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                <title>sultanpur - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>sultanpur RSS Feed</description>
                
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                <title>मुख्य पाइप लाइन में लीकेज से बहा सैकड़ों क्यूसेक पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ सुल्तानपुर नगर पालिका द्वारा मुख्य बाजार में  करवाए जा रहे इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान सोमवार रात्रि में सड़क के साइड में जेसीबी मशीन  से खुदाई के दौरान कस्बे के मुख्य बाजार में मंगलवार को मुख्य पेयजल पाइप लाइन करीब 4 जगह फूट गई। जिससे सैकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बह गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hundreds-of-cusecs-of-water-flowing-through-leakage-in-the-main-pipeline/article-11645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/main-pipeline-leakage-sultanpur.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर।  सुल्तानपुर नगर पालिका द्वारा मुख्य बाजार में  करवाए जा रहे इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान सोमवार रात्रि में सड़क के साइड में जेसीबी मशीन  से खुदाई के दौरान कस्बे के मुख्य बाजार में मंगलवार को मुख्य पेयजल पाइप लाइन करीब 4 जगह फूट गई। जिससे संैकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बह गया।<br /><br />जानकारी के अनुसार कस्बे के मुख्य बाजार में पेयजल पाइप लाइन में मंगलवार को 4 जगह लीकेज हो गया। जिससे सैंकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बहने के साथ ही कई दुकानों में पानी भर गया। दुकानदारों का सामान खराब हो गया। साथ ही कस्बे के कई मोहल्लों में 6 घंटे तक पेयजल सप्लाई बाधित रहने से समय पर नलों में पानी नहीं आ सका। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। कस्बे के मुख्य बाजार में नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान सोमवार रात्रि में सड़क के साइड में जेसीबी मशीन द्वारा खुदाई की गई थी जिससे पाइप लाइन लीकेज हो गई। जिसके चलते कस्बे में पेयजल सप्लाई भी करीब 6 घंटे तक बाधित रही। दोपहर के समय जैसे ही कोटा रोड की पेयजल सप्लाई छोड़ी गई वैसे ही मुख्य लाइन में से करीब चार-पांच जगह से फव्वारे निकलने लगे। बौछार की रफ्तार इतनी तेज थी कि आसपास की दुकानों में पानी भर गया। <br /><br /><strong>दुकानों के शटर लगाकर किया बचाव</strong><br />जानकारी के अनुसार कुछ दुकानदारों ने तो पानी की बौछार से बचने के लिए दुकानों के शटर तक लगा लिए। पाइप लाइन लीकेज होने से करीब 6 घंटे तक पेयजल सप्लाई बाधित रही। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। <br /><br />पाइपलाइन लीकेज होने से उससे निकलने वाला पानी दुकान में भर गया। जिससे दुकान में रखा सामान खराब हो गया। कपड़े की दुकान होने से कपड़े गीले हो गए। शीघ्र ही दुकान का शटर लगा कर ज्यादा पानी अंदर आने से रोका। <br /><strong>-रमेश नामा, व्यापारी</strong><br /><br />दोपहर के समय अचानक ही पाइपलाइन लीकेज हो जाने से एकदम से ही पानी दुकानों में आना शुरू हो गया। पानी से बचाव के लिए लिकेज पर कुछ पत्थर डालकर रोकने का प्रयास किया। लेकिन वह प्रयास विफल हुआ और दुकानों में पानी ही पानी हो गया।<br /><strong>-गोलू शर्मा एवं भवानी शंकर शर्मा, व्यापारी</strong> <br /><br />दोपहर के समय जैसे ही कोटा रोड की सप्लाई को चालू किया गया तो रात्रि में इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पाइप लाइनों से तेजी से पानी की बौछार निकलने लगी। जिससे दुकानों में पानी भर गया।<br /><strong>-पूरन मेहरा, फोटो दुकान मालिक </strong> <br /><br />नगर में सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। इसी दौरान पाइप लाइन लीकेज हो गई। जिसे संबंधित विभाग द्वारा शीघ्र ही दुरुस्त करा कर कस्बे वासियों के लिए पेयजल सप्लाई शुरू करा दी गई है।<br /><strong>-हेमलता शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका,</strong><br /><strong> सुल्तानपुर</strong><br /><br />इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान मुख्य पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिसे दुरुस्त करवा दिया गया है। कस्बे के जिन वार्डों में पेयजल सप्लाई बाधित हुई थी, उनकी सप्लाई देर शाम तक चालू करवा दी है। <br /><strong>-दिनेश गोचर, जेईएन, पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 16:15:35 +0530</pubDate>
