<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/sonography/tag-16398" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>sonography - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/16398/rss</link>
                <description>sonography RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय: सोनोग्राफी मशीन पर जमी धूल, काफी समय से खराब होने से नहीं हो रहा उपयोग </title>
                                    <description><![CDATA[पशु चिकित्सालय में रोज 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन काफी समय से बंद पड़ी हुई है। आधुनिक जांच सुविधा के अभाव में चिकित्सकों को बीमार पशुओं का उपचार केवल लक्षणों और अनुभव के आधार पर करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि कई जटिल मामलों में पशुओं की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। पशु चिकित्सालय में रोजाना 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या दुधारू गाय-भैंसों, गर्भवती पशुओं और प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले मामलों की होती है। सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ की स्थिति, भ्रूण का विकास, आंतरिक सूजन, ट्यूमर, चोट या संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। सोनोग्राफी मशीन बंद होने से गर्भ जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है।</p>
<p><strong>निजी जांच केंद्रों का ही सहारा</strong><br />सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों को निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी स्तर पर सोनोग्राफी कराने पर 800 से 1500 रुपऐ तक खर्च आ रहा है, जो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बड़ी रकम है। कई पशुपालक आर्थिक तंगी के कारण जांच नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ रही। चिकित्सकों के अनुसार सोनोग्राफी के बिना कई बार बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे इलाज ट्रायल-बेस पर करना पड़ता है, दवाइयों की अवधि बढ़ जाती है और पशु के स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है। दुधारू पशुओं के मामलों में दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नई मशीन की मांग, लेकिन अब तक इंतजार</strong><br />पशु चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई माह पहले ही नई सोनोग्राफी मशीन की मांग उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट और प्रक्रिया का हवाला देते हुए मामला लंबित बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक मशीन मिलने से न सिर्फ जांच सटीक होगी, बल्कि रेफर के मामलों में भी कमी आएगी। स्थानीय पशुपालकों ने विभाग से मांग की है कि मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द नई सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई जाए। ताकि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं का समय पर, सटीक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने से हमें निजी जगह जांच करानी पड़ती है। खर्च ज्यादा आता है, ऊपर से समय भी बर्बाद होता है। गरीब पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या है।<br /><strong>-रामलाल, पशुपालक</strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी हुई है। नई मशीन के लिए डिमांड भेज रखी है। नई मशीन मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ. भंवर सिंह, उपनिदेशक, राजकीय पशु चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233</guid>
                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/1200-x-600-px-%281%297.png"                         length="1871336"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अनदेखी: पशुओं की नहीं हो पा रही सोनोग्राफी</title>
