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                <title>food security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>food security RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दिल्ली सरकार की बड़ी घोषणा: सीएम रेखा ने कहा-किसानों के साथ पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है सरकार, गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खराब मौसम से प्रभावित किसानों के लिए गेहूं खरीद मानकों में बड़ी छूट दी है। अब 70% लस्टर लॉस और 15% तक सिकुड़े दानों वाला गेहूं भी सरकारी केंद्रों पर खरीदा जाएगा। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-governments-big-announcement-cm-rekha-said-that-the-government/article-152079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guptta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गुप्ता ने आज कहा कि इस वर्ष प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं की फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों की परेशानी कम करने और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने से बचाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने ठोस पहल की है। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल से रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2026-27 के लिए पूरी दिल्ली के सभी जिलों में गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी दी गई है, जो इस सीजन की शुरुआत से ही लागू होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत अब गेहूं में चमक की कमी (लस्टर लॉस) को 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ ही सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को पहले के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर दिया गया है ताकि मौसम से प्रभावित फसल भी खरीद के दायरे में आ सके, हालांकि गुणवत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि टूटे और हल्के टूटे दाने मिलाकर 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छूट के तहत खरीदा गया गेहूं अलग तरीके से संभाला जाएगा। इस गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखकर उसका अलग भंडारण किया जाएगा और उसका पूरा हिसाब-किताब अलग से रखा जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने बताया कि इस तरह के गेहूं को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले इस्तेमाल किया जाएगा, यानी इसे देर तक स्टोर नहीं रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खरीदे गए गेहूं का उपयोग केवल दिल्ली के भीतर ही किया जाएगा, जिससे स्थानीय खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भंडारण के दौरान इस गेहूं की गुणवत्ता में कोई गिरावट आती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह निर्णय किसानों को राहत देने, उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्णय से उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय या संचालन संबंधी प्रभाव की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार स्वयं वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, जिम्मेदार और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि इसका लाभ सीधे किसानों और उपभोक्ताओं तक पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:07:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चिंता: कृषि व्यापार नियमों को बदलने की कवायद तेज, विश्वजीत धर ने कहा-होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ती लागत को देखते हुए विशेषज्ञ अब WTO के पुराने नियमों को बदलने की वकालत कर रहे हैं। भारत सब्सिडी और नए विदेशी स्रोतों के जरिए यूरिया व डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित कर खाद्य सुरक्षा बचाने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/america-iran-war-increased-the-concern-about-global-food-security-efforts/article-147996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका -इजरायल और ईरान के बीच हाल ही के युद्ध ने न केवल तेल बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। इस संकट को देखते हुए अर्थशास्त्री और विभिन्न सरकारें अब वैश्विक कृषि व्यापार नियमों को फिर से लिखने का प्रस्ताव तैयार कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के झटकों से निपटा जा सके।</p>
<p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व डब्ल्यूटीओ चेयरमैन प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा ने यह उजागर कर दिया है कि ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य प्रणालियां एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। एलएनजी के प्रवाह में रुकावट और बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण भारत जैसे देशों में उर्वरक उत्पादन और कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तावित 'मॉडल ट्रीटी ऑन एग्रीकल्चरल ट्रेड' में तर्क दिया गया है कि विश्व व्यापार संगठन का मौजूदा ढांचा जलवायु परिवर्तन, महामारी और युद्ध जैसे झटकों से निपटने में अक्षम साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ढांचा शुरू से ही दोषपूर्ण था और अब इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के तनाव परीक्षण में विफल पाया गया है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का लगभग पांचवां हिस्सा यूरिया, आधा हिस्सा डीएपी और लगभग पूरी पोटाश मात्रा आयात करता है। खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति और समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिमों के कारण बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उर्वरकों की कीमतों में उछाल आया है। अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार ने फिलहाल इस झटके को किसानों तक पहुँचने से रोकने के लिए उच्च सब्सिडी के माध्यम से अवशोषित करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो कृषि उत्पादन घटने और खाद्य कीमतों के बढ़ने का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता था, जो एक बड़ा वित्तीय संकट बन सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित नई संधि का उद्देश्य व्यापार के बजाय खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और समानता को प्राथमिकता देना है। प्रोफेसर धर के अनुसार, यह संधि सरकारों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार देने की वकालत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्षविराम होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में युद्ध जोखिम प्रीमियम स्थायी रूप से जुड़ सकता है। इसका मतलब है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा और उर्वरक की लागत संरचनात्मक रूप से हमेशा के लिए ऊंची बनी रह सकती है।</p>
<p>बदलते हालातों को देखते हुए भारत अब पोटाश और फॉस्फेट के लिए नए स्रोतों की तलाश कर रहा है और विदेशी खनिज संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, घरेलू यूरिया उत्पादन विस्तार और खाड़ी क्षेत्र के बाहर से लंबी अवधि के एलएनजी अनुबंधों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि बाहरी झटकों को कम किया जा सके। वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यधिक केंद्रित होती हैं, तो झटके केवल स्थानीय नहीं रहते बल्कि वैश्विक स्तर पर फैल जाते हैं। नई संधि इन संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने और बड़े कृषि व्यवसायों पर लगाम लगाने का आह्वान करती है ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।</p>
<p>प्रस्ताव में खाद्य सुरक्षा को "मानवता की साझा चिंता" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत राज्यों को यह अधिकार और दायित्व होगा कि वे व्यापार को प्रतिबंधित करके भी अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो मौजूदा उदारीकरण समर्थक डब्ल्यूटीओ नियमों से एक बड़ा बदलाव होगा। अमेरिका-ईरान युद्ध ने साबित कर दिया है कि वैश्विक व्यापार की वर्तमान संरचना अब पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं पर टिकी है। बर्लिन और बर्न विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा समर्थित यह पहल आने वाली डब्ल्यूटीओ मंत्रीस्तरीय वार्ता में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रल्हाद जोशी का लोकसभा में जवाब: हर पात्र व्यक्ति को मिल रहा मुफ्त राशन, दुकान से बिना राशन वापस नहीं जा रहे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में आश्वस्त किया कि प्रमाणीकरण की कमी के बावजूद किसी भी पात्र लाभार्थी को मुफ्त राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राशन दुकानदारों का कमीशन और आवंटन राज्य सरकारों के अधीन है। मध्य प्रदेश में 100% राशन कार्ड आधार से लिंक हो चुके हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pralhad-joshis-answer-in-lok-sabha-every-eligible-person-is/article-147850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rashan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को लोक सभा में कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकार की मुफ्त राशन वितरण योजना के तहत राशन पाने से वंचित नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>प्रल्हाद जोशी ने प्रश्न काल में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन कार्ड प्रमाणीकरण एवं अन्य औपचारिकतायें पूरी न होने पर भी राशन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पात्र व्यक्ति को राशन की दुकान से बिना राशन वापस नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में बताया कि राशन दुकानों का आवंटन एवं राशन दुकानदारों का कमीशन राज्य सरकारें तय करती हैं। केन्द्र सरकार का इन मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता।</p>
<p>उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में बताया कि मध्य प्रदेश में शत-प्रतिशत राशन कार्ड आधार से लिंक कर दिये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:43:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम, व्यापार और रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने गुरुवार को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर साइन किए, ताकि 2004 से रुके हुए ट्रेड पैक्ट के लिए बातचीत फिर से शुरू हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-step-towards-india-gcc-free-trade-agreement-trade-and-strategic/article-142071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किया, जिसके बाद अमेरिका ने अपने टेरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था और अब भारत ने एक और कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में अहम प्रगति करते हुए गुरुवार को टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही वर्ष 2004 से रुकी हुई भारत-GCC व्यापार वार्ता को दोबारा औपचारिक रूप से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>भारत और जीसीसी के बीच FTA वार्ता की शुरुआत 2004 में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके बाद 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन 2011 में GCC ने वैश्विक स्तर पर सभी व्यापार वार्ताएं रोक दी थीं। नवंबर 2022 में GCC के सेक्रेटरी जनरल की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में नई जान आई। अक्टूबर 2023 में GCC ने संशोधित टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस साझा किए, जिन पर अब दोनों पक्षों की सहमति बन गई है।</p>
