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                <title>future - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है</title>
                                    <description><![CDATA[खलिहानों में जाकर जगाई शिक्षा की अलख।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wings-alone-are-not-enough--it-is-courage-that-enables-flight/article-152626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है कोटा जिले के लालाहेड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक रेवतीरमण नागर ने। अभावों में पले-बढ़े और विपरित परिस्थितियों से लड़कर निकले रेवतीरमण आज उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। अपनी मेहनत के दम पर न केवल उन्होंने उच्च शिक्षा में हमेशा प्रथम श्रेणी प्राप्त की, बल्कि एक शिक्षक के रूप में अपनी कर्तव्यनिष्ठा से सरकारी स्कूलों के प्रति समाज का नजरिया भी बदल दिया। उनके इसी जज्बे को साल 2023 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया। नागर ने बताया कि हम तीन भाई जिनमें बड़े भाई भी सरकारी शिक्षक है, दूसरा में स्वयं ,तीसरे भाई भी प्राइवेट स्कूल में कार्यरत हैं।</p>
<p><strong>अभावों के बीच रहा शिक्षा का सफर </strong><br />रेवतीरमण नागर ने बताया कि उनका बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता खेती का कार्य करते थे और घर की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। घर की तंगहाली के चलते उन्होंने कोटा में मामा के पास रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।</p>
<p><strong>2015 में शुरू हुआ सेवा का संकल्प</strong><br />साल 2015 में रेवतीरमण का चयन शिक्षक के पद पर हुआ। उनकी पहली पोस्टिंग सुल्तानपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय छोटी जाखड़ौन्द में हुई। स्कूल ज्वाइन करते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कम नामांकन की थी। उन्होंने हार मानने के बजाय विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने (नामांकन वृद्धि) पर जोर दिया और ग्रामीण परिवेश में शिक्षा की अलख जगाई।</p>
<p><strong>खेत-खलिहानों तक पहुंचे, ड्रॉप आउट बच्चों को जोड़ा </strong><br />जब उनका स्थानांतरण राजकीय प्राथमिक विद्यालय लालाहेड़ा में हुआ, तो वहां भी स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। स्कूल में बच्चों की संख्या काफी कम थी और कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने जा रहे थे। नागर ने हार नहीं मानी और खुद घर-घर व खेतों में जाकर अभिभावकों से संपर्क किया। उन्होंने उन बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया जो मजदूरी में लगे थे। विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने माता-पिता को प्रेरित किया कि वे बच्चों को स्कूल भेजें। उनके इस 'डोर-टू-डोर' अभियान का नतीजा यह रहा कि स्कूल से बाहर (ड्रॉप आउट) हो चुके बच्चे फिर से मुख्यधारा से जुड़ गए। वहीं स्कूल के बुनियादी ढांचे को सुधारने का बीड़ा भी उठाया। उन्होंने समाज के दानदाताओं को प्रेरित किया और उनके सहयोग से स्कूल में रंग-रोगन का कार्य करवाया, पानी की टंकी बनवाई और बच्चों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं जुटाईं। उनके इन प्रयासों से स्कूल का वातावरण निजी स्कूलों जैसा आकर्षक नजर आने लगा है।</p>
<p><strong>सम्मान की चमक: जिला स्तर से राज्य स्तर तक</strong><br />रेवतीरमण नागर के समर्पण को पहचान मिलना तब शुरू हुई जब साल 2022 में उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। उनकी मेहनत और निष्ठा का सफर यहीं नहीं रुका। साल 2023 में जयपुर में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अध्यक्ष डॉ. बुलाकी दास (बीडी)कल्ला शिक्ष मंत्री, विशिष्ट अतिथि जाहिदा खान राज्यमंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग स्वतंत्र प्रभार, शिक्षा सचिव नवीन जैन ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी सरकारी शिक्षकों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बदलाव लाने का जज्बा रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:14:48 +0530</pubDate>
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                <title>ताइक्वांडो विवादों के घेरे में, खिलाड़ियों का भविष्य अधर में !</title>
                                    <description><![CDATA[पैरेलल ताइक्वांडो बॉडियों की भरमार, वैध-अवैध फेर के पेच में फसा फेडरेशन विवाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/taekwondo-embroiled-in-controversies--players--future-hangs-in-the-balance/article-136124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय स्तर पर ताइक्वांडो के भविष्य पर अब अनिश्चितता के बादल छा हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया ताइक्वांडो' (विश्व ताइक्वांडो से मान्यता प्राप्त) और 'ताइक्वांडो फेडरेशन आॅफ इंडिया (टीएफआइ) के बीच चल रही खींचतान ने अब राजस्थान ताइक्वांडो एसोसिएशन को अपनी चपेट में ले लिया है। इस आंतरिक कलह के कारण स्थानीय स्तर पर खेल का माहौल बुरी तरह प्रभावित हुआ है, तीन से चार समानांतर गुट आमने-सामने खड़े हैं। विवाद की जड़ वर्तमान में किसी के पास भी मान्यता नहीं होना है। चूंकि यह तय नहीं हो पा रहा है कि कौन सी राष्ट्रीय इकाई वैध या अवैध है। समानन्तर में खूब सारी बॉडिया खड़ी है। अभी तक किसी को भी  खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) या वर्ल्ड ताइक्वांडो (डब्ल्यूटी) की मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों, खासकर बच्चों के भविष्य को हो रहा है।</p>
<p>राष्ट्रीय महासंघ स्तर पर अदालती मुकदमों के तहत विवादों के संबंध में जल्द ही अदालत द्वारा दिए गए निर्देश के आधार पर राष्ट्रीय ताइक्वांडो महासंघ के एकीकरण का निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद, केवल वही राज्य स्तरीय ताइक्वांडो एसोसिएशन, जिन्हें 2019 और 2022 के पिछले चुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त था, 2026 के चुनाव में अपने मतदान के अधिकार का उपयोग करने के हकदार होंगे। बता दें कि कोटा में ताइक्वांडो एसोसिएशन 2017 से खेल अधिनियम 2005 के तहत पंजीकृत है। केवल खेल परिषद और जिला ओलंपिक संघ द्वारा मान्यता प्राप्त ताइक्वांडो संघ है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार पहले आंतरिक विवादों के चलते अलग-अलग गुट बनते चले गए और पैरेलल बॉडियां खड़ी होती चली गईं। इसी कारण न तो यह स्पष्ट है कि देश में कुल कितने क्लब हैं और न ही यह तय हो पा रहा है कि कौन सी संस्था वैध है। राजस्थान की स्थिति और भी उलझी हुई है। यहां अब तक कोई भी ताइक्वांडो स्टेट बॉडी विधिवत रूप से रजिस्टर्ड नहीं है। इसी कारण हर कोई अपना झंडा उठाकर दावा कर रहा है। इंडिया ताइक्वांडो के तहत डब्ल्यूटीए को कुछ वर्ष पूर्व शर्तों के कारण मान्यता दी गई थी, जो 2026 तक वैध बताई जा रही है, लेकिन यह भी अंतिम नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब तक एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय फेडरेशन अस्तित्व में नहीं आती, तब तक किसी भी राज्य या जिला संघ को ओलंपिक या आधिकारिक प्रतियोगिताओं के लिए एफिलिएशन नहीं दिया जा सकता। </p>
