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                            <item>
                <title>केंद्र सरकार का बड़ा फ़ैसला: डीजल, विमान ईंधन के निर्यात पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया, नई दरें आज से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने डीजल के निर्यात पर उत्पाद शुल्क 50 पैसे बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। विमान ईंधन (ATF) पर भी शुल्क 3 रुपये बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है। यह बढ़ोतरी घरेलू बिक्री और पड़ोसी देशों को होने वाले निर्यात पर लागू नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/big-decision-of-central-government-excise-duty-increased-on-export/article-157100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>नई​ दिल्ली। सरकार ने डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। डीजल के निर्यात पर उत्पाद शुल्क में 50 पैसे और विमान ईंधन पर तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गयी है। वित्त मंत्रालय की सोमवार देर रात जारी अधिसूचना में बताया गया है कि नयी दरें 16 जून 2026 से लागू होंगी। निर्यात वाले डीजल पर उत्पाद शुल्क 13.5 रुपये से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। विमान ईंधन के निर्यात पर अब 9.5 रुपये की जगह 12.5 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगेगा। वहीं, पेट्रोल निर्यात पर उत्पाद शुल्क 1.50 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखा गया है।</p>
<p>इन दरों में पिछली बार 01 जून को बदलाव किये गये थे। उस समय निर्यात वाले पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1.50 रुपये, डीजल पर तीन रुपये और विमान ईंधन पर 6.50 रुपये घटाये गये थे। उत्पाद शुल्क की ये दरें घरेलू बिक्री पर लागू नहीं होंगी। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किये जाने वाले निर्यात पर भी ये दरें लागू नहीं होंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:22:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत से ब्रह्मोस खरीदेगा वियतनाम: इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम चरण में, उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण विश्वास पर आधारित</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। सिंगापुर में शांग्री-ला डायलॉग के दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इंडोनेशिया के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है। यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र और आसियान देशों के साथ भारत की मजबूत रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/vietnam-to-buy-brahmos-from-india-talks-with-indonesia-in/article-155526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/brahmos.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत के रक्षा निर्यात और दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक पहुंच से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में फिलीपींस के बाद अब  वियतनाम ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जबकि इंडोनेशिया के साथ इस संबंध में बातचीत अंतिम चरण में है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर में इंटरनेशनल इंस्टीट््यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज द्वारा आयोजित 23वें शांग्री-ला डायलॉग में एक पैनल चर्चा के दौरान यह बात कही। इस समझौते से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष का पता चलता है।   </p>
<p>सिंह ने दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रह्मोस मिसाइल के संभावित खरीदारों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण विश्वास और रणनीतिक साझेदारियों पर आधारित होता है। रक्षा सहयोग के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, कोई भी देश अपने अधिक उन्नत हथियार और प्लेटफॉर्म उन देशों को बेचेगा जो मित्र विदेशी देश हैं। आप इसे किसी विरोधी या ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं बेचेंगे जो इसे किसी विरोधी को दे सकता हो।</p>
<p>दक्षिण-पूर्व एशिया के देश विश्वसनीय भागीदार  रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को विश्वसनीय भागीदारों के रूप में देखता है और उनके साथ उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है। आसियान देशों के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता है और हम आप सभी को मित्र विदेशी देशों के रूप में देखते हैं जिनके साथ हम उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों को साझा कर सकते हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:33:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जस शो 2026 को मिला वैश्विक गौरव, हीरा उद्योग के दिग्गज मावजीभाई पटेल होंगे मुख्य अतिथि</title>
