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                <title>partnership - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जापान और फिलीपींस ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया: प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए</title>
                                    <description><![CDATA[जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए और फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश गोपनीय सैन्य सूचना सुरक्षा और गश्ती पोतों के हस्तांतरण पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही एआई, अंतरिक्ष और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर सहयोग बढ़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-and-philippines-elevate-their-relations-to-the-level-of/article-155339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/takaichi.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान और फिलीपींस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह जानकारी जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा, "28 मई को जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए ने फिलीपींस गणराज्य के राष्ट्रपति फर्डिनेंड रोमुआल्डेज़ मार्कोस जूनियर से शिखर सम्मेलन किया, जो राजकीय अतिथि के रूप में जापान की यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया, जो फिलीपींस के लिए अपनी तरह की पहली साझेदारी है। यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।"</p>
<p>बयान में यह भी कहा गया है कि दोनों पक्ष गोपनीय सैन्य सूचनाओं की सुरक्षा के लिए एक समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि जापान और फिलीपींस गश्ती पोतों सहित उपकरणों के हस्तांतरण पर सहयोग में तेजी लाने का इरादा रखते हैं। इसके अतिरिक्त, जापान और फिलीपींस ने कथित तौर पर एशिया में आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने सहित आर्थिक सहयोग को और गहरा करने तथा कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, ऊर्जा और मानव संसाधन विकास में सहयोग विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में क्वाड देशों की बैठक जारी, जयशंकर ने कहा-हिन्द प्रशांत क्षेत्र के मुद्दों के समाधान के लिए विश्वसनीय और पारदर्शी साझेदारी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में क्वाड देशों (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। बैठक में समुद्री सुरक्षा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक विश्वास बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/meeting-of-quad-countries-continues-in-delhi-jaishankar-said/article-155007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना क्वाड देशों की साझा जिम्मेदारी है और विश्वसनीय तथा पारदर्शी साझेदारियों के बल पर ही इसे बेहतर ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता, संपर्क मार्गों के अवरोध बिंदु, विनिर्माण एवं संसाधन तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में कमी जैसे मुद्दों पर भी क्वाड देशों को ध्यान देना होगा।</p>
<p>जयशंकर ने मंगलवार को यहां भारत की मेजबानी में हो रही क्वाड देशों की बैठक में वहां के विदेश मंत्रियों, आस्ट्रेलिया की पेनी वोंग , जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो का स्वागत करते हुए यह बात कही। विदेश मंत्री ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विशेष फोकस रहेगा इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता, संपर्क मार्गों के अवरोध बिंदु, विनिर्माण एवं संसाधनों को बढाने तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में कमियों जैसे मुद्दों का समाधान भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अपनी विशिष्ट चिंताएँ भी हैं। इसके लिए रणनीतिक विश्वास को बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना, आर्थिक विकल्पों को प्रोत्साहित करना तथा गहरे सहयोगात्मक दृष्टिकोण को विकसित करना आवश्यक होगा। उन्होंंने कहा कि यह कार्य विश्वसनीय तथा पारदर्शी साझेदारियों को बढ़ावा देकर सबसे बेहतर ढंग से किया जा सकता है। जयशंकर ने कहा कि बीते समय में हमारे अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, आर्थिक सुदृढ़ता तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा,"हमने अनेक पहलों में उत्साहजनक प्रगति देखी है। समुद्री लोकतंत्रों, बहुलतावादी समाजों और बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, एक स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने की साझा जिम्मेदारी हमारी है। यह क्षेत्र वैश्विक विकास और स्थिरता का प्रेरक बना रहना चाहिए। हमें विश्वास है कि आज हमारी विचार-विमर्श प्रक्रिया इस बात को रेखांकित करेगी और उपयोगी एवं फलदायी सिद्ध होगी।