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                <title>depression - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>depression RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजस्थान में बदला मौसम का मिजाज  : जैसलमेर में धूलभरी आंधी ; कई जिलों में बारिश, तीन दिन में 12 डिग्री गिरा पारा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राजस्थान के कई जिलों में तेज आंधी, रेत का गुबार और बारिश दर्ज की गई। जैसलमेर और बीकानेर में दिन में अंधेरा छा गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4-5 दिनों तक 60-70 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं और बारिश का दौर जारी रहेगा, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/weather-patterns-changed-in-rajasthan/article-155575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/temprature.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में रविवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के अनेक जिलों में तेज आंधी, धूलभरी हवाएं और बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती जिले जैसलमेर में देखने को मिला, जहां रामगढ़, मोहनगढ़, नाचना और आसपास के क्षेत्रों में धूल का विशाल गुबार छा गया। तेज आंधी के कारण कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई और दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। मौसम विभाग के अनुसार बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर, सीकर, अलवर और जयपुर सहित कई जिलों में तेज हवाओं के साथ मौसम बदला।</p>
<p>कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हुई, जिससे पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली। जयपुर में भी तेज हवाओं के बाद कहीं कहीं बूंदाबांदी दर्ज की गई। पिछले दो दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर पश्चिमी राजस्थान में धूलभरी आंधियों का दौर तेज हुआ है। बीकानेर और चूरू में रेत के गुबार के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा, जबकि कई स्थानों पर वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी। </p>
<p><strong>अगले 4-5 दिन बना रह सकता है ऐसा मौसम</strong></p>
<p>मौसम केन्द्र जयपुर के अनुसार आगामी चार से पांच दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम इसी प्रकार बना रह सकता है। बीकानेर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर संभाग के जिलों में गरज चमक के साथ बारिश, तेज आंधी और 60 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। मौसम बदलाव के कारण पिछले तीन दिनों में पारा 12 डिग्री तक नीचे गया है। </p>
<p><strong>तीन दिन में 12 डिग्री तक गिरा पारा</strong></p>
<p>मौसम विभाग का कहना है कि इस सक्रिय सिस्टम के चलते अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे बना रह सकता है। इससे प्रदेशवासियों को लू और भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान के जिलों में भी एक जून से तीन जून के बीच आंधी, गरज चमक और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:12:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में मिर्गी के 41 प्रतिशत मरीजों में डिप्रेशन, वजह: सामाजिक उपेक्षा, 28 प्रतिशत मरीज आज भी इलाज के लिए झाड़ फूंक का ले रहे सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[डिप्रेशन के कारण मरीजों को सही इलाज लेने में भी मुश्किल होती है और उनके जीवन की गुणवत्ता भी बहुत कम हो जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/depression-in-41-percent-of-epilepsy-in-social-neglect/article-108683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy183.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ग्रामीण इलाकों में आज भी झाड़फूंक के जरिए मिर्गी का इलाज किया जा रहा है जो कि मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। यही वजह है कि राजस्थान में सबसे आम न्यूरोलॉजिकल बीमारी मिर्गी के 41 प्रतिशत मरीज डिप्रेशन से ग्रस्त हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दौरे आने पर होने वाली सामाजिक उपेक्षा है। डिप्रेशन के कारण मरीजों को सही इलाज लेने में भी मुश्किल होती है और उनके जीवन की गुणवत्ता भी बहुत कम हो जाती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं आंकड़ें</strong><br />आंकड़ों की मानें तो भारत में मिर्गी के करीब डेढ़ करोड़ मरीज हैं। इनमें से अकेले राजस्थान में ही करीब पांच लाख मरीज मिर्गी रोग से ग्रस्त हैं। इतना ही नहीं हर साल करीब 25 हजार नए मिर्गी के मामले प्रदेश में सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद जागरुकता की कमी इस बीमारी के इलाज में आड़े आ रही है।</p>
