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                <title>incentive - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0: पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करवाने पर दिल्ली सरकार देगी 50,000 रुपए, जानें योजना लागू होने किसे मिलेगा इसका लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक (रेट्रोफिटिंग) कराने पर ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि देगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और 10-15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप होने से बचाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/delhi-government-will-give-rs-50000-for-converting-an-old/article-138524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/delhi-ev.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार नित नए कदम उठा रही है। अब एक और बड़ी तैयारी हो रही है। खबर है कि, नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत पुराने पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने यानी रेट्रोफिट कराने पर प्रोत्साहन देने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि पुराने वाहन मालिक अपने गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराते हैं तो उन्हें इसके लिए सरकार की तरफ इंसेंटिव मिलेगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार पहली 1,000 पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। इसका मकसद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के साथ-साथ पुराने वाहनों के इलेक्ट्रिक कन्वर्जन को भी बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त नियम</strong></p>
<p>दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। यह नियम एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत लागू हैं ताकि वाहन प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। नियम तोड़ने पर चालान, वाहन को सीज करना और केवल अधिकृत स्क्रैपिंग या एनओसी के जरिए बाहर भेजने का विकल्प मिलता है।</p>
<p><strong>ईवी पॉलिसी 2.0 के अन्य प्रस्ताव</strong></p>
<p>ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2.0 में स्क्रैपिंग के बाद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद पर प्रोत्साहन देने का भी सुझाव है। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट फंड को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करने, बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा स्वैपिंग स्टेशनों पर ज्यादा सब्सिडी और ई-रिक्शा व ई-कार्ट के लिए सेफ्टी रेटिंग जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में एक पूर्व अधिकारी के हवाले से गया है कि,रेट्रोफिटिंग उन गाड़ियों के लिए ज्यादा बेहतर होगा जिनका इस्तेमाल सीमित होता है। इसकी कन्वर्जन की सफलता वाहन के मॉडल, इलेक्ट्रिक किट की कम्पैटिबिलिटी और गियरबॉक्स कंपोनेंट्स इत्यादि पर निर्भर करती है। हालांकि यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है कि, सरकार की ये नई प्लॉनिंग कितनी कारगर साबित होगी, क्योंकि यदि इस नए नियम को लागू किया जाता है तो भी शुरूआत में केवल 1,000 वाहनों के लिए ही ये सुविधा उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong>क्या होता है रेट्रोफिटिंग</strong></p>
<p>रेट्रोफिटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और इससे संबंधित कंपोनेंट्स लगाए जाते हैं। जिससे कोई भी रेगुलर वाहन ईवी में कन्वर्ट हो जाती है। हालांकि ये प्रक्रिया महंगी है, लेकिन सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से आम लोगों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। पहले भी इस योजना को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी, लेकिन ज्यादा लागत के कारण लोगों की रुचि कम रही। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सब्सिडी से यह प्रक्रिया किफायती बनेगी और लोग अपनी गाड़ियों का दोबारा उपयोग कर सकेंगे।</p>
