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                <title>असर खबर का .... एमएसपी पर अधिकतम गेहूं की खरीद होगी सुनिश्चित : बिरला</title>
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                        <![CDATA[बारिश व ओलावृष्टि से प्रभावित उपज की गुणवत्ता को देखते हुए मानकों में छूट के निर्देश।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news----maximum-wheat-procurement-at-msp-to-be-ensured--birla/article-149248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीद में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कोटा सर्किट हाउस में भारतीय खाद्य निगम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, राजफेड, सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने खरीद व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए मानकों में आवश्यक छूट दी जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी किसान को परेशानी न हो और एफसीआई द्वारा किसानों का शत-प्रतिशत गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। बैठक में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शासन सचिव (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव अंबरिश कुमार, राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी और जिला कलक्टर पीयूष समारिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि दाने के रिजेक्शन मानकों में छूट के लिए भारत सरकार से बातचीत हो चुकी है और अगले तीन दिनों में इसके आदेश जारी होने की संभावना है, जिससे किसानों की उपज कम से कम अस्वीकृत हो। साथ ही खरीद का आवंटन दोगुना करने और सोमवार से सभी केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>अवकाश के दिनों में भी खोलें वेयरहाउस और गोदाम</strong><br />लॉजिस्टिक और भंडारण व्यवस्था पर बिरला ने कहा कि कोटा-बूंदी में बारदाने की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। अगले सात दिनों में अतिरिक्त बारदाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अवकाश के दिनों में भी वेयरहाउस और गोदाम खुले रहें तथा माल के सुचारू परिवहन के लिए रेलवे रैक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एमएसपी पर खरीद में अंतर और एफसीआई गोदामों में राजफेड द्वारा भेजे गए गेहूं के रिजेक्शन से जुड़े मामलों का भी शीघ्र समाधान करने को कहा। बिरला ने स्लॉट बुकिंग और बायोमेट्रिक से जुड़ी समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि सोमवार तक सभी किसानों को स्लॉट मिलना सुनिश्चित किया जाए। किसानों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए भामाशाह मंडी में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।</p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री ने गेहूं खरीद के लक्ष्य बढ़ाने के दिए निर्देश</strong><br />बैठक में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बूंदी जिले में हाल ही में हुई वर्षा के कारण प्रभावित कम गुणवत्ता वाले गेहूं के सैंपल दिखाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जल्द से जल्द रिलेक्सेशन प्राप्त कर कम गुणवत्ता वाला गेहूं खरीदने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने समर्थन मूल्य पर कोटा संभाग में गेहूं खरीद के तय लक्ष्य को बढ़ाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 6 लाख मीट्रिक टन खरीद के लक्ष्य को बढ़ाकर दुगुना करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाए और इसके अनुसार खरीद की तैयारियां रखी जाएं। बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव अम्बरीश कुमार ने बताया कि सोमवार से कोटा एवं बूंदी जिलों के सभी क्रय केन्द्रों पर खरीद प्रांरभ हो जाएगी। जितने किसानों ने पंजीयन कराया है उनके पास स्लॉट बुकिंग का मैसेज पहुंच जाएगा।</p>
<p><strong>4 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का बारदाना उपलब्ध</strong><br />उन्होंने बताया कि संभाग में वर्तमान में 4 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए बारदाना उपलब्ध है। बारदाने के लिए रेट कान्ट्रेक्ट किया जा चुका है। तय लक्ष्य की खरीद पूरी होते ही अतिरिक्त गेहूं की खरीद के लिए बारदाने की व्यवस्था कर ली जाएगी। बैठक में शासन सचिव सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने सहकारिता विभाग के कोटा संभाग स्थित क्रय केन्द्रों पर की गई गेहूं खरीद की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। एमडी राजफैड सौरभ स्वामी ने बताया कि कोटा संभाग में राजफैड के क्रय केन्द्रों पर सभी तैयारियां पूरी हैं और सोमवार से सभी केन्द्रों पर खरीद शुरू कर दी जाएगी। तिलम संघ के अधिकारियों ने जानकारी दी कि उनके 35 केन्द्रों पर खरीद की तैयारियां पूरी हैं। बैठक में संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, जिला कलक्टरपीयूष समारिया सहित एफसीआई, राजफैड, तिलम संघ, सहकारिता, रसद विभाग आदि के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />किसानों को सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने में किसानों को रही परेशानी के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 4 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि जिले में गेहूं खरीद का सीजन इस बार किसानों के लिए राहत के बजाय संकट बनता जा रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल में नमी का स्तर बढ़ गया है, जिसके चलते सरकारी खरीद केंद्रों पर 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाले गेहूं को लेने से साफ इनकार किया जा रहा है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं और अंतत: उन्हें बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। बारिश के कारण खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल दोनों ही प्रभावित हुई हैं, जिससे अधिकांश किसानों की उपज निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:55:24 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कोटा में भरे भंडार, अब दूसरे जिलों में भेज रहे गेहूं</title>
