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                <title>restoration - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईरान से राहत की खबर : दुबई के लिए उड़ानें फिर होंगी शुरू, यात्रियों को मिलेगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इजरायल-अमेरिका तनाव के बाद बंद किए गए तेहरान-दुबई हवाई मार्ग को 1 जुलाई से पुनः शुरू करने की मंजूरी दे दी है। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत ईरान ने पश्चिमी हवाई क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को बहाल करने का निर्णय लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-relief-from-iran-flights-to-dubai-will-start-again/article-158275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dubai.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के विमानन अधिकारियों ने तेहरान-दुबई मार्ग पर उड़ानें फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। दोनों देशों के बीच एक जुलाई से फिर से यह सेवा बहाल होगी। ईरानी समाचार एजेंसी इस्ना ने बताया कि ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के प्रवक्ता माजिद अखवान ने जानकारी दी है कि दोनों देशों के नागरिक उड्डयन संगठन ने तेहरान से दुबई के लिए उड़ानें बहाल करने की मंजूरी दे दी है।</p>
<p>गौरतलब है कि ईरान के विमानन अधिकारियों ने जून की शुरुआत में देश के पश्चिमी हिस्से का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। इस फैसले के पीछे इजरायल के साथ बढ़ता तनाव था। इसके बाद ईरान ने बीते मंगलवार को देश के पश्चिमी हिस्से में हवाई यात्रा बहाल करने का फैसला किया। ईरान-अमेरिका ने 18 जून की रात वर्चुअली एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य संघर्ष को समाप्त करना है। इस समझोते में अमेरिका के समुद्री नाकेबंदी हटाने और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करने की समयसीमा भी तय की गयी है।</p>
<p>इसके अलावा ईरान ने परमाणु हथियार हासिल न करने की प्रतिबद्धता जतायी है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को अलग समझौते के जरिये सुलझाया जायेगा। दोनों पक्ष इस मामले पर 60 दिनों के भीतर बातचीत करेंगे। ईरान को उम्मीद है कि इस बातचीत के नतीजे के रूप में ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा लिये जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 18:05:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सरिस्का की ऐतिहासिक सफलता, अब देशभर के टाइगर रिजर्व अपनाएंगे राजस्थान मॉडल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान का सरिस्का दुनिया में बाघ पुनर्स्थापन (Tiger Relocation) की सबसे सफल मिसाल बन गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने शिरकत की। सरिस्का में बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर 56 हो चुकी है, जो अब अन्य अभयारण्यों के लिए रोल मॉडल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/historic-success-of-sariska-now-tiger-reserves-across-the-country/article-158303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sariska.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान में कभी बाघों से पूरी तरह खाली हो चुका सरिस्का अब दुनिया में बाघ पुनर्स्थापन की सबसे सफल मिसाल बनकर उभरा है। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के 18 वर्ष पूरे होने पर रविवार को सरिस्का बाघ अभयारण्य राष्ट्रीय स्तर के मंथन का केंद्र बना, जहां देशभर के बाघ संरक्षण विशेषज्ञ, वरिष्ठ वन अधिकारी और वैज्ञानिक जुटे। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला "बाघ पुनर्स्थापन : अवसर एवं चुनौतियां" का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया।</p>
<p>कार्यशाला में राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (आईबीसीए) के महानिदेशक, विभिन्न राज्यों के प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, क्षेत्रीय निदेशक और देश के प्रमुख वन्यजीव वैज्ञानिक शामिल हुए। इस दौरान सरिस्का मॉडल के आधार पर देश के अन्य बाघ-विहीन और कम बाघ घनत्व वाले बाघ अभयारण्य पुनर्स्थापन की रणनीति पर मंथन हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरिस्का का 18 वर्षों का सफर ऐतिहासिक रहा है। बेहतर निगरानी, मजबूत प्रबंधन और उत्कृष्ट आवास संरक्षण के कारण सरिस्का वर्तमान में देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रत्येक बाघ अभयारण्य की अपनी अलग परिस्थितियां हैं और जहां बाघों की संख्या नहीं बढ़ रही है वहां विशेष रणनीति अपनाई जाएगी। यादव ने कहा कि बाघ संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण, पक्षी संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति पर्यटन को भी समान महत्व देना होगा। बाघ अभयारण्य से जुड़े ग्रामीणों के कौशल विकास पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है ताकि संरक्षण और आजीविका दोनों मजबूत हों। उन्होंने बताया कि सरिस्का परियोजना के 20 वर्ष पूरे होने पर बड़ा राष्ट्रीय आयोजन किया जाएगा।</p>