<p>रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि, यह योजना खासतौर पर प्रीमियम और लग्जरी कार मालिकों को आकर्षित कर सकती है। 50 लाख या उससे ज्यादा कीमत की गाड़ियों को स्क्रैप करने पर बहुत कम कीमत मिलती है, जिससे मालिक हिचकते हैं। रेट्रोफिटिंग के जरिए वे अपनी महंगी गाड़ियों को भी इलेक्ट्रिक कारों में कन्वर्ट करा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खिलाड़ियों की प्रोत्साहन राशि की घोषणा कर भूला परिषद</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनकी प्रोत्साहन राशि साल 2018 से नहीं मिली है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/council-forgot-to-announce-incentive-amount-for-players/article-74201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/khiladiyo-ki-protsahan-rashi-ki-ghoshna-kr-bhula-parishad...kota-news-01-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक खिलाड़ी को अपने खेल में आगे बढ़ने में जितना योगदान उसकी मेहनत का होता है उतना ही योगदान उसका सहयोग और प्रोत्साहन करने वालों का होता है। लेकिन राजस्थान के खिलाड़ियों के साथ इससे ठीक उल्टा हो रहा है। जहां कई खिलाड़ियों की करोड़ों रुपए की प्रोत्साहन राशि अटकी हुई है। राजस्थान क्रीड़ा परिषद् की और से दी जाने वाली ये राशि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के साथ उनकी आर्थिक रुप से मदद भी करती है, जिससे खिलाड़ी को संसाधनों के अभाव में तैयारी ना करनी पड़े। वहीं सरकार की ओर से हर प्रतियोगिता के बाद खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन राशि तो घोषित कर दी जाती है। मगर राशि जारी करने में सालों लगा देते हैं। ऐसे में जब खिलाड़ी को आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है तब उसे राशि नहीं मिल रही।</p>
<p><strong>कई खिलाड़ियों की लाखों रुपए की राशि</strong><br />कोटा के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनकी प्रोत्साहन राशि साल 2018 से नहीं मिली है। कोटा की वुशू खिलाड़ी ईशा गुर्जर के साल 2018 व 2019 में आयोजित स्टेट वुशू चैंपियनशिप में कांस्य व स्वर्ण पदक जीतने पर राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई। इसके अलावा 2019 में ही राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने पर भी प्रोत्साहन राशि की घोषणा हुई थी जिसका अभी भी मिलने का इंतजार है। ईशा की कुल 3 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि रुकी हुई है। इसी तरह बॉक्सिंग प्लेयर निशा गुर्जर द्वारा भी साल 2021, 2022 व 2023 में आयोजित राज्य स्तरीय महिला बॉक्सिंग चैंपिंयनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक जारी नहीं हुई है। निशा की कुल 4 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि अभी तक जारी नहीं हुई है। वहीं वुशू खिलाड़ी प्रियांशी गौतम के पिता अशोक गौत्तम ने बताया कि प्रियांशी द्वारा साल 2021 में 20वीं व 2022 में 21वीं नेशनल सब जूनियर वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड के साथ साल 2023 में 67वीं स्कूल गेम नेशनल प्रतियोगिता वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक पेंडिग है। </p>
<p><strong>कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता</strong><br />कोटा से ऐसे कई खिलाड़ी है जिन्होंने राज्य स्तर से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक में अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते हुए कई सारे मेडल अपने नाम किए और शहर के साथ साथ राजस्थान और देश का भी नाम रोशन किया। खिलाड़ियों के पदक जितने पर राज्य सरकार द्वारा समय समय पर खिलाडियों के प्रोत्साहन राशि की घोषणा की जाती है। लेकिन वो घोषणा बस घोषणा ही बनकर रह जाती है। क्यों धरातल पर इसके उलट खिलाड़ियों को राशि मिलने के बजाए सालों से अटकी हुई है। जिस पर ना क्रीड़ा परिषद् स्पष्ट जवाब देता है और न खेल अधिकारी। खिलाड़ियों ने बताया कि इसके लिए कई बार लिा खेल अधिकारी और परिषद् से बात भी की है लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता है। हर बार प्रक्रिया जारी है का आश्वासन दे दिया जाता है।</p>