                                    <description><![CDATA[ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित JAS शो 2026 को इस बार वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। ₹20,000 करोड़ से अधिक के डायमंड एक्सपोर्ट वाले 'किरण जेम्स' के संस्थापक मावजीभाई पटेल उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस आयोजन से भारतीय जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jas-show-2026-gets-global-glory-diamond-industry-veteran-mavjibhai/article-155420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर द्वारा आयोजित देश के प्रतिष्ठित जेम्स एवं ज्वेलरी व्यापारिक आयोजन JAS शो 2026 को इस वर्ष वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। आयोजन समिति ने घोषणा की है कि विश्व के अग्रणी डायमंड उद्योगपति एवं किरण जेम्स के संस्थापक-चेयरमैन मावजीभाई पटेल उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजू मंगोड़ीवाला एवं जस शो कन्वीनर अशोक माहेश्वरी ने बताया कि मावजीभाई पटेल की उपस्थिति से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिलेगी। उन्होंने कहा कि जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग के लिए यह गौरव का विषय है कि विश्व की अग्रणी पॉलिश्ड डायमंड कंपनियों में शामिल Kiran Gems के संस्थापक इस आयोजन से जुड़ रहे हैं।</p>
<p>बताया गया कि किरण जेम्स का वार्षिक डायमंड एक्सपोर्ट 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है तथा कंपनी ने 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार से जोड़कर उद्योग जगत में विकास और विश्वास का नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 1985 में स्थापित कंपनी आज रफ डायमंड प्रोसेसिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अंतरराष्ट्रीय निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव अजय गोधा ने कहा कि मावजीभाई पटेल केवल सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि भारतीय हीरा उद्योग की प्रेरणादायक हस्तियों में से एक हैं। अपने दूरदर्शी नेतृत्व, मेहनत और नैतिक व्यापारिक मूल्यों के बल पर उन्होंने भारतीय जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:09:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एलजी ने लॉन्च की नई प्रीमियम होम अप्लायंसेज रेंज, फ्रेंच डोर फ्रिज और एआई वॉशिंग मशीन समेत कई उत्पाद पेश</title>
                                    <description><![CDATA[एलजी ने नोएडा में अपना नया होम अप्लायंसेज पोर्टफोलियो पेश किया है। एसेंशियल सीरीज के तहत एआई वॉशिंग मशीन और स्मार्ट रेफ्रिजरेटर जैसे आधुनिक उत्पाद लॉन्च किए गए। 'Make-in-India' विजन के साथ कंपनी इन उत्पादों को 22 देशों में निर्यात करेगी, जिससे भारतीय तकनीक वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/lg-launches-new-premium-home-appliances-range-introduces-many-products/article-153983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नोएडा में एल इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने वर्ष 2026 के लिए अपने होम अप्लायंसेज पोर्टफोलियो का बड़ा विस्तार करते हुए नई प्रीमियम और किफायती-प्रीमियम ‘एसेंशियल सीरीज’ बाजार में उतारी है। कंपनी ने फ्रेंच डोर रेफ्रिजरेटर, एआई डीडी वॉशिंग मशीन, कन्वर्टिबल माइक्रोवेव ओवन और ट्रू स्टीम डिशवॉशर जैसे आधुनिक उत्पाद लॉन्च किए हैं।</p>
<p>कंपनी का कहना है कि नई रेंज भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे आधुनिक तकनीक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके। एलजी ने ‘मेक-इन-इंडिया’ और ‘मेक-फॉर-इंडिया’ पहल को मजबूत करने के साथ ‘मेक-इंडिया-ग्लोबल’ रणनीति पर भी जोर दिया है। कंपनी ने बताया कि 2026 में एसेंशियल सीरीज के उत्पाद एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के 22 देशों में निर्यात किए जाएंगे।</p>
<p>नई रेंज में 225 लीटर से 276 लीटर तक के रेफ्रिजरेटर, 8 से 12 किलोग्राम क्षमता वाली वॉशिंग मशीन, कन्वर्टिबल माइक्रोवेव ओवन और प्रीमियम फ्रेंच डोर फ्रिज शामिल हैं। कंपनी ने 574 लीटर से 610 लीटर क्षमता वाले फ्रेंच डोर रेफ्रिजरेटर भी पेश किए हैं, जिनमें ऑटो आइस मेकर और स्मार्ट कूलिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं।</p>