<p>इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन के जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष और सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र सुरेका ने बताया कि राजस्थान में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि मिर्गी के मरीजों में डिप्रेशन की शिकायत सबसे आम है। इसका सबसे बड़ा कारण समाज में उन्हें लेकर भ्रांतियां हैं। मरीज को आम इंसान जैसा महसूस नहीं कराया जाता है जिससे वह अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हो जाते हैं और डिप्रेशन में चले जाते हैं। रिसर्च में 352 मरीजों ने भाग लिया था जिसमें ये परिणाम सामने आए।</p>
<p><strong>28% मरीजों की अब दूर हो रही भ्रांति  </strong><br />डॉ. सुरेका ने बताया कि अब मिर्गी के झाड़फूंक से ठीक होने की भ्रांति तेजी से बदलाव आ रहा है। करीब 10 साल पहले तक जहां 78 प्रतिशत मरीज मिर्गी के इलाज के लिए डॉक्टर्स के पास न जाकर झाड़फूंक के लिए जाते थे अब भी 28 प्रतिशत मरीज मिर्गी के इलाज के लिए झाड़फूंक करा रहे हैं। </p>
<p><strong>57% लोग मानने लगे, मिर्गी दिमाग की बीमारी </strong><br />शोध में यह भी सामने आया है कि मिर्गी के वे मरीज जो इसे बुरी आत्मा की बीमारी न मान कर दिमागी बीमारी मानते हैं, उनकी संख्या बढ़ी है। चार सालों में ऐसे मरीज 23 से 57 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। करीब 10 प्रतिशत से भी कम लोग अपनी इस बीमारी को नजरअंदाज कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मिर्गी से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई</strong><br />मिथक: मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच या धातु की वस्तु डालना जरूरी है।<br />सत्यता: ऐसा करना बिल्कुल गलत है। इससे रोगी को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और दांत या जबड़ा भी टूट सकता है। दौरे के समय रोगी को सिर्फ  एक तरफ  करवट देकर सुरक्षित स्थान पर लेटना चाहिए और सिर के नीचे कोई मुलायम वस्तु रखनी चाहिए।<br />मिथक: मिर्गी किसी भूतप्रेत या टोने-टोटके का असर है।<br />सच्चाई: मिर्गी का संबंध मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि से होता है। यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसका इलाज दवाओं और उचित देखभाल से संभव है।<br />मिथक: मिर्गी छूने या संपर्क में आने से फैलती है।<br />सच्चाई: मिर्गी किसी भी प्रकार से संक्रामक रोग नहीं है। यह अनुवांशिक या मस्तिष्क में चोट, संक्रमण या अन्य कारणों से हो सकती है लेकिन यह किसी और को छूने से नहीं फैलती।<br />मिथक: मिर्गी का कोई इलाज नहीं है, यह जीवन भर साथ रहती है।<br />सच्चाई: मिर्गी का इलाज संभव है। सही समय पर शुरू की गई दवाओं से लगभग 70 प्रतिशत मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।</p>
<p><strong>हार्ट की तरह अब मिर्गी के लिए भी पेसमेकर</strong><br />जिस तरह हार्ट की अनियंत्रित धड़कन को नियंत्रित करने के लिए पेसमेकर लगाया जाता है। उसी तरह अब दिमाग में मिर्गी को कंट्रोल करने के लिए भी पेसमेकर जैसा डिवाइस वेगस नर्व स्टीमुलेटर आ गया है। यह गर्दन के पास इंप्लांट होता है जो ब्रेन तक जाने वाली नर्व से जुड़ता है और मिर्गी आने पर उसे इलेक्ट्रिक शॉक देकर बढ़ने से रोकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 11:50:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फेल होने के डर से ही आत्महत्या कर रहे छात्र, ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में चूकने पर भी जिंदगी में हार नहीं मानते खिलाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[छात्रों में बढ़ती निराशा की प्रवृति को रोकने के लिए स्कूलों में अनिवार्य हो खेल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/students-are-committing-suicide-due-to-fear-of-failure-players/article-91622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/suicide.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उड़न पारी पीटी उषा हो या मिल्खा सिंह, श्रीराम सिंह और दर्जनों भारतीय खिलाड़ी, ओलंपिक और दीगर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई बार मामूली अंतर से पदक से चूक गए लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर चुनौती का सामना किया, हर परीक्षा से गुजरे मगर निराशा में गलत कदम नहीं उठाया। इसके विपरीत देश का छात्र वर्ग परीक्षा में असफलता तो दूर फेल होने के डर से ही आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है।</p>
