरण नहीं हो पाता है।</p>
<p><strong>लाइनों का नवीनीकरण और व्यवस्थित जल वितरण ही उपाय</strong><br />शहर के इलाकों में जलापूर्ति को लेकर होने वाली समस्यों के निवारण के लिए लाइनों का नवीनीकरण और पानी का व्यवस्थित वितरण ही कारगर साबित होगा। जलदाय विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोटा की जलापूर्ति के पैर्टन में मौजूद विसंगतियों का सर्वे कर उन्हें दूर करने की योजना पर काम किया जा रहा है जिसे कुछ हद तक अमृत 2.0, स्मार्ट सिटी योजना और 15वीं वित्तीय आयोग के तहत होने वाले निर्माण कार्यों से दूर किया जा सकेगा। ह्यं पानी की किल्लत हर साल की रहती है उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हर गर्मी में पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। विभाग को इतने सालों में भी समस्या का पता नहीं चला तो ये अधिकारियों की गलती है।<br /><strong>- मोहनलाल प्रजापत, डीसीएम</strong></p>
<p>हर साल विभाग को पाइप लाइनों और प्रेशर को लेकर शिकायत करते हैं लेकिन हर साल एक जैसी तस्वीर रहती है उसमें कोई बदलाव नहीं आता, जनता को तो हर बार पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है।<br /><strong>- गायत्री सुमन, प्रेमनगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में पानी को समस्या के समाधान के लिए 50 और 70 एमएलडी के दो नए प्लांटों के निर्माण किया जा चुका है। कोचिंग क्षेत्र में पाइप लाइन को बदला जा रहा है साथ ही अमृत योजना 2.0, स्मार्ट सिटी योजना और 15वीं वित्तीय आयोग योजना में पाइप लाइनों का नवीनीकरण करने के साथ नई लाइनें जोड़ी जाऐंगी। <br /><strong>- प्रद्यूमन बागला, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 19:13:26 +0530</pubDate>
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                <title>बोरवेल खराब होने से जेके लोन में पीने के पानी की किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[जेकेलोन अस्पताल में पीने के पानी सारे वाटर कुलर खराब पड़े है, वार्ड में टॉयलेट में भी पानी नहीं आ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-drinking-water-in-jakelon-due-to-damaged-borewell/article-64075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/borewell.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बडे जेकेलोन अस्पताल में पुराने हो चुके बोरवेल से पानी की सप्लाई नहीं होने से अस्पताल में पानी की किल्लत हो रही है। जिससे मरीजों को बाहर से पानी लाकर काम चलना पड़ रहा है। वहीं स्टाफ भी पानी के कैंपर मंगवाकर काम चला रहा है। अस्पताल में दो बोरवेल है जो काफी पुराने हो गए जिससे उनका जल स्तर नीच ला गया है। अभी हाल में अस्पताल प्रशासन ने दोनो ंबोरवेल की सफाई भी कराई लेकिन 70 से 80 फीट गहरे होने के बाद पानी पूरा नहीं आ रहा जिसके चलते अस्पताल में पानी की किल्लत हो गई है। </p>
<p><strong>जेकेलोन की पुरानी बिल्डिंग में सबसे ज्यादा परेशानी</strong><br />जेकेलोन में तीमारदारी के लिए आए मनीषा वर्मा ने बताया कि अस्पताल में पीने के पानी सारे वाटर कुलर खराब पड़े है। वार्ड में टॉयलेट में भी पानी नहीं आ रहा है। अस्पताल में लगी पीने की प्याऊ में टोटियां गायब हो गई है।  उनकी जगह प्लग लगाकर पांइट बंद कर दिए। जिससे बाजार से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। लेबर रूम के पास लगी पानी टंकी कई दिनों से बंद पड़ी है। यहीं हाल वार्ड में भी है। पोस्ट आॅपरेटिव वार्ड में पानी नहीं है। </p>
<p><strong>सभी कार्यालय में आ रहे कैंपर</strong><br />अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि अस्पताल में पेयजल के लिए सभी कर्मचारी कैंपर मंगवा रहे है। पर्ची काउंटर से लेकर अस्पताल के सभी कार्यालय में रोज पानी के कैंपर मंगवाए जा रहे है। </p>
<p>अस्पताल में लगे बोरवेल पुराने हो गए है। जिससे पानी नहीं आ रहा है। उनकी सफाई भी करवाई लेकिन सार्थक परिणाम नहीं आए है। आज बैठक में नए बोरवेल लगवाने का प्रस्ताव दिया है। शीघ्र ही पानी की समस्या का समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Dec 2023 17:44:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सारे काम छोड़कर अभी भी पानी का करना पड़ता है इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों का कहना है कि पानी कि ना तो आपूर्ति समय पर होती है और ना ही जरूरी समय तक होती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaving-aside-all-work--one-still-has-to-wait-for-water/article-59940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sare-kaam-chord-kr-abhi-bhi-pani-ka-krna-pdta-h-intezaar...kota-news-19-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कहने को तो हमारा शहर चंबल नदी के किनारे बसा हुआ है इसके बावजूद कई इलाकों में पानी कि कमी है आज भी वैसी ही बनी हुई है। कोटा