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 13:23:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कैपिया ने जनरल कैटलिस्ट के नेतृत्व में जुटाए 63 मिलियन डॉलर, पीक एक्सवी पार्टनर्स और ज़ेड-47 ने भी दोहराया भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रैवल-फिनटेक प्लेटफॉर्म स्कैपिया ने जनरल कैटलिस्ट, पीक एक्सवी और ज़ेड-47 से $63 मिलियन का निवेश हासिल किया है। इस पूंजी का उपयोग भारत भर में ग्राहक आधार बढ़ाने और एआई-फर्स्ट उत्पाद विकास के लिए किया जाएगा। स्कैपिया फेडरल बैंक और बीओबी कार्ड के साथ मिलकर डुअल-नेटवर्क क्रेडिट कार्ड और 'स्कैपिया पे' जैसी सुविधाएं दे रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/scapia-raised-63-million-led-by-general-catalyst-peak-xv/article-154982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px5.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। भारत की अग्रणी ट्रैवल-फिनटेक कंपनियों में से एक, स्कैपिया ने जनरल कैटलिस्ट के नेतृत्व में 63 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग हासिल की है। इस निवेश दौर में मौजूदा निवेशकों पीक एक्सवी पार्टनर्स और ज़ेड—47 ने भी अपनी निरंतर भागीदारी बनाए रखी। इस पूंजी के जरिए स्कैपिया देशभर में अपने ग्राहक आधार का विस्तार करेगी और उत्पाद विकास व टीम निर्माण के अपने एआई-फर्स्ट दृष्टिकोण को और मजबूत बनाएगी।</p>
<p>स्कैपिया के फ़ाउंडर और सीईओ, अनिल गोटेटी, ने कहा, “हम जनरल कैटलिस्ट का भागीदार के रूप में स्वागत करते हुए बेहद उत्साहित हैं। साथ ही, पीक एक्सवी और ज़ेड—47 का लगातार समर्थन हमारे विज़न, उत्पाद और अब तक की यात्रा में उनके मजबूत विश्वास को दर्शाता है। आज स्कैपिया केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि एक व्यापक ट्रैवल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो चुका है, जिसे उस नई भारतीय पीढ़ी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो यात्रा को अपनी जीवनशैली का अहम हिस्सा मानती है। यह निवेश हमें अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने, ग्राहकों को बेहतर अनुभव और अधिक मूल्य देने, ब्रांड की पहुँच बढ़ाने और बेहतरीन प्रतिभाओं को साथ जोड़ने में मदद करेगा। साथ ही, हम एक मजबूत एआई-फर्स्ट संस्कृति और उत्पाद सोच विकसित करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य ऐसे उत्पाद तैयार करना है, जो लोगों को अधिक यात्रा करने और बेहतर जीवन अनुभव जीने के लिए प्रेरित करें।”</p>
<p>स्कैपिया ने युवा और यात्रा पसंद करने वाले भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक ऐसा वित्तीय प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो यात्रा की खोज, योजना, बुकिंग और पूरे अनुभव को अधिक सहज, सरल और एकीकृत बनाता है। कंपनी उन दो प्रमुख रुझानों के केंद्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही है, जिनमें युवाओं के बीच तेजी से बढ़ता यात्रा उत्साह और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को बढ़ता अपनाव शामिल है। पिछले वर्ष की तुलना में प्लेटफॉर्म पर फ्लाइट बुकिंग में 5 से 6 गुना और स्टे बुकिंग में 8 गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाली बुकिंग में भी लगातार उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p>इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा पूरे भारत में स्कैपिया ब्रांड को मजबूत बनाने और एक विश्वस्तरीय एआई-आधारित संगठन तैयार करने में निवेश किया जाएगा। भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल है, जो स्वाभाविक रूप से एआई तकनीक के साथ सहज और तेजी से जुड़ने वाली पीढ़ी मानी जाती है। यही कारण है कि आज भारतीय उपभोक्ता अधिक स्मार्ट, व्यक्तिगत और सहज अनुभव देने वाले उत्पादों की अपेक्षा कर रहे हैं। साथ ही, देश का प्रतिभाशाली कार्यबल भी ऐसे नवाचारपूर्ण समाधान विकसित करने की मजबूत क्षमता रखता है। यह निवेश स्कैपिया को इंजीनियरिंग, उत्पाद, डेटा साइंस और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में शीर्ष एआई प्रतिभाओं को आकर्षित करने, विकसित करने और लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखने में मदद करेगा।</p>
<p>जनरल कैटलिस्ट के इंडिया और एमईएनए सीईओ, नीरज अरोड़ा, ने कहा, भारत की अगली बड़ी उपभोक्ता कंपनियाँ केवल पारंपरिक मॉडलों के डिजिटल रूपांतरण से नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और नए उपभोक्ता व्यवहारों की गहरी समझ के आधार पर उभरेंगी। स्कैपिया ने बहुत शुरुआती चरण में ही यह पहचान लिया था कि नई भारतीय पीढ़ी के लिए यात्रा अब सिर्फ एक आकांक्षा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुकी है। पिछले एक वर्ष में ग्राहकों की संख्या में सात गुना वृद्धि और ट्रैवल इकोसिस्टम में कंपनी की मजबूत पकड़ उसके विज़न और क्रियान्वयन क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। हम स्कैपिया की इस विकास यात्रा का हिस्सा बनकर बेहद उत्साहित हैं।”</p>
<p>पीक एक्सवी पार्टनर्स साक्षी चोपड़ा ने कहा, “जैसे-जैसे यात्रा युवा भारतीयों की जीवनशैली और खर्च करने की आदतों का अहम हिस्सा बनती जा रही है, वैसे-वैसे उपभोक्ता ऐसे वित्तीय उत्पादों की तलाश कर रहे हैं जो उनकी जरूरतों और व्यवहार के अनुरूप हों। स्कैपिया ने भुगतान, रिवॉर्ड्स, जीरो फॉरेक्स मार्कअप और यात्रा लाभों को जोड़ते हुए एक सहज ट्रैवल-फिनटेक अनुभव तैयार किया है, जो उपभोक्ताओं के साथ गहराई से जुड़ता है। टीम ने मजबूत उत्पाद सोच को उत्कृष्ट क्रियान्वयन के साथ जोड़ा है और हम उनके अगले विकास चरण में भी उनके साथ बने रहने को लेकर उत्साहित हैं।”</p>
