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                <title>rites - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>वन्यजीवों के अन्तिम संस्कार के लिए बनाया यंत्र, पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के पहले मिनी शवदाह गृह से रुकेगी अंग तस्करी , अवशेषों की खाद से महकेगी विभाग की नर्सरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/device-developed-for-the-dignified-cremation-of-wildlife%E2%80%94also-environmentally-safe/article-149692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। क्षेत्रीय वन्य जीव मंडल ने वन्यजीवों के सम्मानजनक निस्तारण की दिशा में एक अनूठी पहल की है। जिले में अब घायल वन्यजीवों और पक्षियों की मृत्यु के बाद उनके शवों को जमीन में दफनाने की पारंपरिक मजबूरी खत्म होगी। विभाग ने एक विशेष 'ओवननुमा शवदाह गृह' तैयार किया है, जो न केवल पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है, बल्कि वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को रोकने में भी अभेद्य कवच साबित होगा।</p>
<p><strong>विभाग ने बनाया प्रदेश का पहला मिनी शवदाह गृह</strong><br />प्रदेश में पहली बार अन्तिम संस्कार के लिए बने यंत्र से अंतिम संस्कार होगा। नयापुरा स्थित क्षेत्रीय वन्य जीव कार्यालय कोटा ने इसे बनाकर तैयार कर लिया है। जिसमें जिले भर से लाये गये घायल व इलाज के दौरान दम ताेड़ने वाले जानवराें, पक्षीयों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। कोटा मेें इस पहल की शुरूआत जल्द ही होने वाली है।</p>
<p><strong>अहमदाबाद से मिली प्रेरणा से बनाया मिनिएचर</strong><br />डीसीएफ (वाइल्डलाइफ) अनुराग भटनागर ने बताया कि गुजरात दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि वहां हाथियों जैसे बड़े जानवरों के लिए विशाल शवदाह गृह बने हुए हैं। जिनमें वाहन से लाये गये बड़े से बड़े जानवर को सीधे ही रखा जा सकता है। राजस्थान में फिलहाल इसके लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं था। इसलिए कोटा टीम ने उसी तकनीक का एक मिनिएचर मॉडल स्थानीय स्तर पर तैयार करवाया। नयापुरा स्थित वन्य जीव कार्यालय में जमीन की कमी और बारिश में दुर्गंध की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p><strong>गैस आधारित कम खर्चीला व सुरक्षित</strong><br />इसे बनाने में विभाग के एडेप्टिव स्कीम से बचे पैसे से कुल 3.25 लाख रूपये की लागत में ही इसे तैयार कर लिया। इस शवदाह यंत्र की बनावट बेहद मजबूत है। जिसे आधुनिक और वैज्ञानिक मापदंडों पर तैयार किया गया है। इसमें अन्य छोटे जीवो के अलावा भेड़िया ,लोमड़ी ,बन्दर , व्यस्क चिंकारा , हिरण जैसे जानवरों का निस्तारण किया जा सकेगा। गैस आधारित संचालन प्रक्रिया को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इसमें तीन गैस कनेक्शन का आवेदन किया गया है, ताकि शव को पूरी तरह भस्म किया जा सके।</p>
<p><strong>6 एमएम की लोहे की चादर से निर्मित</strong><br />विशाल आकार यह ओवननुमा यंत्र करीब 9 फीट लंबा, पौने चार फीट चौड़ा और साढ़े चार फीट ऊंचा है। इसका ढ़ांचा मोटी चद्दर की दोहरी परत से बनी हैं, जिससे इसकी कुल मोटाई 4 इंच हो जाती है। जिसमे एक साथ 6 बर्नर से ऐ साथ गैस ड़ाली जाती है यह संरचना उच्च तापमान को बर्दाश्त करने में सक्षम है।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण तस्करी पर रोक</strong><br />परंपरागत रूप से जानवरों को जमीन में दफन करने पर हड्डीयों व अंगों की चोरी या दुरुपयोग का जोखिम बना रहता है। इस मशीन में शव पूरी तरह राख में तब्दील हो जाएगा, जिससे तस्करी की संभावनाएं शून्य हो जाएंगी। साथ ही, बारिश के मौसम में जमीन से आने वाली दुर्गंध और संक्रमण का खतरा भी टल जाएगा।</p>
<p><strong>वेस्ट टू वेल्थ हड्डियों के पाउडर से बढ़ेगी वन भूमि की उर्वरता</strong><br />चिड़ियाघर और बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के भोजन के बाद रोजाना करीब 80 से 85 किलो हड्डियां बचती हैं। पर्यावरण नियमों के तहत इन्हें बाहर नहीं फेंका जा सकता। अब इन हड्डियों को इस भट्टी में जलाने के बाद क्रशर मशीन से पीसा जाएगा। इस पाउडर का उपयोग विभाग की नर्सरी और वन भूमि में खाद के तौर पर होगा, जिससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और जानवरों के अवशेषों का कोई दुरुपयोग नहीं हो सकेगा।</p>
