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                <title>bengaluru - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कर्नाटक में सियासी संग्राम तेज: RSS पर सवाल उठाने पर भड़के विजयेंद्र, नेशनल हेराल्ड विवाद फिर गरमाया</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा नेता विजयेंद्र येदियुरप्पा ने आरएसएस पर टिप्पणी करने वाले मंत्री प्रियांक खरगे को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड विवाद में घिरी कांग्रेस से पारदर्शिता का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। विजयेंद्र ने बाढ़ राहत और समाज सेवा में आरएसएस के योगदान को अतुलनीय बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/political-conflict-intensifies-in-karnataka-vijayendra-angry-over-raising-questions/article-157156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)29.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजयेद्र येदियुरप्पा ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाले प्रदेश के मंत्री प्रियांक खरगे के बयान पर तीखा पलटवार किया जिससे नेशनल हेराल्ड विवाद मंगलवार को एक फिर से सामने आ गया। विजयेंद्र ने आरएसएस पर विजयेंद्र की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह "विडंबना" है कि कांग्रेस नेता पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ऐसे व्यक्ति से आती है जिसकी पार्टी को अभी भी नेशनल हेराल्ड विवाद पर साफ जवाब देने हैं।</p>
<p>उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विजयेंद्र के बयान राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने कहा, "यह चुनिंदा नैतिक गुस्सा आला कमान को खुश करने और राजनीतिक पोजीशनिंग को सही ठहराने की एक हताश कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।" उन्होंने आरएसएस का बचाव करते हुए कहा कि संगठन की विश्वसनीयता दशकों की जनसेवा और ज़मीनी स्तर पर जुड़ाव से बनी है, न कि राजनीतिक मंज़ूरी से। उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस को कांग्रेस पार्टी से वैधता के प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है और यह पहले से ही करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने शाखाओं, आपदा राहत प्रयासों, रक्तदान अभियान और आदिवासी कल्याण कार्यक्रम के ज़रिए संगठन की पहुँच पर ज़ोर दिया और कहा कि इसका काम एक सदी से भी ज़्यादा समय से लगातार चल रहा है। सौ से भी ज़्यादा सालों से आरएसएस के कार्यकर्ता देश भर में बाढ़ राहत कैंप, रक्तदान अभियान और समाज सेवा की पहल में शामिल होते रहे हैं।</p>
<p>विजयेंद्र ने आगे कहा कि संगठन सामुदायिक स्तर पर खुले तौर पर काम करता है। उन्होंने कहा, "कोई भी बिना किसी सूचना के अपने चुनाव क्षेत्र में आरएसएस शाखा में जा सकता है और ज़मीन पर हो रहे काम को देख सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस की आलोचना करने से उसकी जनता में पहचान नहीं बदलेगी। आरएसएस पर हमला करने से राजनीतिक नेतृत्व कुछ समय के लिए खुश हो सकता है, लेकिन इससे शासन की नाकामियां नहीं छिपेंगी या कांग्रेस पार्टी के विवादों का लंबा रिकॉर्ड नहीं मिटेगा। इस विवाद से कर्नाटक में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है, और नेशनल हेराल्ड विवाद एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही विचारधारा की लड़ाई में एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:55:28 +0530</pubDate>
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                <title>बिटकॉइन मामला: कांग्रेस नेता नलपाद को ईडी का समन, कर्नाटक के मंत्री ने कार्रवाई को बताया 'राजनीति से प्रेरित'</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में कुख्यात बिटकॉइन घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद को 11 जून के लिए समन जारी किया है। कर्नाटक सरकार के मंत्री यू टी खादर ने इसे 'राजनीति से प्रेरित' कार्रवाई बताया है। ईडी हैकर श्रीकी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-summons-congress-leader-nalapad-in-bitcoin-case-karnataka-minister/article-156582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कथित बिटकॉइन घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद को समन भेजे जाने से बुधवार को कर्नाटक में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। राज्य के मंत्री यू टी खादर ने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए इसे 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने मोहम्मद हारिस नलपाद और उनके भाई उमर फारूक नलपाद को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पूछताछ के लिए 11 जून को बेंगलुरु स्थित अपने कार्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह जांच कुख्यात हैकर कृष्ण रमेश उर्फ श्रीकी से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से संबंधित है।</p>