<p>एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर होंग जू जीयोन ने कहा कि भारत कंपनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार है और नई रेंज भारतीय उपभोक्ताओं की जीवनशैली और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी हर बजट के ग्राहकों के लिए आधुनिक और भरोसेमंद तकनीक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 10:15:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तानी विपक्षी नेता अचकज़ई का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान के साथ बातचीत का किया आह्वान, बोले-पड़ोसी देश के साथ तनावपूर्ण संबंध राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं की जड़</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के विपक्षी नेता महमूद खान अचकज़ई ने सरकार से अफगानिस्तान के साथ तत्काल वार्ता बहाल करने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि पड़ोसी देश के साथ बिगड़ते संबंधों और आर्थिक गलतियों के कारण पाकिस्तान का निर्यात बाजार बर्बाद हो रहा है। अचकज़ई के अनुसार, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय शांति के लिए नीतियों में सुधार अनिवार्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-economic-crisis-pakistani-opposition-leader-achakzai-made-a/article-152834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mahmood-khan-achakzai.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेएमएपी) के अध्यक्ष महमूद खान अचकज़ई ने सरकार से अफगानिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पड़ोसी देश के साथ तनावपूर्ण संबंध एवं राजनीतिक गलत अनुमान पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं को और बढ़ा रहे हैं। यह जानकारी बुधवार को अफ़गान समाचार पोर्टल एरियाना न्यूज़ ने दी।</p>
<p>रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि श्री अचकज़ई का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक कठिनाइयों की जड़ें सरकार की उन गलत नीतियों में निहित हैं जिनके कारण अफगानिस्तान एक आर्थिक साझेदार नहीं रहा है, जो हाल तक पाकिस्तानी वस्तुओं के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार था।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, श्री अचकज़ई ने कहा कि अफगानिस्तान अभी भी पाकिस्तानी सामानों में बहुत रुचि रखता है और उन्होंने बल देकर कहा कि इस्लामाबाद की नीतियों ने उसके अपने आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया है। खबरों के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व से आर्थिक दबावों एवं क्षेत्रीय अस्थिरता दोनों से निपटने के लिए संवाद और अपनी नीतियों में सुधार करते हुए व्यावहारिक समाधान खोजने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:35:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में हिंसा की आंच में झुलसा हाड़ौती का लहसुन</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश में लहसुन का काफी मात्रा में निर्यात किया जाता है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-garlic-scorched-in-the-heat-of-violence-in-bangladesh/article-87199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में लहसुन का बम्पर उत्पादन होता है। अपने बेहतरीन स्वाद के चलते यहां का लहसुन काफी मात्रा में बांग्लादेश निर्यात किया जाता है। इससे स्थानीय किसानों को भाव भी अच्छा मिलता है। अब वहां की राजनीतिक अस्थिरता के कारण लहसुन उत्पादक किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। बांग्लादेश में हिंसा होने के कारण लहसुन का निर्यात बंद हो गया है। भारत-बांग्लादेश का घोजाबाड़ा बार्डर बंद हो गया है। इस कारण लहसुन सहित अन्य भारतीय उत्पादों का निर्यात नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति अगर लंबे समय तक कायम रही तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। निर्यात बंद होने से हाड़ौती की मंडियों में लहसुन के भाव प्रभावित होने लगे हैं। </p>
<p><strong>ऐसे पड़ेगा किसानों की कमाई पर असर</strong><br />लहसुन के थोक व्यापारियों के अनुसार बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी रहने और सरकार के तख्तापलट से भारत के लहसुन उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि बांग्लादेश भारतीय लहसुन सबसे बड़ा आयातक  देश है। विश्व के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश में लहसुन का काफी मात्रा में निर्यात किया जाता है। व्यापारियों के अनुसार हाड़ौती क्षेत्र से करीब 15 से 20 टन लहसुन बांग्लादेश में भेजा जाता है। ऐसे में यदि लम्बे समय तक निर्यात बंद रहा तो स्थानीय स्तर पर लहसुन के भाव कम हो जाएंगे। इससे किसानों की कमाई पर असर पड़ेगा। मांग नहीं होने से भावों में कमी होती चली जाएगी।</p>