<p><strong>इन खिलाड़ियों की प्रोत्साहन राशि पेंडिग</strong><br />अरुंधती चौधरी         17 लाख<br />प्रियांशी गौतम          4 लाख रुपए<br />खुशी गुर्जर               3 लाख रुपए<br />यशिता कुमावत        3.5 लाख<br />सौरभ गुर्जर             4 लाख<br />हेमंत गुर्जर              4.5 लाख<br />नव्या शर्मा              2.5 लाख<br />तितिक्षा                  2.5 लाख<br />सचिन गुर्जर           1.5 लाख<br />निशा पालीवाल       3 लाख<br />यश चौधरी             2.5 लाख<br />नीलम कुमावत       4 लाख<br />तौसीफ हसन         5 लाख<br />अंजलि शर्मा          3 लाख<br />अमित ख्ांडाल    3 लाख</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जिन खिलाड़ियों की प्रोत्साहन राशि बकाया है उनके बारे में राज्य क्रीड़ा परिषद् को अवगत कराया हुआ है। प्रोत्साहन की राशि भी परिषद् की ओर से ही जारी की जाएगी।<br /><strong>- मधु चौहान, जिला खेल अधिकारी कोटा</strong></p>
<p>खिलाडियों की प्रोत्साहन राशि जारी कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं तथा इसके लिए खिलाड़ियों की संसोधित सूची तैयार कर ली गई, जिसकी विभाग की ओर से स्वीकृति मिलते ही जिन भी खिलाड़ियों की प्रोत्साहन बकाया है उसे शीघ्र जारी कर दिया जाएगा।<br /><strong>- सोहनराम चौधरी, सचिव, राज्य क्रीड़ा परिषद् राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2024 17:39:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इन्सेंटिव बेस्ड हो काम तो जंगल बने घर, हर वनकर्मी बने रक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[अच्छा काम करने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में सम्मान मिलने से वनकर्मियों का जोश दोगुना बढ़ेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-work-is-incentive-based-then-forest-becomes-home--every-forest-worker-becomes-protector/article-67579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/insentive-based-ho-kaam-to-jungle-bne-ghr,-hr-vankrmi-bne-rakshak...kota-news-20-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य में मौजूदा वन क्षेत्र 32 हजार 864.50 वर्ग किमी है, जो प्रदेश के कुल भू-भाग का 9.60 प्रतिशत है। इसमें टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, सेंचुरी तथा वन अभयारण्य शामिल हैं। वन सम्पदा व वन्यजीवों की रक्षा के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की फौज तैनात है, जो साधन-संसाधनों से लैस होने के  बावजूद माफियाओं से जंगल नहीं बचा पा रहे। अवैध खनन, अतिक्रमण, कटान, शिकार सहित वन अपराध में बढ़ोतरी हो रही है। नवज्योति ने इसके कारणों को तलाशा तो कर्मचारियों का गिरता मनोबल सामने आया। विशेषज्ञों का मत है, यदि वन कर्मचारियों का काम इंसेंटिव बेस्ड किया जाए तो उनके आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ मनोबल बढ़ेगा। जिसके सकारात्मक दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। इसमें बड़ा परिवर्तन मैं की भावना हम में बदल सकेगी। जिससे अवैध गतिविधियों का ग्राफ तेजी से घटेगा। </p>
<p><strong>मनोबल बढ़ेगा, पारिस्थितिकी तंत्र सुधरेगा</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी कहते हैं, अच्छा काम करने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में सम्मान मिलने से वनकर्मियों का जोश दोगुना बढ़ेगा। हर महीने कार्य मूल्यांकन हो और रैंकिंग जारी कर लक्ष्य की प्राप्ती करने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किया जाए। इससे उनमें प्रतिस्पर्दा की भावना बढ़ेगी और अपनी बीट में बेहतर से बेहतर कार्य करने को प्रेरित होंगे। वहीं, पारिस्तिकी तंत्र मजबूत होने से जंगल में खुशहाली आएगी और वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होगा। </p>
<p><strong>ट्यूरिज्म बढ़ेगा, रोजगार सेक्टर विकसित होगा</strong><br />बायोलॉजिस्ट साहिल खान का कहना है, अच्छा काम करने पर प्रशंसा या प्रोत्साहन मिलने से पॉजिटिव एनर्जी बूस्ट होती है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारणय और वनमंडल के कर्मचारियों में रिजल्ट आॅरियंटेड काम करेंगे तो  निश्चित रूप से जंगल खुशहाल बनेगा।  ईको ट्यूरिज्म बढ़ेगा। विदेशों में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में रिजल्ट आरियन्टेड इंसेन्टिव दिए जाते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे समझें इन्सेंटिव को </strong><br />उदाहरणार्थ  वन्य जीव रक्षण में जो लोग लगे हैं वह यदि  प्रतिवर्ष वन्य जानवरों की संख्या जितनी है उतनी ही रखने में कामयाब रहते हैं तो उन्हें इन्सेंन्टिव दिया जाना चाहिए। यदि वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि होती है तो उन्हें इंसेन्टिव की मात्रा और बढ़ाकर देना चाहिए। अर्थात कार्मिकों को रिजल्ट बेस इन्सेंन्टिव दिया जाना चाहिए। वन विभाग इन्सेंन्टिव बेस्ड कार्यप्रणाली अपनाए तो जंगल अवैध गतिविधियों से मुक्त हो सकेगा और वन्यजीवों का कुनबा बढ़ेगा। </p>