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                        <![CDATA[खरीद केन्द्रों पर तेज गति से होने लगा माल का उठाव।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---stores-full-in-kota--now-wheat-is-being-sent-to-other-districts/article-112265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(2)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में समर्थन मूल्य पर इस साल गेहूं की बम्पर खरीद होने से कोटा में स्थित एफसीआई के सभी गोदाम फुल हो गए हैं। अब स्थिति यह हो गई कि यहां से गेहूं को राजस्थान के अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। वहीं अब खरीद केन्द्रों से माल का उठाव भी तेज गति से होने लगा है। जिससे किसानों को काफी राहत मिली है। पूर्व में केन्द्रों पर संसाधनों की कमी के कारण खरीदे गए गेहूं का पर्याप्त उठाव नहीं होने से व्यवस्था बिगड़ रही थी। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब हाड़ौती में खरीदे जा रहे गेहूं को हाथों-हाथ ट्रकों के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। इस कारण खरीद केन्द्रों पर व्यवस्था फिर से सुधरने लगी है।</p>
<p><strong>लक्ष्य के करीब पहुंची गेहूं की खरीद</strong><br />एफसीआई के अधिकारियों के अनुसार कोटा संभाग को इस साल समर्थन मूल्य पर सवा तीन लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य मिला था। इस साल सरकार ने गेहूं खरीद पर समर्थन मूल्य और बोनस की राशि में बढ़ोतरी की है। ऐसे में किसान सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने के लिए उमड़ रहे हैं। कोटा संभाग में अब तक तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद हो चुकी है। इसके बाद भी रोजाना काफी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी केन्द्रों पर पहुंच रहे हैं। आगामी कुछ दिनों में ही कोटा संभाग का गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। अप्रैल माह में ही गेहूं की बम्पर खरीद होने से कोटा शहर में स्थित एफसीआई के सभी गोदाम भर चुके हैं। अब गेहूं को अन्य जिलों में भेजा रहा है।</p>
<p><strong>इन जिलों में भेजा जा रहा गेहूं</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार हाड़ौती के सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की बम्पर खरीद होने से अब ट्रकों और रैक के माध्यम से माल को प्रदेश के अन्य जिलों में स्थित एफसीआई के गोदामों में भेजा रहा है। जयपुर, जोधपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद, अजमेर, उदयपुर, किशनगढ़ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में प्रतिदिन ट्रकों के माध्यम से गेहूं भेजा जा रहा है। पहले खरीद केन्द्रों पर गेहूं कोटा के गोदामों में जमा किया जा रहा था। अब गोदाम फुल होने के कारण  सीधे खरीद केन्द्रों से गेहूं को दूसरे जिलों में पहुंचाया जा रहा है। सरकार की ओर से हाड़ौती में एफसीआई और राजफैड सहित अन्य सरकारी एजेंसियों को समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने का जिम्मा सौंपा गया है। </p>
<p><strong>अब कम हुई ट्रकों की कतारें </strong><br />पूर्व में माल की आवक ज्यादा होने से ठेकेदार फर्म के पास उठाव करने वाले संसाधनों की कमी बनी हुई थी। उनके पास मजदूरों और गेहूं परिवहन करने वाले ट्रक ज्यादा नहीं थे। जिससे माल का उठाव नहीं हो पा रहा था। एफसीआई के गोदामों के बाहर रोजाना डेढ़ सौ से दो सौ ट्रक संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से गेहूं लेकर पहुंच रहे थे। यहां भी ट्रकों से पर्याप्त मात्रा में माल खाली नहीं हो पा रहा है। इससे ट्रकों की कतारें गोदामों के बाहर बनी हुई थी। अब गेहूं को अन्य जिलों में भेजने से खरीद केन्द्रों की व्यवस्थाएं सुधरनी लगी है। माल का उठाव तेज गति से होने लगा है। वहीं अब गोदामों के बाहर ट्रकों की कतारें भी कम होने लगी है। इससे डीसीएम रोड पर आए दिन लगने वाले जाम की समस्या का भी समाधान हो गया है।    </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />हाड़ौती में समर्थन मूल्य के केन्द्रों पर गेहूं की बम्पर खरीद के कारण व्यवस्थाएं बिगड़ने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 24 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों की ओर की जा रही गेहूं की सरकारी खरीद किसानों व व्यापारियों को पीड़ा दे रही है। रोजाना काफी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी केन्द्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके माल की तुलाई नहीं हो रही है। ऐसे में कई किसानों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि सरकारी केन्द्रों पर खरीदे गए माल का पर्याप्त मात्रा में उठाव नहीं हो पा रहा है। बाद में एफसीआई के अधिकारियों द्वारा गेहूं को अन्य जिलों में भेजने से व्यवस्थाओं में सुधार हो गया है।  </p>
