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                <title>Rainy Season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरसता नयागांव गुजरान: न पक्की सड़क, न सुरक्षित श्मशान घाट</title>
                                    <description><![CDATA[कीचड़ के कारण एंबुलेंस आना बंद, चारपाई पर मरीज ले जाने को मजबूर ग्रामीण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/nayagaon-gujran-deprived-of-basic-amenities-decades-after-independence--no-paved-roads--no-proper-cremation-ground/article-162872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)41.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। ग्राम पंचायत बेसार के अंतर्गत आने वाले नयागांव गुजरान में आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी गांव में विकास कार्य धरातल पर नहीं पहुंच पाए हैं। पक्की सड़क के अभाव और श्मशान घाट की बदहाल स्थिति के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में आज तक एक भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश केमौसम में रास्ते कीचड़ और पानी से भर जाते हैं, आवागमन मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है, जिन्हें खराब रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क नहीं होने और जलभराव के कारण गांव तकएंबुलेंस और अन्य वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर बैठाकर कीचड़ भरे रास्तों से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। इससे समय पर उपचार मिलना भी चुनौती बन जाता है।</p>
<p><strong>श्मशान घाट पर अतिक्रमण, सुविधाओं का अभाव</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गांव्र के श्मशान घाट की भूमि पर अतिक्रमण होचुका है। इसके कारण अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने श्मशान घाट से अतिक्रमण हटाने और वहां टीन शेड सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन द्वारा आयोजित विभिन्न शिविरों मेंलिखित आवेदन देकर समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। नयागांव गुजरान के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द सेजल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, जलभराव की समस्या का समाधान किया जाए तथा श्मशान घाट से अतिक्रमण हटाकर वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें आज भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>हमारे गांव में एक पक्की सड़कतक नहीं बन पाई है। बारिश के दिनों में हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजना और खुद घर से बाहर निकलना दूभर हो जाता है।<br /><strong>- चौथमल गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>हमारे गांव में श्मशान घाट की जमीन पर भी अतिक्रमण हो चुका है। अपनों के अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील घड़ी में भी हमें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>-बबलू गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>हमने पंचायत से लेकर प्रशासनिक शिविरों तक कई बार लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन हर बार सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।<br /><strong>- रनजीत गुर्जर,ग्रामीण</strong></p>
<p>रास्ते में कीचड़ और जलभराव के कारण गांव के भीतर एम्बुलेंस का आना तो दूर, किसी सामान्य वाहन का पहुंचना भी असंभव है। आपातकालीन स्थिति में बीमारों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना हमारी मजबूरी बन गया है।<br /><strong>- सोनू गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर इस कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। जरा सी चूक बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए भारी पड़ सकती है। जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण करवाया जाए।<br /><strong>- हंसराज गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>विकास के जितने भी दावे किए जाते हैं, वे सब नयागांव गुजरान आकर कागजी साबित हो जाते हैं। जल्द ही श्मशान घाट से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।<br /><strong>- मुकेश, ग्रामीण</strong></p>