<p>राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि सरिस्का में बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर 56 तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है और जल्द ही यह आंकड़ा 60 तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बाघ संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार से राजस्थान के लिए भी चीता परियोजना स्वीकृत करने की मांग रखी। एनटीसीए के सदस्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2004 में सरिस्का से बाघों के पूरी तरह समाप्त होने के बाद जो चूक हुई, उसे सुधारते हुए 2008 में दुनिया का पहला वैज्ञानिक बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू किया गया। अब सरिस्का केवल बाघों का संरक्षण क्षेत्र नहीं बल्कि "स्रोत क्षेत्र" बन चुका है, जहां से भविष्य में बाघ अन्य अभयारण्यों तक पहुंच सकेंगे।</p>
<p>उन्होंने इस सफलता का श्रेय तत्कालीन एनटीसीए सचिव राजेश गोपाल, फील्ड डायरेक्टर पी. सोमशेखर और वैज्ञानिक प्रबंधन को दिया। इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव ने कहा कि बाघ पुनर्स्थापन का प्रयास रूस में सफल नहीं हो सका, लेकिन राजस्थान ने इसे दुनिया के सामने सफल मॉडल के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचा, प्रभावी निगरानी और शिकार पर नियंत्रण सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सितंबर में सरिस्का में 32 देशों के वन्यजीव विशेषज्ञों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित होगा।</p>
<p>कार्यशाला में बताया गया कि भारत वर्तमान में विश्व के करीब 70 प्रतिशत जंगली बाघों का संरक्षण कर रहा है। देश में 58 बाघ अभयारण्य में करीब 3,682 बाघ हैं। पिछले एक दशक में बाघ अभयारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो चुकी है और संरक्षित क्षेत्र 84 हजार 450 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं बल्कि पूरे जंगल और जैव विविधता का आधार है। इसलिए आवास पुनर्स्थापन, शिकार आधार मजबूत करने, वन्यजीव गलियारों, पुनर्प्रवेश, वन्यजीव स्थानांतरण और वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला में चीता परियोजना पर भी विशेष विचार-विमर्श हुआ।</p>
<p>दो दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त सुझावों के आधार पर देश के बाघ-विहीन और कम बाघ घनत्व वाले क्षेत्रों के लिए नई वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे एनटीसीए, राज्य वन विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय और मजबूत होगा और बाघ संरक्षण में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को नई मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:01:14 +0530</pubDate>
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                <title>प्रकृति को बचाने के लिए प्रोजेक्ट हरा-भरा 8.0 के अंतर्गत किया बीजारोपण </title>
                                    <description><![CDATA[ईको रेस्क्यूर्स और शरण्या फाउंडेशन ने जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व में 'प्रोजेक्ट हरा-भरा 8.0' के तहत धामण घास के बीजों का रोपण किया। सेवानिवृत्त वन अधिकारी महेश विजयवर्गीय के मार्गदर्शन में 65 वॉलिंटियर्स और बच्चों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य जंगली जानवरों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना और हरियाली बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-save-nature-seeds-were-planted-under-project-hara-bhara-80/article-158301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jhalana.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ईको रेस्क्यूर्स फाउंडेशन एवं शरण्या फाउंडेशन की ओर से झालाना लेपर्ड रिजर्व क्षेत्र, जयपुर में 'प्रोजेक्ट हरा-भरा 8.0' के अंतर्गत धामण घास के बीजों की टिकड़ी का बीजारोपण किया गया। जिससे जंगली जानवरों को पर्याप्त मात्रा में घास उपलब्ध हो सके। संस्था का उद्देश्य जंगलों में खत्म होती हुई हरियाली को वापस लाना है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संस्था के सचिव डॉ गौरव ने बताया कि बीजारोपण किस तरह किया जाता है, इसकी पूरी जानकारी सेवानिवृत्ति वन अधिकारी महेश विजयवर्गीय ने सभी वॉलिंटियर्स को दी। इस कार्यक्रम में 40 बच्चों सहित लगभग 65 वॉलिंटियर्स ने भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान समझौता: 60 