<p>पंजीकरण कराने के बाद भी उसका गेहूं बेचने के लिए नम्बर नहीं आ पाया  था। इससे चिंता बढ़ती जा रही थी। अब खरीद केन्द्रों पर माल का उठाव होने से व्यवस्थाएं सुधर गई है। उसके पास गेहूं बेचने का मैसेज आ गया है।  <br /><strong>- मौजेन्द्र सुथार, किसान</strong></p>
<p>पूर्व में केन्द्रों पर संसाधनों की कमी के कारण खरीदे गए गेहूं का पर्याप्त उठाव नहीं होने से व्यवस्था बिगड़ रही थी। अब हाड़ौती में खरीदे जा रहे गेहूं को हाथों-हाथ रैक के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। <br /><strong>- संजय मीना, जनसम्पर्क अधिकारी, एफसीआई</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 14:49:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>समर्थन मूल्य पर खरीद: राजफैड 210 खरीद केन्द्रों पर 10 मार्च से गेंहूं खरीदेगा</title>
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                        <![CDATA[राठौड़ ने बताया कि खाद्य विभाग द्वारा राजफैड को गेहूँ खरीद के लिए 210 केन्द्र आवंटित किये गये है। अधिकांश क्रय केन्द्र कोटा संभाग में है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/procurement-at-support-price--rajfed-will-purchase-wheat-from-210-procurement-centers-from-march-10/article-70025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/wheat.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रबन्ध निदेशक, राजफैड शक्ति सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदेश में 10 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेंहूं की खरीद प्रारंभ की जाएगी। किसानों किसानों से 2400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेंहूं का भुगतान होगा। भारत सरकार द्वारा समर्थन मूल्य दर 2275 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित भुगतान किया जाएगा।</p>
<p>राठौड़ ने बताया कि खाद्य विभाग द्वारा राजफैड को गेहूँ खरीद के लिए 210 केन्द्र आवंटित किये गये है। अधिकांश क्रय केन्द्र कोटा संभाग में है। क्रय केन्द्रों पर बारदाना भारतीय खाद्य निगम द्वारा उपलब्ध करवाया जाना है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा हेल्पलाईन नम्बर 18001806030 स्थापित किया हुआ है एवं राजफैड द्वारा भी समर्थन मूल्य पर दलहन तिलहन खरीद के संबंध में हेल्पलाईन नम्बर 18001806001 स्थापित किया हुआ है। राठौड ने बताया कि सभी क्रय केन्द्रों को गेहूँ खरीद हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करने, पोस्टर, बैनर लगाने हेतु भी पाबन्द किया जा चुका है। क्रय केन्द्रों पर किसानों को गेहूँ तुलाई हेतु आवश्यक आधारभूत सुविधायें यथा छाया-पानी, बिजली, ग्रेडिंग मशीन आदि की सुविधा संबंधित कृषि उपज मन्डी समितियों के माध्यम से उपलब्ध करवाने के भी प्रयास किये जा रहे है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Feb 2024 19:30:45 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया भीषण गर्मी को रहे तैयार, भारत में धान के कटोरे पर मंडराया बड़ा खतरा</title>
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                        <![CDATA[अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में घटती है। इससे समुद्र की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गरम हो जाता है। इसका भारत समेत पूरी दुनिया में मौसम पर गंभीर असर पड़ता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/world-is-ready-for-the-scorching-heat--there-is-a-big-danger-hovering-over-the-rice-bowl-in-india/article-50966"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन।  संयुक्त राष्ट्र संघ की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि दुनियाभर की सरकारें आने वाले महीनों में खतरनाक मौसम और रेकॉर्ड तापमान के लिए तैयार रहें। एजेंसी ने यह चेतावनी अल नीनो को देखते हुए दी है। उसने कहा कि अल नीनो यही रहेगा और कहीं जा नहीं रहा है। इसमें भारत और एशिया के अन्य देशों को लेकर भी डराने वाली चेतावनी दी गई है। वैश्विक एजेंसी ने कहा कि धान की बड़े पैमाने पर खेती करने वाले भारत में अल नीनो मानसून को कमजोर कर सकता है। मानसून की बारिश से ही जलाशय भरते हैं और फसलों की सिंचाई होती है।<br /><br />अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में घटती है। इससे समुद्र की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गरम हो जाता है। इसका भारत समेत पूरी दुनिया में मौसम पर गंभीर असर पड़ता है। इससे दुनियाभर में अरबों लोग प्रभावित होते हैं। एजेंसी के महासचिव पेट्टरी तलास ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव के शुरू होने पर इस बात का खतरा ज्यादा है कि तापामान बहुत अधिक बढ़ जाएगा और रेकॉर्ड टूटेंगे। इससे दुनिया के कई हिस्सों और समुद्र में बहुत गरम हवाएं चलेंगी।