<p>श्मशान की भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में भी 5 लाख रुपए की सैंक्शन (स्वीकृति) निकाली गई थी, लेकिन प्रशासन द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका, जिससे वहां आज भी कीचड़ और वैसी ही स्थिति बनी हुई है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरपंच द्वारा पूर्व में ही प्रस्ताव लिया जा चुका है। आज इस संबंध में सेक्रेटरी से बात कर ली गई है और उन्होंने इस पर सैंक्शन (स्वीकृति) भी निकाल दी है। इस संबंध में आगे की कार्रवाई कर जल्द से जल्द मौके से अतिक्रमण हटवाया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।<br /><strong>-  मदन लाल वर्मा, सरपंच बेसार उपखंड खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 16:44:03 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश में तालाब बन जाता है मेहन्दड़ी-भगवानपुरा मार्ग,मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने स्थायी समाधान और जल्द कार्रवाई की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mehandri-bhagwanpura-road-turns-into-a-pond-during-rains--patients-forced-to-be-carried-on-cots/article-162553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर के जोलपा ग्राम पंचायत मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले मेहन्दड़ी गांव के ग्रामीण लंबे समय से बदहाल सड़क की समस्या से परेशान हैं। मेहन्दडी से भगवानपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय को जोड़ने वाले मार्ग पर करीब दो दशक पुराना खरंजा बना हुआ है। बारिश के दौरान यह रास्ता पानी से लबालब होकर तालाब का रूप ले लेता है, जिससे ग्रामीणों का पंचायत मुख्यालय और आसपास के गांवों से संपर्क प्रभावित हो जाता है। बारिश के दिनों में हालात इतनेखराब हो जाते हैं कि बीमार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को से चारपाई के सहारे पानी भरे रास्ते निकालना पड़ता है। </p>
<p>वहीं, सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेहन्दड़ी में मेहन्दड़ी के अलावा सुवालिया, खुजां और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। जलभराव के कारण विद्यार्थियों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समस्या को लेकर राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई तथा ज्ञापन के माध्यम से सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), उपखंड प्रशासन, जिला प्रशासन और जिला कलेक्टर को कई बार अवगत कराया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1998 में विधायक कोष से खरंजा स्वीकृत हुआ था। इसके बाद से लंबा समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>एक सप्ताह का अल्टीमेटम</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।</p>
<p><strong>पाइप कंवर्ट के प्रस्ताव से नाराजगी</strong><br />ग्रामीणों के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने समस्या के समाधान के लिए दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे उचित समाधान नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पाइप कंवर्ट बनने से रास्ता और नीचे हो जाएगा तथा जलभराव की समस्या बनी रहेगी। ग्रामीणों ने इसके बजाय उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण की मांग की है।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी द्वारा केवल दो पाइप कंवर्ट निर्माण का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जो इस समस्या को और अधिक बढ़ा देगा। पाइप कंवर्ट बनने से खंरंजा और नीचे हो जाएगा, जिससे वहां से निकलना और भी मुश्किल हो जाएगा इसलिए हम इसकी जगह एक उच्च स्तरीय पुलिया की मांग कर रहे हैं।<br /><strong>- गिरिराज बाई, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क किनारे स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में महेंदडी के अलावा सुवालिया, खुजा और भगवानपुरा सहित करीब एक दर्जन गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। खराब रास्ते के कारण स्कूली बच्चों को रोजाना सबसे ज्यादा मशक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- राहुल बैरवा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यदि एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण हेतु बजट का आवंटन नहीं किया गया, तो हम और अधिक कड़ कदम उठाने पर मजबूर होंगे।<br /><strong>-अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>ढाई दशक से ज्यादा समय बीत गया लेकिन महेंदडी से भगवानपुरा मार्ग पर बना यह पुराना खरंजा आज भी जस का तस है। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह से तालाब का रूप ले लेता है, जिससे गांव का संपर्क पंचायत मुख्यालय और पूरे उपखंड क्षेत्र से पूरी तरह कट जाता है।<br /><strong>- अंकित कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़क मार्ग खराब होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के बीमार पड़ने पर उन्हें एम्बुलेंस या वाहन के बजाय चारपाई के सहारे रास्ता पार करवाना पड़ता है।<br /><strong>- हरलाल बेरता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>इस समस्या को लेकर कई बार राजस्थान संपर्क पोर्टल, जनसुनवाई और ज्ञापनों के माध्यम से सूचित किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- दीनदयाल चौबदार, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सीडी वर्ग के प्रस्ताव मांगे गए थे, उसमें जेएलजी प्रस्ताव आ गया था वह स्वीकृत हो गया है। दो पाइप हो चुके हैं अभी एन आई दी खोल रखी है जैसे ही एनआईटी मिल जाएगी तो कार्य चालू हो जाएगा। <br /><strong> - प्रदीप चौधरी, सहायक अभियंता, पीडब्लूडी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:37:07 +0530</pubDate>