<p>बजट की कमी के बावजूद हमने वन्यजीवों के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए यह यंत्र तैयार करवाया है। इससे न केवल स्वच्छता रहेगी, बल्कि बहुमूल्य वन्यजीव अंगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीसीएफ वाइल्डलाइफ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:16:39 +0530</pubDate>
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                <title>कई गांव श्मशान से वंचित, खेतों में अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[शव के पास खड़े लोग घंटों भीगते रहे और ग्रामीणों की आंखों के सामने वह मंजर किसी भयावह तस्वीर से कम नहीं था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/many-villages-deprived-of-crematorium--last-rites-performed-in-fields/article-124503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबडौद।  छीपाबडौद तहसील क्षेत्र के आसपास आज भी ऐसे गांव हैं। जहां श्मशान घाट तक नहीं है। गगचाना ग्राम पंचायत के नियाना गांव की हकीकत जानकर दिल पसीज जाएगा। गांव में जब कोई गुजर जाता है तो परिजन शव को खेत में ले जाते हैं और वहीं अंतिम संस्कार करते हैं। सोचिए, बारिश हो या धूप  खुले आसमान के नीचे ही चिता सजाई जाती है। न टीन शेड, न चबूतरा, न कोई सुविधा। 21वीं सदी में भी इंसान की आखिरी यात्रा इतनी बेबस हो सकती है  यह किसी को भी झकझोर देगा।</p>
<p><strong>बारिश में बुझती रही चिता</strong><br />हाल ही में गांव के श्रवणलाल मेघवाल का निधन हुआ। परिजन जब अंतिम संस्कार करने पहुंचे तो आसमान से मूसलधार बारिश शुरू हो गई। कई बार चिता में आग लगाने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार आग बुझ गई। शव के पास खड़े लोग घंटों भीगते रहे और ग्रामीणों की आंखों के सामने वह मंजर किसी भयावह तस्वीर से कम नहीं था। कई घंटे बाद बड़ी मुश्किल से चिता जली। ग्रामीण कहते हैं कि मौत के बाद इंसान को शांति मिलनी चाहिए, लेकिन हमारे गांव में तो अंतिम संस्कार ही सबसे बड़ी पीड़ा बन गया है। बरसों से यही हाल है, पंचायत को बार-बार बताया गया पर कोई समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>पंचायत की चुप्पी और सिस्टम पर सवाल</strong><br />ग्राम पंचायत और प्रशासन की लापरवाही अब सवालों के घेरे में है। आखिर कब तक इस गांव के लोग अपने अपनों को खेतों में जलाने को मजबूर रहेंगे? क्या यह सभ्य समाज के माथे पर कलंक नहीं है?</p>
<p><strong>यह अकेले नियाना की हकीकत नहीं</strong><br />सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आज भी कई गांव ऐसे है। जहां श्मशान घाट तक नहीं बने हैं। अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ग्रामीण खेतों, नालों या खुले स्थानों का सहारा लेते हैं। यह तस्वीर सिर्फ नियाना की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की हकीकत बयां करती है।</p>
<p><strong>गांव के बुजुर्गों ने आंसू भरी आंखों से कहा</strong><br />"हमने अपने माता-पिता, रिश्तेदारों सभी का अंतिम संस्कार ऐसे ही खेतों में किया है। बरसात में सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। कई बार पंचायत को कहा, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।"</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यह बेहद दु:खद है कि आज भी हमारे गांव में श्मशान घाट नहीं है। पंचायत और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। <br /><strong>- बृजेश वैष्णव, पूर्व वार्ड पंच </strong></p>
<p>बरसात के दिनों में शव जलाना सबसे बड़ी मुश्किल बन जाता है। कीचड़ में फिसलते हुए खेत तक पहुंचना पड़ता है और चिता जलाना तो और भी कठिन होता है। <br /><strong>- मेघराज नागर, ग्रामीण </strong></p>