<p>वर्तमान में जो भी टूनार्मेंट कराए जा रहे हैं और जो प्रमाणपत्र बांटे जा रहे हैं, वे एक तरह से कानूनी रूप से शून्य हैं। वहीं कोटा के खिलाड़ियों को भी यह बड़ी समस्या सामनो आ रही है कि वे किस एसोसिएशन के तहत प्रशिक्षण लें और किस टूनार्मेंट में भाग लें ताकि उनकी जीत राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर मान्य हो और खेल कोटे से नौकरी मिल सके। इस मान्यता संकट ने स्थानीय प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने के दरवाजे बंद कर दिए हैं।</p>
<p>सभी गुट एकजुट हों, चुनाव कराए जाएं और एक मजबूत, मान्यता प्राप्त नेशनल बॉडी बने। तभी राज्य संघों का पंजीकरण, क्लबों की वैधता और खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो पाएगा। फिलहाल ताइक्वांडो प्रशासन में पसरा यह असमंजस बच्चों के सपनों पर भारी पड़ता दिख रहा है। जब तक यह विवाद नहीं सुलझता है तब तक वो स्कूल स्तर के टूनार्मेंट और स्कूल गेम्स फेडरेशन आॅफ इंडिया के टूनार्मेंटों में खिलाकर अपने स्तर सुधार सकते है।<br /><strong>- दशरथसिंह शेखावत, अध्यक्ष, ताइक्वांडो एसोसिएशन आॅफ कोटा</strong></p>
<p>फैडरेशन विवाद जब तक नहीं सुलझेगा तब तक सामानांतर चल रही कोटा ताइक्वांडो में प्रशिक्षण प्राप्त कर खिलाड़ियों का भविष्य में अधर में लटका हुआ है। दूसरी ओर इनसे मिलने वाले सर्टिफिकेट की कोई मान्यता नहीं है, ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वैध ताइक्वांडो एसोसिएशन में ही खिलाए ताकि बच्चों को आगे इनसे लाभ मिल सके।<br /><strong>- अशोक गौतम, कोच, कोटा</strong></p>
<p>फैडरेशन को लेकर अभी कोई विवाद नहीं है। कोर्ट से आए निर्णय के अनुसार टीएफआई मान्य है। 2026 में चुनाव करवाएं जाएंगे, तभी स्थिति साफ हो सकेगी। 2022 में चुनाव हुए थे।<br /><strong>- लक्ष्मण सिंह हाड़ा, जनरल सेक्रेटरी राजस्थान ताइक्वांडो एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 15:16:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कल्कि 2898 में पौराणिक कथाओं के साथ भविष्य का अनूठा मिश्रण : अमिताभ</title>
                                    <description><![CDATA[वैजयंती मूवीज द्वारा निर्मित 'कल्कि 2898 एडी' हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयाली, कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा में 27 जून को रिलीज होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/amitabh-is-a-unique-blend-of-the-future-with-mythology/article-82638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/amitabh-bachchan-.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का कहना है कि उनकी आने वाली फिल्म कल्कि 2898 एडी के जरिये भविष्यवाद के साथ पौराणिक कथाओं का अनूठा मिश्रण किया गया है, जो दर्शकों को बेहद पसंद आयेगा।</p>
<p>'कल्कि 2898' एडी इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक है। नाग अश्विन द्वारा निर्देशित सायंस फिक्शन महाकाव्य फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' में अमिताभ बच्चन, कमल हासन, प्रभास, दीपिका पादुकोण और दिशा पटानी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कल्कि 2898 एडी का प्रशंसक बेसब्री से इसकी रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। रिलीज़ ट्रेलर के बाद, इस उत्साह को द कल्कि क्रॉनिकल्स द्वारा और भी बढ़ा दिया गया, जो कि स्टार कलाकारों के साथ एक साक्षात्कार श्रृंखला है जो फिल्म के निर्माण के बारे में जानकारी देती है। साक्षात्कार में अमिताभ, कमल हासन, प्रभास, दीपिका पादुकोण निर्माता स्वप्ना दत्त और प्रियंका दत्त मौजूद थी।</p>
<p>कल्कि 2898 एडी पौराणिक विषयों पर आधारित है, जिसमें अश्वत्थामा और भैरव जैसे पात्र हैं, जो प्राचीन भारतीय महाकाव्यों में निहित हैं। भविष्य की कथा के साथ पौराणिक पात्रों का यह मिश्रण कहानी में एक अनोखी गहराई और समृद्धि जोड़ता है। 'द कल्कि क्रॉनिकल्स' के पहले एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने फिल्म पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, हम पौराणिक कथाओं को भविष्य की किसी चीज़ के साथ मिलाने में सक्षम हैं, कल्कि 2898 एडी बहुत अनोखा और सफल प्रयोग रहा। उन्होंने दर्शकों को आश्वासन दिया, फिल्म के अंत तक, आप वास्तव में उस पर विश्वास करेंगे जो आपने देखा था। फिल्म गुणवत्ता से परिपूर्ण है और इसके निर्माण में काफी सावधानी बरती गयी है।</p>
<p>अमिताभ ने कहा कि जब निर्देशक नाग अश्विन फिल्म के बारे में बात करने के लिए उनके पास आए थे तो एक फोटो साथ में लाए थे। तस्वीर यह दिखाने के लिए थी कि उनका और प्रभास का किरदार कैसे दिखेगा। उस तस्वीर में अमिताभ बच्चन का किरदार प्रभास के किरदार को धक्का दे रहा था। इस किस्से को सुनाने के बाद बिग बी ने कहा कि मैं हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं और प्रभास के फैंस कृपया मुझे माफ कर दें।  </p>
<p>वैजयंती मूवीज द्वारा निर्मित 'कल्कि 2898 एडी' हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयाली, कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा में 27 जून को रिलीज होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 12:48:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>डिग्री बनी कागज का टुकड़ा,नहीं दिला पा रही रोजगार</title>
                                    <description><![CDATA[बदलते दौर में एकेडमिक विषयों को व्यवसायी में बदलना जरूरी है। जब तक यह प्रयास सार्थक नहीं होंगे तब तक उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई पार कर पाना मुश्किल होगा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/degree-made-piece-of-paper--unable-to-get-employment/article-32340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/kota1111.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  स्कूल से कॉलेज का सफर तय करने के बाद हाथ में डिग्री तो मिल रही लेकिन रोजगार नहीं मिल रहा। उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई केवल ग्रेजुएट पैदा कर रही है, प्रोफेशनल टेलेंट नहीं। वर्तमान शिक्षण व्यवस्था में इतनी ताकत नहीं कि सबके लिए रोजगार सुनिश्चित कर सके। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा भी अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डिग्री होने के बावजूद हाथ से रोजगार गायब है। दरअसल, यूनिवर्सिटी व कॉलेज डिग्री देने की फैक्ट्री बन चुकी है, जो हर साल लाखों स्टूडेंटस का प्रोडक्शन निकाल रही है और उनके माथे पर ग्रेजुएट का लेबल चिप्का कमाने-खाने की दौड़ में खुला छोड़ रहे हैं। असल में ये स्टूडेंट्स ग्रेजुएट तो हैं लेकिन नोलेजबल नहीं है। जिसकी वजह से रोजगार के अवसर होेते हुए भी स्टूडेंट्स रोजगार की दौड़ में पिछड़ रहे है।  इसका मुख्य कारण कॉलेजों में बरसों से चल रहे परम्परागत विषयों को प्रोफेशनल में तब्दील नहीं करना है। जबकि, बदलते दौर में एकेडमिक विषयों को व्यवसायी में बदलना जरूरी है। जब तक यह प्रयास सार्थक नहीं होंगे तब तक उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई पार कर पाना मुश्किल होगा। </p>
<p><strong>शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी</strong></p>
<p>विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने से कॉलेजों में शिक्षा का माहौल खत्म होता जा रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर हो रही है। क्वालिटी एजुकेशन के अभाव में हर साल सैंकड़ों स्टूडेंट्स ग्रेजुएट होते हुए भी बेरोजगार घूम रहे हैं। आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की भी यही स्थिति है। वहीं, प्रोफेशनल कोर्सेज की बात करें तो एमबीए का सबसे बुरा हश्र है। आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को छोड़कर अन्य यूनिवर्सिटी व कॉलेज अपने स्टूडेंट्स को रोजगार तक नहीं दिला पा रहे।    </p>
