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                <title>s jaishankar - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर असर: एलपीजी आपूर्ति प्रभावित, संसद भवन में हरदीप पुरी और जयशंकर ने की पीएम मोदी से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण भारत में कमर्शियल गैस की किल्लत गहरा गई है। पीएम मोदी ने विदेश और पेट्रोलियम मंत्रियों के साथ हालात की समीक्षा की। सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और अस्पतालों व घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। आपूर्ति संतुलित करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/impact-of-middle-east-tension-on-india-lpg-supply-affected/article-146010"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-and-hardeep-singh-puri.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का प्रभाव अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। विशेष रूप से कमर्शियल गैस की सप्लाई में कमी के चलते होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के सामने संचालन की चुनौती खड़ी हो गई है। वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण देश के कई बड़े शहरों में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। </p>
<p>इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय चर्चा कर हालात की समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और उनके भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। आपातकाल जैसी इस स्थिति को देखते हुए कई राज्यों ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर व्यावसायिक गैस की कमी से उत्पन्न हो रही समस्याओं के बारे में जानकारी दी। </p>
<p>तेल विपणन कंपनियों ने बताया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली मांग का आकलन कर प्राथमिकता तय करेगी। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए कहा है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए हर स्तर पर निगरानी की जा रही है, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों और विपणन कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त उत्पादन का मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।</p>
<p>एलपीजी सिलेंडर की कमी पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, पहले केंद्र सरकार LPG कमर्शियल घरेलू के दाम बढ़ाती है और फिर ये युद्ध 9-10 दिन चला और गैस की कमी हो गई है और 25 दिन से पहले घरेलू की बुकिंग नहीं होगी। जो ये कमी है इसके लिए भारत सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय जिम्मेदार है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इस देश का सर शर्म से झुक गया है जब ट्रंप कहते हैं कि 30 दिन और पेट्रोल खरीद लो.. क्या भारत अब ट्रंप के दया पर निर्भर करेगा कि उसे कहां से क्या व्यापार करना है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:14:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बलूचिस्तान ने भारत को लिखा पत्र...कहा-पाकिस्तान को उखाड़ फेंको, हम आपके साथ हैं</title>
                                    <description><![CDATA[नापाक पाकिस्तान की हरकतों के बारे में पूरा विश्व अच्छी तरह जानता है इसी बीच नए साल 2026 के मौके पर बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/balochistan-wrote-a-letter-to-india-saying-uproot-pakistan/article-138148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/pakistan-and-balukistan.png" alt=""></a><br /><p>बलूचिस्तान। नापाक पाकिस्तान की हरकतों के बारे में पूरा विश्व अच्छी तरह जानता है इसी बीच नए साल 2026 के मौके पर बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया। इस पत्र में बलूच नेता ने न केवल भारत के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दिया है, बल्कि पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ रहे "खतरनाक" सैन्य गठबंधन का भी सनसनीखेज खुलासा किया है और कहा है कि आप पाकिस्तान को उखाड़ फेंको हम आपके साथ है।</p>
<p><strong>चीन की सैन्य तैनाती का दावा</strong></p>
<p>इस पत्र के बारे में मीर यार बलूच ने दावा किया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) अब अपने अंतिम चरण में है और इसके बहाने चीन अगले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। उन्होंने दुश्मन देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि, 60 मिलियन बलूच लोगों की सहमति के बिना चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक "अकल्पनीय खतरा" पैदा करेगी। उन्होंने भारत से अपील की है कि वह बलूच रक्षा बलों को मजबूत करने में सहयोग करे।</p>