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                <title>चने में मिट्टी व कंकड़ बताकर खरीद केंद्र पर किया फेल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर के गौण मंडी यार्ड में चल रही समर्थन मूल्य चना खरीद में भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज से किसान टोकन का मैसेज आने के बाद महंगा डीजल जलाकर खरीद केंद्र पर आते हैं। यहां उनकी सही चने की फसल को मिट्टी व कंकड़ बताकर नापास किया जा रहा है।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rejected-at-the-purchase-center-by-saying-that-there-were-soil-and-pebbles-in-gram/article-10490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/chane-mei-mitti-..sultanpur-k1.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। नगर के गौण मंडी यार्ड में चल रही समर्थन मूल्य चना खरीद में भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज से किसान टोकन का मैसेज आने के बाद महंगा डीजल जलाकर खरीद केंद्र पर आते हैं। यहां उनकी सही चने की फसल को मिट्टी व कंकड़ बताकर नापास किया जा रहा है।<br /><br />बुधवार को समर्थन मूल्य चना खरीद केंद्र पर 15 से अधिक किसानों की चने की जिंस में मिट्टी व कंकड़ बताकर नापास कर दिया। जिस पर किसानों ने हंगामा कर दिया। सूचना मिलते ही सुल्तानपुर नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों से जानकारी ली। किसानों ने बताया कि समर्थन मूल्य चना खरीद केंद्र पर उनकी सही चने की जिंस को भी मिट्टी कंकड़ बताकर नापास किया जा रहा है और वापस भिजवाया जा रहा है। जबकि सफाई के बाद ही खरीद केंद्र पर लेकर आते है। खरीद केंद्र पर मौजूद चोमा मालियान निवासी हीरालाल, कोटडादीप सिंह निवासी हेमंत पारेता, बड़ौद से फरीद मोहम्मद व पीपल्दा बिरम निवासी लेखराज मीणा ने बताया कि समर्थन मूल्य पर चना का बेचान किया था। जहां सहकारी समिति द्वारा वेयरहाउस में माल जमा करवाने पर वहां सर्वेयर द्वारा उनकी सही चना फसल को भी नापास कर दिया। ऐसे में दोबारा खरीद केंद्र पर बुलाया गया।  जब समस्या को लेकर क्रय विक्रय सहकारी समिति में मुख्य व्यवस्थापक संदीप जैन के पास जाते हैं तो वह कभी कार्यालय में मिलते ही नहीं हैं। साथ में ही खरीद केंद्र पर आकर तक नहीं देखते। ऐसे में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं खरीद केंद्र अधिकारियों ने बताया कि वह किसानों का हरसम्भव माल खरीद कर रहे है। लेकिन वेयर हाउस में सर्वेयर द्वारा माल नापास करने से परेशानी आ रही है। <br /><br /><strong>पत्र लिखकर की सर्वेयर लगाने की मांग</strong><br />किसानों के आक्रोश के बाद सुल्तानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति व्यवस्थापक महेश शर्मा द्वारा क्षेत्रीय प्रबंधक राजफैड कोटा को समर्थन मूल्य खरीद केंद्र पर सर्वेयर नियुक्त करने को लेकर पत्र लिखा। उन्होंने बताया कि समर्थन मूल्य चना खरीद केंद्र पर जिंस की गुणवत्ता की जांच करने को लेकर के लिए सर्वेयर नियुक्त किया जाए जो कि एफएक्यू क्वालिटी की जिंस का निर्धारण कर सके। क्योंकि समिति कर्मचारियों को गुणवत्ता जांच का किसी भी तरह से प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में खरीद गुणवत्ता मापदण्ड सही नही होने पर वैयर हाउस से जिंस वापसी के आसार बने रहते हैं। इससे किसान भी परेशान होते हैं तो वहीं समिति का भी आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने जिस पैनल से वेयरहाउस में सर्वेयर नियुक्त किया गया है उसी पैनल से खरीद केंद्र परिसर पर भी सर्वेयर नियुक्त करने की मांग की है। ताकि केंद्र पर किसानों को परेशानी न हो। <br /><br /><strong>पानी-बिजली की नहीं है कोई व्यवस्था</strong><br />नरसिंहपुरा से चना फसल लेकर पहुंचे किसान कालूलाल ब्रह्मानंद मानव ने बताया कि खरीद केंद्र पर गौण मंडी प्रशासन की ओर से शीतल पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मजबूरन बाहर दुकानों पर जाकर बोतल कर पानी पीना पड़ता है। इसके साथ ही खरीद केंद्र पर दिन के समय बिजली नहीं आने के चलते वहां लगे सीसीटीवी कैमरे भी शो पीस साबित हो रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा। मंगलवार को समस्याएं सामने आने पर नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह द्वारा तुरंत समस्याओं का समाधान करने के लिए निर्देशित किया। <br /><br /><strong>अब तक 460 किसानों की हुई चना तुलवाई</strong><br />गौरतलब है कि किसान संगठनों द्वारा काफी प्रयास करने के बाद 29 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर चना खरीद शुरू हुई थी। जहां सुल्तानपुर खरीद केंद्र पर कुल 964 किसानों ने चना बेचान को पंजीकरण करवाया है। इनमें से शनिवार को 810 किसानों को टोकन के मैसेज जारी कर दिए गए हैं। वही सोमवार तक कुल 460 किसानों का 19 हजार कट्ठा चना खरीदा जा चुका है। जानकारी मुताबिक यहां पर 1 दिन में 60 किसानों को चना बेचान के टोकन जारी हो रहे हैं। जिनमें से महज 40 किसान खरीद केंद्र पर पहुंच रहे हैं। इसमें भी आधे से ज्यादा किसानों की चना मे कंकड़ बता कर उसे नापास किया जाने से किसान खासा परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 15:14:20 +0530</pubDate>
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                <title>दो साल बाद सावों की धूम के चलते बाजारों में लौटी रौनक </title>
