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                <title>chaitra navratri - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>chaitra navratri RSS Feed</description>
                
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                <title>आज होगी मां कुष्मांडा की पूजा: जानें क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
                                    <description><![CDATA[नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांड की पूजा का विधान है, जो अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करती हैं। नारंगी (Orange) रंग के वस्त्र धारण कर माँ की आराधना करने से भविष्य की सभी विपत्तियां दूर होती हैं। देवी कूष्मांड सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भक्तों को तेज और सौभाग्य प्रदान करती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/maa-kushmanda-will-be-worshiped-today-know-what-is-the/article-147392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/navratri1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है, जो सूर्य देव को प्रदर्शित करती हैं। चतुर्थी तिथि पर संतरे रंग का कपड़ा पहनना शुभ माना जाता है। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भविष्य में आने वाली सभी विपत्तियां दूर होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 10:30:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की चैत्र नवरात्र स्थापना पर पूजा-अर्चना: प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी एवं समृ़द्ध जीवन की प्रार्थना की; वृक्षों पर पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधें</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर सपरिवार राज राजेश्वरी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और घट स्थापना की। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का संदेश दिया और बढ़ती गर्मी को देखते हुए पक्षियों के लिए परिंडे बांधे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajan-lal-sharma-performed-puja-on-the-occasion/article-147021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-bhajanlal1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरूवार को चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन मुख्यमंत्री निवास स्थित राज राजेश्वरी मंदिर में सपत्नीक विधिवत पूजा-अर्चना कर घट स्थापना की तथा मां दुर्गा की आराधना की। </p>
<p>शर्मा ने मां दुर्गा से प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी एवं समृ़द्ध जीवन की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए वृक्षों पर पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 12:39:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चैत्र नवरात्रा का शुभारंभ कल : मंदिर में होंगे विशेष धार्मिक आयोजन, पूरे नौ दिनों की होगी चैत्र नवरात्रि</title>
                                    <description><![CDATA[सूरजपोल स्थित रूद्रघण्टेश्वरी महाकालिका मंदिर में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू। अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना। नौ दिन विशेष पूजन, 108 रुद्र-घंटिकाओं की आराधना और कन्या पूजन। 26 मार्च को रामनवमी, 27 मार्च को हवन के साथ समापन। इस दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 भी प्रारंभ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chaitra-navratri-will-start-tomorrow-special-religious-events-will-be/article-146890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सूरजपोल बाजार, दर्जियों का रास्ता स्थित रूद्रघण्टेश्वरी महाकालिका मंदिर में 19 मार्च से चैत्र नवरात्रा का शुभारंभ होगा। मंदिर के महंत पं. संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि अभिजित बेला में दोपहर 12:15 बजे विधिवत घटस्थापना की जाएगी। इस अवसर पर माता रूद्रघण्टेश्वरी का विशेष पूजन-अर्चन एवं आलौकिक श्रृंगार किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि नवरात्रा के दौरान भगवान शिव के 108 रुद्र नामों से युक्त 108 रुद्र-घंटिकाओं की विशेष पूजा की जाएगी। 21 मार्च को गणगौर तथा 26 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। नवमी के दिन कन्या पूजन कर उन्हें भोजन भी कराया जाएगा।</p>
<p>महंत शर्मा ने बताया कि नवरात्रा का समापन 27 मार्च को दुर्गा सप्तशती के पाठ एवं हवन पूर्णाहुति के साथ होगा। इस अवधि में मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुला रहेगा।</p>
