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                <title>financial year - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>financial year RSS Feed</description>
                
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                <title>सैलरी क्रेडिट होने से लेकर ATM से पैसे निकालने तक...01 अप्रैल 2026 से आम आदमी की जेब पर पड़ेगा ये असर, पढ़ें किन-किन नियमों में हुआ बदलाव ? </title>
                                    <description><![CDATA[1 अप्रैल 2026 से नया 'टैक्स ईयर' शुरू हो रहा है। आयकर कानून सरल होकर अब 12 लाख तक जीरो टैक्स की राहत देगा। डिजिटल भुगतान के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा, जबकि पैन कार्ड के नियम और सख्त होंगे। शेयर बाजार, रसोई गैस और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के नए प्रावधान आम आदमी की वित्तीय योजना बदल देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/many-rules-will-change-from-april-1-2026-from-tax/article-148457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rules-change.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में 1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ कई अहम नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम नागरिकों की जेब, टैक्स प्लानिंग, डिजिटल लेनदेन और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा। सरकार और नियामक संस्थाओं द्वारा लागू किए जा रहे ये नए प्रावधान सिस्टम को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।</p>
<p>सबसे बड़ा बदलाव आयकर कानून में देखने को मिलेगा। नए इनकम टैक्स कानून के तहत पुराने 1961 के कानून को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है, जिससे कानून को अधिक सरल बनाया गया है। ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह अब केवल ‘टैक्स ईयर’ की अवधारणा लागू होगी। नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य टैक्स का प्रावधान किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन और अन्य भत्तों के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। नए इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, फॉर्म 16 और 16A की जगह नए फॉर्म 130 और 131 आएंगे। </p>
<p>PAN कार्ड से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। अब केवल आधार के आधार पर PAN बनवाना या अपडेट कराना संभव नहीं होगा। अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। बड़े वित्तीय लेनदेन में PAN की अनिवार्यता और रिपोर्टिंग भी कड़ी की जा रही है।</p>
<p>डिजिटल पेमेंट को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू होंगे। अब केवल OTP के जरिए ट्रांजेक्शन पूरा नहीं होगा, बल्कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य किया गया है। इसमें PIN, बायोमेट्रिक या डिवाइस वेरिफिकेशन जैसे अतिरिक्त सुरक्षा उपाय शामिल होंगे, जिससे साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने की कोशिश की जाएगी।</p>
<p>1 अप्रैल 2026 से देशभर के नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर FASTag से जुड़े नए नियमों भी बदलाव होगा। ​नए नियमों के अनुसार, निजी वाहनों के लिए FASTag वार्षिक पास की कीमत बढ़ाकर ₹3,075 कर दी गई है, जिसकी वैधता एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक रहेगी। 01 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश भुगतान पूरी तरह बंद हो सकता है, ताकि भुगतान केवल FASTag या UPI से ही हो। इसके साथ ही यदि कोई व्यक्ति बिना FASTag के भुगतान करता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं, नए नियमों के अनुसार अनपेड टोल पर भी काफी सख्ती होगी और तय समय में भुगतान नहीं करने पर वाहन संबंधी रिकॉर्ड भी प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p>ईंधन और रसोई गैस की कीमतों में भी बदलाव संभव है। तेल कंपनियां हर महीने की तरह 1 अप्रैल को नई दरें घोषित करेंगी। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते LPG, CNG, PNG और हवाई ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर परिवहन और महंगाई पर पड़ेगा।</p>