<p><strong>हिंसा से निर्यात को लगा झटका</strong><br />थोक फलसब्जी मंडी के प्रमुख व्यापारी भूपेन्द्र सोनी ने बताया कि बांग्लादेश में लहसुन के मीडियम क्वालिटी के माल की काफी डिमांड है। पूर्व में लहसुन के छोटे माल की डिमांड देश के कुछ राज्यों में ही बनी हुई थी। कुछ सालों से बांग्लादेश में भी इसकी मांग होने से निर्यात की मात्रा बढ़ा दी गई थी। अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश में सबसे ज्यादा लहसुन जा रहा था। अब बांग्लादेश में हिंसा के कारण सभी बार्डर सील कर दिए गए हैं। बांग्लादेश के कस्टम विभाग का सिस्टम काम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में लहसुन और अन्य भारतीय उत्पादों का एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में सभी निर्यातक बांग्लादेश के हालात पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p><strong>मंडियों में भाव होने लगे प्रभावित</strong><br />थोक व्यापारियों के अनुसार वर्तमान में भामाशाहमंडी में लहसुन की 3500 से 4500 कट्टे और थोक फल सब्जी मंडी में 1500 से 2000 कट्टों की आवक हो रही है। पूर्व में लहसुन के भाव 12 हजार से 22 हजार के बीच चल रहे थे। कुछ दिनों से बांग्लादेश में निर्यात बंद होने के कारण भावों में कमी आई है। अभी मंडी में लहसुन के भाव 11 हजार से 20 हजार के बीच बोले जा रहे हैं। वहीं किलो के हिसाब से बात की जाए तो भाव 110 से 200 रुपए किलो के बीच हैं। कुछ माह पहले लहसुन के भाव तीन सौ से चार सौ रुपए किलो तक पहुंच गए थे। उस समय बांग्लादेश में काफी मात्रा में लहसुन का निर्यात हो रहा था।</p>
<p>पिछले साल की तुलना में इस साल किसानों को लहसुन के भाव अच्छे मिल रहे हैं। कई किसानों ने भावों में और बढ़ोतरी को लेकर माल का स्टोरेज कर रखा है। विदेश में निर्यात बंद होने से यहां पर भाव कम होने लगे हैं। आगामी दिनों में किसानों को नुकसान हो सकता है।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र से करीब 15 से 20 टन लहसुन बांग्लादेश में भेजा जाता है। ऐसे में यदि लम्बे समय तक निर्यात बंद रहा तो स्थानीय स्तर पर लहसुन के भाव कम हो जाएंगे। इससे किसानों को नुकसान होगा। बांग्लादेश में पूरी तरह से निर्यात बंद हो चुका है।<br /><strong>- शब्बीर वारसी, प्रमुख व्यापारी, थोक फलसब्जी मंडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Aug 2024 17:40:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अप्रैल 2024 में निर्यात 1.06 प्रतिशत बढ़कर 34.99 अरब डॉलर रहा</title>
                                    <description><![CDATA[चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में देश का कुल निर्यात (माल और सेवाएँ) अप्रैल 2023 के 60.40 अरब डॉलर की तुलना में 6.88 प्रतिशत बढ़कर 64.56 अरब डॉलर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/exports-increased-by-106-percent-to-3499-billion-in/article-78124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/export.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद चालू वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में भारत का निर्यात बढ़कर 34.99 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो अप्रैल 2023 में हुये निर्यात से 1.06 प्रतिशत अधिक है। </p>
<p>जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2024 में देश का आयात पिछले साल के 49.06 अरब डॉलर की तुलना में बढ़कर 54.09 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिसके कारण व्यापार घाटा इस माह में 19.1 अरब डॉलर रहा है।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 में सेवा निर्यात 29.57 अरब डॉलर रहा, जबकि अप्रैल 2023 में यह 25.78 अरब डॉलर था।</p>