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                <title> जमीन के विवाद में अटकी श्मशान घाट की सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को उठानी पड़ती है परेशानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cremation-ground-facilities-stalled-due-to-land-dispute/article-162559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिले के दूसरे सबसे बड़े उपखंड सांगोद के कई गांव बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। सांगोद पंचायत समिति के काशीपुरा गांव में स्थिति ऐसी है कि ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार भी सम्मानजनक तरीके से कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव के श्मशान घाट पर न टीनशेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही बारिश से बचाव के लिए कोई स्थायी इंतजाम। बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार बारिश होने पर श्मशान घाट में रखी लकड़ियां भीग जाती हैं, जिससे चिता जलाने में काफी परेशानी होती है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को खुले आसमान के नीचे बारिश में खड़े रहना पड़ता है। कई बार ग्रामीण तिरपाल बांधकर किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों को खल रहा है।</p>
<p><strong>प्रशासन से कई बार लगा चुके हैं गुहार</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीनशेड सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कई बार ग्राम पंचायत एवं प्रशासन के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। बारिश के मौसम में हर बार यही स्थिति सामने आती है और किसी परिवार में मृत्यु होने पर परिजनों को दुख की घड़ी में अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने श्मशान घाट पर टीनशेड, पक्का चबूतरा, पानी की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी जरूरी व्यवस्था के लिए ग्रामीणों को मौसम की मार नहीं झेलनी पड़े, इसके लिए जरूरी है।</p>
<p>काशीपुरा में श्मशान घाट केलिएजिस भूमि का आवंटन किया गया था, वह वर्तमान में विवादित है। भूमि विवाद के चलते वहां विकास कार्य नहीं कराए जा सके हैं। राजस्व विभाग की ओर से वैकल्पिक भूमि आवंटित किए जाने के बाद श्मशान घाट का निर्माण एवं वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- सूरज वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी, काशीपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:01:39 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का...मिट्टी और कार्य प्रगति का हटाया बोर्ड, दूर हुई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[मिट्टी के ढेर से निकलते समय वाहनों का संतुलन बिगड़ने से हादसे का खतरा बना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----soil-pile-and--work-in-progress--board-removed--obstruction-cleared/article-162533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित तालाब के किनारे सड़क बनने के बाद लगे मिट्टी के ढेर व कार्य प्रगति के लगे बोर्ड को शनिवार को हटा दिया गया। जिससे बाधा दूर होने के साथ ही रास्ता क्लीयर हो गया। वहीं इस मार्ग से दिनभर वाहन आसानी से निकलते रहे। तालाब किनारे मंदिर के पीछे की तरफ सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा था। जिसे कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा मरम्मत कर सही करवाया गया है। लेकिन सड़क मरम्मत के लिए बंद किया गया रास्ता काफी समय तक बंद रहा। जिससे वन वे ट्रैफिक चलने से जाम की स्थिति बन रही थी। वहीं सड़क तैयार होने के बाद सड़क से वाहनों का आवागमन तो शुरू हो गया था लेकिन संवेदक द्वारा एक तरफ से मिट्टी का ढेर और दूसरी तरफ कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाया था। जिससे वाहन चालकों को उस मिट्टी के ढेर से निकलने को मजबूर होना पड़ रहा था। ऐसे में कई वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ था तो कई चार पहिया वाहनों के बोनट मिट्टी के ढेर से अडऩे के कारण खराब हो रहे थे।</p>
