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                <title>क्या कांग्रेस के हाथों से फिसल रहा कर्नाटक? दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित;  सिर्फ नेतृत्व नहीं, नियंत्रण भी</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दिल्ली आलाकमान ने तलब किया है। 136 विधायकों के स्पष्ट बहुमत के बावजूद दोनों गुटों में नेतृत्व परिवर्तन और रोटेशन फॉर्मूले को लेकर रस्साकशी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-karnataka-slipping-from-the-hands-of-congress-the-claims/article-155038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति को एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच शक्ति संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है और यह मुद्दा केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता संतुलन, महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक अनुशासन को संभालने की संरचनात्मक चुनौती का है। सिद्दारमैया और शिवकुमार को दिल्ली तलब किये जाने तथा पार्टी आलाकमान के साथ उनकी बैठकों के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। यह सवाल कांग्रेस सरकार के 2023 में गठन के समय से ही मौजूद हैं। </p>
<p>फर्क सिर्फ इतना है कि अब दोनों खेमों की ओर से संकेत अधिक स्पष्ट हो गये हैं और पार्टी के कुछ वर्गों में अधीरता बढ़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक राजनीतिक विरोधाभास है। कर्नाटक में कांग्रेस संख्यात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन आंतरिक रूप से पूरी तरह एकजुट नहीं है। 224 सदस्यीय विधानसभा में 136 विधायकों के साथ पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद यह मजबूती स्थिर नेतृत्व सहमति में तब्दील नहीं हो सकी है। स्थिति को अब तक अनौपचारिक समझौतों, परस्पर अपेक्षाओं और समय-समय पर आलाकमान के हस्तक्षेप के जरिए संभाला जाता रहा है। सिद्दारमैया अनुभव, जनाधार आधारित राजनीति और 'अहिंदा' सामाजिक समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने लंबे समय से कर्नाटक में कांग्रेस के आधार को मजबूत किया है। उनके समर्थक उन्हें ऐसा स्थिर नेता मानते हैं जिसने चुनावी सफलता दिलायी और जो अब भी विधायकों के बीच प्रभाव बनाए हुए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, शिवकुमार संगठनात्मक क्षमता, चुनावी रणनीति और 2023 की जीत में अपनी भूमिका के आधार पर दावेदारी पेश करते हैं। उनका खेमा संख्या बल के साथ-साथ योगदान, समय और पार्टी संगठन पर पकड़ को भी अपनी ताकत मानता है। कांग्रेस आलाकमान के सामने चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। एक पक्ष को संतुष्ट करने से दूसरे पक्ष में असंतोष बढ़ने का जोखिम बना रहता है। इसी कारण समाधान की जगह संतुलन साधने की राजनीति जारी है।</p>
<p>यही वजह है कि कर्नाटक की राजनीति बार-बार "रोटेशन", "मंत्रिमंडल फेरबदल" और "आलाकमान चर्चा" जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। ये स्थायी समाधान नहीं, बल्कि दबाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने के उपाय हैं, जो सरकार के भीतर दो शक्ति केंद्रों की मूल समस्या को टालते रहे हैं। हाल के दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा भी इसी पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल विस्तार से अस्थायी संतुलन जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इससे नेतृत्व अधिकार का मूल प्रश्न हल नहीं होता। इससे केवल मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया जाता है।</p>
<p>असल सवाल यह नहीं है कि सिद्दारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बनेंगे। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था है, जिसके तहत उस राज्य में दोहरे नेतृत्व को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके, जहां चुनावी सफलता ने कई दावेदार पैदा कर दिये हैं, लेकिन आलाकमान के अलावा कोई स्पष्ट निर्णायक व्यवस्था नहीं है। दल-बदल, विधानसभा अंकगणित या विपक्षी समीकरणों को लेकर लगायी जा रही अटकलों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल किसी भी गुट के पास सरकार की स्थिरता को प्रभावित करने का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता और संख्या बल अब भी कांग्रेस के पक्ष में है। ऐसे में आलाकमान केवल दर्शक नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने वाली प्रमुख शक्ति है। </p>
<p>हालांकि, उसकी क्षमता भी सीमित है। निर्णयों में देरी से अटकलें बढ़ती हैं, अस्पष्ट संकेतों से गुटीय व्याख्याओं को बल मिलता है और समझौता आधारित समाधान अक्सर उत्तराधिकार के सवाल को हल करने के बजाय टाल देते हैं। कर्नाटक की स्थिति भारतीय राजनीति के व्यापक स्वरूप को भी दर्शाती है, जहां मजबूत क्षेत्रीय नेताओं, व्यक्तिगत नेटवर्क और केंद्रीकृत पार्टी नियंत्रण के कारण चुनावी सफलता के बाद टकराव की स्थिति पैदा होती है, खासकर तब जब नेतृत्व पहले से स्पष्ट नहीं किया गया हो।</p>