                                    <description><![CDATA[जिले के छह लाख से अधिक पशुओं की सोनोग्राफी की जांच का भार इसी मशीन पर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/negligence--sonography-of-animals-is-not-being-done/article-81836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/andekhi--pashuo-ki-nahi-ho-paa-rahi-sonography..kota-news..17.6.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । राजकीय बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में लगी सोनोग्राफी मशीन अभी तक ठीक नहीं हुई है। इस कारण पशुओं की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। यहां पर लगी सोनोग्राफी मशीन में व्हाइटनेस की समस्या आ रही है। इसकी वजह से रिपोर्ट का सही आंकलन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बीमार पशुओं के उपचार में परेशानी हो रही है। पूरे जिले में सोनोग्राफी मशीन की सुविधा केवल मोखापाड़ा स्थित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय की पॉली क्लिनिक इकाई में हैं। ऐसे में जिले के छह लाख से अधिक पशुओं की सोनोग्राफी की जांच का भार इसी मशीन पर है। इसके बावजूद अभी तक सोनोग्राफी मशीन को चालू नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>मशीन लगाने वाली कंपनी लापता</strong><br />जिला मुख्यालयों पर संचालित होने वाले प्रत्येक राजकीय पशु चिकित्सालयों के लिए वर्ष 2017 में एक-एक सोनोग्राफी मशीन खरीदी गई थीं। उस समय एक मशीन की कीमत 4.50 लाख रुपए आई थी। उस समय जिस कंपनी को सोनोग्राफी मशीनें लगाने और देखभाल का जिम्मा दिया गया था, आज उस कंपनी का कोई अता-पता ही नहीं है। पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों ने बताया कि सोनोग्राफी मशीन लगने के बाद बीमार पशुओं के उपचार में आसानी होने लगी थी। कुछ माह पहले यहां की मशीन अचानक खराब हो गई। जिससे जांच की सुविधा बंद हो गई। इस कारण बीमार पशुओं का उपचार कराने में पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ हा है।</p>
<p><strong>बिना जांच कैसे पता चलेगी बीमारी </strong><br />मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में ही सोनोग्राफी मशीन लगी हुई। सोनोग्राफी जांच की सुविधा कोटा जिले में केवल यहीं पर ही हैं। इस मशीन के खराब होने के कारण अब बीमार पशुओं की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। नयागांव के पशुपालक दौलतराम मीणा व शोदान गुर्जर ने बताया कि सोनोग्राफी की जांच से ही पशुओं की बीमारी का पता चल पाता है। अब मशीन खराब होने से पशु चिकित्सक पशुओं की स्थिति देखकर दवाइयां लिख रहे हैं। जांच के बिना पशुओं की गम्भीर बीमारी का पता नहीं लग पा रहा है। </p>
<p> पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब होने के कारण बीमार पशुओं का उपचार कराने में परेशानी हो रही है। पशुओं के गंभीर बीमार होने पर पशु चिकित्सक सोनोग्राफी की सलाह देते हैं, लेकिन जिले में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने से उन्हें अन्य जिलों में जाकर सोनोग्राफी करवानी पड़ती है।<br /><strong>-भवानीशंकर गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>जिला पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन को ठीक कराने के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है। पूर्व में आचार संहिता के कारण नई मशीन नहीं लग पा रही थी। अब  नई सोनोग्राफी मशीन जल्द ही उपलब्ध होने की उम्मीद है।<br /><strong>-डॉ. गिरिश सालफळे, उप निदेशक, पशुपालक विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/negligence--sonography-of-animals-is-not-being-done/article-81836</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/negligence--sonography-of-animals-is-not-being-done/article-81836</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Jun 2024 16:32:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-06/andekhi--pashuo-ki-nahi-ho-paa-rahi-sonography..kota-news..17.6.2024.jpg"                         length="330805"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रशिक्षित 146 डॉक्टर करेंगे सोनोग्राफी</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे चिकित्सालय जहां सोनोग्राफी मशीन नहीं हैं, वहां पदस्थापित चिकित्सकों को स्थानांतरित किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/trained-146-doctors-will-do-sonography/article-81514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में सोनोग्राफी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। इसके लिए सितम्बर-अक्टूबर माह में पीसीपीएनडीटी का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 146 चिकित्सकों को जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल, सैटेलाइट हॉस्पिटल, एफआरयू एवं आदर्श सीएचसी पर प्राथमिकता के साथ पदस्थापित किया जाएगा। साथ ही ऐसे चिकित्सालय जहां सोनोग्राफी मशीन नहीं हैं, वहां पदस्थापित चिकित्सकों को स्थानांतरित किया जाएगा। यह निर्णय एसीएस शुभ्रा सिंह की अध्यक्षता में सोनोग्राफी मशीनों की उपलब्धता एवं संचालन के संबंध में समीक्षा बैठक में लिए गए।</p>