<p><strong>मुखबिर तंत्र होगा सुदृढ़</strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के संस्थापक देवव्रत हाड़ा का कहना है, इंसेंटिव बेस्ड टॉस्क दिए जाने से कर्मचारियों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगेगी। इसके लिए वे नवाचार अपनाएंगे और वनक्षेत्र को सुरक्षित करेंगे। माफियाओं के चंगुल से जंगल बचेगा और देश के मानचित्र पर  सेंचूरी का नाम प्रदर्शित होगा। <br /><strong>- स्वर्ण अक्षरों में लिखवाएंगे नाम</strong></p>
<p>इंसेंटिव बेस्ड वर्क कर्मचारियों की कार्य प्रणाली को सुव्यवस्थित करने में कारगर है।  मैंने कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने के लिए नवाचार किया है। जिसके तहत डीएफओ चेम्बर में बोर्ड लगवा रहे हैं, जिस पर अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवाया जाएगा। कार्य का मूल्यांकन प्रतिमाह किया जाएगा। कर्मचारियों को रिजल्ट आॅरियंटेड टास्क दिए जा रहे हैं। अवैध खनन, माइनिंग, कटान रोकना सहित अन्य कार्यों का मूल्यांकन कर रैंकिंग देकर वन कर्मियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। <br /><strong>- तरुण मेहरा, उप वन संरक्षक, कोटा वनमंडल </strong></p>
<p><strong>कांस्टेबल और वरक्षक  के वेतन में अंतर</strong><br />पुलिस कांस्टेबल और वन रक्षक का पद समान है फिर भी दोनों के वेतन में 15 हजार का अंतर है। पुलिस को हार्ड ड्यूटी एलाउंस दिया जाता है। जबकि, वन कर्मचारी दुर्गम स्थानों पर 24 घंटे ड्यूटी करता है। इसके बावजूद उन्हें हार्ड ड्यूटी एलाउंस नहीं दिया जाता। वेतन विसंगतियां भी कर्मचारियों का मनोबल तोड़ती है। इंसेंटिव के रूप में सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि मिले तो आत्मविश्वास बढ़ेगा और जंगल की चुनौतियों से निपटने को बल मिलेगा। <br /><strong>- जसवीर सिंह भाटी, रैंजर, दरा सेंचुरी, मुकुंदरा रिजर्व</strong></p>
<p><strong>मजबूत होगा मुखबिर तंत्र</strong><br />प्रोत्साहन मिलना अच्छी बात है लेकिन इससे पहले पर्सनाल्टी डवलपमेंट की ट्रैनिंग देना बेहद जरूरी है। ताकि, वनकर्मी अच्छे और बूरे में फर्क कर सके। कर्मचारी में बेहतर काम करने की भावना होती है लेकिन उसे काम में कैसे शामिल करें, इसका ज्ञान दिया जाना आवश्यक है। यह काम होंगे तो मजबूत मुखबिर तंत्र का निर्माण होगा। प्रोत्साहन मिलने से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीसीएफ, उड़नदस्ता प्रभारी</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू </strong><br />हर अवैध कार्य पैसा कमाने के लिए किया जाता है, यदि वनकर्मियों को सम्मानजनक  प्रोत्साहन राशि इन्सेंन्टिव के रूप में दिए जाए तो निश्चित रूप से मानसिकता में सुधार आएगा। अवैध खनन, अतिक्रमण, कटान, वनसम्पदा चोरी, संदिग्ध घुसपैठ, शिकार सहित अन्य वन अपराध का ग्राफ तेजी से घटेगा। अधिकारियों द्वारा सम्मान करने, पीठ थपथपा कर शब्बासी देना वन रक्षकों को मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत करेगा और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित होंगे।      <br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jan 2024 15:49:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>साढ़े तीन साल से अपने हक को तरस रहे कोरोना वॉरियर्स, नहीं मिली राशि</title>