<p>मंत्रिमंडल संतुलन, विभिन्न गुटों को आश्वस्त करने और नियंत्रित राजनीतिक संदेशों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। फिलहाल राजनीतिक हित निरंतरता के पक्ष में हैं, इसलिए किसी बड़े टकराव की संभावना कम मानी जा रही है।हालांकि सरकार संख्या बल के लिहाज से स्थिर है, लेकिन आंतरिक रूप से अस्थिर बनी हुई है। इसके पीछे वह मूल प्रश्न अब भी अनसुलझा है, जिससे पार्टी 2023 से बचती रही है; जब जीत सामूहिक हो, लेकिन नेतृत्व विवादित हो, तब अधिकार का निर्धारण कौन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात : अमेरिका-चीन संबंधों में 'नये दौर' का संकेत, इन अहम मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐतिहासिक मुलाकात हुई। शी ने ताइवान को 'रेड लाइन' बताते हुए कड़ी चेतावनी दी, लेकिन संबंधों को 'स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' का नया दौर भी कहा। व्यापार, AI और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ दोनों महाशक्तियाँ आपसी तनाव कम करने की कोशिश में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-jinping-meeting-signals-a-new-era-in-us-china-relations-discussion/article-153831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों के उभरते चरण को अधिक स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा का 'नया दौर' करार दिया है। साथ ही जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों में सबसे संवेदनशील और खतरनाक मुद्दा करार दिया है। चीन के राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के शुरुआत में की। वर्ष 2017 के बाद चीन में यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी, जिसने उन चर्चाओं की दिशा तय कर दी, जिनका मुख्य केंद्र रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा होने की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर तनाव का माहौल है। </p>
<p>ईरान में जारी संघर्ष, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा शामिल है। चर्चा के लिए मेज पर रखे गये प्रमुख मुद्दों में व्यापार और टैरिफ को स्थिर करना, अमेरिकी बाजारों तक चीन की पहुंच और चीन में अमेरिकी कंपनियों का विस्तार, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, चीन के इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात और वैश्विक ऑटो उद्योग पर इसका प्रभाव तथा ऊर्जा सुरक्षा और ईरान के तेल निर्यात जैसे विषय शामिल हैं। </p>
<p>ईरान के तेल निर्यात के मामले में चीन का काफी प्रभाव है और इस मुद्दे पर दोनों महाशक्तियां अपनी भूमिका निभाएंगी। यह बैठक ईरान युद्ध की छाया में हो रही है, जिसमें दोनों देशों के नेता व्यापक भू-राजनीतिक समीकरणों और दोनों नेता महाशक्तियों के बीच 'नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' पर चर्चा करेंगे। जिनपिंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां दोनों देशों को स्थिरता और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ताइवान चीन के लिए सबसे अहम चिंता का विषय है और चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने इसे एक 'रेड लाइन' (सीमा रेखा) बताया जो दोनों देशों के संबंधों की भविष्य की दिशा तय कर सकती है। तनाव के बावजूद जिनपिंग ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच चीन और अमेरिका को एक-दूसरे का विरोधी बनने के बजाय साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि समग्र स्थिरता बनाये रखने के लिए दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाया जा सकता है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों ने मध्य-पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मार्गों में आ रही बाधाओं पर भी अपने विचार साझा किये। ट्रंप अपने साथ वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिकी व्यापार जगत के दिग्गजों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर आये थे, जो संभावित निवेश और व्यापारिक समझौतों पर उनके विशेष ज़ोर का संकेत था। इस प्रतिनिधिमंडल में उनके मंत्रिमंडल और आर्थिक टीम के प्रमुख सदस्य शामिल थे, जो इस शिखर सम्मेलन के भारी आर्थिक महत्व को दर्शाता है।</p>