<p><strong>महत्वपूर्ण विषयों में भी शिक्षकों की कमी</strong></p>
<p>शहर के प्रमुख राजकीय महाविद्यालयों में महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञों की कमी है। गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में कुल 107 प्रोफेसरों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 34 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। जबकि, यहां करीब 9 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके मुकाबले शिक्षकों के पद रिक्त होने से शिक्षा प्रभावित होती है। यहां अंग्रेजी और लोकप्रशासन विषय में 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं। ऐसे में दो या तीन सेक्शन को एक साथ बिठाकर पढ़ाना पड़ता है। ऐसे में प्रोफेसर स्टूडेट्स को अपनी बात ठीक से समझा नहीं पाते। नतीजन, अधूरा ज्ञान विद्यार्थियों को बेरोजगारी की ओर धकेल रहा है। </p>
<p><strong>परम्परागत विषयों को प्रोफेशनल में बदलने की जरूरत</strong></p>
<p>यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में आज भी बरसों पुराने परम्परागत विषय पढ़ाए जा रहे हैं। जबकि, बदलते दौर में जरूरतें भी बदल गई हैं। ऐसे में किताबी ज्ञान की जगह प्रेक्टिकली नोलेज बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए। वहीं, ट्रैडिशनल कोर्सों को प्रोफेशनल में बदलकर स्किल डवलपमेंट पर काम करने की महती आवश्यकता है।  विशेषज्ञ बताते हैं, ग्रेजुएट होना ही काफी नहीं है बल्कि विषय का विशेषज्ञ बनने की जरूरत है। यदि स्किल मजबूत होगी तो रोजगार लाखों की भीड़ में भी मिल जाएगा।  </p>
<p><strong>थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल पढ़ाई भी प्रभावित</strong><br />राजकीय साइंस कॉलेज में कुल 93 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 36 प्रोफेसरों के पद लंबे समय से खाली हैं। इनमें भौतिक शास्त्र  रसायन शास्त्र, वनस्पति व गणित के कई शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। प्राचार्य डॉ. जेके विजयवर्गीय ने बताया कि विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण संकाय में पदों का रिक्त होना चिंताजनक है। यहां करीब ढाई से तीन हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल पढ़ाई भी प्रभावित होती है। प्रोफेसर की कमी से बच्चों की समुचित पढ़ाई संभव नहीं हो पा रही। </p>
<p><strong>कहीं धर्मशाला तो कहीं स्कूल के आधे हिस्से में कॉलेज संचालित</strong><br />शहरी कॉलेजों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों की स्थिति दयनीय है।  हालात यह है, कहीं धर्मशाला तो कहीं स्कूल के आधे हिस्से में कॉलेज संचालित हो रहे हैं। राजकीय इटावा महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, तब से यह करीब 50 साल पुरानी त्यागी धर्मशाला में चल रहा है। भवन जितना पुराना है, उतना ही जर्जर अवस्था में है। वहीं, कनवास राजकीय आर्ट्स महाविद्यालय 5 साल से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। स्थिति विकट है, यहां स्कूल और कॉलेज एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। इस भवन में तीन दर्जन से अधिक कमरे हैं, जबकि कॉलेज के लिए 6 ही कमरे दिए हुए हैं। जिनमें से एक कक्ष प्राचार्य आॅफिस है और 5 कक्षों में 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। </p>
<p><strong>यहां कोर्स पूरा करवाना ही चुनौती</strong><br />शहर के सभी महाविद्यालयों में से सबसे बुरी स्थिति जेडीबी व गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की है।  दोनों कॉलेजों को मिलाकर कुल 64 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 54 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जेडीबी कॉमर्स की बात करें तो यहां 25 पदों में से मात्र 3 ही शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 22 पद खाली चल रहे हैं। इसी तरह राजकीय कॉमर्स कॉलेज में कुल 39 में मात्र 7 ही शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं, 32 पद लंबे समय से खाली हैं। ऐसे में यहां क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर कोर्स पूरा करवाना ही चुनौती बनी है। </p>
<p><strong>600 विद्यार्थियों पर दो शिक्षक </strong><br />शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बढ़ते अनुपात टैलेंट की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन शहर के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में 100 बच्चों पर 1 तो इटावा कॉलेज में 600 बच्चों पर 2 शिक्षक है। बच्चों से शिक्षक का सीधा जुड़ाव नहीं हो पाता।   क्वालिटी एजुकेशन तो दूर की बात व्यवस्थाएं बनाना ही शिक्षक के लिए चुनौती बन जाती है। </p>
<p> कॉलेज में प्लेसमेंट सेल बनी है। हमारी कोशिश बच्चों को रोजगार से जोड़ने की रहती है। हाल ही में एमएससी विद्यार्थियों को राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन (आरएपीपी)  की विजिट करवाई थी। जहां उन्हें अपने विषयों से संभावित रोजगार की संभावनाओं से अवगत कराया था। इस विजिट के माध्यम से उनकी कॅरिअर काउंसलिंग करवाई गई। इसके अलावा अन्य कम्पनियों को बुलाकर प्लेसमेंट शिविर भी आयोजित करवाए जाते हैं। असल में समस्या उन विद्यार्थियों के साथ होती है जो नियमित कॉलेज नहीं आते और अपने शिक्षक के सम्पर्क में नहीं रहते। <br /><strong>-डॉ. संजय भार्गव, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p> आर्ट्स के विषयों में प्राइवेट सेक्टर्स में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। विभिन्न विषयों के प्रोफेसर अपने स्टूडेंट्स के साथ उनके विषयों से संबंधित रोजगार के अवसरों से रुबरु करते हैं। इसके लिए बाहर से विशेषज्ञों को बुलाकर सेमिनार करवाकर उन्हें अपने विषयों में कहां, कैसे रोजगार मिल सकता है, इसकी जानकारी दी जाती है। हम विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार कर सकते हैं लेकिन जॉब के लिए मेहनत तो उन्हें ही करनी होगी। इसके अलावा कॉलेजों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए अलग से सेल बनी हुई है, जहां विद्यार्थियों को किस परीक्षा की कैसे तैयारी करनी है, आरएएस, आईएएस अधिकारियों को बुलाकर बच्चों को मोटिवेट भी करते हैं। <br /><strong>-डॉ. ज्योति सिडाना, सह आचार्य समाजशास्त्र जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>वाणिज्य संकाय में प्रोफेशनल विषयों को सम्मलित करना समय की जरूरत है। प्रोफेशनल विषय माइक्रो आॅडिटिंग, फाइनेंस आॅफ मार्केटिंग, लीगल आस्पेक्ट्स आॅफ बिजनेस, स्किलस आॅफ एंटरप्रिन्योरशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ते हुए पाठ्यक्रम बनाना आवश्यक है। साथ ही बच्चों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए वाणिज्य के व्यसायक प्रसाशन  को काला , विज्ञान, लॉ में आॅप्शनल विषय के रूप में जोड़ा जाना चाहिए। जिससे विद्यार्थियों को स्वरोजगार की जानकारी स्नातक करने के दौरान ही मिल जाए। <br /><strong>-डॉ. अनुज विलियम, सहायक आचार्य विद्या सम्बल योजना कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>वाणिज्य संकाय में विद्यार्थियों को कॉरपोरेट कम्पनियां व फैक्ट्रियों में व्यवहारिक ट्रैनिंग देने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।  कॉमर्स के क्षेत्र बैंकिंग, फाइनेंशियल एडवाइजर, लेखा अधिकारी, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर, मार्केटिंग मैनेजर, होटल, प्रोडक्ट, रिटेल मैनेजर,  तहसीलदार व क्लर्क जैसे पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में वाणिज्य विषयों को परीक्षा पाठ्यक्रम में सम्मिलित नहीं किया जाता। जबकि, अन्य संकायों को प्राथमिकता मिलने के  कारण विद्यार्थियों का कॉमर्स के प्रति रुझान कम होता जा रहा है। इस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। <br /><strong>-डॉ. वंदना आहूजा, प्राचार्य, जेडीबी कॉमर्स कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/degree-made-piece-of-paper--unable-to-get-employment/article-32340</link>