<p>इस साल चैत्र नवरात्र व नव संवत्सर 19 मार्च से शुरू होगा। नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा-उपासना बड़ी ही श्रद्धा के साथ की जाती है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 20 मार्च की सुबह 4:52 मिनट पर होगा। इसलिए इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को घटस्थापना के साथ होगी। इस दिन गुड़ी पड़वा के साथ हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा। वहीं नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा। चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से ही नया हिंदू वर्ष प्रारंभ हो जाता है। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों के होंगे और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप का अपना विशेष महत्व है और भक्त इनकी पूजा करके अलग-अलग प्रकार के आशीर्वाद की कामना करते हैं। नवरात्रि के अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन तथा उपहार दिए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।</p>
<p><strong>घट् स्थापना का मुहूर्त :</strong></p>
<p>ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि बसंत नवरात्रा का आरंभ चैत्र शुक्ल में उदय व्यापिनी प्रतिपदा को होता है। लेकिन यदि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा किसी भी दिन उदय व्यापिनी नहीं हो (अर्थात् प्रतिपदा तिथि क्षय हो) तो पहले दिन (अमावस्या वाले दिन ही) नवरात्रा प्रारंभ करने के शास्त्रों में निर्देश मिलते हैं।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय है, अर्थात् प्रतिपदा 19 मार्च, 2026 गुरुवार को सूर्योदय बाद शुरु होकर इसी दिन गुरुवार को ही (अग्रिम दिन शुक्रवार के सूर्योदय के पहले) समाप्त हो रही है, जिससे वह दोनों दिन (19 व 20 मार्च को) उदय व्यापिनी नहीं बनी है। बसन्त नवरात्र का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल में उदयव्यापिनी प्रतिपदा में द्विस्वभावलग्र युक्त प्रातः काल में होता है। इस वर्ष चैत्रशुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को प्रातः 06:54 से अंतरात्रि 04:52 तक है। शास्त्रानुसार बसन्तनवरात्र का प्रारम्भ व घटस्थापना इसी दिन होगी।</p>
<p>द्विस्वभाव मीनलग्न प्रातः 06:54 से प्रातः 07:50 तक <br />मिथुनलग्न प्रातः 11:24 से दोपहर 01:38 तक <br />शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05, <br />चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः वकः 84 से दोपहर 03:32 तक <br />अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:59 तक रहेगा।</p>
<p><strong>तिथि :</strong></p>
<p>भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 20 मार्च की सुबह 4:52 मिनट पर होगा। इसलिए इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को घटस्थापना के साथ होगी। उदया तिथि के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी और इसका समापन 27 मार्च को होगा। चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से ही नया हिंदू वर्ष प्रारंभ हो जाता है।</p>
<p><strong>नक्षत्र एवं शुभ योग :</strong></p>
<p>भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग का  संयोग भी रहेगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और घटस्थापना की जाती है।</p>
<p><strong>विक्रम संवत 2083 :</strong></p>
<p>भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू परंपरा में नव संवत्सर को नए आरंभ, नई ऊर्जा और नए संकल्प का प्रतीक माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी नया संवत्सर अपने साथ नई संभावनाएं और कुछ चुनौतियां लेकर आएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रौद्र’ संवत्सर है, जिसका प्रभाव साल भर देखने को मिलेगा। इस साल चैत्र नवरात्र कुछ खास ज्योतिषीय संयोग में शुरू होंगे। प्रतिपदा तिथि अमावस्या में मिलने के कारण पहली तिथि टूटने का योग बन रहा है, लेकिन इसके बावजूद नवरात्र पूरे नौ दिनों के ही रहेंगे। प्रतिपदा तिथि 19 को सूर्योदय के बाद प्रारंभ होगी और अगले दिन 20 मार्च को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार जिस दिन प्रतिपदा तिथि होती है, उसी दिन नवरात्र घटस्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है।</p>
<p><strong>पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा :</strong></p>
<p>कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि हर बार नवरात्र में देवी अलग-अलग वाहन पर आती हैं, और उस वाहन के हिसाब से अगले छह महीने की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी। देवी भागवत में पालकी में माता के आगमन का फल  "ढोलायां मरणं धुवम्"  बताया गया है जो जन हानि रक्तपात होना बताता है। अर्थात पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभता का संकेत नहीं है। माता का डोली पर आगमन सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल व महामारी का परिचायक माना गया है।</p>