<p>इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने समाचार प्रकाशित किया था। केडीए अधिकारी हरकत में आए और संवेदक को पाबंद कर मिट्टी के ढेर को हटवाया गया। मिट्टी के ढेर व बोर्ड को फिलहाल तालाब किनारे की तरफ साइड में किया गया है। केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के माध्यम से संवेदक को आदेश दिया गया कि वह मिट्टी के ढेर व बोर्ड को तुरंत हटाए। जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो। शनिवार को सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को हटा दिया गया। जिससे वाहन दिनभर सुगमता से निकलते रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि सड़क बनने के बाद भी संवेदक द्वारा मौके से मिट्टी और कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाने से वाहन चालकों को होने वाली परेशानी का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 8 अगस्त को पेज 11 पर' तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ, नहीं हटी बाधा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें मिट्टी व बोर्ड नहीं हटने से रास्ता चालू होने के बावजूद वाहन चालकों को हो रही परेशानी व हादसों के खतरे के बारे में बताया था। साथ ही बरसात के समय अधिक दुर्घटना होने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकािरयों ने संवेदक को मिट्टी हटाने के लिए आदेश देते हुए पाबंद किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ : नहीं हटी बाधा, बरसात में दुर्घटना का  खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[रास्ता बंद करने वाली बैरिकेडिंग व मिट्टी के ढेर नहीं हटाए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-near-the-pond-reopened--but-obstructions-remain--risk-of-accidents-during-rains/article-162357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पास बदहाल हो चुकी सड़क को तो कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सही कर दिया गया। जिससे वहां से रास्ता तो चालू हो गया लेकिन अभी तक भी दोनों तरफ की बाधाएं नहीं हटी हैं। जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बरसात में वाहनों के फिसलने से दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। तालाब किनारे मंदिर के पास की सड़क का एक बड़ा हिस्सा पिछले काफी समय से खस्ताहाल हो रहा था। जिससे वाहन चालकों को उन गड्ढ़ों से हिचकोले खाते हुए निकलना पड़ रहा था। उससे भी वाहनों का संतुलन बिगड़कर दुर्घटना का खतरा बना हुआ था।आमजन की इस समस्या को देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सड़क की मरम्मत तो करवा दी गई। मरम्मत के दौरान जयपुर गोल्डन के सामने मल्टी स्टोरी पार्किंग से ही वाहनों को डायवर्ट कर वनवे रास्ते से निकाला गया था। जिससे गीता भवन से नयापुरा की तरफ और नयापुरा से गीता भवन की तरफ जाने का एक ही सड़क से रास्ता था। जिससे वाहनों के जाम की समस्या बनी हुई थी।</p>
<p><strong>एक तरफ बोर्ड तो दूसरी तरफ मिट्टी के ढेर</strong><br />वहीं सड़क मरम्मत के बाद भी संवेदक की ओर से सड़क के दोनों तरफ रास्ता बंद करने के लिए लगाई गई बेरीकेडिंग व लगाए मिट्टी के ढेर को नहीं हटाया गया। जिससे वाहन चालकों ने परेशान होकर खुद ही सड़क मरम्मत के बाद वहां से वाहनों को निकालना शुरु कर दिया। जबकि अभी भी सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को नहीं हटाया गया है। ऐसे में हालत यह है कि मल्टी स्टोरी पाकिंग के सामने तो कार्य प्रगति पर होने का बोर्ड लगा हुआ है। जहां साइड से थोड़ी सी जगह से वाहन निकल रहे हैं। वहीं आगे मंदिर के पास व उसके आगे दो जगह पर मिट्टी के ढेर से वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>बरसात होने पर अधिक खतरा</strong><br />वाहन चालकों ने बताया कि जैसे-तैसे दो पहिया वाहन तो निकल रहे हैं। जबकि चार पहिया वाहनों को मिट्टी के ढेर से निकलने में परेशानी हो रही है। कई बार वाहन का पिछला हिस्सा तो कभी बोनट का हिस्सा मिट्टी के ढेर से अडऩे पर वाहनों को नुकसान हो रहा है। वहीं दो पहिया वाहनों का भी संतुलन बिगडऩे का खतरा बना हुआ है। बरसात के समय में यह खतरा अधिक बढ़ जाएगा। ऐसे में वाहनों के फिसलने पर लोगों के चोटिल होने तक का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को भी दिनभर वाहन तो निकले लेकिन लोग परेशान होते रहे।</p>
<p><strong>वनवे वाले रास्ते पर जाम</strong><br />वहीं जो वाहन इस रास्ते से नहीं निकले तो दूसरी तरफ वनवे वाली साइड पर लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ा। इस रास्ते से निकलने वाले वाहन चालक प्रशासन को कोसते रहे।</p>
<p><strong>मिट्टी का ढेर जल्दी हटवा देंगे</strong><br />सीसी रोड बनने के बाद उसे सैट होने में समय लगता है। इस कारण से रास्ता बंद रखना पड़ता है। लेकिन अब रास्ता चालू हो गया है तो मिट्टी के ढेर व बोर्ड को भी जल्दी ही हटवा देंगे।<br /><strong>-मुकेश कुमार चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:24:14 +0530</pubDate>
