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                <title>scorching heat - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>scorching heat RSS Feed</description>
                
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                <title>यूरोप में 10 दिन की भीषण गर्मी से 2300 मौतें, रिसर्च में खुलासा- जलवायु परिवर्तन से जानलेवा हुई हीटवेव</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोप के 12 शहरों में हाल में खत्म हुई हीटवेव में 2,300 लोगों की जान गई है। वैज्ञानिकों ने अपने एक विश्लेषण के आधार पर ये दावा किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/2300-deaths-in-europe-due-to-scorching-heat-revealed-in/article-120110"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। यूरोप के 12 शहरों में हाल में खत्म हुई हीटवेव में 2,300 लोगों की जान गई है। वैज्ञानिकों ने अपने एक विश्लेषण के आधार पर ये दावा किया है। यह अध्ययन 2 जुलाई को खत्म हुई 10 दिनों की हीटवेव पर किया गया है। 10 दिन की इस अवधि के दौरान पश्चिमी यूरोप के कई बड़े हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में रहे। अध्ययन में कहा गया है कि पिछले सप्ताह खत्म हुई भीषण हीटवेव से 12 यूरोपीय शहरों में कम से कम 2,300 लोगों की मौत हुई है।</p>
<p>लंदन के इंपीरियल कॉलेज लंदन और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने यूरोप की भीषण गर्मी पर ये रिसर्च की है। अध्ययन कहता है कि 2,300 में से 1,500 मौतों की वजह जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है। जलवायु परिवर्तन ने यूरोप के हीटवेव को और ज्यादा गंभीर बना दिया। शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हुई।</p>
<p>12 शहरों को किया शामिल  <br />अध्ययन में बार्सिलोना, मैड्रिड, लंदन और मिलान जैसे 12 शहरों को शामिल किया गया। खासतौर से पश्चिमी यूरोप का बड़ा हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में रहा। </p>
<p>इस दौरान स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया तो फ्रांस में जंगलों में गर्मी की वजह से आग लग गई। इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ता डॉक्टर बेन क्लार्क ने बताया कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम को पहले की तुलना में ज्यादा गर्म बना दिया है, जिससे हीटवेव और खतरनाक हो गई।</p>
<p>सहकर्मी समीक्षित विधियों का इस्तेमाल<br />शोधकर्ताओं ने गर्मी से हुई मौतों का अनुमान लगाने के लिए स्थापित महामारी विज्ञान मॉडल और ऐतिहासिक मृत्यु दर के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। ये उन मौतों को दर्शाता है, जिनकी वजह गर्मी थी। इसमें पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियों के बिगड़ने की स्थिति शामिल है। अनुमानित मृत्यु दर का अनुमान लगाने के लिए सहकर्मी समीक्षित विधियों का इस्तेमाल किया, क्योंकि गर्मी से संबंधित मौतों की आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट नहीं की जाती है और कई सरकारें डाटा जारी नहीं करती हैं। यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा ने बुधवार को एक मासिक बुलेटिन में कहा कि पिछला महीना इतिहास का तीसरा सबसे गर्म जून था। </p>
<p>कोपरनिकस ने कहा कि पश्चिमी यूरोप ने रिकॉर्ड पर अब तक का सबसे गर्म जून अनुभव किया। इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्से में बहुत तेज गर्मी का अनुभव हमने किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Jul 2025 11:13:48 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी के साथ ही गंभीर पेयजल संकट </title>
                                    <description><![CDATA[गांव के सभी पांच हैंडपंप हुए नाकारा जबकि नलों में कभी टपका नहीं पानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/along-with-the-scorching-heat--there-is-a-serious-drinking-water-crisis/article-85514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/bhishan-grmi-k-sth-hi-peyjal-sankat...suket,-kota-news-22-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>सुकेत। क्षेत्र के सलावद खुर्द गांव में एक तरफ जहां भीषण गर्मी का प्रकोप बना हुआ है वहीं गांव में काफी समय से लोग पेयजल संकट से जूझने को मजबूर हैं। क्षेत्र में मानसून की पर्याप्त वर्षा नहीं होने तथा आसमान से आग बरसा रहे सूरज के प्रकोप के कारण गांव में भीषण पेयजल संकट खड़ा हो गया है। बीते वर्षों में पेयजल की समस्या ने काफी विकराल रूप ले लिया है। सलावद में लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। काफी दिनों से यह सिलसिला चल रहा है। लोग दूर-दराज से अपना काम छोड़ कर पानी लाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। तब कहीं जाकर खाना बन पा रहा है। समाज सेवक विकास वर्जीनिया ने कई बार शिकायत की। कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों को सूचना दी कि सलावद में पानी की बहुत बड़ी समस्या चल रही है। लेकिन ना तो कोई अधिकारी सुन रहा है और ना ही कोई इस समस्या का समाधान करने को तैयार है। कस्बे में जो पांच हैंडपंप लगे हुए हैं, वह भी खराब हैं। इनकी भी सूचना अधिकारी को मई महीने में ही दे दी गई थी। लेकिन अभी तक हैंडपंप ठीक नहीं किए गए। </p>
<p>दिनभर मजदूरी करके आते हैं और शाम को दूर-दराज से घंटों की मशक्कत के बाद पानी भरकर लाते हैं। तब खाना बनता है।<br /><strong>- बलवान गुर्जर</strong></p>
<p>अधिकारियों को कई बार पानी की समस्याओं से अवगत करवा दिया है। किंतु पानी की जगह हमेशा हमें आश्वासन ही मिला है।<br /><strong>- परमानंद गुर्जर</strong></p>
<p>मेरा पूरा जीवन सलावद खुर्द ग्राम पंचायत में गुजरा है। लेकिन आज भी भीषण गर्मी के सीजन में पानी की विकराल समस्या बनी हुई है।<br /><strong>- किशोर कुमार</strong></p>
<p>गांव वाले पानी की समस्याओं से काफी परेशान हैं। कई बार आला अधिकारियों को मौखिक व लिखित सूचना दी गई। लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अधिकारी मौके पर नहीं आते। साथ ही पांच हैंडपंप की शिकायत मई माह से ही गई है। लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। <br /><strong>- विकास वर्जीनिया, समाजसेवी, सलावद खुर्द </strong></p>
