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                <title>six months - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मेज नदी की पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त, पानी से होकर गुजरने पर मजबूर ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[सादेड़ा-विषधारी मार्ग अवरुद्ध ,  मेज नदी को पार करना बना जोखिम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/mej-river-culvert-damaged-for-six-months--villagers-forced-to-wade-through-water/article-146812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के सादेड़ा से विषधारी मार्ग पर मेज नदी की पुलिया पिछले लगभग छह महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिससे इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। पुलिया टूटने के कारण राहगीरों और श्रद्धालुओं को तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके संबंधित विभाग अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।जानकारी के अनुसार सादेड़ा से संगमेश्वर (समेला) महादेव होते हुए विषधारी जाने वाले मुख्य ग्रेवल मार्ग पर मेज नदी में एक छोटी पुलिया बनी हुई थी। इसी पुलिया के माध्यम से दोनों ओर से आने-जाने वाले ग्रामीण और वाहन चालक आवागमन करते थे। मेज नदी और बेजाण नदी में कम पानी का बहाव होने पर भी इसी पुलिया से पानी निकल जाता था और लोगों को आवागमन में सुविधा रहती थी। गत वर्ष लंबे समय तक हुई बारिश के कारण यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से पर गहराई बढ़ जाने से यहां से वाहन निकलना असंभव हो गया है। इसके बाद से ही यह मार्ग अवरुद्ध पड़ा है। अब लोगों को विषधारी पहुंचने के लिए कल्याणपुरा और कालानला होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। पैदल राहगीर जब इस स्थान से गुजरते हैं तो उन्हें तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कपड़े भी भीग जाते हैं और जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि पास ही स्थित धार्मिक स्थल संगमेश्वर (समेला) महादेव के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि मेज और बेजाण नदी के ऊपरी क्षेत्रों में बड़े बांध बने हुए हैं, जिनसे नहरों में पानी छोड़ा जाता है। ऐसे में अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>अस्थायी रास्ता बारिश की भेंट चढा</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष मिनी डैम निर्माण कार्य के दौरान पुलिया के क्षतिग्रस्त स्थान पर मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता बनाया गया था, लेकिन बारिश में वह भी बह गया। तब से यह मार्ग बंद पड़ा है, जिससे क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुलिया का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>इन गांवों से पहुंचते श्रद्धालु</strong><br />नैनवां सहित हिण्डोली दोनों उपखंडों की ग्राम पंचायतों के निकट यह मंदिर है। यहां विषधारी, डाबेटा, दरा का नयागांव, भण्डेड़ा, सादेड़ा, बांसी, रामगंज, कल्याणपुरा, गुजरियाखेड़ा, दुगारी, उरांसी, मानपुरा, डोड़ी, सांवतगढ़, निमोद, भजनेरी, मरां, मुण्डली, कालानला सहित अन्य गांवों के श्रद्धालु भगवान के दर्शनार्थ पहुंचते है। भण्डेड़ा क्षेत्र से इस रुट द्वारा आवाजाही करने पर जिला मुख्यालय की दूरी कम हो जाती है। अभी भी सैकड़ों राहगीर शॉर्टकट की वजह से रोजमर्रा ही जानजोखिम में डालकर इस रुट पर अपना सफर तय करते है पर संगमेश्वर की पुलिया व रास्ते की वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है। </p>