<p><strong>चैत्र नवरात्रि  की तिथियां :</strong></p>
<p>19  मार्च - नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना<br />20  मार्च - नवरात्रि द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा <br />21  मार्च - नवरात्रि तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा<br />22  मार्च - नवरात्रि चतुर्थी- मां कुष्मांडा पूजा<br />23  मार्च - नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा<br />24  मार्च - नवरात्रि षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा<br />25  मार्च - नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा<br />26  मार्च - नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी, रामनवमी<br />27  मार्च - नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री , नवरात्रि पारण </p>
<p><strong>कलश स्थापना की सामग्री :</strong></p>
<p>भविष्यवक्ता डॉ अनीष व्यास ने बताया कि मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें। इसके अलावा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए।</p>
<p><strong>कलश स्थापना :</strong></p>
<p>भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर लें। मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योत जलाएं। कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं। अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधें। अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें। इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं। अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें। फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें। अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्प लिया जाता है। आप चाहें तो कलश स्थापना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्योति भी जला सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 12:42:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>19 मार्च से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र, घट स्थापना के साथ घरों और मंदिरों में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना होगी प्रारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से होगा। इस बार माँ दुर्गा का आगमन और प्रस्थान पालकी पर होगा, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। 26 मार्च को महाअष्टमी और 27 मार्च को श्रद्धा के साथ रामनवमी मनाई जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chaitra-navratri-will-start-from-march-19-with-the-establishment/article-145981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/navratri.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। साधना के प्रतीक चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से होगा। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले इस नौ दिवसीय पर्व में श्रद्धालु मां भगवती की साधना और उपासना में लीन रहेंगे। घरों और मंदिरों में घट स्थापना के साथ शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ होगी। नवरात्र के प्रथम दिन मां भगवती का आगमन पालकी पर होगा तथा प्रस्थान भी पालकी पर ही होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की वृद्धि का संकेत मिल रहे हैं।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य पं. सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि 19 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:06 बजे होगा। अमावस्या तिथि सुबह 6:40 बजे तक रहेगी, जबकि प्रतिपदा तिथि का प्रभाव पूरे दिन रहेगा। इस कारण 19 मार्च को ही नवरात्र व्रत का शुभारंभ और कलश स्थापना का विधान है। उन्होंने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग के अभाव के कारण दोपहर 12:30 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं नवरात्र के दौरान हवन-पूजन और व्रत की पूर्णाहुति 27 मार्च को दोपहर 12:27 बजे तक की जा सकेगी।</p>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाअष्टमी का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा, जिसका पारण 27 मार्च को होगा। महानवमी का व्रत 27 मार्च को रहेगा तथा पारण 28 मार्च को प्रात: 10:34 बजे तक किया जा सकेगा। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्र के अवसर पर विभिन्न मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:14:50 +0530</pubDate>