<p>ऐसे ज्यादा मामले राजस्थान के ही कोटा जिले से आ रहे हैं, जो देश में शिक्षा का बड़ा केन्द्र बना है। परीक्षा शिक्षा जगत में हो या खेल के मैदान पर, प्रतिस्पर्धा हर स्तर पर है। एक छात्र से तो उसके पेरेंट्स और रिश्तेदारों की ही उम्मीदें जुड़ी रहती हैं, वहीं खिलाड़ी जब हजारों दर्शकों के बीच मैदान पर उतरता है तो लाखों-करोड़ों लोगों की उम्मीदों का भार लेकर चलता है। खिलाड़ी हार कर भी हार नहीं मानता। कभी सुना नहीं कि एक खिलाड़ी ने हार से निराश होकर अपने आपको समाप्त करने जैसा कदम उठाया हो। वहीं छात्र असफलता के भय से ही मानसिक तनाव और डिप्रेशन का शिकार बन रहे हैं।</p>
<p><strong>इन खिलाड़ियों से सीख लें छात्र</strong><br />राजस्थान का पैरा एथलीट सुन्दर सिंह 2018 के रियो ओलंपिक खेलों में नाकामी के बाद डिप्रेशन का शिकार हुआ। सुन्दर रियो ओलंपिक की भालाफेंक स्पर्धा में मात्र दो मिनट की देरी की वजह से हिस्सा नहीं ले सका। उसे डिस्क्वालीफाई कर दिया गया। अच्छी तैयारी के साथ ओलंपिक में पहुंचे खिलाड़ी के लिए यह  बड़ा झटका था लेकिन खेल भावना और कोच महावीर सेनी के मोटिवेशन से सुन्दर फिर मैदान पर उतरा और लंदन वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर लाया। </p>
<p>टोक्यो पैरालंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर के लिए हाल ही पेरिस में मिली नाकामी बड़े सदमे से कम नहीं रही। वर्ल्ड चैंपियन के रूप में पेरिस खेलों में पहुंचे कृष्णा देश के लिए पदक नहीं जीत पाने से बेहद दुखी नजर आए लेकिन वो बाकई एक खिलाड़ी हैं। वह हार मानकर बैठने वाले नहीं हैं और यही जज्बा उन्हें फिर से मैदान पर ले आया। कोच यादवेन्द्र सिंह के साथ कृष्णा नागर अब फिर से अगले मुकाबले की तैयारी में जुटे हैं।</p>
<p><strong>छात्रों में हों खिलाड़ी जैसे गुण</strong><br />खेलों से जुड़े लोग हों या शिक्षा जगत से या समाज का अन्य तबकाए हर कोई आज महसूस कर रहा है कि खेलों को शिक्षा में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। स्कूली जीवन में हर विद्यार्थी के लिए खेलना भी अनिवार्य किया जाए। इससे बच्चों में एक खिलाड़ी जैसी भावना उत्पन्न होगी। बच्चों में हार से निराश नहीं होने की भावनाए जीवन में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने जैसे गुणए हताश होने की जगह अगली चुनौती के लिए नये सिरे से तैयारी रहने का ज’बा जैसे एक खिलाड़ी के गुण बचपन से ही पनपेंगे और युवा पीढ़ी तनाव और डिप्रेशन जैसी बीमारियों से दूर रहेगी।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की राय: शिक्षा के साथ खेलों को अनिवार्य बनाया जाए</strong><br />मौजूदा दौर में सामाजिक प्रतिष्ठा और अच्छा पद हासिल करने के लिए पढ़ाई पर ध्यान देना जरूरी है लेकिन परिवार और समाज की उम्मीदों के भार तले बच्चे इस कदर पढ़ाई के दबाव में हैं कि अन्य गतिविधियों से पूरी तरह कट गए हैं। जब उनके सपने पूरे नहीं होते तो तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में युवा आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं। शिक्षा के साथ खेलों को अनिवार्य बनाया जाए। बच्चे खेलेंगे तो बचपन से ही मानसिक परिपक्वता, टीम भावना और हर परिस्थिति में संतुलन बनाने जैसे गुण उनमें आएंगे। <br />-रामावतार सिंह जाखड़, सचिव, राजस्थान ओलंपिक संघ</p>
<p>कहावत भी है कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है। एक खिलाड़ी का शारीरिक और मानसिक स्तर आम युवा की तुलना में अधिक मजबूत और संतुलित रहता है। खिलाड़ी में चुनौतियों को स्वीकार करने और हार के बाद नया लक्ष्य तय कर उसे हासिल करने की संघर्ष क्षमता एक आम युवा से अधिक रहती है। छात्रों को भी असफलता खिलाड़ी की तरह निराश होकर बैठने की जगह नई चुनौती का मुकाबला करना चाहिए। छात्रों को ये सीख छोटी क्लास से ही मिले। <br />-श्यामवीरसिंह, पूर्व खेल अधिकारी, राजस्थान खेल परिषद</p>
