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                <title>silence - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>silence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पांचना बांध विवाद: अशोक गहलोत ने सरकार की चुप्पी और उदासीनता पर उठाए सवाल, जनता में पनप रहा आक्रोश </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांचना बांध को लेकर पूर्वी राजस्थान में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों में अविश्वास और आक्रोश बढ़ रहा है, लेकिन सरकार मौन है। गहलोत ने मुख्यमंत्री के क्षेत्र का हवाला देते हुए मांग की कि पंच-पटेलों को बुलाकर तुरंत शांतिपूर्ण हल निकाला जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tension-on-panchna-dam-is-worrying-government-should-intervene-gehlot/article-157623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ashok-ggehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पांचना बांध को खोलने को लेकर कई दिनों से पूर्वी राजस्थान में बना हुआ तनाव चिंताजनक है। गहलोत ने कहा है कि यह और भी चिंताजनक है कि राजस्थान सरकार इस मामले को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत तक नहीं कर रही, जिससे वहां की जनता में अंदर-ही-अंदर आक्रोश पनप रहा है। इसके कारण इन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास भी बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>सरकार को दोनों पक्षों के पंच-पटेलों को अविलंब बुलाकर बातचीत करनी चाहिए और इस मुद्दे का एक शांतिपूर्ण एवं न्यायसंगत हल निकालने का गंभीर प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री स्वयं पूर्वी राजस्थान से होने के बावजूद इस मुद्दे पर मौन कैसे हैं, यह समझ से परे है। उन्हें जल्द-से-जल्द इस मामले पर सक्रिय रुख अपनाना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:03:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> 20 दिन से खुले पड़े मौत के चैम्बर, जिम्मेदार मौन </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के अंदरुनी इलाकों में हो रहे निर्माण कार्यों में सरकारी मशीनरी व जिम्मेदारों की बदइंतजामी का दंश पिछले एक साल से शहरवासी भुगत रहे हैं। पहले आरयूडीपीआई ने सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए कॉलोनियों की सड़कें उधेड़ डाली। हालांकि सीसी रोड बनाया है लेकिन सीवरेज के दो फीट चौड़े और चार फीट गहरे चैम्बरों को खुला छोड़ दिया, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/death-chambers-lying-open-for-20-days--responsible-silence/article-11909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/l2.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के अंदरुनी इलाकों में हो रहे निर्माण कार्यों में सरकारी मशीनरी व जिम्मेदारों की बदइंतजामी का दंश पिछले एक साल से शहरवासी भुगत रहे हैं। पहले आरयूडीपीआई ने सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए कॉलोनियों की सड़कें उधेड़ डाली। डिल मशीनों की कानफाडू आवाज के बीच लोगों ने जैसे-तैसे परेशानियों के दिन काटे। लंबे अरसे बाद काम पूरा होने पर लोग चेन की सांस ले पाते उससे पहले ही नगर निगम भी जेसीबी लेकर उन्हीं कॉलोनियों में कूद गया और रोड चौड़ा करने के नाम पर घरों के आगे बनी चबूतरियों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। हालांकि सीसी रोड बनाया है लेकिन सीवरेज के दो फीट चौड़े और चार फीट गहरे चैम्बरों को खुला छोड़ दिया, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। इन दिनों विज्ञान नगर के वार्ड 39 में ऐसे ही हालात बने हुए हैं। दरअसल, कोटा दक्षिण नगर निगम द्वारा वार्डों में विभिन्न निर्माण कार्य करवाएं जा रहे हैं। जिनमें सीसी सड़क, सीवरेज चैम्बर, इंटरलोकिंग सहित अन्य कार्य शामिल हैं। <br /><br /><strong>सड़क पर गिरे बाइक सवार दंपती</strong><br />अनिल लालवानी का कहना है, चैम्बर का ढकान करवाने के लिए पार्षद को बोला था लेकिन अनसुना कर दिया। हालात यह हो रहे हैं, दिन में तो गड्ढे दिखाई देने से वाहन चालक संभलकर निकल जाते हैं लेकिन रात को स्ट्रीट लाइट बंद रहती है, जिससे कॉलोनी में अंधेरा होने से चैम्बर दिखाई नहीं देते। तीन दिन पहले शाम साढ़े सात बजे करीब बाइक सवार दम्पति सीवरेज गड्ढे में