                                    <description><![CDATA[ ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो वर्ष से अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर लॉकडाउन के चलते विवाह नहीं हो सके थे। दो सालों की तुलना में इस बार शादी ब्याह में छूट के चलते बाजार गुलजार हुए। टेंट, रेडीमेड कपड़ों का व्यापार, ज्वेलर्स, बर्तन जैसे बिजनेस में इस साल में अब तक 2 करोड़ का कारोबार हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/after-two-years--due-to-the-pomp-of-savo--the-market-returned-to-the/article-9425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/19.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। नगर के बाजारों में कोरोना महामारी के चलते लगे लॉक डाउन के बाद से ही बाजारों में खामोशी छाई हुई थी जिसके चलते व्यापारियों में निराशा छाई हुई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो वर्ष से अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर लॉकडाउन के चलते विवाह नहीं हो सके थे। साथ ही बाजार बंद होने से भी व्यापारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था। दो सालों की तुलना में इस बार शादी ब्याह में छूट के चलते बाजार गुलजार हुए। टेंट, रेडीमेड कपड़ों का व्यापार, ज्वेलर्स, बर्तन जैसे बिजनेस में इस साल में अब तक 2 करोड़ का कारोबार हुआ है। बाजार गुलजार होने से व्यापारियों में उत्साह का माहौल है।<br /><br /> ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष  शादी विवाह के सावे है। साथ ही किसानों की फसलें भी बढ़िया हुई है जहां सरसों की फसल की पैदावार बढ़िया होने के साथ ही भाव भी अच्छे मिल रहे हैं जिससे किसानों का मनोबल भी बढ़ा है लेकिन लहसुन के भाव और पैदावार कम होने के कारण मिलाजुला असर देखने को मिला। अब तक किसान खेतों में अपनी फसलों को तैयार करने के लिए लगे हुए थे इसके चलते बाजारों में खामोशी छाई हुई थी लेकिन सावो के अवसर को देखते हुए कस्बे सहित क्षेत्र में सैकड़ों शादियां हो चुके हैं और कई शादियां होनी बाकी है जिसके चलते बाजार में पिछले कुछ दिनों से अच्छी खासी रौनक छाई हुई है जिससे व्यापारियों की बांछें खिल गई है। दीपावली पर्व के बाद से ही व्यापारी बाजार में खरीदारी नहीं होने से खामोश बैठे हुए थे लेकिन अबूझ सावे की रौनक को देखते हुए खरीदारी बढ़ने लगी है। <br /><br /> पंडित विमल आचार्य  एवं  संदीप आचार्य ने बताया कि  ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया के अबूझ सावे  में शादियों की धूम धाम देखने को मिली क्योंकि अक्षय तृतीया को ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा पर्वत माना जाता है साथ ही अक्षय तृतीया के 1 दिन पूर्व 2 मई को भी इस वर्ष शादी विवाह के लिए बहुत अच्छा योग होने के कारण 2 मई के भी अत्यधिक शादियों के सावे थे। शादी विवाह की धूम देखी गई जिससे ग्रामीण लोग शादियों की खरीदारी करने में लग गए हैं लेकिन अब सावों के खुलने एवं अक्षय तृतीया का अबूझ सावा खत्म होने के बाद भी बाजारों में खरीदारी बढ़ गई है। इसी के तहत बाजारों में रौनक छाई रही।  कस्बे के मुख्य बाजार में किराना की दुकानें, रेडीमेड कपड़ों के व्यापार, बर्तन की दुकान, आभूषणों,टेंट और डकोरेशन की दुकानों पर भी रौनक दिखाई दी। <br /><br /><strong>रेडीमेड कपड़ों की बढ़ी डिमांड</strong><br />रेडीमेड व्यापारी अमन खंडेलवाल, उमेश शर्मा,बंटी ऋषि अश्वनी नामा का कहना है कि युवाओं में रेडीमेड कपड़ों के प्रति अधिक रुझान देखने को मिल रहा है पिछले 2 वर्षों से व्यापार कोरोना का हाल के चलते ठप पड़ा हुआ था इस वर्ष रेडीमेड व्यापारियों की अच्छी चांदी हुई है। कस्बे में करीब 40 लाख रुपए तक का कारोबार हुआ है। आगामी समय में शादी विवाह के मुर्हूत होने से बाजार में अच्छा व्यापार होने की उम्मीद है। <br /><br /><strong>मैरिज गार्डन, बैंड बाजे एवं बस मालिकों की मौज</strong><br />इस वर्ष कोरोना महामारी का प्रभाव नहीं होने के कारण शादियों की धूम के चलते कस्बे में मैरिज गार्डन बैंड बाजे एवं बस मालिकों की मौज रही। सावा होने के चलते मैरिज गार्डन कहीं माह पूर्व ही बुक हो चुके है। ऐसे में कई विवाह समारोह करने वाले अभिभावकों को शादी के लिए जगह मिलना भी मुश्किल हो रहा है। यही हाल है बैंड बाजा की भी है क्योंकि दो और तीन के अधिक सावे होने से बैंड बाजे की बुकिंग पूर्व में ही हो चुकी है। बस संचालक जय प्रकाश शर्मा,अब्दुल कयूम, हमीद अंसारी का कहना है कि सावा होने के कारण मार्च माह में ही बसों की बुकिंग पूर्ण हो चुकी है जिन लोगों ने आनन-फानन में शादी की तारीख तय की है ऐसे लोगों को बसे तक नहीं मिल पा रही है। मैरिज गार्डन संचालक रामदयाल नामा रामस्वरूप नामा का कहना है कि इस बार सावे खुलने के कारण अच्छी बुकिंग आ रही है पिछले 2 वर्षों से कोरोना के चलते हैं मैरिज गार्डन व्यवसाय का धंधा चौपट हो गया था। इस वर्ष सावो की धूमधाम होने के कारण अच्छा व्यवसाय हुआ। शादी-विवाह के सीजन में इस वर्ष करीब 3 लाख का कारोबार हुआ है।