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                <title>straw - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ब्याईजी भूसा मत बेचना... आप हमें दे देना</title>
                                    <description><![CDATA[गेहूं का उत्पादन कम होने से पर्याप्त मात्रा में भूसा मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे पशुपालकों के सामने मवेशियों को खुला छोड़ने की मजबूरी खड़ी हो सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-sell-the-straw--please-give-it-to-us/article-74589"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/biyaji-bharose-mt-bhejo-aap-hamen-de-dena...-kota-news-06.04.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। ब्याईजी, फूफाजी, मामाजी, मौसाजी आपने भूसा बेच दिया क्या?, भूसा मत बेचना, आप हमें दे देना। कुछ तरह का वार्तालाप ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों के बीच चल रहा है। जिले में भूसे के संकट ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में पशुपालक अभी से ही अपने मवेशियों के लिए भूसे का इंतजाम करने में जुट गए हैं। पशुपालक अपने रिश्तेदारों के यहां से भूसे का जुगाड़ करने में लगे हैं। इस साल जिले में गेहूं का उत्पादन कम हुआ। इसका प्रभाव भूसे पर भी पडा है। इसके चलते आगामी दिनों में मवेशियों के लिए भूसे की किल्लत हो सकती है।  </p>
<p><strong>इसलिए आया भूसे का संकट</strong><br />पूर्व में मौसम में बदलाव के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। फसलों के जमीन में गिरने से पैदावार के साथ भूसे का संकट भी खड़ा हो गया है।  मौसम की खराबी और बूंदाबांदी व हवा चलने से खासकर गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा था। इससे गेहूं का उत्पादन भी कम हुआ है। इसका प्रभाव भूसे पर भी पड़ा है। जिन किसानों के पास पिछले साल का भूसा बचा है उसी से वे मवेशियों का आधा अधूरा पेट भर रहे हैं। गेहूं का उत्पादन कम होने से पर्याप्त मात्रा में भूसा मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे पशुपालकों के सामने मवेशियों को खुला छोड़ने की मजबूरी खड़ी हो सकती है।  </p>
<p><strong>उत्पादन कम, डिमांड अधिक</strong><br />समय के अनुसार हर वस्तु की कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में इन दिनों किसानों व पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी समस्या पशुओं के लिए चारा संग्रह करने की आ रही है। गेहूं की बुवाई कम होने के साथ ही सुखला यानी भूसे की मांग अधिक बढ़ गई है। पशुपालक एडवांस में मुंह मांगी कीमत देकर इसे बुक कर रहे है। क्षेत्र में इस वर्ष गेहूं की कम बुवाई एवं पूरे सीजन में मौसम की मार के चलते फसल की ग्रोथ आशा के अनुरूप नहीं हुई है। इससे चलते कम भूसा निकल रहा है। भूसे की कमी की आंशका के चलते क्षेत्र के कई किसान व पशुपालक गेहूं कटाई व निकलाई से पूर्व ही भूसे की कीमत तय कर उसे एडवांस में बुक कर रहे हैं।</p>
<p><strong>गत्ता व रद्दी बनाने में हो रहा उपयोग</strong><br />कृषि विशेषज्ञ गोविन्द गुप्ता के अनुसार पिछले कुछ सालों से भूसे का  कॉमर्शियल उपयोग होने लगा है इस कारण भी भूसे के स्टॉक में कमी आ रही है।  दरअसल, हाल के कुछ वर्षों में भूसे का इस्तेमाल गत्ता और रद्दी बनाने के कामों में भी किया जा रहा है। ऐसे में पशुपालकों को यह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा अब किसान फसलों की कटाई कंबाइन मशीनों से करवाने लगे हैं। ऐसा करने से 6 इंच फसल बचकर खेत में ही रह जा रही है। कंबाइन एक बड़ी मशीन होती है। यह ऊपर के फसल को तो काट लेती है लेकिन नीचे के हिस्से की फसल रह जाती है।  इसी वजह से फसल अगर 12 इंच की है तो 6 इंच का पौधा खेत में ही रह जाता है। इस कारण भूसे का उत्पादन कम हो पा रहा है।</p>