<p>इसके आगे पत्र में नेता मीर यार बलूच ने कहा कि उनका राष्ट्र पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के "राज्य-प्रायोजित आतंकवाद" और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहा है। इसके आगे बलूच नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए पिछले साल पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर की गई 'ऑपरेशन सिंदूर' की कार्रवाई की सराहना करते हुए लिखा कि अब समय आ गया है कि इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 16:46:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चक्रवात'दितवाह': श्रीलंका को भारत देगा 45 करोड़ डॉलर का 'पुनर्निर्माण पैकेज'</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने चक्रवात दितवाह से प्रभावित श्रीलंका के लिए 45 करोड़ डॉलर के राहत एवं पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह सहायता भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-will-give-450-million-reconstruction-package-to-sri-lanka/article-136944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-and-sri-lnaka.png" alt=""></a><br /><p>कोलम्बा। भारत ने चक्रवात 'दितवाह' से हुई तबाही से उबरने में श्रीलंका की मदद के लिए 45 करोड़ डॉलर के राहत एवं पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह जानकारी मंगलवार को दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष दूत के रूप में कोलंबो पहुंचे डॉ जयशंकर ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमारा दिसानायके को प्रधानमंत्री का पत्र सौंपा, जिसमें इस सहायता का विवरण दिया गया है। इस पैकेज में 35 करोड़ डॉलर की रियायती ऋण सहायता(लाइन ऑफ क्रेडिट) और 10 करोड़ डॉलर की अनुदान राशि शामिल है ।</p><p>विदेश मंत्री ने श्रीलंका के विदेश मामलों के मंत्री विजिता हेराथ के साथ भी बैठक की, जिसमें सहायता को शीघ्रता से पहुंचाने और देश की पुनर्निर्माण प्राथमिकताओं पर चर्चा भी की गयी। डॉ. जयशंकर ने कहा, पीएम मोदी के विशेष दूत के रूप में और राष्ट्रपति के लिए संदेश लेकर हम उनसे मिले। चक्रवात दितवाह से हुए नुकसान पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का जो पत्र मैंने सौंपा है, वह भारत की 'फस्र्ट रिस्पॉन्डर' भूमिका को आगे बढ़ाता है और 45 करोड़ डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज की प्रतिबद्धता जताता है। हमारी बातचीत इस बात पर केंद्रित रही कि इस सहायता को कितनी तेजी से धरातल पर उतारा जाये।</p><p>उन्होंने आपदा के तुरंत बाद भारत की प्रतिक्रिया पर जोर देते हुए कहा, भारत की सहायता उसकी फस्र्ट 'रिस्पॉन्डर' भूमिका पर आधारित है। चक्रवात के तट पर पहुंचने के उसी दिन 'ऑपरेशन सागर बंधु' शुरू कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि संपर्क व्यवस्था और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता रही। डॉ. जयशंकर ने श्रीलंका के मौजूदा आर्थिक संकट के दौरान भी भारत के निरंतर मदद करने पर जोर दिया और कहा कि भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि इस कठिन दौर में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।</p><p>उन्होंने कहा, अपने सबसे करीबी पड़ोसी और 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत, जब श्रीलंका संकट में था तो भारत का आगे आना स्वाभाविक था। हमने आर्थिक कठिनाइयों के समय भी ऐसा किया है। चक्रवात दितवाह के मामले में भी भारत सहयोग का मजबूती से श्रीलंका की मदद कर रहा है। विदेश मंत्री ने कहा, नेबरहुड फस्र्ट नीति के अनुरूप भारत श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि यह घोषणा ऐसे समय में की गयी है, जब श्रीलंका चक्रवात दितवाह के बाद बेहद खराब हालात से जूझ रहा है। इस चक्रवात ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया और हजारों लोग विस्थापित हो गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:05:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमारी विदेश नीति की बुनियाद है स्वतंत्र विकल्प और रणनीतिक स्वतंत्रता: विदेश मंत्री एस जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि शेख हसीना की भारत में मौजूदगी निजी निर्णय है। भारत बांग्लादेश से अच्छे संबंध चाहता है। पुतिन की यात्रा से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता प्रभावित नहीं होगी। भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-foundation-of-our-foreign-policy-is-free-choice-and/article-135112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा कि भारत में उनकी मौजूदगी उनकी निजी पसंद है और यह उसी स्थिति से जुड़ी है, जो पिछले साल बांग्लादेश में घटी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत, बांग्लादेश का अच्छा पड़ोसी और शुभचिंतक है। बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग के बावजूद भारत ने अभी तक इस पर कोई सहमति नहीं दी है।</p>
<p>पिछले महीने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। एक कार्यक्रम में पूछा गया कि क्या हसीना भारत में जितनी चाहें उतनी देर रह सकती हैं? इस पर जयशंकर ने कहा कि यह फैसला उनका अपना है। उन्होंने कहा कि वह एक खास परिस्थिति में भारत आई थीं और वही परिस्थितियां तय करेंगी कि आगे क्या होगा। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत हमेशा यह चाहेगा कि पड़ोसी देश में लोकतांत्रिक माहौल मजबूत रहे।</p>
