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                            <item>
                <title>भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि, नीदरलैंड लौटाएगा चोल साम्राज्य काल के प्राचीन ताम्रपत्र</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड दौरे पर चोल सम्राट राजा राज चोल प्रथम के काल के 21 ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत को सौंपे जाएंगे। 12 वर्षों के कूटनीतिक प्रयासों और यूनेस्को के सहयोग से यह सांस्कृतिक धरोहर वापस आ रही है। संस्कृत और तमिल में लिखे ये ताम्रपत्र चोल साम्राज्य की धार्मिक सहिष्णुता और प्राचीन वैश्विक संबंधों के जीवंत प्रमाण हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/netherlands-will-return-ancient-copper-plates-of-chola-empire-period/article-154102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/niderland.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नीदरलैंड दौरे की एक बड़ी उपलब्धि आनईमंगलम चोल ताम्रपत्रों की घर वापसी रहेगी। असल में, नीदरलैंड पीएम मोदी को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर सौंपेगा। चोल वंश के महान सम्राट राजा राज चोल प्रथम के शासनकाल (985-1014 ई) से जुड़े यह 21 ताम्रपत्र भारतीय इतिहास और तमिल विरासत के अति महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं। करीब 30 किलोग्राम वजनी इन ताम्रपत्रों को एक कांस्य वलय से जोड़ा गया है। जिस पर चोल साम्राज्य का राज चिह्न अंकित है। </p>
<p>भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत सरकार ने साल 2012 से इन ताम्रपत्रों की वापसी के लिए प्रयास शुरू किए थे। वर्ष 2023 में यूनेस्को के हस्तक्षेप के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई और भारत के दावे को मान्यता मिली। अब 12 सालों के लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद इन ताम्रपत्रों को भारत को लौटाने पर सहमति बन गई है। इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत की दोबारा प्राप्ति की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। जिन पर संस्कृत और तमिल भाषाओं का उपयोग किया गया है। संस्कृत भाग में चोल वंश की वंशावली का वर्णन है। जिसमें भगवान विष्णु से प्रारंभ कर राजवंश की वैधता को दर्शाया गया है। </p>
<p>वहीं, तमिल भाग में उल्लेख है कि राजा राजा चोल प्रथम ने अपने शासन के 21वें वर्ष में नागपट्टिनम स्थित एक बौद्ध विहार के लिए आनईमंगलम के आसपास के गांवों की संपूर्ण आय दान में देने की घोषणा की थी। यह विहार श्रीविजय के एक मलय शासक द्वारा निर्मित कराया गया था। इतिहासकारों के अनुसार, यह दान चोल साम्राज्य की धार्मिक सहिष्णुता और अंतरराष्टÑीय संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जहां एक शैव हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध संस्थान को संरक्षण दिया गया। यह उस समय के भारत के वैश्विक व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी दर्शाता है। इसके अलावा इस दान की घोषणा भले ही राजाराजा चोल प्रथम ने की थी। लेकिन इसे स्थाई रूप देने का काम उनके पुत्र राजेन्द्र चोल प्रथम ने किया था। उनके आदेश पर ही इन अभिलेखों को ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण कराया गया था। जिससे यह धरोहर आज तक सुरक्षित रह सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:59:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शिलालेख गायब होने पर पुरातत्व विभाग ने दर्ज कराया मामला</title>
                                    <description><![CDATA[बीकानेर स्थित दिल्ली दरवाजा जिसे लोग गोगागेट के नाम से जानते हैं, जिस पर रियासतकालीन शिलालेख लगा था। पिछले साल चले रिनोवेशन कार्य के पूरा होने के बाद ये शिलालेख अपने मूल स्थान पर नहीं दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/archaeological-department-filed-case-after-inscription-disappeared/article-8336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/6546546.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीकानेर स्थित दिल्ली दरवाजा जिसे लोग गोगागेट के नाम से जानते हैं, जिस पर रियासतकालीन शिलालेख लगा था। पिछले साल चले रिनोवेशन कार्य के पूरा होने के बाद ये शिलालेख अपने मूल स्थान पर नहीं दिखा। इस संबंध में राजस्थान आरक्योलॉजी एण्ड एपीग्राफी कांग्रेस संस्था ने भी पुरातत्व विभाग को शिलालेख गायब होने जानकारी दी थी।</p>
<p>इसके बाद बीकानेर वृत्त अधीक्षक ने ठेकेदार के खिलाफ इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई है। बीकानेर शहर की चारदीवारी पर निर्मित कोटेगेट, नत्थूसरगेट, गोगागेट एवं जस्सूसरगेट का रिनोवेशन कार्य किया गया था, लेकिन रिनोवेशन कार्य पूरा होने के बाद गोगागेट पर लगा शिलालेख अपने मूल स्थान पर नहीं था।</p>
