<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/eye/tag-15983" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>eye - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/15983/rss</link>
                <description>eye RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वायु प्रदूषण : धुएं-धूल की मार, आंखें हुई लाचार, एलर्जी जैसी समस्याएं, सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/air-pollution--smoke-and-dust--eyes-become-vulnerable--and-problems-like-allergies--air-pollution-particles-in-the-air-during-the-winter-season/article-132514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने आमजन की सेहत पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में विशेष तौर पर आंखों से जुड़े मरीजों की संख्या में 20-30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी नेत्र चिकित्सालयों तक रोजाना ऐसे दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें आंखों में जलन, लालिमा, लगातार पानी बहना, सूखापन और एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं। दिवाली के बाद से ही शहर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में तैरते रहते हैं। जिससे वायु दिनभर प्रदूषित बनी रहती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों के अनुसार शहर में शुक्रवार को एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 दर्ज किया गया है। यानी यहां की हवा जहरीली हो चुकी है। </p>
<p><strong>प्रदूषण आंखों पर ऐसे डालता है असर</strong><br />नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी के मौसम में हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे कण बहुत खतरनाक होते हैं। यह कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे आंखों की सतह तक पहुंचकर कंजंक्टिवा और कॉर्निया पर जमा हो जाते हैं। इससे सूजन, खुजली, जलन और पानी आने जैसे समस्या शुरू हो जाती है। वहीं लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक की आंखों के इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों और बुजुर्गों में यह असर ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि उनकी आंखें ज्यादा संवेदनशील होती है। इन दिनों बुजुर्ग और बच्चे आंखों की समस्या लेकर अस्पतालों में अधिक आ रहे हैं। इनकी संख्या में रोजाना इजाफा होता जा रहा है।</p>
<p><strong>धूल-धुएं की अधिक मात्रा बनी परेशानी</strong><br />शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की जा रही है। ट्रैफिक का बढ़ता दबाव, निर्माण कार्यों की धूल और मौसम में बदलाव के चलते हवा में धूलकणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह महीन कण सीधे आंखों की ऊपरी परत को प्रभावित करते हैं, जिससे संक्रमण और कॉर्निया को नुकसान तक हो सकता है। इस माहौल में जहां लोगों में सांस संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती है, वहीं बड़ी संख्या में लोग आंखों में जलन, चुभन और पानी आने जैसी दिक्कतों से भी जूझने लगते है। इस कारण बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।</p>
<p><strong>आंखों को हेल्दी रखने के लिए अपनाएं यह उपाय</strong><br />- प्रदूषण में जब भी आप बाहर निकले अपनी आंखों को धूल और धुएं से बचाए। इसके लिए सनग्लासेस या बड़े साइज के काले चश्मे यूज करें। जिससे हवा सीधे आंखों में न जाए और एलर्जी और जलन से बचाव हो।<br />- बाहर फैली प्रदूषित हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे आंखों में जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो जाती है। इससे बचने के लिए आप दिन में 2 से 3 बार लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप आंखों में डालें।<br />- अगर पॉल्यूशन के समय में आपको भी आंखों में जलन और सूजन महसूस हो तो आपको आंखों को दिन में दो बार ठंडे पानी से धोना चाहिए. इसके अलावा आप आंखों पर आईस पैक सिकाई भी कर सकते हैं। <br />- कई बार ज्यादा धुएं की वजह से आंखों में जलन बढ़ जाती है और चुभन की भी शिकायत रहती है। ऐसे में लोग आंखों को रगड़ने लगते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि आंखों को रगड़े नहीं बल्कि उन्हें पानी से धो लें।</p>