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                <title>कन्या पूजन और हवन के साथ चैत्र नवरात्र संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[चैत्र मास के वासंतिक नवरात्र हवन और कन्या पूजन के साथ सम्पन्न हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chaitra-navratri-concluded-with-kanya-pujan-and-havan/article-109920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer19.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चैत्र मास के वासंतिक नवरात्र हवन और कन्या पूजन के साथ सम्पन्न हुए। उत्थान सेवा संस्थान एवं पतंजलि किसान सेवा समिति समिति के तत्वाधान में नांगल जैसा बोहरा स्थित बोहरा जी की बावड़ी परिसर में हुए दशम कन्या पूजन एवं वैदिक यज्ञ महोत्सव के अंतर्गत झुग्गी बस्तियों की 615 कन्याओं का पूजन किया गया। कन्याओं का पाद प्रक्षालन कर पुष्पवर्षा की गई। भोजन प्रसादी कराकर उपहार दिए गए।</p>
<p>इसके पहले राजेश गुप्ता और मनु महाराज के सान्निध्य में पंचकुंडीय यज्ञ किया गया। संस्थान की ओर से नि:शुल्क संचालित अपनी बाल संस्कार पाठशाला के बालक बालिकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों ने प्लास्टिक मुक्ति के नारे लिखी तख्तियां दिखाकर प्लास्टिक के उपयोग के निषेध का संदेश दिया। इस पूरे कार्यक्रम में भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। संस्थान के अध्यक्ष कैप्टन शीशराम चौधरी ने सभी का आभार व्यक्त किया। सचिव शिवानंद त्रिपाठी ने परिसर में उपस्थित कन्याओं, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। पतंजलि अभिभावक कुलभूषण बैराठी ने कार्यक्रम की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन तिरुपति कंडोई ने किया। कार्यक्रम में कन्याओं सहित लगभग 1400 लोग उपस्थित रहे।</p>
<p>इसके अलावा शहर के आमेर के शिला माता मंदिर में नवमी पर मातारानी का विशेष श्रृंगार किया गया। हवन के बाद कन्याओं का पूजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कनक घाटी आमेर रोड स्थित गोविंद देवजी ठिकाने के मंदिर श्री मनसा माता मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में रविवार को सुबह साढ़े आठ बजे नवमी पूजन के बाद हवन किया गया। इसके बाद करीब सौ कन्याओं का पूजन कर उपहार दिए गए। दुर्गापुरा के दुर्गा मंदिर, राजापार्क के वैष्णो देवी मंदिर, घाटगेट श्मशान स्थित काली माता मंदिर, झालाना डूंगरी स्थित कालक्या मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में हवन और कन्या पूजन के साथ चैत्र के वासंतिक नवरात्र संपन्न हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 13:21:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चैत्र नवरात्र : आज से 9 दिन शक्ति की आराधना का पर्व, घरों-मंदिरों में होगी घटस्थापना</title>
                                    <description><![CDATA[श्रद्धालु नवरात्र में शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chaitra-navratri-will-be-held-in-homes-and-temples-for/article-109096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(1)48.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार को घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र शुरू होंगे। श्रद्धालु नवरात्र में शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहेंगे। देवी मंदिरों में जहां दुर्गा सप्तशती के पाठ होंगे जबकि भगवान राम के मंदिरों में रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण की चौपाइयां गूंजायमान होंगी। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 9.20 से दोपहर 12.25 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.01 से 12.50 बजे तक रहेगा। जबकि 6 अप्रैल को रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि के साथ रामनवमी का स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त रहेगा। आमेर के शिला माता, मनसा माता, दुर्गापुरा के दुर्गा मंदिर, राजापार्क के वैष्णोदेवी मंदिर, घाटगेट श्मशान स्थित काली माता मंदिर, झालाना डूंगरी स्थित कालक्या मंदिर सहित अन्य दुर्गा मंदिरों में शनिवार को तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। शहर के सभी राम मंदिरों में भी नवरात्र पर वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत रामचरितमानस के अखंड नवाह्न पारायण होंगे।</div>
<div> </div>
<div><strong>आठ दिन के होंगे नवरात्र</strong></div>
<div>इस साल 9 दिन के नहीं बल्कि 8 दिन के ही नवरात्र हैं क्योंकि नवरात्र में तृतीय तिथि का क्षय हो रहा हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में मां दुर्गा का आगमन गजराज पर होगा। गजराज पर मातारानी का आगमन को धन-धान्य में वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>गोविंददेवजी मंदिर</strong></div>