<p>ज़ेड47 के मैनेजिंग डायरेक्टर, विक्रम वैद्यनाथन, ने कहा,  “हमने स्कैपिया को उसके शुरुआती निवेश दौर से समर्थन दिया है और हर अगले चरण ने हमारे भरोसे को और मजबूत किया है। डुअल-नेटवर्क कार्ड से लेकर स्कैपिया पे और एयरपोर्ट प्रिविलेज जैसी पेशकशों तक, भारतीय फिनटेक क्षेत्र में बहुत कम टीमें इतनी तेजी और अनुशासन के साथ नवाचार कर रही हैं। जैसे-जैसे उपभोक्ता अनुभव एआई-नेटिव होते जा रहे हैं, हमें विश्वास है कि स्कैपिया आधुनिक भारतीय यात्रियों के बीच एक अग्रणी ब्रांड के रूप में उभरेगा।”</p>
<p>स्कैपिया, फेडरल बैंक और बीओबी कार्ड के साथ साझेदारी में सह-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड प्रदान करती है और भारत की पहली कंपनी बनी, जिसने वीज़ा और रुपे दोनों नेटवर्क पर आधारित डुअल-नेटवर्क सह-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पेश किया। अंतरराष्ट्रीय खर्चों पर जीरो फॉरेक्स मार्कअप की सुविधा के लिए पहचान बना चुकी स्कैपिया ने ‘एयरपोर्ट प्रिविलेज’ की भी शुरुआत की, जो केवल पारंपरिक लाउंज एक्सेस तक सीमित नहीं है, बल्कि डाइनिंग, रिटेल और ड्यूटी-फ्री अनुभवों को भी शामिल करता है। आज स्कैपिया के हर तीन में से एक उपयोगकर्ता पारंपरिक लाउंज एक्सेस की तुलना में शॉपिंग और डाइनिंग अनुभवों को अधिक प्राथमिकता देता है। कंपनी ने ‘एयरपोर्ट प्रिविलेज’ सुविधा को इसी बदलती उपभोक्ता पसंद और आधुनिक यात्रियों की नई अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है।</p>
<p>पिछले छह महीनों में स्कैपिया ने अपने प्लेटफॉर्म पर कई नई सुविधाएँ और उत्पाद जोड़े हैं। इनमें रिवॉर्ड्स-फर्स्ट यूपीआई अनुभव ‘स्कैपिया पे’, एड-ऑन क्रेडिट कार्ड, बीबीपीएस के जरिए सभी बैंकों के क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान, स्कैपिया स्टोर और स्कैपिया एक्सपीरियंस जैसी पेशकशें शामिल हैं। कंपनी अपने उपयोगकर्ताओं को ‘स्कैपिया कॉइन्स’ के रूप में रिवॉर्ड्स देती है, जिन्हें रोजमर्रा के खर्चों पर कमाया जा सकता है और बाद में उड़ानों, ट्रेनों, बसों, होटल बुकिंग, वीज़ा सेवाओं और अन्य यात्रा अनुभवों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सभी सेवाओं के जरिए स्कैपिया ने एक ऐसा संपूर्ण ट्रैवल इकोसिस्टम तैयार किया है, जहाँ यात्रा और वित्तीय सेवाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर सहज तरीके से उपलब्ध होती हैं। नए निवेश के साथ कंपनी अब इस इकोसिस्टम को और बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:26:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका के साथ जटिल समय में हो रही बातचीत के सार्थक रहने की उम्मीद: विदेश मंत्री जयशंकर </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने कहा कि जटिल समय में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बेहद मजबूत है और यह दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। रूबियो नई दिल्ली में आयोजित क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-minister-jaishankar-is-hopeful-that-the-talks-with-america/article-154849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को बेहद मजबूत बताते हुए उम्मीद जताई है कि इस जटिल समय में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ उनकी बातचीत काफी सार्थक रहेगी। जयशंकर ने रूबियो के साथ रविवार को यहां विपक्षीय वार्ता से पहले अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे और व्यापक संबंध है जो दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस जटिल समय में हो रही दोनों नेताओं की बातचीत काफी सार्थक होगी।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा, "हमारी एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है और मेरा मानना है कि इसका सरल भाषा में अर्थ यह है कि हमारे बीच बहुत गहरा, बहुत व्यापक सहयोग और ऐसा संबंध है, जो अन्य क्षेत्रों और दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अनेक मुद्दों पर और दुनिया के कई हिस्सों में हमारे हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं। मैं आज हमारी बातचीत की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। ये समय जटिल हैं, लेकिन मज़बूत साझेदारों के रूप में मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी चर्चाएँ बहुत खुली और परिणामदायक होंगी"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि रूबियो क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए यहां आए हुए हैं। मंगलवार को होने वाली इस बैठक से पहले दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय वार्ता की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नई दिल्ली में क्वाड देशों की महाबैठक: 26 मई को जुटेंगे 4 देशों के विदेश मंत्री, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की मेजबानी में 26 मई को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग और जापान के तोशिमित्सु मोतेगी भारत आएंगे। बैठक में मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर रणनीतिक चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/important-meeting-of-quad-will-be-held-on-26th-may/article-154642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/quad.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बहुप्रतीक्षित बैठक आगामी 26 मई को यहां होगी, जिसमें शामिल होने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बैठक में मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे।</p>