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                <pubDate>Wed, 14 Dec 2022 16:27:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>कचरे के ढेर में भविष्य ढूंढने को मजबूर बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[करवर कस्बे के आसपास छोटे -छोटे बच्चे अपना व परिवार का पेट भरने के लिए सुबह से देर शाम तक कचरे के ढेर खंगालते रहते है। ये बच्चे सुबह से शाम तक अपना और घर का गुजारा करने के लिए पढ़ाई लिखने की उम्र में कूड़ा कचरा बीन रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/childhood-forced-to-find-future-in-a-heap-of-garbage/article-15174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/kachre-mei-bhavishya-..karwar.jpg" alt=""></a><br /><p>करवर । करवर कस्बे  के आसपास छोटे -छोटे बच्चे अपना व परिवार का पेट भरने के लिए सुबह से देर शाम तक कचरे के ढेर खंगालते रहते है। ये बच्चे सुबह से शाम तक अपना और घर का गुजारा करने के लिए पढ़ाई लिखने की उम्र में कूड़ा कचरा बीन रहे है। बच्चे अपनी उम्र के अन्य बच्चों को सुबह स्कूल जाते हुए देख कर अपने आप को भी स्कूल में पढ़ने तथा उनके साथ खेलने कूदने की सोचते है, लेकिन परिवार की माली हालात ठीक नहीं होने के कारण वह स्कूल जाने व खेलने कूदने की उम्र में कूड़ा कचरे के ढेरों में अपना भविष्य ढूंढते नजर आते है। बच्चों का कहना है कि वह पढ़ना चाहते हो लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं है कि वे शिक्षा हासिल करने के लिए किसी स्कूल की ओर कदम बढ़ा सके। बच्चे सुबह से शाम तक कूड़े के ढेरों में शराब की खाली बोतलें,प्लास्टिक का सामान व लोहे का सामान निकालते रहते है। यह बच्चे अपना व परिवार को पेट भरने के लिए अपना जीवन कूड़े के ढेरों में बिता रहे है। कचरा बीनने वाले यह छोटे- छोटे बच्चे आने वाले खतरों से अनजान होकर कूड़ा कचरा बीनते रहते है। कस्बे में दौड़ते हुए तेज वाहनों की आवाज को नकार कर यह अपना ध्यान सिर्फ कूड़ा बीनने में रखते है। यह बच्चे कचरे के ढेरों से सिर्फ सौ -पचास रुपए के लिए अपना जीवन कचरे के ढेरों में बिता रहे है। राज्य सरकार व शिक्षा विभाग ने बच्चों को पढ़ाई की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए  गरीब परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क पढ़ाने तथा मिड डे मील योजना के तहत नि:शुल्क खाना सरकारी स्कूलों में दिया जाता है, लेकिन इन सब योजनाओं के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने कचरा बिनते यह बच्चे नहीं दिखाई देते है। ऐसे में राज्य सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा हर वर्ष सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने को लेकर बड़े पैमाने पर जोर दिया जाता है लेकिन अध्यापक इन बच्चों को स्कूल की मुख्यधारा से नहीं जोड़ पाते है।<br /><br /><strong>शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित है</strong><br />बच्चों को नि:शुल्क व अनिवार्य स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार कहीं योजनाएं चला रही है लेकिन सरकार के लाख प्रयास के बावजूद आज भी करवर क्षेत्र के बच्चं शिक्षा से वंचित है ,पीठ पर कचरे का बोरा लटकाए बाजारों व मोहल्लों में घूमते इन बच्चों को देखकर बचपन बोझिल सा  प्रतीत होता है।<br /><br /><strong>कस्बे में प्रशासन अनजान</strong><br />स्कूली शिक्षा से वंचित दिनभर कूड़े कचरे के ढेर में जिंदगी तलाशते बच्चें बाल अधिकारों और संरक्षण का सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता का दावा करने वाली विभागीय अधिकारियों के दावा के दावों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। सरकार ने भले ही महिला एवं बाल विकास, शिक्षा व बाल अधिकारिता विभाग सहित सामाजिक संस्थाओं को ऐसे बच्चों को स्कूलों में नामांकन कराने की जिम्मेदारी सौंपी है हालांकि प्रशासन द्वारा एनजीओ के माध्यम से ऐसे बच्चों को चिन्हित कर शिक्षा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन यह प्रयास केवल दिखावा साबित हो रहा है कस्बे में तीन-चार बालक बालिकाएं कंधे पर कचरे का बोरा लड़का है। देखे जा सकते हैं। उन्हें जहां पर भी कचरे का ढेर दिखता उसमें से  प्लास्टिक आदि समेटकर बोरे में डाल लेते है। जब संवाददाता ने उनसे पूछने पर बताया कि वह पढ़ना चाहते हो लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं है कि वे शिक्षा हासिल करने के लिए किसी स्कूल की ओर कदम बढ़ा सकें उन्हो का कहना है की अन्य बच्चों को स्कूल जाते देख उन्हें भी स्कूल जाने की इच्छा होती है।<br /><br /><strong>इनका कहना</strong><br /> ऐसे बच्चों को रेस्क्यू करके बाल कल्याण समिति संरक्षण में रखकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर उनको संबंधित स्किम में जोड़कर लाभ दिलाया जाएगा।<br /><strong>-सीमा पोद्दार, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, बून्दी</strong><br /><br /> करवर में ऐसे बच्चे नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। प्रशासन द्वारा ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ कर शिक्षा का अलख जगाना चाहिए। <br /><strong>-काजोड़ी लाल प्रजापत, समाज सेवी, करवर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 17:50:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ICC के अगले फ़्यूचर टूर प्रोग्राम में IPL को संभावित रूप से ढाई महीने की विंडो मिलने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को टेंशन... जाने कारण</title>