                                    <description><![CDATA[ संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corona-warriors-have-been-yearning-for-their-rights-for-three-and-a-half-years--did-not-receive-the-amount/article-57020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/saade-teen-saal-s-apne-haq-ko-taras-rhe-corona-warriors,-nhi-mili-rashi...kota-news-13-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोरोना वायरस के खौफ से जब पूरी दुनिया सहम गई थी, तब फ्रंट लाइन में खड़े रहकर जानलेवा वायरस से सामना स्वास्थ्य कर्मियों ने ही किया था। माहामारी के दौर में जब अपनों ने अपनों का साथ छोड़ दिया था, तब चिकित्सक, नर्सिंग सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी ही बेसहाराओं की ढाल बने थे। संक्रमण से लड़ रहे इन कर्मचारियों के लिए देशभर में ताली से थाली तक बजी। कोरोना योद्धा का सम्मान भी मिला। खुद की जान खतरे में डाल मानवीय धर्म निभाया। संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन, साढ़े तीन साल बाद भी कोरोना वॉरियर्स को अपना हक नहीं मिला। स्वास्थ्यकर्मी अपने हक के लिए उच्चाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। </p>
<p><strong>पिछले साल निदेशालय को भिजवाया था डाटा</strong><br />कोरोना काल में काम करने वाले वॉरियर्स की हौसला अफजाई करने और आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए सरकार द्वारा तय की गई प्रोत्साहन राशि और  पात्र  कोरोना वॉरियर्स की सूची जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्साधिकारी व मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की ओर से निदेशालय को भिजवाई गई थी। हालांकि, सीएमएचओ के अधीन आने वाले अस्पतालों के पात्र चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मियों को प्रोत्साहन राशि मिलने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें जल्द ही पैसा मिल जाएगा। वहीं, मेडिकल कॉलेज में संभाग के सबसे बड़े सुपरस्पेशलिस्ट चिकित्सालय में बने कोविड सेंटर में कार्यरत चिकित्साकर्मियों को नहीं मिला। </p>
<p><strong>कलक्टर से सीएमएचओ तक लगाई गुहार</strong><br />राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बेनीप्रसाद मीणा ने बताया कि कोविड के दौर में जब अपने अपनों का साथ छोड़ दिया था तब नर्सिंगकर्मी ही था जो उनका सहारा बना। रुटीन में 8 घंटे डयूटी करने वाले कर्मियों ने 12 से 15 घंटे बिना डरे आमजन की सेवा की। हालांकि, यह मानव धर्म था और उसी के मद्देनजर काम किया। सरकार ने वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। इसके लिए निदेशालय ने सीएमएचओ को जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स की संख्या और कितना पैसा दिया जाना है, इसकी सूचना मांगी जा रही, जो निदेशालय को भिजवा दी गई। इसके बावजूद अभी तक सुपरस्पेशलिस्ट चिकित्सालय में बने कोविड सेंटर में कार्यरत चिकित्साकर्मियों को उनका हक नहीं मिला। </p>
<p><strong>किसे कितनी मिलनी है प्रोत्साहन राशि</strong><br />कोरोना वैश्विक महामारी में राज्य सरकार ने डॉक्टर्स के लिए 5 हजार और नर्सिंगकर्मी, एएनएम, एलएचवी, टैक्निशियन, वाहन चालक, वार्डबॉय, सफाईकर्मियों को एकमुश्त 2500 रुपए देना तय किया था। जिसका इंतजार हजारों कर्मचारियों को करना पड़ रहा है। </p>
<p>पिछले साल हमने पात्र कोरोना वॉरियर्स व उनके मिलने वाली राशि की सूची बनाकर निदेशालय से बजट की डिमांड की थी। जहां से बजट ट्रेजरी में आ गया। इस संबंध में संबंधित चिकित्साकर्मियों के बिल बनाकर ट्रैजरी में भेज दिए हैं। जल्द ही वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि मिल जाएगी। <br /><strong>- डॉ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>
<p>मैं अभी कार्यक्रम में हूं, इस संबंध में जानकारी गुरुवार तक दे पाएंगे। <br /><strong>- डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं नर्सिंगकर्मी  </strong><br />पूर्व में जिला कलक्टर, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और सीएमएचओ तक को ज्ञापन देकर अवगत करा चुके हैं। लेकिन, अभी तक वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं मिली।  जबकि, कोरोना काल के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा एक और घोषणा की थी, जिसके तहत आईसीयू में काम करने वाले चिकित्साकर्मियों को 200 रुपए प्रतिदिन एवं कोविड जनरल वार्ड सहित अन्य जगह ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को 100 रुपए प्रतिदिन देने की घोषणा की थी। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज कोटा के कोविड वार्ड में कार्यरत कर्मचारियों को आज तक पैसा नहीं मिला। <strong>- बैनी प्रसाद मीणा, जिलाध्यक्ष राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन कोटा  </strong></p>