<p>चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में देश का कुल निर्यात (माल और सेवाएँ) अप्रैल 2023 के 60.40 अरब डॉलर की तुलना में 6.88 प्रतिशत बढ़कर 64.56 अरब डॉलर हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2024 16:51:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गैर-बासमती चावल के निर्यात पर रोक, भाव में 3 से 5 रुपए तक की आई गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[गैर-बासमती सफेद चावल की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ban-on-export-of-non-basmati-rice--prices-fall-by-rs-3-to-rs-5/article-53780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ger-basmati.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश ने 20 जुलाई से गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद से ही चावल के दाम में 3 से 5 रुपए किलो तक दाम में गिरावट आई। केंद्र ने यह कदम घरेलू बाजार में कीमतें थामने के लिए उठाया है। हालांकि कोटा में बासमती चावल का ही निर्यात होता है। गैर बासमती चावल निर्यात नहीं होने से यहां पहले चावल के दाम अन्य राज्यों से कम है। प्रतिबंध के बाद टूटे चावल के दाम तीन से चार रुपए की गिरावट आई है। बासमती चावल के एक्सपोर्ट करने वाले व्यापारियों का कहना है कि  इस फैसले से दुनियाभर के देशों में चावल की कीमतें बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया।  इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा अमेरिका और कनाडा में रहने वाले भारतवंशियों पर। उन्होंने चावल की बोरियां इकट्ठी करनी शुरू कर दी हैं। उल्लेखनीय है कि भारत दुनियाभर में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। लिहाजा इसके किसी भी फैसले से अनाज की कीमतों में भारी असर पड़ने की आशंका रहती है।</p>
<p><strong>गैर-बासमती चावल को लेकर ये लिया फैसला</strong><br />बासमती चावल के निर्यातक निलेश पटेल ने बताया कि कोटा से गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात नहीं होता है। इसलिए इसकी कीमतों यहां ज्यादा अंतर नहीं आया है। कोटा में तीन से पांच रुपए तक गिरावट आई है। सरकार ने गैर बासमती चावल को लेकर विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना जारी की । इसके मुताबिक, गैर-बासमती सफेद चावल की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति दी है। अधिसूचना से पहले जहाजों में जिस चावल की लोडिंग शुरू हो गई थी, तो उसके निर्यात की मंजूरी दी गई। साथ ही उन मामलों में भी निर्यात हो सकेगा।</p>
<p><strong>इसलिए लगाई सरकार ने यह पाबंदी </strong><br />चावल होलेसेल व्यापारी कालूराम मेवाडा ने बताया कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनावों और उसके बाद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश में अधिक महंगाई के जोखिम से बचना चाहती है। इसके अलावा खराब मौसम की वजह से प्रमुख उत्पादक राज्यों में चावल की बुवाई पर असर पड़ा है। इसलिए गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। आने वाले त्योहारी सीजन में चावल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। </p>
<p><strong>इस बार कम हुई धान की बुवाई</strong><br />14 से 31  जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ की बुवाई दो फीसदी कम हुई है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश की वजह से फसल की कम बुवाई हुई है।सरकार के फैसले से 80 फीसदी चावल का निर्यात प्रभावित हो सकता है। इससे देश में तो चावल की कीमत में गिरावट आएगी। </p>
<p><strong>इन देशों में होता है निर्यात </strong><br />चावल निर्यातक निलेश पटेल ने बताया कि भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। वहीं देश से निर्यात होने वाले कुल चावल में गैर-बासमती सफेद चावल की हिस्सेदारी लगभग 25 फीसदी है। जानकारी के मुताबिक, भारत से गैर-बासमती सफेद चावल का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2022-23 में 42 लाख डॉलर के करीब था। इससे पिछले साल में निर्यात 26.2 लाख डॉलर बताया गया था। भारत प्रमुख रूप से थाईलैंड, इटली, स्पेन, श्रीलंका और अमेरिका को गैर-बासमती चावल निर्यात करता है।  चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कुल करीब 15.54 लाख टन सफेद चावल का निर्यात हुआ था। एक साल पहले समान अवधि में 11.55 लाख टन की तुलना में इसमें 35 प्रतिशत की तेजी आई है। घरेलू बाजार में चावल की खुदरा कीमतें एक साल में 11.5 प्रतिशत व एक माह में 3 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। 2022-23 में इस चावल के निर्यात का मूल्य 42 लाख डॉलर था। उसके पहले के साल में 26.2 लाख डॉलर था।</p>