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                <title>नीचे कुर्सी, ऊपर मंडरा रहा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ तेज बरसात होने पर टूटी फॉल्स सीलिंग की जगह से पानी  टपकता  है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-chair-sits-below--while-danger-looms-overhead/article-162356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी कार्यालयों में सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाई जा रही फॉल्स सीलिंग आमजन के लिए खतरा भी बन सकती है। नगर निगम कार्यालय में तीसरी मंजिल की क्षतिग्रस्त फाल्स सीलिंग बरसात में कर्मचारियों व वहां आने वाले आमजन के लिए खतरा बन सकती है। नगर निगम कार्यालय की बिल्डिंग बनने के समय यहां कमरों के साथ ही गैलेरियों में भी फॉल्स सीलिंग की गई थी। हालत यह है कि तीसरी मंजिल की अधिकतर फॉल्स सीलिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। पिछले कई सालों से जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। जिसे बार-बार सही करवाने के बाद फिर से वही स्थिति हो रही है।</p>
<p>वर्तमान में भी तीसरी मंजिल पर कई जगह से विशेष रूप से एनयूएलएम की तरफ वाली गैलेरी में दो जगह से फॉल्स सीलिंग टूटी हुई है। इतना ही नहीं उसके नजदीक ही नीचे लोगों के बैठने के लिए बैंच भी लगी हुई है। जिससे बरसात के समय में कभी भी फाल्स सीलिंग टूटकर गिरने से बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। जानकारों के अनुसार तेज बरसात होने पर टूटी फॉल्स सीलिंग की जगह से पानी भी टपकता रहता है। जिससे फर्श गीला होने पर लोगों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। इस तीसरी मंजिल पर पीएम स्वनिधि से संबंधित ऋण के सिलसिले में लोगों की आवाजाही अधिक बनी रहती है। साथ ही यहां कई अन्य अनुभाग है। जेरोक्स मशीन भी इसी मंजिल पर लगी हुई है। जिससे जेरोक्स करवाने के लिए भी लोग आते रहते है। जानकारों के अनुसार कई बार तो स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि बरसात में अधिक पानी टपकने पर टूटी फाल्स सीलिंग की जगह पर बाल्टी तक रखनी पड़ती है।</p>
<p><strong>छत की कमजोरी फाल्स सीलिंग से ढकने का प्रयास</strong><br />जानकारों का कहना है कि बिल्डिंग बनाने के समय छत पर जिस तरह का काम होना चाहिए था वैसा नहीं हुआ। साथ ही पानी निकासी के लिए जो पाइप डाले गए थे वह खराब हो चुके है। जिससे बरसात के समय छत पर पानी भर जाता है। उससे वजन अधिक होने पर टूटे पाइप से पानी फॉल्स सीलिंग पर पड़ता है। ऐसे में फाल्स सीलिंग कमजोर होकर टूट जाती है। जब तक छत की सही ढंग से मरम्मत नहीं होगी तब तक फाल्स सीलिंग को सही करवाने पर बार-बार टूटती ही रहेगी। वहीं जानकारों का कहना है कि छत पर सोलर पैनल लगाने के दौरान की गई खुदाई से भी छत के गड्ढ़ों में पानी भरता है।</p>
<p>इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि पहले तो कई जगह से ïफाल्स सीलिंग टूटी हुई थी। ऐसे में छत और फाल्स सीलिंग को सही कराया गया था। यदि फिर भी कहीं से टूटी हुई है तो उसे भी सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:23:05 +0530</pubDate>
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                <title>खस्ताहाल सड़क बनी हादसे का सबब, राहगीर परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का सही अनुमान नहीं लग पाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dilapidated-road-causes-accidents--commuters-face-hardship/article-161700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। राज्य सरकार के गड्डा मुक्त सड़क अभियान के दावों की पोल चौमहला कस्बे की मुख्य बाजार सड़क खोल रही है। झंडा चौक से डॉ. रमेश खटीक तक जाने वाला प्रमुख मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में पड़ा है। सड़क की एक ओर की पूरी परत उखड़ जाने से जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि दूसरी ओर सड़क ऊंची-नीची होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। </p>
<p>यह मार्ग कस्बे का सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र होने केकारण दिनभर भारी यातायात रहता है। बरसात के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क की बदहाली से स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। </p>
<p>स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की मरम्मतको लेकर कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि गड्डा मुक्त सड़क अभियान केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर हैं।</p>