<p>जिनपिंग के साथ हालांकि सार्वजनिक रूप से उपस्थित रहने के दौरान ट्रंप ने ताइवान के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवालों का सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होता है, जबकि टकराव से दोनों को ही नुकसान पहुंचता है। ट्रंप ने आर्थिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के संबंधों को लेकर आशावादी दृष्टिकोण व्यक्त किया। अब दोनों नेता बंद दरवाज़ों के पीछे आपसी बातचीत (गोपनीय वार्ता) के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। आने वाले दिनों में उनके बीच और भी कई बैठकें, राजकीय कार्यक्रम और आधिकारिक भोज आयोजित किए जाने हैं। अभी तक हालांकि किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं की गयी है, फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष अपने संबंधों में स्थिरता लाने एवं तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। यह दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीनी विदेश मंत्रालय का दावा: मतभेदों को दूर कर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार, वैश्विक शांति और विकास के मुद्दों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजing यात्रा से पहले चीन ने समानता और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग का हाथ बढ़ाया है। दोनों नेता दुर्लभ खनिज (Rare Earth) निर्यात और वैश्विक स्थिरता पर चर्चा करेंगे। हालांकि, चीन ने ताइवान हथियार बिक्री और जिमी लाई मामले को अपना आंतरिक मुद्दा बताते हुए कड़ा रुख बरकरार रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinese-foreign-ministry-claims-ready-to-overcome-differences-and-increase/article-153708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजकीय यात्रा से पहले बुधवार को कहा कि वह समानता, आपसी सम्मान और साझा लाभ के आधार पर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को दूर करने के लिए तैयार है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि चीन 'परिवर्तनशील और अस्थिर दुनिया' में अधिक स्थिरता और निश्चितता लाने के लिए अमेरिका के साथ काम करने का इच्छुक है। गुओ ने कहा, "चीन समानता, सम्मान और आपसी लाभ की भावना के साथ सहयोग का विस्तार करने और मतभेदों को प्रबंधित करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।" प्रवक्ता ने कहा कि चीन ट्रंप की यात्रा का स्वागत करता है, जिसके दौरान दोनों देशों के नेता चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ वैश्विक शांति और विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर 'गहन विचारों का आदान-प्रदान' करेंगे।</p>
<p>नेताओं के बीच आगामी बैठक के दौरान चीन और अमेरिका द्वारा दुर्लभ मृदा पदार्थ (रेयर अर्थ मैटेरियल) के चीनी निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करने वाले एक अस्थायी समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। हालांकि, इस संभावित विस्तार के बावजूद, चीन अभी भी कुछ प्रमुख सामग्रियों के निर्यात को सीमित कर रहा है जो रक्षा और उच्च-तकनीकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। गुओ ने ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करते हुए दोहराया कि इस मुद्दे पर चीन का रुख 'स्थिर और स्पष्ट' बना हुआ है।</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप द्वारा बातचीत के दौरान मुद्दा उठाए जाने पर चीन हांगकांग के मीडिया उद्यमी जिमी लाई की रिहाई पर विचार करेगा, गुओ ने इस सुझाव को खारिज कर दिया और मामले को चीन का आंतरिक मामला बताया। गुओ ने कहा, "लाई ची-यिंग हांगकांग को हिला देने वाले दंगों के पीछे मुख्य साजिशकर्ता और अपराधी हैं।" उन्होंने कहा कि चीनी सरकार कानून के अनुसार मामले को संभालने में हांगकांग के न्यायिक अधिकारियों का दृढ़ता से समर्थन करती है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप की चीन यात्रा बुधवार से शुरू होकर 15 मई तक जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूस-सऊदी अरब ने ईरान तथा अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का किया समर्थन, होर्मुज में जहाजों का आवागमन किया जाए बहाल : लावरोव</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के विदेश मंत्री लावरोव और सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान ने फोन पर वार्ता कर ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सुधारने का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय संकट के स्थायी राजनयिक समाधान पर जोर दिया, ताकि खाड़ी में शांति बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-saudi-arabia-support-normalization-of-relations-between-iran-and-arab/article-153245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/sergey.