<p><strong>पुतिन की यात्रा पर भारत का स्पष्ट संदेश</strong></p>
<p>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस संबंध पिछले 70-80 साल से सबसे स्थिर बड़े रिश्तों में रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुतिन की यात्रा से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता प्रभावित नहीं होगा। जयशंकर ने स्पष्ट कहा, भारत सभी बड़े देशों से रिश्ते रखता है। किसी भी देश को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उसे हमारे फैसलों पर वीटो जैसा असर मिलेगा।</p>
<p><strong>अमेरिका से व्यापार बातचीत पर भारत का रुख</strong></p>
<p>वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के लिए व्यापार बड़ा मुद्दा है। जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही बातचीत करेगा। उन्होंने कहा, डिप्लोमेसी किसी को खुश करने के लिए नहीं होती, यह देश के हितों की रक्षा के लिए होती है। अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50% तक शुल्क लगाया है और रूसी तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगाया था, जिसके कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। भारत और अमेरिका अभी एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि इस समझौते में भारत के किसानों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ा जाएगा।</p>
<p><strong>भारत की रणनीतिक आजादी पर जोर</strong></p>
<p>पुतिन की यात्रा पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि एक बड़े और उभरते हुए देश के रूप में भारत सभी महत्वपूर्ण देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि हमारी विदेश नीति की बुनियाद है स्वतंत्र विकल्प और रणनीतिक स्वतंत्रता। यही आगे भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 11:42:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>न्यूयॉर्क में जयशंकर-लाज़ारो की मुलाकात : दक्षिण- चीन सागर विवाद के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को नई दिशा </title>
                                    <description><![CDATA[मुलाकात के बाद डॉ.जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों ने अगस्त में फिलीपींस के राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस की भारत की राजकीय यात्रा के परिप्रेक्ष्य में बातचीत की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jaishankar-lazaro-meet-in-new-york-in-new-york-strategic-partners/article-127612"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ.एस.जयशंकर ने दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के नौसैनिक पोतों की हाल ही में हुई झड़प के बीच रविवार को न्यूयार्क में फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाज़ारो के साथ मुलाकात की और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में परस्पर सहयोग पर चर्चा की। डॉ.जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में में भाग लेने के लिए अभी न्यूयॉर्क में हैं।</p>
<p>मुलाकात के बाद डॉ.जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों ने अगस्त में फिलीपींस के राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस की भारत की राजकीय यात्रा के परिप्रेक्ष्य में बातचीत की। उस समय दोनों पक्षों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि " न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की शुरुआत में फिलीपींस की विदेश मंत्री लाज़ारो से मिलकर खुशी हुई। हमने राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर.मार्कोस जूनियर की हाल की भारत राजकीय यात्रा पर भी बातचीत की। संयुक्त राष्ट्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारे सहयोग पर भी बात हुई। "</p>
<p>फिलीपींस की विदेश मंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने राजनीतिक, रक्षा, सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग विकसित करने की दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि " पिछले अगस्त में राष्ट्रपति की भारत की सफल राजकीय यात्रा के बाद डॉ. एस. जयशंकर से फिर मिलकर खुशी हुई। आज की हमारी चर्चा, राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र में सक्रिय रूप से सहयोग विकसित करने के लिए रणनीतिक साझेदार के रूप में हमारे दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।"</p>
<p>दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत संसाधन संपन्न दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल को लेकर फिलीपींस और चीन के बीच चल रहे विवाद के बीच हुई है। स्कारबोरो शोल फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में स्थित मछली पकड़ने का पारंपरिक क्षेत्र है जिस पर बीजिंग ने अपना आधिपत्य जमा रखा है। इसका फिलिपीन्स के मछुआरों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। स्कारबोरो शोल फिलीपींस के संयुक्त राष्ट्र द्वारा परिभाषित विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित है और चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से को अपने ऐतिहासिक समुद्री क्षेत्र के रूप में दावा करता है। यह कदम हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के 2016 के उस फैसले की अनदेखी करता है जिसमें इस दावे को खारिज किया गया था।</p>