<p>इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए भी नए नियम लागू होंगे। शेयर बायबैक को अब कैपिटल गेन माना जाएगा और F&amp;O ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाया गया है। वहीं नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बात यह है कि नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल सेटलमेंट अब दो दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।</p>
<p>01 अप्रैल 2026 से बैंकिंग और ATM नियमों में भी बदलाव होने वाला है। नए नियमों के अनुसार, HDFC Bank, PNB, Bandhan Bank आदि में ATM फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट या चार्जेस में काफी बड़ा बदलाव होगा। इसके अलावा बड़े कैश ट्रांजेक्शन पर PAN रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग को भी पहले से कही ज्यादा सख्त किया गया है।</p>
<p>1 अप्रैल 2026 से भारतीय रेलवे के भी नियमों में बदलाव होने जा रहा है। ये बदलाव मुख्य रूप से दलालों (टाउट्स) द्वारा टिकट होर्डिंग और लास्ट मिनट कैंसिलेशन आदि की परेशानी को रोकने ओर यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित ये नियम 1 से 15 अप्रैल 2026 तक पूरे देश में लागू होंगे।</p>
<p>नए नियमों के अनुसार, अब टिकट कैंसिलेशन के समय के आधार पर यात्रियों को रिफंड मिलेगा। नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से अधिक पहले टिकट कैंसिल करता है, तो उसे अधिकतम रिफंड मिलेगा। इस स्थिति में या​त्री से केवल न्यूनतम फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज ही लिया जाएगा। वहीं, अगर टिकट 72 घंटे से 24 घंटे के बीच कैंसिल किया जाता है, तो कुल किराए का लगभग 25 प्रतिशत ही काटा जाएगा। इसके अलावा, 24 घंटे से 8 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर करीब 50 प्रतिशत राशि काटी जाएगी। सबसे सख्त नियम उन यात्रियों के लिए हैं जो आखिरी समय में टिकट कैंसिल करते हैं। यदि ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द किया गया, तो यात्रियों को कोई भी रिफंड नहीं दिया जाएगा।</p>
<p>भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बोर्डिंग स्टेशन से जुड़े नियमों में भी कई अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के अनुसार, पहले ट्रेन के प्रस्थान से 4 घंटे पहले तक नो-रिफंड विंडो लागू होती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 8 घंटे पहले कर दिया गया है, जिसका मतलब ये ​है कि अगर कोई यात्री ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द करता है, तो उसे कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही रेलवे ने यात्रियों को राहत देते हुए बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा को भी आसान बना दिया है। इन नए नियमों के अनुसार, अब यात्री ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:58:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राजस्थान में 10 हजार करोड़ का होगा पहला ग्रीन बजट</title>
                                    <description><![CDATA[जलवायु परिवर्तन-ग्रीन हाऊस गैस इफेक्ट घटाने, तापमान में बढ़ोतरी रोकने पर बनेगी कार्ययोजना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-will-have-its-first-green-budget-of-rs-10/article-89439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(14).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा में अगले वित्त वर्ष में पहला ग्रीन बजट आएगा। इसके लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों को परिपत्र जारी कर ग्रीन ग्रोथ को कार्ययोजना बनाने के लिए मुख्य सचिव सुधांश पंत की मंजूरी के बाद वित्त (बजट) विभाग के शासन सचिव देबाशीष पृष्टी ने प्रारम्भिक गाइडलाइन जारी कर दी है।</p>
<p>इसके तहत प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को रोकने, ग्रीन हाऊस गैसों के प्रभाव को कम करने, मरूस्थलीकरण एवं भूमि क्षरण की रोकथाम तथा तापमान में हो रही बढ़ोतरी को रोककर पर्यावरण प्रबन्धन पर फोकस किया गया है। उच्चस्थ सूत्रों के अनुसार राजस्थान में आगामी ग्रीन बजट कुल बजट का करीब 4 फीसदी होगा। वित्त विभाग के अधिकारी इस पहले ग्रीन बजट को अनुमानत: करीब 10 हजार करोड़ रुपए का मान रहे हैं। बिहार पहला राज्य है जिसने पहला ग्रीन बजट 2020-21 में पेश किया था, गत वित्तीय वर्ष में इसके लिए 9920.77 करोड़ रूपए यानी कुल बजट का 3.79 फीसदी बजट रखा गया है।  </p>