<p>वक्तव्य में कहा गया है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर पेनी वोंग, मोतेगी तथा रुबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि सभी सदस्य देश मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत के लिए क्वाड की परिकल्पना के अनुरूप पिछले वर्ष एक जुलाई को वॉशिंगटन में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<p>इसके अलावा सदस्य मौजूदा क्वाड पहलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे, तथा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे। यात्रा के दौरान, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों तथा अमेरिका के विदेश मंत्री के विदेश मंत्री डॉ जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट करने की भी संभावना है। इस बीच, भारत में अमेरिका के दूतावास ने कहां है कि अमेरिका स्वतंत्र और खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए एकजुटता के साथ खड़ा है। दूतावास ने कहा है कि रबियो की भारत यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।</p>
<p>दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साथ खड़े हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा को समर्थन देने से लेकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने तक विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत की आगामी यात्रा क्वाड साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।" उल्लेखनीय है कि क्वॉड की बैठक पिछले काफी समय से टलती आ रही थी। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इस बैठक का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:27:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह ने की वियतनाम के राष्ट्रपति से मुलाकात, हिन्द-प्रशांत में स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता की जताई प्रतिबद्धता</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ हनोई में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों ने AI और क्वांटम प्रौद्योगिकी पर समझौते किए। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rajnath-singh-met-the-president-of-vietnam-expressed-commitment-to/article-154357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और वियतनाम ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वियतनाम की राजधानी हनोई में उप प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से वियतनाम के वायु सेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। भारत एवं वियतनाम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्री ने न्हा त्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना की घोषणा की।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना, साइबर सुरक्षा तथा उच्च स्तरीय आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यासों और विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों की रक्षा सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने वियतनाम के साथ भारत की उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढांचे के अंतर्गत वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पहलों के समर्थन में भारत के संकल्प को पुनः व्यक्त किया।जनरल फान वान जियांग ने भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता तथा बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 16:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत और नॉर्वे के बीच ‘ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ की नई शुरुआत: 9 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर, तीन महत्वपूर्ण पहलों की भी घोषणा </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के पीएम जोनास गाहर स्टोरे के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद 9 समझौतों और 3 पहलों की घोषणा की गई। दोनों देशों ने 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' को अपनाया है, जिसके तहत अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास, समुद्री सहयोग और हरित प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-beginning-of-green-strategic-partnership-between-india-and-norway/article-154320"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modii.png" alt=""></a><br /><p>ओस्लो। भारत और नॉर्वे ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए अपने संबंधों को "ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप" के स्तर तक उन्नत करने के साथ-साथ समुद्री सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से नौ समझौतों और तीन पहलों की घोषणा की है। दोनों देशों ने "ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप" के संबंध में एक संयुक्त वक्तव्य को अपनाया।</p>