<p>समस्याओं के चलते बिजली बंद थी। इसलिए पानी की सप्लाई बंद थी। समस्याओं का निवारण दो दिन में कर दिया जाएगा। पांचों हैंडपंपों को जल्द ही सही करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- बलभद्र, एईएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 18:00:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी से राहत के लिए बनाए आश्रय स्थलों में नहीं आ रहे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ में सोने के लिए संसाधन नहीं तो कई जगह बिना पानी के चल रहे कूलर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-are-not-coming-to-the-shelters-made-for-relief-from-heat/article-80611"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/grmi-s-rahat-k-liye-bnaye-ashraye-sthalo-me-nhi-aarhee-log...kota-news-06-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पिछले महीने कोटा में भीषण गर्मी में तापघात के शहर में भीषण गर्मी को देखते हुए दोनों निगम की ओर से कोटा के कई स्थानों पर राहगीरों और बेघर लोगों के लिए ग्रीष्मकालीन आश्रय स्थल शुरू किए गए थे। जहां लोगों के लिए पीने के पानी सोने के लिए बिस्तर और ठंडी हवा के लिए कूलरों की व्यवस्था की गई थी। लेकिन कोटा के आधे आश्रय स्थल खाली पड़े हैं। जहां इक्का दुक्का लोगों के अलावा कोई नहीं आ रहा। वहीं कुछ आश्रय स्थलों में अन्नपूर्णा रसोई चलाई जा रही है। वहीं कुछ स्थलों पर सुविधाएं पूरी नहीं हैं।</p>
<p><strong>दिनभर रहते खाली, रात में आ रहे हैं लोग</strong><br />कोटा में आश्रय स्थलों को मुख्यत दिन के दौरान पड़ने वाली गर्मी के लिए बनाए गए थे। ताकि दिन में पड़ने वाली भीषण गर्मी से लोगों को बचाव मिल सके। लेकिन आश्रय स्थलों में दिन के समय में सबसे कम लोग आ रहे हैं। जबकि कोटा का पारा वर्तमान में रोज 40 से पार जा रहा है। ऐसे में आमजन के लिए की गई सुविधा का उपयोग आमजन ही नहीं कर रहे हैं। हालांकि रात के समय जरूर थोड़े बहुत लोग आते हैं। लेकिन वो भी सोने के लिए ही आश्रय स्थलों का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p><strong>बिना पानी के चल रहे थे कूलर</strong><br />आश्रय स्थलों में लोगों को गर्मी राहत देने के लिए कूलर की व्यवस्था की गई थी। लेकिन अधिकतर कूलर बिना पानी के चलते हुए मिले जो गर्म हवा दे रहे थे। वहीं कुछ आश्रय स्थलों में क्षमता से कम या एक ही कूलर मिला जो बड़े बड़े आश्रय स्थलों के लिए न के बराबर है। इसके अलावा इन आश्रय स्थलों में लोगों को सोने के लिए कोई पर्याप्त संसाधन नहीं थे। लोगों को नीचे ही जमीन पर सोना पड़ रहा है। लगभग सभी आश्रय स्थलों में सोने के लिए केवल कारपेट बिछाया हुआ है, जो गंदा होने के साथ चुबने वाला भी प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />आश्रय स्थल कहां पर है इसके बारे में जानकारी ही नहीं है, जाएं कैसे। आश्रय स्थल बनाए हैं तो लोगों को उसके बारे में बताना चाहिए। ताकि जिसे जरुरत है वो उसका फायदा ले सके। <br /><strong>- श्ांभू कुमार </strong></p>
<p>नए बस स्टैंड स्थित आश्रय स्थल में दिन के समय गिने चुने लोग आते हैं, 15 से 20 जनों की क्षमता वाले आश्रय स्थल में मात्र एक कूलर है जिससे बिल्कुल ठंडाई नहीं होती है। यहां कम से कम दो कूलर होने चाहिए। <br /><strong>- रामप्रसाद</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong></p>
<p>आश्रय स्थलों को लोगों को गर्मी से हालत देने के लिए बनाए गए थे। उनमें सुविधाओं की कमी होगी तो समीक्षा करके उन्हें पूरा करेंगे। लोगों को आश्रय स्थलों के बारे में भी जानकारी देंगे।<br /><strong>- सरिता, आयुक्त, नगर निगम दक्षिण</strong></p>
<p>आश्रय स्थल में सुविधाओं का जायजा लेंगे, साथ ही लोग आश्रय स्थल तक आए इसका प्रयास करेंगे। पीने का पानी और कूलर की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। <br /><strong>- अनुराग भार्गव, नगर निगम उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jun 2024 16:29:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नदी किनारे प्यासा गांव: भीषण गर्मी में पेयजल को तरस रहे ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों की अकर्मण्यता से पार्वती नदी के किनारे बसे गांवों को नहीं मिल रहा पेयजल। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thirsty-village-on-the-banks-of-the-river--villagers-yearning-for-drinking-water-in-the-scorching-heat/article-80339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer3.png" alt=""></a><br /><p>खातौली। खातौली ग्राम पंचायत के मदनपुरा गांव के ग्रामीणों को इन दिनों पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल अधिकारियों की अकर्मण्यता के कारण हालत यह है कि महिलाएं देर रात तक गांव में स्थित एकमात्र हैंडपंप पर पानी भरने के लिए जुटी रहती हैं। जबकि यह गांव पार्वती नदी के किनारे बसा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जलदाय विभाग की पेयजल आपूर्ति लाइन से कनेक्शन लगे हुए हैं। गांव में ही पीएचईडी की दो बोरवेल भी हैं, जिनसे मदनपुरा के साथ ही खातौली में भी पेयजल की आपूर्ति की जाती है। लेकिन गांव के कई घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने कई बार जलदाय विभाग को इस समस्या से अवगत करवाया। लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। </p>
<p><strong>पार्वती नदी में हर साल आती है बाढ़</strong><br />गौरतलब है कि क्षेत्र की पार्वती नदी में हर साल बारिश के दिनों में बाढ़ आती है। पुलिया पर 8 से 10 इंच की चादर चलने से कई दिनों तक मध्यप्रदेश के श्योपुर से संपर्क कटा रहता है। लेकिन यह विडम्बना ही है कि अपार पानी होते हुए भी जलदाय विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और अकर्मण्यता के कारण इस नदी के किनारे बसे हुए लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। जिम्मेदारों की निष्क्रियता का ही नतीजा है कि लाखों गैलन पानी का उचित प्रबंधन के अभाव में बेकार बह जाता है।</p>
<p><strong>क्षेत्र से सटी हुई है कालीसिंध नदी भी </strong><br />जानकारी के अनुसार पानी के मामले में यह क्षेत्र बहुत ही भाग्यशाली है। क्षेत्र में पानी की प्रचुरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कालीसिंध यहां से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर बहती है। इतना ही नहीं कालीसिंध से कुछ ही किलोमीटर पर चंबल जैसी बारहों महीने बहने वाली नदी मौजूद है। लेकिन यह इस क्षेत्र का दुर्भाग्य ही है कि यहां के लोग पेयजल तक के लिए बरसों से परेशान हैं। </p>