<p>सरकार फिट राजस्थान और हिट राजस्थान की बात तो करती है लेकिन आज बच्चों को न तो पढ़ाई से फुर्सत है और न ही खेलने की जगह। बस्ते का बोझ जो प्राइमरी से शुरू होता है वो उच्च शिक्षा तक दिमाग पर बोझ बन जाता है। हम चर्चा तो करते हैं कि शिक्षा के साथ बच्चों को खेल भी जरूरी हैं।  अभिभावक बच्चों को खिलाना भी चाहें तो हर किसी के लिए यह संभव नहीं है। छोटे बच्चों को कॉलोनी से दूर भेजना संभव नहीं और कॉलोनी में खेल के मैदान नहीं रहे। कहीं पार्कों में मंदिर बना दिए तो कहीं बड़े-बुजुर्ग बच्चों को मैदान से बाहर कर देते हैं। <br />-अजय जोशी, अभिभावक</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Sep 2024 14:25:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>World Suicide Prevention Day: अवसाद के कारण बढ़ रही आत्महत्याएं, इसलिए भावनाएं साझा करें, तनाव मुक्त रहें और होड से बचें</title>
                                    <description><![CDATA[चौंकाने वाली बात यह है कि 15 से 29 वर्ष की आयु में यह मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। आजकल युवा विशेष रूप से स्टूडेंट्स आगे बढ़ने की होड़ में तनाव से गुजर रहे हैं और कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/suicides-are-increasing-due-to-depression-so-share-your-feelings/article-90125"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(5).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अवसाद एक प्रकार का मनोदशा विकार है जो अपने जीवनकाल में लगभग 20 में से 1 व्यक्ति को प्रभावित करता है। अवसाद के कारण बढ़ती आत्महत्या एक अत्यंत चिंता का विषय है और डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 7 लाख 20 हजार आत्महत्याएं होती हैं। यानी लगभग हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या से अपना जीवन गंवा देता है।</p>
<p>चौंकाने वाली बात यह है कि 15 से 29 वर्ष की आयु में यह मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। आजकल युवा विशेष रूप से स्टूडेंट्स आगे बढ़ने की होड़ में तनाव से गुजर रहे हैं और कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि दिन प्रतिदिन बढ़ते कॉम्पिटिशन के चलते आज का स्टूडेंट बुद्धिमान और सक्षम होते हुए भी चाहे अनचाहे तौर पर एक प्रकार का तनाव महसूस करने लगता है जिसका असर ना केवल उसकी तैयारी बल्कि शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। </p>
<p>क्या हैं आमजन और स्टूडेंट्स में आत्महत्या के कारण: सफलता पाने की होड़ तनाव को अप्रत्यक्ष रूप से और बढ़ा देती है। अधिकांश छात्र परिवार के सीधे संपर्क से दूर छात्रावासों में रहते हैं, इसलिए जब कुछ मानसिक तनाव होता है तो परिवार के सदस्यों की गैर मौजूदगी जो ऐसे समय में एक भावनात्मक सपोर्ट दे सकती है, कहीं न कहीं खलती है। कई बार व्यक्ति नशे का भी सहारा ले सकता है जो ज्यादा घातक है। इस उम्र में तनाव, अवसाद आदि जैसी मानसिक समस्याओं का होना और उनकी समय पर पहचान ना हो पाना भी ऐसी परिस्थितियों को पैदा कर सकता है । </p>
<p>ऐसी स्थिति में कैसे करें मैनेज: पढ़ाई के साथ साथ सोशल और मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने के लिए छात्रों को बढ़ावा देना चाहिए। मित्रों एवं परिजनों से सकारात्मक संवाद बनाए रखें। अपनी भावनाओं को साझा करें। किसी भी प्रकार की भावनात्मक परेशानी होने पर मदद मांगना बिल्कुल सामान्य माना जाना चाहिए, इसे किसी कमजोरी के रूप में ना देखें। परिजन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ ना डालें। </p>
<p><strong>सोशल मीडिया भी आत्महत्या के लिए बन रहा जिम्मेदार</strong><br /> मनोरोग विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया अच्छा है लेकिन इसका सही इस्तेमाल जरूरी है। इसका ज्यादा उपयोग मानसिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है। फोन नहीं उठाना, स्टेटस नहीं देखना, पोस्ट पर लाइक्स नहीं आना, शेयर नहीं किया जाना, पोस्ट पर कमेंट्स ना आना आदि चीजें भी आजकल युवाओं को तनाव दे रही हैं।</p>
<p><strong>आत्महत्या के कुछ चेतावनी संकेत</strong><br />उन चीजों को करना बंद कर देना, जिनका उन्हें आमतौर पर आनंद आता है। नकारात्मक बातें करना, चिड़चिड़े हो जाना या भावनात्मक रूप से उग्र हो जाना। अत्यधिक उदास एवं अलग अलग रहना या अनावश्यक रूप से ज्यादा खुश दिखाई देना। दोस्तों, परिवार या नियमित गतिविधियों से दूर हो जाना। जीवन समाप्त करने की बातें करना एवं उसके लिए तरीकों की जानकारी करना ।</p>