<p>प्रोत्साहन राशि के इंतजार में साढ़े तीन साल बीत गए लेकिन अब तक हक नसीब नहीं हुआ। जब लोग घरों से बाहर निकलने में कतराते थे, उस दौर में हम संक्रमण के बीच अपना फर्ज निभाने से पीछे नहीं हटे। 24 घंटे काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी अपने हक के लिए तरस रहे हैं। पूर्व में उच्चाधिकारियों को लिखित में ज्ञापन देकर मांगों से अवगत कराया। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। <br /><strong>-हनुमान मीणा, प्रदेश सह संयोजक, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong></p>
<p>महामारी के दौर में नर्सिंग सहित अन्य चिकित्साकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डाल मरीजों की सेवा की थी। सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की जो आज तक नहीं मिली। इससे कर्मचारियों में निराशा है। हमने हक के लिए  उच्चाधिकारियों को लिखित में पत्र देकर गुहार लगाई, आश्वासन मिले लेकिन हक का पैसा नहीं मिला। <br /><strong>- सीपी बैरवा, महासचिव, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Sep 2023 18:09:51 +0530</pubDate>
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                <title>3 साल से कोरोना वॉरियर्स का हक दबाकर बैठे चिकित्सा अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[खुद की जान खतरे में डाल मानवीय धर्म निभाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन, तीन साल बाद भी कोरोना वॉरियर्स को अपना हक नहीं मिला। चिकित्सा अधिकारी कुंडली मार प्रोत्साहन राशि को दबाए बैठे हंै। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/medical-officer-sitting-by-suppressing-the-rights-of-corona-warriors-for-3-years/article-40779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/3-saal-se-corona-warriors-ka-hak-dabakar-baidhe-chikitsa-adhikari...kota-news..25.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जब कोरोना वायरस के खौफ से जब पूरी दुनिया सहम गई थी, तब फ्रंट लाइन में खड़े रहकर जानलेवा वायरस से सामना स्वास्थ्य कर्मियों ने ही किया था। माहामारी में अपनों ने अपनों का साथ छोड़ दिया था, तब नर्सिंगकर्मी ही बेसहाराओं की ढाल बने थे। संक्रमण से लड़ रहे इन कर्मचारियों के लिए देशभर में ताली से थाली तक बजी। कोरोना योद्धा का सम्मान भी मिला। खुद की जान खतरे में डाल मानवीय धर्म निभाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन, तीन साल बाद भी कोरोना वॉरियर्स को अपना हक नहीं मिला। सरकार स्वास्थ्यकर्मियों को उनका हक देना चाहती लेकिन चिकित्सा अधिकारी कुंडली मार प्रोत्साहन राशि को दबाए बैठे हंै। </p>
<p><strong>अधिकारियों की मंशा पर संदेह</strong><br />कोरोना काल में काम करने वाले वॉरियर्स की हौसला अफजाई करने और आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए सरकार द्वारा तय की गई प्रोत्साहन राशि अभी तक किसी भी कर्मचारी को नहीं दी गई है। ऐसे में काम करने वाले वॉरियर्स में हताशा है। जबकि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय 24 मार्च 2020 से ही सूचना मांग रहा है। इसके बावजूद सीएमएचओ द्वारा जिले के सम्पूर्ण वॉरियर्स और प्रोत्साहन राशि का डाटा नहीं भेजा गया। जिसकी वजह से चिकित्सा कर्मियों को तीन साल से उनका हक नहीं मिल रहा। ऐसे में अधिकारियों की मंशा पर संदेह उठ रहा है। </p>
<p><strong>कलक्टर से सीएमएचओ तक लगाई गुहार</strong><br />राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेंद्र सामरिया, जयेश मार्ग, हनुमान मीणा का कहना है, कोविड़ के दौर में जब अपने अपनों का साथ छोड़ दिया था तब नर्सिंगकर्मी ही था जो उनका सहारा बना। रुटीन में 8 घंटे डयूटी करने वाले कर्मियों ने 12 से 15 घंटे बिना डरे आमजन की सेवा की। हालांकि, यह मानव धर्म था और उसी के मद्देनजर काम किया। सरकार ने वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इसके लिए निदेशालय वर्ष 2020 से अब तक सीएमएचओ के नाम 4 बार पत्र भेज जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स की संख्या और कितना पैसा दिया जाना है, इसकी सूचना मांगी जा रही लेकिन वे सूचनाएं निदेशालय को नहीं भिजवा रहे। नतीजन, कोविड का समय निकले तीन साल हो गए, इसके बावजूद हमें हमारा हक नहीं मिल रहा।</p>