<p><strong>पानी नहीं भरने से टंकी हो रही नकारा</strong><br />ग्रामीण नंदलाल केवट व बनवारी केवट ने बताया कि 2015-16 में मोहल्ले में पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। किंतु इसमें पेयजल कनेक्शन नहीं होने के कारण 9 वर्षों से यह बेकार पड़ी हुई है। जलदाय विभाग अगर चाहे तो टंकी से कनेक्शन करके पेयजल की समस्या का समाधान कर सकता है। किंतु विभागीय लापरवाही के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में नरेगा के बाद पानी भरने की जिम्मेदारीगांव की चंद्रकला व भरोसी बाई ने बताया कि इन दिनों सुबह जल्दी नरेगा में मजदूरी के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में सुबह पानी नहीं भर पाते। घर में नल कनेक्शन है। किंतु उसमें गत तीन माह से पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में शाम को मोहल्ले की सारी औरतें पेयजल के लिए जुटती हैं। सीमा बाई ने बताया कि पुरानी पेयजल लाइनों में पानी नहीं आने के कारण नई पेयजल लाइन से कनेक्शन लिया था। किंतु उसमें भी अब पानी नहीं आ रहा। जबकि यहां से खातौली में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />नहीं आ रहा। जिससे समय पर खाना भी नहीं बना पाते।  <br /><strong>- चंद्रकला, गृहिणी, मदनपुरा</strong></p>
<p>गांव में पानी की गंभीर समस्या है। तीन महीने से नलों में पानी नहीं आ रहा। हमें नरेगा में भी मजदूरी करने के लिए सुबह जल्दी निकलना पड़ता है। जिससे काफी परेशान हैं। <br /><strong>- सीमा बाई, गृहिणी, मदनपुरा</strong></p>
<p>क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। इस कारण महिलाओं व पुरुषों को जल्दी नरेगा की साइट पर मजदूरी के लिए जाना पड़ता है। वहां से लौटने के बाद गांव के एकमात्र हैंडपंप से पानी भर कर लाना पड़ता है। इस कारण देर रात तक पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।<br /><strong>- बनवारी केवट, ग्रामीण, मदनपुरा</strong></p>
<p>मेरा मकान थोड़ा ऊंचाई पर है। अगर लाइन डल जाए तो पानी आ सकता है।<br /><strong>- शंभुलाल केवट, ग्रामीण, मदनपुरा</strong></p>
<p>नल में पानी कई दिनों से नहीं आ रहा है। यहां पानी की टंकी शो पीस बनी हुई है। इसका लाभ ग्रामीणों को अभी तक नहीं मिला है। या तो यह चालू हो जाए या लाइन डल जाए या फिर हैंडपंप में मोटर डल जाए। तभी पानी की समस्या का समाधान हो सकता है। हम दिन में मजदूरी करने जाते हैं। शाम को हरे थके आते हैं। मजबूरन यह हैंडपंप का पानी पीना पड़ता है।<br /><strong>- मुरारीलाल केवट, ग्रामीण, मदनपुरा </strong></p>
<p>वर्ष 2015-16 में हमारे मोहल्ले में जलदाय विभाग ने पेयजल के लिए पानी की टंकी का निर्माण करवाया था। लेकिन आज तक यह टंकी कनेक्शनों का इंतजार कर रही है। 9 वर्षों से इस टंकी का कोई उपयोग नहीं होने से यह नाकारा हो चुकी है। पास में हैंडपंप है। लेकिन उसका पानी पीने लाइक नहीं है। अगर सरकार की तरफ से इसमें मोटर डाली जाए तो इसका पानी साफ और मीठा आ सकता है या पास में टंकी बनी हुई है, उसको चालू किया जाए।<br /><strong>- नंदलाल केवट, ग्रामीण, मदनपुरा</strong></p>
<p> मदनपुरा गांव में पेयजल समस्या की कोई शिकायत अभी तक सामने नहीं आई है। यदि लोगों को परेशानी है तो जानकारी कर समस्या का समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- रवि यादव, कनिष्ठ अभियंता, जलदाय विभाग, खातौली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 17:42:35 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी और देखरेख के अभाव में सूखने लगे डिवाइडर के बीच लगे पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[नेशनल हाईवे 27 पर लगाए गए पेड़ पौधे पनप नहीं रहे हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-plants-planted-between-the-dividers-are-drying-up-due-to-the-scorching-heat-and-lack-of-care/article-80341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer-(5).png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। आदिवासी अंचल क्षेत्र में गर्मी का कहर बुरी तरह बरपा हुआ है। इसकी एक बानगी कोटा शिवपुरी नेशनल हाईवे 27 पर भी देखने को मिल रही है। जब कोटा शिवपुरी नेशनल हाईवे 27 का निर्माण कार्य हुआ था तो हजारों पेड़ पौधे काटे गए थे। इसके बदले में नेशनल हाईवे 27 के डिवाइडर और साइड में पेड़ पौधे लगाए गए थे लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही और मनमानी के चलते अब पेड़ पौधे सूखने लगे हैं। इसको लेकर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है तथा पेड़ पौधों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे ही बनी हुई है। राहुल शिवहर,े हेमंत भार्गव, एडवोकेट डेबिट भार्गव, मनोज कुमार रामदयाल मेहता, अनिल पुरी, रवि सोनी, सोनू राठौर, दिलीप कुमार आदि ने बताया कि पहले इस सड़क मार्ग पर बड़े-बड़े पेड़ पौधे हुआ करते थे जो राह चलते लोगों के लिए आरामदायक छाया देते थे लेकिन हाईवे निर्माण के दौरान काटे गए पेड़ों की भरपाई के बदले यह पौधे हाईवे पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा लगवाए गए थे लेकिन इन पौधों की सुरक्षा और सार संभाल को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।</p>
<p><strong>बिगड़ता जा रहा पर्यावरण संतुलन</strong><br />नेशनल हाईवे 27 पर लगाए गए पेड़ पौधे पनप नहीं रहे हैं। इसके चलते पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है। इसको लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए और लापरवाह संवेदकों को के खिलाफ उचित कार्रवाई करना चाहिए ताकि नेशनल हाईवे 27 पर पेड़ पौधे और हरियाली दिखने लगे। जिस राह चलते लोगों को गर्मी के दिनों में राहत महसूस हो।</p>
<p><strong>गर्मी से झुलसे और सूख चके है पौधे</strong><br /> इसके चलते पौधे झुलस चुके हैं और कई पौधे पूर्ण तरीके से सूख कर नष्ट भी हो चुके हैं। उल्लेखनीय बात तो यह है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी पेड़ पौधों की सुरक्षा और देखरेख व पौधों में पानी पिलाने को लेकर लाखों करोड़ों रुपए की टेंडर प्रक्रिया होती है लेकिन टेंडर प्रक्रिया के टेंडर होने के बाद ठेकेदार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी कंपनी के अधिकारी इन पौधों की देखरेख और पानी पिलाने की महज खानापूर्ति कर रहे है और फर्जी बिल वाउचर ठेकेदार द्वारा लगाकर नेशनल हाईवे 27 पर लगे पेड़ पौधों की सुरक्षा पर पानी पिलाने और देखे कह के नाम पर फर्जी बिल लगाकर भुगतान उठा लिया जाता है। </p>