में एक ओर जहां नए नए विकास के कार्य किए जा रहे हैं कई समस्याओं का समाधान किया जा रहा पर प्रेम नगर व कंसुआ इलाके के बाशिंदे आज भी अपनी पानी कि मूलभुत समस्या के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। इस इलाके में सड़क, रोड लाइट, बिजली और जनता क्लिनिक भी पहुंच गई है लेकिन जो सबसे जरूरी चीज है उसकी ही आपूर्ति ठीक तरह से नहीं होती है। लोग यहां सालों से हैण्डपम्पों का उपयोग करते आ रहे हैं और आज भी कर ही रहे हैं बस पहले पानी जमीन से खींचते थे और अब पाइप लाइन से। सरकार द्वारा हाल ही में 50 व 70 एमएलडी की क्षमता वाले नए वाटर प्लांटों का निर्माण करवाया है लेकिन इस क्षेत्र में पानी कि समस्या अभी भी बनी हुई है। इस क्षेत्र में पानी के नियमित प्रेशर न होने कि हमेशा से समस्या रही है लोगों को सारे काम छोड़कर पहले पानी भरने कि चिंता रहती है क्योंकि अगर दुसरे काम में समय लगा दिया तो पानी छूट जाता है। लोगों का कहना है कि पानी कि ना तो आपूर्ति समय पर होती है और ना ही जरूरी समय तक होती है। </p>
<p><strong>सिर्फ एक समय ही पानी वो भी एक घण्टा</strong><br />प्रेम नगर इलाके में लोग सुबह चार बजे ही उठकर पानी कि सप्लाई का इंतजार करने लग जाते हैं और अगर पानी आ भी जाए तो उसे या छोटे हैण्डपम्पों या बुस्टर मोटर लगाकर पानी भरना पड़ता है क्योंकि ना तो उसकी सप्लाई इतनी देर होती है और ना इतने प्रेशर से कि लोग आसानी से पानी भर सके। कुछ तरफ पानी सुबह आता है और कुछ तरफ शाम को और ये समय भी बदलता रहता है जिस कारण असमंजस कि स्थिति बनी हुई रहती है। सुबह या शाम होते ही लोग बर्तन बाल्टीयां लेकर सड़कों पर खुदे हुए नलों के गढ्ढों में सारे काम छोड़कर पानी भरने के लिए डेरा लगाकर बैठ जाते हैं। </p>
<p><strong>दो दो बिलों का खर्चा </strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पानी कि समस्या के कारण उन्हें दो दो बिल भरने पड़ रहे हैं क्योंकि पानी का प्रेशर कम होने से बुस्टरों का उपयोग करना पड़ता है जो बिजली के बिल में अतिरिक्त भार आता है और उसके बावजूद भी समस्या बनी रहती है। इन समस्याओं को लेकर अधिकारीयों से लेकर नेताओं मंत्री तक से मिल चुके हैं और विराध कर चुके हैं लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। इस इलाके कि डेढ़ लाख कि जनसंख्या है और पानी कि समस्या यहां कि सबसे बड़ी समस्या है।</p>
<p><strong>पानी स्टोर करने के लिए ला रखी हैं अतिरिक्त टंकियां</strong><br />पानी कम समय के लिए ही और कम प्रेशर से आने के कारण लोगों ने पानी को अतिरिक्त रूप में भरने के लिए बड़ी बड़ी टंकियां ला रखी हैं। लोगों का कहना है कि क्या करें हम इस तरह से पानी स्टोर करने के लिए मजबूर हैं अगर पानी कि सप्लाई ठीक से ज्यादा समय के लिए और पे्रशर से हो तो हमें इसकी जरूरत नहीं पड़े। कई कई जगह तो नीचे के साथ साथ लोगों ने छतों पर भी दो या तीन टंकियां रखी हुई हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा पानी स्टोर कर सकें।</p>
<p>हमें पानी भरने के लिए सुबह जल्दी ही उठना पड़ता है सारे काम छोड़ कर पहले पानी के लिए लगना पड़ता है अगर नहीं लगे तो पानी भरना छुट जाए। अभी परेशानी कम होती है लेकिन गर्मीयों में तो ट्यूबवेल मोटरों व हैण्डपम्पों से पानी भरना पड़ता है। <br /><strong>- विनोद बुर्ट, प्रेम नगर तृतीय </strong></p>
<p>पानी हर काम के लिए जरूरी होता है नहाने धोने से लेकर खना पकाने तक सब में और सुबह सुबह सभी के काम का समय होता है और पानी का भी लेकिन खाना छोड़कर पहले पानी का काम करना पड़ता है क्योंकि फिर नल अगले दिन ही आएगा और एक घण्टे ही सप्लाई होने के कारण उसी समय में कपड़े भी धोना है पीने का पानी भी भरना होता है। <br /><strong>- शिवानी राजावत, कंसुआ</strong></p>
<p>इस इलाके कि ये सबसे बड़ी समस्या है जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है, सालों से हम पानी के लिए परेशान होते आ रहे हैं ना पानी कि आपूर्ति पूरी होती है ना ही प्रेशर ठीक से आता है अधिकारीयों नेताओं सबसे कह चुके लेकिन कोई ध्यान नहीं देता।<br /><strong>- मनभर बाई, प्रेमनगर द्वितीय </strong></p>
<p>पानी तो एक समय आता ही है पर जो आता है उसमें भी प्रेशर नहीं आता है हमें नीचे से उपर पानी पहुंचाना पड़ता है प्रेशर ठीक से आए तो पानी उपर चढ़ पाए। प्रेशर कि समस्या कॉलोनी बनने के समय से ही बनी हुई है जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं निकाला गया है।<br /><strong>- प्रमोद पारेता, कंसुआ अर्फोडेबल योजना </strong></p>
<p>हमारे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं है, अगर कहीं है तो उसे ठीक करवाएगें और पानी कि आपूर्ति पूर्ण रूप से सुचारू है। प्रेशर भी ठीक दिया जा रहा है।<br /><strong>- भरत भूषण मिगलानी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Oct 2023 16:10:43 +0530</pubDate>
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