<p><strong>एक्यूआई यह देता है संकेत</strong><br />अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं - 0-50 <br />संतोषजनक  -  51-100<br />बाहर जाने से बचें - 101-200<br />श्वसन के मरीजों को तकलीफ - 201-300<br />लम्बे बीमार रोगियों को दिक्कत - 301-400<br />बाहर बिलकुल नहीं निकलें - 401-500</p>
<p>प्रशासन निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव करवाएं, धूल नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करें और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करें। तभी शहर की हवा और आंखों की सेहत दोनों सुधर पाएंगी। <br /><strong>- राजू कुमार, पर्यावरणविद</strong></p>
<p>बच्चों और बुजुर्गों में आंखों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। धूल और प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से इन वर्गों में आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बाहर निकलते समय चश्मे का उपयोग करें, आंखों को बार-बार धोएं और संक्रमण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सा लें।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/air-pollution--smoke-and-dust--eyes-become-vulnerable--and-problems-like-allergies--air-pollution-particles-in-the-air-during-the-winter-season/article-132514</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/air-pollution--smoke-and-dust--eyes-become-vulnerable--and-problems-like-allergies--air-pollution-particles-in-the-air-during-the-winter-season/article-132514</guid>
                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 15:21:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/500-px%295.png"                         length="284996"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नयनों को नयनों की आस : ढाई लाख लोगों को आंखों की रोशनी मिलने का इंतजार, नेत्रदान का प्रतिशत बढ़े, तो अंधेरे में जी रहे लोग फिर से देख सकें दुनिया के रंग</title>
                                    <description><![CDATA[ आंखें प्रकृति का दिया हुआ अनमोल तोहफा होती हैं। इन्हीं की बदौलत व्यक्ति दुनिया की खूबसूरती को देख पाता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-nines-are-waiting-for-the-nines-to-get/article-118777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(5)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आंखें प्रकृति का दिया हुआ अनमोल तोहफा होती हैं। इन्हीं की बदौलत व्यक्ति दुनिया की खूबसूरती को देख पाता है। एक समय था जब किसी की आंखों में रोशनी नहीं होती या किसी बीमारी के कारण आंखें खराब हो जाती थीं तो उसके जीवन में अंधेरा पसर जाता था, लेकिन नेत्रदान करके कोई भी व्यक्ति ऐसे लोगों को आंखों की रोशनी वापस दे सकता है। हालांकि जितने लोगों को आंखों की जरूरत है उसके मुकाबले नेत्रदान का प्रतिशत हमारे देश में काफी कम है। देशभर की बात करें तो करीब ढाई लाख लोग कॉर्निया ट्रांसप्लांट के इंतजार में हैं, लेकिन इसके अनुपात में नेत्रदान कम होने से इन लोगों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में भी हजारों लोग कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए वैटिंग में हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह जागरुकता की कमी है। यही वजह है कि लोग नेत्रदान करने से डरते हैं। कॉर्निया खराब होने के कारण अंधेरे में जी रहे लोगों के जीवन में उजाला लाने का काम कर रही है आई बैंक सोसायटी आॅफ राजस्थान। जिसने फरवरी 2002 में स्थापना से लेकर मई 2025 तक 25,570 लोगों को कोर्निया ट्रांसप्लांट कराया है। </p>
<p><strong>16 हजार से ज्यादा कॉर्निया ट्रांसप्लांट</strong><br />पूर्व आईएएस और आई बैंक सोसाइटी के अध्यक्ष बीएल शर्मा ने बताया कि 23 वर्षों में आई बैंक सोसायटी की ओर से कुल 25,570 कोर्निया दान में प्राप्त किए गए। इनमें से 16, 369 कोर्निया ट्रांसप्लांट किए गए। कुछ कोर्निया खराब होने या क्वालिटी अच्छी नहीं होने के कारण ट्रांसप्लांट नहीं किए जाते हैं। फिर भी इनकी उपयोगिता दर 64 प्रतिशत रही है जो अखिल भारतीय औसत 45 प्रतिशत से अधिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिशत के बराबर है। </p>