<p><strong>पेड़-पौधों की सुरक्षा भगवान भरोसे</strong><br />भीषण गर्मी में आम जनजीवन घरों से बाहर नहीं निकल रहा है और गर्मी की तेज हवाओं को सहन नहीं कर पा रहा है तो यह छोटे-छोटे पौधे कैसे सहन कर पाएंगे। इन पेड़ पौधों के लिए जीवित रहने के लिए इनमें खाद पानी निदाई गुड़ाई और सुरक्षा के बंदोबस्त नेशनल हाईवे अथॉरिटी के ठेकेदार को करना चाहिए लेकिन ठेकेदार पेड़ पौधों की सुरक्षा को लेकर लापरवाह बना हुआ है नेशनल हाईवे 27 पर लगे पौधों की सुरक्षा भगवान भरोसे है तथा पेड़ पौधों की सुरक्षा वह देखरेख के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए का बजट ठेकेदार उठा रहे है। इसको लेकर जिम्मेदार विभाग या अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और पेड़ पौधे नेशनल हाईवे 27 पर सूखकर नष्ट होते जा रहे हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल में नहीं हो रहा है और हालात भीषण गर्मी में भयावह होते जा रहे हैं। </p>
<p>नेशनल हाईवे 27 पर पानी के अभाव में पेड़ पौधे सूखते जा रहे हैं। इनको लेकर एएनएचआई विभाग की जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- राहुल शर्मा, दुकानदार।</strong></p>
<p>कोटा शिवपुरी नेशनल हाईवे 27 पर पानी के अभाव में और गर्मी के चलते पेड़ पौधे सूख रहे हैं। संवेदक द्वारा पेड़ पौधों में पानी डालने का काम ठीक तरीके से नहीं किया जा रहा है। हाईवे अधिकारी इस और ध्यान दें।<br /><strong>- कल्याण सिंह कोली,  ग्रामीण</strong></p>
<p>नेशनल हाईवे 27 पर लगाए गए पौधे देखरेख के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। नेशनल हाईवे अधिकारी कार्यकारी एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को मामले को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए ताकि नेशनल हाईवे 27 पर हरियाली बनी रहे।<br /><strong>- कल्लाराम प्रजापति, ग्रामीण</strong><br /> <br />नेशनल हाईवे 27 डिवाइडर के बीच लगाए गए पेड़ पौधे पानी के अभाव में गर्मी से झुलस रहे है। इसके चलते पेड़ पौधे नष्ट हो रहे हैं और वृद्धि भी नहीं कर पा रहे हैं।<br /><strong>- अंकित भार्गव, दुकानदार</strong></p>
<p>नेशनल हाईवे 27 कोटा शिवपुरी मार्ग पर डिवाइडर और सड़क मार्ग के दोनों लगाए गए पौधों में पानी डलवाने को संवेदक को बोला जाएगा पौधों को पानी पिलाने का काम चल रहा है। तेज गर्मी और गर्म हवाओं से छोटे-छोटे पेड़-पौधे झूलस भी रहे हैं।<br /><strong>- उमाकांत मीणा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई 27 </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 16:47:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भीषण गर्मी: तापघात पशुओं पर कर रहा अटैक</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में हर दिन 15 से 20 पशु बुखार और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scorching-heat--heatstroke-is-attacking-animals/article-80338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नौतपा के चलते तापमान में वृद्धि के कारण लगातार पड़ रही भीषण गर्मी ने जहां मानव जीवन को प्रभावित कर रखा है वहीं गर्मी मवेशियों के लिए भी उतनी ही घातक साबित हो रही है। कोटा जिले में लगातार भीषण गर्मी का दौर जारी है। भीषण गर्मी एवं पानी की कमी के कारण आवरा पशु ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वहीं पालतू पशुओं में बुखार एवं डायरिया बीमारी का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया है। जिले में हर दिन 15 से 20 पशु बुखार और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। इनका पशु चिकित्सकों टीमों द्वारा उपचार किया जा रहा है। </p>
<p><strong>रोजाना डेढ़ दर्जन पशुओं का उपचार</strong><br />गर्मी, लू एवं तापमान के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। पशु चिकित्सकों की माने तो तपन और लू के थपेड़े पशुओं की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। इस नौतपा के चलते तापमान में वृद्धि हो रही है, जो अब सीधे रूप से दुधारू पशुओं पर भी देखने को मिल रहा है। तेज गर्मी से दूध उत्पादन में कमी दिख रही है। पशु चिकित्सकों ने बताया कि लू तापघात की चपेट में आने वाले पशु चारा खाना छोड़ देता है। मुंह से पानी गिरने लगता है और तेज बुखार चढ़ जाती है। वर्तमान में रोजाना डेढ़ दर्जन पशुओं का उपचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>दिन में पानी का कर रहे छिड़काव</strong><br />शंकरपुरा निवासी पशुपालक रोहिताश मीणा व राधेश्याम ने बताया कि पशुओं को गर्मी से बचाव को लेकर दिन में 4 बार पानी का छिड़काव कर रहे है। कई जगह पशुपालक बाड़े में पंखे चलाकर भी पशुओं को गर्मी से बचाव करने में जुटे है। गर्मी के कारण बुखार और डायरिया की चपेट में सबसे ज्यादा गायें आ रही है। पिछले दिनों उनकी चार गायें डायरिया की चपेट में आ गई थी। इस पर कैथून स्थित पशु अस्पताल में सूचना दी गई। पशु चिकित्सकों ने मौके पर आकर बीमार गायों का उपचार किया। गांव में अन्य पशु भी गर्मी से बेहाल हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पशुओं में दूध उत्पादन  हुआ कम</strong><br />गर्मी के कारण पशुओं खासकर गाय और भैंसों की दूध उत्पादन की क्षमता भी घटने लगी है। कोटा जिले में छह लाख से ज्यादा पशु हैं, इनमें से लगभग दो लाख से अधिक दुधारू पशु है। पशुपालकों के अनुसार पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ना शुरू हो गया है। आलम यह है कि गर्मी के कारण पशुओं में दूध की मात्रा 30 प्रतिशत तक कम हो गई है।  गर्मियों में पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर होता है। दुग्ध का उत्पादन भी कम हो जाता है। </p>
<p><strong>गर्मियों में इन बातों  का रखें ध्यान</strong><br />पशुओं को दिन के समय सीधी धूप से बचाएं<br />पशुओं को बांधने के लिए छायादार व हवादार स्थान का चयन करें<br />पशुओं के पास पीने का पानी और चारा हमेशा रखें<br />डेयरी शेड में दिन के समय कूलर-पंखे आदि का इस्तेताल करें<br />अधिक गर्मी की स्थिति में पशुओं के शरीर पर पानी का छिड़काव करें<br />पशुओं में असमान्य लक्षण नजर आने पर पशु चिकित्सक से सम्पर्क करें</p>