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच फोन पर बातचीत में दोनों पक्षों ने ईरान और अरब राजतंत्रों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का समर्थन किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईरान और अरब देशों के बीच लंबे समय के लिए रिश्ते सुधारने और सामान्य बनाने की कोशिशें दोबारा शुरू करना सही माना गया है। "मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन संघर्ष-पूर्व की स्थितियों में बहाल किया जाना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के संकट के सभी पहलुओं के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए जारी राजनयिक संपर्कों को बनाए रखा जाना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तानी विपक्षी नेता अचकज़ई का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान के साथ बातचीत का किया आह्वान, बोले-पड़ोसी देश के साथ तनावपूर्ण संबंध राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं की जड़</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के विपक्षी नेता महमूद खान अचकज़ई ने सरकार से अफगानिस्तान के साथ तत्काल वार्ता बहाल करने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि पड़ोसी देश के साथ बिगड़ते संबंधों और आर्थिक गलतियों के कारण पाकिस्तान का निर्यात बाजार बर्बाद हो रहा है। अचकज़ई के अनुसार, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय शांति के लिए नीतियों में सुधार अनिवार्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-economic-crisis-pakistani-opposition-leader-achakzai-made-a/article-152834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mahmood-khan-achakzai.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेएमएपी) के अध्यक्ष महमूद खान अचकज़ई ने सरकार से अफगानिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पड़ोसी देश के साथ तनावपूर्ण संबंध एवं राजनीतिक गलत अनुमान पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं को और बढ़ा रहे हैं। यह जानकारी बुधवार को अफ़गान समाचार पोर्टल एरियाना न्यूज़ ने दी।</p>
<p>रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि श्री अचकज़ई का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक कठिनाइयों की जड़ें सरकार की उन गलत नीतियों में निहित हैं जिनके कारण अफगानिस्तान एक आर्थिक साझेदार नहीं रहा है, जो हाल तक पाकिस्तानी वस्तुओं के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार था।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, श्री अचकज़ई ने कहा कि अफगानिस्तान अभी भी पाकिस्तानी सामानों में बहुत रुचि रखता है और उन्होंने बल देकर कहा कि इस्लामाबाद की नीतियों ने उसके अपने आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया है। खबरों के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व से आर्थिक दबावों एवं क्षेत्रीय अस्थिरता दोनों से निपटने के लिए संवाद और अपनी नीतियों में सुधार करते हुए व्यावहारिक समाधान खोजने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:35:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी ने पूर्वी नागालैंड पर ऐतिहासिक समझौते की सराहना की, कहा मील का पत्थर, विकास एवं समृद्धि को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी ने पूर्वी नागालैंड समझौते को ऐतिहासिक बताया। केंद्र, राज्य और ईएनपीओ के बीच करार से शांति, समावेशी विकास और अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-lauds-historic-agreement-on-eastern-nagaland-says-milestone/article-142145"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्वी नागालैंड से संबंधित दशकों पुराने मुद्दों को सुलझाने के उद्देश्य से हुए एक ऐतिहासिक समझौते की सराहना की। पीएम मोदी ने इसे मील का पत्थर कहा जिससे क्षेत्र में विकास एवं समृद्धि को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता पूर्वोत्तर में शांति एवं समावेशी विकास के प्रति केंद्र की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पीएम मोदी ने कहा, यह वास्तव में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास की गति को बढ़ावा देगा। मुझे पूरा विश्वास है कि इससे लोगों के लिए अवसर एवं समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। यह कदम पूर्वोत्तर में शांति, प्रगति एवं समावेशी विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। </p>
<p>भारत सरकार, नागालैंड सरकार और पूर्वी नागालैंड जन संगठन (ईएनपीओ) के बीच पांच फरवरी को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य नागालैंड के पूर्वी जिलों की लंबे समय से लंबित मांगों एवं चिंताओं का समाधान करना है, जो वर्षों से ज्यादा प्रशासनिक ध्यान एवं समान विकास की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>गृह मंत्री अमित शाह ने इस समझौते को एक बड़ा कदम बताते हुए एक्स पर एक अलग पोस्ट में कहा कि यह क्षेत्र को शांतिपूर्ण एवं समृद्ध पूर्वोत्तर के उनके दृष्टिकोण के करीब लाता है। अमित शाह ने कहा, विवादित सभी मुद्दों को सुलझाकर मोदी जी के शांतिपूर्ण एवं समृद्ध पूर्वोत्तर के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।</p>