                                    <description><![CDATA[कराची। आईसीसी के अगले फ़्यूचर टूर प्रोग्राम में आईपीएल को संभावित रूप से ढाई महीने की विंडो मिलने से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को लगता है कि उसके साथ अन्याय किया जा रहा है। जुलाई में आईसीसी की वार्षिक आम बैठक में पीसीबी इस मुद्दे को उठाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/pakistan-cricket-board-is-worried-about-the-possibility-of-getting-a-window-of-two-and-a-half-months-for-the-ipl-in-the-next-future-tour-program-of-the-icc/article-13025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/pak-cricket-bord-new.jpg" alt=""></a><br /><p>कराची। आईसीसी के अगले फ़्यूचर टूर प्रोग्राम में आईपीएल को संभावित रूप से ढाई महीने की विंडो मिलने से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को लगता है कि उसके साथ अन्याय किया जा रहा है। जुलाई में आईसीसी की वार्षिक आम बैठक में पीसीबी इस मुद्दे को उठाएगा।<br /><br />विडो के बारे में आईसीसी की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई है और इसके होने की संभावना नहीं है क्योंकि यह एक घरेलू लीग है। अगले आठ साल के चक्र के लिए फ़्यूचर टूर प्रोग्राम को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है लेकिन बीसीसीआई सचिव जय शाह ने हाल ही में कहा था कि बोर्ड अब 10 टीमों के टूर्नामेंट के लिए एक विंडो सुनिश्चित करेगा जिससे सभी शीर्ष अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर इसमें भाग ले सकेंगे। इसमें पाकिस्तान के खिलाड़ी शामिल नहीं होंगे। पहले आईपीएल सीजन को छोड़कर पाकिस्तान के खिलाड़ी किसी भी अन्य आईपीएल सीजन में शामिल नहीं रहे हैं। यह ज्यादातर दोनों देशों के बीच खराब राजनीतिक संबंधों के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप आईपीएल विंडो यक़ीनन पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय सत्र को अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रभावित करती है।<br /><br />लाहौर में पीसीबी के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स की 69वीं बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान पीसीबी अध्यक्ष रमीज राजा ने कहा, कि (IPL) विंडो बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की गई है। इस पर मेरे विचार हैं जिन्हें हम जुलाई की बैठक में आईसीसी के मंच पर उठाएंगे। रमीज ने यह भी कहा कि उनका चार देशों की टी20 सुपर सीरीज का प्रस्ताव - जिसे अप्रैल में आईसीसी की बैठक में पास किया गया था - अभी तक बेकार नहीं गया है। मेरा चार देशों का कॉन्सेप्ट अभी बेकार नहीं हुआ है। ऐसा लगता है कि मीडिया को यह आभास हो गया है कि इसे स्थगित कर दिया गया है। यह सच नहीं है। वे (आईसीसी) विश्व कप के आयोजनों के राइट्स को इक कर रहे थे, इसलिए उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने एक और सामग्री की घोषणा की, तो सभी निवेशक इसका पीछा करना शुरू कर देंगे। यह एक नई चुनौती बन जाएगी, इसलिए उन्होंने इसे अभी पेश न करना ही बेहतर समझा। लेकिन यह एकमात्र क्रिकेट बोर्ड होगा जो किसी भी मंच को चुनौती देगा जहां उसे लगता है कि पाकिस्तान के साथ अन्याय किया जा रहा है। जब हमें यह विवरण (आईपीएल ङ्क्षवडो के विस्तार का) औपचारिक रूप से मिलेगा, तो हम अपने विचारों को एक मजबूत तरीक़े से रखेंगे।<br /><br />रमीज क्रिकेट संबंधों के बारे में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के संपर्क में रहे हैं लेकिन उन्होंने स्वीकार कियाकि स्थिति उनसे परे थी। मैंने सौरव गांगुली से इतर बात की है, और मैंने उनसे कहा कि अब तीन पूर्व क्रिकेटर (मार्टिन स्नेडेन सहित) आईसीसी बोर्ड में हैं। मैंने कहा कि अगर हम भी बदलाव नहीं ला सकते हैं, फिर क्या मतलब है? उन्होंने मुझे दो बार आईपीएल में आमंत्रित किया, एक बार दुबई में और एक बार इस मर्तबा। मैंने मना कर दिया। मैंने सोचा कि अगर मैं चला गया, तो प्रशंसक मुझे माफ़ नहीं करेंगे, भले ही क्रिकेटिंग सेंस जाने को कहता हो, लेकिन अभी ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें हल करने में समय लगेगा, क्योंकि यह एक राजनीतिक खेल है। अगर यह क्रिकेट का मुद्दा था, तो हम इसे दो मिनट में सुलझा लेंगे। लेकिन हमें चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2025 की मेजबानी मिली, इसलिए हमने कुछ हद तक प्रभाव को तोड़ा, और लोगों को एहसास हुआ कि पाकिस्तान की टीम और प्रशंसक इस तरह के विश्व स्तरीय आयोजन के लायक हैं। आईपीएल 2014 से आठ टीमों का टूर्नामेंट था। इस साल से दो नई टीमों - लखनऊ सुपर जायंट्स और इस सीजन की विजेता गुजरात टाइटंस को जोड़ा गया था जिससे मैचों की संख्या 60 से बढ़कर 74 हो गई और लीग की अवधि 50 दिनों से दो महीने तक हो गई। आईपीएल की हालिया मीडिया-राइट्स नीलामी में, जो एक धमाकेदार डील साबित हुई, बीसीसीआई ने कहा था कि आईपीएल में मैचों की संख्या 2025 और 2026 में 84 और 2027 में 94 तक हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 19:01:39 +0530</pubDate>
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                <title>प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए भविष्य की उड़ान सवाई माधोपुर एप लॉन्च </title>
                                    <description><![CDATA[ जिला कलक्टर सुरेश कुमार ओला ने ‘भविष्य की उड़ान’ संवाद कार्यक्रम के तहत मंगलवार को कलक्टर चैम्बर में पत्रकार वार्ता के दौरान भविष्य की उड़ान संवाद सवाई माधोपुर एप लॉन्च किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/future-flight-sawai-madhopur-app-launched-for-preparation-of-competitive-exams/article-12195"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/102.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सवाई माधोपुर।</strong> जिला कलक्टर सुरेश कुमार ओला ने ‘भविष्य की उड़ान’ संवाद कार्यक्रम के तहत मंगलवार को कलक्टर चैम्बर में पत्रकार वार्ता के दौरान भविष्य की उड़ान संवाद सवाई माधोपुर एप लॉन्च किया। कलक्टर ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों के लिए सवाई माधोपुर जिले में चलाए जा रहे नवाचार ‘भविष्य की उड़ान’ संवाद कार्यक्रम के बारे में मीडिया को विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि किसी के भी आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। </p>
<p>शिक्षा न मिले या वह बीच में ही छूट जाये तो व्यक्ति के जीवन की दशा एवं दिशा दोनों बदल जाती हैं। बेटों के समान बेटियों को भी कॅरियर गाइडेंस का समान अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इस नवाचार को प्रारम्भ किया है। इससे बालिकाओं को कॅरियर की नई उम्मीद जगी है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि संवाद कार्यक्रम के तहत बालिकाओं को 3 समूहों में कक्षा 9 से 12 तक विद्यालयों में अध्ययनरत, कॉलेज में अध्ययनरत बालिकाओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की महिला प्रतिभागी हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को सफ ल बनाने के लिए जिला स्तरीय एवं ब्लॉक स्तरीय कोर समूह का गठन किया गया है जो विद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों में जाकर बालिकाओं से संवाद कर विभिन्न अकादमिक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के संबंध में उपयुक्त अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि बालिकाओं को ऑनलाइन-ऑफ लाइन मोड पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के साथ-साथ परीक्षाओं के वस्तुनिष्ठ प्रश्न तैयार कर मॉक टेस्ट लिए जा रहे हैं। जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली परीक्षार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 12:24:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब एक टेस्ट से लगेगा भविष्य में होने वाली बीमारियों का पता</title>