<p><strong>पुलिया व रास्ते की वजह से श्रद्धालुओं की राह में बाधाएँ</strong><br />श्रद्धालुओं ने बताया कि बारह गांव की मुख्य आस्था का केन्द्र संगमेश्वर (समेला) महादेव है। यहां पर बारिश के समय की खुबसूरती आनेवाले को आकर्षित करती है। यहाँ की हरियाली चतुदर्शी व अमावस्या पर श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। मगर इसके रास्ते पर संगमेश्वर की टूटी पुलिया एवं अभी तक किसी ने डामरीकृत सड़क नही बनवा पाए है। जो श्रद्धालुओं के लिए बारिश के समय एक चुनौती से कम नही है। बूंदी के लिए आवाजाही हेतु शॉर्टकट रास्ता भी है। पर संगमेश्वर पुलिया की वजह से परेशानी होती है। क्षेत्रीय लोगों को अन्य रुट से जाने पर 10 किमी का अतिरिक्त फेरा लगता है।  <br /><strong>-छोटूलाल जोशी, श्रद्धालु भण्डेडा, निवासी</strong></p>
<p>हमारे क्षेत्र की मुख्य आस्था का धार्मिकस्थल है। यहां पर बारिश के समय कच्ची पुलिया व जगह-जगह पर नाले पड़ते है। फिर भी श्रद्धालु इस समस्या का सामना करते हुए भी आते जाते है। जो काफी खतरे भरी राह से गुजरना होता है।  आवाजाही को लेकर डामरीकृत व सीसी सड़क बनाने को लेकर लंबे समय से मांग उठा रहे है। ग्रेवल रास्ते के बावजूद भी हरवर्ष दिनोंदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन किसी ने सुध नहीं ली है।<br /><strong>-निखिल शर्मा, रामगंज निवासी</strong></p>
<p>मेज नदी की संगमेश्वर पुलिया की वजह से क्षेत्रवासियों को परेशान झेलनी पड़ती है। बारिश के समय दोनों नदियों में पानी की लहरों का नजारा व हरियाली के कारण हर किसी को आकर्षित करती है।   लड्डू-बाटी चूरमा की गोट का नजारा आम होता है लेकिन बारिश के समय श्रद्धालुओं को नदी के पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।  समेला महादेव पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता परेशानी का सबब बना हुआ है। <br /><strong>- नारायण सिंह हाड़ा, श्रद्धालु</strong></p>
<p>क्षेत्र में बारह गांवों की मुख्य आस्था का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। संगमेश्वर महादेव का स्थान पर यहा पर तीन ग्राम पंचायतों की सीमा जुड़ा है। बारिश के समय दोनों नदियों की तरफ से आनेवाले रास्ते कच्चे है, बारिश के समय गहरे गड्ढे व कीचड़ हो जाता है।  इस राह को पार कर भगवान शिव तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पुलिया व कच्चे रास्ते की वजह से राहगीरों सहित श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ता है।  <br /><strong>- पदम कुमार जैन, बांसी निवासी</strong></p>
<p>यह पुलिया लंबे समय से टूटी होने से क्षेत्रीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। समेला महादेव मंदिर के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व संबंधित विभाग इस आधुनिक युग में भी डामरीकरण सड़क को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि  बरसाती दिनों में यहां का मनमोहक नजारा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करहीं होने से भक्तों को परेशानी होती है।<br /><strong>-रोहित कुमार शर्मा, भण्डेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहा है </strong><br />यह पुलिया डामरीकृत सड़क नहीं है। मेज नदी की पुलिया का कार्य हमारे अधीन में नहीं है। हमारे अधीन में होती तो दुरूस्त करवाया जाता हो सकता है ग्राम पंचायत द्वारा किसी मद से पुलिया का निर्माण करवाया गया होगा। <br /><strong>- रेवतीरमन शर्मा, जेईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग देई-नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:03:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>करीब छह माह से नहीं बह रही चम्बल माता से जलधारा</title>
                                    <description><![CDATA[रिवर फ्रंट के आकर्षणों में से एक आकर्षण हैं मूर्ति से बहती जलधारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-stream-from-chambal-mata-has-not-flowed-for-nearly-six-months/article-134668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक तरफ तो शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां देश विदेश से पर्यटकों को लाकर यहां के पर्यटन स्थलों को दिखाने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यहां के पर्यटन स्थलों की सुध तक नहीं ली जा रही है। जिसका नजीता है चम्बल रिवर फ्रंट। रिवर फ्रंट पर बैराज साइड पर लगी चम्बल माता की विशाल मूर्ति से पिछले करीब 6 माह से जल धारा तक नहीं बह रही है। जिससे वहां आने वाले बाहरी पर्यटक ही नहीं स्थानीय लोग भी उस मनोरम दृश्य को देखने से वंचित हो रहे हैं। रिवर फ्रंट के आकर्षणों में से एक आकर्षण हैं मूर्ति से बहती जलधारा। लेकिन वहां आने वालों को काफी समय से यह जलधारा बहती हुई नजर ही नहीं आ रही है।