<p><strong>इसका यह हो रहा असर</strong><br />गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध से देश में उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम होंगी। गैर-बासमती चावल (उसना चावल) और बासमती चावल की निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं करने को लेकर कहा गया कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाभकारी कीमतों का लाभ मिलता रहेगा।  उपभोक्ता मामलों के विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई से 31 जुलाई के बीच कई शहरों में एक किलो चावल की कीमतों में एक से लेकर पांच रुपए तक की कमी आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 15:15:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>6 साल में 31 हजार करोड़ निर्यात बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान से वित्तीय वर्ष 2017-18 में 46 हजार 476 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जो कि वर्ष 2022-23 तक बढ़कर 77 हजार 771 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/31-thousand-crore-units-increased-in-6-years/article-49910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों, निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों एवं अभियानों की सफल क्रियान्विति से निर्यातकों और निर्यात को गति मिली है। राजस्थान से वित्तीय वर्ष 2017-18 में 46 हजार 476 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जो कि वर्ष 2022-23 तक बढ़कर 77 हजार 771 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। निर्यात में गत 6 वर्षों में 31 हजार करोड़ रुपए से अधिक की बढ़ोतरी प्रदेश के भविष्य की सुखद तस्वीर है। इसमें निर्यात प्रोत्साहन प्रक्रिया व दस्तावेजीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना का अहम योगदान रहा है। वर्ष 2012 में शुरू इस योजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निर्यात क्षेत्र में कॅरिअर बनाने की इच्छा रखने वाले उद्यमियों को निर्यात प्रक्रिया एवं दस्तावेजों तथा विश्व के बाजारों की जानकारी दी जाती हैै।<br /><br /><strong>प्रशिक्षण में पूरी प्रक्रिया की जानकारी</strong><br />योजना का संचालन राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन परिषद् (आरईपीसी) के माध्यम से किया जा रहा है। इससे युवा निर्यातकों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वे राज्य की औद्योगिक प्रगति में योगदान दे सकेंगे। नए निर्यातकों को शिपिंग के साथ आॅनलाइन निर्यात का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें इम्पोर्ट एक्सपोर्ट कोड, लाइसेंस फॉर एक्सपोर्ट, जीएसटी, प्रोक्योरमेंट, कस्टम क्लीयरनेंस, पेमेंट प्रोसेस, लैटर आॅफ  क्रेडिट, बैंकिंग डिलिंग और फॉॅलोअप तक का प्रशिक्षण दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/31-thousand-crore-units-increased-in-6-years/article-49910</link>
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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 10:46:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नॉर्थ कोरिया की एक्सपोर्ट लिस्ट में हैं गुलाम </title>
                                    <description><![CDATA[नॉर्थ कोरिया टॉप पर है, जहां हजार में से 104.6 लोग गुलाम हैं, यानी हर 10 में से एक शख्स गुलामी कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/slaves-are-in-export-list-of-north-korea/article-47894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी-(16).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स में उन देशों की लिस्ट बनाई गई, जहां मॉडर्न गुलाम रहते हैं। ये ऐसे लोग हैं, जिनके काम के कोई घंटे नहीं होते, न ही कोई पक्की तनख्वाह होती है। इंडेक्स की मानें तो दुनिया में लगभग 5 करोड़ लोग फिलहाल स्लेव की तरह जी रहे हैं। इसमें नॉर्थ कोरिया टॉप पर है, जहां हजार में से 104.6 लोग गुलाम हैं, यानी हर 10 में से एक शख्स गुलामी कर रहा है।</p>
<p><strong>इन देशों में भी हैं मॉडर्न स्लेव </strong><br />उत्तर कोरिया के बाद एरिट्रिया और मॉरीतानिया का नंबर है। मॉरीतानिया अफ्रीकी देश है, जहां अस्सी के दशक में ही स्लेवरी को गैरकानूनी माना गया। इनके बाद यूएई, कुवैत और सऊदी अरब का भी नंबर है। बेहद धनवान इन देशों के अपने नागरिक बढ़िया हालातों में रह रहे हैं, लेकिन बाहर से जा रहे मजदूरों को यहां गुलाम की तरह रखा जाता है।</p>
<p><strong>मजदूरों को निर्यात कर रहा देश</strong><br />नॉर्थ कोरिया में स्लेवरी की हालत ऐसी है कि वो अपने देश में ही लोगों का शोषण नहीं करता, बल्कि सस्ते मजदूर बनाकर उनका एक्सपोर्ट भी करता है। सबसे पहले साल 2016 में डेटाबेस सेंटर फॉर नॉर्थ कोरियन ह्यूमन राइट्स ने इसका खुलासा किया। इससे पहले कई देशों में मजदूरों की अमानवीय हालातों में मौत हुई थी, जिसके बाद जांच हुई। उसने बताया कि 50 हजार से ज्यादा कोरियाई मजदूर रूस भेजे गए, जहां से वे भारी रकम कमाकर सरकारी खजाना भर रहे हैं। </p>