<p>भीषण गर्मी की स्थिति में पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंधन एवं उपाय की आवश्यकता है। गर्मी से बचाव के लिए पशुओं को हरा चारा खिलाना जरूरी है। ठंडी जगह पर बांधने से पशुओं को राहत मिलती है। संभव हो तो पंखे-कूलर की व्यवस्था करनी चाहिए। दिन में पशु को तीन बार पानी पिलाना चाहिए। साथ ही सुबह 10 बजे से पहले नहलाना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. गिरिश साळफले, उपनिदेशक पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 16:29:59 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में पानी पिलाने की हौड़, कुछ इलाके प्यासे</title>
                                    <description><![CDATA[इस भीषण गर्मी में राहत देने के लिए अगर एक प्याऊ की व्यवस्था कुछ स्थानों पर भी हो जाए तो मार्ग से गुजरने वाले लोगों को राहत मिलेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-a-race-to-provide-water-in-the-city--some-areas-are-thirsty/article-80112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/shehr-ki-sundarta-pr-grahan-lga-rhe-nashedi-va-chor...kota-news-01-06-20241.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। वर्तमान में भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान भी 45 डिग्री से नीचे नहीं जा रहा है। पिछले दिनों तो 47 डिग्री भी पार हो गया था। थोड़ा सा चलने में ही लोगों के पसीने छूट रहे हैं। भीषण गर्मी के कारण सनस्ट्रोक होने की भी संभावना बढ़ जाती है। थोड़ी-थोड़ी देर में ही पीने के लिए पानी की जरूरत महसूस होती रहती है। ऐसे में अगर समय पर पानी नहीं मिले तो व्यक्ति की स्थिति बिगड़ सकती है। इतना ही नहीं लू व तापघात का शिकार हो जाता है। पानी की कमी के कारण उल्टी, दस्त और अन्य बीमारियां जकड़ लेती है। इन सबसे बचाने के लिए शहरभर में जगह-जगह पीने के पानी की प्याऊ, वाटरकूलर, कैंपर आदि की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं सरकार ने भी अधिकारियों को भीषण गर्मी में लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगाने के आदेश दे रखे हैं। इसके बावजूद ५ऋशहर में कई इलाके ऐसे हैं जहां पांच से छह किलोमीटर तक पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां चार-पांच किलोमीटर तक एक मटकी तक नहीं रखी हुई है, जिससे वाहन चालक अपना गला तर लें। इस भीषण गर्मी में राहत देने के लिए अगर एक प्याऊ की व्यवस्था इन स्थानों पर भी हो जाए तो यहां से गुजरने वाले लोगों को राहत मिलेगी। ऐसा नहीं है कि यह कोई व्यवस्ततम मार्ग नहीं है या यहां आसपास अस्पताल नहीं है। यहां से थोड़ी ही दूरी पर संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है और वहां आने वाले मरीजों व परिजनों को इसी मार्ग से गुजरना होता है। दूसरी ओर हाइवे जाने के लिए भी इन्हीं मार्गों का उपयोग किया जाता है।</p>
<p><strong>वाहन चालक साथ रखें पानी की व्यवस्था</strong><br />इस भीषण गर्मी में इस मार्ग पर ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां से नियमित रूप से गुजरने वाले वाहन चालक तो अपने साथ पानी की व्यवस्था रखते हैं। अर्थात वे अपने साथ घर से ही ठंडे पानी की बोतल भरकर लाते हैं और रास्ते में प्यास लगने पर रुककर पी लेते हैं। वहीं दूरदराज से आने वाले बड़े वाहनों में तो वैसे ही पानी साथ लेकर चलने की लोगों में आदत सी है। </p>
<p><strong>रावतभाटा रोड पर भी नहीं है शीतल पेय की व्यवस्था</strong><br />शहर ही नहीं चंबल गार्डन से रावतभाटा रोड की तरफ जाने वाले मार्ग पर भी राहगीरों के लिए शीतल पेयजल की व्यवस्था इस भीषण गर्मी में नहीं है। ऐसा नहीं है कि यहां से सिर्फ दूरदराज जाने वाले लोगों का आवागमन होता है। इस क्षेत्र में बसी कॉलोनियों में रहने वाले लोग भी सुबह-शाम यहां से आॅफिस जाने के लिए गुजरते हैं। ऐसे में इस मार्ग पर भी एक भी प्याऊ नहीं है। इस भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए उन्हें स्वयं ही व्यवस्था करके चलना पड़ता है। क्रमश: ऐसा ही हाल बोराखेड़ा क्षेत्र में भी है। यहां पर भी पुलिया से लेकर थाने तक एक भी पानी की प्याऊ नहीं है। </p>
<p><strong>खेड़ली फाटक से जेडीबी तक नहीं है एक भी प्याऊ</strong><br />स्टेशन क्षेत्र से शहर की तरफ जाने वाला यह प्रमुख मार्ग है। यहां से सुबह से लेकर शाम तक इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों का आना-जाना लगा रहता है। यहीं से शहर के अन्य स्थानों पर जाने के लिए भी प्रमुख मार्ग निकलते हैं। ऐसे में यहां पर दिनभर बड़ी संख्या में वाहनों की भी आवाजाही रहती है। हर समय चलने वाले इस पांच से छह किलोमीटर लंबे मार्ग पर एक भी प्याऊ नहीं है। यहां तक कि किसी ने एक मटकी तक नहीं रखी है, जिससे की भीषण गर्मी में प्यास लगने पर वाहन चालक रुककर अपनी प्यास बुझा सके। वाटरकूलर और कैंपर व्यवस्था तो दूर की बात है। ऐसा नहीं है कि यहां पर लोगों का जमावड़ा नहीं रहता है। आसपास के गांवों से रेल की यात्रा कर एमबीएस अस्पताल, अदालत में जाने वाले लोग भी अधिकांशतया इसी मार्ग से गुजरते हैं। इस भीषण गर्मी में उनके लिए यहां एक मटकी पानी तक की व्यवस्था नहीं है।</p>
<p><strong>अपने साथ लेकर चलता हूं बोतल</strong><br />मैं भदाना क्षेत्र में रहता हूं। रोजाना इसी मार्ग से अपने आॅफिस जाता हूं। जो घर से करीब 15 किलोमीटर पड़ता है। भीषण गर्मी पड़ रही है, थोड़ी-थोड़ी देर में प्यास लगती है। रूक-रूक कर बैग से बोतल निकाल कर पानी पीता रहता हूं। जो आॅफिस तक चल जाती है, हालांकि गर्म भी हो जाता है। मगर क्या करें।                 <br /><strong> - राहुल </strong></p>
<p><strong>होनी तो चाहिए, मगर क्या करें</strong><br />मेरा घर स्टेशन क्षेत्र में ही है। नियमित इसी मार्ग से गुजरता हूं। कई बार बहुत तेज प्यास लगती है, मगर रोकनी पड़ती है। पेट्रोल पंप पर जाकर ही पानी मिलता है। एक भी प्याऊ नहीं है। वैसे होनी तो चाहिए। मगर क्या कर सकते हैं। <br /><strong>- माधव</strong></p>
<p><strong>जल्द ही कराएंगे व्यवस्था</strong><br />वैसे हमारा फोकस शहर में ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही था। जहां पर लोगों का ठहराव ज्यादा होता है। अभी तक वहीं पर प्याऊ लगा रहे हैं। इन मार्गों पर भी जल्द ही प्याऊ की व्यवस्था कराएंगे।<br /><strong>- कृष्णा शुक्ला, एडीएम, सीलिंग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jun 2024 16:33:03 +0530</pubDate>