<p><strong>बड़े हादसे की आशंका, शीघ्र मरम्मत की मांग</strong><br />क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गड्डों को भरकर सड़क दुरुस्त नहीं की गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने चेतावनी दी कि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। </p>
<p>सड़क दिखवाकर शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी।<br /><strong>- शंकर सिंह कनिष्ठ अभियंता सार्वजिनक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:09:19 +0530</pubDate>
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                <title>हाडौती के मंदिरों की विरासत संभालने वाला विभाग खुद बेहाल, भवन की स्थिति जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[ न रास्ता सुगम, न पार्किंग की जगह  देवस्थान कार्यालय पहुंचना फरियादियो के लिए बनी अग्निपरीक्षा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-department-responsible-for-preserving-the-temple-heritage-of-hadauti-is-itself-in-a-sorry-state/article-160213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)49.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के खाई रोड स्थित देवस्थान विभाग सहायक आयुक्त कार्यालय इन दिनों अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। जिन कंधों पर शहर सहित हाड़ौती अंचल के दर्जनों ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती धार्मिक संपत्तियों, ट्रस्टों और व्यवस्थाओं को सहेजने का जिम्मा है, वही कार्यालय आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खोता नज़र आ रहा है। पुजारियों व फरियादियों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी भारी परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अलावा, कार्यालय तक पहुँचने का रास्ता सुगम न होने के कारण फरियादियों को यहाँ आने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने से यहाँ आने वाले लोगों को अपने वाहन खड़े करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>भवन की स्थिति जर्जर, रिकॉर्ड भीगने की आशंका </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्यालय वर्षों पुराना है और इसकी इमारत दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है। बारिश के दिनों में छत टपकने से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और फाइलें भीगने की नौबत आ जाती है। विभाग के पास रियासतकालीन व ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती जमीनों और जमींदारियों से जुड़े कई संवेदनशील कागजात मौजूद हैं, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में अलमारियों में रखी फाइलें बारिश के समय भीग जाती हैं। नियमित साफ-सफाई न होने से इन फाइलों पर लंबे समय से धूल जमी हुई है, जिससे इन पर दीमक लगने और रिकॉर्ड नष्ट होने की आशंका बनी हुई है।</p>
<p><strong>डर के साए में काम करने को मजबूर </strong><br />कार्यालय की इस खस्ताहाल स्थिति का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। जर्जर छत के नीचे बैठकर काम करना कर्मचारियों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। हाड़ौती भर के दूर-दराज़ इलाकों से आने वाले पुजारियों और फरियादी राम कुमार व दिनेश ने बताया, "हम यहाँ मंदिर से संबंधित कार्य के लिए आए हैं, लेकिन कार्यालय की छत के नीचे बैठना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि बारिश में पानी टपकने का डर बना रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और मंदिर प्रतिनिधियों ने मांग की है कि हाड़ौती की इस ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत को बचाने के लिए जर्जर भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए या इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, रियासतकालीन संवेदनशील फाइलों का तत्काल डिजिटलाइजेशन कराया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड भविष्य के लिए सुरक्षित रह सके।</p>
<p><strong>रास्ता सुगम नहीं, पहुँचने में छूट रहे पसीने</strong><br />देवस्थान विभाग कार्यालय में मंदिर संबंधी आवेदन लेकर बूंदी से आए दिनेश कुमार ने बताया, "बस वाले ने हमें बस स्टैंड पर उतार दिया। इसके बाद यहाँ आने के लिए ऑटो किया, लेकिन ऑटो वाले को भी कार्यालय का रास्ता पता नहीं था। जैसे-तैसे समझाकर लाए, लेकिन कार्यालय पहुँचने वाली सड़क पर घुमावदार घाटी होने के कारण ऑटो को चढ़ाने में काफी परेशानी हुई।"</p>
<p>वहीं, बारां से फरियाद लेकर आए मोहनलाल ने बताया कि वे लोगों से रास्ता पूछते-पूछते यहाँ पहुँचे। रास्ता इतना घुमावदार और ढलान भरा है कि उन्हें पैदल आने में एक-दो जगह विश्राम करना पड़ा।</p>