<p><strong>रेडियो डायग्नोसिस कोर्स करने वाले पीजी छात्रों की ली जाएंगी सेवाएं</strong><br />बैठक में बताया कि रेडियो डायग्नोसिस कोर्स करने वाले स्रात्कोत्तर छात्रों को बॉण्ड के तहत राजस्थान में कार्य करना होता है। ये छात्र सहायक प्रोफेसर शिप व सीनियर रेजीडेंसी में चले जाते हैं। इनमें से कुछ चिकित्सकों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन जिला एवं उप जिला अस्पतालों में पदस्थापित किया जा सकता है ताकि क्वालिटी सर्विस मिल सके। इस पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मिशन निदेशक, एनएचएमए चिकित्सा शिक्षा आयुक्त एवं निदेशक जनस्वास्थ्य की तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीसीपीएनडीटी कोर्स की परीक्षा समय पर कराने तथा प्रशिक्षण केंद्रों की गुणवत्ता बढ़ाने के भी निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/trained-146-doctors-will-do-sonography/article-81514</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/trained-146-doctors-will-do-sonography/article-81514</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Jun 2024 12:35:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-06/uu11rer-%285%291.png"                         length="334180"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रोत्साहन योजना बढ़ाई, लेकिन सूचना कहीं से नहीं आई</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में बेटी बचाओं मुहीम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रदेश में  पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत मुखबिर योजना को अधिक प्रभावी बनाते हुए प्रोत्साहन राशि को ढाई लाख से बढ़ाकर अब तीन लाख रुपए कर दिया । लेकिन कोटा जिले में इसके व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने से मुखबिर योजना में अभी तक एक भी मुखबिर ने लिंग परीक्षण को लेकर चिकित्सा विभाग को कोई सूचना नहीं दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incentive-scheme-increased--but-information-did-not-come-from-anywhere/article-13154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/protsahan-yojana-badhai-lekin-suchna-kahi-se-nahi-aai.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । प्रदेश में बेटी बचाओं मुहीम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रदेश में  पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत मुखबिर योजना को अधिक प्रभावी बनाते हुए प्रोत्साहन राशि को ढाई लाख से बढ़ाकर अब तीन लाख रुपए कर दिया । लेकिन कोटा जिले में इसके व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने से मुखबिर योजना में अभी तक एक भी मुखबिर ने लिंग परीक्षण को लेकर चिकित्सा विभाग को कोई सूचना नहीं दी है। शहर में करीब 117 सेंटर है। जहां सोनोग्राफी की जा रही है। एमबीएस में प्रतिदिन करीब 70 से 80 सोनोग्राफी होती है।  इसके अलावा कोटा के 117 केंद्रों पर सोनोग्राफी होती है। अधिकांश सोनोग्राफी सेंटरों पर मुखबिर योजना के पोस्टर ऐसी जगह लगा रखे जहां लोगों का ध्यान नहीं जाए। कोटा जिला लिंग परीक्षण लेक र काफी संवेदनशील माना गया है। पिछले महीने ही एक दलाल दपंती को लिंग परीक्षण कराते हुए पकड़ा था। लेकिन इस आॅपरेशन के लिए गर्भवती महिला और मुखबिर सभी जयपुर से आए। ऐसे में कोटा में मुखबिर तंत्र इस योजना का लाभ लेने के लिए उत्साहित नजर नहीं आ रहा है। <br /><br /><strong>10 जून से 30 जून तक चल रहा सोनोग्राफी सेंटरों की जांच का अभियान</strong><br />चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में 10 जून से 30 जून तक सभी 117 सोनोग्राफी सेंटरों की जांच का अभियान चल रहा है। लेकिन मुखबिर योजना को लेकर अभी जिले में व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने से बेटियों की जान अभी खतरे में अटकी हुई है। कोटा में पांच साल पहले तक कई डिकाय आॅपरेशन हुए जिसमें मुखबिरों ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर अहम भूमिका निभाई लेकिन अब सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के बावजूद मुखबिर लिंग परीक्षण को लेकर कोई सूचना नहीं दे रहे है। चिकित्सा विभाग मुखबिर योजना के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए अभियान चलाकर इतिश्री कर लेता जिससे लोगों का इस योजना के प्रति उत्साह नजर नहीं आ रहा है। <br /><br /><strong>प्रोत्साहन राशि की किश्तें की कम</strong> <br />पीसीपएनडीटी समन्वयक प्रमोद कंवर ने बताया कि पूर्व में मुखबिर योजना के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण संबंधी प्राप्त सूचना पर 3 किश्तों में ढाई लाख रुपए तक की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी जाती थी।  लेकिन अब इसे और व्यवहारिक और आकर्षक बनाते हुए सफल डिकाय आॅपरेशन पर मुखबिर, डिकाय गर्भवती महिला एवं सहयोगी को दो किश्तों में कुल तीन लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि का भुगतान दिया जा रहा है। योजना में निर्धारित ढाई लाख की राशि की पहली किश्त सफल डिकाय होने पर, दूसरी न्यायालय में परिवाद दर्ज होने एवं तीसरी किश्त फैसला आने पर दी जाती थी। अब मुखबिर, डिकाय गर्भवती महिला एवं सहयोगी को पहली किश्त सफल डिकाय होने एवं दूसरी किश्त न्यायालय में अभियोजन पक्ष के समर्थन में बयान के बाद दी जाने का प्रावधान किया है। कोटा में अभी नई योजना लागू होने के बाद किसी मुखबिर ने इस योजना का लाभ नहीं उठाया है। गांवों में इसका व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो रहा है। जिससे मुखबिर तंत्र कमजोर हो गया है। <br /><br /><strong> गर्भवती महिला को दो किश्तों में 1.5 लाख रुपए</strong> <br />डिकॉय आॅपरेशन में गर्भवती महिला की अहम भूमिका होती है।  गर्भस्थ शिशु की जोखिम एवं गर्भवती महिला को परेशानी को ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिला की राशि में बढ़ोतरी की गयी है।  पहले गर्भवती महिला को तीन किश्तों में कुल एक लाख रुपए की राशि दी जाती थी।  अब उसे दो किश्तों में कुल डेढ़ लाख रुपए की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी जा रही है। साथ ही पूर्व में मुखबिर को तीन किश्तों में 33 हजार 250 प्रति किश्त, सहयोगी को 16 हजार 625 रुपए प्रति किश्त मिलते थे।  लेकिन अब मुखबिर को दो किश्तों में 50-50 हजार रुपऐ एवं सहयोगी को 25-25 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा रहा है। <br /><br /><strong>टोल फ्री नंबर पर आज तक नहीं आई सूचना</strong> <br />लिंग परीक्षण की सूचना देने के लिए और नवीन मुखबिर योजना के क्रियान्वयन से आमजन का भ्रूण लिंग परीक्षण रोकथाम में और अधिक सहयोग और इसकी शिकायत  के लिए टोल फ्री नम्बर 104/108 एवं वाट्सएप नंबर 9799997795 जारी कर रखा है लेकिन इन नंबर पर आज तक किसी मुखबिर ने सूचना नहीं दी है।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />नई मुखबिर योजना में तीन लाख रुपए की राशि करने के बाद अभी तक कोटा जिले में किसी व्यक्ति इस योजना से राशि प्राप्त नहीं की है। लोगों लिंग परीक्षण नहीं कराने और सोनोग्राफी सेंटरों में लिंग परीक्षण नहीं हो इसकी सघन जांच के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सभी सेंटरों पर मुखिबर योजना के प्रचार प्रसार के लिए पोस्टर लगे हुए है।  जिले के 110 से अधिक  स्थानों जांच की जा चुकी है। मुखबिर योजना के लिए लोगो प्रोत्साहित किया जा रहा है। <br /><strong>- प्रमोद कंवर, पीसीपीएनडीटी समन्वयक कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incentive-scheme-increased--but-information-did-not-come-from-anywhere/article-13154</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incentive-scheme-increased--but-information-did-not-come-from-anywhere/article-13154</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 14:54:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/protsahan-yojana-badhai-lekin-suchna-kahi-se-nahi-aai.jpg"                         length="49091"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रैकर को ट्रैक करें तो बच सकती हैं लाडलियां</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने ,बाल लिंगानुपात में सुधार के लिए सोनोग्राफी सेंटरों की नियमित मॉनीटरिंग तो की जाती है लेकिन सोनोग्राफी सेंटर के एक्टिव ट्रैकर की सिर्फ लाल और हरी लाइन की ही जांच की जाती है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-track-the-tracker--then-girls-can-be-saved/article-9029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/tracker-sonography-kota-news-.