<p>आज के समय में अवसाद काफी बढ़ गया है, जिससे आत्महत्याएं बढ़ रही है। खासकर युवा वर्ग में यह ज्यादा हो रहा है। इसलिए बच्चों और युवाओं से अपील है कि आपको मानव जीवन मिला है, यह स्वयं एक वरदान है। हर कोई अद्वितीय है और उसकी अपनी क्षमता है। इसलिए खुश रहें, संवाद करें, अपनी भावनाएं साझा करें, दिनचर्या बनाए रखें और मदद मांगने में कभी संकोच न करें। <br /><strong>-डॉ. अखिलेश जैन, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 12:47:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Demonology, Drugs and Depression की आंतरिक लड़ाई पर बनाई फिल्म</title>
                                    <description><![CDATA[अंत में पता चलता है की वो किसी बाहर की शक्ति से जो डेमोनोलॉजी से जुड़ी है उसमें समा गई और खो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/a-film-based-on-the-internal-battle-between-demonology-drugs/article-81037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer10.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। राजस्थान में उदयपुर के नौजवानों ने डेमोनोलॉजी, ड्रग्स एवं डिप्रेशन की आंतरिक लड़ाई को लेकर एक लघु फिल्म रिलीज की है।</p>
<p>फिल्म के निर्माता मुकुल खंडिया ने बताया कि यह कहानी एक लड़की आकांक्षा के बारे में है जो आंतरिक संघर्षों से जूझ रही है। वह खुद से लड़ रही है, जद्दोजहद का सामना करती है। ड्रग्स का इस्तेमाल करती है और उसमें एक ऐसा डर है कि दुनिया उसके खिलाफ है। उसका रवैया और जलन उसे निगल लेता है। उसे पहले ही नतीजे पूर्वानुमानित करने और निर्णय लेने की अनुमति देते है।</p>
<p>वह दूसरों की सुंदरता और खुशी में ईष्या करने लगती है, जिससे वह खुद को चोट पहुँचाती है। उसने विचार किया और एक अनुमानित प्रतिद्वंद्वी (रेंडम गर्ल जो की काल्पनिक है) को नुकसान पहुंचाने के लिए वास्वतिकता और कल्पना की रेखा का मिलान कर दिया। अंत में पता चलता है की वो किसी बाहर की शक्ति से जो डेमोनोलॉजी से जुड़ी है उसमें समा गई और खो गई।</p>
<p>इस फिल्म के निर्माता एवं लेखक मुकुल खांडिया, स्कीनप्ले राइटर्स अरशद कुरैशी एवं मुकुल खांडिया, फिल्म की मुख्य भूमिका में कृष्णा शर्मा, करन सिंह राजपुरोहित, रिया नागदेव, उमंग सोनी, दिव्यांश डाबी, हर्ष दुबे, प्रणय पंड्या, सतीश खोखर, प्रमोद रैगर एवं कैलाश जांगिड़ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 15:02:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिजिक्सवाला से ऑनलॉइन कोचिंग ले रहे छोटे भाई की मौत, अवसाद में बड़ा भाई </title>
                                    <description><![CDATA[पिता ने कहा था बेटा अगर नीट क्लीयर नहीं हो रहा है तो जीएएनएम नर्सिंग या  बीएसटीसी का कोर्स कर लेना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/elder-brother-in-depression-due-to-shock-of-younger-brother-s-death-who-was-taking-online-coaching-from-physicswala/article-77643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/6633-copy39.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। छोटे भाई मनीष  द्वारा आठ दिन पूर्व भरतपुर में फंसी का फंदा लगाकर आत्महत्या करने के बाद से बड़ा भाई आशीष अवसाद में  है। परिजनों ने उसे  भरतपुर जिले के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। लखनपुर नदबई निवासी मनीष (18) पुत्र हरभान सिंह 12 वीं कक्षा के बाद अपने बड़े भाई आशीष और मामा के साथ बृज नगर भरतपुर में किराए का कमरा लेकर दो साल से रह रहा था और फिजिक्सवाला कोचिंग संस्थान से ऑनलाइन नीट की तैयारी कर रहा था।  मनीष ने 4 मई को भरतपुर के मथुरागेट पुलिस थाना क्षेत्र में फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी। वह पढ़ने में बहुत हुशियार था और परिवार के सदस्यों का लाड़ला था। मनीष दो भाई थे। उसके  आत्महत्या करने के बाद से परिवार में मायूसी छा गई है   परिवार का हर सदस्य मायूस है।  आशीष  के अवसाद में आने से परिजन उससे किसी को भी मिलने नहीं दे रहे हैं तथा उसका फोन भी बंद करवा दिया है। </p>
<p>मृतक मनीष कुमार के पिता हरभान सिंह ने बताया कि  बड़ा बेटा आशीष कुमार श्री दिगंबर जैन पैरा मेडिकल कॉलेज सेवर जिला भरतपुर से डीएमएलटी का कोर्स कर रहा है और छोटे बेटे  मनीष कुमार ने वर्ष 2022 में 12 वीं क्लास   की  परीक्षा में 94 प्रतिशत प्लस   तथा दसवीं में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। वह पढ़ने में होशियार था और डाक्टर बनने का सपना लेकर भरतपुर आया था, लेकिन सब खत्म हो गया। हमें वहां से उसकी डेड बॉडी लानी पड़ी । इससे पहले मनीष ने एक निजी कोचिंग से एक साल नीट की कोचिंग ली थी। इस सत्र में उसने अगस्त-सितंबर 2023 में फिजिक्सवाला कोचिंग संस्थान से आॅन लाइन कोचिंग ली । इसके लिए उसने  फोन-पे से ही 3800 रुपए जमा किए थे। इसके बाद से वह आॅन लाइन नीट की कोचिंग ले रहा था। उन्होंने बताया कि उसने जिस दिन  आत्महत्या की उससे  दो दिन पूर्व मैं मिलकर आया था और कहा था कि बेटा अगर नीट क्लीयर नहीं हो रहा है तो जीएएनएम नर्सिंग  या  बीएसटीसी का कोर्स कर लेना। ये पता नहीं था कि वह ऐसा कदम उठा लेगा।  </p>