                                    <description><![CDATA[व्यक्ति एपीलेप्सी सहित अन्य बीमारियों से कब ग्रसित हो जाता है। इसका उसे पता ही नहीं चलता, जब पता चलता है, तब तक अक्सर बहुत देर हो जाती है और इलाज मुश्किल हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jaipur-one-test-will-detect-future-diseases/article-12185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/1-copy7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। व्यक्ति एपीलेप्सी सहित अन्य बीमारियों से कब ग्रसित हो जाता है। इसका उसे पता ही नहीं चलता, जब पता चलता है, तब तक अक्सर बहुत देर हो जाती है और इलाज मुश्किल हो जाता है। कई बार मरीज को बचा पाना भी संभव नहीं होता है। अगर इन बीमारियों का भविष्य में होने या नहीं होने का पता पहले ही चल जाए तो हम बीमारी होने से पहले ही रोक सकते हैं या बचाव कर सकते हैं। नेक्स्ट जेन सिक्वेंसिंग जीनो टाइपिंग टेस्ट के जरिए अब यह संभव है। आठ हजार रुपए में होने वाले इस टेस्ट को प्रीजेनिक सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी करवा रही है और इस टेस्ट के डेटा एनालिसिस से आमजन को भविष्य में होने वाली बीमारियों से आगाह भी कर रही है। इससे लोगों को कैंसर सहित अन्य बीमारियों से बचाव में मदद मिल रही है। एनआरआई निश्चित अग्रवाल ने अपने साथी बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग कर चुके सुशांत गोयल के साथ मिलकर फिलहाल जयपुर से यह स्टार्ट अप शुरू किया है। इसका उद्देश्य प्रिवेंशन इज बेटर देन क्योर है।</p>
<p><strong>ऐसे मिली प्रेरणा</strong><br />कंपनी के फाउंडर सुशांत ने बताया कि स्टार्ट अप को शुरू करने का आइडिया निश्चित अग्रवाल को आया था। उनकी मां की करीब 50 साल की उम्र में ही जेनेटिक डिजीज ब्रेन एन्यूरिज्म के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद निश्चित को जानने का जुनून हुआ कि उनको और उनकी बहन को यह बीमारी भविष्य में होने की कितनी संभावना है और अगर है, तो वे इसके लिए बचाव प्रक्रिया अपना सके। सुशांत ने बताया कि आमजन में जागरूकता की कमी से भारत में फिलहाल इस तरह के टेस्ट और जिनोम सिक्वेंसिंग के डेटा का एनालिसिस बहुत कम हो रहा है। इसलिए हम दोनों ने मिलकर यह स्टार्ट अप शुरू किया है। हमारे स्टार्ट अप को एनवीडिया इंसेप्शन प्रोग्राम और माइक्रोसॉफ्ट फॉर स्टार्ट अप प्रोग्राम में भी सलेक्ट किया है।</p>
<p><strong>165 से ज्यादा बीमारियां कवर, छह हफ्तों में रिपोर्ट</strong><br />सुशांत ने बताया कि फिलहाल हम इस टेस्ट के जरिए जीन के म्यूटेशन को देखते हैं। इसके जरिए 48 प्रकार के कैंसर, एपीलेप्सी, डिप्रेशन, पीसीओएस, पीसीओडी, ब्रेन एन्यूरिज्म सहित 165 से ज्यादा बीमारियों और उनके ट्रेंड्स को कवर कर रहे हैं। जयपुर में अभी तक हमने करीब 60 टेस्ट किए हैं। सुशांत ने बताया कि फिलहाल में खुद ही घर-घर जाकर टेस्ट भी कर रहा हूं और मैं और निश्चित मिलकर टेस्ट के डेटा एनालिसिस भी कर रहे हैं। टेस्ट की रिपोर्ट छह हफ्तों में आ जाती है और रिपोर्ट आने के बाद हम टेस्ट करवाने वाले की एक घंटे की काउंसलिंग भी करते हैं, जिसमें उन्हें टेस्ट रिजल्ट और बीमारियों के बारे में बताने के साथ ही बचाव के तरीके भी बताते हैं।</p>
<p><strong>फिलहाल ऑनलाइन है टेस्ट की बुकिंग</strong><br />सुशांत ने बताया कि कोई भी व्यक्ति प्रिजेनिक्स डॉट इन वेबसाइट पर जाकर इस टेस्ट के बारे में जानकारी ले सकता है। इस वेबसाइट से टेस्ट की बुकिंग भी कराई जा सकती है और बुकिंग होने के बाद मैं खुद घर जाकर टेस्ट किट से सैंपल लेता हूं। यह एक बहुत छोटा सा पॉकेट साइज टेस्ट किट है और इसमें एक ट्यूब होती है, जिसमें मरीज का थूक या सलाइवा लिया जाता है। फिर हम इसे टेस्ट प्रोसेसिंग में डाल देते हैं और इस टेस्ट का डेटा एनालिसिस करते हैं। इस प्रक्रिया में छह हफ्ते तक का समय लगता है। हमारी लोगों से अपील है कि 18 साल से ऊपर के व्यक्ति इस टेस्ट को जरूर करवाएं, जिससे उन्हें भविष्य में होने वाली जेनेटिक बीमारियों का पहले ही पता चल जाए और उससे बचाव संभव हो सके।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 10:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीएमओयू का मामला: परीक्षा का पता और न ही परिणाम का, दांव पर लगा हजारों विद्यार्थियों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[वर्धमान खुला विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई। लचर व्यवस्था से हजारों छात्रों का भविष्य दांव लगा हुआ है । हालात यह है, न परीक्षा का पता है और न ही परिणाम का। वहीं, एक साल का कोर्स तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-of-vmou--neither-the-address-of-the-examination-nor-the-result--the-future-of-thousands-of-students-at-stake/article-10989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/vmou-pariksha-ka-pata-nahi-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्धमान खुला विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई। लचर व्यवस्था से हजारों छात्रों का भविष्य दांव लगा हुआ है । हालात यह है, न परीक्षा का पता है और न ही परिणाम का। वहीं, एक साल का कोर्स तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ है। विद्यार्थियों की डिग्री पूरी होने के बावजूद आंतरिक मूल्यांकन के नम्बर मार्कशीट में नहीं जोड़े गए, जिससे रिजल्ट कम्पलीट नहीं हो पा रहा। इतना ही नहीं, राजस्थान के दूरस्थ इलाकों से कोटा आए छात्रों को यूनिवर्सिटी में समस्याओं से संबंधित सवालों के जवाब भी संतोषजनक नहीं मिल रहे। नतीजन, भीषण गर्मी में विद्यार्थी इधर से उधर भटकने को मजबूर हैं। इन दिनों वर्धमान खुला विश्वविद्यालय में ऐसे ही हालात हर रोज नजर आ रहे हैं।  <br /><br /><strong>एक साल बाद भी अंकतालिका में नहीं जोड़े असाइनमेंट के नम्बर</strong> <br /> बीएड छात्र देवेंद्र व अमर सिंह ने बताया कि बीएड प्रथम वर्ष की परीक्षा हुए एक साल हो गया।  लेकिन, अभी तक आंतरिक मूल्यांकन के नम्बर मार्कशीट में नहीं जोड़े गए। जिससे रिजल्ट कम्पलीट नहीं हो रहा। वहीं, द्वितीय वर्ष के असाइनमेंट अभी तक नहीं दिए गए। जबकि, असाइमेंट जमा करवाने की तारीख गत 15 मई थी। ऐसे में कब असाइनमेंट बनाएं और कब जमा करवाएंगे।   <br /><br /><strong>7 दिनसे100 से ज्यादा विद्यार्थी कोटा में रुके</strong> <br />वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय से बीएड कर रहे छात्र दोहरी मार झेल रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से वीएमयू में बीएड कीपरीक्षा करवाने की मांग को लेकर कोटा आए 100 से ज्यादा विद्यार्थी 7 दिन से अपने खर्चे पर यहां रुके हुए हैं। इनमें कोई होटल, धर्मशाला तो कोई परिचितों के यहां समाधान की आस में रूके हुए हैं। समस्याओं को लेकर रोजाना यूनिवर्सिटी जाते हैं लेकिन वहां ना तो परीक्षा नियंत्रक मिलते हैं और न ही कोई जिम्मेदार अफसर। ऐसे में छात्र यूनिवर्सिटी की अव्यवस्थाओं को कोसते हुए मायूस लौट रहे है। <br /><br /> <strong>परीक्षा नहीं हुई तो शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए हो जाएंगे अपात्र</strong><br />बीएड छात्र चैनाराम विशनोई व नेनाराम चौधरी ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 500 विद्यार्थी वर्धमान खुला विशवविद्यालय से बीएड कर रहे हैं। द्वितीय वर्ष की परीक्षा इसी जून माह में होना प्रस्तावित है लेकिन अभी तक एग्जाम को लेकर कोई शिड्यूल जारी नहीं किया। ऐसे में असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है। यदि परीक्षा निर्धारित समय पर नहीं हुई तो अक्टूबर में होने वाले आरपीएससी की फर्स्ट व सैकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। जिम्मेदारों की लेटलतीफी से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।