दिनों में अंतिम डील पर सहमति, पीएम शरीफ ने बतौर मध्यस्थ 'इस्लामाबाद एमओयू' पर किए दस्तख़त</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन की सहमति वाले इस समझौते के तहत दोनों देश दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर राजी हुए हैं। इसके तहत ईरान को $300 बिलियन का पुनर्निर्माण कोष मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agreement-final-deal-agreed-in-60-days-pm-sharif/article-157379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बतौर मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। पाकिस्तानी मीडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता के अंतिम समर्थन दस्तावेज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के दस्तखत पहले से ही मौजूद थे। बयान के मुताबिक शांति समझौते को तय समय से पहले पूरा हुआ बताया गया, जिसमें दोनों पक्ष दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हुए। इसमें आगे दावा किया गया कि समझौता पहले ही लागू हो चुका था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में पैलेस ऑफ वर्सेल्स में अमेरिका-ईरान समझौता की एक कॉपी पर दस्तखत करके अपनी जी-7 यात्रा पूरी की।</p>
<p>एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इसके बाद अमेरिका ने दस्तखत किए गए समझौते की एक फोटो ईरानियों को भेजी। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दस्तावेज पर दस्तखत किए। यह समझौता अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौता करने का वायदा करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिका छूट देगा ताकि ईरान तेल निर्यात कर सके और इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रावधान बताए गए हैं। यह अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदारों को ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का पुनर्निर्माण कोष बनाने का भी वायदा करता है। अधिकारियों ने समझौते को दुश्मनी खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता वापस लाने के मकसद से एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया।</p>
<p>बयान में कहा गया कि समझौता में खास समुद्री रास्तों को फिर से खोलने के प्रावधान शामिल हैं और इसमें बड़े आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबद्धता की रूपरेखा है। विवरण हालांकि अभी साफ नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कहा गया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत 60 दिनों के लिए जारी रहेगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का बड़ा बयान : अमेरिका-ईरान सहमति से क्षेत्र में स्थिरता और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा, युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 107 दिनों से जारी इस संघर्ष की समाप्ति से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से क्षेत्र में स्थिरता आएगी और मुक्त व्यापार सुनिश्चित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-big-statement-america-iran-agreement-will-boost-stability-and/article-157032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम होगी। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के संबंध में अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझ का स्वागत करता हूँ, जिसने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किया है और अनेक देशों में जनहानि का कारण बना है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति से क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और नौवहन तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।<br /> <br />प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत को आशा है कि इस समझ के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की पुनर्स्थापना में सहायता मिलेगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हम आशा करते हैं कि शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श एक टिकाऊ अंतिम समझौते तक पहुँचेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात कही है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अशोक गहलोत का बड़ा बयान, बोले कल्ला की प्रतिमा के धराशायी होने से लोगों की भावनाएं आहत</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर के पहले कोतवाल फतेहराज कल्ला की प्रतिमा धराशायी होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे स्थानीय भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से मांग की है कि उनकी याद को चिरस्थायी रखने के लिए पूरे सम्मान के साथ वहां पुनः नई भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ashok-gehlots-big-statement-said-that-peoples-sentiments-are-hurt/article-156242"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ashok-ggehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर के पहले कोतवाल रहे फतेहराज कल्ला की स्मृति में प्रतापनगर सदर पुलिस थाने में लगी उनकी प्रतिमा के धराशायी हो जाने की खबर को दिल दुखाने वाली बताते हुए कहा है कि इससे स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। गहलोत ने अपने बयान में कहा कि यह दिल दुखाने वाली खबर है कि जोधपुर के पहले कोतवाल रहे फतेहराज कल्ला की स्मृति में प्रतापनगर सदर पुलिस थाने में लगी प्रतिमा धाराशायी हो गई है।</p>