<p><strong>प्रदेश में यहां आई बैंक</strong><br />वर्तमान में आई बैंक सोसायटी द्वारा जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, कोटा, अलवर, पाली, बूंदी, चितौड़गढ़, दौसा, भरतपुर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में सेन्टर्स काम कर रहे हैं। इनके अलावा आई बैंक सोसाइटी द्वारा ब्यावर, डीग, कोटपुतली, खैरथल, सलुम्बर, बारां, झालावाड़ और हनुमानगढ़ जिलों को भी कॉर्निया कलेक्शन कार्य से जोड़ा गया है।</p>
<p><strong>सरकारी और निजी अस्पतालों में भेजे जाते हैं कॉर्निया</strong><br />सोसाइटी मृतकों के परिजनों द्वारा दान किए गए कॉर्निया आई बैंक के माध्यम से राजस्थान के एसएमएस अस्पताल सहित अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में और मांगे जाने पर अन्य राज्यों को ट्रांसप्लांट के लिए भिजवाए जाते हैं। राजस्थान में कॉर्निया भेजने के बाद आई बैंक में जो कोर्निया शेष रह जाते हैं उनको नष्ट होने से बचाने के लिए केन्द्रीय वितरण प्रणाली के तहत देश के अन्य शहरों के अस्पतालों को मांग के अनुसार भेज दिए जाते हैं।</p>
<p><strong>राज्य में लागू है राइट टू साइट पॉलिसी</strong><br />राज्य में गहलोत सरकार के समय राइट टू साइट पॉलिसी लागू की गई थी। इसके तहत यदि राज्य के सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टर, आवश्यक उपकरण एवं संसाधनों के साथ अन्य पेरा मैडिकल स्टाफ  उपलब्ध हो जाए तो नेत्रदान से प्राप्त अतिरिक्त कॉर्निया सीडीएस प्रणाली के तहत राज्य से बाहर अन्य शहरों को नहीं भेज कर राजस्थान के लोगों को लाभान्वित किया जा सकता है।<br />-लक्ष्मण बोलिया, प्रवक्ता, आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान</p>
<p><strong>देश में 350 रजिस्टर्ड आई बैंक</strong><br />शर्मा ने बताया कि देशभर में 350 रजिस्टर्ड आई बैंक हैं, लेकिन उनमें से केवल 150 आई बैंक ही सक्रिय हैं। इनमें से भी राजस्थान के आई बैंक सहित केवल 11 आई बैक ही हैं जो आई बैकिंग के क्षेत्र में विश्व की प्रमुख संस्था साईट लाइफ  इन्टरनेशनल द्वारा प्रमाणित हैं। </p>
<p><strong>नेत्रदान को लेकर कुछ जरूरी बातें</strong><br />किसी भी उम्र या लिंग का कोई भी व्यक्ति आंखें दान कर सकता है। यहां तक कि मोतियाबिंद का आॅपरेशन करा चुके, चश्मा पहनने वाले, बीपी या डायबिटीज के मरीज भी नेत्रदान कर सकते हैं। रेटिनल या ऑप्टिक नर्व की बीमारी के कारण दिव्यांग लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं। </p>
<p>नेत्रदान में आंखों का कॉर्निया दान किया जाता है। यह हमें दिखाई देने वाली आंख के सामने की बाहरी पारदर्शी परत होती है। कॉर्निया के जरिए ही पुतली को देखा जा सकता है। कॉर्निया प्रकाश को रेटिना पर भेजता है, वहां से इसकी तस्वीर मस्तिष्क को भेजी जाती है और इस तरह हम सभी चीजों को देख और पहचान पाते हैं।</p>
<p>मृत्यु के बाद जितना जल्दी हो सके आंखें दान की जानी चाहिए, लेकिन अधिकतम छह घंटे के अंदर कॉर्निया निकाला जा सकता है। इसके लिए डॉक्टरों की टीम मृतक के पास स्पेशल कंटेनर लेकर जाती है। कॉर्निया निकालकर उसे एक सॉल्यूशन जिसे कानिसोल कहते हैं, में लैब में प्रिजर्व किया जाता है और फिर उसे तत्काल कॉर्निया बैंक को पहुंचाया जाता है। </p>
<p>दान किए गए कॉर्निया को लंबे समय तक नहीं रखा सकता। इसे अधिकतम सात दिन के अंदर किसी न किसी को ट्रांसप्लांट करना ही होता है। जितना जल्दी कॉर्निया प्रत्यारोपित होगा, उतना ही बेहतर रिजल्ट मिलेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अब आधुनिक सॉल्यूशन के जरिए 14 से 15 दिन भी कॉर्निया प्रिजर्व किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-nines-are-waiting-for-the-nines-to-get/article-118777</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-nines-are-waiting-for-the-nines-to-get/article-118777</guid>
