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                <title>prevalence - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बाल विवाह पर सरकार का बड़ा प्रहार: शादी के कार्ड बताएंगे दूल्हा-दुल्हन की उम्र, फ़डणवीस सरकार ला रही नया नियम</title>
                                    <description><![CDATA[बाल विवाह रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार शादी के कार्डों पर वर-वधू की जन्मतिथि अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। राजस्थान की तर्ज पर तैयार इस कानून से उम्र का सार्वजनिक सत्यापन आसान होगा। उल्लंघन करने वाले परिवारों और प्रिंटिंग ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके साथ ग्रामीण जागरूकता और शिक्षा पर भी जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/governments-big-attack-on-child-marriage-wedding-cards-will-tell/article-157971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/maharashtra.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में बाल विवाह के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार शादी के निमंत्रण कार्डों पर वर और वधू दोनों की आधिकारिक जन्म तिथि छापना अनिवार्य करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के अंतिम चरण में है। राजस्थान में लागू इसी तरह के नियमों की सफलता से प्रेरित होकर महाराष्ट्र सरकार इस नये कानून को पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी कर रही है। यह कदम राज्य विधानमंडल में पेश किए गए उन चिंताजनक आंकड़ों के जवाब में उठाया गया है, जिनसे पता चला है कि विभिन्न ग्रामीण और सुदूर जिलों में बाल विवाह अभी भी एक गंभीर समस्या बना हुआ है।</p>
<p>महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया कि निमंत्रण पत्रों पर वर्तमान में आयु सत्यापन की कमी के कारण अक्सर कम उम्र की शादियों की बिना किसी जांच-पड़ताल के अनुमति मिल जाती है। प्रस्तावित नियमों के तहत, विवाह कार्डों पर दूल्हा-दुल्हन की जन्म तिथि प्रदर्शित होने से उनकी उम्र सार्वजनिक रूप से सत्यापन योग्य हो जाएगी। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "यदि विवाह के निमंत्रण पत्र पर जन्म तिथियां स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती हैं, तो अधिकारियों और नागरिक समाज के लिए यह सत्यापित करना काफी आसान हो जाता है कि जोड़ा कानूनी आयु की आवश्यकताओं को पूरा करता है या नहीं।" अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि बाल विवाह का कोई संदेह पैदा होता है, तो कार्ड पर दी गयी तारीख नागरिकों के लिए पुलिस या बाल अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराने के लिए प्राथमिक साक्ष्य के रूप में काम करेगी।</p>
<p>विधानसभा में पेश किए गए आंकड़े एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करते हैं, जिसमें कई जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र में लड़कियों की शादी का प्रतिशत काफी अधिक है जिसमें परभणी 48 प्रतिशत, बीड़ 43.7 प्रतिशत, धुले 40.5 प्रतिशत और सोलापुर 40.3 प्रतिशत है। विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि बाल विवाह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक संकट भी है। यह स्कूल छोड़ने और कम उम्र में मां बनने की समस्याओं को बढ़ावा देता है, जिसका युवतियों के शारीरिक और मानसिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। राज्य प्रशासन वर्तमान में अंतिम नियम तैयार कर रहा है, जिसमें कानून का उल्लंघन करने वाले परिवारों के साथ-साथ उन प्रिंटिंग ठेकेदारों के खिलाफ भी सीधे कार्रवाई के प्रावधान शामिल होंगे जो अनिवार्य जानकारी के बिना निमंत्रण पत्र छापने और उनके वितरण में सहायता करते हैं।</p>
<p>सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है। सख्त नियम हालांकि एक आवश्यक निवारक के रूप में कार्य करते हैं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि वे गहराई तक जड़ जमा चुकी इस प्रथा को पूरी तरह से खत्म करने के लिए ग्रामीण स्तर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाएं और लड़कियों की शिक्षा के लिए प्रोत्साहन बढ़ाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:55:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूरोप में तीन सालों में 80,000 नए HIV मामले और 9000 TB से मौतें होने की आशंका : ईसीडीसी</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ECDC) ने चेतावनी दी है कि यूरोप में अगले तीन सालों में 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले आ सकते हैं। साथ ही, टीबी के कारण 9,000 से अधिक मौतें होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में सिफलिस और गोनोरिया जैसे यौन संचारित रोगों की दरें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/80000-new-hiv-cases-and-9000-tb-deaths-expected-in/article-155932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/europ.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। यूरोप में अगले तीन वर्षों में लगभग 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आने और टीबी के कारण 9,000 से अधिक मौतें होने की आशंका है। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ईसीडीसी) की निदेशक पामेला रेंडी-वैगनर ने यह जानकारी दी है। गत 21 मई को ईसीडीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में यूरोप में एक दशक से ज़्यादा समय में यौन संचारित संक्रमणों की सबसे ज़्यादा दरें देखी गईं, जिसमें सिफलिस और गोनोरिया शामिल हैं।</p>