<p>कल्ला जोधपुर की वरिष्ठ नेता, कई बार की विधायक सूर्यकांता व्यास जीजी के पिता थे और उनकी एक विशिष्ट पहचान थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन को उनकी याद को चिरस्थाई बनाए रखने के लिए शानदार प्रतिमा का निर्माण कराकर पूरे सम्मान से पुनः स्थापित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:36:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी ने भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों पर डाला प्रकाश, कहा- 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत की समृद्ध जैव विविधता पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयासों से चीता, हिम तेंदुआ और स्लॉथ बीयर जैसी प्रजातियों का पुनरुद्धार हुआ है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रतिवर्ष 1.19 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जुड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-environment-day-prime-minister-modi-threw-light-on-indias/article-156050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की समृद्ध जैविक विविधता का उल्लेख करते हुए वन्यजीव संरक्षण एवं वन विस्तार में देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि निरंतर प्रयासों ने देश भर में कमजोर प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में मदद की है। पीएम मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत अपनी विशाल जैव विविधता और विविध पारिस्थितिक तंत्रों पर गर्व करता है जो असंख्य प्रजातियों के साथ-साथ लाखों आजीविका का समर्थन करते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में हमें अपनी जैविक विविधता पर बहुत गर्व है। हमारे विविध पारिस्थितिकी तंत्र अनगिनत प्रजातियों और आजीविका का समर्थन करते हैं।" सरकार की संरक्षण पहलों का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने लुप्तप्राय और कमजोर वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा के उद्देश्य से विशेष पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों की सफलता की बात की । उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुओं, स्लॉथ बीयर और चीतों के संरक्षण प्रयासों ने प्रदर्शित किया है कि दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वन्यजीव आबादी और पारिस्थितिक आवासों के पुनरुद्धार में कैसे योगदान दे सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "विशेष पुनर्प्राप्ति में हमारे प्रयास भी उल्लेखनीय रहे हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुए, स्लॉथ बीयर और चीता के संरक्षण प्रयासों ने इस बात की झलक दी है कि निरंतर प्रतिबद्धता वन्यजीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में कैसे मदद कर सकती है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने पिछले साल शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के प्रभाव का भी हवाला दिया, जो नागरिकों को अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस पहल ने देश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, "'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल ने हर साल लगभग 1.19 लाख हेक्टेयर जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।" यह टिप्पणी तब आई जब भारत ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है। पिछले एक दशक में, सरकार ने वन क्षेत्र को बढ़ाने, लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करने और ख़राब पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।</p>