<br /><br /><strong>अल नीनो से कहीं भारी बारिश तो कहीं सूखा</strong><br />तलास ने कहा कि दुनिया की सरकारें इसके लिए तैयार हो जाएं ताकि इस साल अल नीनो का इंसान के स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और इकोसिस्टम पर बहुत कम असर पड़े। उन्होंने कहा कि इंसानों की जान और उनकी आजीविका को बचाने के लिए सरकारों को अपना जल्दी चेतावनी देने वाला तंत्र विकसित करना होगा। एजेंसी ने बताया कि पिछले 3 साल दुनिया के कुछ सबसे गरम साल रहे हैं। अल नीनो के प्रभाव की वजह से समुद्र के अंदर तापमान अपने रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है मौसम एजेंसी ने कहा कि अल नीनो की वजह से साल 2023 या 2024 में गर्मी के सारे रेकॉर्ड टूट सकते हैं। इस बात की 90 प्रतिशत संभावना है कि अलनीनो साल 2023 के बाद के 6 महीने में भी जारी रह सकता है। अल नीनो की वजह से समुद्र गरम हो रहे हैं और लैटिन अमेरिका महाद्वीप, अमेरिका के दक्षिणी हिस्से, अफ्रीका और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में बारिश काफी बढ़ सकती है। लेकिन इससे आॅस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, दक्षिण एशिया, मध्य अमेरिका और उत्तरी लैटिन अमेरिका में भी भयानक सूखा भी पड़ सकता है। इससे खाद्यान का उत्पादन काफी गिर सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 09:51:07 +0530</pubDate>
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                <title>मंडियों में चार लाख टन गेहूं की खरीद </title>
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                        <![CDATA[ पूर्व में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद जिले में गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है और मंडियों में पिछले साल की तुलना में अधिक फसल आ रही है। अभी तक मंडियों में चार लाख टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/purchase-of-four-lakh-tonnes-of-wheat-in-mandis/article-44310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/z-10.png" alt=""></a><br /><p>अमृतसर। पंजाब में सरकार स्मार्ट प्रबंध के तहत सदका की मंडियों में गेहूं की खरीद सुचारू रूप से कर रही है और ऐसा पहली मंडियों से गोदामों तक गेहूं ले जाने वाले सभी वाहनों को जीपीएस ट्रैक किया गया है। यह जानकारी देते हुए रविवार उपायुक्त हरप्रीत सिंह सूदन ने गेहूं की खरीद प्रक्रिया के संबंध में अपने विचार साझा करते हुए दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद जिले में गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है और मंडियों में पिछले साल की तुलना में अधिक फसल आ रही है। अभी तक मंडियों में चार लाख टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि मंडियों में आवक भी पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ रही है और अधिक गेहूं आने की उम्मीद है। </p>
<p>उन्होंने बताया कि सरकार के आदेश और मंडियों की आवश्यकता को देखते हुए उठान में भी तेजी की है और उपार्जित गेहूं का भुगतान भी निर्धारित समय में किया जा रहा है। उपायुक्त ने बताया कि जिला की मंडियों में विभिन्न खरीद एजेंसियों और व्यापारियों द्वारा  4 लाख टन में से पनग्रेन द्वारा 122436 टन, मार्कफेड 90506 टन, 76120 टन, पंसप 76120 टन, वेयर हाउस  77845 टन और एफ.सी.आई. ने 14080 टन गेहूं की खरीद की है। </p>]]>
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                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 10:41:15 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशों में निर्यात से गेहूं के दामों में भारी उछाल</title>
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                        <![CDATA[कोटा संभाग में गेहूं की फसल प्रमुखता से बोई जाती है। इस बार लाखों हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई गई थी। मौसम अनुकूल होने के कारण संभाग में फसल का बम्पर उत्पादन हुआ था। इसके बावजदू गेहूंं के दाम शुरू से ही तेज बने हुए थे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/huge-jump-in-wheat-prices-due-to-exports-abroad/article-29075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/videsho-se-niryaat-se-gehu-ke-daamo-mei-bhari-uchchal..kota-news--9.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गेहूं की बढ़ती मांग से यूक्रेन सहित अन्य देशों को किए गए गेहूं निर्यात का असर अब दिखने लगा है। इससे पूरे देश में गेहूं की किल्लत होने से दामों में उछाल आया है। कोटा में भी दिवाली के बाद गेहूं के दामों में 300-400 रुपए क्विंटल रुपए तेजी आई है, यानि गेहूं 3-4 रुपए प्रति किलो महंगा हुआ है। भामाशाहमंडी में अच्छी क्वालिटी का गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। ऐसे में लोगों को अब महंगे दाम में गेहूं की खरीद करनी पड़ेगी। अनाज व्यापारियों के अनुसार भारत ने अप्रेल-अगस्त 2022 तक यूक्रेन सहित अन्य देशों को 43.50 मीट्रिक टन निर्यात किया था, इसमें बड़े ग्राहक के रूस व यूक्रेन भी शामिल है। व्यापारियों के अनुसार सरकार ने जल्द ही ओपन बाजार में गेहूं की बिक्री शुरू नहीं की तो घरेलू बाजार में गेहूं की बढ़ती कीमत को थामना मुश्किल हो जाएगा और महंगाई बढ़ जाएगी।</p>
<p><strong>भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश</strong><br />विश्व में यूक्रेन गेहूं का बहुत बड़ा निर्यातक है। यूक्रेन के बाद भारत दूसरे सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद देश में मार्च-अप्रेल से गेहूं के भावों में तेजी आना शुरू हो गई थी। गेहूं निर्यात के साइड इफेक्ट नजर आने लग गए है। दिवाली के बाद से गेहूं के दामों में 4 रुपए प्रति किलो तक उछाल आ गया है।</p>