                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 11:53:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-06/news-%285%2923.png"                         length="472331"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला की आंख कुतरने का मामला :  जांच हुई पूरी, समीक्षा के बाद ही दोषियों पर होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ महाराव भीमसिंह अस्पताल में 16 मई को एक महिला की आंख की पलक कुतरने के मामले में जांच कर रही कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट अधीक्षक को सौंप दी है। लेकिन अधीक्षक और जांच कमेटी में शामिल एक डॉक्टर के अस्वस्थ्य होने से सौंपी गई रिपोर्ट पर समीक्षा नहीं हो सकी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/woman-s-eye-nibble-case---investigation-completed--only-after-review--action-will-be-taken-against-the-culprits/article-10305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/mbs-janch-poori-hui-chooha.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । महाराव भीमसिंह अस्पताल में 16 मई को एक महिला की आंख की पलक कुतरने के मामले में जांच कर रही कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट अधीक्षक को सौंप दी है। लेकिन अधीक्षक और जांच कमेटी में शामिल एक डॉक्टर के अस्वस्थ्य होने से सौंपी गई रिपोर्ट पर समीक्षा नहीं हो सकी। जिससे इस घटना के जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। राजस्थान के स्वास्थ्य मॉडल की धज्जियां उड़ाने वाली शर्मनाक घटना के बाद भी अस्पताल प्रशासन की ओर से चूहों और कांक्रोच को पकड़ने के लिए किसी पेस्टीसाइड कार्यक्रम की शुरुआत नहीं की। वहीं दूसरी ओर शहर की कई स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा चूहे पकड़ने के लिए पिजरें अस्पतालों के वार्डो में रखवा दिए। कई वार्डो में चूहा पकड़ने की प्लेटे लगाई जिसमें रोज तीन से चार चूहे पकड़ में आ रहे है। वार्ड बॉय का कहना है कि जब से चूहे पकड़ने की प्लेटे रखी है तब से हर वार्ड में तीन से चार चूहे पिजरों व प्लेट पर चिपक रहे है। सबसे ज्यादा चूहे मेडिकल वार्ड से पकड़ में आ रहे हंै। इसके अलावा स्ट्रोक वार्ड, नेत्र वार्ड, अस्थि रोग वार्ड में रोज एक दो चूहे पकड़ में आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल में पेस्टीसाइड कार्यक्रम चल रहा तो इतने चूहे कहां से आ रहे है। तीमारदारों का कहना है कि पिछले छह माह से इस अस्पताल में क्रांकोच, चूहे, खटमल को नष्ट करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई गंभीर कदम नहीं उठाए जिससे अस्पताल की चूहों का आंतक हो गया है। <br /><br /><strong>स्वयंसेवी संस्थाओं ने दान किए पिजरें</strong> <br />अस्पताल में मंगलवार को हुई महिला की पलक कुतरने की घटना के बाद शहर की विभिन्न संस्थाओं ने अस्पताल में चूहों को पकड़ने के लिए पिजरे भेंट किए एक संस्थाने दस पिजरें भेट किए वहीं अन्य संस्थाओं की ओर चूहे पकड़ने की प्लेट्स भेंट की। इसके अलावा अस्पताल प्रशासन की ओर से भी चूहों को पकड़ने के लिए वार्डो और नर्सिंग स्टाफ रूम में पिजरे रखवाए जिससे चूहे पकड़े जा सके। <br /><br /><strong>हर वार्ड में चूहों ने बना रखे  बिल</strong><br />अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार राम किशन ने बताया कि चूहों का आंतक देखना है तो रात के समय आए। वार्ड में चूहे धमाल चौकड़ी मचाते हैं। फर्श पर सोने वालों के ऊपर से कूदफांद करते है। एमबीएस अस्पताल के हर वार्ड में चूहों बिल बना रखे है। एक वार्ड से दूसरे वार्ड में घूमते रहते है। अस्पताल के सफाई कर्मियों ने बताया कि अभी तक छोटे चूहे पिजरों व प्लेट में फंस रहे बड़े चूहे प्लेट्स को कूतर कर भाग जाते है। तीमारदारों ने बताया कि पिछले दो दिन से पिजरे और प्लेट रखने के बाद चूहे अब खूले में कम दिखाई दे रहे लेकिन मरीजों के लिए रखे फल और खाने पर हाथ साफ करने से अभी नही चूक रहे है। <br /><br /><strong>16 मई को हुई थी घटना</strong><br />एमबीएस अस्पताल के न्यूरो स्ट्रोक यूनिट में जीपी कॉलोनी निवासी 28 वर्षीय रूपवती पिछले 51दिनों से भर्ती है। उसका पूरा शरीर पेरेलाइज है। वो शरीर का कोई हिस्सा हिला नहीं सकती। साथ ही बोल भी नहीं सकती है।  <br />महिला के पति देवेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि  16 मई तड़के  3 बजे वह अपनी पत्नी के पास ही आईसीयू में था। उसकी दाईं आंख की पलकों को चूहा कुतर गया।  बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष  ने अस्पताल दौरा कर मरीज की कुशक्षेम पूछी और अस्पताल की व्यवस्था सूधारने के निर्देश दिए। साथ जांच कमेटी गठित कर दोषियों खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए। <br /><br /><strong>घटना  के पांच दिन बाद भी  जवाबदेही नहीं हो सकी तय</strong><br />एमबीएस अस्पताल में महिला की आंख की पलक कुतरने की घटना के पांच दिन बाद भी अस्पताल प्रशासन इस घटना के जिम्मेदारों व दोषियों की जवाबदेही तय नहीं कर सका। जांच कमेटी के सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट अधीक्षक को सौंप दी लेकिन अधीक्षक के अवकाश पर चलने और एक अन्य जांच कमेटी के सदस्य डॉक्टर के अस्वस्थ्य होने से रिपोर्ट की समीक्षा नहीं हो सकी। अस्पताल प्रशासन अब सोमवार तक रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की बात कर रहा है। <br /><br /><strong>इनका कहना है...</strong><br />महिला की आंख की पलक कूतरने की घटना की जांच पूरी हो चुकी है। लेकिन जांच कमेटी के सदस्य डॉ. एचके गुप्ता के अस्वस्थ्य होने से जांच समीक्षा होने में विलंब हो रहा है। एक दो दिन में उनके स्वस्थ्य होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के लिए पांच सदस्यों की एक कमेटी बनाई है जिसमें डॉ. आरडी मीणा, डॉ. एचके गुप्ता, डॉ. समीर टंडन,डॉ. नवीन सक्सेना, नर्सिंग सुपरडेंट द्वारा जांच कर रिपोर्ट सौंप दी है। सोमवार तक समीक्षा होने की संभावना है। अस्पताल में पेस्टीसाइड कंट्रोल अभियान जारी है। अस्पताल में चूहे, मच्छर, कीट, कांकरोच को नियंत्रण करने का अभियान चलाया जा रहा है। <br /><strong>- डॉ. समीर टंडन, उप अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong> <br /><br />जांच कमेटी की रिपोर्ट समिट हो चुकी है लेकिन मैं अवकाश पर होने से रिपोर्ट का अध्ययन नहीं कर सका। सोमवार को लौटने के बाद ही रिपोर्ट की समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाएगी।<br /><strong>- डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/woman-s-eye-nibble-case---investigation-completed--only-after-review--action-will-be-taken-against-the-culprits/article-10305</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/woman-s-eye-nibble-case---investigation-completed--only-after-review--action-will-be-taken-against-the-culprits/article-10305</guid>
                <pubDate>Mon, 23 May 2022 17:22:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/mbs-janch-poori-hui-chooha.jpg"                         length="48066"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाल-ए-एसएमएस अस्पताल... जरूरत 350 सीसीटीवी की, काम कर रहे हैं 70 कैमरे</title>
                                    <description><![CDATA[130 कैमरे लगे, लेकिन किसी काम के नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hall-e-sms-hospital----needed-350-cctv-cameras--70-cameras-working--how-will-the-crime-stop--the-third-eye-is-only-four-times-worse--the-criminals-commit-the-crime-to-the-victim-of-the-disease-manifold-pain/article-6934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sms.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के कई राज्यों के मरीजों का भार संभाल रहा सवाई मानसिंह अस्पताल खुद लचर सुरक्षा व्यवस्था जैसी बड़ी बीमारी से ग्रसित है। यहां दूरदराज से ज्यादातर गरीब तबके के मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां उन्हें कभी जेब कटने, मोबाइल चोरी होने तो कभी वाहन चोरी होने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में मरीज के परिजनों और डॉक्टर्स तथा अन्य स्टाफ के साथ ऐसी घटनाएं अब आम हो गई हैं। इसके बाद भी अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा।</p>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:64.3333px;height:41px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:535.667px;height:41px;"> 130 कैमरे लगे, लेकिन किसी काम के नहीं</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:64.3333px;height:41px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:535.667px;height:41px;">पुलिस ने एसएमएस प्रशासन को सौंपा वाहन और मोबाइल चोरी रोकने का मास्टर प्लान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:64.3333px;height:41px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:535.667px;height:41px;"> सुरक्षा में तैनात गार्ड