<p>नार्वे की दो दिन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के बीच सोमवार को द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने समुद्री सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से अनेक समझौतों और पहलों की घोषणा की। नार्वे ने भारत की हिन्द प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की घोषणा की, जबकि भारत वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले "नॉर शिपिंग" कार्यक्रम में भारतीय मंडप के साथ भाग लेगा।</p>
<p>दोनों देशों के बीच सरकार-से-सरकार के स्तर पर तीन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और नार्वें की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और अन्वेषण में सहयोग के लिए रूपरेखा समझौता, भारत और नॉर्वे के विदेश मंत्रालयों के बीच डिजिटल विकास साझेदारी पर समझौता ज्ञापन तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के लिए नॉर्वे के स्वास्थ्य एवं देखभाल सेवा मंत्रालय और भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच समझौता शामिल है।</p>
<p>व्यापार और संस्थागत सहयोग के तहत भी कई महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल संस्थान के बीच सुरंग निर्माण, ढलान स्थिरता और क्षमता निर्माण से संबंधित विशेष परामर्श सेवाओं के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा भारत के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग पर समझौता हुआ।</p>
<p>वैज्ञानिक अनुसंधान और हरित प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और नॉर्वे की सिंटेफ संस्था के बीच वर्ष 2026 से 2029 तक की गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए सहयोग समझौता किया गया। दोनों पक्षों ने समुद्री ऊर्जा, जिसमें अपतटीय पवन ऊर्जा भी शामिल है, पर संयुक्त कार्य कार्यक्रम के लिए एक परियोजना-विशिष्ट कार्यान्वयन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इसके अलावा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी ने नॉर्वे के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हरित परिवर्तन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग पर संयुक्त आशय घोषणा को अपनाया। हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान और नॉर्वे की एमराल्ड जियोमॉडलिंग एएस के बीच वैज्ञानिक और व्यावसायिक सहयोग के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इन घोषणाओं और समझौतों को भारत और नॉर्वे के बीच हरित विकास, समुद्री सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान आधारित साझेदारी को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:31:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>स्वीडन के बाद ओस्लो पहुंचे पीएम मोदी: भारतीय समुदाय ने किया स्वागत, बोले-द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन की सफल यात्रा पूरी कर अपनी पांच देशों की यात्रा के चौथे पड़ाव, नॉर्वे के लिए रवाना हो गए हैं। प्रस्थान से पहले पीएम मोदी ने बताया कि स्वीडन दौरा बेहद सार्थक रहा। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने और अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-sweden-pm-modi-reached-oslo-welcomed-by-the-indian/article-154257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-niderland1.png" alt=""></a><br /><p>गोथेनबर्ग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वीडन की दो दिन की यात्रा संपन्न होने के बाद पांच देशों की अपनी यात्रा के चौथे पड़ाव के लिए सोमवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो रवाना हो गए। प्रस्थान से पहले पीएम मोदी ने कहा कि उनकी यात्रा बेहद सार्थक रही और इससे दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, "स्वीडन की मेरी यात्रा कई महत्वपूर्ण परिणामों से चिह्नित रही, जो भारत-स्वीडन संबंधों को नई गति प्रदान करेंगे। </p>
<p>हमारे संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत करने, संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0 तथा भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता गलियारे की शुरुआत करने से लेकर, अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने तक, चर्चाएँ अत्यंत फलदायी रहीं। मैं स्वीडन की जनता, स्वीडन सरकार और प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन का उनके स्नेह और मित्रता के लिए आभार व्यक्त करता हूँ।" उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी 15 मई को पांच देशों संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रवाना हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:33:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का वियतनाम-कोरिया दौरा: द्विपक्षीय सहभागिता के दायरे का होगा विस्तार, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों पर चर्चा संभव </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करना, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है। वह दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/defense-minister-rajnath-singhs-visit-to-vietnam-korea-will-expand-the/article-154197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रवाना हुए। रक्षा मंत्रालय ने आज बताया कि राजनाथ सिंह 18 से 19 मई तक वियतनाम की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जिसके बाद वह 19 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। राजनाथ सिंह ने दोनों देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले सोशल मीडिया में एक पोस्ट में दोनों एशियाई देशों की यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त किया ताकि द्विपक्षीय सहभागिता के दायरे का और विस्तार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस दौरान मुख्य ध्यान रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने पर होगा, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है, जिसे पांच से सात मई तक वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित किया गया था। राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी के लिए 2030 तक के संयुक्त दृष्टि वक्तव्य पर रक्षा मंत्री की 2022 की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। यह दृष्टि वक्तव्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित करता है। दोनों लोकतांत्रिक देशों की क्षेत्र में शांति और समृद्धि में समान रुचि है।</p>
<p>राजनाथ सिंह की यह यात्रा 19 मई को वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के अवसर के साथ भी मेल खाती है। रक्षा मंत्री हो ची मिन्ह समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और सम्मान प्रकट करेंगे। दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आह्न ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। मंत्रीगण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और द्विपक्षीय सहभागिता को और मजबूत करने के लिए नई पहलों पर विचार करेंगे। वे साझा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<p>रक्षा मंत्री रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चोल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। कोरियाई युद्ध में भारत का योगदान इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से परिभाषित होता है। भारत द्वारा इस युद्ध का समर्थन करने का निर्णय भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस इकाई को तैनात करके युद्ध में मानवीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया था। तीन वर्षों से अधिक समय तक सेवा देते हुए इस इकाई ने दो लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया और लगभग 2,500 शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं संपन्न कीं, साथ ही अनेक नागरिकों का भी उपचार किया। भारत का दूसरा प्रमुख योगदान तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता था, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रस्ताव था और जिसे बहुमत से स्वीकार किया गया। इसके अनुसार भारत की संरक्षक सेना, भारतीय सेना की 5,230 सैनिकों वाली टुकड़ी ने युद्धोत्तर चरण में लगभग 2,000 युद्धबंदियों की शांतिपूर्ण वापसी सुनिश्चित की।</p>
<p>शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए 21 मई को देशभक्त एवं पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल के साथ भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन प्रस्तावित है। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' और कोरिया की 'हिंद-प्रशांत रणनीति' के बीच स्वाभाविक सामंजस्य तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा मूल्यों ने दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय खोला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 13:10:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का स्वीडन दौरान: भारत-स्वीडन के संबंध रणनीतिक साझेदारी में बदले, मोदी को मिला स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टरसन के बीच द्विपक्षीय वार्ता में संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" स्तर पर ले जाने का निर्णय हुआ। पीएम मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार' से सम्मानित किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/during-pm-modis-visit-to-sweden-india-sweden-relations-transformed-into/article-154193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi6.png" alt=""></a><br /><p>गोथेनबर्ग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता को बेहद सार्थक बताते हुए कहा है कि परस्पर बढते सहयोग को देखते हुए दोनों देशों ने संबंधों को रणनीति साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय किया है। मोदी ने उन्हेंं स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार से सम्मानित किये जाने को भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान करार दिया। पांच देशों की यात्रा के तीसरे चरण में स्वीडन की दो दिन की यात्रा पर गये श्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद रविवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ," प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ अत्यंत उत्कृष्ट वार्तालाप हुए। यह भी अत्यंत प्रसन्नता की बात रही कि युवराज्ञी विक्टोरिया ने भी बैठक में भाग लिया। उन्होंने स्वीडन के महाराज और महारानी की ओर से शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं। उनके प्रति मेरा आभार।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत और स्वीडन के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन के सिद्धांतों और मानव-केंद्रित विकास की मजबूत नींव पर आधारित हैं। सभी क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को देखते हुए, हमने अपने संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान व्यापार, रक्षा, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी।</p>