<p>इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री खादर ने सतर्क रुख अपनाया और कहा कि हालांकि वे इस समन पर अपनी आपत्ति जताते हैं, लेकिन जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने संवााददाताओं से कहा, "यह नोटिस राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है, लेकिन मुझे मामले के सभी तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं है। किसी भी जांच एजेंसी के कामकाज पर टिप्पणी करना हमारे लिए उचित नहीं होगा। एजेंसी कानून के मुताबिक अपनी जांच करेगी। मैं अभी इस मुद्दे का अध्ययन कर रहा हूं।"</p>
<p>यह समन इस हाई-प्रोफाइल बिटकॉइन घोटाला जांच में नया घटनाक्रम है, जिसने कई प्रभावशाली व्यक्तियों के कथित संबंधों के कारण कर्नाटक में समय-समय पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाई है। ईडी की जांच मुख्य रूप से वेबसाइटों को हैक करने, डिजिटल संपत्तियों (बिटकॉइन) की चोरी करने और इस अवैध गतिविधि से अर्जित धन को वैध बनाने (लांड्रिंग) के आरोपों पर केंद्रित है। नलपाद भाइयों से इससे पहले कर्नाटक पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी पूछताछ की थी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि केंद्रीय एजेंसी ने अप्रैल में कर्नाटक में कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें नलपाद भाइयों के परिसर भी शामिल थे। तब ईडी ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद हैकर श्रीकी के करीबी सहयोगी थे और इस अपराध की कमाई के लाभार्थियों में शामिल थे। हालांकि, नलपाद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:01:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुरजेवाला का केंद्र पर निशाना: भाजपा ने राज्यसभा सीट न देकर किया देवेगौड़ा का अपमान, बोले- कुमारस्वामी द्वारा इस व्यवहार को स्वीकार करना आश्चर्यजनक</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने देवेगौड़ा के बजाय एम. नागराजा को राज्यसभा टिकट दिया। सुरजेवाला ने सत्ता के लिए इस अपमान को स्वीकार करने पर जद(एस) नेता कुमारस्वामी पर भी तीखा निशाना साधा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/surjewalas-target-is-on-the-centre-bjp-insulted-deve-gowda/article-156344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/randeep-singh-surjewala.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कांग्रेस महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने राज्यसभा के लिए उन्हें नामित करने के बजाय पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एम. नागराजा को प्राथमिकता दी है। साथ ही उन्होंने जनता दल (सेक्युलर) नेतृत्व पर भी भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने को लेकर निशाना साधा।</p>
<p>सुरजेवाला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक तीखी टिप्पणी में कहा कि भाजपा का यह कथित फैसला देवेगौड़ा जैसे वरिष्ठ नेता का अपमान है और यह दर्शाता है कि भाजपा अपने सहयोगी जद(एस) को लगातार नजरअंदाज और अपमानित करती रही है। उन्होंने लिखा, "कल देर रात भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा को राज्यसभा के लिए नामांकन देने से इनकार कर दिया और उनकी जगह पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष तथा जिला भवन निर्माण प्रभारी एम. नागराजा को चुनने का फैसला किया। भाजपा ने एक पूर्व प्रधानमंत्री के बजाय एम. नागराजा को प्राथमिकता दी।"</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि जद(एस) नेता और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा इस तरह के व्यवहार को लगातार स्वीकार करना आश्चर्यजनक है और यह केवल सत्ता से चिपके रहने की राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "भाजपा द्वारा जद(एस) और उसके नेतृत्व का लगातार अपमान किया जा रहा है और कुमारस्वामी केवल मंत्री पद बचाए रखने के लिए इसे स्वीकार करते जा रहे हैं। यह बेहद चौंकाने वाला और आंखें खोल देने वाला मसला है। इस अपमान को स्वीकार करना आत्मसम्मान की पराकाष्ठा तक पहुंची हुई स्थिति को दर्शाता है।"</p>
<p>सुरजेवाला ने इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में देवेगौड़ा को भाजपा उम्मीदवार जी.एस. बसवराजु ने हराया था। उन्होंने यह भी कहा कि देवेगौड़ा ने कभी सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि कुमारस्वामी भाजपा के साथ हाथ मिलाते हैं तो वह उन्हें "अपना पुत्र मानने से इनकार कर देंगे।" सुरजेवाला के अनुसार अक्टूबर 2023 में जद(एस) के भाजपा के साथ गठबंधन करने के बाद ये सभी राजनीतिक सिद्धांत छोड़ दिये गये। </p>
<p>कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि हालिया घटनाक्रम भाजपा-जद(एस) गठबंधन की असमान प्रकृति को उजागर करता है और यह दिखाता है कि जद(एस) सत्ता के लिए अपने राजनीतिक सिद्धांतों की बलि देने को तैयार है। उन्होंने कहा, "इससे साफ है कि कर्नाटक में अब जद(एस) का एकमात्र सिद्धांत किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना और सत्ता में बने रहना है।" सुरजेवाला के आरोपों पर भाजपा और जद(एस) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:52:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक में नए युग की शुरुआत: डीके शिवकुमार ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, जी. परमेश्वर बने डिप्टी सीएम</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्दारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस भव्य समारोह में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जबकि डॉ. जी. परमेश्वर ने डिप्टी सीएम पद की कमान संभाली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-era-begins-in-karnataka-dk-shivakumar-takes-oath-as/article-155869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dk.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरू। कर्नाटक में श्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और औपचारिक रूप से राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाली नयी सरकार की कमान संभाली। शिवकुमार कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने यहां स्थित लोक भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इसी के साथ ही श्री शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले आठवें मुख्यमंत्री भी बन गये हैं।उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं, धार्मिक गुरुओं और जानी-मानी हस्तियों की विशाल मौजूदगी के बीच पदभार ग्रहण किया। उनके साथ 13 मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिससे कैबिनेट गठन का पहला चरण पूरा हो गया। इस कार्यक्रम के साथ ही नयी मंत्रिपरिषद को कार्यकारी जिम्मेदारियों का औपचारिक हस्तांतरण हो गया।</p>
<p>इस समारोह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक के पार्टी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया मौजूद थे। इसके साथ ही कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया, जिससे इस अवसर का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ गया। समारोह में धार्मिक गुरु, फिल्म जगत की हस्तियां, खिलाड़ी और उद्योगपति भी मौजूद थे। चालीस से अधिक धर्मगुरु समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा अभिनेता रविचंद्रन, अभिनेत्री जयमाला, अभिनेता किच्चा सुदीप, अभिनेत्री रम्या, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद और उद्योगपति अनिल कुंबले जैसी जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद थीं।</p>
<p>शिवकुमार के परिवार के सदस्य भी इस समारोह में उपस्थित थे, जिनमें उनकी मां गौरम्मा, पत्नी उषा और उनके बच्चे शामिल थे। परंपरा से हटकर शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम दिशा के बजाय पूर्व दिशा की ओर मुख करके आयोजित किया गया। यह निर्णय आध्यात्मिक और ज्योतिषीय सलाहकारों की सलाह पर लिया गया था। लोक भवन परिसर में स्थित 'ग्लास हाउस' में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जहां निर्धारित स्थानों पर लगभग 3,500 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। धर्मगुरुओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी, जबकि समारोह की कार्रवाई को सभी तक पहुंचाने के लिए छह एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से अधिक वीआईपी पास जारी किए गए थे। नये शपथ लेने वाले मंत्रियों में श्री जी. परमेश्वर, के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायर गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्दारमैया, बैरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:36:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सिद्दारमैया ने जाते-जाते शिवकुमार, राहुल के लिए खड़ी की मुश्किलें, पढ़ें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूरी देकर कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी उलझन में डाल दिया है। इस फैसले से राहुल गांधी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार असहज स्थिति में हैं, क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय की नाराजगी और नया आरक्षण समीकरण पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-created-problems-for-shivkumar-rahul-while-leaving-read-what/article-155452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dkk.