रिवर फ्रंट घूमने गए लोगों का कहना है कि वीडियो व रील में तो चम्बल माता से जलधारा बहती हुई दिखती है। लेकिन जब वहां मौके पर गए तो जलधारा नजर ही नहीं आई। जिससे वहां जाकर भी निराशा ही मिली।</p>
<p><strong>धीरे-धीरे गायब हो रहे व्यू कटर</strong><br />रिवर फ्रंट बनने के बाद तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से बैराज के समानांतर पुल पर रिवर फ्रंट व बैराज साइड दोनों तरफ व्यू कटर लगाए गए हैं। जिससे पुल से गुजरने वाले वाहन चालक अंदर की तरफ नहीं देख सके। साथ ही वाहन चालकों को वहां रूकने से जाम की स्थिति भी नहीं बने। जबकि जब व्यू कटर नहीं लगे थे तब वहां पुल पर जाम की स्थिति बनी रहती थी।लेकिन हालत यह है कि वर्तमान में बैराज साइड से व्यू कटर धीरे-धीरे गायब हो रहे है। बैराज से सकतपुरा की तरफ जाते समय कहीं एक-दो तो कहीं आधा दर्जन से अधिक व्यू कटर टुकड़ों में गायब हो रहे हैं। शुरूआत में यह एक दो जगह से गायब हुए थे वहीं अब इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि कुछ लोगों ने बरसात के समय बैराज के गेट खुलने पर उनके पानी को देखने के लिए कुछ जगह से व्यू कटर तोड़े थे। लेकिन केडीए अधिकारियों की अनदेखी से उन्हें सही नहीं किया गया। जिससे अब यह अधिक जगह से गायब हो गए हैं। जिससे वहां काफी जगह हो गई है। ऐसे में वहां से किसी के झांकने पर गिरकर हादसा होने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p>इधर होटल फैडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा संभाग के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पर्यटन विभाग व केडीए अधिकारियों के साथ गत दिनों रिवर फ्रंट का अवलोकन किया था। इस दौरान वहां जो भी कमियां नजर आई उन्हें दुरुस्त करने के लिए कहा था। जिससे टूर एंड ट्रेवल मार्ट में आने वालों को अच्छा नजारा दिख सके। चम्बल माता की जलधारा को भी फिर से शुरू करने के लिए कहा है। अधिकारियों ने शीघ्र ही उसे चालू करने की बात कही है।</p>
<p><strong>पानी बंद होने पर सही करवाए जा रहे पम्प</strong><br />केडीए के सहायक अभियंता(विद्युत) ललित मीणा ने बताया कि चम्बल माता की मूर्ति में ऊपर तक पानी पहुंचाने के लिए जो मोटर व पम्प लगे हुए हैं वह चम्बल नदी में अंदर की तरफ है। हालांकि वहां चार दीवारी बनाई हुई है। लेकिन बरसात के समय में बैराज के गेट खोलने से पानी की आवक अधिक हो गई थी। जिससे वे पम्प पानी में अधिक डूब गए। पानी के साथ बहकर आई मिट्टी पम्प में जम गई थी। जिससे मोटर व पम्प बंद होने से मृूर्ति से जलधारा बंद हो गई थी। लेकिन अब गेट बंद होने व पानी कम होने से पम्प को निकालकर साफ कराया जा रहा है। शीघ्र ही फिर से जलधारा बहती नजर आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 15:29:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ईरान में पिछले छह माह में 354 लोगों को दी गयी फांसी</title>
                                    <description><![CDATA[ ईरान में 2023 की शुरुआती छह महीनों में कम से कम 354 लोगों को फांसी दी गयी है, जो 2022 की तुलना में बहुत अधिक है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/354-people-were-hanged-in-the-last-six-months-in/article-50857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ईरान में 2023 की शुरुआती छह महीनों में कम से कम 354 लोगों को फांसी दी गयी है, जो 2022 की तुलना में बहुत अधिक है। नॉर्वे स्थित ईरानी मानवाधिकार संगठन ने सोमवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>संगठन ने तेहरान पर आरोप लगाया है कि पिछले सितंबर में महसा अमिनी की मौत पर भड़के विरोध आंदोलन के मद्देनजर समाज में डर फैलाने के लिए लोगों को मौत की सजाएं दी जा रही हैं। उन्हें कथित तौर पर महिलाओं के लिए सख्त पोशाक नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।</p>