<p>दोनों देशों के बीच 16 सितंबर को हुई यह झड़प चीन द्वारा स्कारबोरो शोल पर एक प्राकृतिक अभ्यारण्य बनाने की घोषणा के लगभग एक सप्ताह बाद हुई। फिलीपींस ने इस कदम की 'कब्ज़े का स्पष्ट बहाना' बताते हुए निंदा की है और पिछले सप्ताह आसियान समुद्री मंच पर भी इसका विरोध किया था। अगस्त में राष्ट्रपति मार्कोस की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। फिलीपींस समुद्री सहयोग, रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ और अधिक निकटता से जुड़ने का इच्छुक रहा है। उनकी यात्रा के दौरान, भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में फिलीपींस की नौसेना के साथ अपना पहला संयुक्त समुद्री अभ्यास किया जिस पर चीन ने आपत्ति जताई थी।</p>
<p>फिलीपींस और चीन दक्षिण चीन सागर में एक अन्य स्थल जिसे सेकेंड थॉमस शोल कहा जाता है - स्प्रैटली द्वीप समूह में स्थित एक जलमग्न रीफ को लेकर भी प्रतिस्पर्धा में उलझे हुए हैं। फिलीपींस ने पहली बार 1999 में इस स्थल पर कब्ज़ा किया था और वहाँ एक नौसैनिक पोत तैनात किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 17:35:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ब्रिक्स वर्चुअल शिखर सम्मेलन : एस जयशंकर करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व, अमेरिकी आयात शुल्क पर होगी अहम चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार शाम को प्रारंभ हो रहे ब्रिक्स वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/brics-virtual-summit-s-jaishankar-will-represent-india-important-discussion/article-126217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार शाम को प्रारंभ हो रहे ब्रिक्स वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस सम्मेलन का आयोजन ब्राज़ील के राष्ट्रपति और ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने किया है। उम्मीद की जा रही है कि इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के व्यापार संबंधी बातचीत के अलावा अमेरिका के ऊंचे आयात शुल्क को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।</p>
<p>यह बैठक नेताओं के स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका की आक्रामक आयात शुल्क नीतियों के जवाब में ब्रिक्स सदस्यों के लिए एक साझा दृष्टिकोण तैयार करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 13:33:13 +0530</pubDate>
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                <title>अफगानिस्तान भूकंप : भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 1000 तंबू और 15 टन खाद्य सामग्री भेजी; विदेश मंत्री ने जताई संवेदना</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने अफगानिस्तान में भूकंप से हुई भारी तबाही के बाद मदद का हाथ बढाते हुए तत्काल सहायता के तौर पर वहां एक हजार तंबू तथा 15 टन खाद्य सामग्री भेजी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/afghanistan-earthquake-india-increased-the-hand-of-help-1000-tents/article-125508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने अफगानिस्तान में भूकंप से हुई भारी तबाही के बाद मदद का हाथ बढाते हुए तत्काल सहायता के तौर पर वहां एक हजार तंबू तथा 15 टन खाद्य सामग्री भेजी है। विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर ख़ान मुत्तक़ी से बात कर भूकंप के कारण हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि इस कठिन समय में भारत अफगानिस्तान के साथ है। उन्होंने कहा कि भारत ने काबुल में एक हजार तंबू पहुँचाए हैं। काबुल स्थित भारतीय मिशन द्वारा कुनार तक 15 टन खाद्य सामग्री भी तुरंत पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से कल और राहत सामग्री भेजी जाएगी।</p>
<p>डा.जयशंकर ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि “ आज अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर ख़ान मुत्तक़ी से बात की। भूकंप में हुई जान-माल की हानि पर अपनी संवेदना व्यक्त की। भारत ने आज काबुल में 1000 परिवारों के लिए तंबू पहुँचाए हैं। भारतीय मिशन द्वारा काबुल से कुनार तक 15 टन खाद्य सामग्री भी तुरंत पहुँचाई जा रही है। कल से भारत से और राहत सामग्री भेजी जाएगी। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। इस कठिन समय में भारत अफ़ग़ानिस्तान के साथ है।”</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के कुनार और नांगरहार प्रांतों में रविवार रात आये भूकंप कम से कम 800 से अधिक लोगों की मौत हो गई और इस प्राकृतिक आपदा में 2500 से अधिक घायल हुए हैं। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार अफगानिस्तान के पूर्वी भाग में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र नंगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद से 27 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में आठ किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 18:52:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-पाकिस्तान में सीजफायर को लेकर ट्रंप के बार-बार के दावों पर विदेश मंत्री ने सुनाया, कहा- जो हुआ बहुत साफ है, अब खत्म करिए</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फिर साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल आॅफ मिलिट्री आॅपरेशंस) के बीच बातचीत से हुआ था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-the-repeated-claims-of-trump-about-the-ceasefire-in/article-119407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फिर साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच बातचीत से हुआ था। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को गलत बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह समझौता उनके बीच-बचाव और व्यापार वार्ता के जरिए हुआ था। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के लिए व्यापार का इस्तेमाल किया। यह तनाव 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था और 7 मई को भारत की ऑपरेशन सिंदूर के साथ बढ़ गया था।</p>
<p><strong> उस समय क्या हुआ था, इसका रिकॉर्ड बिल्कुल साफ है</strong><br />एस जयशंकर ने वाशिंगटन डीसी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उस समय क्या हुआ था, इसका रिकॉर्ड बिल्कुल साफ है। सीजफायर दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बातचीत से हुआ था। उन्होंने कहा, जो हुआ वह बहुत स्पष्ट है, इसे यहीं छोड़ देते हैं। उन्होंने आगे कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इससे पहले, न्यूजवीक के साथ एक बातचीत में जयशंकर ने कहा था कि जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने 9 मई की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी, तब वह उसी कमरे में थे। जयशंकर के अनुसार, वेंस ने पीएम मोदी को बताया था कि अगर भारत कुछ चीजें नहीं मानता है तो पाकिस्तान भारत पर बड़ा हमला कर देगा। जयशंकर ने बताया कि पीएम मोदी ने इस कॉल के दौरान संकेत दिया था कि भारत की ओर से इसका जवाब दिया जाएगा।</p>
<p><strong>जयशंकर पहले भी कर चुके हैं भारत की स्थिति साफ</strong><br />जयशंकर ने कहा कि हमारी स्थिति यह रही है और यह सिर्फ दिल्ली में इस सरकार की स्थिति नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय सहमति है कि पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध द्विपक्षीय हैं। मैं आपको बता सकता था, उपराष्ट्रपति वेंस ने 9 मई की रात को प्रधानमंत्री मोदी से बात की और कहा कि अगर हम कुछ चीजें नहीं मानते हैं तो पाकिस्तानी भारत पर बहुत बड़ा हमला करेंगे। प्रधानमंत्री पाकिस्तानी धमकियों से बेपरवाह थे। उन्होंने संकेत दिया कि जवाब दिया जाएगा। यह उससे एक रात पहले की बात है। पाकिस्तानियों ने उस रात हम पर बड़े पैमाने पर हमला किया। हमने उसके बाद बहुत जल्दी जवाब दिया, और अगली सुबह, मिस्टर रुबियो ने मुझे फोन किया और कहा कि पाकिस्तानी बात करने के लिए तैयार हैं।  इसलिए, मैं आपको केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव से बता सकता हूं कि क्या हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 13:12:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने दोहराई आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री ने इस अमानवीय हमले की जांच में पाकिस्तानी अधिकारियों से सहयोग करने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-committed-to-work-with-india-in-a-global-fight/article-112736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अलग-अलग फोन पर बात की और दोनों देशों से जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद जारी तनाव कम करने की अपील की। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने सोशल मीडिया में कहा कि रुबियो ने जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया और पहलगाम हमले में पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत के साथ मिलकर काम करने की अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहरायी।</p>
<p>उन्होंने पाकिस्तान के साथ तनाव कम करने और दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि रुबियो ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ से बात की और पाकिस्तान को भारत के साथ मिलकर तनाव कम करने, सीधे संवाद स्थापित करने और दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की निंदा करने की जरूरत पर बल दिया। दोनों नेताओं ने हिंसा के जघन्य कृत्यों के लिए आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने के वास्ते अपनी निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ने इस अमानवीय हमले की जांच में पाकिस्तानी अधिकारियों से सहयोग करने का आग्रह किया।</p>