<p>प्रमुख संरक्षण पहलों में से एक प्रोजेक्ट चीता है, जिसके तहत सात दशक से भी अधिक समय पहले देश में प्रजाति विलुप्त होने के बाद अफ्रीकी चीतों को भारत में फिर से लाया गया था। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सुरक्षा के प्रयासों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जबकि हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुओं और मध्य भारत में स्लॉथ बीयर के संरक्षण उपायों को आवास संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से तेज किया गया है। प्रधानमंत्री का संदेश विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करने वाले पोस्ट और पहल की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जो जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान: जयपुर जिले में 3500 नागरिकों ने निभाई सहभागिता</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026' के तहत विविध कार्यक्रम आयोजित हुए। चौगान स्टेडियम से पैदल और साइकिल रैली निकालकर जल शपथ दिलाई गई। शाहपुरा, मौजमाबाद और दूदू में ग्रामीणों ने श्रमदान, पौधारोपण, बावड़ियों की सफाई और परिंडे बांधकर जल संरक्षण का संदेश दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/3500-citizens-participated-in-vande-ganga-water-conservation-mass-campaign/article-155595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 के तहत ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को जयपुर जिले में विभिन्न विभार्गों, पंचायत समितियों, नगरीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं आमजन की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी विविध कार्यक्रर्मों का आयोजन किया गया। जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा ने बताया कि अभियान के तहत प्रात: जिला खेलकूद प्रशिक्षण केंद्र चौगान स्टेडियम से वंदे गंगा पैदल रैली एवं साइकिल रैली निकाली गई। जिसे खेल अधिकारी मानसिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। </p>
<p>इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों को जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। पंचायत समिति शाहपुरा क्षेत्र में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत कुल 61 गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 2068 नागरिकों ने भागीदारी निभाई। शाहपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मनोहरपुर में ग्रामीणों एवं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से पौधारोपण, जल संरक्षण संरचनाओं की साफ-सफाई, श्रमदान, डी सिल्टिंग तथा स्वच्छता गतिविधियों का आयोजन किया गया। पंचायत समिति मौजमाबाद की समस्त ग्राम पंचायतों में वंदे गंगा जल जागरूकता रैली एवं साइकिल रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में लगभग 125 जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भाग लिया। कोटखावदा ब्लॉक में प्रभात फेरी, जागरूकता रैली एवं साइकिल रैली का आयोजन किया गया। </p>
<p>नगर पालिका दूदू क्षेत्र में वंदे गंगा प्रभात फेरी, जागरूकता रैली, जल स्रोतों की साफ-सफाई, बावड़ियों एवं खेलियों की सफाई, जल सेवा, परिंडे स्थापना, पशुओं के लिए पेयजल व्यवस्था, हनुमान सागर बांध पर दीप प्रज्वलन तथा नो-प्लास्टिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 11:08:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मन की बात में पीएम मोदी का संदेश: एस्ट्रोनॉमी क्लबों और एथलीटों को सराहा, नीदरलैंड्स से चोल काल की ताम्र पट्टिकाएं लौटीं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में युवाओं से एस्ट्रोनॉमी क्लबों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने 100 मीटर दौड़ के राष्ट्रीय रिकॉर्ड विजेताओं की खेल भावना को सराहा और बताया कि नीदरलैंड्स से चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत वापस आ गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-country-is-moving-forward-with-inspiring-works-astronomy-club/article-155583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देश के गांवों और शहरों में ऐसे अनेक प्रेरणादायी कार्य हो रहे हैं जिनसे यह विश्वास मजबूत होता है कि देश लोगों की शक्ति से निरंतर आगे बढ़ रहा है। मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134 वीं कड़ी में इसी तरह के अनेक प्रेरणादायी कार्यों का उल्लेख करते हुए लोगोंं से इनकी सराहना करने तथा इनसे जुड़ने की अपील की है। उन्होंंने कहा, भारत के हर गाँव में, हर शहर में, कुछ-न-कुछ ऐसा हो रहा है जो हमें प्रेरणा देता है। कई बार, इन प्रयासों की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन जब हम इन्हें जानते हैं, तो ये विश्वास और मजबूत होता है, कि देश, अपने लोगों की शक्ति से आगे बढ़ रहा है। </p>
<p>मोदी ने देश में एस्ट्रोनॉमी क्लबों की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए छात्रों से अपनी रूचि के अनुसार इन क्लबों से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, स्कूलों से लेकर पार्कों तक एस्ट्रोनॉमी क्लब तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंंने कहा, आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई देता है। </p>
