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                <title>mustard - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खाद्य तेल की खपत कम करने की पीएम मोदी की अपील का स्वागत, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री की खाद्य तेल उपभोग कम करने की अपील का व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। भारत अपनी खपत का 60% आयात करता है। राजस्थान, जहाँ सरसों उत्पादन 60 लाख टन तक पहुँच चुका है, अब 120 लाख टन का लक्ष्य रखकर देश को आयात मुक्त और खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने की ओर अग्रसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pm-modis-appeal-to-reduce-consumption-of-edible-oil-welcomed/article-153459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raja.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खाद्य तेल के उपभोग को कम करने की अपील का व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्वागत किया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता ने कहा कि वैश्विक संकट और बढ़ती आयात निर्भरता के दौर में देश को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। देश में प्रतिवर्ष लगभग 255 लाख टन खाद्य तेल की खपत होती है, जिसमें से करीब 145 लाख टन तेल आयात किया जाता है। भारत में पॉम ऑयल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से, सोयाबीन ऑयल अमेरिका और ब्राजील से तथा सनफ्लावर ऑयल रूस और यूक्रेन से आयात होता है। </p>
<p>ऐसे में वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बाबू लाल गुप्ता ने कहा कि राजस्थान ने सरसों उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में सरसों का उत्पादन पहले 30 लाख टन था, जो बढ़कर 60 लाख टन तक पहुंच चुका है और भविष्य में इसे 120 लाख टन तक ले जाने की क्षमता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राजस्थान को “सरसों उत्पादक राज्य” के रूप में विशेष पहचान दी जाए, ताकि किसानों को प्रोत्साहन मिल सके और देश खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सके। उन्होंने कहा कि यदि देश में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और खाद्य तेल के अनावश्यक उपभोग को नियंत्रित किया जाए तो विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:29:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरसों-चना खरीद 10 अप्रैल से, किसानों को खरीद केन्द्रों पर नहीं हो असुविधा, विभाग की तैयारी पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[10 अप्रेल से शुरु की जा रही सरसों-चना खरीद की तैयारियां सहकारिता विभाग ने पूरी कर ली है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mustard-and-purchase-purchase-from-april-10-farmers-should-not/article-109319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/sahkar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 10 अप्रेल से शुरु की जा रही सरसों-चना खरीद की तैयारियां सहकारिता विभाग ने पूरी कर ली है। किसानों को खरीद केंद्र पर असुविधा का सामना नहीं करना पड़े, इस दिशा में विभाग के अधिकारी नियमित मोनिटरिंग कर रहे है।</p>
<p>यदि लगातार किसी ठेकेदार की शिकायत मिलती है तो उसे डिबार करने की कार्यवाही की जाएगी। अधिकारियों को टेंडर फेल होने की स्थिति में दूसरा विकल्प तैयार रखने के निर्देश दिए गए है। प्रभारी अधिकारी पूरे समय खरीद केन्द्र पर मौजूद रहेगे और एक अधिकारी को एक से अधिक खरीद केन्द्र का चार्ज नहीं दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 15:04:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जहां पर समर्थन मूल्य पर सरसों चना की खरीद रहेगी शून्य, वे खरीद केंद्र अगले सीजन में होंगे बंद</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत सरकार द्वारा सरसों खरीद के लिए 14,61,028 मीट्रिक टन एवं चना खरीद 4,52,365 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य स्वीकृत किए गए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-procurement-centers-where-the-purchase-of-mustard-and-gram/article-78802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/mustard-gram.