<p><strong>नागरिक बनाए जा रहे कमोडिटी</strong><br />इसके अलावा वे पोलैंड, कतर, यहां तक कि यूरोपियन यूनियन के देशों में भी भेजे जा रहे हैं। साल 2012 में किम जोंग उन के सत्ता में आने के बाद से ये चलन शुरू हुआ। नॉर्थ कोरिया पर चूंकि काफी सारी रोक लगी हुई हैं, ऐसे में उसके पास पैसे कमाने के ज्यादा रास्ते नहीं हैं। इसी के तोड़ की तरह इस देश के तानाशाह ने अपने ही लोगों को कमोडिटी बना दिया। </p>
<p><strong>किन्हें गुलाम बनाया जाता है</strong><br />भयंकर गरीबी और सख्ती में जी रहे इस देश से अक्सर लोगों के भागने की खबर आती है। वे सीमा पार करके दक्षिण कोरिया, अमेरिका या किसी ऐसे देश पहुंच जाते हैं, जहां वे चैन से रह सकें। भागने वाले तो बच जाते हैं, लेकिन पीछे छूटा उनका परिवार मुसीबत में आ जाता है। असल में किम सरकार ऐसे ही लोगों को टारगेट करती है। वो उन्हें सजा के तौर पर बंधक बना लेती है और जल्दी ही गुलाम बनाकर अपने देश में रखती है या विदेशों में एक्सपोर्ट कर देती है। </p>
<p><strong>ऐसे काम करता है ट्रैप</strong><br />यूरोपियन अलायंस फॉर ह्यूमन राइट्स इन नॉर्थ कोरिया की मानें तो विदेश भेजने के लिए उन लोगों को चुना जाता है, जो शादीशुदा हों और जिनके बच्चे भी हों। इन लोगों के भागने का डर कम होता है क्योंकि ये रिस्क नहीं ले पाते। दूसरा, पुरुष और महिलाओं दोनों को अलग-अलग कामों में लगाया जाता है। पुरुषों को अक्सर कंस्ट्रक्शन साइट पर भेज दिया जाता है, जबकि महिलाएं सिलाई-बुनाई, खिलौने बनाने जैसे काम में लगाई जाती हैं। सी-फूड के काम के लिए भी इनका इस्तेमाल होता है। गल्फ देशों में 6 हजार से ज्यादा नॉर्थ कोरियाई मजदूर गुलामी की हालत में रह रहे हैं। कतर में वर्ल्ड कप के दौरान स्टेडियम में कंस्ट्रक्शन का काम भी इन्हीं मजदूरों ने किया था। तब ये खबर मीडिया में आई थी, जिसपर नॉर्थ कोरिया का जवाब था कि वे लोग अपनी मर्जी से कतर में काम करने गए हैं। इसके बाद भी इंटरनेशनल दबाव बना, जिसके बाद खुद कतर उत्तर कोरियाई लोगों को गुलाम बनाने से बचने लगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2023 10:30:01 +0530</pubDate>
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                <title>वस्तु निर्यात मार्च में 13.88 प्रतिशत गिरा, कुल वार्षिक निर्यात 770 अरब डालर के पार</title>
                                    <description><![CDATA[ वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच  भारत से वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात मार्च 2023 में सालाना आधार पर 13.88 प्रतिशत गिरकर 38.38 अरब डॉलर रहा। जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में  44.57 अरब  डॉलर का निर्यात हुआ था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/goods-exports-fell-by-1388-percent-in-march-total-annual/article-42707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/export.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच  भारत से वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात मार्च 2023 में सालाना आधार पर 13.88 प्रतिशत गिरकर 38.38 अरब डॉलर रहा। जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में  44.57 अरब  डॉलर का निर्यात हुआ था। मार्च 2023 में समाप्त पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात (माल और  सेवाएं) सालाना आधार पर 13.84 प्रतिशत बढ़कर  770.18 अरब डॉलर के बराबर रहा  जो वित्त वर्ष 2021-22 में 676.53 अरब  डॉलर था।</p>
<p> मार्च माह में  निर्यात में यह गिरावट प्रमुख विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के वातावरण ओर मांग की कमजोरी को दर्शाती है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार  मार्च 2023 में कुल वाणिज्यक  आयात 58.11 अरब डॉलर था। इस तरह मार्च माह में व्यापार घाटा यानी निर्यात की तुलना में आयात की बेशी 19.73 अरब डालर के बराबर रहा।</p>
<p> वाणिज्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में देश माल का निर्यात 6.03 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 447.46 अरब  डॉलर के बराबर रहा जबकि वर्ष 2021-22 में 422 अरब डालर का निर्यात हुआ था। वित्त वर्ष 2022-23 में सेवाओं का निर्यात भी 27.16 प्रतिशत बढ़कर 323 अरब डॉलर हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2221-22 में सेवा निर्यात 254 डॉलर था। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने 13 अप्रैल को कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में कुल निर्यात बढ़कर 770 अरब डॉलर हो गया, जो सरकार द्वारा निर्धारित वार्षिक लक्ष्य को पार कर गया। बर्थवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में कुल निर्यात का लक्ष्य 750 अरब डालर था। इस तरह उपलब्धि लगभग 20 अरब डालर ऊंची रही।</p>