<br /><br /><strong>बाजारों में देखने को मिल रही है ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खरीददारों की भीड़</strong><br />कस्बे के बाजार में अब शादी विवाह के सावो के चलते ग्रामीणों की भीड़ देखने को मिल रही है कस्बे के मुख्य बाजार में बर्तन की दुकानों, कपड़ों की दुकानों, रेडीमेड की दुकानों, किराने की दुकानों  एवं सरार्फा बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल दिखाई दिए हैं। शादियों के लिए सामान खरीदने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से लोग सुबह से ही आने लगे हैं जिससे बाजारों में चहल-पहल देखने को मिल रही है। बर्तन व्यवसायी राजेंद्र शर्मा, रामस्वरूप नामा, पंकज नागर का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष बर्तनों की रेट में करीब 30 से 40% का इजाफा होने इसका असर खरीदारी पर देखने को मिल रहा है क्योंकि पूर्व में शादी के सामान खरीदने के लिए ग्रामीणों का जो बजट हुआ करता था उसमें महंगाई के चलते इजाफा हो गया है 2020 एवं 2021 में कोरोना काल के चलते लॉक डाउन लग गया था जिससे व्यापार प्रभावित हुआ था इस वर्ष कस्बे के बर्तन व्यापारियों ने सावो के दौरान करीब 20 लाख रुपए का कारोबार किया है। कपड़ा व्यापारी इमामुद्दीन खान, सुरेश बडेरा का कहना है कि व्यापारियों के द्वारा शादियों के सीजन को देखते हुए खरीदारी पूर्ण कर ली गई है नई नई वैरायटी के कपड़े बाजार में आए। कपड़ा व्यापारियों ने 50 लाख का कारोबार शादी विवाह के सीजन में किया है। <br /><br /><strong>सामूहिक विवाह सम्मेलन की रहेगी धूम</strong><br />नगर सहित क्षेत्र में सामूहिक विवाह की धूम रहेगी। क्षेत्र में नागर समाज, मीणा समाज, मेघवाल समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन प्रस्तावित है। सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। भगवान गणपति को निमंत्रण दिया जा चुका है। आगामी दिनों में सामूहिक विवाह के आयोजनों से बाजार भी गुलजार रहेंगे।<br /><br /><strong>पिछले साल की अपेक्षा इस साल तीन माह में 350</strong> <br />शादियां हुईसुल्तानपुर पंडित संदीप आचार्य एवं पंडित मयंक गौतम ने बताया कि गत तीन साल में अप्रैल, मई जून में शादियों के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष में कोरोना महामारी नहीं चलने के कारण 150 शादियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जहां 2020 में अप्रैल, मई, जून में शादियों का सीजन आने से पहले ही कोरोना वायरस का प्रभाव चालू हो जाने से शादियां नहीं हो पाई थी। 2021 में शादियां तो शुरू हो गई थी करीब 200 शादियां हो पाई थी कि कोरोना का प्रभाव तेज होने के कारण सरकार ने शादियां नहीं करने की गाइडलाइन निकाल दी थी जिस पर शादियों पर रोक लग गया था। इस वर्ष सुल्तानपुर कस्बे सहित क्षेत्र में करीब 350 शादियां अब तक हुई है करीब ढाई सौ शादियां आगे भी होनी बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 16:56:35 +0530</pubDate>
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                <title>खबर का असर: सुल्तानपुर-नापाहेड़ा सड़क का किया डामरीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति के 22 अप्रैल के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने सुल्तानपुर-नापाहेड़ा सड़क का डामरीकरण किया। लेकिन अभी भी कई कमियां छोड़ दी गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news--asphaltization-of-sultanpur-napaheda-road/article-9421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/asar-khaber-ka.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। दैनिक नवज्योति के 22 अप्रैल के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने सुल्तानपुर-नापाहेड़ा सड़क का डामरीकरण किया। लेकिन अभी भी कई कमियां छोड़ दी गई हैं जिससे डामरीकरण का लाभ राहगीरों को मिलना संदिग्ध है। पहले की भांति राहगीरों को दुर्घटना का शिकार का खतरा बना हुआ है।<br /><br />गौरतलब है कि ग्रामीणों को डामरीकरण नहीं होने के कारण आए दिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। 22 अप्रैल को दैनिक नवज्योति ने ग्रामीणों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद सड़क का डामरीकरण किया गया। लेकिन सड़क के दोनों तरफ की पटरी जीरो गुणवत्ता वाली मिट्टी से बनाई गई है। संबंधित अधिकारियों ने मिट्टी हटाने के निर्देश जारी कर दिए थे। लेकिन अभी तक भी दोनों तरफ की मिट्टी हटाकर ग्रेवल नहीं डाला गया। जहां पर नाले या पुलिया बनानी है, उनका काम भी अभी तक चालू नहीं किया गया है। 15 दिन से रोड का कार्य बंद पड़ा है। ठेकेदार एवं कंपनी के द्वारा कार्य में अनियमितता बरती जा रही है। <br /><br />ग्रामीण हेमंत झाला एवं अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को पत्र लिख कर अवगत करवाया गया। लेकिन अभी तक भी इस रोड की गुणवत्ता की जांच नहीं की गई। जिसमें बहुत सारी कमियां अभी भी बाकी हैं। पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत झाला एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य परमानंद  मीणा ने सड़क का अवलोकन किया। जिसमें अभी भी कई समस्याएं पाई गर्इं। जिनका निस्तारण होना बारिश से पहले अति आवश्यक है। नहीं तो जनता को इन समस्याओं से वापस जूझना पड़ेगा। झाला ने बताया कि सुल्तानपुर से 2 ग्राम पंचायत मुख्यालयों अमरपुरा एवं किशोरपुरा के 18 गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर कार्य की गुणवत्ता में काफी अनियमितता बरती जा रही है। उच्चाधिकारियों एवं सहायक अभियंता सुल्तानपुर को कई बार शिकायत दी गई। इसके बाद इस मुख्य सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ। लेकिन इसमें कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बहुत सारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। इसमें दोनों तरफ जो मिट्टी की पटरियां बनाई जा रही हैं, वह मिट्टी गुणवत्ता वाली नहीं डाल कर ड्रेन खोदकर पास में से ही ऐसी मिट्टी रोड पर डाली गई, जिसमें बिल्कुल भी गुणवत्ता नहीं है। जो हमेशा बारिश के पानी में डूबी रहती है। झाला ने मांग की है कि शीघ्र इस रोड की समस्त कमियों की जांच कर डामरीकरण किया जाए। <br /><br /><strong>निरीक्षण के दौरान उजागर हुर्इं कमियां</strong><br />समस्या को लेकर पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत झाला के नेतृत्व में क्षेत्र की जनता ने इस रोड का निरीक्षण किया। जिसमें कई प्रकार की कमियां उजागर हुर्इं हैं। झाला ने बताया कि डामरीकरण के बाद भी राहगीरों को पहले की तरह दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ेगा। निरीक्षण के दौरान जल वितरण समिति अध्यक्ष हरीश मीणा नापाहेड़ा, संदीप यादव, विरदीचंद खारोल एवं ग्रामीण मौजूद रहे।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />पूर्व सड़क जिस पर डामरीकरण हो रहा था, उसी डामर को थोड़ा सा हटाकर उस पर ही ठेकेदार द्वारा गिट्टी बिछा दी गई। अभी रोड पर जो गिट्टी कर रखी है, उसको 1 महीना हो चुका है। जिससे राहगीरों को दुर्घटना का शिकार होना पड़ रहा है। आए दिन बाइक चालक रोड पर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। अनेक राहगीर दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। <br /><strong>-हेमंत झाला, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष </strong> <br /><br />सड़क का कार्य प्रगति पर है। दोनों साइडों पर ग्रेवल डलवा कर बारिश के पूर्व कार्य को पूर्ण करवा दिया जाएगा। आम जनता को परेशानी नहीं होगी। <br /><strong>-लक्ष्मीनारायण मीणा, एईएन, पीडब्ल्यूडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 16:06:22 +0530</pubDate>
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                <title>बैंड, बाजा, बारात बूम पर, बाजार में छाई रौनक</title>
                                    <description><![CDATA[अबूझ सावे को देखते हुए रविवार को नगर के बाजारों में रौनक देखने को मिली।  कस्बे सहित क्षेत्र में सैकड़ों शादियां होंगी। जिसके चलते बाजार में पिछले कुछ दिनों से अच्छी खासी रौनक छाई हुई है। सरसों की फसल की पैदावार बढ़िया होने के साथ ही भाव भी अच्छे मिल रहे हैं। जिससे किसानों का मनोबल भी बढ़ा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/band--baaja--baaraat-on-boom--the-market-is-full-of-excitement/article-8078"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/wedding.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। अबूझ सावे को देखते हुए रविवार को नगर के बाजारों में रौनक देखने को मिली। शादी की खरीददारी का असर बाजार में देखने को मिला। जानकारी के अनुसार इस वर्ष फसलें अच्छी हुई हैं। सरसों की फसल की पैदावार बढ़िया होने के साथ ही भाव भी अच्छे मिल रहे हैं। जिससे किसानों का मनोबल भी बढ़ा है। लेकिन लहसुन के भाव और पैदावार कम होने के कारण मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है। अब तक किसान खेतों में अपनी फसलों को तैयार करने के लिए लगे हुए थे। इसके चलते बाजारों में खामोशी छाई हुई थी।  लेकिन सावों को देखते हुए कस्बे सहित क्षेत्र में सैकड़ों शादियां होंगी। जिसके चलते बाजार में पिछले कुछ दिनों से अच्छी खासी रौनक छाई हुई है। ग्राहकों की चहल पहल से व्यापारियों की बांछें खिल गई हैं। दीपावली के बाद से ही व्यापारी बाजार में खरीदारी नहीं होने से खामोश बैठे हुए थे। लेकिन अबूझ सावे को देखते हुए खरीदारी बढ़ने लगी है। कस्बे के मुख्य बाजार में किराना, रेडीमेड कपड़े, बर्तन, आभूषण, जूते चप्पल एवं रेस्टोरेंट की दुकानों पर काफी रौनक दिखाई दी। <br /><br /><strong> सामूहिक विवाह सम्मेलन की रहेगी धूम</strong><br />नगर सहित क्षेत्र में सामूहिक विवाह की धूम रहेगी। क्षेत्र में नागर समाज, मीणा समाज, मेघवाल समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन प्रस्तावित हैं। सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। भगवान गणपति को निमंत्रण दिया जा चुका है। साथ ही जोड़ों का प्रवेश भी शुरू हो चुका है। सम्मेलनों के दौरान नाबालिग जोड़ों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। बालिग जोड़ों को ही दस्तावेजों के आधार पर लिया जा रहा है। पंडित विमल आचार्य ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया का पर्व सबसे बड़ा पर्व होता है। इसे अबूझ सावे  के तौर पर भी देखा जाता है। जिन दूल्हा एवं दुल्हन के सावे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नहीं निकल पाते हैं तो उन्हें अबूझ सावों में शादी कर लेनी चाहिए। इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य करने के लिए किसी भी पंडित की राय लेने की आवश्यकता  नहीं होती है।