<p><strong>देश में 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य</strong><br />भारत सरकार ने  वर्ष 2070 तक पर्यावरण संरक्षण-प्रबन्धन और शून्य कॉर्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा गया है। 30 फीसदी मीथेन उत्सर्जन कम करने, 50 फीसदी तक रिन्यूअल एनर्जी पर निर्भरता बढ़ाने का प्रयास है। इस समयावधि में पर्यावरण पर पड़ते दुष्प्रभावों को रोकने के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर निवेशित करने का लक्ष्य है। </p>
<p><strong>पर्यावरण विभाग होगा नोडल विभाग </strong><br />मुख्य सचिव सुधांश पंत ने प्रदेश में ग्रीन बजट के लिए पर्यावरण विभाग को इसका नोडल विभाग बनाने के आदेश जारी किए हैं। पर्यावरण विभाग ग्रीन बजट को अन्य विभागों की प्लानिंग से कोर्डिनेशन भी करेगा।</p>
<p><strong>विभागीय इन तय बिन्दुओं पर प्लानिंग बनाएंगे </strong></p>
<ul>
<li>प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं प्रबन्धन</li>
<li>ग्रीन आधारभूत संरचनाओं का निर्माण, जैसे सौर ऊर्जा सयंत्र, ग्रीन भवन, बैटरी चलित सार्वजनिक परिवहन इत्यादि। </li>
<li>जल संसाधन क्षेत्र संरक्षण</li>
<li>जलवायु परिवर्तन शमन तथा अनुकूलन</li>
<li>वायु तथा जल प्रदूषण नियंत्रण</li>
<li>अपशिष्ट प्रबन्धन </li>
<li>संधारणीय भूमि उपयोग और जलगृहण एवं मृदा संरक्षण</li>
<li>जलवायु स्मार्ट कृषि</li>
<li>मरूस्थलीकरण एवं भूमि क्षरण रोकथाम</li>
<li>जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी संरक्षण</li>
<li>ऐसी योजनाएं जिससे पर्यावरण में सुधार हो</li>
<li>कार्बन उत्सर्जन तथा ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना</li>
<li>ग्रीन ग्रोथ से संबंधित अन्य व्यय </li>
</ul>
<p>लाइफ स्टाइल फॉर क्लाइमेट की थीम होनी चाहिए। प्रदेश में मरूस्थल बढ़ रहा है, कभी बाढ़ तो कभी सूखा पड़ रहा है। शहर-गांव में स्थानीय माइक्रो क्लाइमेट बदल रहा है। ग्रीन बजट का मतलब नेचुरल रिर्सोसेज की खपत नहीं बचत हो तो सार्थक प्रयास होंगे। <br />-अनिल मेहता, पर्यावरणविद्</p>
<p>बजट बेहतर प्रयास है, लेकिन सरकार के साथ जनता को सहभागी बनना होगा। जो पर्यावरण असंतुलन करे, उस पर पैनल्टी इम्पोज भी जरूरी है। <br />- सुरेन्द्र सिंह चौहान, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एचओडी, आरयू।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Sep 2024 11:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्थिक गतिविधियों में तेजी जारी, वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत</title>
                                    <description><![CDATA[विनिर्माण और खनन गतिविधियों में आई तेजी के बल पर वित्त वर्ष 2023-24 में भारत 8.2 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के साथ दुनिया में सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था बना गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/economic-activity-continues-to-accelerate-gdp-growth-82-percent-in/article-80061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/gdp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विनिर्माण और खनन गतिविधियों में आई तेजी के बल पर वित्त वर्ष 2023-24 में भारत 8.2 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के साथ दुनिया में सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था बना गया। वित्त वर्ष 2022-23 में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि दर रही थी। </p>
<p>मार्च 2024 में समाप्त चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है जबकि मार्च 2023 में समाप्त तिमाही में यह 6.2 प्रतिशत रही थी। जीडीपी वृद्धि के लगभग सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया भर की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से इस मामले में आगे निकल गयी है।</p>