<p>इस वर्ष जनवरी से 30 जून तक 354 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। यह आंकड़ा 2022 में इसी अवधि की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है क्योंकि पिछले वर्ष 261 लोगों को ही फांसी दी गई थी। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ईरान में फाँसी से गैर-फ़ारसी जातीय समूह असमान रूप से प्रभावित होते हैं।  संगठन ने कहा कि अब तक फांसी की सजा पा चुके लोगों में से 20 प्रतिशत सुन्नी बलूच अल्पसंख्यक थे। ईरानी मानवाधिकार ने बताया कि फांसी की सजा पा चुके 354 में से 206 लोगों पर नशीली दवाओं की तस्करी करने का आरोप था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 126 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में फांसी दिए जाने वालों में छह महिलाएं थीं, जबकि दो पुरुषों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।</p>
<p>आईएचआर के निदेशक महमूद अमीरी-मोघदाम ने कहा कि मौत की सजा का इस्तेमाल सामाजिक भय पैदा करने और अधिक विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 17:11:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>छह माह बाद नगर पालिका में ईओ की नियुक्ति, कोटकासिम अधिशासी अभियंता को सौंपा अतिरिक्त कार्यभार</title>
                                    <description><![CDATA[गोविंदगढ़। नगर पालिका कार्यालय में बुधवार को नगर पालिका अधिशासी अधिकारी विक्की शर्मा कार्यभार ग्रहण किया। शर्मा को कोटकासिम से गोविंदगढ़ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। नगरपालिका पालिका चेयरमैन उर्मिला मेठी के द्वारा अधिशासी अधिकारी का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/govindgarh-news-after-six-months--the-appointment-of-eo-in-the-municipality--additional-work-assigned-to-kotkasim-executive-engineer/article-11687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/1232.jpg" alt=""></a><br /><p>गोविंदगढ़। नगर पालिका कार्यालय में बुधवार को नगर पालिका अधिशासी अधिकारी विक्की शर्मा कार्यभार ग्रहण किया। शर्मा को कोटकासिम से गोविंदगढ़ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। नगरपालिका पालिका चेयरमैन उर्मिला मेठी के द्वारा अधिशासी अधिकारी का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। मीडिया से बातचीत में अधिशासी अधिकारी विक्की शर्मा ने कहा कि उनका प्राथमिक कार्य आमजन के कार्यों को करना होगा, आमजन की समस्या को सुलझाया जाएगा, वही दूसरी तरफ अभी तक नगर पालिका कार्यालय में अधिशासी अधिकारी को अस्थाई तौर पर लगाया गया है।</p>
<p>उसके अलावा अन्य किसी भी स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है, जिसके चलते किस प्रकार से रुके हुए कार्य का संचालन संभव हो सकेगा। गौरतलब है कि गोविंदगढ़ ग्राम पंचायत थी, जिसे नगरपालिका घोषित किया गया था। छह माह पूर्व ग्राम पंचायत के कार्य समाप्त कर दिए गए, जिसके बाद से ही राशन कार्ड सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना जन्म प्रमाण पत्र मृत्यु प्रमाण पत्र विवाह पंजीयन के लिए कस्बे के नागरिक पंचायत समिति कार्यालय तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कोटकासिम के अधिशासी अधिकारी को गोविंदगढ़ नगरपालिका का कार्यभार सौंपा गया है। जबकि दोनों नगरपालिका मुख्यालयों के मध्य 87 किलोमीटर की दूरी है, ऐसे में किस प्रकार से दोनों कार्यों का संचालन अधिशासी अधिकारी कर पाएंगे इस दूरी के कारण जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jun 2022 12:57:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अफगानिस्तान के पास है गजब की तकनीक छह महीने तक रसीले बने रहते हैं अंगूर</title>