<br /><br /><strong> ग्रामीण क्षेत्रों के खरीददारों की बढ़ी भीड़</strong><br />कस्बे के बाजार में अब उत्सवों के चलते ग्रामीणों की भीड़ देखने को मिल रही है। शादी का सामान खरीदने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से लोग सुबह से ही आने लगे हैं। <br />बर्तन व्यवसायी राजेंद्र शर्मा, रामस्वरूप नामा, पंकज नागर का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष बर्तनों की रेट में करीब 30 से 40% का इजाफा होने का असर खरीदारी पर देखने को मिल रहा है। रेडीमेड व्यापारी अमन खंडेलवाल, उमेश शर्मा, बंटी, ऋषि, अश्वनी नामा का कहना है कि युवाओं में रेडीमेड कपड़ों के प्रति अधिक रुझान देखने को मिल रहा है। <br /><br /><strong>मैरिज गार्डन, बैंड बाजे एवं बस मालिकों की मौज...</strong><br />इस वर्ष कोरोना का प्रभाव नहीं होने के कारण शादियों की धूम रहेगी। जिसके चलते कस्बे में मैरिज गार्डन, बैंड बाजे एवं बस मालिकों की मौज होने की संभावना है। 2 मई एवं 3 मई अक्षय तृतीया का अबूझ सावा होने के चलते मैरिज गार्डन बुक हो चुके हैं। बस संचालक जयप्रकाश शर्मा, अब्दुल कयूम, हमीद अंसारी का कहना है कि 2 और 3 मई का अबूझ सावा होने के कारण मार्च माह में ही बसों की बुकिंग पूर्ण हो चुकी हैं। मैरिज गार्डन संचालक रामदयाल नामा, रामस्वरूप नामा का कहना है कि इस बार सावे खुलने के कारण अच्छी बुकिंग आ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 15:49:01 +0530</pubDate>
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                <title>घर का पूत कुंवारा डोले पाड़ोसियां का फेरा</title>
                                    <description><![CDATA[घर का पूत कुंवारा डोले पाडोसियां का फेरा पशु पालकों के लगभग ऐसा ही हो रहा है। खुद के पशुओं के लिए तो चारा नहीं है और जो चारा उपलब्ध है  उसे बाहर भेजा जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ghar-ka-poot-kunvaara-dole-paadosiyaan-ka-phera/article-8074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/overriding-.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। घर का पूत कुंवारा डोले पाडोसियां का फेरा पशु पालकों के लगभग ऐसा ही हो रहा है। खुद के पशुओं के लिए तो चारा नहीं है और जो चारा उपलब्ध है  उसे बाहर भेजा जा रहा है। नगर सहित क्षेत्र में हजारों दुधारू पशुओं के लिए पशुपालकों को भूसा नहीं मिलने के कारण चिंता सताने लगी है। <br /><br />क्षेत्र में इस वर्ष गेहूं का रकबा कम होने के कारण गेहूं के अवशेषों से बनने वाले भूसे को बाहर बेचा जा रहा है। प्रतिदिन दर्जनों वाहनों से भूसे को अन्य जगहों पर भेजा जा रहा है। दूसरी तरफ भूसे की कमी के कारण पशु पालकों को अपने पशुओं के पेट भरने की चिंता सताने लगी है। गत वर्ष मार्च और अप्रैल में बेमौसम बारिश के कारण रबी फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गई थी। बची हुई फसलों को किसानों ने हार्वेस्टर मशीन से कटवा लिया। ओलावृष्टि से अछूते रहे इलाकों में ही ज्यादातर किसानों ने गेहूं की फसल क्रेशर से तैयार की थी। इसी वजह से आने वाले दिनों में पशुओं के लिए चारे की किल्लत होना स्वाभाविक बात है। भूसा व्यवसायी इसी बात को ध्यान में रखते हुए सक्रिय हो गए हैं। वह अभी से ही माल का भंडारण करने लग गए हैं। जिससे बाद में मोटी रकम कमाई जा सके। क्षेत्र के गांवों से प्रतिदिन 2 दर्जन से अधिक पिकअप, ट्रैक्टर-ट्रॉली ओवरलोड भर कर अन्य राज्यों में जा रहे हैं। सीमाओं पर स्थाई चेकिंग प्वाइंट नहीं होने से  व्यापारियों का काम और भी आसान हो रहा है। पशु मालिक जगदीश गोत्तम गोविंद शर्मा आदि का कहना है कि क्षेत्र के खेतों से भूसे को बेरोकटोक बाहर ले जाया जा रहा है। <br /><br /><strong>दोगुने हुए भूसे के दाम</strong><br />पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष दोगुने भाव में भूसा बिक रहा है। जिस से पशुपालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भूसा कम होने के कारण भाव भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पिछली बार दो से तीन हजार रुपए में भूसे की ट्रॉली मिल जाया करती थी। वहीं इस वर्ष 5000 रुपए तक भूसे की ट्रॉली बिक रही है। अगर भूसे की कीमत ऐसे ही बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में 7000 रुपए तक भी भूसे की ट्रॉली बिक सकती है। <br /><br /><strong>खड़ी नौलाइयों की भी लग रही कीमत</strong><br />किसानों को अच्छी कीमत मिलने के कारण वे अपनी जरूरत के अनुसार स्टॉक के बाद शेष भूसा व्यापारियों को बेच रहे हैं। कई किसानों ने तो खड़ी हुई नौलाइयों को ही बेचना शुरू कर दिया है।<br /><br /><strong>गौशालाओं में भी चारे की किल्लत</strong><br />सुल्तानपुर नगर की श्रीगोपाल गौशाला में भी वर्तमान में चारे का संकट देखने को मिल रहा है। वर्तमान में अन्य वर्षो की तुलना में इस वर्ष दानदाताओं द्वारा चारा नहीं भिजवाया गया है।  <br /><br />क्षेत्र में किसान खेतों में फसल कटने के बाद शेष बची नौलाइयों को बेच रहे हैं। बाहर के व्यापारी उसका भूसा बनाकर अन्य राज्यों में सप्लाई कर रहे हैं। जिसके चलते गौशाला में चारे की किल्लत पैदा हो रही है।  <br /><strong>-रमेश खंडेलवाल, महामंत्री, गौशाला समिति  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ghar-ka-poot-kunvaara-dole-paadosiyaan-ka-phera/article-8074</link>
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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 15:46:15 +0530</pubDate>