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने ,बाल लिंगानुपात में सुधार के लिए सोनोग्राफी सेंटरों की नियमित मॉनीटरिंग तो की जाती है लेकिन सोनोग्राफी सेंटर के एक्टिव ट्रैकर की सिर्फ लाल और हरी लाइन की ही जांच की जाती है। किसी एक्टिव ट्रैकर में भू्रण लिंग परीक्षण किया तो लाल लाइट ऑन हो जाती है । वह जब तक चालू रहती है जब तक एक्टिव ट्रैकर को खोला नहीं जाए।  भ्रूण लिंग परीक्षण से जुड़े संदेह व्यक्ति एवं संस्थानों के चिह्नीकरण में स्वयंसेवी संस्थाओं संगठनों का सहयोग लेकर पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों की सख्ती से पालना गाइड लाइन बना रखी है लेकिन उसकी पालना कम होती है। उल्लेखनीय है कि  पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत राज्य शासन ने लिंग परीक्षण रोकने व नियमों में कड़ाई बरतने के उद्देश्य से सभी सोनोग्राफी सेंटर में लगे एक्टिव ट्रैकर सिस्टम के जांच करने के निर्देश दे रखे हंै। ताकि लिंग परिक्षण करने वाले सेंटरों को पकड़ा जा सके। इससे भ्रूण हत्या के मामलों में लगाम कसी जा सके। लेकिन सीपीएनडीटी समन्वयक एक्टिव ट्रैकर की लाल व हरी लाइट की जांच कर इतिश्री कर लेते हैं। प्रदेश में एक्टिव ट्रैकर को खोलने वाले प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी नहीं होने से लाल लाइन आॅन होने पर सोनोग्राफी के ट्रैकर खोलने का प्रावधान है। इसके लिए भी पहले कमेटी गठित कर उसकी निगरानी में खोला जाता है। ऐसे में लिंग परीक्षण हो रहा या नहीं इसका ठीक से पता नहीं चलता है। कारण जिले में मुखबीर योजना में आज तक एक भी व्यक्ति ने लिंग परीक्षण की सूचना नहीं दी है। <br /><br /><strong>एक्टिव ट्रैकर डाटा विश्लेषण नहीं होता</strong><br /> सोनोग्राफी मशीनों पर भ्रूण लिंग परीक्षण पर नजर रखने के लिए एक्टिव ट्रैकर (साइलेंट आब्जर्वर) लगाए गए थे। एक्टिव ट्रैकर से अभी तक एक भी भ्रूण लिंग जांच का केस पकड़ा नहीं गया जबकि दावा था कि इस तकनीक से लिंग जांच करते ही डॉक्टर पकड़ में आ जाएंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक एक्टिव ट्रैकर का डाटा विश्लेषण नहीं हो पाया है। अधिकारियों के पास यह रिकॉर्ड तक नहीं है कि सील की जा चुकी मशीनों में से कितनों का डाटा विश्लेषण किया गया। प्रदेश में अब तक लिंग जांच के सभी मामलों में डिकॉय आॅपरेशन के तहत ही कार्रवाई हुई है। इससे एक्टिव ट्रैकर ज्यादा उपयोगिता साबित नहीं हो रही है। <br /><br /><strong>इस तरह काम करता है ट्रैकर</strong> <br />पीसीपीएनडीटी समन्वय प्रमोद तंवर ने बताया कि यह बाहरी डिवाइस है जो मेमोरी चिप की तरह काम करती है। सोनोग्राफी मशीन में पोर्ट बनाकर इसे फिट कर दिया जाता है। मशीन जैसे ही चालू होती है ट्रैकर में रिकार्डिंग शुरू हो जाती है। सोनोग्राफी मशीन की स्क्रीन में जो भी दिखाई देता है वह सब ट्रैकर में स्टोर होता जाता है। ट्रैकर को इस तरह सील किया जाता है कि सोनोग्राफी संचालक इससे छेड़छाड़ ही नहीं कर सकते। ट्रैकर लगाने वाली कंपनी सेंटर संचालक को यूजर आईडी और पासवर्ड देती है, जिससे वह ट्रैकर की आॅनलाइन स्टेट्स देख सकता है। एक ट्रैकर की कीमत करीब 30 हजार है।<br /><br /><strong>समय पर  एक्टिव ट्रैकर की जांच होती रहे तो बच सकती है कई बेटियां</strong><br />राज्य व जिला स्तर पर बनी पीसीपीएनडीटी (प्री कॉसेप्शनल एंड प्री नैटल डायग्नोस्टिक टेक्निक) कमेटी के सदस्यों को सोनोग्राफी केंद्रों के ट्रैकर का डाटा परीक्षण कराने का अधिकार है। बड़ी बात है कि कितने ट्रैकरों का डाटा लेकर परीक्षण किया गया, इसका संबंधित अधिकारियों के पास कोई डाटा नहीं है। अगर जिला स्तर पर पीसीपीएनडीटी कमेटी के सदस्य एक्टिव होकर ट्रैकर का डाटा जांचते तो कई बेटियों को कोख में बचाया जा सकता है। गौरतलब है कि 15 जुलाई 2015 को सोनोग्राफी मशीनों पर ट्रैकर लगवाना अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन इनका डाटा आज तक  प्रदेश भर में कहीं विश्लेषण नहीं किया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />जिले में वर्तमान में 116 सोनोग्राफी सेंटर संचालित किया जा रहा है। जिसकी अनरवत जांच की जा रही है। शहर के सभी निजी व सरकारी सोनोग्राफी की सेंटरों की नियमित जांच और आॅनलाइन दस्तावेज की जांच की जा रही है। सोनो ग्राफी सेंटरों पर लगे एक्टिव ट्रैकर की लाल व हरी बती की जांच की जाती है। जिले में अभी तक किसी भी एक्टिव ट्रैकर में लाल लाइट नहीं जली है। सभी नियमों पालन कर रहे है। जिले में  किसी सोनोग्राफी मशीनों सील किया जाता है तो उसके एक्टिव ट्रैकर का डाटा विश्लेषण जयपुर से कराया जा सकता है।