                                    <description><![CDATA[ यह मिट्टी के दो कटोरे होते हैं, जिसमें अंगूरों को रख कर उसे ऊपर से भी मिट्टी से ही सील कर दिया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghanistan-has-amazing-technology--grapes-remain-juicy-for-six-months/article-8129"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/angur.jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान ने कई सालों से युद्ध को झेला है। अब इसी अफ गानिस्तान में तालिबान सत्ता में आ गया है। लेकिन तालिबान और आतंकवाद की जगह अफ गानिस्तान की उस ऐतिहासिक तकनीक सामने आई है, जिसके जरिए लोग बिना किसी बिजली और बिना किसी रेफ्रीजरेटर के लंबे समय तक अंगूरों और फलों को ठंड के मौसम में बचा कर रखते हैं। यह तकनीक इतनी बेहतर है कि छह महीने तक लोग अंगूरों को सुरक्षित रख पाते हैं। अंगूरों को सुरक्षित रखने की यह तकनीक मिट्टी से बनी है। यह मिट्टी के दो कटोरे होते हैं, जिसमें अंगूरों को रख कर उसे ऊपर से भी मिट्टी से ही सील कर दिया जाता है। मिट्टी को मजबूत रखने के लिए भूसा मिला कर इन कंटेनरों को तैयार किया है।<br /><br /><strong>मिट्टी में नहीं जा पाती है हवा</strong><br />यह पूरी तरह से सील होते हैं, जिसमें किसी भी तरह की कोई हवा अंदर नहीं जा पाती है। सदियों से अफ गानिस्तान के उत्तरी ग्रामीण इलाकों में इसका इस्तेमाल होता रहा है, जिसे कंगिना कहा जाता है। अंगूरों के अलावा कई तरह के और फ लों को इसके जरिए सुरक्षित रखा जा सकता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह टेक्नोलॉजी आगे पहुंची है, लेकिन इसे अभी तक डॉक्यूमेंट नहीं किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 13:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>गोगागेट से शिलालेख गायब होने का मामला: अधिकारी ने पत्र लिखकर कहा था शिलालेखों का रखा जाए विशेष ध्यान</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--case-of-missing-inscriptions-from-gogagate--the-officer-wrote-a-letter-saying-that-special-attention-should-be-given-to-the-inscriptions--still-the-inscription-disappeared-from-goggate--officers-were-sitting-suppressing-the-matter-for-six-months/article-7194"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/shilalekh.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीकानेर स्थित दिल्ली दरवाजा जिसे लोग गोटागेट के नाम से जानते हैं। इस पर लगे रियासतकालीन शिलालेख के अपने मूल स्थान पर नहीं होने के मामले को करीब 6 माह हो गए हैं, लेकिन अभी तक विभाग पता नहीं लगाया पाया है कि आखिरकार शिलालेख कहां है। आलम ये है कि इस मामले को लेकर अभी तक कोई जांच कमेटी तक नहीं बनाई गई है।</p>
<p>सितम्बर 2021 से जनवरी, 2022 तक इस गेट का रिनोवेशन कार्य करने वाले ठेकेदार का कहना था कि काम शुरू करते समय गोगागेट पर कोई शिलालेख नहीं था, लेकिन उस समय बीकानेर सर्किल का चार्ज संभाल रहे अधिकारी ने 29 सितम्बर, 2021 को काम कर रहे संबंधित ठेकेदार को पत्र लिखकर कहा था कि बीकानेर शहर की चारदिवारी पर निर्मित दरवाजों कोटेगेट, नत्थूसरगेट, जस्सूसरगेट एवं गोगागेट पर चल रहे मरम्मत एवं सौंदर्यकरण के कार्य के दौरान इन दरवाजों पर लगे शिलालेखों एवं अन्य पुरामहत्वों की वस्तुओं के रख-रखाव का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही कार्य के दौरान इनमें किसी तरह का परिवर्तन तथा तोड़-फोड़ नहीं की जाए। गोगागेट से शिलालेख गायब होने के मामले को अधिकारी 6 माह से दबाए हुए थे। इस मामले में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक प्रदीप के. गावंडे का कहना है कि उस समय (तत्कालीन) बीकानेर वृत्त अधीक्षक रहे अधिकारी से रिपोर्ट ले रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 12:26:52 +0530</pubDate>
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