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जाते-जाते राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की तैयार की गयी 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूर कर कांग्रेस नेतृत्व को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सियासत में कभी-कभी ऐसे लम्हे आते हैं जब कोई सरकारी फाइल सिर्फ आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसका अपना एक अलग वजूद बन जाता है। कर्नाटक की जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट भी एक ऐसा ही मोहरा है। जहां निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस अफसरशाही इत्मीनान और राजनीतिक अंतिम रूप के साथ इसे मंजूर किया है, उसने खामोशी से वही काम करना शुरू कर दिया है, जो आंकड़े अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं- </p>
<p><strong>ताकतवरों की नींद उड़ाना।</strong></p>
<p>रिपोर्ट की मंजूरी देने की एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके भीतर ज्यादा दिलचस्प हलचल छिपी हुई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी अब खुद को ऐसी असहज स्थिति में पा रहे हैं, जहां उन्हें एक ऐसे दस्तावेज़ पर जवाब देना भारी पड़ रहा है। वे उसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कर्नाटक के सियासी मिजाज के मंझे खिलाड़ी सिद्दारमैया ने शायद वही किया है, जो तजुर्बेकार सियासतदान अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं एक ऐसा माहौल छोड़ जाना, जो कानूनी तौर पर तो बिल्कुल साफ-सुथरा हो लेकिन राजनीतिक रूप से काफी उलझा हुआ हो। यह रिपोर्ट एक बार मंजूर होने के बाद अब सिर्फ कोई सुझाव नहीं रह गयी है। यह एक ऐसा सवाल बन चुकी है, जो जवाब के इंतजार में है।</p>
<p>शिवकुमार के लिए यह मुद्दा फिलहाल सबसे अहम है और सीधे उनके क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राज्य का जातीय समीकरण कभी भी हवा-हवाई नहीं होता। यह उन समुदायों के रूप में सामने आता है, जो पुरानी बातें याद रखते हैं, ऐतराज जताते हैं और एकजुट होते हैं। वोक्कालिगा समुदाय का एक वर्ग, जो पहले भी जातीय सर्वेक्षण को लेकर हुए विवादों को लेकर संवेदनशील रहा है, इसके क्रियान्वयन की दिशा में उठाए जाने वाले किसी भी कदम पर कड़ी और सतर्क निगाह रख सकता है। पद्धति और आंकड़ों पर बहस भले ही दफ्तरों में हो, लेकिन पहचान और प्रतिनिधित्व का सवाल सड़कों पर तय होता है।</p>
<p>राहुल गांधी की परेशानी का स्तर थोड़ा अलग है। जातिगत जनगणना के हक में उनका लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक रुख अब इसे अमली जामा पहनाने में टेडी खीर नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी आदत के मुताबिक, इस सूरत-ए-हाल को नीति के विकास के रूप में नहीं, बल्कि एक सियासी विरोधाभास के तौर पर देखना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा बोलती है और राज्यों में दूसरी। कांग्रेस जैसा लाजिमी है, इस बात से सरासर इनकार करती है।</p>
<p>अब कांग्रेस के सामने दो रास्ते खुलते हैं, और दोनों में से कोई भी रास्ता आरामदेह नहीं है। अगर इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाता है, तो इसके प्रशासनिक ईमानदारी और फिर उसके बाद आने वाली राजनीतिक हिचकिचाहट का एक और भारतीय उदाहरण बन जाने का खतरा है। इसने पिछड़े समुदायों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों के बीच जो उम्मीदें जगाई हैं, वे इतनी आसानी से खत्म नहीं होंगी। ऐसी सूरत में इस रिपोर्ट को इस बात के लिए कम याद किया जायेगा कि इसमें क्या कहा गया था, बल्कि इस बात के लिए ज्यादा याद किया जायेगा कि इसके साथ क्या नहीं किया गया।</p>
<p>अगर इसे लागू किया जाता है, तो इसके नतीजे ज्यादा त्वरित और साफ तौर पर दिखाई देने वाले होंगे। आरक्षण का नये सिरे से निर्धारण समुदायों का प्रतिनिधित्व और जनसांख्यिकीय दावे सक्रिय रूप से राजनीति के केंद्र में आ जायेंगे। समर्थन और विरोध दोनों एक साथ खड़े होंगे। कानूनी पेचीदगियां सामने आ सकती हैं। प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं तथा गठबंधन को संभालना और भी मुश्किल हो जायेगा। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए इसका मतलब पार्टी के अनुशासन और अपने समुदाय की भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी और श्री गांधी के लिए इसका मतलब अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को उसकी तमाम अपरिहार्य उलझनों के साथ प्रशासनिक हकीकत में बदलना होगा। दोनों ही सूरतों में दबाव खत्म नहीं होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में सिद्दारमैया के इस रिपोर्ट को मंजूर किये जाने को सिर्फ कागजी या प्रक्रियात्मक कार्रवाई से बढ़कर देखा जा रहा है। इस जिम्मेदारी को पार्टी के भीतर खामोशी लेकिन मजबूती के साथ दूसरों के कंधों पर डालने के तौर पर देखा जा रहा है- एक तजुर्बेकार सियासतदान का यह तय करने का तरीका कि एक बार जो फैसला ले लिया गया, वह आराम से सिर्फ उनका ही होकर न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:09:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक राज्यपाल ने स्वीकार किया सिद्दारमैया का इस्तीफा: मंत्रिपरिषद भंग, जानें कब शपथ लेंगे डीके शिवकुमार ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राजभवन के आदेशानुसार वर्तमान मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। नई वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्दारमैया ही राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-governor-accepts-siddaramaiahs-resignation-council-of-ministers-dissolved-know/article-155347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)27.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सिद्दारमैया के अपना इस्तीफा सौंपे जाने के एक दिन बाद राज्यपाल ने यह कदम उठाया। यहां लोक भवन से जारी एक आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, राज्यपाल ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सिद्दारमैया मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते रहेंगे।</p>
<p>सिद्दारमैया ने गुरूवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उनकी जगह किसे मुख्यमंत्री पद सौंपा जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:24:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इस्तीफे से पहले इमोशनल हुए शिवकुमार: छुए सिद्दायमैयार के पैर, बोले- आलाकमान से किया वादा निभाएंगे सिद्धारमैया</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के आवास 'कावेरी' पर आयोजित नाश्ते की बैठक में राजनीतिक सौहार्द का अनोखा नजारा दिखा। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सिद्दारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। कयासबाजियों के बीच दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसे पार्टी की अंदरूनी एकजुटता के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/before-resigning-shivkumar-became-emotional-touched-the-feet-of-siddaramaiah/article-155263"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka-cm.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'कावेरी' में गुरुवार को आयोजित नाश्ते की बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। यह सम्मान और राजनीतिक सौहार्द का एक उल्लेखनीय प्रदर्शन था, जिसने कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व समीकरणों पर चल रही चर्चा के बीच तुरंत ध्यान आकर्षित किया। यह बैठक सिद्दारमैया द्वारा आयोजित की गई थी और इसमें शिवकुमार, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, के साथ-साथ कई कैबिनेट मंत्री और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।</p>
<p>शिवकुमार द्वारा सिद्दारमैया के पैर छूने और उसके बाद दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें दोनों नेताओं के कार्यालयों से जारी की गईं, जो बैठक से जुड़ी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गईं। ये तस्वीरें सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से वायरल हुईं, जहां इन्हें राज्य कांग्रेस नेतृत्व के भीतर एकता और समन्वय के समन्वित संदेश के रूप में देखा गया। नाश्ते पर हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री के खेमे से जुड़े कई मंत्री और विधायक भी शामिल हुए, जिससे सत्तारूढ़ दल के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति और भी स्पष्ट हो गई।</p>
<p>गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि उन्हें बैठक की विशिष्ट जानकारी नहीं है और वे विवरण जुटाएंगे। उन्होंने दोहराया कि नेतृत्व संबंधी कोई भी निर्णय पार्टी उच्च कमान के पास है। एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के संबंध में कोई औपचारिक चर्चा या निर्णय नहीं लिया गया है। इस बीच, राज्यपाल थावरचंद गहलोत गुरुवार को बेंगलुरु में उपस्थित नहीं थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 15:03:04 +0530</pubDate>