<p><strong> 15  मिनट में सब खत्म </strong><br /> पिता ने बताया कि चार मई की शाम को करीब आठ बजे आशीष ने उससे कहा था कि मनीष पढ़ाई कर लो हम मामा के साथ बाजार से सब्जी लेकर आते हैं। उसका पांच मई को नीट का एग्जाम था। इसके बाद आशीष और उसका मामा  सब्जी लेने चले गए। करीब 15 मिनट बाद लौट कर आए तो मनीष फंदे पर लटका हुआ था।  उसे फंदे से उतार कर अस्पताल लेकर गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। </p>
<p><strong> इनका कहना है </strong><br /> हमने कोटा स्थित फिजिक्सवाला कोचिंग के  ब्रांच हैड दिनेश को फोन किया तो उन्होंने कहा कि आॅन लाइन की टीम अलग है उनके नंबर देता हूं। लेकिन कोई नंबर नहीं दिया गया तो उनके मोबाइल पर नंबर के लिए मैसेज किया किन्तु कोई जवाब नहीं आया। <br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 May 2024 17:40:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रेम विवाह के 14 साल बाद विवाहिता ने की आत्महत्या</title>
                                    <description><![CDATA[ रविवार दोपहर सवा दो बजे उसे दवा खिलाकर बाजार जाने के लिए निकला था। बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे। गली में खड़े  किसी से बात कर रहा था। तभी बेटी रोते हुए आई और घर चलने को कहा। बेटी ने बताया कि मम्मी ने पलंग पर चढ़कर गले में चुन्नी बांध ली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/married-woman-commits-suicide-after-14-years-of-love-marriage/article-40960"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/prem-vivah-ke-14-saal-baad-vivahita-nei-ki-aatamhatya..kota-live-news-27.3.2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के नयापुरा थाना क्षेत्र में एक विवाहिता द्वारा फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने बताया कि विवाहिता  जानकीबाई ने 14 साल पूर्व प्रेम विवाह किया था । इसके बाद से उसके परिजन उसे दूर हो गए तथा आना जाना बंद कर दिया था। इस बात से विवाहिता अवसाद में चल रही थी । उसका इलाज भी  चल रहा था बताया जा रहा है कि विवाहिता ने फांसी का फंदा लगाने से पूर्व  परिवार के सदस्यों के साथ खाना खाया  इसके बाद पति ने उसको दवा खिलाई और मार्केट से कुछ घंटे बाद लौटकर आने का कहकर घर से बाहर निकल गया । पति के निकलने के कुछ देर बाद पत्नी ने फांसी का फंदा लगा लिया । फंदे पर लटकी अपनी मां को देखकर 12 साल की बेटी  रोते हुए पिता के पास पहुंची और उन्हें पूरी बात  बताई।  घर पहुंचकर पति ने पत्नी को फांसी के फंदे से उतारा और  एमबीएस हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। लेकिन कुछ घंटे बाद  उसकी मौत हो गई।</p>
<p>पति बाल सिंह परमार ने बताया कि उसकी पत्नी जानकी बाई (35) पिछले तीन साल से मानसिक रूप से बीमारी थी। हॉस्पिटल में इलाज के अलावा देवी देवताओं के यहां भी जाते थे। लेकिन  कुछ भी फर्क नहीं पड़ रहा था। वो अजीब अजीब हरकतें करती थी। उसकी दवाइयां चल रही थी। रविवार दोपहर सवा दो बजे उसे दवा खिलाकर बाजार जाने के लिए निकला था। बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे। गली में खड़े किसी से बात कर रहा था। तभी बेटी रोते हुए आई और घर चलने को कहा। बेटी ने बताया कि मम्मी ने पलंग पर चढ़कर गले में चुन्नी बांध ली। मौके पर जाकर चुन्नी को काटा। करीब सवा तीन बजे हॉस्पिटल लेकर आया।  उस समय उसकी पल्स चल रही थी। डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में शिफ्ट किया। रात करीब साढ़े 9 बजे  पत्नी ने दम तोड़ दिया। </p>
<p>एसआई नवल किशोर ने बताया कि साल 2008 में लव मैरिज की थीं। दोनों किराए से रह रहे थे। रविवार दोपहर को महिला ने फांसी लगा ली। दोनों पक्षों के परिजन मौके पर आए है। उन्होंने मानसिक रूप से बीमार होना बताया है। दोनों के बीच कोई झगड़े की बात सामने नहीं आई है। परिजनों की सहमति से शव का पोस्टमार्टम करवा कर उन्हें सौंप दिया गया  है। मामले की जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 15:14:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन तलाक के बाद डिप्रेशन में आई पत्नी ने किया सुसाइड</title>