<p><strong>अधिक दाम पर भी नहीं मिल रहा</strong><br />पशुपालक ज्ञानसिंह गुर्जर, रत्तीराम माली, हरकचंद लोधा व लालचंद मीणा आदि ने बताया कि एक बीघा में बोए हुए गेहूं के भूसे की कीमत करीब 4 से 5 हजार रुपए तक है। जो मुंह मांगी कीमत देने पर भी नहीं मिल रहा है। भूसा नहीं मिलने की दशा में चारे का कोई अन्य विकल्प काम में लेंगे। जिले में इस बार गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे भूसे की भी कमी बनी हुई है। वहीं कुछ किसान इसका स्टॉक भी कर रहे हैं, ताकि आगामी दिनों में अधिक दाम में बेचा जा सके। </p>
<p>पहले खेतों में किसान अपने औजारों से गेहूं की कटाई करता था, जिससे  भूसे का उत्पादन भी ज्यादा मात्रा में होता था लेकिन अब ऐसा बेहद कम हो रहा है। अब कंबाइन मशीनों से गेहूं की कटाई करवाने के कारण भूसे का उत्पादन घटा है। इसके अलावा इस साल तापमान की अधिकता के कारण गेहंू की फसल में नुकसान देखा गया है। क्योंकि तापमान अधिक होने से अनाज हल्का हो जाता है और प्रोडक्शन में कमी आ जाती है। <br /><strong>- रमेश चांडक, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Apr 2024 16:39:17 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गौशाला में पहुंचा 6 गाड़ी भूसा, हरे चारे के लिए भी किया संवेदक को पाबंद </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में संवेदक द्वारा नियमित रूप से भूसे की सप्लाई नहीं की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---6-carts-of-chaff-reached-cowshed--sensor-banned-for-green-fodder-also/article-61434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/asar-khabar-ka.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में रविवार को 6 गाड़ी भूसा पहुंचा। वहीं हरा चारा सप्लाई करने के लिए भी संवेदक को पाबंद किया गया है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में संवेदक द्वारा नियमित रूप से भूसे की सप्लाई नहीं की जा रही है। जिससे वहां कुछ ही समय का भूसा बचा है। जबकि संवेदक को कार्यादेश शर्त के अनुसार भूसे की सप्लाई करनी है। </p>
<p>नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि संवेदक ने रविवार को 6 गाड़ी भूसे की गौशाला में भिजवाई है। हर गाड़ी में 40 से 45 क्विंटल भूसा आता है। एक साथ 6 गाड़ी आने से गोदाम में भूसे की पर्याप्त आपूर्ति हुई है। जिससे अगले कुछ दिन तक गौवंश को भूसा खाने को मिल सकेगा।  सिंह ने बताया कि संवेदक को नियमित रूप से भूसा सप्लाई करने को कहा गया है। लेकिन संवेदक का कहना है कि उसका लाखों रुपए का भुगतान निगम के स्तर पर अटका हुआ है। करीब दो माह से भुगतान नहीं होने से उसे आर्थिक परेशानी हो रही है। सिंह ने बताया कि इस संबंध में निगम में जानकारी करने पर पता चला कि निगम द्वारा बिल पास कर कोष कार्यालय में भेजे हुए हैं। वहीं से बिल पास नहीं होने से भुगतान अटका हुआ है। सिंह ने कहा कि संवेदकों को नियमित भुगतान होता रहेगा तो वे भी गौशाला में नियमित भूसे की सप्लाई करते रहेंगे। इधर निगम अधिकारियों ने हरा चारे के संवेदक को भी नोटिस जारी कर सोमवार तक गौशाला में हरे चारे की सप्लाई करने के लिए पाबंद किया है। यदि सोमवार तक चारा सप्लाई नहीं होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएग़ी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि निगमकी गौशाला में भूसे की कमी होने का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में रविवार के अंक में पेज दो पर ‘निगम अधिकारियों पर हावी हो रहे संवेदक’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसके बाद अधिकारियों ने संवेदक को भूसे की सप्लाई करने के लिए पाबंद किया। उसके बाद संवेदक ने रविवार को गौशाला में 6 गाड़ी भूसा सप्लाई किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 12:17:45 +0530</pubDate>