<p><strong>अधिकारियों की लापरवाही पर निदेशालय ने जताया खेद</strong><br />निदेशालय द्वारा लगातार सूचनाएं मांगने के बावजूद अधिकारियों द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं करवाए जाने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जयपुर के निदेशक ने 8 मार्च 2023 को सीएमएचओ के नाम अति आवश्यक स्मरण पत्र जारी किया। जिसमें कहा गया कि 18 मई 2022 को प्रोत्साहन राशि के संबंध में सूचना मांगी थी, जिसे पांच दिन बाद यानी 23 मई को भेजी जानी थी। लेकिन, अफसोस की बात है कि बार-बार लिखे जाने के बाद भी सीएमएचओ द्वारा सूचनाएं नहीं दी जा रही। इसके बाद वर्तमान सीएमएचओ जगदीश सोनी ने 8 मार्च को न्यू मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा कर्मियों को छोड़कर अन्य अस्पतालों के वॉरियर्स की सूचना और 28 लाख की डिमांड भेज दी। उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य से सूचना देने को कहा था लेकिन उन्होंने नहीं दी।   </p>
<p><strong>इन्हें मिलनी है प्रोत्साहन राशि</strong><br />कोरोना वैश्विक महामारी में राज्य सरकार ने डॉक्टर्स के लिए 5 हजार और नर्सिंगकर्मी, एएनएम, एलएचवी, टैक्निशियन, वाहन चालक, वार्डबॉय, सफाईकर्मियों को एकमुश्त 2500 रुपए देना तय किया था।</p>
<p><strong>अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास</strong><br /><strong>मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने नहीं भेजी उनकी सूचना</strong><br />हाल ही में 8 मार्च को निदेशालय से वॉरियर्स की संख्या और उन्हें मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का डाटा के संबंध में पत्र मिला था। हमारे पास हमारा  डेटा था लेकिन न्यू मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्यकर्मियों की कोई जानकारी नहीं थी।  ऐसे में हमने मेडिकल कॉलेज को छोड़कर हमारे पास उपलब्ध कोरोना वॉरियर्स का डेटा निदेशालय को भिजवा दिया। हमने 28 लाख की डिमांड भेजी है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>
<p><strong>हम सीएमएचओ को सूचना भेज चुके</strong><br />हमने कोरोना माहामारी में तैनात मेडिकल कॉलेज के 375 स्वास्थ्य कर्मियों की सूची और उनको मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की सूचना सीएमएचओ को भिजवा दी है। पहले भी सूचना भेजी गई थी अब दोबारा भी भेज दी गई है। वैसे, इसके बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। <br /><strong>- डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>सूचना भेजी या नहीं कन्फर्म नहीं</strong><br />कोरोना वॉरियर्स को लेकर सीएमएचओ और प्राचार्य द्वारा सूचना तो मांगी गई थी लेकिन भेजी गई है या नहीं, यह कन्फर्म सोमवार को आॅफिस खुलने पर सिस्टम में देखकर ही बता पाऊंगा। <br /><strong>-डॉ. रामप्रसाद मीणा, अधीक्षक नवीन चिकित्सालय मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>कलक्टर से सीएमएचओ तक गुहार, किसी ने नहीं सुनी</strong><br />इस संबंध में जिला कलक्टर, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और सीएमएचओ तक को ज्ञापन देकर अवगत करा चुके हैं। लेकिन, अभी तक वॉरियर्स की सूचना निदेशालय को नहीं भेजी जा रही है। जबकि, निदेशालय 24 मार्च 2020 से ही कोरोना वॉरियर्स की सूचना मांग रहा है। अब तक सीएमएचओ के नाम 4 बार पत्र जारी हो चुके हैं। चिकित्सा अधिकारी अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डोल रहे हैं। एडीएम सिटी ने भी सीएमएचओ को फोन कर निर्देशित कर दिया था। वहीं, दो बार सीएमएचओ को ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद संज्ञान नही लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। कोरोना योद्धाओं को अतिशीघ्र प्रोत्साहन राशि का वितरण करवाना चाहिए।<br /><strong>- बैनी प्रसाद मीणा, जिलाध्यक्ष राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Mar 2023 14:52:50 +0530</pubDate>