<p>राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में नॉमिनल जीडीपी में 9.6 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई है, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में 14.2 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई थी। विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में इस दौरान 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है जबकि पिछले वित्त वर्ष में शून्य से 2.2 प्रतिशत नीचे रहा था। इसी तरह से खान एवं उत्खनन क्षेत्र का प्रदर्शन भी बेहतर रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में यह क्षेत्र 1.9 प्रतिशत की गति से बढ़ा था जो इस वर्ष मार्च में समाप्त तिमाही में बढ़कर 7.1 प्रतिशत पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2022-23 में देश का जीडीपी 16071429 करोड़ रुपये रहा था जो इस वर्ष 8.2 प्रतिशत बढ़कर 17381722 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। </p>
<p>वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 6.2 प्रतिशत रही थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 May 2024 18:58:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Stock Market : वित्त वर्ष के अंतिम दिन बाजार गुलजार</title>
                                    <description><![CDATA[बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 655.04 अंक की छलांग लगाकर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर 73,651.35 अंक पर बंद हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/stock-market-market-buzzing-on-the-last-day-of-the/article-73929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/share-market-.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर में कटौती करने की उम्मीद में विश्व बाजार के सकारात्मक रुझान के बीच स्थानीय स्तर पर देश का आर्थिक विकास अनुमान बढऩे और आरबीआई के वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) में ऋणदाताओं के निवेश नियमों में ढील दिए जाने के बाद वित्तीय स्थिति में तेजी आने की बदौलत हुई चौतरफा लिवाली से आज चालू वित्त वर्ष के अंतिम कारोबारी दिवस को शेयर बाजार गुलजार हो गया।</p>
<p>बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 655.04 अंक की छलांग लगाकर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर 73,651.35 अंक पर बंद हुआ। इससे पूर्व यह 12 मार्च को 73667.96 अंक पर रहा था। साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 203.25 अंक उछलकर 22,326.90 अंक हो गया। इसी तरह बीएसई का मिडकैप 0.62 प्रतिशत चढ़कर 39,322.12 अंक और स्मॉलकैप 0.33 प्रतिशत मजबूत होकर 43,166.34 अंक पर रहा।</p>
<p>इस दौरान बीएसई में कुल 3938 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 1802 में लिवाली जबकि 2024 में बिकवाली हुई वहीं 112 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसी तरह निफ्टी की 45 कंपनियां हरे जबकि शेष पांच लाल निशान पर बंद हुई।</p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार, रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को दिसंबर में लाए गए मानदंडों में ढील दी, जिसके तहत अनिवार्य ऋणदाता यदि वैकल्पिक निवेश फंडों में खरीददारी करते हैं तो उन्हें उच्च प्रावधानों को अलग रखना होगा। नियमों में ढील दिये जाने से वित्तीय स्थिति में तेजी आई और बाजार ने ऊंची छलांग लगाई। साथ ही वित्तीय सलाह देने वाली एसएंडपी ग्लोबल के बाद अब मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया, जिससे बाजार में निवेशकों का निवेश प्रवाह बढ़ा।</p>
<p>इससे बीएसई के सभी 20 समूहों में जमकर लिवाली हुई। इस दौरान कमोडिटीज 0.95, सीडी 0.94, ऊर्जा 0.57, एफएमसीजी 0.64, वित्तीय सेवाएं 0.95, हेल्थकेयर 1.18, इंडस्ट्रियल्स 1.12, आईटी 0.55, दूरसंचार 0.64, यूटिलिटीज 1.29, ऑटो 1.19, बैंकिंग 0.82, कैपिटल गुड्स 1.54, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.00, धातु 1.11, तेल एवं गैस 0.85, पावर 1.69, रियल्टी 0.52, टेक 0.63 और सर्विसेज समूह के शेयर 0.53 प्रतिशत मजबूत रहे।