<p><strong>इस बार हुआ था बम्पर उत्पादन</strong><br />कोटा संभाग में गेहूं की फसल प्रमुखता से बोई जाती है। इस बार लाखों हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई गई थी। मौसम अनुकूल होने के कारण संभाग में फसल का बम्पर उत्पादन हुआ था। इसके बावजदू गेहूंं के दाम शुरू से ही तेज बने हुए थे। सरकार ने उस समय गेहूं का समर्थन मूल्य 2075 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया था। जबकि उस समय बाजार भाव ही 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल से चल रहे थे। इस कारण समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई थी।</p>
<p><strong>बुवाई के लिए बढ़ी मांग</strong><br />भामाशाहमंडी के व्यापारियों ने बताया कि हर साल देश में गेहूं का बम्पर उत्पादन होता है। इस साल यूक्रेन और रूस में लम्बे समय से युद्ध चल रहा है। इस कारण यूक्रेन में गेहूं की मांग अधिक हो गई थी। वहीं इससे समीप अन्य देशों में भी भारत गेहूं का निर्यात करता है। ऐसे में यहां से काफी मात्रा में गेहूं बाहर भेजा गया था। वहीं अब खेतों में गेहूं की बुवाई का दौर शुरू हो गया है। इसलिए मांग बढ़ने के कारण गेहूं के दामों में इजाफा हो रहा है।</p>
<p><strong>होलसेल भाव रुपए प्रति क्विंटल में</strong><br />गेहूं पुराना -2100 से 2250<br />गेहूं नया मिल दड़ा -2350 से 2450<br />गेहूं एवरेज 2450 से 2500<br />बेस्ट टुकड़ी 2500 से 2600</p>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद देश में मार्च-अप्रेल से गेहूं के भावों में तेजी आना शुरू हो गई थी। गेहूं निर्यात के साइड इफेक्ट नजर आने लग गए है। गेहूं के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं खेतों में गेहूं बीज की आवश्यकता होने से भी दामों में तेजी आई है।<br /><strong>- आलोक जैन, गेहूं के होलसेल व्यापारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Nov 2022 16:19:56 +0530</pubDate>
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                <title>  गोदाम खाली, दूसरे राज्यों से मंगा रहे गेहूं</title>
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                        <![CDATA[कोटा संभाग में इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। इस कारण यहां के गोदाम खाली रहे। अब एफसीआई के अधिकारी दूसरे राज्यों से गेहूं मंगा रहे हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/godown-empty--wheat-is-being-ordered-from-other-states/article-11556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/truck.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड  स्थित एफसीआई के गोदाम खाली होने के कारण अधिकारियों को चिंता हो रही है। कोटा संभाग में इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। इस कारण यहां के गोदाम खाली रहे। अब एफसीआई के अधिकारी दूसरे राज्यों से गेहूं मंगा रहे हैं। मंगलवार को गोदाम के बाहर ट्रको की कतार लगी हुई थी। ट्रक चालक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।<br /><br />इस साल मार्च माह की शुरुआत में मंडी में गेहूं की आवक शुरू हो गई थी। इस दौरान गेहूं के दामों में काफी उछाल आ गया था। इस कारण अधिकांश किसानों ने अपना गेहूं बाजार में ही बेचा। कोटा संभाग के किसी भी एफसीआई के केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए एक भी किसान नहीं पहुंचा। खरीद अवधि के दौरान सारे केंद्र खाली पड़े रहे। गेहूं की खरीद नहीं होने पर इस बार गोदाम खाली ही रह गए। अब एफसीआई को हरियाणा, पंजाब से गेहूं मंगवाना पड़ रहा है। रोजाना काफी संख्या में ट्रक इन राज्यों से गेहूं लाकर कोटा पहुंच रहे हैं। इस समय गोदामों के बाहर ट्रकों की लाइन लगी हुई है। गोदामों के बनने के बाद गेहूं का आवंटन राज्य सरकार को किया जाएगा। जहां से यह राशन के माध्यम से बेचा जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 18:32:01 +0530</pubDate>
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                <title>फिर आम आदमी नाचेगा बिचौलियों की अंगुलियों पर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया।  स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। 

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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/then-the-common-man-will-dance-on-the-fingers-of-middlemen/article-11461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aam-aadmi-ko-milega-expensive-wheat.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया। स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। वर्तमान में कम दाम में खरीदे गेहूं को अधिक दाम में बेचकर व्यापारी भारी मुनाफा कमा रहे हैं।  हाड़ौती में हर साल गेहूं की बम्पर पैदावार होती है। हालांकि इस साल तेज गर्मी के कारण उत्पादन क्षमता में कुछ प्रभाव पड़ा था। इसके बावजूद बाजार में बिक्री के लिए गेहूं की आवक शुरू होते ही दामों में तेजी आ गई थी। अमूमन 1800 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाले गेहूं के दाम इस बार 2100 से 2200 के बीच बोले गए, जबकि समर्थन मूल्य पर गेहूं के दाम 2015 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किए गए थे। व्यापारी वर्ग ने इसका भरपूर फायदा उठाया और थोड़े दाम बढ़ाकर किसानों का सारा गेहूं खरीद लिया। इसका नतीजा यह रहा कि हाड़ौती क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।