गिकर चोटिल हो गए। महिला के हाथ में छोटा बच्चा था, जिसे भी मामूली चोट आई। <br /><br /><strong>घर के आगे फिर मलबे का ढेर</strong><br />कविता कुकरेजा ने बताया कि पहले सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए आरयूडीपीआई के ठेकेदारों ने सड़क खोदकर मलबे का ढेर लगाया, अब नगर निगम ने इंटरलॉकिंग के नाम पर घर के बाहर बनी चबुतरियां तोड़कर फिर से मलबे का ढेर लगा दिया। धूल-मिट्टी से जीना मुहाल हो गया। निगम ठेकेदार एक कॉलोनी का काम पूरा किए बिना ही दूसरी कॉलोनी में काम शुरू कर देते हैं, जिससे दोनों ही कॉलोनी के बाशिंदे बदइंतजामी से परेशान हो रहे हैं। <br /><br /><strong>रोड लाइटें बंद, कॉलोनी में अंधेरा</strong><br />स्थानीय निवासियों का कहना है, कॉलोनी की रोड लाइटें बंद पड़ी हैं। शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है और खुले पड़े चैम्बर हादसों का सबब बनते हैं। यहां 20 दिन में कई हादसे हो चुके हैं। पार्षद से ढकान करवाने को कहा लेकिन अनसुना कर दिया। निगम अधिकारी भी मौका मुआयना नहीं करते। जिसकी वजह से ठेकेदार व जनप्रतिनिधि मनमर्जी चलाते हैं। लोग शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।  <br /><br /><strong>10 साल के मासूम की बच गई जान</strong><br />स्थानीय निवासी लविशा खत्री बतातीं है, गत बुधवार की शाम ट्यूशन पढ़कर घर लौट रहा 10 वर्षीय बालक सीवरेज गड्ढे में गिरकर लहुलूहान हो गया। होठों से लेकर नाक का उपरी हिस्सा कट गया। मोहल्लेवासियों ने तुरंत बच्चे को बाहर निकाल पास ही क्लिनिक लेकर पहुंचे। इधर, सागर लोहिया कहते हैं, घर के सामने खुले पड़े सीवरेज गड्ढे खतरनाक साबित हो रहे हैं। बच्चे बाहर जाने की जिद करते हैं, ऐसे में साए की तरह उनके पीछे लगे रहते हैं। <br /><br /><strong>चैम्बर में फंस रहे वाहन</strong> <br />कॉलोनीवासी मधु मूलचंदानी ने बताया कि सीवरेज चैम्बर का ढकान नहीं होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। कुछ दिनों पहले देर शाम चेम्बर में कार फंसने से चालक चोटिल हो गया। मोहल्लेवालों ने बमुशिकल कार को बाहर निकाला। वहीं, लोडिंग वाहन भी पलटने से बाल-बाल बचा। इसके अलावा आए दिन बाइक सवार चोटिल हो रहे हैं। <br /><br /><strong>खुले पड़े 2 फीट चौड़े सीवरेज चैम्बर</strong> <br />विज्ञान नगर अशोक पार्क स्थित कॉलोनी में करीब 16 फीट चौड़ी सीसी सड़क बनाई गई है। जिस पर 2 फीट चौड़े व 4 फीट गहरे 8 से 10 सीवरेज चैम्बर बने हैं, जो 20 दिन से खुले पड़े होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। रात को रोड लाइटें बंद होने से कॉलोनी में अंधेरा रहता है। जिससे वाहन चालकों को चैम्बर दिखाई नहीं देते और उसमें गिरकर चोटिल हो जाते हैं। <br /><br />नगर निगम द्वारा वार्डों में सीसी सड़क, इंटरलोकिंग, सीवरेज चैम्बर सहित अन्य कार्य करवाए जा रहे हैं। पार्षद होने के नाते लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखना मेरी जिम्मेदारी है। मैने ठेकेदार को अस्थाई रूप से सीवरेज के गड्ढों के आसपास अवरोधक लगाने को कहा था। वैसे, चेम्बरों के ढकान बनकर तैयार हो गए हैं, शनिवार या रविवार को सभी का ढकान कर दिया जाएगा। वहीं, वार्ड की अन्य कॉलोनियों में 20 फीट से अधिक चौड़ी सड़क बनाई है, जहां चैम्बरों के ढकान करवा दिया है।  <br /><strong>- मनोज गुप्ता, पार्षद वार्ड 39</strong><br /><br />सीवरेज से सबंधित काम आरयूडीपीआई या यूआईटी द्वारा करवाया जा रहा है। यदि, किसी वार्ड में कोई समस्या है तो वार्डवासी हमें बताएं, तुरंत समाधान करवाया जाएगा। वैसे, हमारे पास इस तरह की शिकायत नहीं आई, जैसे ही कोई शिकायत आएगी तो जेईएन को मौके पर भेज समाधान करवा देंगे। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर कोटा दक्षिण नगर निगम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 14:47:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>गुल खिलाएंगी खामोशी और बेचैनी</title>