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। समर्थन मूल्य पर चना और सरसों की खरीद के लिए स्थापित किए गए ऐसे केंद्र जिन पर सरसों व चना की खरीद शून्य रही है, उन केन्द्रों का आगामी सीजन में चयन नहीं किया जाए। आवश्यकता महसूस होने पर यदि केन्द्रों के स्थापित करने की मांग भविष्य में प्राप्त होती है, तो पुनः विचार किया जाएगा। खरीद व्यवस्था में समिति या विभागीय अधिकारियों द्वारा यदि कोई अनियिमितता की जाती है तो उनके विरूद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>231 केन्द्रों पर सरसों चना की खरीद</strong> <br />सरसों चना की खरीद के लिए राज्य में  231 केन्द्र स्थापित है। पिछले सप्ताह तक 1 लाख 22 हजार 454 किसानों से 2.61 लाख मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है। जिसकी राशि 1475 करोड़ रूपए है। भारत सरकार द्वारा सरसों खरीद के लिए 14,61,028 मीट्रिक टन एवं चना खरीद 4,52,365 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य स्वीकृत किए गए है। सरसों एवं चना का घोषित समर्थन मूल्य क्रमशः 5650 एवं 5440 है। चना विक्रय के लिए 32351 किसानों की ओर से पंजीकरण करवाया हुआ है, जिसमें से 28620 किसानों को तुलाई दिनांक आवंटित करने के उपरांत भी मात्र 642 किसानों द्वारा 1253 मैट्रिक टन चना क्रय केन्द्रों पर लाया गया है। चने के बाजार भाव समर्थन मूल्य दर से अधिक होने के कारण किसानों द्वारा क्रय केन्द्रों पर चना विक्रय करने में रूचि नही ली जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 May 2024 19:11:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक मशीन पर भार, तेल की धार के लिए कतार</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में रोजाना मंडी में सरसों की आवक बढ़ने से रोजाना किसानों को कतारों में लगकर जांच करवाने के लिए मजूबर होना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/load-on-a-machine--queuing-for-a-squirt-of-oil/article-71775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ek-machine-pr-bhar,-tel-ki-dhar-k-liye-ktar...kota-news-04-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। भामाशाह कृषि उपज मंडी में सरसों बेचने आने वाले किसानों को घंटों कतार में लगकर जिन्स की जांच करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके चलते किसानों का काफी समय बर्बाद हो रहा है, वहीं नीलामी स्थल पर लगाई गई ढेरी की सुरक्षा की चिन्ता भी सताती रहती है। इस बार किसानों को सरसों की नीलामी से पूर्व तेल की मात्रा की प्रयोगशाला में जांच करवानी पड़ रही है। कृषि उपज मंडी कार्यालय की प्रयोगशाला में जांच के लिए किसानों को नीलामी स्थल पर ढेरी लगाने के बाद सुबह से ही कतार में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>प्रयोगशाला में एक ही जांच मशीन</strong><br />कृषि उपज मंडी कार्यालय की प्रयोगशाला में सरसों की जांच के लिए सिर्फ एक मशीन ही है। जहां एक सैम्पल की जांच में तीन से चार मिनट लगते हैं। ऐसे में किसानों को इंतजार करना पड़ता है। भामाशाहमंडी में कोटा जिले के अलावा हाड़ौती और मध्यप्रदेश के किसान भी अपनी फसल बेचने के लिए आते हैं। ऐसे में किसानों की संख्या में तुलना में एक सरकारी जांच मशीन नाकाफी है। वर्तमान में रोजाना मंडी में सरसों की आवक बढ़ती जा रही है। जिससे अब रोजाना किसानों को कतारों में लगकर जांच करवाने के लिए मजूबर होना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इसलिए करवानी पड़ रही जांच</strong><br />मंडी की प्रयोगशाला में सरसों के नमूने की जांच करवाने पहुंचे किसान कोमल प्रकाश वैष्णव, सत्यनारायण गुर्जर व गिर्राज धाकड़ ने बताया कि सरसों के नमूने की जांच करवाने के लिए यहां लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन सरसों की जांच करवाना भी जरूरी है। इससे किसानों को नुकसान की संभावना कम रहती है। सरसों की मशीन से जांच होने के बाद उसमें तेल की मात्रा का पता लग जाता है। जांच के बाद बकायदा इसकी पर्ची मिलती है। इस आधार पर वह व्यापारी के पास सरसों बेचते हैं तो उससे दाम कम लगने की संभावना नहीं रहती है और किसानों को नुकसान नहीं होता है।</p>