<br /><br /><strong>और घटाना पड़ गया कोटा</strong><br />हर साल अधिकांश किसान अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त करने के लिए सरकारी खरीद केन्द्र पर गेहूं बेचने की कोशिश करता था। इसकी प्रक्रिया काफी जटिल होने के बावजूद किसान का यही प्रयास रहता था कि उसका गेहूं सरकारी खरीद केन्द्र पर ही बिके, लेकिन इस बार गेहूं खरीद की गणित पूरी तरह से बिगड़ गई है। व्यापारी वर्ग ने पहले से ही अधिक दाम लगाकर किसानों का सारा माल खरीद लिया। ऐसे में सरकारी खरीद ठप हो गई। इसके चलते केन्द्र सरकार ने देश में गेहूं खरीद का कोटा घटाकर 195 लाख टन कर दिया, जो पिछले साल की तुलना में 55 फीसदी कम था। इससे व्यापारियों को भी फायदा हुआ। <br /><br /><strong>ऐसे हुई व्यापारियों की मौज</strong><br />गेहूं का उत्पादन और गुणवत्ता कमजोर होने का सीधा फायदा व्यापारियों को मिला। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की दर 2015 रुपए प्रति क्विंटल थी। इसी का फायदा व्यापारियों ने उठाया और किसानों से अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं भी 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीद लिया। उसके बाद अपने पास स्टॉक कर लिया। उस समय काफी मात्रा में गेहूं देश से बाहर निर्यात किया जा रहा था। ऐसे में व्यापारियों ने किसानों से खरीदा अधिकांश माल विदेशों में भेज दिया। इसका फायदा भी व्यापारियों को मिला। वहीं निर्यात के चलते स्थानीय स्तर पर गेहूं के दामों में और इजाफा हो गया, जिससे आमजन में हाहाकार मच गया। गेहूं के दामों पर लगाम के लिए केन्द्र सरकार को निर्यात पर प्रतिबंध तक लगाना पड़ा। इसके बावजूद दामों में ज्यादा कमी नहीं आई।<br /><br /><strong>मुनाफाखोरी का खेल</strong><br />कृषि उपजमंडी में किसानों का गेहूं 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीदा गया था। व्यापारियों ने सारा गेहूं खरीदकर अपने यहां स्टॉक कर लिया। उसके बाद मुनाफाखोरी का खेल शुरू कर दिया। व्यापारियों ने अपने स्तर पर गेहूं के दाम बढ़ा दिए और आमजन को 2500 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा। व्यापारी को एक क्विंटल पर ही करीब 400 रुपए का भारी मुनाफा हो गया। कृषिमंडी से निकला गेहूं आमजन तक पहुंचने तक 400 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हो गया। <br /><br /><strong>सफाई के नाम पर धोखा</strong><br />लोगों का कहना है कि बाजार में इस समय गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा है। इतने अधिक दाम होने के बारे में व्यापारी बताता है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं की क्वालिटी काफी खराब होती है, इसलिए उस गेहूं की सफाई करवाई जाती है। इसलिए अधिक दाम लगाने पड़ते है। लोगों का कहना है कि मशीन क्लीन गेहूं के नाम से लूटमार की जा रही है। गेहूं को क्लीन करने में इतना खर्चा नहीं आता है इसके बावजूद सफाई के नाम पर दाम अधिक लगाए जाते है।  <br /><br /><strong>इतना महंगा गेहूं कभी नहीं खाया</strong><br />परिवार के लिए हर साल आठ बोरी गेहूं लेते हैं। इस बार गेहूं के दामों ने सकते में ला दिया है। आठ बोरी गेहूं ही बीस हजार रुपए से अधिक के आ गए। इससे पूरे घर का बजट ही गड़गड़ा गया है। व्यापारी मशीन क्लीन के नाम पर लोगों से धोखा करते हैं। ज्यादा रुपए लेने के बाद भी गेहूं में कंकर व अन्य गंदगी मिली हुई थी।<br /><strong>- दुर्गाप्रसाद शर्मा, जयश्रीविहार</strong><br /><br />परिवार में दस सदस्य हैं, इसलिए सालभर का गेहूं एक साथ खरीद लेते हैं। इस साल तो  गेहूं काफी महंगा पड़ गया। कोरोना महामारी के चलते व्यवसाय पहले से ही ठप था। अब महंगे गेहूं की और स्थिति बिगाड़ दी। मजबूरी में गेहूं खरीदने की मात्रा कम करनी पड़ी। अगर आगे दाम कम होंगे तो और गेहूं खरीद लेंगे।<br /><strong>- रामभरोस सुमन, ग्रीन होम सोसायटी</strong><br /><br />भामाशाहमंडी में किसानों को इस बार गेहूं के दाम अधिक मिले थे। इससे किसानों को फायदा हुआ था। अधिकांश किसानों ने व्यापारियों को ही माल बेचा था। इसके बाद माल की दर व्यापारी अपने हिसाब से ही तय करता है।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, भामाशाहमंडी सचिव</strong><br /><br />गेहूं के दामों में इजाफा होने से इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है।  कोटा संभाग में गेहूं खरीद के लक्ष्य तय किए गए थे, लेकिन बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम होने से केन्द्रों पर खरीद नहीं हो पाई। <br /><strong>- सतीश कुमार, मण्डल प्रबंधक, एफसीआई कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 15:42:59 +0530</pubDate>