<br /><br /><strong>कर्मचारी नहीं दे रहे ठीक से जवाब</strong> <br />कुन्हाड़ी निवासी कुलदीप सिंह हाड़ा का कहना है, एमए की मार्कशीट लेने आया था। संबंधित काउंटर पर जाकर पूछताछ की तो काफी देर तक जवाब नहीं दिया। दोबारा फिर से मार्कशीट के बारे में पूछा तो वहां तैनात कर्मचारी अभद्रता पर उतर आया। वहीं, झालावाड़ जिले के भवानीमंडी से आए किशनलाल अरोड़ा ने कहा, विव प्रशासन द्वारा परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी जाती। यहां आकर देखा तो लाईब्रेरी की क्लासें शुरू हो चुकी थी। ऐसे में हमारी कई क्लासें छूट गई। <br /><br /><strong>जोधपुर से कोटा के लगाए 4 चक्कर, फिर भी सुनवाई नहीं</strong> <br />जोधपुर से आए विद्यार्थी उम्मेद सिंह व अरविंद कुमार ने बताया कि वर्धमान कोटा खुला विश्वविद्यालय के जोधपुर रिजनल सेंटर से बीएससी की। प्रथम वर्ष में फिजिक्स-कैमेस्ट्री में बैक आ गई। डिफाल्टर फॉर्म भरा और परीक्षा देकर पास हो गए। इसी दौरान तीन साल की डिग्री भी पूरी हो गई लेकिन प्रथम वर्ष के नंबर अंकतालिका में नहीं जोड़े गए। जिससे रिजल्ट अभी तक अधूरा है। शिकायत लेकर जोधपुर सेंटर पर गए तो उन्होंने कोटा भेज दिया। यहां आए तो संबंधित कर्मचारियों ने काम वहीं होने की बात कहकर वापस जोधपुर भेज दिया। इस तरह अब तक जोधपुर से कोटा के 4 चक्कर काट चुका हूं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही। सुबह से शाम तक अधिकारी से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। <br /><br /><strong>अंतिम तिथि आज नहीं खुला पोर्टल</strong><br />बाड़मेर निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि वीएमओयू कोटा से वर्ष 2019 में एमए गणित में एडमिशन लिया था। परीक्षा अगले वर्ष 2020 में होनी थी लेकिन कोविड के चलते परीक्षा न करवाकर द्वितीय वर्ष में प्रमोट कर दिया। अक्टूबर 2021 में फाइनल एग्जाम में बैक आ गई, जिसे क्लीयर करने के लिए डिफाल्टर फॉर्म भरना जरूरी है लेकिन लंबे समय से यूनिवर्सिटी का पोर्टल नहीं खुल रहा।  परीक्षा नियंत्रक के कक्ष पर ताला लगा है।  ई-मित्र पर गया तो पता लगा आज फॉर्म करने की आखिरी तारीख है और दोपहर तीन बजे तक पोर्टल बंद था। <br /><br /><strong>1 साल का कोर्स 3 साल में भी नहीं हुआ पूरा</strong> <br />भीलवाड़ा निवासी विद्यार्थी  हिम्मत सिंह बताया कि  वर्ष 2019 में यहां लाइब्रेरी डिप्लोमा में एडमिशन लिया था। 2 साल कोविड के चलते न तो एग्जाम हुए और न ही प्रेक्टिकल करवाए गए। इसके अलावा परीक्षा तिथि भी घोषित नहीं की गई। ऐसे में 1 का कोर्स 3 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ। अब तक अनगिनत चक्कर काट चुके हैं, फिर भी सुनवाई नहीं हुई।<br /><br />परीक्षा सहित अन्य शैक्षणिक समस्याओं को लेकर परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर बी.अरुण कुमार से कई बार सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन उनके द्वारा फोन न उठाने से सम्पर्क नहीं हो पाया और विश्वविद्यालय में उनके कक्ष पर भी ताला लगा हुआ था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 16:25:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुनहरा हुआ देसाई का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी परिणाम में अजमेर के भविष्य देसाई ने पूरे देश में 29वीं रैंक हासिल की है।भविष्य ने दैनिक नवज्योति से बातचीत में बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा सेंट एन्सलम स्कूल से करने के बाद आईआईटी कानपुर से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद गुड़गांव स्थित फर्म में 55 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर नौकरी लग गई लेकिन इच्छा विदेश सेवा करने की थी। इसलिए नौकरी छोड़कर वह यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-news--desai-s-future-is-golden/article-10850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/1110.jpg" alt=""></a><br /><p> अजमेर। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी परिणाम में अजमेर के भविष्य देसाई ने पूरे देश में 29वीं रैंक हासिल की है। देसाई ने पहली ही बार में यह सफलता हासिल की है। उनकी प्राथमिकता विदेश सेवा में जाने की है। एमडीएस विश्वविद्यालय के पास ही मोहिनी विहार कॉलोनी में रहने वाले भविष्य देसाई के पिता गोपाराम देसाई महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में बॉटनी विभाग में हरबैरियम असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं और माता ललिता देसाई कायड़ स्थित राजकीय विद्यालय में शिक्षक है। भविष्य की छोटी बहन हिमाक्षी बड़ोदरा में एमबीबीएस कर रही है।</p>
<p>भविष्य ने दैनिक नवज्योति से बातचीत में बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा सेंट एन्सलम स्कूल से करने के बाद आईआईटी कानपुर से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद गुड़गांव स्थित फर्म में 55 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर नौकरी लग गई लेकिन इच्छा विदेश सेवा करने की थी। इसलिए नौकरी छोड़कर वह यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया। </p>
<p><strong>अपनाई यह स्ट्रेटजी</strong></p>
<p>भविष्य ने बताया कि यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा का सिलेबस बहुत विस्तृत होता है और टाइम लिमिटेड होता है। इसलिए उन्होंने सिम्पल स्ट्रेटजी अपनाई। बेसिक कॉन्सेप्ट पर ध्यान केन्द्रीय किया। लिमिटेड पढ़ाई और मल्टीपल रिवीजन अपनाया।</p>
<p><strong>एस. जयशंकर से प्रभावित होकर किया विदेश सेवा का चयन</strong></p>
<p>भविष्य ने बताया कि उनकी इच्छा विदेश सेवा में जाने की है। उन्होंने यूपीएससी के परीक्षा आवेदन में भी प्राथमिकता में विदेश सेवा ही चुनी थी। इसकी वजह यह है कि उनकी पॉलिटिकल फिलोसॉफी, इंटरनेशनल रिलेशनशिप में काफी दिलचस्पी रही है। वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा एम्बेसेडर शिवशंकर मेनन से काफी प्रभावित रहे हैं। परिणाम आने के बाद अब मसूरी स्थित लालबहादुर शास्त्री एकेडमी में होगी और सुषमा स्वराज इंस्टीटयूट में फोरेन पॉलिसी ट्रेनिंग होगी। इसके बाद लैंग्वेज ट्रेनिंग होगी। भविष्य के अनुसार लैंग्वेज में उनकी प्राथमिकता चाइनिज और फ्रेंच है लेकिन विदेश मंत्रालय तय करेगा कि कौनसी लैंग्वेज मिलेगी। इसके अनुसार ही उनकी नियुक्ति होगी। </p>
<p><strong>लगा बधाइयों का तांता</strong></p>
<p>जैसे यूपीएससी का परिणाम घोषित हुआ। गोपाराम देसाई के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिचितों, मित्रों, सहकर्मियों, रिश्तेदारों ने बधाई दी। बेटे की सफलता से गद्गद् गोपाराम का कहना है कि बेटे की सफलता ने उनका सीना चौड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि भविष्य और उसकी छोटी बहन आरंभ से ही मेधावी रहे हैं। जब उसने यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा के लिए आवेदन किया। तब उसकी तैयारी और लगन देख उन्हें अहसास हो गया था कि भविष्य पहली ही बार में सफलता हासिल करेगा। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 11:52:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एचएमएसआई ने किया भावी योजनाओं का अनावरण</title>