<p><strong>सरकारी जांच सस्ती और प्राइवेट महंगी</strong><br />किसानों ने बताया कि सरसों में नमी की मात्रा के आधार पर तेल की स्थिति का पता लगता है। अभी सरसों में नमी ज्यादा होने की समस्या आ रही है। इसलिए जांच करवानी पड़ रही है। गेट पास बनवाने के बाद सरकारी प्रयोगशाला में एक ढेर की जांच करवाने के लिए किसान से 30 रुपए और दो ढेर के 50 रुपए लिए जाते हैं। वहीं मंडी से बाहर प्राइवेट प्रयोगशाला में एक ढेर की जांच के लिए 50 रुपए लिए जाते हैं। ऐसे में प्राइवेट जांच महंगी पड़ती है। इसलिए किसान अपनी बचत करने के लिए सरकारी प्रयोगशाला में जांच करवाने को मजबूर हैं। मंडी प्रशासन को सरकारी प्रयोगशाला में मशीनों की संख्या बढ़ना चाहिए। मंडी में अभी तो करीब 20 हजार कट्टे के करीब ही सरसों की आवक हो रही है। सीजन में यह आवक जब बढ़ जाएगी, तब जांच संभव नहीं होगी। अभी रोजाना 600 किसान जांच करवा रहे हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />किसान सरसों की जांच करवाएं या नहीं करवाएं। जिन्स को खरीदा जा रहा है। सरसों की आवक के शुरूआती दौर में नमी अधिक आने के कारण कई किसान स्वयं की मर्जी से जांच करवाने पहुंच रहे हैं। हालांकि अब आगे आने वाली सरसों में जांच जैसी कोई आवश्यकता नहीं होगी। व्यापारी पहले भी अपनी परख के अनुसार ही माल की खरीद करते आएं हैं।<br /><strong>- महेश खंडेलवाल, प्रमुख व्यापारी</strong></p>
<p>सरसों की जांच करवाना अनिवार्य नहीं हैं। किसान अपनी मर्जी से यह जांच करवा रहा है ताकि उसकों फसल की स्थिति के बारे में पता चल सके। फिलहाल मंडी की प्रयोगशाला में एक जांच मशीन लगी हुई है। एक जांच मशीन और मंगवाने के लिए लिखा गया है। <br /><strong>- जवाहरलाल नागर, सचिव, भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 15:48:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरसों, मूंगफली और वनस्पति तेल में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[ बीते सप्ताह दाल-दलहन के बाजार में तेजी का रुख रहा। सप्ताहांत पर मसूर दाल 200 रुपए, मूंग दाल 100 रुपए और उड़द दाल 400 रुपए प्रति क्विंटल चढ़ गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/increase-in-mustard-groundnut-and-vegetable-oil/article-55667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/vegetables-oil.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/नवज्योति, नई दिल्ली। विदेशी बाजारों में गिरावट के बावजूद स्थानीय स्तर पर मांग निकलने से बीते सप्ताह दिल्ली थोक जिंस बाजार में सरसों तेल, मूंगफली तेल और वनस्पति तेल के भाव में तेजी रही। तेल-तिलहन : वैश्विक स्तर पर मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का सितंबर वायदा सप्ताहांत पर 21 रिंगिट फिसलकर 3834 रिंगिट प्रति टन पर आ गया। इसी तरह सितंबर का अमेरिकी सोया तेल वायदा 0.74 सेंट की गिरावट लेकर 63.12 सेंट प्रति पौंड बोला गया। सप्ताहांत पर सरसों तेल 146 रुपए, मूंगफली तेल 220 रुपए और वनस्पति तेल 133 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हो गया। वहीं, सूरजमुखी तेल, सोया रिफाइंड और पाम आॅयल के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ और वे पुराने स्तर पर पडे रहे। सप्ताहांत पर सरसों तेल 12454 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली तेल 20732 रुपए प्रति क्विंटल, सूरजमुखी तेल 13407 रुपए प्रति क्विंटल, सोया रिफाइंड 12088 रुपए प्रति क्विंटल, पाम आॅयल 9000 रुपए प्रति क्विंटल और वनस्पति तेल 11133 रुपए प्रति क्विंटल पर रहा। <br /><br /><strong>दाल-दलहन<br /></strong>बीते सप्ताह दाल-दलहन के बाजार में तेजी का रुख रहा। सप्ताहांत पर मसूर दाल 200 रुपए, मूंग दाल 100 रुपए और उड़द दाल 400 रुपए प्रति क्विंटल चढ़ गई। वहीं, चना, दाल चना और अरहर दाल के भाव स्थिर रहे। सप्ताहांत पर चना 6100-6200, दाल चना 7100-7200, मसूर काली 8000-8100, मूंग दाल 9100-9200, उड़द दाल 11400-11500, अरहर दाल 10500-10600 रुपए प्रति क्विंटल रहे। अनाज : अनाज मंडी में टिकाव रहा। साप्ताहांत पर गेहूं और चावल के भाव पुराने स्तर पर पडेÞ रहे। इस दौरान (भाव प्रति क्विंटल) गेहूं दड़ा 2550-2650 रुपए और चावल 3000-3100 रुपए प्रति क्विंटल रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/increase-in-mustard-groundnut-and-vegetable-oil/article-55667</link>