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                <title>क्या कांग्रेस के हाथों से फिसल रहा कर्नाटक? दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित;  सिर्फ नेतृत्व नहीं, नियंत्रण भी</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दिल्ली आलाकमान ने तलब किया है। 136 विधायकों के स्पष्ट बहुमत के बावजूद दोनों गुटों में नेतृत्व परिवर्तन और रोटेशन फॉर्मूले को लेकर रस्साकशी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-karnataka-slipping-from-the-hands-of-congress-the-claims/article-155038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति को एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच शक्ति संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है और यह मुद्दा केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता संतुलन, महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक अनुशासन को संभालने की संरचनात्मक चुनौती का है। सिद्दारमैया और शिवकुमार को दिल्ली तलब किये जाने तथा पार्टी आलाकमान के साथ उनकी बैठकों के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। यह सवाल कांग्रेस सरकार के 2023 में गठन के समय से ही मौजूद हैं। </p>
<p>फर्क सिर्फ इतना है कि अब दोनों खेमों की ओर से संकेत अधिक स्पष्ट हो गये हैं और पार्टी के कुछ वर्गों में अधीरता बढ़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक राजनीतिक विरोधाभास है। कर्नाटक में कांग्रेस संख्यात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन आंतरिक रूप से पूरी तरह एकजुट नहीं है। 224 सदस्यीय विधानसभा में 136 विधायकों के साथ पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद यह मजबूती स्थिर नेतृत्व सहमति में तब्दील नहीं हो सकी है। स्थिति को अब तक अनौपचारिक समझौतों, परस्पर अपेक्षाओं और समय-समय पर आलाकमान के हस्तक्षेप के जरिए संभाला जाता रहा है। सिद्दारमैया अनुभव, जनाधार आधारित राजनीति और 'अहिंदा' सामाजिक समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने लंबे समय से कर्नाटक में कांग्रेस के आधार को मजबूत किया है। उनके समर्थक उन्हें ऐसा स्थिर नेता मानते हैं जिसने चुनावी सफलता दिलायी और जो अब भी विधायकों के बीच प्रभाव बनाए हुए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, शिवकुमार संगठनात्मक क्षमता, चुनावी रणनीति और 2023 की जीत में अपनी भूमिका के आधार पर दावेदारी पेश करते हैं। उनका खेमा संख्या बल के साथ-साथ योगदान, समय और पार्टी संगठन पर पकड़ को भी अपनी ताकत मानता है। कांग्रेस आलाकमान के सामने चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। एक पक्ष को संतुष्ट करने से दूसरे पक्ष में असंतोष बढ़ने का जोखिम बना रहता है। इसी कारण समाधान की जगह संतुलन साधने की राजनीति जारी है।</p>
<p>यही वजह है कि कर्नाटक की राजनीति बार-बार "रोटेशन", "मंत्रिमंडल फेरबदल" और "आलाकमान चर्चा" जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। ये स्थायी समाधान नहीं, बल्कि दबाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने के उपाय हैं, जो सरकार के भीतर दो शक्ति केंद्रों की मूल समस्या को टालते रहे हैं। हाल के दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा भी इसी पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल विस्तार से अस्थायी संतुलन जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इससे नेतृत्व अधिकार का मूल प्रश्न हल नहीं होता। इससे केवल मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया जाता है।</p>
<p>असल सवाल यह नहीं है कि सिद्दारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बनेंगे। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था है, जिसके तहत उस राज्य में दोहरे नेतृत्व को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके, जहां चुनावी सफलता ने कई दावेदार पैदा कर दिये हैं, लेकिन आलाकमान के अलावा कोई स्पष्ट निर्णायक व्यवस्था नहीं है। दल-बदल, विधानसभा अंकगणित या विपक्षी समीकरणों को लेकर लगायी जा रही अटकलों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल किसी भी गुट के पास सरकार की स्थिरता को प्रभावित करने का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता और संख्या बल अब भी कांग्रेस के पक्ष में है। ऐसे में आलाकमान केवल दर्शक नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने वाली प्रमुख शक्ति है। </p>
<p>हालांकि, उसकी क्षमता भी सीमित है। निर्णयों में देरी से अटकलें बढ़ती हैं, अस्पष्ट संकेतों से गुटीय व्याख्याओं को बल मिलता है और समझौता आधारित समाधान अक्सर उत्तराधिकार के सवाल को हल करने के बजाय टाल देते हैं। कर्नाटक की स्थिति भारतीय राजनीति के व्यापक स्वरूप को भी दर्शाती है, जहां मजबूत क्षेत्रीय नेताओं, व्यक्तिगत नेटवर्क और केंद्रीकृत पार्टी नियंत्रण के कारण चुनावी सफलता के बाद टकराव की स्थिति पैदा होती है, खासकर तब जब नेतृत्व पहले से स्पष्ट नहीं किया गया हो।</p>