                                    <description><![CDATA[सूबे में दोनों दलों के ठिकानों पर इन दिनों खामोशी और बेचैनी को लेकर काफी खुशरफुसर है। हो भी क्यों ना, मामला मिशन-23 से ताल्लुकात जो रखता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/silence-will-feed-gul/article-7289"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/raj_kaj-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>सूबे में दोनों दलों के ठिकानों पर इन दिनों खामोशी और बेचैनी को लेकर काफी खुशरफुसर है। हो भी क्यों ना, मामला मिशन-23 से ताल्लुकात जो रखता है। मिशन को लेकर हाथ वालों के साथ भगवा वाले बड़े भाई लोग भी बेचैन हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वाले के ठिकाने पर छोटे पायलट की खामोशी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, तो सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर खुसरफुसर है कि राज की कुर्सी को लेकर नेताओं की बेचैनी कुछ अलग ही इशारा करती दिखाई दे रही है। जब से मैडम एक्टिव हुई हैं, तब से भारती भवन वाले भाई लोग भी बैठकों में चिंतन-मंथन करने में रातों काली कर रहे हैं। अब बड़े नेताओं को कौन समझाए कि खामोशी और बेचैनी अपना गुल खिलाए बिना नहीं रहेगी। खामोशी और बेचैनी का मतलब समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।</p>
<p><strong>रूठे सैंया हमारे</strong><br />इन दिनों कमल वाली पार्टी में रूठों को मनाने का काम जोरों पर है, लेकिन रूठने वाले तो किसी न किसी बहाने रूठेंगे, उनको रोक भी कौन सकता है। अब देखों ना, पिछले दिनों शहरी सरकार के चुनावों में शिकस्त खाने के बाद सूबे में पार्टी को फिर से अपने पांवों पर खड़ा करने के लिए आमेर वाले पूनियाजी भाई साहब भगवा रूपी जहाज को वैतरणी पार कराने के लिए रात दिन भी एक कर रहे हैं। बाहर का रास्ता दिखा चुके चार नेताओं को भी जैसे-तैसे मनाकर अंदर ले लिया, मगर अभी भी उनकी रातों की नींद और दिन का चैन गायब है। बेचारे सूख कर दुबले होते ही जा रहे हैं। इतना करने के बाद भी जहाज है कि विपरीत हवाओं के चलते आगे नहीं बढ़ पा रहा है। और तो और साहब के सहयोगी तक सौ कदम दूर भाग रहे हैं। भगवा के ठिकाने पर सालों से आने वाले भाई लोग भी समझ नहीं पा रहे हैं कि उदयपुर वाले भाई साहब के सिवाय कोई भी बड़े नेता की सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। दो पूर्व सदरों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई, लेकिन वे भी किसी न किसी बहाने खुश नहीं है। अपने सामने मैडम के बागी तेवर झेल चुके जोधपुर वाले गज्जू बन्ना जी वाले उनकी सक्रियता से नाखुश हैं, तो शाहपुरा वाले कैलाश जी भाई साहब भी अपनी पार्टी के स्टेट चीफ की कार्यप्रणाली से नाराज होकर बीमारी के बहाने वैतरणी को बीच में ही छोड़ चुके हैं।</p>
<p><strong>बांछें खिली</strong><br />जब से गुजरे जमाने में अजमेर वाले दो अफसरों को क्लीन चिट मिली है, तब से ही कई साहब लोगों की बांछें खिली हुई हैं। बांछें भी उनकी खिली हैं, जो मालामाल हैं। उनकी संख्या भी पांच दर्जन से कम नहीं है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि भ्रष्टाचार के मामले में जेल की हवा खा चुके खाकी वाले दो बड़े साहबों को क्लीन चिट मिलने से एक बड़ी मुहिम को ब्रेक लगने के साथ ही उन आईओएज की हालत खराब है, जिन्होंने साहब लोगों जेल का रास्ता दिखाया था। अब राज का काज करने वालों को कौन समझाए कि राज की नीति में सब कुछ जायज है। साहब लोगों के साथ पहले वाले राज में जो कुछ हुआ वो भी ठीक था और अब जो हुआ वो गलत नहीं है। सिर्फ राज-राज का फर्क है।</p>
<p><strong>एक जुमला यह भी</strong><br />इन दिनों राज का काज करने वाले साहब लोगों में एक जुमला जोरों पर है। खाकी वाले साहब लोग तो रात दिन सोच जुमले को लेकर सोच में डूबे हुए हैं। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि हाईटेक सिस्टम को लेकर है। राज चाहे किसी का भी रहा हो, अपने रत्नों को हाईटेक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जोधपुर वाले भाई साहब ने तो अपने राज में तीन फीसदी बजट तक इसी में खपाया था। और तो और राज के रत्नों को पहले भी महंगे लैपटॉप तक बांटे थे, और अब सवा लाखी आई फोन दिया है, लेकिन बात वही ढाक के तीन पात वाली निकली। राज के सभी रत्नों के पास आईफोन में फाइनेंस वालोें ने बजट भेजा, लेकिन शाम तक किसी भी रत्न ने चैक तक नहीं किया। चर्चा है कि नेताओं को आई फोन देने से कोई फायदा नजर नहीं आया। कई खादी वालों को तो आई फोन चालू करना तक नहीं आता। लेकिन इस बात में दम है कि उनके बेटे के साथ भतीजों तक का जरूर भला हुआ है।</p>
<p><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 10:36:16 +0530</pubDate>
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