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                <pubDate>Mon, 28 Aug 2023 11:39:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>तिलहन उत्पादन में  आत्मनिर्भर बनाने में सरसों मॉडेल फार्म प्रोजेक्ट अहम </title>
                                    <description><![CDATA[द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सॉलिडेरिडाड द्वारा शुरू किए गएसरसो मॉडल फार्म प्रोजेक्ट के तहत, सरसो के मॉडल फार्म विकसित किए जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mustard-model-farm-project-is-important-in-making-self-sufficient-in/article-40331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/musterd.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वर्ष 2025 तक सरसों का उत्पादन 200 लाख टन तक बढ़ाने और तिलहन उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से देश के शीर्ष खाद्य तेल उद्योगनिकाय "द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया" एवं सॉलिडेरिडाड संस्था द्वारा "सरसो मॉडल फार्म प्रोजेक्ट" का क्रियान्वयन किया जा रहा है। सरसों उत्पादन से संबंधित प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट क्रियान्वयन क्षेत्र में सरसों के उत्पादन में वृद्धि अनुमानित है।परियोजना के तहत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में अभी तक 2100 से अधिक मॉडल फार्म विकसित किए गए है, जिससे 73500 से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। प्रोजेक्ट क्रियान्वयन क्षेत्रों मेंकिसानों द्वारा व्यापक रूप में कृषि के वैज्ञानिक तरीके और उन्नत तकनीकों को अपनाया गया है, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव हो सकी है। </p>
<p>भारत विश्व में खाद्य तेलों के सबसे बड़े आयातकर्ता के रूप में सामने आया है। खाद्य तेलों की घरेलू खपत लगभग 240 लाख टन है। बढ़ती जनसंख्या और प्रति व्यक्ति आय के साथ खाद्य तेलों की खपत और बढ़ने की संभावना है। वर्तमान में,भारत में लगभग 100 लाख टन खाद्य तेल का उत्पादन हो रहा है। खाद्य तेलों की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगभग 140 लाख टन है और इस अंतर कोआयात के द्वारा पूरा किया जारहा है। आयात किए जा रहे खाद्य तेल पर देश की निर्भरता चिंता का विषय है और इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के तरीकों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। भारत में, लगभग एक तिहाई खाद्य तेल की आपूर्ति तोरिया और सरसों से होती है, जो इन्हें देश की प्रमुख खाद्य तिलहन फसल बनाता है। खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरसों सबसे महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। साथ ही कम लागत और कम सिंचाई में यह फसल अधिक उत्पादन भी देती है।</p>
<p>द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सॉलिडेरिडाड द्वारा शुरू किए गएसरसो मॉडल फार्म प्रोजेक्ट के तहत, सरसो के मॉडल फार्म विकसित किए जाते हैं, जिसमें खेत की तैयारी, बीज तैयार करने, बुवाई प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन, उर्वरक, पौधों के विकास प्रबंधन, सिंचाई का समय निर्धारण और कटाई आदि में किसानों को सहायता दी जाती है। </p>
<p>यह परियोजना वर्ष 2020-21 में राजस्थान के 05 जिलों में 400 मॉडल फार्म के साथ प्रारंभ की गई थी। 2021-22 में, परियोजना को 500 अतिरिक्त मॉडल फार्मके साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश में विस्तारित किया गया। 2022-23 में, 1234 मॉडल फार्म विकसित किए गए हैं। इस वर्ष राजस्थान और मध्यप्रदेश के साथ ही परियोजना का विस्तार अयोध्या (उत्तर प्रदेश) और संगरूर (पंजाब) में भी किया गया है, जिसमे जे.आर एग्रो इंडस्ट्रीज और रायसीला फाउंडेशन, धुरी का सहयोग प्राप्त हुआ है। इस प्रकार अब तक 2100 से अधिक मॉडल फार्म 04 राज्यों में स्थापित किए गए हैं।</p>