                                    <description><![CDATA[फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक परिवहन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/hmsi-unveils-future-plans/article-8565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/honda.jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुग्राम। होण्डा मोटरसाइकल एण्ड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने भविष्य एवं वैकल्पिक मोबिलिटी के लिए अपने कारोबार में बदलाव के लिए अपनी प्रगतिशील योजनाओं की घोषणा की है। साथ ही, कंपनी ने ‘मेकिंग इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के दृष्टिकोण के साथ हरियाणा के मनेसर स्थित अपने प्लांट को ग्लोबल रिसोर्स फैक्टरी के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य भी रखा है।  अपने निर्यात फुटप्रिन्ट को बढ़ाने के अलावा, एचएमएसआई ने ईंधन प्रभावी उत्पादों के विकास के लिए भी उग्र योजनाएं बनाई हैं। इसके तहत कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में चरणबद्ध तरीके से फ्लेक्स-फ्यूल टेकनोलॉजी को लागू कर इसे शामिल करेगी।  एचएमएसआई कम्युटर सेगमेन्ट में एक नई लो.एंड मोटरसाइकल लेकर आएगी। आत्सुशी ओगाता.मैनेजिंग डायरेक्टर प्रेजीडेन्ट एवं सीईओ होण्डा मोटरसाइकल एण्ड स्कूटर इंडिया ने कहा कि होण्डा की विश्वस्तरीय विशेषज्ञता और सशक्त स्वदेशी सहयोग के साथ, आने वाले समय में एचएमएसआई भारत में अपना विस्तार करेगी। चरणबद्ध तरीके से फ्लेक्स फ्यूल टेकनोलॉजी और ईवी मॉडल्स लाने की यात्रा कंपनी के लिए बेहद रोचक होने वाली है। एचएमएसआई ने घरेलू बाजारों में अपने नए फन मॉडल्स कारोबार को बढ़ाने के लिए लो एंड मोटरसाइकल सेगमेन्ट में प्रवेश की योजनाएं भी बनाई हैं। साथ ही कंपनी विदेशों में भी अपना विस्तार करेगी।<br /><br /><strong>सुरक्षा महत्वपूर्ण पहलु</strong><br />कम्युटर सेगमेन्ट में नई लो-एंड मोटरसाइकल आएगी<br />ईवी मॉडल लाइनअप के लिए फिजिबिलिटी का अध्ययन जारी<br />ग्लोबल रिसोर्स फैक्ट्री बनेगी एक्सपोर्ट हब<br /><br />होण्डा ने 2050 तक दुनिया भर में होण्डा मोटरसाइकलों एवं ऑटोमोबाइल्स की सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा है। अपने इसी विश्वस्तरीय दृष्टिकोण के साथ एचएमएसआई अपने सुरक्षा लक्ष्यों का दायरा बढ़ा रही है, जिसके तहत जागरुकता एवं राइडर ट्रेनिंग पहलों का विस्तार किया जाएगा। सुरक्षित राइडिंग को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद दोपहिया वाहनों के साथ प्रशिक्षण मैनपावर का होना बहुत जरूरी है। <br /><br /><strong>फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक परिवहन</strong><br />दुनिया भर में फ्लेक्स.फ्यूल टेकनोलॉजी में एक दशक से अधिक के अनुभव और ब्राजील के बाजार में 7 मिलियन से अधिक संतुष्ट उपभोक्ताओं के साथ एचएमएसआई भारत के दोपहिया बाजÞार में फ्लेक्स फ्यूल बदलाव लाने के लिए तैयार है।  एचएमएसआई ने देश में होण्डा की अन्य सब्सिडरियों के सहयोग से आने वाले सालों में कई नए ईवी मॉडल बाजार में उतारने की योजना भी बनाई है। वर्तमान में कंपनी अपने ईवी मॉडल लाईनअप के लिए फिजिबिलिटी का अध्ययन कर रही है और भारत में समग्र इको-सिस्टम के विकास पर काम कर रही है। <br /><br /><strong>मानेसर प्लांट को ग्लोबल रिसोर्स में बदला जाएगा</strong><br />भविष्य के लिए तैयार संगठन होने के नातेए होण्डा मोटरसाइकल एण्ड स्कूटर इंडिया मनेसर स्थित अपनी मुख्य फैक्टरी में 360 डिग्री आधुनिक टर्नअराउण्ड के साथ न्यू नॉर्मल को तेजी से अपना रही है। अब एचएमएसआई के सभी कॉर्पोरेट कार्यों का संचालन एक ही स्थान पर होता है और सभी टीमें और वर्टिकल्स संयुक्त क्षमता के साथ काम करते हैं। उत्पादकता के अलावा, रोजाना के संचालन में नई डिजिटल पहलों को शामिल करने से एचएमएसआई के सभी एसोसिएट्स के लिए काम एवं जीवन के बीच का तालमेल बेहतर हो जाएगा।<br /><br /><strong>बाजार में सुधार की उम्मीद</strong> <br />एचएमएसआई की भावी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए यदविंदर सिंह गुलेरिया डायरेक्टर सेल्स एण्ड मार्केटिंग होण्डा मोटरसाइकल एण्ड स्कूटर इंडिया ने कहा कि पिछले 20 सालों में उपभोक्ता और समाज के साथ भरोसे के मजबूत रिश्ते बनाने के बाद आज एचएमएसआई 5 करोड़ से अधिक भारतीय परिवारों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है। भावी योजनाओं की बात करें, तो हालांकि सप्लाई चेन में कई मुद्दे हैं और उद्योग जगत कोमोडिटी एवं ईंधन की बढ़ती कीमतों के साथ जूझ रहा है, हमें पिछले वित्तीय वर्ष के नीचले आधार पर बाजार में सुधार की उम्मीद है।</p>
<p><br /><strong>निर्यात कारोबार का विस्तार</strong><br />यूरोप और जापान सहित 40 देशों में लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाते हुए, एचएमएसआई के प्रोडक्ट दुनिया भर में उपभोक्ताओं को लुभा रहे हैं। इस तरह, विकसित बाजारों में विस्तार करते हुए, एचएमएसआई ने अपनी उत्कृष्ट उत्पादन तकनीकों एवं विश्वस्तरीय प्रोडक्ट्स के साथ निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 14:49:10 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस के भविष्य को लेकर दिल्ली में मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में बीजेपी पर बरसे गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/brainstorming-in-delhi-regarding-the-future-of-congress--many-congress-veterans-including-prashant-kishor--ashok-gehlot-were-present/article-8231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok5.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस की भविष्य की रणनीति तय करने के लिए दिल्ली दरबार में मंथन का दौर जारी है। बुधवार को दस जनपथ पर कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, प्रशांत किशोर, दिग्विजय सिंह, केसी वेणुगोपाल, सोनिया गांधी, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, जयराम रमेश मौजूद रहें। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव, अगले आम चुनाव समेत गुजरात, हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों पर मंथन किया गया। इसके साथ ही कांग्रेस के चिंतन शिविर पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस पार्टी को जीत की नई दिशा देने के लिए  लगातार तीसरे दिन हो रही बैठक में प्रशांत किशोर पर सभी की निगाहें रही। वहीं बैठक के दौरान कांग्रेस की भविष्य की रणनीति तय करने में सीएम गहलोत की राय और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण माना गया।</p>
<p><strong>सीएम अशोक गहलोत दिल्ली में बोले...</strong><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली पहुंचने पर मीडिया से भी मुखातिब हुए। इस दौरान उनहोनें जमकर बीजेपी पर जुबानी हमला बोला। गहलोत ने कहा कि राजस्थान में बीजेपी के 6 सीएम चेहरे हो गए हैं। तंज कसते हुए गहलोत ने कहा कि ऐसे में अब चर्चा किससे की जाए। वहीं देश में मौजूदा हालातों पर बोलते हुए गहलोत ने कहा कि देश में हिंसा का माहौल है, सरकार कुछ नहीं कर रही है। सत्तापक्ष हिंसा को रोकने के बाजय बढ़ावा दे रहा है। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बेलगाम होकर काम कर रहे हैं। वें किसी की परवाह नहीं करते। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा वहीं कह रहे हैं जो पीएम मोदी चाहते हैं। पीएम मोदी किरोड़ी मीणा की धमाल पट्टी को पसंद करते हैं। बाकी नेताओं से भी यही उम्मीद करते हैं। मैं किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करता, बल्कि मुद्दों पर बात करता हूं। पीएम और गृह मंत्री की गरिमा का ख्याल रखता हूं। जरूरत है कि सरकार देशहित में काम करे और फैसले ले।</p>
<p>वहीं मुख्यमंत्री ने प्रशांत किशोर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशांत किशोर जैसे प्रोफेशन लोगों का पार्टी यदि उपयोग करती है तो गलत नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 16:18:16 +0530</pubDate>
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