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                <title>नलों से नहीं पहुंच रहा पानी लेकिन समय पर पहुंच रहा बिल  </title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी के चलते ग्रामीण हो रहे परेशान । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-is-not-reaching-through-taps-but-bill-is-reaching-on-time/article-79916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(4)41.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। समीपवर्ती क्षेत्र के खांडा सहरोल ग्राम पंचायत के मामोनी गांव में करोड़ों रुपए की लागत से 2 वर्ष पहले बनाई गई जनता जल योजना की हवाई पानी की टंकी कुछ दिनों तक उपभोक्ताओं के घरों में नलों से पानी पहुंचा रही थी। उसके बाद 5 महीने से नलों में पानी नहीं आ रहा है। नल शोपीस मात्र बनकर रह गए हैं लेकिन उल्लेखनीय बात तो यह है कि 5 महीने से मामोनी गांव के ग्रामीणों के घरों में नलों से पानी नहीं पहुंच रहा है और नल सप्लाई का बिल नियमित तरीके से हर महीने समय पर पहुंच रहा है। ऐसे में ग्रामीण अचंभित हैं। इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया है। जगदीश, सोम, मुकेश, हरीश, घनश्याम, नाथूलाल, प्रेमचंद सांवरिया आदि ने बताया कि भीषण गर्मी में पानी के लिए मारामारी बनी हुई है। गांव में एक ही ट्यूबवेल संचालित है। जिस पर पानी पानी भरने वालों की सुबह-शाम देर रात्रि तक भीड़ लगी रहती है। कई बार तो पानी भरने को लेकर लड़ाई झगड़े की नौबत तक आ जाती है इसी बीच अगर बिजली गुल हो जाती है तो घण्टो तक रात के अंधेरे में पानी के इंतजार में काली रात करनी पड़ती है। </p>
<p><strong>जनता जल योजना की ट्यूबवेल खराब</strong><br />इस संबंध में सरपंच धनराज मेहता ने बताया कि जनता जल योजना की ट्यूबवेल खराब है। बजट के अभाव में बिल जमा नहीं होने से डीपी उठाकर बिजली विभाग के कर्मचारी ले गए थे। अभी डीपी मंगवा जाएगी इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारियों से वार्ता की गई है। गांव में पानी की समस्या बनी हुई है। इस संबंध में भी विभाग की अधिकारियों को अवगत करा दिया है। ग्राम विकास अधिकारी रोशन सिंह ने बताया कि ट्रांसफार्मर नहीं है। बिजली विभाग के कर्मचारियों से बात की गई है। ट्रांसफार्मर आते ही कनेक्शन जोड़कर नल सप्लाई शुरू करवा दी जाएगी।</p>
<p><strong>ग्रामीण इधर-उधर से कर रहे पानी का जुगाड़</strong><br />एक और तो सरकार एवं जिला प्रशासन सहरिया क्षेत्र में बिजली पानी की समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों को अलर्ट मोड पर काम करने की हिदायत देने में लगे हुए हैं लेकिन मामोनी गांव में विभागीय कर्मचारी और अधिकारियों की लापरवाही व मनमानी के चलते भीषण गर्मी में पानी की समस्या से ग्रामीण जूझ रहे हैं। लोग आवश्यकता के अनुरूप इधर-उधर से पानी का जुगाड़ कर रहे हैं तथा गांव में एक ही ट्यूबवेल चालू है जो लाइट आने पर ही संचालित होती है। उस पर भी पानी भरने वाले लोगों की भीड़ लगी रहती है। </p>
<p><strong>पानी भरने को लेकर होते है लड़ाई झगड़े</strong><br />वहीं पानी भरने को लेकर कई बार लड़ाई झगड़ा भी उत्पन्न हो जाते है। पानी की समस्या गांव में करीब 5 महीने से बनी हुई है इसको लेकर कई बार जनप्रतिनिधि और अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया है लेकिन मामले को लेकर कोई भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इसके चलते ग्रामीणों में रोष बना हुआ है। लोगों के घरों में लगे नलों में पानी नहीं आ रहा है लेकिन हर महीने पानी का बिल लोगों के घरों में पहुंच रहा है। इसको लेकर ग्रामीण परेशान है और यह कौतूहल का विषय भी बना हुआ है। लोगों ने जिला प्रशासन से पानी की सुविधा मुहैया कराने की मांग की है ताकि लोगों को गर्मी के मौसम में इधर-उधर भटकना नहीं पड़े।</p>
<p><strong>नलों में पानी आए बिना ही पहुंच रहे बिल</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि नलों में पानी तो आ नहीं रहा फिर बिल कैसे आ रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों ने कई बार जिम्मेदार कर्मचारियों अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन मामले को लेकर कोई भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है। पानी के लिए भीषण गर्मी में त्राही त्राही मची हुई है। मामोनी गांव में करीब 1500 लोग निवास करते हैं तथा एक ही से 1500 लोगों की प्यास बुझा पाना मुश्किल साबित हो रहा है और पानी टंकी का निर्माण दो वर्ष पहले हुआ था इसे हर घर में नल कनेक्शन दिया गया था लेकिन करीब डेढ़ साल तक नियमित नल से पानी लोगों के घरों में पहुंचा उसके बाद नलों में अभी तक करीब 5 महीने से पानी नहीं पहुंचा है नल शोपीस मात्र बनकर सूखे पड़े हुए हैं। </p>
<p> गांव में पानी की समस्या विगत पांच महीने से बनी हुई है। भीषण गर्मी में पानी के लिए मारामारी मची हुई है। पानी की समस्या को लेकर हर घर में परेशानी हो रही है। जिम्मेदार मामले को लेकर गंभीर नहीं है।<br /><strong>- राजेंद्र प्रसाद सेन, ग्रामीण।    </strong></p>
<p>मामूनी गांव में 2 वर्ष पहले पानी टंकी का निर्माण हुआ था कुछ महीने नलों में पानी आया था लेकिन अब नल शो पीस मात्रा बने हुए हैं। दूरदराज क्षेत्र से लोग बाग पानी ला रहे हैं। पानी की समस्या से लोग परेशान हैं।<br /><strong>- फूलचंद, ग्रामीण।</strong></p>
<p>5 महीने से नलों में पानी नहीं आ रहा है लेकिन जनता जल योजना के कर्मचारी हर महीने नल उपभोक्ताओं तक पानी के बिल पहुंचा रहे हैं। इसके चलते लोगों में रोष बना हुआ है।<br /><strong>- पवन ओझा, ग्रामीण।     </strong>   </p>
<p>पानी की समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों को अवगत करा रखा है। ट्यूबवेल खराब है। बिल जमा नहीं होने के कारण ट्रांसफार्मर उतार ले गए हैं। ट्रांसफार्मर लाने को अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।<br /><strong>- धनराज मेहता, सरपंच खांडा सहरोल।</strong></p>
<p>जनता जल योजना से गांव में पानी की सप्लाई होती थी लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं होने के कारण पानी की समस्या बनी हुई है। डीपी मंगवा ली हैं। जल जीवन मिशन के तहत जल्दी पानी सप्लाई शुरू करवा दी जाएगी।<br /><strong>- रोशन सिंह, सहायक ग्राम विकास अधिकारी, खांडा सहरोल।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 May 2024 17:15:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिजली कटौती से ‘रतजगे’ को मजबूर है जनता</title>