                                    <description><![CDATA[अलवर। तीन तलाक के बाद एक विवाहिता ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली। पीहर पक्ष का आरोप है कि महिला का ससुर उस पर बुरी नजर रखता था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/wife-in-depression-after-triple-talaq-committed-suicide/article-13076"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/talaq.jpg" alt=""></a><br /><p>अलवर। तीन तलाक के बाद एक विवाहिता ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली। पीहर पक्ष का आरोप है कि महिला का ससुर उस पर बुरी नजर रखता था।</p>
<p><br />भोंकर गांव निवासी मनीषा (20) की शादी 14 मार्च 2021 को नूंह के सिकरावा गांव निवासी इम्तियाज (23) के साथ हुई थी। मृतका के चाचा जाहूल खां ने बताया कि मनीषा के माता-पिता दोनों ही नहीं है। उन्होंने शादी में बुलेट बाइक दी, 1 लाख 61 हजार रुपए नकद दिए थे। फिर भी पति, सास, ससुर मनीषा को दहेज के लिए परेशान करने लगे। मनीषा पर उसका ससुर आसिफ बुरी नजर भी रखता था। पति को बताया तो वह गुस्सा हो गया। पिता के कहने पर ही इम्तियाज ने अपनी पत्नी मनीषा को तीन बार तलाक कहा और घर से निकाल दिया।<br /><br /><strong>मई में दिया था तलाक</strong><br />मनीषा ने 11 मई 2022 को भिवाड़ी थाने में पति, सास व ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व तलाक का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि शिकायत के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, इससे मनीषा डिप्रेशन में थी। शनिवार शाम को उसने जहर खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 12:17:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> डिप्रेशन के हो गए हैं शिकार, तो क्यों होती है ये परेशानी </title>
                                    <description><![CDATA[ जो लोग बुजुर्ग हैं उनमें डिप्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। दूसरे कारणों से ये और भी ज्यादा बदतर हो सकता है, जैसे अकेले रहना और सामाजिक समर्थन की कमी होना।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/have-become-a-victim-of-depression-why-is-this-problem/article-12328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/focus1.jpg" alt=""></a><br /><p> डिप्रेशन एक गंभीर परेशानी होती है। कोई नहीं जानता कि वास्तव में इसका क्या कारण है, लेकिन यह कई कारणों से हो सकता है। कुछ लोगों को गंभीर बीमारी के दौरान डिप्रेशन होता है। दूसरों को जीवन में बदलाव के साथ डिप्रेशन हो सकता है। यहां कुछ कारण दिए गए हैं जिनकी वजह से डिप्रेशन हो सकता है।  </p>
<p>शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण आपको जीवन में डिप्रेशन के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकता है। जो लोग बुजुर्ग हैं उनमें डिप्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। दूसरे कारणों से ये और भी ज्यादा बदतर हो सकता है, जैसे अकेले रहना और सामाजिक समर्थन की कमी होना।पुरुषों की तुलना में महिलाओं के उदास होने की संभावना लगभग दोगुनी होती है। महिलाएं अपने जीवन के अलग.अलग समय में जिन हार्मोनल परिवर्तनों से गुजरती हैं, वे भी कारण हो सकता है। कभी-कभी, डिप्रेशन एक बड़ी बीमारी के साथ होता है या किसी अन्य चिकित्सा स्थिति से शुरू हो सकता है।अन्य मानसिक बीमारियों के कारण सामाजिक डिप्रेशन, परिवार या सामाजिक ग्रुप से निकाले जाने जैसी समस्याएं डिप्रेशन के विकास के जोखिम का कारण हो सकता है। व्यक्तिगत संघर्ष या परिवार के सदस्यों या दोस्तों के साथ विवादों के कारण डिप्रेशन हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 13:22:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>डिप्रेशन में आकर महिला डॉक्टर ने की आत्महत्या</title>