<p><strong>राजनाथ सिंह ने की अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से बात</strong><br />पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को अमेरिका के अपने समकक्ष पीट हेगसेथ से बात की। दोनों नेताओं ने मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। इससे पहले, भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों ने भी हॉटलाइन पर बात की थी। भारत ने पाकिस्तान को एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना उकसावे के संघर्ष विराम उल्लंघन के बारे में चेतावनी दी थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से बात की और आतंकी हमले पर चर्चा की। रुबियो ने भारत के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराया। पहलगाम में 22 अप्रैल को एक आतंकी हमला हुआ था, इसमें 26 लोग मारे गए थे। इस हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से फोन पर बात की। भारतीय सेना ने 27-28 अप्रैल को कुपवाड़ा और पुंछ जिलों में एलओसी पर पाकिस्तान की सेना की ओर से हुई गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।</p>
<p><strong>पहलगाम हमले के बाद बढ़ा हुआ है तनाव</strong><br />पहलगाम हमले के बाद एलओसी पर पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाएं बढ़ गई हैं। वहीं पहलगाम हमले के जवाब में, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। इनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद करना और उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या को कम करना शामिल है। 29 अप्रैल को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उऊर जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुखों और ठरअ अजीत डोभाल के साथ एक बैठक की थी। इससे पहले, 23 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी की बैठक हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 12:20:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>S Jaishankar की यूएई के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात , द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी पर की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[बैठक में शेख अब्दुल्ला और डॉ. जयशंकर ने आर्थिक, व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन सहित सभी क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के प्रयासों की चर्चा की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/s-jaishankar-meets-uae-foreign-minister-discusses-bilateral-strategic-partnership/article-82545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>अबूधाबी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अपने समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से अबू धाबी में मुलाकात की और लगातार बढ़ती द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की। </p>
<p>डॉ जयशंकर ने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा कि यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद से अबू धाबी में मिलकर बहुत खुशी हुई। हमारी लगातार बढ़ती व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर सार्थक और गहन बातचीत हुई। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर उनकी अंतर्दृष्टि सराहनीय रही। यूएई विदेश मंत्रालय के एक रीडआउट के अनुसार शेख अब्दुल्ला ने डॉ जयशंकर को फिर से भारत के विदेश मंत्री बनने पर बधाई दी। </p>
<p>यूएई के शीर्ष राजनयिक ने कल रात अबू धाबी में डॉ. जयशंकर का रात्रिभोज के लिए स्वागत किया। इस मौके पर उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्री संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने यूएई और भारत के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी के ढांचे के भीतर द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। बैठक में शेख अब्दुल्ला और डॉ. जयशंकर ने आर्थिक, व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन सहित सभी क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के प्रयासों की चर्चा की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 14:59:37 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका के आरोप पर भारत ने जांच समिति बनायी: जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[कनाड़ा द्वारा भी इसी तरह का आरोप लगाये जाने से संबंधित सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि कनाड़ा ने इस संबंध में अब तक किसी तरह का पुख्ता सबूत नहीं दिया है इसलिए इस मामले में आगे कार्रवाई नहीं की जा सकती। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-forms-investigation-committee-on-americas-allegations-jaishankar/article-63641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरूवार को राज्यसभा को बताया कि भारत ने अमेरिका के उस आरोप की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया है जिसमें अमेरिका ने उसके यहां एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या की साजिश में एक भारतीय का हाथ बताया है।</p>