<div>चैत्र नवरात्र में आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में 30 मार्च से सात अप्रेल तक श्रीराम चरितमानस का संगीतमय नवाह्न पारायण का आयोजन होगा। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में प्रतिदिन सुबह सात से ग्यारह बजे तक 51 आसन पर 51 साधक श्रीराम चरितमानस की चौपाइयों का सस्वर संगीतमय पाठ करेंगे। श्री चिंता हरण हनुमान मंदिर के बंशीजी महाराज व्यासपीठ से पाठ करेंगे। भगवान राम का दरबार सजाया जाएगा। पांच घंटे रामचरितमानस के पाठ  के बाद शाम को भजन होंगे। सात अप्रेल को पाठ की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में संगीतमय सुंदरकांड पाठ होंगे।</div>
<div> </div>
<div>गायत्री शक्तिपीठों पर होंगे लघु अनुष्ठान: चैत्र नवरात्र पर अखिल विश्व गायत्री परिवार विश्व शांति, मानव कल्याण एवं विश्व में हो रही विध्वंसक घटनाओं को रोकने के लिए, देश की प्रगति, सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास के लिए विशेष अनुष्ठा करेगा। नवरात्र में गायत्री महामंत्र की साधना की जाएगी। गायत्री परिवार के जोन प्रभारी ओम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि नववर्ष के अवसर पर 30 मार्च को गायत्री परिजन कलश स्थापना के साथ अनुष्ठान प्रारंभ करेंगे। राजस्थान की सभी गायत्री शक्तिपीठों, गायत्री चेतना केन्द्रों एवं मानसरोवर स्थित वेदना निवारण केन्द्र पर कलश स्थापना होगी।</div>
<div> </div>
<div><strong>श्री खोले के हनुमान मंदिर में 9 दिवसीय धार्मिक उत्सव </strong></div>
<div>श्री खोले के हनुमान मंदिर में 30 मार्च को चैत्र नवरात्रा घट स्थापना के साथ 9 दिवसीय धार्मिक उत्सव प्रारंभ होंगे। श्री नरवर आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि नव संवत्सर 30 मार्च को प्रात: कलश यात्रा के बाद दोपहर 12 बजे घट स्थापना की जाएगी। घट स्थापना के बाद वाल्मीकि रामायण के पाठ प्रारंभ होंगे और 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक 201 आसान से 9 दिवसीय राम चरित्र मानस के पाठ प्रारंभ होंगे। खोले के हनुमान मंदिर पहाड़ी पर स्थित वैष्णो माता की घटस्थापना और दुर्गा सप्तमी के पाठ नियमित नौ दिन तक किए जाएंगे। मां वैष्णो को पंचामृत स्रान कराकर नई पोशाक धारण कराई जाएगी। साथ ही गायत्री माता मंदिर में गायत्री कवच व अन्नपूर्णा माता मंदिर में दुर्गा पाठ व अन्नपूर्णा स्त्रोत किए जाएंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 10:39:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चैत्र नवरात्र नौ से : युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के साथ सत्ता परिवर्तन के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[ माता का हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करना शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और 9 दिनों तक अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी हर एक परेशानियों का दूर करती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/signs-of-change-of-power-along-with-war-and-natural/article-74314"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/durga-mata.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 9 से 17 अप्रैल तक वासंतिक नवरात्र में पूरे नौ दिन घर-घर में शक्ति की देवी मां दुर्गा और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना होगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2081 भी आरंभ होगा। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर आ रही हैं। आमेर के शिला माता, जयगढ़ की तलहटी में स्थित मनसा माता मंदिर, काली माता मंदिर घाटगेट श्मशान, दुर्गा माता मंदिर दुर्गापुरा, वैष्णो देवी मंदिर राजपार्क,रूद्रघंटेश्वरी सहित अन्य देवी मंदिरों में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ होगा। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>घोड़े पर आना अशुभ संकेत</strong><br />पाल बालाजी संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ.अनीष व्यास ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक जब नवरात्रि की शुरुआत शनिवार या मंगलवार को होती है तो माता की सवारी घोड़ा होता है। घोड़े पर सवार होकर आना शुभ संकेत नहीं माना जाता अर्थात ये युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की तरफ संकेत करता है। सत्ता में परिवर्तन भी हो सकता है। इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.04 से 12.52 बजे तक है। 