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी का रुख रहा। इस दौरान ब्रिटेन का एफटीएसई 0.34, जर्मनी का डैक्स 0.13, हांगकांग का हैंगसेंग 0.91 और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.59 प्रतिशत उछल गया। हालांकि जापान के निक्केई में 1.46 प्रतिशत की गिरावट रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Mar 2024 16:53:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान में मामूली वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि रबी सीजन में पैदावार बेहतर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को बल मिलेगा और संपर्क आधारित सेवासें में तेजी से शहरी क्षेत्रों में भी मांग को समर्थन मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/marginal-increase-in-growth-forecast-for-the-current-financial-year/article-41925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/shaktikant.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को मामूली बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताते हुये आज कहा कि मार्च में समाप्त हुये वित्त वर्ष में यह सात प्रतिशत रह सकता है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद इसमें लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुये गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि हाल में बैंकों के दिवालिया होने से वैश्विक अर्थव्यवथा वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है और इसके साथ ही भू राजनीतिक तनाव से भी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्वस्थ है और मार्च में समाप्त हुये वित्त वर्ष में यह सात प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रबी सीजन में पैदावार बेहतर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को बल मिलेगा और संपर्क आधारित सेवासें में तेजी से शहरी क्षेत्रों में भी मांग को समर्थन मिलेगा। इसके साथ ही सरकार के पूंजीगत निवेश पर जोर के साथ ही विनिर्माण क्षमता के पूर्ण उपयोग के रूख , ऋण उठाव में दो अंकों की बढोतरी और कमोडिटी की कीमतों में नरमी से विनिर्माण और निवेश को बल मिलने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि वैश्विक और घरेलू कारकों के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान को मामूली बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। पहली तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में यह 5.9 प्रतिशत रह सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Apr 2023 11:57:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को सात फीसदी पर बरकरार रखा</title>
                                    <description><![CDATA[फिच ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। उसने कहा कि हमारे फिच 20 दायरे में भारत के उभरते बाजारों में तीव्र आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाले देशों में से एक बने रहने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/fitch-retains-indias-growth-forecast-for-the-current-financial-year/article-31668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/q-131.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। साख निर्धारित करने वाली एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (2022-23)के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को सात प्रतिशत पर बरकरार रखा है। उसने कहा कि भारत इस साल उभरते बाजारों में सबसे तीव्र आर्थिक वृद्धि हासिल वाला देश हो सकता है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी ने अगले दो वित्त वर्ष के लिये जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर अनुमान को घटाया है। उसने कहा कि हालांकि देश वैश्विक आर्थिक झटकों से स्वयं को बचाने में कुछ हद तक सक्षम रहा है लेकिन यह वैश्विक गतिविधियों से पूरी तरह से अछूता नहीं रह सकता है। फिच ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के दिसंबर अंक में कहा कि देश की जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में सात प्रतिशत रहेगी। वहीं 2023-24 में इसके धीमी पड़कर 6.2 प्रतिशत और 2024-25 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे पहले, सितंबर महीने में चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर सात प्रतिशत, अगले वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत तथा 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गई थी।</p>