<p>पुरातत्व विभाग के बीकानेर वृत्त अधीक्षक ने गोगागेट पर लगे शिलालेख के अपने मूल स्थान पर ना होने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई है। <br /><strong>- नवनीत सिंह, एसएचओ, कोतवाली पुलिस स्टेशन, बीकानेर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Apr 2022 11:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोगागेट से शिलालेख गायब होने का मामला: अधिकारी ने पत्र लिखकर कहा था शिलालेखों का रखा जाए विशेष ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[छह माह से मामले को दबाए बैठे थे अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--case-of-missing-inscriptions-from-gogagate--the-officer-wrote-a-letter-saying-that-special-attention-should-be-given-to-the-inscriptions--still-the-inscription-disappeared-from-goggate--officers-were-sitting-suppressing-the-matter-for-six-months/article-7194"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/shilalekh.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीकानेर स्थित दिल्ली दरवाजा जिसे लोग गोटागेट के नाम से जानते हैं। इस पर लगे रियासतकालीन शिलालेख के अपने मूल स्थान पर नहीं होने के मामले को करीब 6 माह हो गए हैं, लेकिन अभी तक विभाग पता नहीं लगाया पाया है कि आखिरकार शिलालेख कहां है। आलम ये है कि इस मामले को लेकर अभी तक कोई जांच कमेटी तक नहीं बनाई गई है।</p>
<p>सितम्बर 2021 से जनवरी, 2022 तक इस गेट का रिनोवेशन कार्य करने वाले ठेकेदार का कहना था कि काम शुरू करते समय गोगागेट पर कोई शिलालेख नहीं था, लेकिन उस समय बीकानेर सर्किल का चार्ज संभाल रहे अधिकारी ने 29 सितम्बर, 2021 को काम कर रहे संबंधित ठेकेदार को पत्र लिखकर कहा था कि बीकानेर शहर की चारदिवारी पर निर्मित दरवाजों कोटेगेट, नत्थूसरगेट, जस्सूसरगेट एवं गोगागेट पर चल रहे मरम्मत एवं सौंदर्यकरण के कार्य के दौरान इन दरवाजों पर लगे शिलालेखों एवं अन्य पुरामहत्वों की वस्तुओं के रख-रखाव का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही कार्य के दौरान इनमें किसी तरह का परिवर्तन तथा तोड़-फोड़ नहीं की जाए। गोगागेट से शिलालेख गायब होने के मामले को अधिकारी 6 माह से दबाए हुए थे। इस मामले में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक प्रदीप के. गावंडे का कहना है कि उस समय (तत्कालीन) बीकानेर वृत्त अधीक्षक रहे अधिकारी से रिपोर्ट ले रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 12:26:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आखिर कहां गया शिलालेख</title>
                                    <description><![CDATA[बीकानेर स्थित दिल्ली दरवाजा जिसे लोग गोगा गेट के नाम से जानते हैं। इस पर रियासतकालीन शिलालेख लगा था, जिस पर उसके निर्माणकर्ता का नाम और तिथि अंकित थी, लेकिन अब शिलालेख अपने मूल स्थान पर नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-inscription-is-not-in-its-place/article-6849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/01-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीकानेर स्थित दिल्ली दरवाजा जिसे लोग गोगा गेट के नाम से जानते हैं। इस पर रियासतकालीन शिलालेख लगा था, जिस पर उसके निर्माणकर्ता का नाम और तिथि अंकित थी, लेकिन अब शिलालेख अपने मूल स्थान पर नहीं है। इस संबंध में ‘राजस्थान आरक्योलॉजी एण्ड एपीग्राफी कांग्रेस’ संस्था ने पुरातत्व विभाग को 27 फरवरी, 2022 को पत्र लिखकर गोगा गेट पर लगे शिलालेख को हटाने पर ध्यान आकर्षित किया था। पत्र के माध्यम से संस्था ने मांग की है कि इस ऐतिहासिक विरासत को अतिशीघ्र ढूंढा जाए। गौरतलब है कि इससे पहले संस्था ने 29 अक्टूबर, 2021 को भी पत्र लिखकर शिलालेख को ऐतिहासिक महत्व का बताया गया था।</p>
<p><strong>किताब में शिलालेख का उल्लेख</strong><br />पुरातत्व विभाग के पूर्व अधिकारी ने बीकानेर वृत अधीक्षक पद पर रहते हुए ‘बीकानेर वृत के संरक्षित स्मारक, प्राचीन पुरावशेष स्थान एवं प्रमुख कला पुरासामग्री’ नाम से पुस्तक लिखी थी। इसमें उन्होंने गोगा गेट के अंदर प्रतिष्ठित शिलालेख की फोटो सहित उस पर अंकित शब्दों का भावानुवाद किया था। इस बीच कमाल की बात ये है कि गोगागेट से शिलालेख गायब है और विभाग के अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है।</p>
<p>गोगा गेट के भीतरी हिस्से में एक रियासत कालीन शिलालेख लगा हुआ था, जो वर्तमान में उस जगह नहीं है। जिला कलेक्टर एवं पुरातत्व विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है। जिला कलेक्टर ने इस संबंध में कोटगेट थाना अधिकारी और कोतवाली को तथ्य जुटाने के निर्देश दिए, लेकिन छह माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त विभाग के अधिकारियों की ओर से भी कुछ नहीं किया जा रहा। <br /><strong>- डॉ. रीतेश व्यास, सचिव, राजस्थान आर्कियोलॉजी एंड एपीग्राफी सोसायटी, बीकानेर</strong></p>
<p>जिस समय मैंने काम शुरू किया था, उस समय गोगा गेट पर कोई शिलालेख नहीं था। सितम्बर, 2021 से काम शुरू किया था, जो करीब जनवरी, 2022 तक चला। <br /><strong>- अकरम अली, ठेकेदार</strong><br />बीकानेर स्थित गोगा गेट पर शिलालेख का मामला चल रहा है, लेकिन मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। इसके लिए वृत अधीक्षक बीकानेर से बात करें। <br /><strong>- कृष्णकांता शर्मा, उपनिदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 10:55:12 +0530</pubDate>
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