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                <title>सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष में लगा ताला</title>
                                    <description><![CDATA[ सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब ढाई माह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 16 लाख रुपए लागत की सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी। लेकिन आज भी महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है।  सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sonography-room-locked-due-to-not-having-a-sonologist/article-7156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sonogra.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब ढाई माह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 16 लाख रुपए लागत की सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी। लेकिन आज भी महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है। ब्लॉक क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आने वाली सीएचसी सोनोग्राफी मशीन को लगाए हुए ढाई माह से अधिक समय हो गया है। लेकिन आम जनता को अभी तक सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा हुआ है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब दो दर्जन मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है। उन्हें कोटा या फिर निजी अस्पतालों में जा कर के अपना उपचार कराना पड़ता है। चिकित्सालय प्रशासन द्वारा इस मामले में कई बार उच्चाधिकारियों को सोनोलॉजिस्ट लगवाने के लिए अवगत करा दिया गया है। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। गंभीर हालत में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं को भी बिना सोनोग्राफी जांच के ही 40 किलोमीटर दूर कोटा जाना मजबूरी बन गया है।<br /><br /><strong>लंबे संघर्ष के बाद मिली थी सोनोग्राफी मशीन</strong><br />सोनोग्राफी मशीन की सुविधा को लेकर युवा शक्ति द्वारा आंदोलन चलाया गया था। जिसमें युवाओं के साथ ही कस्बे वासियों एवं महिलाओं ने भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए योगदान दिया था। जिसके फलस्वरूप लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के द्वारा ग्रामीणों की मांग पर एवं नगर के लोगों की मांग पर सोनोग्राफी मशीन की घोषणा कर सीएचसी में मशीन उपलब्ध करवाई थी। लेकिन ढाई माह बाद भी इसे नियमित रूप से शुरू नहीं कराया जा सका है। <br /><br /><strong>धूल खा रही 16 लाख से अधिक की मशीन</strong><br />स्थिति यह है कि 16 लाख से अधिक राशि की यह मशीन धूल खा रही है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि विभाग के पास सोनोलॉजिस्ट नहीं है। लेकिन सोनोलॉजिस्ट लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों का भी कोई ध्यान नहीं है। जबकि सीएचसी मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आता है जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधि चाहे तो प्रतिनियुक्ति पर ही सोनोलॉजिस्ट लगा कर के नगर वासियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को राहत पहुंचा सकते हैं। <br /><br /><strong>रात्रि में नहीं मिलती महिला चिकित्सक</strong><br />तहसील क्षेत्र की सबसे बड़ी सीएचसी में स्थानीय चिकित्सकों द्वारा मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर आॅपी सामर के आने के बाद चिकित्सालय में सुविधा विस्तार भी हुआ है तो वहीं यहां कार्यरत डॉ मोहम्मद परवेज डॉ श्याम मालव डॉ दिनेश मीणा आदि द्वारा चिकित्सालय में बेहतरीन उपचार भी दिया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी कमी यह है कि यहां महिला रोगियों को चिकित्सालय में रात्रि के समय कोई महिला चिकित्सक नहीं मिलती। दिन में भी कभी-कभी ही महिला चिकित्सक का उपचार मिल पाता है। ऐसे में क्षेत्र के बाशिंदों की पीड़ा यह है कि यदि कोई महिला गंभीर बीमार हो जाए तो उपचार तक के लिए यहां आस-पास कोई डॉक्टर तक नहीं मिलता। ऐसे में कोटा जाना महिलाओं की मजबूरी बन गई है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />सोनोलॉजिस्ट की समस्या का शीघ्र ही समाधान किया जाएगा। साथ ही महिला चिकित्सक रात्रि में नहीं रुकने की शिकायत के लिए भी संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर समाधान कराया जाएगा।<br />-रामनारायण मीणा, विधायक <br /><br />सुल्तानपुर चिकित्सालय में मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। साथ ही मरीजों को निशुल्क दवाइयां देकर के उपचार किया जा रहा है। सोनोलॉजिस्ट के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। साथ ही महिला चिकित्सक के लिए भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख दिया है।<br />-डॉक्टर ओपी शर्मा, सीएचसी प्रभारी  <br /><br />सीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं होने की शिकायतें मिली हैं। सीएचसी प्रभारी को कार्यवाही करनी चाहिए। सोनोग्राफी मशीन चलाने के लिए भी पत्र लिखा हुआ है।<br />-डॉ गिरिराज मीणा, बीसीएमओ</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 16:31:21 +0530</pubDate>