<p>सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हमारे गांव के लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार तक सम्मानपूर्वक नहीं कर पा रहे हैं। यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।<br /><strong>- लड्डूलाल, ग्रामीण </strong></p>
<p> श्मशान घाट न होना समस्या है। भूमि चयन नहीं होने के कारण मामला अटका हुआ है। जल्द ही इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।<br /><strong> -द्रौपदी धाकड़, सरंपच प्रशासक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 16:03:09 +0530</pubDate>
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                <title>बैंसला का अंतिम संस्कार: नम आंखों से कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को अंतिम विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[आंदोलन के केंद्र स्थली दौसा पर उन्हें श्रद्धांजलि देने उमड़ा जन-सैलाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/last-rites-of-bainsla--last-farewell-to-colonel-kirori-singh-bainsla-with-moist-eyes/article-7185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/14new-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>दौसा/करौली। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को आज हर किसी ने नम आंखों से विदाई दी। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पार्थिव देह शुक्रवार को उनके पैतृक गांव मुंडिया (करौली) पहुंचा। बैंसला के अंतिम दर्शन करने के लिए आम और खास मौजूद रहें। इससे पहले उनके आंदोलन के केंद्र स्थली रहे दौसा में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जन सैलाब उमड़ा।</p>
<p><br /> हजारों लोग, मंत्री-विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, समाज के पदाधिकारी मुंडिया गांव पहुंचे और कर्नल को अंतिम विदाई दी। बैंसला को अंतिम विदाई देने किसान नेता राकेश टिकैत, दिल्ली उपनेता प्रतिपक्ष रामवीर विधुड़ी, टोंक सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, मंत्री शकुंतला रावत, विधायक जोगेंद्र अवाना, जयपुर हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर, बीज निगम चेयरमैन धीरज गुर्जर, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समेत कई राजनीतिक सामाजिक हस्तियां मुंडिया गांव पहुंचकर बैंसला को अंतिम विदाई दी। <br /><br />बता दे कि कर्नल बैंसला का गुरुवार को निधन हो गया था। जयपुर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार को कर्नल बैंसला की शवयात्रा जयपुर के वैशाली नगर से सुबह छह बजे शुरू हुई। सेना के फूलों से सजे ट्रक में कर्नल की पार्थिव देह जहां से गुजरा वहां मौजूद लोगों ने बैसला को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। करीब 150 किलोमीटर के इस सफर में जगह-जगह बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और कर्नल जिंदाबाद के नारे लगाए।<br /><br />गुर्जर समाज के पुरोधा माने जाने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पार्थिव देह जयपुर से रवाना होकर सुबह करीब 10-11 बजे सिकंदरा, मानपुर पर पहुंची। जहां कर्नल बैंसला के अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान गुर्जर समाज के महिला और पुरुष हर कोई कर्नल बैंसला के अंतिम दर्शन के लिए लालायित नजर आया। कर्नल बैंसला गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष हुआ करते थे और उन्होंने गुर्जर समाज को आरक्षण देने की मांग को लेकर बड़े आंदोलन किए थे। उनके आंदोलन के केंद्र स्थली दौसा रहा था।  ऐसे में उनके प्रति लोगों का प्यार आज भी देखने को मिला जब उनकी पार्थिव देह नेशनल हाईवे 21 से गुजरा तो जगह-जगह भीड़ नजर आईं। इस दौरान सिकंदरा चौराहे पर सड़क पर गुलाल से लिखा गया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला अमर रहें वहीं मौजूद लोग भी जमकर नारे लगाते रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला अमर रहें। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 18:59:26 +0530</pubDate>
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