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                <title>गेहूं का कोटा कम कर गरीब से रोटियां छीनने का काम कर रही है केंद्र सरकार : प्रियंका</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि केंद्र सरकार राज्यों के लिए गेहूं का कोटा कम कर गरीब से रोटियां छीनने का काम कर रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/-central-government-is-working-to-snatch-the-bread-from-the-poor-by-reducing-the-quota-of-wheat--says-priyanka/article-10426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/priyanka-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि केंद्र सरकार राज्यों के लिए गेहूं का कोटा कम कर गरीब से रोटियां छीनने का काम कर रही है। वाड्रा ने कहा सारी कटौती गरीबों के लिए ही क्यों। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने आटा महंगा कर गरीबों की पहुंच से बाहर कर दिया और अब राशन के झोले से भी गरीबों का गेहूं छीनने की तैयारी है। कुछ दिनों पहले तक पूरे विश्व का पेट भरने का दावा और अब देश के लोगों के लिए ही गेहूं का कोटा कम क्यों कर रही है सरकार।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने एक खबर भी पोस्ट की है, जिसमें लिखा हे कि अगले माह से उत्तर प्रदेश में लोगों को मुफ्त में गेहूं की जगह चावल मिलेगा। इसकी वजह यह है कि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों को मिलने वाले गेहूं के कोटे को बहुत कम कर दिया है और कहा जा रहा है कि गेहूं की जगह अब चावल का कोटा बढ़ाया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 16:05:08 +0530</pubDate>
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                <title> किसानों के अरमानों पर बारिश ने फेरा पानी</title>
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                        <![CDATA[भामाशाहमंडी परिसर में बने टीनशेडो में स्थानीय व्यापारियों की ओर से किए गए कब्जोंं के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि टीनेशेडो पर कब्जों के कारण प्राकृतिक आपदा होने पर किसानों को नुकसान हो सकता है। यदि समय रहते टीनशेड खाली हो जाते तो किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ता।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-rain-threw-water-on-aspirations-of-the-farmers/article-10420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/kissano-ke-arman-par-barish-fera-paani.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पश्चिमी विक्षोभ के चलते बदले मौसम ने सोमवार शाम को कहर बरपा दिया। शाम को तेज अंधड़ के साथ हुई बारिश ने भामाशाहमंडी में किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम के कारण किसानों को अपनी फसल बचाने का मौका ही नहीं मिल पाया है। खुले में रखी कई किसानों की फसल पानी से भीग गई। बाद में किसानों ने मंडी प्रशासन से तिरपाल की व्यवस्था कर अपनी फसल को बचाने का प्रयास किया है। <br /><br />भामाशाह कृषि उपजमंडी में विभिन्न प्रकार की कृषि जिंसों की रोजाना करीब 40 हजार बोरी की आवक हो रही है। इनमें गेहूं, सरसों, चना व लहसुन शामिल हैं। लहसुन के भी प्रतिदिन करीब आठ हजार कट्टों की आवक बनी हुई है। सोमवार को भी विभिन्न स्थानों से किसान अपनी कृषि जिसों को बेचने के लिए लाए थे। दिन में धूप में तेजी के चलते कई किसान शाम को अपन जिंस बेचने आए थे। शाम को करीब छह बजे बाद अचानक मौसम बदला और तेज अंधड़ के साथ बारिश शुरू हो गई। अचानक मौसम बदलने से किसान सम्भल नहीं पाए। बाद में मंडी प्रशासन से तिरपाल लेकर आए और अपनी फसलों को बचाने का प्रयास किया।<br /><br /><strong>इसलिए आई परेशानी</strong><br />किसानों की फसलों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए मंडी परिसर में प्रशासन ने अलग-अलग यार्डों में टीनशेड लगवा रखे हैं। इनमें से कुछ यार्डों में स्थानीय व्यापारियों ने  कब्जा जमा रखा है। व्यापारी, किसानों से कृषि जिंस खरीदकर इन टीनशेडों के नीचे जमाकर  कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में किसानों को अपनी कृषि जिंस के ढेर खुले में ही करने पड़ते हैं।  टीनशेड के नीचे जगह नहीं मिलने से कुछ किसानों ने अपनी जिंस के ढेर सड़क पर कर रखे थे। इस कारण इन किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।<br /><br /><strong>मंडी प्रशासन से लाने पड़े तिरपाल</strong><br />दूरदराज के गांवों से आए किसान बारिश से बचाव के लिए कोई इंतजाम करके नहीं लाए थे। अचानक बदले मौसम के कारण किसानों में अफरा तफरी मच गई। स्थानीय कर्मचारियों ने किसानों को मंडी प्रशासन के पास तिरपाल उपलब्ध होने की जानकारी दी। इसके बाद किसान मंडी समिति कार्यालय पहुंचे। वहां पर एक हजार रुपए सिक्योरिटी राशि जमा कराने के बाद किसानों को तिरपाल उपलब्ध करवाए गए। तिरपाल वापस जमा करवाने के बाद उक्त राशि किसानों को लौटा दी जाती है। <br /><br /><strong>यदि जगह मिल जाती तो</strong><br />मोरुकला के किसान रामजीलाल सेन व जाखडोंद के त्रिलोक नागर ने बताया कि टीनशेड में जगह नहीं होने से सड़क पर खुले में गेहूं के ढेर कर रखे थे। अचानक से मौसम बदला  और अंधड़ के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ समझ ही नहीं पाए। बाद में मंडी प्रशासन से तिरपाल लाकर गेहूं पर डाला। यदि टीनशेड में जगह मिल जाती तो परेशानी नहीं होती। <br /><br /><strong>दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />भामाशाहमंडी परिसर में बने टीनशेडो में स्थानीय व्यापारियों की ओर से किए गए कब्जोंं के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि टीनेशेडो पर कब्जों के कारण प्राकृतिक आपदा होने पर किसानों को नुकसान हो सकता है। यदि समय रहते टीनशेड खाली हो जाते तो किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ता।<br /><br /> बारिश से फसलों को बचाने के लिए मंडी प्रशासन के पास तिरपाल की व्यवस्था की है, जो किसानों को बिना राशि के उपलब्ध करवाए जाते हैं। टीनशेड खाली करवाने के लिए भी समय-समय पर नोटिस दिए जाते हैं।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, सचिव भामाशाहमंडी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-rain-threw-water-on-aspirations-of-the-farmers/article-10420</link>