<p>भारत ने इससे पिछले वित्त वर्ष में कुल मिलाकर 676 अरब डालर के माल और सेवाओं का निर्यात किया था। वाणिज्य सचिव ने कहा कि वैश्विक बाजार में मंदी की स्थिति और प्रतिकूल हवाओं के बावजूद, भारत ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान कुल निर्यात में सालाना आधार पर 94 अरब डॉलर की छलांग लगाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Apr 2023 19:46:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल चेयरमैन ने ली जोधपुर में बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राजीव अरोडा ने बताया कि 20 से 23 मार्च को राजस्थान इन्टरनेशनल एक्सपो, ट्रेड फेशिलेटेशन सेन्टर, ईपीसीएच बोरानाडा औद्योगिक क्षेत्र जोधपुर में आयोजित किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-export-promotion-council-chairman-took-meeting-in-jodhpur/article-28873"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/untitled-design-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयपुर।</span> <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आगामी मार्च माह में आयोजित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले से जुड़ी तैयारियों के लिए राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद एवं राजस्थान लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राजीव अरोडा की अध्यक्षता में जोधपुर के बोरानाडा में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान उद्योग आयुक्त महेंद्र पारख सहित आला अधिकारी गण उपस्थित रहे। अरोड़ा ने बताया कि </span>20 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से </span>23 <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मार्च को राजस्थान इन्टरनेशनल एक्सपो</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रेड फेशिलेटेशन सेन्टर</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईपीसीएच बोरानाडा औद्योगिक क्षेत्र जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। मेले में जोधपुर से निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पाद हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर के अलावा कृषि प्रसंस्करण उत्पाद</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पत्थर प्रसंस्करण उत्पाद</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वस्त्र</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इंजीनियरिंग उत्पाद</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्टील बर्तन आदि का भी प्रदर्शन किया जायेगा।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य महेन्द्र कुमार पारख ने बताया कि उद्योग विभाग</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हस्तशिल्प निर्यात संवर्द्धन परिषद</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिला प्रशासन जोधपुर एवं उद्यमी एवं निर्यातक संगठन संयुक्त रूप से इस आयोजन को सफल क्रियान्वयन के प्रयास करेंगे एवं इस आयोजन को नियमित बनाने के लिए प्रथम आयोजन उत्कृष्ठ रूप से क्रियान्वित करेंगे।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संभागीय आयुक्त कैलाश चन्द्र मीणा ने बताया कि जिला प्रशासन मेले के आयोजन के लिए सड़को के विशेष रख-रखाव कर मेला अवधि में शहर के सौन्दर्यकरण पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। जिला कलक्टर जोधपुर हिमांशु गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक कार्य के सफल निष्पादन के लिए नोडल अधिकारियो को नियुक्त किया जायेगा एवं जिला प्रशासन इस आयोजन को उत्कृष्ठ स्वरूप देने के लिये हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।महावीर प्रताप शर्मा उपाध्यक्ष राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद ने बताया कि परिषद द्वारा प्रारंभिक तैयारियां पूर्ण कर ली गई है एवं आयोजन की प्रारंभिक रुपरेखा प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर</span>  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुनील परिहार</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वतंत्र निदेशक रीको</span>, <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संयुक्त निदेशक</span>  <span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पीआर शर्मा सहित भारी संख्या में उद्यमी एवं निर्यातक उपस्थित थे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Nov 2022 16:31:35 +0530</pubDate>
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