                                    <description><![CDATA[नमाना कस्बे और आसपास के 10 गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/people-are-forced-to-stay-awake-all-night-due-to-power-cuts/article-79031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(13).png" alt=""></a><br /><p>नमाना। नमाना कस्बे और उसके आसपास के 10 गांवों के लोग अघोषित बिजली की कटौती से परेशान है। बिजली की आंख मिचौली विगत 10 दिनों से अनवरत चल रही है जिससे कस्बे सहित आसपास के 10 हजार लोग प्रभावित हो रहे है। बिजली निगम द्वारा से अधिकांश तौर पर रात के समय भी ही बिजली कटौती की जा रही है जिससे बड़ों की ही नहीं छोटे बच्चों की भी नींद हराम हो गई है। भीषण गर्मी के बीच बिना लाइट के ग्रामीणों को दिनभर के कामकाज के बाद नींद निकालना तक मुश्किल हो गया है। रात को खुले में सोने में भी जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है। रात में ही नहीं दिन में भी बिजली कटौती से व्यवसाय तक चौपट हो रहे है। नमाना कस्बे में विगत 10 दिनों से भारी बिजली कटौती हो रही है। भीषण गर्मी  में जहां अधिकतम तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्यियस तक चल रहा है। जिससे नौतपा से पहले ही धरा तप रही है। अघोषित बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों को परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है। भारी गर्मी पड़ने की वजह से  बुजुर्ग, बच्चे हर वर्ग परेशान हो रहे हैं। रात्रि के समय लोगों को रतजगा करना पड़ता है। भयंकर गर्मी पड़ने की वजह से बीमार होने का डर बना रहता है। रात्रि  समय में भी खाना खाते वक्त लाइट काट दी जाती हैं।  ग्रामीणों ने बताया कि अगर इसी तरह लाइट कटौती होती रहेगी तो ग्रेड स्टेशन पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
<p>रात के समय में लाइट की कटौती होने की वजह से गर्मी से हालत खराब हो जाती है। नींद नहीं निकाल पाते है और छोटे बच्चे, वृद्ध सहित हर वर्ग के लोग परेशान हैं। गर्मी से बीमारियों से ग्रसित होने का डर बना रहता है। <br /><strong>- मुकेश राठौर, नमाना निवासी</strong></p>
<p>बिजली की कटौती की वजह से कस्बे वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी पड़ने की वजह से और समय पर बिजली न मिलने से ग्रामीणों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। लोग बीमार हो रहे हैं। बीमार व्यक्तियों की हालत बहुत गंभीर बनी हुई है। अगर बिजली की व्यवस्था को नहीं सुधरा  गया तो  आगे इन अधिकारियों की शिकायत की जाएगी। ग्रेड स्टेशन पर धरना प्रदर्शन भी किया जा सकता है। <br /><strong>- लोकेश राठोर नमाना निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लोड शिफ्टिंग के कारण  जयपुर से सूचना के आधार पर क्षेत्र में बिजली कटौती की जा रही है। जल्द ही इसको सुधारा जाएगा ताकि आमजन को परेशानी न हो। <br /><strong>- सुरेंद्र नागर, टेक्नीशियन , सिलोर 220 केवी ग्रिड स्टेशन  </strong></p>
<p>लाइट की कटौती सिलोर के बड़े ग्रेड स्टेशन से कट जाती है। वहां से हमको सूचना मिलती है। नमाना ग्रेड से कोई कटौती नहीं होती है। <br /><strong>- पवन यादव, लाइनमैन, नमाना कस्बे के ग्रेड स्टेशन  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 May 2024 17:50:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Gehlot's Appeal : 25-26 को तेज गर्मी में लोग घरों से निकलने से बचें</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि प्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gehlots-appeal-people-should-avoid-leaving-their-homes-in-the/article-79050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/cm_ashok_gehlot.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 25-26 को गर्मी के लिए जारी रेड अलर्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि दो दिन अधिक तापमान के चलते लोग घरों से कम ही निकलें, ताकि गर्मी से बचाव रह सके।</p>
<p>गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि प्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने 25 और 26 मई का रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें कुछ जगह तापमान 50 डिग्री तक जा सकता है। ऐसे में लू और अधिक तापमान के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। सभी से विनम्र निवेदन है कि गर्मी से बचने की पूरी सावधानी अपनाएं। जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें एवं शरीर में हाइड्रेशन रखने के लिए पानी पीते रहें। राज्य सरकार किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तैयारी रखे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 May 2024 15:41:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीषण गर्मी का कहर, बिजली कटौती से बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने विभाग से समय पर बिजली आपूर्ति की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/scorching-heat--power-cuts-wreak-havoc/article-78693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bhishan-grmi-ka-prahar,-bijli-katoti-s-behal...panwar,-jhalawar-news-20-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>पनवाड़। भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती की समस्या से लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है। मई का आधा महीना बीतने पर गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है, इसी भीषण गर्मी के बीच बिजली की कटौती की समस्या से लोग परेशान है। ग्रामीण इलाको में अघोषित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे के कौशल सुमन,सत्यनारायण नागर,अलीमुद्दीन पठान,सुरेंद्र सुमन,रवि सुमन ने बताया कि तेज गर्मी के बीच बिजली की कटौती से जीना दुश्वार हो रहा है,शादी ब्याह का सीजन होने के कारण कस्बे सहित क्षेत्र के गांवों में घरों में शादी का माहौल है इसी बीच रात्रि के समय तीन से चार घंटे बिजली कटौती के कारण बच्चे बूढ़ों को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिशनखेड़ी गांव निवासी छीतरलाल नागर,श्रवण नागर ने बताया कि सरकार वादा करती है कि 24 घंटे बिजली मुहैया कराई जाएगी। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है ऐसी गर्मी में 8 से 10 घंटे बिजली कटौती की जा रही है रातभर बिजली गुल रहती है जिससे रात के समय गर्मी से बच्चे,बूढ़े,महिलाए परेशान होते रहते है,शाम होते ही बिजली की आंख मिचौली का काम शुरू हो जाता है बिजली की आपूर्ति सही तरीके से नही होने के कारण लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है और बताया कि रोजाना रात्रि में सोने का समय होता है और बिजली कटौती चालू हो जाती है इस समस्या के बारे में बिजली कर्मचारियों को फोन लगाते है तो लोड सेटिंग की कहकर फोन काट देते है कही बार तो फोन तक नहीं उठाते इससे ग्रामीणों में खासी नाराजगी है। ग्रामीणों ने विभाग से समय पर बिजली आपूर्ति की मांग की है,और बताया कि समस्या का निवारण नहीं होने पर ग्रामीणों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा ।</p>