                                    <description><![CDATA[दौसा जिले के लालसोट में  एक प्रसूता की मौत के बाद महिला चिकित्सक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन और हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद चिकित्सक ने अस्पताल के कक्ष में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/woman-doctor-suicide-due-to-depression/article-6963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/dr-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>लालसोट। दौसा जिले के लालसोट में  एक प्रसूता की मौत के बाद महिला चिकित्सक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन और हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद चिकित्सक ने अस्पताल के कक्ष में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला चिकित्सक डा. अर्चना शर्मा अपने पति डॉ. सुनीत उपाध्याय के आनन्द अस्पताल में गायनी की चिकित्सक थीं।</p>
<p><strong>ये है मामला</strong> <br />लालसोट के आनंद हॉस्पिटल में आशा बैरवा नामक प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लाया गया था, जहां प्रसव के दौरान महिला की मौत हो गई थी। परिजनों व ग्रामीणों ने हंगामा किया था और रात करीब ढाई बजे बजे डॉ. दंपती पर हत्या की एफआईआर दर्ज होने और उचित मुआवजा दिए जाने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ था। मंगलवार की सुबह आनंद हॉस्पिटल की डॉ. अर्चना शर्मा ने अस्पताल परिसर में ही कक्ष के अंदर फंदा लगा लिया, फिलहाल पुलिस सुसाइड के कारणों की जांच कर रही है।</p>
<p><strong>8 साल से हॉस्पिटल चला रहे डॉक्टर दंपती</strong></p>
<p>डॉ. अर्चना शर्मा गाइनी थीं और पति डॉ. सुनीत उपाध्याय न्यूरो साइक्रेट्रिस्ट है। 8 साल से डॉक्टर दंपती हॉस्पिटल चला रहे हैं। हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का कहना था कि ज्यादा ब्लड बहने से आशा की मौत हो गई थी। परिजन हत्या का आरोप लगा रहे थे। सुबह करीब 11 बजे तीसरी मंजिल पर स्थित डॉक्टर डॉ. अर्चना शर्मा के पास कोई स्टाफ गया तो कमरा बंद था। डा. अर्चना के पति को बताया। वे कमरे तक पहुंचे और गेट खोलने का प्रयास किया। दरवाजा नहीं खुला तो धक्का मारकर उसे खोला गया। कमरे में डॉक्टर अर्चना फंदे पर लटक रही थीं।<br /><br /><strong>सुसाइड नोट वायरल लेकिन पुलिस का इंकार</strong><br />लालसोट थाना प्रभारी अंकेश चौधरी ने बताया कि डॉ. अर्चना शर्मा ने सुसाइड कर लिया है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। उसके कमरे की तलाशी ली जाएगी। घरवालों की ओर से अभी पुलिस में कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया है, जबकि सोशल मीडिया पर एक सुसाइड नोट वायरल हो रहा जो अर्चना शर्मा का ही बताया जा रहा है। <br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 10:24:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डिप्रेशन से जूझ रही थीं दीपिका पादुकोण, हिम्मत और साहस के लिए 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से सम्मानित </title>
                                    <description><![CDATA[दीपिका पादुकोण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर कर अवॉर्ड जीतने की खुशी जाहिर की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/deepika-padukone-was-battling-depression--honored-with-time-100-impact-award-for-courage-and-courage/article-6945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/dipika.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है। दीपिका पादुकोण के जीवन में एक ऐसा समय भी आया था जब वह डिप्रेशन से जूझ रही थीं। दीपिका ने न सिर्फ खुद को डिप्रेशन से बचाया बल्कि मेंटल हेल्थ की फील्ड में काफी काम भी किया। दीपिका को इसी हिम्मत और साहस के लिए 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है।</p>
<p>दीपिका पादुकोण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर कर अवॉर्ड जीतने की खुशी जाहिर की। दीपिका ने कैप्शन में लिखा, ''मुझे लगता है कि सोमवार की शुरूआत करने के लिए इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता।'' इसके साथ ही उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए 'टाइम' को टैग भी किया।''<br /><br />दीपिका पादुकोण डिप्रेशन से जूझ रहे दूसरे लोगों की मदद करती हैं, जिसके लिए उन्होंने एक मेंटल हेल्थ फाउंडेशन भी शुरू किया। जिसका नाम'लिव लव लाफ फाउंडेशन' है। 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से दुनिया के 100 उन चुनिंदा लोगों को सम्मानित किया गया है जो अपनी पहचान का इस्तेमाल एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए कर रहे हैं। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 15:26:09 +0530</pubDate>
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