<p>यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयन से मुलाकात पर पीएम मोदी ने कहा,"गोथेनबर्ग में आपसे मिलकर अत्यंत प्रसन्नता हुई, अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन। भारत-यूरोप संबंधों की प्रबल संभावनाओं पर, विशेषकर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में, मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूं।" स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार से सम्मानित किये जाने पर उन्होंने कहा," मुझे अभी ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार से सम्मानित किया गया है। यह केवल मेरे लिए ही नहीं, बल्कि भारत के 1.4 अरब लोगों के लिए भी सम्मान है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्वीडन में हमारे उन सभी मित्रों को भी श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारत और स्वीडन के संबंधों को सुदृढ़ किया और एक मजबूत आधार तैयार किया। हमारी दोनों राष्ट्रों के बीच मित्रता निरंतर प्रगाढ़ होती रहे। पीएम मोदी को एक विशेष समारोह में, स्वीडन की युवराज्ञी विक्टोरिया ने 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया, जो स्वीडन के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जिसकी स्थापना 18वीं शताब्दी में हुई थी। यह सम्मान स्वीडन द्वारा विदेशी शासनाध्यक्षों को असाधारण लोकसेवा और स्वीडन के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने में योगदान के लिए प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।</p>
<p>स्टरसन और मोदी ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को रेखांकित करते हुए विशेष स्मारक उपहारों का आदान-प्रदान किया। क्रिस्टरसन द्वारा दिए गए उपहार में एक बॉक्स शामिल था, जिसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा हस्तलिखित दो नीति-वचनों (एपिग्राम) की प्रतिकृतियां, एक संक्षिप्त व्याख्यात्मक लेख और वर्ष 1921 में उप्साला विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान ली गई गुरुदेव टैगोर की एक तस्वीर थी। हाल ही में स्वीडिश राष्ट्रीय अभिलेखागार में खोजे गए ये मूल दस्तावेज, गुरुदेव टैगोर द्वारा वर्ष 1921 और 1926 में अपनी स्वीडन यात्राओं के दौरान तैयार किए गए थे।</p>
<p>मोदी ने क्रिस्टरसन को रवींद्रनाथ टैगोर की संकलित रचनाओं का एक संग्रह भेंट किया, साथ ही शांतिनिकेतन का विशेष रूप से हस्तनिर्मित एक बैग भी प्रदान किया, जिस पर वे रूपांकन (मोटिफ्स) अंकित हैं जिन्हें गुरुदेव ने स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए चुना था।प्रधानमंत्री ने गोथेनबर्ग में उद्योग के लिए यूरोपीय गोलमेज सम्मेलन को भी संबोधित किया। क्रिस्टरसन, वान डेर लेयेन, यूरोप के वरिष्ठ उद्योग जगत की हस्तियों तथा प्रमुख यूरोपीय और भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वोल्वो समूह द्वारा आयोजित इस संवाद में भाग लिया। पीएम मोदी ने भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक सामंजस्य को रेखांकित किया और लगातार जटिल तथा अनिश्चित होते वैश्विक परिवेश में विश्वसनीय साझेदारियों के महत्व को उजागर किया। उन्होंंने स्वीडन की कंपनियों से भारत में महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने का आह्वान किया। पीएम मोदी स्वीडन से यात्रा के चौथे पड़ाव में नावें जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:25:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी नीदरलैंड दौरा: भारत-नीदरलैंड ने आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जताई सहमति, कई अहम समझौतों पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के पीएम रोब जेटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" स्तर पर ले जाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता हुई। व्यापार, रक्षा, एआई और हरित ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर भी जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-visits-netherlands-india-netherlands-agreed-to-strengthen-mutual-relations/article-154149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेटेन के साथ आधिकारिक वार्ता में दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। साझा मूल्यों और आपसी विश्वास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बढ़ते सामंजस्य और सहयोग को देखते हुए, नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया। उन्होंने व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए एक महत्वाकांक्षी सामरिक साझेदारी रोडमैप अपनाने पर भी सहमति व्यक्त की। बढ़ते व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी पर ध्यान देते हुए, नेताओं ने कहा कि भारत की विकास गाथा द्वारा प्रस्तुत अवसर डच कंपनियों के लिए बेहतर व्यावसायिक संभावनाएं प्रदान करते हैं।</p>