<p><strong>पार्किंग और छाया के लिए स्थान नहीं </strong><br />कहने को तो यह कार्यालय हाड़ौती भर के मंदिरों और ट्रस्टों के पंजीकरण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संभालता है, लेकिन इसके बाहर न तो ठीक ढंग से वाहन पार्किंग की जगह उपलब्ध है और न ही फरियादियों के बैठने के लिए छायादार स्थान। इसके चलते भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में यहाँ आने वालों की मुसीबतें और बढ़ जाती हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय काफी पुराना व जर्जर अवस्था में है। यहां बैठने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही उचित व्यवस्था। बारिश के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है। कार्यालय एक कोने में स्थित होने के कारण आसानी से मिलता भी नहीं है, जिससे बुजुर्ग लोगों को आने-जाने में भारी असुविधा होती है।<br /><strong>-रौनक आनंद, विहिप मंदिर एवं अर्चक पुरोहित प्रमुख, चित्तौड़ प्रांत</strong></p>
<p> मैं सांगोद से यहाँ काम के सिलसिले में आया था। बस स्टैंड से पर्सनल ऑटो करके आया, लेकिन रास्ता घुमावदार होने के कारण ऑटो चालक को यहाँ तक आने में काफी परेशानी हुई।<br /><strong>-रामलाल, फरियादी</strong></p>
<p>नया ऑफिस बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा हुआ है। जैसे ही इसकी मंजूरी आएगी, नए भवन का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।"<br /><strong>- के.के. खंडेलवाल, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : अटल सरोवर के सामने जलभराव की समस्या से क्षेत्रवासियों को मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पालिका ने विशेष सफाई अभियान चलाकर सड़क से कीचड़ व गंदगी हटाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report--residents-get-relief-from-waterlogging-issues-in-front-of-atal-sarovar/article-159338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। अटल सरोवर के सामने बारिश के बाद सड़क पर जलभराव, कीचड़ और गंदगी की समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति में 8 जुलाई के अंक में समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन हरकत में आ गया। बुधवार सुबह पालिका की सफाई टीम मौके पर पहुंची और विशेष सफाई अभियान चलाकर सड़क पर फैले कीचड़ व गंदगी को हटाया।  साथ ही निर्माण कार्य के दौरान बंद किए गए नाले को खुलवाकर जल निकासी व्यवस्था सुचारु कर दी, जिससे क्षेत्रवासियों को राहत मिली।</p>
<p>गौरतलब है कि शक्ति चौराहा पर चल रहे नाला निर्माण कार्य के दौरान शिवनगर की ओर से आने वाले नाले का रास्ता बंद कर दिया गया था। मंगलवार को हुई बारिश के बाद पानी की निकासी नहीं होने से अटल सरोवर के सामने मुख्य सड़क पर जलभराव हो गया। पानी उतरने के बाद सड़क पर कीचड़ फैल गया और आसपास दुर्गंध की स्थिति बन गई थी। स्थानीय लोगों ने इस समस्या से प्रशासन को पूर्व में भी अवगत कराया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सफाई अभियान चलाया तथा बंद नाले को खुलवाकर जल निकासी व्यवस्था बहाल कर दी। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में निर्माण कार्य के दौरान ऐसी लापरवाही नहीं बरती जाएगी, ताकि बारिश के समय आमजन को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।पालिका ने विशेष सफाई अभियान चलाकर सड़क से कीचड़ व गंदगी हटाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:41:31 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>गड्ढे और मवेशी = बरसात में खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में हिचकोले व मवेशियों  से दुर्घटना की संभावना
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/potholes-and-cattle---danger-during-the-rainy-season/article-159244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । बरसात का सीजन शुरु हो गया है। ऐसे में सड़कों पर हो रहे गड्ढ़े और मवेशियों का जमघट खतरा बने हुए हैं।मानसून ने तो दस्तक दे दी है। लेकिन अभी तक तेज बरसात नहीं हुई है। उससे पहले ही शहर की सड़कों पर बीच में बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। अभी तो ये गड्ढ़े नजर भी आ रहे हैं। लेकिन बरसात के समय में इनमें पानी भरने पर एक ओर जहां इनकी गहराई नजर नहीं आएगी। वहीं दूसरी तरफ बरसाती पानी भरने से ये गड्ढ़े और बड़ा रूप लेकर लोगों के लिए हादसों का खतरा बन जाएंगे। वहीं रात के समय अंधेरा होने पर तो ये नजर भी नहीं आएंगे। जिससे दुर्घटनाओं की संभावना अधिक हो जाएगी।</p>