भी नाकाफी, 300 गार्ड भी हैं कम</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span style="color:#ff0000;background-color:#ffff99;"><strong>एक नजर में वारदात</strong></span><br />पुलिस की ओर से तैयार रिपोर्ट की बात करें तो 18 अगस्त, 2021 से लेकर 31 दिसम्बर, 2021 तक कुल 512 मोबाइल और 52 बाइक चोरी हुई। वहीं 2022 में एक जनवरी, 2022 से लेकर 21 फरवरी तक 150 मोबाइल और 15 बाइक चोरी हुई। एसएमएस के गेट नम्बर एक से लेकर 6 नम्बर के बीच में सबसे ज्यादा वाहन चोरी होते हैं। चोर मास्क लगाकर आते हैं और आसानी से वारदात करते हैं। मास्क से भी पुलिस को वाहन चोर पकड़ने में मशक्कत करनी पड़ती है।</p>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:599px;text-align:center;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>वर्तमान में सुरक्षा व्यवस्था</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:66.2667px;">1.</td>
<td style="width:532.733px;">करीब 200 सीसीटीवी लगे हैं, जिनमें से 70 कैमरे ही काम कर रहे हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:66.2667px;">2.</td>
<td style="width:532.733px;">अस्पताल के मुख्य द्वारों पर कोई भी कैमरा और गार्ड नहीं हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:66.2667px;">3.</td>
<td style="width:532.733px;">वर्तमान में एसएमएस की सुरक्षा के लिए निजी कम्पनी के 423 गार्ड हैं। इसके साथ ही 56 गार्ड एक्स-आर्मी मैन हैं।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:74.3333px;text-align:center;" colspan="2"><strong><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;">यह होना चाहिए</span></strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:74.3333px;">1.</td>
<td style="width:525.667px;">पूरे अस्पताल की सुरक्षा के हिसाब से 350 सीसीटीवी अतिआवश्यक हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:74.3333px;">2.</td>
<td style="width:525.667px;">हाल में तैनात गार्ड के अलावा 100 गार्ड्स की और तैनाती की जाए तो सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो सकती है।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सबसे ज्यादा भीड़ वहां भी सुरक्षा नहीं</strong></span><br />हर रोज एसएमएस के गेट नम्बर-4 जहां धनवंतरी ओपीडी है यहां पर सबसे ज्यादा भीड़ आती है। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार यहां पर गार्ड और सीसीटीवी कैमरे नहीं है। इसी गेट पर महावीर विकलांग समिति है, जिसके बाहर गार्ड व सीसीटीवी कैमरे नहीं है।<br /><br />अस्पताल में कैमरों और गार्ड की संख्या जल्द ही बढ़ाई जाएगी। पुलिस प्रशासन से भी बात हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर मरीजों और स्टाफ के साथ हो रही चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। <br />-<strong>डॉ. विनय मल्होत्रा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल</strong><br /><br />एसएमएस में हो रही वाहन चोरी, मोबाइल छीनने और पर्स निकालने जैसी वारदातों को रोकने के लिए एक प्लान एसएमएस प्रशासन को सौंपा है, इसमें हर वारदात के हॉट स्पॉट को बताते हुए उन्हें रोकने के सुझाव भी दिए हैं। यदि यह प्लान लागू होता है तो काफी हद तक वारदातें रोकी जा सकेंगी। <br />-<strong>नवरतन धौलिया, थाना प्रभारी, एसएमएस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hall-e-sms-hospital----needed-350-cctv-cameras--70-cameras-working--how-will-the-crime-stop--the-third-eye-is-only-four-times-worse--the-criminals-commit-the-crime-to-the-victim-of-the-disease-manifold-pain/article-6934</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hall-e-sms-hospital----needed-350-cctv-cameras--70-cameras-working--how-will-the-crime-stop--the-third-eye-is-only-four-times-worse--the-criminals-commit-the-crime-to-the-victim-of-the-disease-manifold-pain/article-6934</guid>
                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 12:56:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/sms.jpg"                         length="73663"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        