17 अप्रैल को नवरात्रि सम्पन्न होंगे। माता रानी हाथी पर प्रस्थान करेंगी। माता का हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करना शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और 9 दिनों तक अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी हर एक परेशानियों का दूर करती हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अश्विनी नक्षत्र का संयोग बनेगा</strong><br />ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर 30 वर्ष बाद अमृत सिद्धि, शश योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अश्विनी नक्षत्र का संयोग बनेगा। नवरात्र के प्रथम दिन और दशमी को उत्थापन के दिन अश्विन नक्षत्र रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 09:44:53 +0530</pubDate>
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                <title>चैत्र नवरात्रि विशेष: श्रद्धाभाव से करें मां की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार माता का आगमन घोड़े पर होने जा रहा है जिसे देवी भगवत पुराण में सत्ता, जनता और राष्ट्र के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chaitra-navratri-special--worship-mother-with-reverence/article-7155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/navratri.jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्रि का आरंभ कल 2 अप्रैल से हो रहा है। अबकी बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की हैं जो भक्तों के लिए माता की कृपा पाने का बेहतर अवसर है। लेकिन इस बार माता का आगमन घोड़े पर होने जा रहा है जिसे देवी भगवत पुराण में सत्ता, जनता और राष्ट्र के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।<br /><br />पुराण के अनुसार जब नवरात्र का आरंभ मंगलवार या शनिवार के दिन होता है तो देवी का वाहन घोड़ा यानी अश्व होता है। सोमवार और रविवार के दिन नवरात्र का आरंभ होने पर देवी का वाहन हाथी होता है। गुरुवार और शुक्रवार के दिन नवरात्रि आरंभ होने पर देवी डोली पर आती हैं जबकि बुधवार को नवरात्रि आरंभ होने पर देवी नाव पर आती हैं। देवी के सभी वाहनों पर आगमन और गमन का अलग-अलग प्रभाव होता है। जिस दिन नवरात्रि समाप्त होती है उस दिन के अनुसार देवी का अलग-अलग वाहन माना जाता है। शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि समाप्त होने पर देवी बिना किसी वाहन के यानी पैदल ही जाती हैं। देवी का पैदल वापस जाना अच्छा नहीं माना जाता है। बुधवार और शुक्रवार के दिन नवरात्रि समाप्त होने पर देवी हाथी पर वापस जाती हैं जिसे अच्छी बरसात और खूब फ सल होने का सूचक माना जाता है। गुरुवार को नवरात्रि के समाप्त होने पर देवी का वाहन मनुष्य माना जाता है। यानी देवी मानव के कंधे पर सवार होकर जाती हैं। जबकि रविवार और सोमवार के दिन नवरात्रि समाप्त होने पर देवी भैंस पर सवार होकर जाती हैं। भैंस पर देवी की वापसी को बहुत ही अशुभ माना गया है।</p>
<p><br /><strong>माता का वाहन प्रभाव</strong><br />अबकी बार चैत्र नवरात्रि पर ऐसे संयोग बना है कि देवी घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं जबकि भैंस पर सवार होकर जा रही हैं। देवी का आगमन और गमन दोनों ही प्रतिकूल फ लदायी है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा और रोग से जन धन की हानि हो सकती है।  चैत्र नवरात्रि के दिन से नया संवत यानी हिंदू नववर्ष भी आरंभ हो रहा है जो नल नाम का संवत होगा। यह संवत दुनिया के कई देशों में उथल-पुथल और युद्ध का योग बना रहा है। ऐसे में अपने जीवन में सुख-शांति और अनुकूलता को बनाए रखने के लिए नवरात्रि में देवी की श्रद्धा भाव से उपासना करें। नियमित कवच, कीलक और अर्गलास्तोत्र का पाठ करते रहें।</p>
<p><br /><strong>कलश स्थापना</strong> <br />नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि यानी कि पहले दिन 2 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 01 मिनट से सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक के बीच का समय कलश स्थापना के लिए शुभ है। वहीं कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक है। भक्त इस मुहूर्त में भी घट स्थापना कर सकते हैं।</p>
<p><br /><strong>पूजा विधि</strong><br />नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिले पानी से स्रान करें। साफ कपड़े पहनें और फिर मंदिर साफ  करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और इस पर मां की मूर्ति या चित्र लगाएं। अब साफ मिट्टी में जौ बोकर इस पर कलश स्थापित करें। इसके बाद मां का आह्वान करें फि र मंत्र और आरती का पाठ करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 14:24:38 +0530</pubDate>
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