<br /><strong>-प्रमोद कंवर, पीसीपीएनडीटी समन्वयक कोटा</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-track-the-tracker--then-girls-can-be-saved/article-9029</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-track-the-tracker--then-girls-can-be-saved/article-9029</guid>
                <pubDate>Mon, 02 May 2022 16:57:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/tracker-sonography-kota-news-.jpg"                         length="38518"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक MRI पर 21 लाख की आबादी निर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में सभी तरह की नि:शुल्क जांच व्यवस्था 1 अप्रैल से शुरू कर दी है, लेकिन संसाधन वही है। स्थिति ऐसी है कि मेडिकल कॉलेज में स्थित एक मात्र एमआरआई मशीन पर पूरे जिले के 21 लाख लोग निर्भर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/21-lakh-population-dependent-on-one-mri/article-7222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/10.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में सभी तरह की नि:शुल्क जांच व्यवस्था 1 अप्रैल से शुरू कर दी है, लेकिन संसाधन वही है। स्थिति ऐसी है कि मेडिकल कॉलेज में स्थित एक मात्र एमआरआई मशीन पर पूरे जिले के 21 लाख लोग निर्भर है। क्योंकि, सरकारी क्षेत्र में यही पर एमआरआई स्थापित है। ऐसे में नि:शुल्क जांच होने पर पूरे जिले के लोग यही पर आएंगे। जबकि, यहां नि:शुल्क जांच से पूर्व ही 10 दिन तक वेटिंग रहती थी। ये वेटिंग करीब एक माह आगे बढ़ने की संभावना है। सोनोग्राफी मशीन की स्थिति भी ठीक नही है। ये भी सीमित संख्या में है। मेडिकल कॉलेज सभी अस्पतालों को मिलाकर इनकी संख्या आधा दर्जन है। यहां पर भी एक- एक सप्ताह की वेटिंग रहती थी। ये और बढ़ जाएगी। सीटी स्कैन का मामला तो और भी खराब है। इनकी संख्या भी 2 ही है। यहां पर भी परेशानी होगी। अगले एक सप्ताह में समस्या व्यापक हो जाएगी। संसाधनों के स्टाफ की भी दिक्कत होगी। ये भी अपर्याप्त है। इन कार्मिकों की संख्या भी कम है। ऐसे में दिक्कत होना स्वाभाविक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/21-lakh-population-dependent-on-one-mri/article-7222</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/21-lakh-population-dependent-on-one-mri/article-7222</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 17:48:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/10.jpg"                         length="52601"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष में लगा ताला</title>
                                    <description><![CDATA[ सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब ढाई माह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 16 लाख रुपए लागत की सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी। लेकिन आज भी महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है।  सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sonography-room-locked-due-to-not-having-a-sonologist/article-7156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sonogra.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब ढाई माह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 16 लाख रुपए लागत की सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी। लेकिन आज भी महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है। ब्लॉक क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आने वाली सीएचसी सोनोग्राफी मशीन को लगाए हुए ढाई माह से अधिक समय हो गया है। लेकिन आम जनता को अभी तक सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा हुआ है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब दो दर्जन मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है। उन्हें कोटा या फिर निजी अस्पतालों में जा कर के अपना उपचार कराना पड़ता है। चिकित्सालय प्रशासन द्वारा इस मामले में कई बार उच्चाधिकारियों को सोनोलॉजिस्ट लगवाने के लिए अवगत करा दिया गया है। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। गंभीर हालत में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं को भी बिना सोनोग्राफी जांच के ही 40 किलोमीटर दूर कोटा जाना मजबूरी बन गया है।<br /><br /><strong>लंबे संघर्ष के बाद मिली थी सोनोग्राफी मशीन</strong><br />सोनोग्राफी मशीन की सुविधा को लेकर युवा शक्ति द्वारा आंदोलन चलाया गया था। जिसमें युवाओं के साथ ही कस्बे वासियों एवं महिलाओं ने भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए योगदान दिया था। जिसके फलस्वरूप लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के द्वारा ग्रामीणों की मांग पर एवं नगर के लोगों की मांग पर सोनोग्राफी मशीन की घोषणा कर सीएचसी में मशीन उपलब्ध करवाई थी। लेकिन ढाई माह बाद भी इसे नियमित रूप से शुरू नहीं कराया जा सका है। <br /><br /><strong>धूल खा रही 16 लाख से अधिक की मशीन</strong><br />स्थिति यह है कि 16 लाख से अधिक राशि की यह मशीन धूल खा रही है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि विभाग के पास सोनोलॉजिस्ट नहीं है। लेकिन सोनोलॉजिस्ट लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों का भी कोई ध्यान नहीं है। जबकि सीएचसी मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आता है जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधि चाहे तो प्रतिनियुक्ति पर ही सोनोलॉजिस्ट लगा कर के नगर वासियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को राहत पहुंचा सकते हैं। <br /><br /><strong>रात्रि में नहीं मिलती महिला चिकित्सक</strong><br />तहसील क्षेत्र की सबसे बड़ी सीएचसी में स्थानीय चिकित्सकों द्वारा मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर आॅपी सामर के आने के बाद चिकित्सालय में सुविधा विस्तार भी हुआ है तो वहीं यहां कार्यरत डॉ मोहम्मद परवेज डॉ श्याम मालव डॉ दिनेश मीणा आदि द्वारा चिकित्सालय में बेहतरीन उपचार भी दिया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी कमी यह है कि यहां महिला रोगियों को चिकित्सालय में रात्रि के समय कोई महिला चिकित्सक नहीं मिलती। दिन में भी कभी-कभी ही महिला चिकित्सक का उपचार मिल पाता है। ऐसे में क्षेत्र के बाशिंदों की पीड़ा यह है कि यदि कोई महिला गंभीर बीमार हो जाए तो उपचार तक के लिए यहां आस-पास कोई डॉक्टर तक नहीं मिलता। ऐसे में कोटा जाना महिलाओं की मजबूरी बन गई है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />सोनोलॉजिस्ट की समस्या का शीघ्र ही समाधान किया जाएगा। साथ ही महिला चिकित्सक रात्रि में नहीं रुकने की शिकायत के लिए भी संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर समाधान कराया जाएगा।<br />-रामनारायण मीणा, विधायक <br /><br />सुल्तानपुर चिकित्सालय में मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। साथ ही मरीजों को निशुल्क दवाइयां देकर के उपचार किया जा रहा है। सोनोलॉजिस्ट के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। साथ ही महिला चिकित्सक के लिए भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख दिया है।<br />-डॉक्टर ओपी शर्मा, सीएचसी प्रभारी  <br /><br />सीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं होने की शिकायतें मिली हैं। सीएचसी प्रभारी को कार्यवाही करनी चाहिए। सोनोग्राफी मशीन चलाने के लिए भी पत्र लिखा हुआ है।<br />-डॉ गिरिराज मीणा, बीसीएमओ</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sonography-room-locked-due-to-not-having-a-sonologist/article-7156</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sonography-room-locked-due-to-not-having-a-sonologist/article-7156</guid>
                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 16:31:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/sonogra.jpg"                         length="35724"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        