<p>दोनों नेताओं ने निरंतर उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। जल, कृषि और स्वास्थ्य] में सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने बड़े पैमाने की जल परियोजनाओं पर सहयोग के माध्यम से 'जल पर रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक सुदृढ़ करने पर करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य सुरक्षा सहित प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का भी स्वागत किया।</p>
<p>पीएम मोदी और जेटेन ने बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार को महत्वपूर्ण बताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (भारत-ईयू एफटीए) की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इस पर जल्द हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगा।</p>
<p>दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) और सेमीकंडक्टर सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में अधिक सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं की भागीदारी वाले शामिल हैकाथॉन आयोजित करने को भी प्रोत्साहित किया। नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताते हुए, उन्होंने एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हरित हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, हरित शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'मोबिलिटी पार्टनरशिप' (प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी) और उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने के लिए की गई नयी पहलों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस संबंध में, उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुए समझौते पर विशेष रूप से उल्लेख किया।</p>
<p>दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने 11वीं शताब्दी की चोल कालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहायता करने के लिए डच सरकार का आभार व्यक्त किया। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने लीडेन विश्वविद्यालय पुस्तकालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) के बीच सहयोग का भी स्वागत किया, जो इन ऐतिहासिक कलाकृतियों के ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। आधिकारिक वार्ता के बाद, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, व्यापार, मोबिलिटी, जल, कृषि और स्वास्थ्य,शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में 14 समझौता ज्ञापनों(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री जेटेन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। भारत और नीदरलैंड्स के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी सहयोग पर आधारित मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:09:45 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा: अमीरात की सफल यात्रा के बाद नीदरलैंड रवाना हुए मोदी, बोले-यूएई के संक्षिप्त लेकिन अत्यंत परिणामोन्मुखी दौरे का समापन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई की अपनी यात्रा को अत्यंत परिणामोन्मुखी बताया। $5 बिलियन के निवेश और ऊर्जा, रक्षा एवं तकनीक में हुए समझौतों से रणनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। अबू धाबी में सफल वार्ता के बाद, पीएम अब अपनी चार देशों की यूरोपीय यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड पहुंचेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modis-visit-to-netherlands-modi-left-for-netherlands-after/article-153963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-niderland1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात की संक्षिप्त यात्रा के समापन के बाद शुक्रवार को चार यूरोपीय देशों की यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड रवाना हो गये। अमीरात की अपनी यात्रा को सार्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की समग्र रणनीतिक साझेदारी को नयी गति मिलेगी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा , "यूएई के संक्षिप्त लेकिन अत्यंत परिणामोन्मुखी दौरे का समापन। मैंने अपने भाई, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, के साथ भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर व्यापक चर्चा की। मुझे विश्वास है कि इस दौरे के परिणाम हमारी मित्रता को और मजबूत करेंगे और विकास और समृद्धि में योगदान देंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूएई की भारत में पांच अरब डालर के निवेश की घोषणा से दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा," इस यूएई दौरे के दौरान ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना, शिपिंग और उन्नत तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमुख समझौतों को भी अंतिम रूप दिया गया, जिससे भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली। एक अन्य महत्वपूर्ण विकास में, यूएई ने भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की, जो आर्थिक संबंधों को और गहरा करेगा।" उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी चार यूरोपीय देशों की यात्रा से पहले अमीरात की संक्षिप्त यात्रा पर आये थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:50:38 +0530</pubDate>
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