<p>भीषण गर्मी में रात्रि के समय घंटों बिजली गुल रहने से जीना दुश्वार हो रहा है,बिजली कटौती का कोई समय निर्धारित नहीं है, कब जाएगी कब आएगी, अधिकारियों को फोन लगाने पर संतुष्टप्रद जवाब नहीं मिलता।  <br /><strong>- श्रवण नागर, ग्रामीण बिशनखेड़ी </strong></p>
<p> शादी ब्याह का सीजन चल रहा है ऐसे में रात्रि के समय घंटो बिजली कटौती से घरों पर बच्चे,महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जल्द समस्या का निवारण करना चाहिए।<br /><strong>- कौशल कुमार सुमन </strong></p>
<p><strong>निवासी पनवाड़  </strong><br />अघोषित बिजली कटौती से आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,रात्रि के समय दो से तीन घंटे लोड सेटिंग के नाम पर बिजली काटी जा रही है, इससे बच्चे,बूढ़े,महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। <br /><strong>- छीतरलाल नागर, ग्रामीण बिशनखेड़ी </strong></p>
<p>लोड सेटिंग को लेकर बिजली कटौती हो रही है। क्षेत्र ही नहीं पूरे राजस्थान में समस्या बनी हुई है, एक दो दिन में बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से चलने की संभावना है। <br /><strong>- राघवेंद्र मिश्रा, एईएन,खानपुर जयपुर डिस्कॉम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 17:31:53 +0530</pubDate>
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                <title>हालात नहीं सुधरे तो विद्युत कार्यालय का करेंगे घेराव </title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों ने दी चेतावनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-the-situation-does-not-improve--they-will-gherao-the-electricity-office/article-78694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/halat-nahi-sudre-to-vidyut-karyalay-ka-karenge-gerav...khedarsulpur,-kota-news-20-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>खेड़ारसूलपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों लगातार की जा रही अघोषित बिजली कटौती के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी में दिन-रात किसी भी समय बिजली कटौती से लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है। रात को लोड शिफ्टिंग के नाम पर बिजली कटौती से ग्रामीणों को रतजगा करना पड़ रहा है। लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। ग्रामीण प्रवीण नामा, जोधराज गुर्जर, अनूप मेहरा व राम खंडेलवाल ने बताया कि इस भीषण गर्मी में प्रतिदिन बिजली विभाग द्वारा अघोषित कटौती की जा रही है। जिसके कारण लोग अपने घरेलू व दैनिक कार्य भी नहीं कर पा रहे। बिजली कटौती के कारण गांव में बनी पेयजल की टंकी भी पानी से पूरी तरह नहीं भर रही है। जिसके कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्रामीणों को पीने का पानी हैंडपंपों से लाना पड़ रहा है। ग्रामीण प्रवीण नामा ने बताया कि गांव में रात के समय कभी भी लो शिफ्टिंग के नाम पर 1 से 2 घण्टे तक बिजली की कटौती की जा रही है। लोगों को पसीने व मच्छरों के कारण नींद नहीं आ रही है। </p>
<p><strong>गांवों के साथ हो रहा भेदभाव</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि खेड़ा, रसूलपुर, भोजपुरा, चडीन्दा, आरामपुरा, जाखेड़ा सहित आसपास के एक दर्जन गांवों में मनमानी अघोषित कटौती हो रही है। जिसके कारण ग्रामीणों को अंधेरे में रात बितानी पड़ रही है। जबकि कैथून नगर पालिका क्षेत्र में बिजली कटौती नहीं की जा रही। हमारे गांवों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग के सहायक अभियंता को इस समस्या से अवगत कराया। लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही नही की गई। </p>
<p><strong>कर्मचारी नहीं देते संतुष्टिपूर्ण जवाब</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि जब बिजली विभाग के कर्मचारियों से कटौती का कारण पूछते हैं तो कोई भी कर्मचारी सन्तुष्टिपूर्ण जवाब नहीं देता। जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>बिजली विभाग का करेंगे घेराव</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन हो रही अघोषित बिजली कटौती अगर बन्द नहीं हुई व जल्द से जल्द इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो बिजली विभाग का घेराव कर प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने कहा कि बिजली कटौती की जा रही है तो उसकी पूर्व में सूचना देकर समय निर्धारित किया जाए।  </p>
<p>रात में कई बार बिजली कटौती होने से छोटे बच्चों व बुजुर्गों को गर्मी व उमस से काफी परेशानी हो रही है। लोग बीमार हो रहे हैं। शीघ्र अघोषित बिजली कटौती को बंद किया जाए। <br /><strong>- जोधराज गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>दिन रात अघोषित बिजली कटौती से गांव में पेयजल की समस्या आ गई है। गांव में बनी पानी की टंकी बिजली कटौती से पूरी नहीं भर पाती। जिससे घरों में नल नहीं आते। महिलाओं को घरेलू कार्य करने व पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- अनूप मेहरा, ग्रामीण</strong></p>
<p>भीषण गर्मी के कारण छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं पर मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोग बीमार हो रहे हैं। इसके साथ ही लोकल फॉल्ट के चलते ट्रिपिंग से ये समस्या और विकराल हो गई है।<br /><strong>- प्रवीण नामा, ग्रामीण 3932</strong></p>
<p>लोड शिफ्टिंग के कारण क्षेत्र में बिजली की कटौती ऊपर से ही की जा रही है।<br /><strong>- आशीष जौहरी, एक्सईएन, बिजली विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 16:42:14 +0530</pubDate>
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