<p>फिच ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। उसने कहा कि हमारे फिच 20 दायरे में भारत के उभरते बाजारों में तीव्र आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाले देशों में से एक बने रहने की संभावना है। फिच ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की प्रकृति काफी हद तक घरेलू केंद्रित है। देश के जीडीपी में खपत और निवेश का बड़ा योगदान है। इससे देश कुछ हद तक वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने में सफल रहा है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हालांकि, भारत वैश्विक गतिविधियों से पूरी तरह से अछूता नहीं रह सकता है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक नरमी से भारतीय निर्यात के लिये मांग कम होने की आशंका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Dec 2022 10:46:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष से होंगे कई बदलाव </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से कई बदलाव होंगे। इसके तहत सभी सरकारी अस्पतालों में आउटडोर-इंडोर भर्ती मरीजों का इलाज पूरी तरह से फ्री होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/many-changes-will-be-to-new-financial-year-in-state/article-7138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/tt-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से कई बदलाव होंगे। इसके तहत सभी सरकारी अस्पतालों में आउटडोर-इंडोर भर्ती मरीजों का इलाज पूरी तरह से फ्री होगा। इसके साथ ही अस्पतालों का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक हो जाएगा। राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना प्रभावी हो जाएगी। घेरलू बिजली उपभोक्ताओं को 50 यूनिट तक बिजली मुफ्त में मिलेगी। सभी हाईवे पर टोल महंगा हो जाएगा। स्कूलों का समय भी बदल जाएगा। पहली पारी सुबह 7.30 से एक बजे तक और दूसरी पारी 12.30 से 6 बजे तक होगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बजट घोषणा के अनुसार सरकारी अस्पतालों में आउटडोर में पर्ची बनाने के लगने वाले दस रुपए भी अब नहीं देने होंगे। भर्ती होने पर सरकारी दवा केन्द्रों पर उपलब्ध दवाओं के अलावा बाहर से कोई दवा मंगवानी पड़ी तो उसका पैसा भी सरकार ही देगी। इसी तरह कई जांचों के पैसे अस्पतालों में अभी भी लिए जा रहे थे, सरकार ने अब इन्हें भी फ्री कर दिया है।</p>
<p>इससे 150 जांचों सहित खासकर एमआरआई-सीटी स्कैन जैसी 3500 हजार तक होने वाली जांच भी फ्री होगी। गुर्दा रोगियों के लिए डायलिसिस कराने का खर्च भी सरकार वहन करेगी। जिन अस्पतालों में प्राइवेट फर्म से सीटी-स्कैन और एमआरआई करवाई जा रही है। उनको भी पैसे सरकार देगी। एक माह में सामने आने वाली समस्याओं के निस्तारण के बाद योजना को एक मई से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>अन्य प्रदेशों के मरीजों को देने होंगे पैसे</strong><br />राजस्थान के बाहर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को पूर्व नियमानुसार जांच और इलाज में आने वाले खर्च को वहन करना होगा। प्रदेश के मरीजों को जनआधार कार्ड या अन्य प्रदेश मूल निवासी होने का प्रमाण देना होगा।</p>
<p><strong>कैंटीन-पार्किंग-कॉटेज वार्ड के देने होंगे पैसे</strong><br />मरीज के इलाज के अलावा कैंटीन, पार्किंग और कॉर्टज वार्ड लेने का खर्चा सभी मरीजों को देना ही होगा। यह राशि हर अस्पताल की राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी के द्वारा ही तय किया जाएगा।</p>
<p><strong>नेशनल हाईवे पर अब सफर करना महंगा</strong><br />नए वित्तीय साल से नेशनल हाईवे पर अब सफर करने के लिए ज्यादा टोल टैक्स देना होगा। टोल की बढ़ी हुई दरें 31 मार्च को रात 12 बजे बाद से लागू हो गई। जयपुर के आसपास चार टोल नाकों पर करीब 40 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। इसमें जयपुर से टोंक, जयपुर से रींगस और जयपुर रिंग रोड के दो टोल बूथ शामिल है। इसके अलावा जयपुर-अजमेर, जयपुर-दिल्ली और जयपुर-आगरा हाईवे पर टोल की दरें फिलहाल नहीं बढेंÞगी। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 12:45:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> होम लोन के ब्याज पर सब्सिडी खत्म, निवेश पर भी कैंची</title>