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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 15:22:08 +0530</pubDate>
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                <title>गेहूं निर्यात पर रोक</title>
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                        <![CDATA[भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रण करने के उपाय के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/editorial--ban-on-wheat-export/article-9994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/gehu.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रण करने के उपाय के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अधिसूचना जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार किसी दूसरे देश की खास जरूरत के मद्देनजर गेहूं निर्यात की अनुमति दे सकती है। वह गेहूं भी निर्यात किया जा सकेगा, जिसके लिए लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए जा चुके हैं और जो शिपमेंट के लिए तैयार है। देश में पिछले कुछ दिनों से गेहूं की कीमतें ऊंची हो चली है और आटा भी काफी महंगा बिक रहा है। बढ़ती महंगाई के चलते गेहूं के बढ़ते मूल्यों को नियंत्रित करना जनहित में ही है। निर्यात रोकने का असर भी देखने को मिला है। कुछ अनाज मण्डियों में गेहूं के दाम गिरे भी हैं। गेहूं की कीमतें बढ़ने के पीछे के दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला इस बार मार्च-अप्रैल में ही बढ़ती गर्मी व लू के कारण देश में गेहूं की फसल का काफी नुकसान हुआ है। अनुमान था कि देश में 11.13 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होगा, लेकिन फसलें नष्ट होने की वजह से यह अनुमान लगाया गया कि उत्पादन 10.50 करोड़ टन तक रह सकता है। गौरतलब है कि देश में गेहूं की सालाना मांग 10 करोड़ टन के आसपास रहती है। इसलिए गेहूं का पर्याप्त स्टाक रखने के लिए निर्यात पर रोक का कदम उठाया गया है। दूसरा कारण, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं की वैश्विक मांग बढ़ी है और भारत पिछले चार महीनों में 9.63 लाख टन का निर्यात कर चुका है। रूस और यूक्रेन विश्व में प्रमुख निर्यातक देश हैं, लेकिन युद्ध की वजह से गेहूं की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। भारत विश्व का दूसरा गेहूं उत्पादक देश है, तो दुनिया को भारत से बहुत उम्मीदें थीं और भारत ने निर्यात पर रोक लगाकर कई देशों को निराश कर दिया है। इस बार सरकार की खरीद 50 फीसदी से भी कम है, बाजारों को पिछले साल की तुलना में कम आपूर्ति है। हालांकि सरकार ने गेहूं खरीद को बढ़ाने के लिए समय की अवधि को अब 31 मई तक बढ़ा दिया है, लेकिन लक्ष्य पूरा होने की संभावना कम ही है, क्योंकि व्यापारियों से पहले ही किसानों से सीधे गेहूं की खरीद करती है। निर्यात पर रोक के फैसले से भारत के घरेलू उपभोक्ता को कितना लाभ मिलता है, जो देखना होगा, लेकिन दुनिया के कई देशों ने भारत के अचानक फैसले की निंदा की है। इससे भारत की विश्वसनीयता की क्षति हो सकती है। भारत ने निर्यात पर रोक लगाने से पहले निर्यात को बढ़ाने की बात कही थी, जिससे दुनिया गेहूं आपूर्ति को लेकर आश्वस्त थी।</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/editorial--ban-on-wheat-export/article-9994</link>
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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 16:16:11 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>गेहूं निर्यात पर लगी रोक</title>
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                        <![CDATA[भारत ने खाद्य सुरक्षा का हवाला देते हुये देश से गेहूं निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/ban-on-wheat-export/article-9756"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/gg-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने खाद्य सुरक्षा का हवाला देते हुये देश से गेहूं निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। गेहूं निर्यात नीति को संशोधित करते हुये इस संबंध में सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें कहा गया है कि गेहूं की वैश्विक कीमतों में अचानक तेजी आयी है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा के साथ ही पड़ोसी और अन्य कमजोर देशों के लिए जोखिम उत्पन्न हो गया है।</p>
<p>इस नीति में यह बदलाव ऐसे समय में की गयी है, जब सरकार ने कल ही कहा था कि गेहॅूं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वह एक प्रतिनिधिमंडल को मारोक्को, टुनिशिया, इंडोनेशिया, फीलिपीन्स, थाईलैंड, वियतनाम, तुर्की, अलजेरिया और लेबनान भेजेगी। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस रोक को लेकर कल एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था, जहां आईसीएलसी जारी किये जा चुकें हैं उसके लिए निर्यात की व्यवस्था की जायेगी। इसमें कहा गया है कि भारत सरकार की अनुमति पर ऐसे देशों को गेहूं निर्यात की अनुमति दी जायेगी, जिसको खाद्य सुरक्षा की जरूरत है और संबंधित देश की सरकार ने ने इस तरह का आग्रह किया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 15:48:08 +0530</pubDate>
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