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                <title>89 साल के श्रीचंद और दुर्रानी को अब मिलेगी पेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[ पेंशन का लाभ लेने वाले एथलीट कैप्टन श्रीचन्द और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर सलीम दुर्रानी सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/announcement-of-pension-to-players--immediate-benefit-to-50-to-60-players--big-incentive-for-future---89-years-old-srichand-and-durrani-will-now-get-pension/article-6685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/102.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रदेश के ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के पदक विजेताओं और अर्जुन व द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं के लिए पेंशन की घोषणा से भले ही करीब 50 से 60 खिलाड़ियों को ही तात्कालिक लाभ पहुंचे लेकिन यह ऐतिहासिक घोषणा भविष्य में प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन का काम करेगी। पेंशन का लाभ लेने वाले एथलीट कैप्टन श्रीचन्द और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर सलीम दुर्रानी सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी होंगे। प्रदेश के 50 खिलाड़ियों को अब तक अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया है, जबकि सात प्रशिक्षकों को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के पदक विजेता अधिकांश खिलाड़ी अर्जुन पुरस्कार विजेता की श्रेणी में शामिल हैं, वहीं कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनकी उम्र अभी 40 से कम है और वे तत्काल पेंशन पाने के पात्र नहीं हैं। ऐसे में फिलहाल करीब 50-60 खिलाड़ियों को ही पेंशन का लाभ मिल सकेगा।<br /><br /><strong>कैप्टन श्रीचंद और सलीम दुर्रानी सबसे बुजुर्ग</strong><br />1951 के दिल्ली एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले कैप्टन श्रीचंद और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर सलीम दुर्रानी पेंशन का लाभ उठाने वाले प्रदेश के सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी होंगे। 1934 में जन्मे बीकानेर के श्रीचंद ने 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व किया और वे राजस्थान के पहले ओलंपियन बने। वहीं श्रीचंद के बराबर 89 वर्ष के हो चुके सलीम दुर्रानी ने भारत के लिए 29 टेस्ट मैच खेले। दुर्रानी साठ और सत्तर के दशक में राजस्थान की ओर से रणजी ट्रॉफी में खेले। <br /><br />   <strong> छह द्रोणाचार्य होंगे लाभांवित</strong><br />द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता राजस्थान के श्यामसुन्दर राव, अनूप कुमार, महा सिंह, आरडी सिंह, वीरेन्द्र पूनिया और सागरमल धायल को पेंशन का लाभ मिलेगा।  </p>
<p><br />    <strong>सबसे ज्यादा पदक विजेता एथलेटिक्स के</strong><br />पदक विजेताओं में सबसे ज्यादा 12 खिलाड़ी एथलेटिक्स के हैं, जिन्हें पेंशन का लाभ मिलेगा। इसके बाद सात-सात खिलाड़ी निशानेबाजी और नौकायन के हैं। घुड़सवारी और कबड्डी में छह-छह खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं।</p>
<p><br />   <strong> मगन सिंह अकेले फुटबालर</strong><br />पूर्व भारतीय कप्तान मगन सिंह राजवी अकेले  फुटबालर हैं, जिन्हें पेंशन मिलेगी, वहीं वालीबॉल में भी कीर्तेश कुमार अकेले पदक विजेता हैं। महिला हॉकी में 1982 दिल्ली एशियाई खेलों की पदक विजेता वर्षा सोनी और गंगोत्री भण्डारी पेंशन की हकदार होंगी।<br /><br /><strong>पहले भी हो चुकी है घोषणा</strong><br />प्रदेश में खिलाड़ियों को पेंशन देने की घोषणा पूर्व भाजपा सरकार की ओर से 2017-18 के बजट में भी की गई थी लेकिन तब यह घोषणा नियमों में उलझकर रह गई। खेल विभाग और खेल परिषद ने ऐसे सख्त नियम बनाए कि किसी खिलाड़ी को इसका लाभ नहीं मिल सका। लेकिन राजस्थान खेल परिषद के मुख्य खेल अधिकारी वीरेन्द्र पूनिया का कहना है कि इस बार सभी नियम स्पष्ट हैं। स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेता को समान रूप से 20 हजार रुपए पेंशन मिलेगी, वहीं किसी खिलाड़ी ओर यदि किसी अन्य स्रोत से पेंशन लाभ मिल रहा है तो उसका भी इस पर कोई असर नहीं होगा। <br /><br /><strong>खेल विकास को नई ऊर्जा मिलेगी</strong><br />खिलाड़ियों को पेंशन की घोषणा खेलमंत्री अशोक गहलोत का ऐतिहासिक फेसला है। राजस्थान देश का पहला राज्य है, जहां पदक विजेताओं को पेंशन मिलेगी। इससे राजस्थान के खेल विकास को एक नई ऊर्जा मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Mar 2022 11:32:19 +0530</pubDate>
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