<p>जयशंकर ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में कहा कि अमेरिका ने इस मामले में भारत के साथ संगठित अपराधों और कुछ अन्य गतिविधियों के बारे में ऐसी जानकारी साझा की है जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है और भारत के लिए ङ्क्षचता का विषय है। इसीलिए इस मामले की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है।</p>
<p>कनाड़ा द्वारा भी इसी तरह का आरोप लगाये जाने से संबंधित सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि कनाड़ा ने इस संबंध में अब तक किसी तरह का पुख्ता सबूत नहीं दिया है इसलिए इस मामले में आगे कार्रवाई नहीं की जा सकती। </p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह स्वयं और कुछ अन्य केन्द्रीय मंत्री विदेशों में ओवरसीज फ्रेन्डस ऑफ बीजेपी के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री जब भी विदेशों में जाते हैं तो वे वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से मिलते हैं। वे लोग भारत की प्रतिष्ठा बढा रहे हैं इसलिए उनसे मंत्री मिलते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन सच्चाई यह भी है कि मंत्री पहले अपना कार्य करते हैं और जिम्मेदारी पूरी करने के बाद भारतीय समुदाय के लोगों से मिलते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Dec 2023 20:34:19 +0530</pubDate>
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                <title>भारत को विश्वसनीय विकास साझीदार, आर्थिक सहयोगी मानने लगी है दुनिया : जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की विदेश नीति में बीते नौ साल में आये बदलावों को देश के जन भावनाओं पर आधारित बताते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज कहा कि विश्व भारत को एक भरोसेमंद विकास साझीदार एवं आर्थिक सहयोगी के रूप मेें देखने लगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-world-has-started-considering-india-as-a-reliable-development/article-48202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/66.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति में बीते नौ साल में आये बदलावों को देश के जन भावनाओं पर आधारित बताते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज कहा कि विश्व भारत को एक भरोसेमंद विकास साझीदार एवं आर्थिक सहयोगी के रूप मेें देखने लगा है।</p>
<p>डॉ. जयशंकर ने यहां जवाहरलाल नेहरू भवन में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन, राजकुमार रंजन सिंह और मीनाक्षी लेखी के साथ केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के नौ साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल्याकंन दो थीम पर किया जाना चाहिए। एक, पूरा विश्व भारत को किस तरह से देखता है और दूसरी- विदेश नीति किस प्रकार से लोगों का जीवन बदल कर उन्हें सशक्त बनाया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज विश्व के 78 देशों में 600 से अधिक विकास परियोजनाएं चल रहीं हैं। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमें एक विकास भागीदार के रूप में देखता है, न केवल एक विकास भागीदार के रूप में बल्कि एक विकास भागीदार के रूप में जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कही गई बातों पर खरा उतरता है। उन्होंने कहा कि आज भारत की दूसरी छवि एक आर्थिक सहयोगी की है जिसने श्रीलंका जैसे देशों को आर्थिक अस्थिरता से बचाया। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा और अधोसंरचना का विकास हुआ। कोविड काल में वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम से सौ से अधिक देशों की मदद की। भारत इस दौरान क्वॉड, आई2यू2 और शंघाई सहयोग संगठन, फिपिक, नॉर्डिक्स, आदि संगठनों के माध्यम से आर्थिक सहयोग की साझीदारियां कायम की। जी-20 की अध्यक्षता में इस दायरे से बाहर ग्लोबल साउथ के देशों का सम्मेलन आयोजित किया जिसमें 125 देशों ने भाग लिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जलवायु एक्शन, वैक्सीन मैत्री जैसे कार्यक्रमों के अलावा खाद्य सुरक्षा के लिए मिलेट्स का उपयोग, डिजीटल वित्तीय सेवाएं, 4जी/5जी आदि घरेलू प्रगति भी वैश्विक कूटनीति पर प्रभाव डाल रही है। तकनीकी, आर्थिक, रणनीतिक एवं राजनीतिक सहयोग बढ़ा है। पड़ोसी प्रथम की नीति का भी असर हुआ है। नेपाल, बंगलादेश, मालदीव, श्रीलंका, म्यांमार एवं भूटान के बीच कनेक्टिविटी एवं आर्थिक सहयोग से यह क्षेत्र एक आर्थिक ब्लॉक बन गया है। बंगलादेश के साथ सीमा संबंधी समझौतों से संबंधों में बेहतरी आयी है।        विदेश मंत्री ने कहा कि पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में सुधार से भी पर्यटकों, समुद्री परिवहन में काम करने वाले, विद्यार्थी, कारोबारी आदि को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि हम मजबूत होंगे तो दुनिया भी इज्जत करेगी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद हो या देश हित से जुड़ी कोई अन्य बात, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे समझा और स्वीकार किया है और देश की यही भावना विदेश नीति में झलक रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 15:24:24 +0530</pubDate>
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