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                <title>भूसे की कीमत बढ़ी तो ठेकेदार चाह रहा ब्लैकलिस्ट होना </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की गौशाला में गौवंश के लिए भूसा व चारा सप्लाई करने वाला संवेदक भूसा व चारा देने की जगह खुद ही ब्लैकलिस्ट होना चाह रहा है। जिससे उसे आगे काम नहीं करना पड़े। लेकिन निगम अधिकािरयों ने सख्ती दिखाई तो बुधवार को संवेदक ने गौशाला में भूसा डलवाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-the-price-of-straw-increases--the-contractor-wants-to-be-blacklisted/article-7069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  नगर निगम की गौशाला में गौवंश के लिए भूसा व चारा सप्लाई करने वाला संवेदक भूसा व चारा देने की जगह खुद ही ब्लैकलिस्ट होना चाह रहा है। जिससे उसे आगे काम नहीं करना पड़े। लेकिन निगम अधिकािरयों ने सख्ती दिखाई तो बुधवार को संवेदक ने गौशाला में भूसा डलवाया। नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा गौशाला में भूसा व चारा सप्लाई करने का टेंडर किया था। जिसका कार्यादेश 2 साल के लिए 24 सितम्बर 2020 को जारी किया गया था। अभी डेढ़ साल का समय ही हुआ है। करीब 6 माह का समय  बाकी है।  भूसे व चारे का वर्तमान ठेका सितम्बर 2022 तक है। लेकिन उससे पहले ही संवेदक भूसा सप्लाई करने की जगह स्वयं को ब्लेकलिस्ट करवाना चाह रहा है। इसका कारण भूसे व चारे की कीमत बढ़ना बताया जा रहा है। <br /><br /><strong>करीब ढाई से तीन गुना बढ़ी कीमत</strong><br />नगर निगम ने डेढ़ साल पहले संवेदक को भूसे व चारा सप्लाई का ठेका दिया था। उस समय भूसे की दर निगम द्वारा 4 रुपए 84 पैसे प्रति किलो और हरे चारे की दर 2 रुपए 35 पैसे प्रति किलो थी। जबकि बाजार में उस समय भूसा व चारा इससे कम कीमत में मिल रहा था। जब तक बाजार में सस्ता भूसा व चारा मिल रहा था तब तक तो संवेदक निगम को सप्लाई करता रहा। लेकिन जैसे ही बाजार में भूसा व हरे चारे की कीमत वर्तमान में करीब ढाई से तीन गुना अधिक हो गई है। ऐसे में संवेदक द्वारा गौशाला में पूरा व अच्छी क् क्वालिटी का भूसा व चारा ही नहीं दिया जा रहा है। <br />भूसे व चारे की किल्लत होने पर महापौर व अधिकारियों ने जब उसकी जांच की तो उसमें कमियां पाई गई। निर्धारित से कम सप्लाई होने व क्वालिटी भी खराब होने से निगम ने संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की।  उसके बाद से संवेदक द्वारा गौशाला में समय पर व पूरा चारा व भूसा सप्लाई करने में आनाकानी की जाने लगी। साथ ही निगम अधिकािरयों पर उसे ब्लेकलिस्ट करने का दबाव बना रहा है। जिससे बीच में ही उसे छुटकारा मिल जाए। <br /><br /><strong>मध्य प्रदेश व पंजाब से आ रहा था भूसा</strong><br />पूर्व में संवेदक द्वारा मध्य प्रदेश व पंजाब से भूसा मंगवाया जा रहा था। लेकिन मध्य प्रदेश में भूसे की किल्लत होने पर वहां से सप्लाई पर रोक लगी तो संवेदक ने पंजाब से भूसा मंगवाना शुरू किया। लेकिन वहां से महंगा होने से उसने इसमें कमी करना शुरू कर दिया। <br />ठेके की शर्त के अनुसार संवेदक को गौशाला में करीब 15 दिन का भूसा व हरा चारे का स्टॉक रखना अनिवार्य है लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा है। हालत यह है कि एक दिन का भूसा गौशाला में नहीं मिल पा रहा है। गौशाला में वर्तमान में 21 सौ गौवंश है। जिनके लिए करीब 7 किवंटल भूसा व 10 क्विंटल हरे चारे की रोजाना जरूरत है। <br /><br /><strong>अधिकारियों ने की व्यवस्था तो घबराया संवेदक</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के उपायुक्त अशोक त्यागी ने बताया कि एक दिन पहले गौशाला मेंÞ चारा नहीं होने की जानकारी मिली थी। इस पर वे मौके पर पहुंचे और जैसे-तैसे इधर-उधर से निजी लोगों से भूसा व चारा खरीदा। जिससे गौवंश को भूखा नहीं रहना पड़े। उसका भुगतान संवेदक की जमा राशि में से काटा जाएगा। जैसे ही संवेदक को इसका पता चला तो उसने 4-5 गाड़ियां भूसा डलवाया है। जिससे आगामी कई दिन तक की व्यवस्था हो गई है। त्यागी ने बताया कि अभी वर्तमान ठेके में 6 माह का समय है लेकिन उसका बजट पूरा हो गया है। जिससे वह भूसा नहीं दे पा रहा है। <br /><br /><strong>नया व शॉर्ट टर्म ठेका किया जा रहा</strong><br />उपायुक्त अशोक त्यागी ने बताया कि निगम द्वारा नया व 7 दिन का शॉर्ट टर्म ठेका किया जा रहा है। जिसे गुरुवार को जारी कर दिया जाएगा। उसके साथ ही एक नया ठेका भी किया जा रहा है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 14:20:48 +0530</pubDate>
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