<p>ईयू ऑब्जर्वर न्यूज़ एजेंसी ने बुधवार को रेंडी-वैगनर के हवाले से कहा, "हम यूरोप में आने वाले तीन सालों में 80,000 नए एचआईवी संक्रमण और टीबी से 9,000 से ज़्यादा मौतें देखेंगे।" रिपोर्ट में कहा गया है कि ईयू रेगुलेटर का अनुमान है कि टीबी और यौन संचारित संक्रमणों में तेज़ी से बढ़ोतरी होगी। साथ ही, इन बीमारियों की वजह से ईयू , आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में हर साल 59,000 मौतें होती हैं। ईयू , आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में अभी लगभग 800,000 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:45:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आधुनिक गर्भनिरोधक प्रसार दर में हुई 1.2 प्रतिशत की वृद्धि : सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[परिवार नियोजन (एफपी) और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित प्रोजेक्ट- पीएमए की ओर से 2021 सर्वेक्षण के परिणाम सामने रखे गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/modern-contraceptive-prevalence-rate-increased-1-2-percent/article-6905"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/pm-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परिवार नियोजन (एफपी) और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित प्रोजेक्ट- पीएमए की ओर से 2021 सर्वेक्षण के परिणाम सामने रखे गए। प्रोजेक्ट पीएमए इंडिया को राजस्थान में आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी द्वारा क्रियान्वित किया गया। रीप्रोडेक्टीव चाइल्ड हैल्थ केयर एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक डॉ. केएल मीणा द्वारा इस कार्यशाला की अध्यक्षता की गई। इसमें देशभर के विकास भागीदारों के प्रतिनिधि, कार्यान्वयनकर्ता एवं शोधकर्ता शामिल हुए। मीणा ने कहा कि पीएमए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रीय स्तर पर परिवार नियोजन के ज्ञान व्यवहार एवं कवरेज के बारे में जानकारी एकत्रित करता है। इसके परिणाम आसानी और कम समय में सभी स्टेकहोल्डर्स तक पहुंचाये जा सकते है। पीएमए इंडिया द्वारा किया गया यह पैनल सर्वेक्षण पहली बार किया गया है। राजस्थान सरकार के परिवार कल्याण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. गिरीश द्विवेदी ने कहा कि जारी किया गया डेटा सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह हमें नीति निर्माण एवं कार्यक्रमों में मदद करेगा और डेटा पर आधारित निर्णय लेने में भी मदद करेगा। पीएमए द्वारा नौ प्लीजिंग वाले एफपी 2020 देशों में वार्षिक आधार पर राष्ट्रीय या उप-राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन एवं अन्य स्वास्थ्य संकेतकों का अनुमान लगाने के लिए चयनित स्थानों पर घरों व महिलाओं से डेटा एकत्र किया जाता है।</p>
<p>आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट डॉ. पीआर सोडानी ने कहा कि पीएमए प्रोजेक्ट शुरू में जेएचयू और झपिएगो द्वारा शुरू किया गा था और भारत में आईआईएचएमआर द्वारा इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया जा रहा है। यह विभिन्न देशों में किया गया अध्ययन है, जो कार्रवाई करने योग्य डेटा उपलब्ध कराता है। मैं हमारे इस प्रोजेक्ट को निरंतर समर्थन के लिए राजस्थान सरकार का आभार व्यक्त करता हूं। उनके समर्थन के कारण ही हम इसे राजस्थान में सफलतापूर्वक लागू कर सके है। पीएमए सर्वेक्षण के प्रथम व द्वितीय चरण पूरा करने वाली महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक के उपयोग में वृद्धि हुई है। गर्भ निरोधकों का उपयोग नहीं करने में मामूली गिरावट आई है। सर्वेक्षण के दोनों चरण पूरा करने वाली विवाहित महिलाओं के बीच प्रथम चरण के बाद से गर्भनिरोधक के उपयोग में 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधक प्रसार दर में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
<p>इसके अलावा पीएमए अध्ययन से पता चला है कि जिन महिलाओं ने प्रथम चरण के दौरान भविष्य में परिवार नियोजन साधनों का उपयोग करने की इच्छा जताई थी, उनमें से आधे से अधिक (54 प्रतिशत) महिलाओं ने द्वितीय चरण तक कोई न कोई विधि अपनाने की सूचना दी। करीब 14 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उनकी वर्तमान या पिछली गर्भावस्था अनचाही थी। इनमें से अधिकांश महिलाएं देरी से मां बनना चाहती थी। परिवार नियोजन का उपयोग नहीं करने वाली आधी से अधिक महिलाओं ने बताया कि इसके साधनों का उपयोग न करना उनका अपना निर्णय था। पीएमए इंडिया प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (आईआईएचएमआर) के नेतृत्व में डेटा संग्रह किया गया। पीएमए में भारत देश इथियोपिया, केन्या, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर, युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो सहित नौ देशों में से एक प्रोग्राम कंट्री के रूप में शामिल है।</p>
<p>आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी द्वारा इस प्रोजेक्ट को राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समर्थन से जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ में झपाइगो तथा बिल एंड मेलिंडा गेट्स इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन एंड रिप्रोडक्टिव हैल्थ के सहयोग से लागू किया गया है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा इस प्रोजेक्ट को फंड दिया गया। पीएमए इंडिया शहरी-ग्रामीण स्तर के साथ विभिन्न-चरणों के स्तरीकृत क्लस्टर डिजाइन का उपयोग करके चुने गए 134 गणना क्षेत्रों में परिवार नियोजन सेवाओं की नॉलेज, प्रेक्टिस व कवरेज पर जानकारी एकत्र करता है। इसके परिणाम राज्य स्तर तथा शहरी व ग्रामीण स्तर का प्रतिनिधित्व करते है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 15:58:28 +0530</pubDate>
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