<p>मंत्रिमंडल संतुलन, विभिन्न गुटों को आश्वस्त करने और नियंत्रित राजनीतिक संदेशों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। फिलहाल राजनीतिक हित निरंतरता के पक्ष में हैं, इसलिए किसी बड़े टकराव की संभावना कम मानी जा रही है।हालांकि सरकार संख्या बल के लिहाज से स्थिर है, लेकिन आंतरिक रूप से अस्थिर बनी हुई है। इसके पीछे वह मूल प्रश्न अब भी अनसुलझा है, जिससे पार्टी 2023 से बचती रही है; जब जीत सामूहिक हो, लेकिन नेतृत्व विवादित हो, तब अधिकार का निर्धारण कौन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:13:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिल्ली ऑनलाइन सट्टेबाजी: 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय की 18 ठिकानों पर छापेमारी, तीन आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 18 ठिकानों पर छापेमारी कर ₹1,000 करोड़ के ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का पर्दाफाश किया। देर रात तक चली इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 'गेम्सक्राफ्ट' और 'पॉकेट52' जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए धोखाधड़ी और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/enforcement-directorate-raids-18-locations-in-delhi-online-betting-scam/article-153120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 1,000 करोड़ रुपये के ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट से जुड़े बड़े अभियान के तहत दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बेंगलुरु और अन्य स्थानों पर लगभग 18 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की। गुरुवार सुबह शुरू हुई यह छापेमारी कल देर रात एक बजे तक चली। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, तलाशी के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किये गये आरोपियों के नाम दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वी कुमार और विकास तनेजा है। दीपक सिंह अहलावत हरियाणा के रहने वाला है, जबकि पृथ्वी कुमार उत्तराखंड का निवासी है।</p>
<p>कार्रवाई के दौरान ईडी ने कथित तौर पर जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किये हैं। सूत्रों ने बताया कि यह मामला लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है। ईडी के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, इसके निदेशकों और मामले से जुड़े कई अन्य आरोपियों के खिलाफ यह कार्रवाई की।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में पहले बेंगलुरु के स्थानीय थानों में कई प्राथमिकी दर्ज की गयी थीं। इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच अपने हाथ में ली और आगे की कार्रवाई शुरू की। एजेंसी ने पिछले साल मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य कंपनियों से जुड़े एक अलग लेकिन संबंधित मामले में भी तलाशी अभियान चलाया था। पिछले वर्ष 18 नवंबर से 22 नवंबर के बीच, ईडी ने बेंगलुरु और गुरुग्राम में मेसर्स निर्देश नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (एनएनपीएल), मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जीटीपीएल) के कार्यालयों के साथ-साथ उनके निदेशकों और अन्य संदिग्धों के आवासों पर छापेमारी की थी।</p>
<p>वह जांच कर्नाटक पुलिस की दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की गयी थी। ईडी के अनुसार, प्राथमिकियों में आरोप लगाया गया था कि एनएनपीएल की तरफ से संचालित गेमिंग प्लेटफॉर्म 'पॉकेट52' बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी में शामिल था। इसमें खेल के परिणामों में हेरफेर, खिलाड़ियों के बीच मिलीभगत, तकनीकी खामियां, पैसे निकालने पर प्रतिबंध और प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप शामिल थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/enforcement-directorate-raids-18-locations-in-delhi-online-betting-scam/article-153120</link>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 13:26:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बेंगलुरू सिटी स्टेशन पर यार्ड रिमॉडलिंग कार्य के कारण रेल यातायात प्रभावित </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण पश्चिम रेलवे के यार्ड रिमॉडलिंग कार्य के कारण बेंगलुरु-जोधपुर रेलसेवा अगस्त में आंशिक रूप से रद्द रहेगी। यह ट्रेन अब यशवंतपुर तक ही संचालित होगी। वहीं, अजमेर-मैसूरू रेलसेवा को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यात्री अपनी यात्रा से पूर्व संशोधित समय-सारणी और स्टेशनों की जानकारी अवश्य जाँच लें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rail-traffic-affected-due-to-yard-remodeling-work-at-bengaluru/article-152000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/train_03.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से केएसआर बेंगलुरू सिटी स्टेशन पर किए जा रहे यार्ड रिमॉडलिंग कार्य के कारण रेल यातायात प्रभावित रहेगा। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार केएसआर बेंगलुरू सिटी - जोधपुर रेलसेवा 2 अगस्त को केएसआर बेंगलुरू सिटी -यशवंतपुर के मध्य, जोधपुर - केएसआर बेंगलुरू सिटी रेलसेवा 30 जुलाई व 1 अगस्त को यशवंतपुर -केएसआर बेंगलुरू सिटी के मध्य, केएसआर बेंगलुरू सिटी - जोधपुर रेलसेवा 3 अगस्त को केएसआर बेंगलुरू सिटी -यशवंतपुर के मध्य आंशिक रद्द रहेगी। इसी प्रकार अजमेर-मैसूरू रेलसेवा 31 जुलाई को परिवर्तित मार्ग अरसीकेरे, हासन, कृष्णराज नगर, मैसूरू होकर संचालित होगी ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:55:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रिप्टोकरेंसी मामला: कर्नाटक के कांग्रेस विधायक हारिस के परिवार पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में कांग्रेस विधायक एनए हारिस के बेटों के ठिकानों पर छापेमारी की। करीब एक दर्जन परिसरों पर जारी इस तलाशी का संबंध 2017 के बिटकॉइन घोटाले और मास्टरमाइंड 'श्रीकी' से है। अधिकारियों ने आरोपियों पर अपराध की कमाई का लाभार्थी होने का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cryptocurrency-case-eds-major-action-against-the-family-of-karnataka/article-151098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में राज्य के कांग्रेस विधायक एनए हारिस के परिवार से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, इन ठिकानों में उनके दो बेटों के परिसर भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत बेंगलुरु में लगभग एक दर्जन परिसरों की तलाशी ली जा रही है। इन छापों में हारिस के बेटे मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद से जुड़ी संपत्तियों के साथ-साथ क्रिप्टो-संबंधित अपराधी श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीकी से जुड़े ठिकानों की भी तलाशी ली गयी।</p>
<p>जांचकर्ताओं ने कहा कि यह मामला 2017 के क्रिप्टोकरेंसी मामले में कर्नाटक पुलिस के दर्ज एफआईआर और चार्जशीट से उपजा है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों में कथित सेंधमारी शामिल थी। इस मामले में श्रीकी और उसके सहयोगी आरोपी हैं। अधिकारियों ने आगे आरोप लगाया कि मोहम्मद हारिस और उमर फारूक उन अपराधों की कमाई के लाभार्थी हैं, जो जांच के घेरे में आये क्रिप्टो-अपराधों के माध्यम से अर्जित की गयी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़ा हादसा टला! हैदराबाद से हुबली जा रही Fly91 फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी, चार घंटे तक हवा में अटकी कई यात्रियों की जिंदगी, कोई हताहत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद से हुबली जा रही फ्लाई91 फ्लाइट में तकनीकी खराबी के कारण यात्रियों की जान संकट में पड़ गई। लैंडिंग में विफलता के बाद विमान घंटों हवा में चक्कर काटता रहा, जिससे अफरा-तफरी मच गई। पायलट की सूझबूझ से विमान को बेंगलुरु डायवर्ट कर सुरक्षित उतारा गया। परिजनों ने एयरलाइंस की लापरवाही पर गहरा रोष जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/major-accident-averted-due-to-technical-fault-in-fly91-flight/article-151060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/fly-91.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। हैदराबाद से हुबली जा रही फ्लाई91 एयरलाइंस की फ़्लाइट में अचानक ही तकनीकी खराबी आई जिसके कारण करीब 4 घंटे त​क कई यात्रियों की जिंदगी हवा में लटक गई। इसके बाद यात्रियों में घबराहट फैल गई और अफरा तफरी मच गई। रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दोपहर करीब 3 बजे फ्लाइट आईसी3401 रवाना हुई, लेकिन हुबली पहुंचने से पहले ही विमान में तकनीकी खराबी आ गई और पायलटों को लैंडिंग रोकनी पड़ी। जिसके बाद पायलटों को स्थिति संभालने के लिए विमान को एक बार फिर से हवा में उड़ाना पड़ा ताकि लैंडिंग के समय कोई हादसा नहीं हो सके। </p>
<p>इस दौरान यात्रियों के बीच दहशत का माहौल बन गया और सभी यात्री डर के कारण प्रार्थना करने लगे और कुछ तो रोने भी लग गए। इस हादसे के बाद यात्रियों के परिजनों ने एयरलाइंस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एयरलाइंस ने स्थिति को लेकर अभी तक स्पष्ट अपडेट नहीं किया है जिससे उनमें डर का माहौल बना हुआ है। पायलट ने स्थिति को भांपते हुए काफी कोशिशें के बाद विमान को बेंगलुरू डायवर्ट किया और करीब साढ़े सात बजे विमान को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया। हालांकि, तकनीकी खराबी और जानकारी की कमी को लेकर यात्रियों के परिजनों ने एयरलाइंस पर सवाल उठाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/major-accident-averted-due-to-technical-fault-in-fly91-flight/article-151060</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:53:58 +0530</pubDate>
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