<p>सीएडी से दादाबाड़ी के बीच नए बने एलबीएस मार्ग पर बीच सड़क काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसाती पानी भरने से इनका आकार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में ये और भी बड़े हो सकते हैं। इसी तरह से दादाबाड़ी छोटा चौराहे के पास मेन रोड पर बड़ा गड्ढ़ा है। जिस पर से दो पहिया ही नहीं चार पहिया वाहन तक हिचकलो खाते हुए निकल रहे हैं। इसी तरह सरोवर टॉकीज के सामने स्थित मंदिर के पीछे व तालाब के किनारे की सड़क का काद्दफी हिस्सा खस्ताहाल हो रहा है। जिससे वहां से चार पहिया वाहन तक निकलते समय असंतुलित हो रहे हैं। जिससे अभी हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि बरसात में यहां हालत अधिक खराब होने से लोगों के लिए जान जोखिम में डालने वाले साबित हो जाएंगे।<br />चम्बल की बड़ी पुलिया पर महाराणा प्रताप सर्किल के पास भी कई जगह पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। शहर में ऐसी कई और भी जगह हहैं जहां मेन रोड की हालत ही खराब हो रही है। जबकि गली मौहल्लों की सड़कों की हालत तो बदतर स्थिति में है।</p>
<p><strong>बरसात में बढ़ा मवेशियों का जमघट</strong><br />शहर को कैटल फ्री बनाने की दिशा में किया गया प्रयास अभी तक साकार नहीं हो पाया है। हालत यह है कि अभी भी मुख्य मार्गों पर निराक्षित मवेशियों के जमघट लगे हुए देखे जा सकते हैं। किशोरपुरा थाने के सामने का क्षेत्र हो या दादाबाड़ी का। डीसीएम रोड पर नई धानमंडी मेन रोड का क्षेत्र हो या नयापुरा में एमबीएस रोड। हर जगह पर दिन हो या रात बीच राह में मवेशियों का जमघट लगा रहता है। ऐसे में बरसात के समय में ये हादसों का कारण बन सकते हैं। तेजी से आते वाहनों की चकाचौंथ रोशनी में बरसाती पानी के कारण ये मवेशी दूर से नजर नहीं आने पर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। हालांकि कुछ समय से मवेशी कम नजर आ रहे थे। लेकिन बरसाती सीजन शुरु होने के साथ ही ये बीच राह सड़कों पर फिर से नजर आने लगे हैं।</p>
<p><strong>बरसात से पहले सही करवाएंगे गड्ढ़े</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर सड़कों के गड्ढ़ों को पेचवर्क के माध्यम से सही कराया गया है। अभी भी जहां गड्ढ़े अधिक खतरनाक होंगे उन्हें बरसात शुरु होने से पहले सही करवा दिया जाएगा।</p>
<p>वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़कों से मवेशियों को लगातार पकड़ा जा रहा है। बरसात में लोग इन्हें पशु पालक खुला छोड़ देते हैं। जिससे ये सड़कों पर अधिक नजर आते हैं। फिर भी जहां अधिक मवेशी होंगे और हादसों का खतरा रहेगा उन्हें भी पकड़ा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:48:15 +0530</pubDate>
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                <title>दो वर्ष में उखड़ी सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर ग्रामीणों का सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[निमोद-बड़गांव जर्जर सड़क: गड्ढों और बबूल की झाड़यों से बढ़ा हादसों का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/road-surface-disintegrated-within-two-years--villagers-question-construction-quality/article-158843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)2.png" alt=""></a><br /><p>सांवतगढ़। निमोद से बड़गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने से वाहन चालकों, राहगीरों और किसानों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। <br />सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बारिश के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क निमोद, बड़गांव सहित आसपास के कई गांवों का प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से किसान कृषि उपज मंडी तक पहुंचाते हैं तथा विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज आते-जाते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण आवागमन जोखिमभरा हो गया है। <br />उपसरपंच लटूरलाल बेरवा एवं आशाराम मीपणा ने बताया कि सड़क किनारे बबूल की घनी झाड़ियां उग आने से मार्ग संकरा दिखाई देता है।</p>
<p>कई स्थानों पर शाखाएं सड़क तक फैल चुकी हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। निर्माण के दो वर्ष पूरे होने से पहले ही डामर उखड़ गया और सड़क गड्डों में तब्दील हो गई। ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल क्षतिग्रस्त हिस्सों के मरम्मत, पुनर्निर्माण तथा सड़क किनारे उगी झाड़ियों की शीघ्र कटाई कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />मैं स्वयं मौके का निरीक्षण करूंगा। जहां-जहां सड़क की मरम्मत की आवश्यकता होगी, वहां शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही सड़क के दोनों ओर उगे बबूल के पेड़ों एवं झाड़ियों की कटाई भी जल्द करवाई जाएगी, जिससे आवागमन सुरक्षित हो सके।<br /><strong>- सोनू नागर, एईएन सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:32:08 +0530</pubDate>
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