<p>द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडियाके अध्यक्ष अजय झुनझुनवाला ने कहा कि- इस परियोजना के सफल और सकारात्मक परिणाम हमें इस परियोजना को देशव्यापी स्तर पर क्रियान्वित करने की ओर अग्रसर कर रहे हैं ताकि वर्ष 2025 तक सरसों के उत्पादन को 200 लाख टन तक बढ़ाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। </p>
<p>विजय डाटा अध्यक्ष एसईए रेप-मस्टर्ड प्रमोशन काउंसिल- “किसानों की आजीविका और आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य तेल में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरसों सबसे महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। हमें विश्वास है कि सरसों मॉडल फार्म परियोजना सरसों उत्पादन को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाएगी और किसानों की आय और आजीविका में योगदान देगी।</p>
<p>डॉ. सुरेश मोटवानी, महाप्रबंधक सॉलिडरीडाड एशिया - "तिलहन फसलों की उत्पादकता में सुधार के साथ ही कृषि औरउससे संबद्ध गतिविधियों पर निर्भर किसान परिवार के जीवन में सुधार होता है। हम सरसों मॉडल फार्मों के लिए सरसों अनुसंधान निदेशालयकेंद्र भरतपुर, भारत सरकार द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए आभारी हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब के हमारे अनुभव बताते हैं कि आधुनिक तकनीक के सहयोग से सरसों फसल की उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Mar 2023 14:26:07 +0530</pubDate>
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                <title>शुद्ध के लिए युद्ध: सूरजपोल अनाज मंडी में कार्रवाई, 2250 लीटर सरसों तेल सीज </title>
                                    <description><![CDATA[निरीक्षण के दौरान यहाँ घटिया क्वालिटी का सरसों तेल (टैगोर ब्रांड) पाया गया। अमानक पाए जाने पर मौके पर ही 2250 लीटर तेल सीज़ किया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस तेल को सूंघने पर किसी तरह की कोई गंध नहीं आ रही थी और रंग सुनहरी पीला ना होकर गेरुआ लाल था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-draft--add-your-title/article-18651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/whatsapp-image-2022-08-10-at-5.12.28-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर मिलावटखोरों पर लगाम लगाने के लिए चिकित्सा विभाग द्वारा लगातार कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर कार्रवाई की जा रही है। आयुक्त खाद्य सुरक्षा, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी, जयपुर प्रथम, डॉ. विजय सिंह फौजदार के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के दल ने बुधवार को सूरजपोल अनाज मंडी जयपुर स्थित मैसर्स तांबी ट्रेडर्स का निरीक्षण किया।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान यहाँ घटिया क्वालिटी का सरसों तेल (टैगोर ब्रांड) पाया गया। अमानक पाए जाने पर मौके पर ही 2250 लीटर तेल सीज़ किया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस तेल को सूंघने पर किसी तरह की कोई गंध नहीं आ रही थी और रंग सुनहरी पीला ना होकर गेरुआ लाल था। जो राइस ब्रेन और सोया दिओ जैसा प्रतीत हो रहा था। इसके अलावा टीमों द्वारा एस.आर ट्रेडिंग कंपनी और बंशीधर रामविलास फर्मों का भी निरीक्षण किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 17:43:48 +0530</pubDate>