<p><strong>100 मीटर के नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड पर पीएम ने सराहा</strong></p>
<p>पीएम नरेन्द्र मोदी ने नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कप प्रतियोगिता के विजेताओं को शुभकामनाएं दी हैं और 100 मीटर दौड़ में नए राष्ट्रीय रिकार्ड बनाने वाले दो खिलाड़ियों गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर से बात की तथा उनकी खेल भावना और खेलोंं के क्षेत्र में देश को आगे बढाने के उनके जुनून की सराहना की।</p>
<p><strong>भारत को वापस मिलीं प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं</strong></p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियों, बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड्स जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई बैठक में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:54:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर पश्चिम रेलवे की बड़ी उपलब्धि, 9 घंटे में पुराना पुल हटाकर नया तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल ने मारवाड़-आबू रोड मार्ग पर युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए 9 घंटे से भी कम समय में पुराने पुल को ध्वस्त कर नया पुल तैयार कर दिया। दोपहर 12:45 बजे ब्लॉक लेकर शुरू हुआ यह कार्य रात 9:30 बजे पूरा कर रेल संचालन सुरक्षित बहाल कर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-achievement-of-north-western-railway-new-bridge-was-removed/article-154142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/railway-station-jpr.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल ने एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल करते हुए मारवाड़–आबू रोड रेल मार्ग पर स्थित पुराने रेलवे पुल को 9 घंटे से भी कम समय में ध्वस्त कर नया पुल तैयार कर दिया। यह कार्य तय समय सीमा में पूरा कर रेल संचालन को शीघ्र बहाल किया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार सुरक्षित रेल संचालन के लिए पटरियों, पुलों और अन्य रेल ढांचों का समय-समय पर रखरखाव और आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। इसी क्रम में आउवा और भिंवालिया स्टेशनों के बीच स्थित रेलवे पुल संख्या 605 को बदलने का निर्णय लिया गया। इसके लिए दोपहर 12:45 बजे ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया और युद्ध स्तर पर कार्य शुरू किया गया।</p>
<p>इंजीनियरों और तकनीकी टीमों ने महज 9 घंटे के भीतर पुराने पुल को हटाकर 16 ब्लॉक सेगमेंट और 12 स्लैब लगाकर नया पुल तैयार कर दिया। रात 9:30 बजे ब्लॉक समाप्त कर रेल मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया। इस ब्लॉक अवधि का उपयोग करते हुए अन्य अनुरक्षण कार्य भी योजनाबद्ध तरीके से पूरे किए गए। सुमेरपुर जवाई बांध स्टेशन पर 12 मीटर लंबे पैदल पुल के 10 गर्डर लगाए गए। साथ ही 2 डब्ल्यूसीएमएस क्रॉसिंग, 2 रेल और 1 एसईजे बदले गए तथा 11 ग्लू जॉइंट का नवीनीकरण किया गया। इसके अलावा 750 घन मीटर गिट्टी अनलोडिंग, 1200 मीटर शोल्डर गिट्टी सफाई, 380 मीटर डीप स्क्रीनिंग और 360 मीटर ट्रैक टैंपिंग जैसे कार्य भी संपन्न हुए। रेलवे का उद्देश्य न्यूनतम बाधा के साथ कार्य पूरा कर यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:34:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कैलाश ने खेत के रास्ते के लिए 20 साल तक संघर्ष किया, मौत के बाद ही मिल पाई जगह</title>
                                    <description><![CDATA[बेटे ने की आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/kailash-struggled-for-20-years-for-the-path-to-his-farm--got-the-place-only-after-his-death/article-83647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4.png" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। मरे बिना स्वर्ग नहीं मिलता ? यह कहावत पढ़ते व सुनते आ रहे हैं  लेकिन इसका सही उदाहरण  मंगलवार को प्रत्यक्ष रूप से कैलाश तेली की मौत के बाद वह भी परिवार द्वारा शव के साथ उपखंड कार्यालय के बाहर धरना देने के बाद प्रशासन हरकत में आया और रास्ता बहाल कराया। इससे पहले जब वह 20 सालों से उसके खेत पर जाने वाले रास्ते के लिए संघर्ष कर रहा था लेकिन उसकी सुनवाई नहीं की गई। अगर समय रहते उसकी सुनवाई हो जाती तो उसकी मौत नहीं होती।  