                                    <description><![CDATA[एक अप्रैल यानी आज से वित्त वर्ष 2022-23 शुरू हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/home-loan-interest-subsidy-ends--investment-also-scissors--these-changes-will-happen-with-the-beginning-of-the-new-financial-year/article-7136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/home-lone.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एक अप्रैल यानी आज से वित्त वर्ष 2022-23 शुरू हो रहा है। इसके साथ ही कई नियम भी बदल जाएंगे। इनका असर हमारी कमाई, खर्च और निवेश पर पड़ेगा। आइए जानते हैं बदलावों के बारे में जो आपकी जेब पर असर डालेंगे।<br />प्रॉविडेंट फंड: जिन कर्मचारियों ने पीएफ अकाउंट में 2.5 लाख रुपए से ज्यादा जमा किया है, उन्हें ब्याज पर इनकम टैक्स देना होगा। टैक्स कैलकुलेशन के लिए अमाउंट को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। एक में छूट वाला योगदान, तो दूसरे में 2.5 लाख रुपए से ज्यादा का योगदान रहेगा, जो टैक्सेबल होगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपए रहेगी।</p>
<p><br /><strong>किफायती घर:</strong> अगर आपने पहली बार किफायती घर खरीदा हैए तो चुकाए गए ब्याज पर धारा 80 ईईए के तहत 1.5 लाख की अतिरिक्त कटौती का लाभ नहीं मिलेगा। घर की कीमत 45 लाख से कम है, तो अब तक ब्याज भुगतान में डेढ़ लाख तक की कटौती का दावा कर सकते थे। यह कटौती या छूट धारा 24 बी के तहत मिल रही 2 लाख रुपए की छूट के अलावा थी। यह लाभ उन्हीं टैक्सपेयर्स के लिए था, जिन्होंने घर खरीदने के लिए एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच कर्ज लिया हो।<br />क्रिप्टोकरेंसी: वर्चुअल करेंसी पर भी एक अप्रैल से कर संबंधी स्पष्ट नियम लागू होंगे। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स या क्रिप्टो पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। किसी व्यक्ति को क्रिप्टो करेंसी बेचने पर फायदा होता है, तो उसे टैक्स देना होगा। बिक्री पर एक जुलाई से एक फीसदी टीडीएस भी काटा जाएगा।</p>
<p><br /><strong>दवाएं:</strong> नए फाइनेंशियल ईयर में हेल्थकेयर भी महंगा हो जाएगा। करीब 800 लाइफ  सेविंग ड्रग्स के दाम 10 फीसदी तक बढ़ेंगे, जिससे इलाज के खर्च में बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><br /><strong>पैन:</strong> पैन को आधार से लिंक नहीं करने पर पेनल्टी लगेगी। यह 30 जून 2022 तक 500 रुपए रहेगी। इसके बाद 1000 रुपए पेनल्टी देनी होगी। 31 मार्च 2023 के बाद भी लिंक न करवाने पर पैन नंबर निष्क्रिय हो जाएगा।</p>
<p><br /><strong>जीएसटी:</strong> 20 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारी अनिवार्य ई-इनवॉइसिंग के दायरे में आएंगे। हर बिजनेस टू बिजनेस ट्रांजैक्शन के लिए ई-इनवॉइस जारी होगा। इसके न होने पर ट्रांसपोर्ट के दौरान माल जब्त किया जा सकता है। साथ ही, खरीदार को मिलने वाला इनपुट टैक्स क्रेडिट भी खतरे में पड़ जाएगा।</p>
<p><br /><strong>ऑडिट ट्रेल:</strong> हर कंपनी को अकाउंट सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल फीचर जुड़वाना होगा। ऑडिट ट्रेल का उद्देश्य कंपनी के लेन-देन में एंट्री के बाद किए जाने वाले परिवर्तन का रिकॉर्ड रखना होता है। मांगे जाने पर ऑडिट ट्रेल उपलब्ध कराना होगा।</p>
<table style="width:655px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:652px;text-align:center;" colspan="2"><strong><span style="background-color:#ccffcc;color:#008000;">एनपीएसए म्यूचुअल फड संबंधी बदलाव</span></strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;"> राज्य कर्मचारी अपने एम्प्लॉयर के एनपीएस योगदान पर ज्यादा कटौती का दावा कर सकेंगे। दो साल बाद तक अपडेटेड आयकर रिटर्न भर सकेंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;">कोरोना के इलाज के लिए मिली 10 लाख रुपए तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;">म्यूचुअल फंड में निवेश सिर्फ यूपीआई या नेटबैंकिंग के जरिए ही हो सकेगा।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;"> 75 साल से ऊपर के बुजुर्गों को रिटर्न भरने से छूट।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><br /><br />   <br />    <br />    <br />   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 12:35:18 +0530</pubDate>
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