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                <title>जंगली व लावारिस जानवर उजाड़ रहे फसलें </title>
                                    <description><![CDATA[सुल्तानपुर क्षेत्र के किसानों को इन दिनों लावारिस और जंगली जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में मचान बना कर दिन रात रखवाली करनी पड़ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wild-and-unclaimed-animals-are-destroying-crops/article-7075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/myyanoj-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर क्षेत्र के किसानों को इन दिनों लावारिस और जंगली जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में मचान बना कर दिन रात रखवाली करनी पड़ रही है। वहीं सड़कों पर आवारा जानवरों के जमावड़े से एक तरफ जहां यातायात प्रभावित होता है वहीं दूसरी तरफ हर समय हादसों का डर बना रहता है।<br /><br />जानकारी के अनुसार सुल्तानपुर क्षेत्र के खेतों में फसलों की कटाई जोर-शोर से चल रही है। फसलें कटकर खेतों में पड़ी हुई हैं। क्षेत्र के खेतों में इन दिनों चने, धान, लहसुन, गेहूं आदि की फसल कट कर ढेर लगे हुए हैं। इन फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को रात भर खेतों में रहना पड़ रहा है। किसानों को आवारा जानवर से कटी हुई फसलों को बचाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। क्षेत्र में आवारा जानवरों की अधिकता को देखते हुए किसानों को खेतों में रहना पड़ रहा है और फसलों को बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। किसान इन दिनों दिन रात अपने खेतों में डटे हुए हैं। क्योंकि इन दिनों फसलों की कटाई का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। आवारा जानवर से बचाने के लिए रात्रि में भी खेतों पर ही मचान बनाकर जाते हैं और अपनी फसलों की रक्षा करते हैं। जानवरों से बचने के लिए साथ में डंडा व बैटरी लेकर रात भर खेतों की रखवाली में लगे रहते हैं। कई किसान आतिशबाजी का प्रयोग कर आवारा जानवरों को खेतों से दूर भगाने का कार्य करते हैं। <br /><br /> इसी प्रकार कस्बे के बाजार और मुख्य सड़क सहित स्टेट हाइवे 70 पर आवारा जानवरों के जमावड़े से एक तरफ जहां यातायात प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जिसमें कभी तो जानवरों को चोटिल होना पड़ता है। कभी बाइक सवारों को भी चोट लगती है। सड़कों पर जानवर बैठे रहने से जब बड़े वाहन सड़कों से गुजरते हैं तो जानवरों को भी आए दिन चोट लग जाती है। जिससे जानवरों के पैरों से खून निकलता रहता है। इसके लिए न तो कोई जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और ना ही प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कस्बे सहित क्षेत्र में गोवंश की स्थिति दयनीय होती जा रही है। क्षेत्र की सड़कों पर बाजारों में सर्वाधिक स्थानों पर गोवंश का जमावड़ा लगा रहता है। जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता है। कई बार वाहनों की टक्कर से गोवंश की मृत्यु तक हो जाती है। अनेक बार गोवंश घायल हो जाते हैं। <br /><br /><strong>गोवंश को नहीं मिल रहा अनुदान का लाभ</strong><br />व्यापार महासंघ अध्यक्ष विष्णु गोस्वामी ने कहा कि गोवंश की इस दुर्दशा को सुधारने के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन द्वारा अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। गोवंश पर दिया जाने वाला अनुदान जिसका लाभ गोवंश को पूर्णतया नहीं मिल पा रहा है। जिससे दिनोंदिन गोवंश की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कई बार अवगत करा दिया गया है लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। <br /><br /><strong>आसपास के ग्रामीण छोड़ जाते हैं जानवर</strong><br />आसपास के गांवों के किसान व अन्य लोग जानवरों को रात्रि के समय में कस्बे की सड़कों पर छोड़ जाते हैं। जिससे अधिक समस्याएं बन रही है। वर्तमान में गायों के लिए जो चारागाह की जमीनें हैं, उन पर अतिक्रमण हो गए हैं। जानवरों के चरने के लिए कोई जगह नहीं बची है। जिससे जानवरों को भी पेट भरने में समस्या आ रही है। <br /><br />नगर पालिका ने पूर्व में कस्बे की गौशाला में करीब 200  आवारा गायों को भिजवा दिया है। जिसके चलते गौशाला में क्षमता से अधिक गए हो गई हैं। गौशाला में 500 गाय रखने की क्षमता है। जबकि वर्तमान में करीब 800 गाय गौशाला में हो गई हैं। गौशाला में रखरखाव की व्यवस्थाओं के साथ ही चारे की भी कमी होने की आशंका है।<br /><strong>-रमेश खंडेलवाल, महामंत्री, श्रीगोपाल गौशाला </strong> <br /><br />कस्बे के बाजार में जितनी भी गायें थीं, उन्हें गौशाला में भिजवा दिया गया था। लेकिन आसपास के गांव से रात्रि में लोग कस्बे में गायें छोड़ जाते हैं। जिससे समस्याएं अधिक बढ़ गई है। सड़कों से आवारा गायें हटाने के लिए शीघ्र ही कोई उपाय किया जाएगा। <br /><strong>-हेमलता शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका, सुल्तानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 14:20:09 +0530</pubDate>
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