<p>पूर्वी नागालैंड में कई ऐसे जिले हैं जिनकी अपनी-अपनी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ हैं और वे अवसंरचना एवं विकास संकेतकों के मामले में ऐतिहासिक रूप से राज्य के अन्य हिस्सों से पिछड़ा रहे हैं। ईएनपीओ लंबे समय से इस क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता रहा है और शासन, विकास एवं प्रतिनिधित्व से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए दबाव डालता रहा है।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते से लक्षित विकास पहलों, बेहतर शासन व्यवस्था और निर्णय लेने में स्थानीय समुदायों की अधिक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है। केंद्र ने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि पूर्वोत्तर में स्थायी शांति एवं विकास केवल संवाद और समावेशी राजनीतिक समाधानों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।</p>
<p>यह नया समझौता पूर्वोत्तर में लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों के अंतर्गत हाल के वर्षों में हुए समझौतों एवं सहमतियों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण कदम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 13:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वेनेजुएला विवाद पर भारत की पहली प्रतिक्रिया, कहा-घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय, शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को सुलझाएं </title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण बातचीत और स्थिरता बनाए रखने का आग्रह किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indias-first-response-to-venezuela-developments-a-matter-of-deep/article-138328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ven.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम पर गहरी चिंता करते हुए कहा है कि वह बदलते हालात पर करीब से नजर रखे हुए है और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों का समाधान करने की अपील करता है। विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला के घटनाक्रम पर एक दिन बाद सधी हुई प्रतिक्रिया करते हुए रविवार को कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता का बना रहना जरूरी है।</p>
<p>मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा है कि भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए समर्थन की पुष्टि करता है। भारत का कहना है, हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि वे बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को सुलझाएं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।</p>
<p>वक्तव्य में कहा गया है कि काराकस में भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और सभी संभव सहायता देना जारी रखेगा। गौरतलब है कि, वेनेजुएला में शनिवार तड़के एक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को राजधानी काराकस से अमेरिका बलपूर्वक ले जाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 15:39:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>तेल के भावों में उबाल, तो दाल-दलहन के बाजार में टिकाव</title>
                                    <description><![CDATA[गेंहू़ं 10 रुपए चढ़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/oil-prices-boil--then-there-will-be-stability-in-the-pulses-and-pulses-market--sunflower-oil--soya-refined-and-palm-oil-prices-increased--wheat-rose-by-rs-10/article-6959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/dalhan.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक बाजार की स्थिरता के बीच स्थानीय स्तर पर मंगलवार को दिल्ली थोक जिंस बाजार में सूरजमुखी तेल, सोया रिफाइंड और पॉम ऑयल में तेजी रही। इस दौरान दाल दलहन के साथ ही मीठे के बाजार में टिकाव रहा जबकि गेहूँ 10 रुपये चढ़ गया। <br /><br /><strong>तेल-तिलहन</strong> : वैश्विक स्तर पर मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का मार्च वायदा 132 रिंगिट चढ़कर 6248 रिंगिट प्रति टन पर पहुंच गया। इसी तरह मार्च का अमेरिकी सोया तेल वायदा 1.44 सेंट की तेजी के साथ 73.73 सेंट प्रति पौंड बोला गया<br /><br />स्थानीय स्तर सूरजमुखी तेल 147 रुपये प्रति क्विंटल, पॉम ऑयल 146 रुपये और सोया रिफाइंड 176 रुपये प्रति क्विंटल महंगा गया। इस दौरान वनस्पति , मूंगफली तेल और सरसों तेल में टिकाव रहा। <br /><br /><strong>गुड़-चीनी</strong> : मीठे के बाजार टिकाव रहा। इस दौरान गुड़ और चीनी के भाव में टिकाव रहा।<br /><br /><strong>दाल-दलहन</strong> : दाल-दलहन के बाजार में मूंग दाल, मसूर दाल, चना दाल, उड़द दाल, अरहर दाल और चना के भाव टिके रहे।<br /><br /><strong>अनाज</strong> : अनाज मंडी में चावल में टिकाव रहा जबकि गेहूँ 10 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ गया।  <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 18:41:59 +0530</pubDate>
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