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                <title>बिक्री पर्ची बनाने से पहले भेजनी होगी सेल्फी</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चने और सरसों की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी।  लेकिन इस बार किसान केंद्रों पर उपज को आसानी से नहीं बेच सकेंगे। क्योंकि, विभाग ने खरीद में काफी पेचिदगियां कर दी है। खातेदार किसान को स्वयं केंद्र पर उपस्थिति होकर उपज बेचनी होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/selfie-has-to-be-sent-before-making-sales-slip/article-6904"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/mandi.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चने और सरसों की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी। सरकार ने चने का समर्थन मूल्य 5230 और सरसों के 5050 रुपए प्रति क्विंटल तय किए हैं, लेकिन इस बार किसान केंद्रों पर  उपज को आसानी से नहीं बेच सकेंगे। क्योंकि, विभाग ने खरीद में काफी पेचिदगियां कर दी है। खातेदार किसान को स्वयं केंद्र पर उपस्थिति होकर उपज बेचनी होगी।  ब्रिकी पर्ची बनाने से पूर्व कंप्यूटर आॅपरेटर को वेब कैमरे से संबंधित किसान की सेल्फी विभाग के पास भेजनी होगी। अधिकारियों का कहना है कि खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसा किया है। पूर्व में अन्य किसान भी आकर उपज बेच देते थे। ऐसे में फजीर्वाड़ा होने की नौबत रहती थी, लेकिन इस बार परिवर्तन कर दिया गया है। उनका कहना है कि राजफेड विभाग ने खरीद केंद्रों पर बेव कैमरे भी लगाए हैं। इन कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। कार्मिकों को भी पारदर्शिता से कार्य करना होगा। उनकी हर गतिविधियां कैमरे में रिकार्ड की जाएगी। बताया जा रहा है कि केंद्रों पर पुलिस बल भी तैनात किया जा सकता है।<br /><br /><strong>इस तरह अपनाई जा रही प्रक्रिया</strong><br />पंजीयन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक ही हो रहा है। इस दौरान खातेदार की गिरदावरी मान्य की गई। पंजीयन इस बार जन आधार कार्ड से हो रहा है। जन आधार कार्ड भी पंजीयन के लिए अनिवार्य है। साथ ही एक ही मोबाइल से पंजीयन होगा। एक मोबाइल से अधिक पंजीयन करवाने पर मान्य नहीं होगा। यहां तक ई-मित्र संचालक पर कार्रवाई भी की जा सकती है। बायोमैट्रिक और ओटीपी से भी पंजीयन किया जा रहा है। <br /><br /><strong>बार बार अटक रहा सर्वर</strong><br />काफी मशक्कत के बाद चने और सरसों की खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया प्रारंभ हुई, लेकिन राजफैड का सर्वर बार बार अटक रहा है। किसान ई-मित्र की दुकानों पर पंजीयन करवाने के लिए पहुंच तो गए, लेकिन पंजीयन नहीं करवा सके। क्योंकि, साइट ही डाउन हो गई। कुछ केंद्रों पर लिमिट भी पूरी बता दी। जबकि, पंजीयन का प्रथम दिन था। इसके चलते किसानों को काफी परेशानी हुई। अधिकांश किसान तो पंजीयन करवाएं बिना ई-मित्र दुकानों से वापस लौट गए।<br /><br /><strong>कोटा जिले में बनाए 9 केंद्र</strong><br />चने की खरीद के लिए राजफेड ने कोटा जिले में 9 केंद्र बनाए हैं। इनमें कोटा, रामगंजमंडी, इटावा, सांगोद, सुल्तानपुर, बपावर, सुकेत, और चेचट बनाए हैं। जबकि, गेहूं की खरीद के लिए 39 केंद्र है। चने और सरसों की खरीद की घोषणा कर दी गई है। किसानों को पंजीयन के लिए वेबपोर्टल पर लिमिट पूरी होने के मैसेज मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों को परेशानी हो रही है।<br /><br /><strong>इधर, बटाइदारों को हो रही दिक्कत</strong><br />राजफेड की ओर से खरीद में लागू किए गए नए नियमों में सर्वाधिक परेशानी बटाई पर खेती करने वाले किसानों को रही है। अनुमान के अनुसार जिले में 60 फीसदी खेती बटाई पर होती है। ऐसे में समर्थन मूल्य पर इन किसानों की खरीद नहीं हो रही है। इन किसानों ने बटाई से पूर्व का सहमति पत्र मांगा जा रहा है। साथ ही पंजीयन के दौरान कई प्रक्रिया पूरी करवाई जा रही है। ऐसे में इनको खासी दिक्कत हो रही है।<br /><br /><strong>ये हैं चने और सरसों के लिए केंद्र</strong><br />. कोटा<br />. रामगंज मंडी<br />. इटावा<br />. सांगोद<br />. सुल्तानपुर<br />. बपावर<br />. सुकेत<br />. चेचट<br />. खातौली<br /><br /><strong>इनका कहना है।</strong><br />इस बार चने और सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 9 केंद्र बनाए गए हैं। इसके लिए पंजीयन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। विभाग की गाइडलाइन के अनुसार खरीद की जानी है।<br />- विष्णु दत्त शर्मा, लेखांकन अधिकारी, राजफैड, कोटा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 16:10:47 +0530</pubDate>
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