सदमे से मरने वाले किसान कैलाश के पुत्र गणेश ने बताया कि हिंडोली तहसील क्षेत्र के सिंघाड़ी गांव में उसके पिता के नाम 10 बीघा कृषि भूमि स्थित है उसके पड़ोस में कल्याण माली  व उसके परिवार की कृषि भूमि भी स्थित है  लेकिन वह व्यक्ति बहुत लालची स्वभाव का है और उसने सन 2004 में हमारे खेत के  रास्ते के आगे जो की सरकारी भूमि होने के बावजूद भी तार बंदी  करके हमारे रास्ते को रोक देता है इसके बाद से ही  पिता लगातार हिंडोली प्रशासन के चक्कर लगाकर रास्ता बहाली के लिए निवेदन करते रहे लेकिन रास्ता नहीं मिला? इस वर्ष भी उसने हमारे कृषि भूमि के आगे रास्ते को पूर्ण रूप से बंद कर दिया तो  पिताजी ने हिंडोली थाने से लेकर तहसील और उपखंड कार्यालय में जाकर अधिकारियों को अवगत भी कराया लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी इसके बाद 26 जून से 28 जून तक हम सभी परिवारजन धरने पर बैठ गए तो प्रशासन ने आश्वासन देकर कैलाश के परिवार को उठा दिया उसके बाद भी कैलाश  तहसील और उपखंड कार्यालय के चक्कर काटते रहे लेकिन किसी भी अधिकारी ने रास्ता बहाली के लिए ठोस प्रयास भी नहीं किया। कैलाश संघर्ष करते-करते सदमे में 2 जुलाई की सुबह उनकी मौत हो गई उसके बाद भी हम परिवार जनो ने मेरे पिता के शब के साथ उपखंड कार्यालय के बाहर धरना देने पर प्रशासन जागा और हमारा रास्ता बहाल करवाया है।</p>
<p><strong>प्रशासन चाहता तो पहले भी इस रास्ता को बहाल कर सकता था</strong><br />कृषि भूमि का सन 2004 में इस कल्याण माली ने पहली बार रास्ता अवरुद्ध किया था इस मामले की रिपोर्ट हिंडोली थाने में दी थी तब से लगातार हिंडोली थाना तहसील उपखंड कार्यालय मैं रास्ता बहाली को लेकर कैलाश ने बहुत संघर्ष किया लेकिन उसे अकेले कल्याण ने  जायज बात भी प्रशासन को शायद सुनने  नहीं दी और आखिरकार मेरी पिता की मौत हो गई और प्रशासन ने  रास्ता बहाल करवाया है। कैलाश के बेटे गणेश का कहना है कि  मेरी प्रशासन से मांग है कि कल्याण माली के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए।  </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मेरे संज्ञान में आने के बाद से रास्ता बहाली के प्रयास चल रहे थे। इस बीच कैलाश तेली के परिवार ने उपखंड कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया । धरने पर प्रशासन ने उसको शीघ्र रास्ता बहाली के लिए आश्वासन दिया था। कैलाश तेली ने भी प्रशासन के आश्वासन को मानकर धरना खत्म कर दिया था। हम भी उसके पुत्र को बुलाकर सारे विकल्पों पर बातचीत कर रहे थे और मैं भी मौके पर जाकर मौका  देखा था।  एक-दो दिन में रास्ता बहाली होनी थी की इसी बीच कैलाश तेली की मौत हो गई जो दुखद है और उसके खेत का रास्ता भी बहस कर दिया है।     <br /><strong>- कमलेश कुमार कुलदीप, तहसीलदार हिंडोली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2024 15:54:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रद्धालुओं के लिए खुला श्री लक्ष्मीनरसिम्हा स्वामी मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर का मुख्य आकर्षण मंदिर के गोपुरम के ऊपर लगाया गया सोने से मढ़ा कलश है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hyderabad--the-1000-year-old-srilakshmi-narasimha-swamy-temple-built-on-the-hill-of-yadagirigutta-in-telangana-was-opened-for-devotees-after-the-restoration/article-6930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sri-lakshmi-narasimha.jpg" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना में यादगिरिगुट्टा की पहाड़ी पर निर्मित एक हजार साल पुराना श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर पुनरूद्धार के बाद सोमवार को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिया गया।  मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने नए कलेवर में आए मंदिर का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया। इस दौरान मंत्री, विधायक और जन प्रतिनिधियों के साथ-साथ मंदिर का जीर्णोद्धार करने वाले कर्मी भी उपस्थित रहे। मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद लोग उत्सुकता के साथ मंदिर के खुलने का इंतजार कर रहे थे। मंदिर परिसर को परिलोक जैसी सुंदरता दी गई है और हजारों बल्बों और रंग बिरंगे वंदनवारों से सजाया गया है। मंदिर का मुख्य आकर्षण मंदिर के गोपुरम के ऊपर लगाया गया सोने से मढ़ा कलश है। <br /><br /><strong>5 साल में तैयार</strong><br />इस मंदिर का जीर्णोद्धार मुख्यमंत्री का एक ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसे पूरा होने में पांच साल से भी अधिक का समय लगा है।<br /><br /><strong>मंदिर की खासियत</strong><br />    मंदिर को पूरी तरह शास्त्रों के मुताबिक बनाया गया है<br />    खूबसूरती ऐसी कि अच्छे-अच्छे महलों को भी फीका कर दे।<br />    मंदिर प्रोजेक्ट पर तेलंगाना सरकार 1200 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। 1000 करोड़ रुपए तो खर्च भी हो चुके हैं।<br />    मंदिर में 140 किलो सोना लग रहा है। इसमें से 125 किलो सोना तो गर्भगृह के गुंबद पर ही लग रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 12:16:26 +0530</pubDate>
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