<p>GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत और GCC देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।</p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-GCC द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.4 प्रतिशत है। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर रहा। UAE के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा GCC व्यापार साझेदार है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचा, पेट्रोकेमिकल्स, आईसीटी, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन देगा। साथ ही, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को संतुलित करने तथा निर्यात विविधीकरण में भी मदद करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 17:47:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एफएसएसएआई के सीईओ ने की प्रदेश के खाद्य सुरक्षा कार्यों की समीक्षा : निर्देश देते हुए कहा- घी, दूध, पनीर के नियमित सैंपल लें, 90 दिन में जांच कर फैसला दें </title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय सीईओ ओटीएस के सभागार में प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को लेकर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/while-giving-a-review-of-the-states-food-security-works/article-120712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के केन्द्रीय मुख्य कार्यकारी अधिकारी जी. कमला वर्धन ने बुधवार को मिलावट रोकने के लिए दर्ज किए जा रहे केसेज की जानकारी ली एवं इनके त्वरित निस्तारण के साथ सतत निगरानी के निर्देश दिए। केन्द्रीय सीईओ ओटीएस के सभागार में प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को लेकर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। अतिरिक्त जिला कलक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की क्षेत्रीय अधिकारियों की मीटिंग। कहा कि आमजन के दैनिक खाद्य पदार्थों में शामिल घी, दूध, पनीर मसाले जैसे पदार्थों के सेंपल नियमित रूप से लिए जाएं और इनसे संबंधित केसेज को त्वरित रूप से निस्तारित किया जाए। उन्होंने प्रदेश में फूड सेफ्टी ऑफिसर्स के रिक्त पदों के बारे में जानकारी लेते हुए यथाशीघ्र भरने के भी निर्देश दिए। <br /> <br />रेगुलेटरी कम्प्लाइंस डिविजन के निदेशक  राकेश कुमार एवं कार्यकारी निदेशक सत्येन कुमार पंडा ने कहा कि अधिनियम के तहत सेंपलिंग के बाद अधिकतम 90 दिवस में केस पर निर्णय किया जाना आवश्यक है। खाद्य सरक्षा आयुक्त एच. गुईटे ने खाद्य सुरक्षा के तहत किए जाने वाली कार्यवाही की रियल टाइम मॉनिटरिंग एवं आमजन को आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिए एआई आधारित एप विकसित की जा रही है। इसमें आमजन के लिए प्रश्नावली सहित आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध होगी। अप्रेल 24 से मार्च 2025 की अवधि में प्रदेश में 18,213 सेम्पल लिए गए। इनमें 863 अनसेफ, 3734 सेम्पल सब स्टेंडर्ड एवं 131 मिस ब्रांडेड पाए गए। इनमें से 17,615 सेम्पल्स का विश्लेषण कर आवश्यक कार्यवाही कर दी गयी है। शेष 598 पेंडिंग मामलों में जिलावार अवधि निर्धारित कर नियमानुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा बैठक में निदेशक आईईसी शाहीन अली खान, अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त पंकज ओझा, संयुक्त आयुक्त डॉ. विजय प्रकाश शर्मा सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 18:50:04 +0530</pubDate>
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                <title>स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है खाद्य सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छ भोजन केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/food-security-is-essential-for-a-healthy-life/article-116826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer49.png" alt=""></a><br /><p>स्वच्छ भोजन केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की गरिमा, सतत विकास, आर्थिक उन्नति और सामाजिक स्थिरता से भी गहराई से जुड़ा है। आज जब दुनिया खाद्य उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और उपभोग की जटिलताओं से गुजर रही है, तब खाद्य सुरक्षा केवल एक स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं बल्कि एक वैश्विक जिम्मेदारी बन चुकी है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल पेट भरने से नहीं है, बल्कि इस बात से है कि हर व्यक्ति को पर्याप्त, पोषक, सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त भोजन निरंतर मिले। परंतु जब यह भोजन विषाक्त, अशुद्ध, या संक्रमित होता है, तो वह हमारे शरीर के लिए औषधि नहीं बल्कि धीमा जहर बन जाता है। खाद्य जनित बीमारियां, खाद्य अपशिष्ट, मिलावट, कीटनाशक और विषाणुओं की उपस्थिति आज वैश्विक स्वास्थ्य संकट का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना केवल सरकारों की ही नहीं, बल्कि नागरिकों, किसान, व्यापारी और उपभोक्ताओं, सभी की जिम्मेदारी है। </p>
<p>भारत जैसे विशाल और विविध देश में, जहां कृषि जीवनशैली का अभिन्न अंग है, वहां खाद्य सुरक्षा का मुद्दा और भी अधिक संवेदनशील हो जाता है। देश में प्रतिदिन करोड़ों लोग सड़क किनारे ढाबों, ठेलों या घरों में पकाए गए भोजन पर निर्भर रहते हैं। इन सभी स्रोतों में भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता की निगरानी करना एक बड़ी चुनौती है। खाद्य जनित रोग, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, अक्सर रिपोर्ट नहीं होते और इसका दुष्प्रभाव बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर अधिक पड़ता है। भारत सरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की स्थापना का उद्देश्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को नियंत्रित करना है। आज भी यह संस्था स्कूलों, कॉलेजों, होटलों, दुकानों और सुपरमार्केट्स में खाद्य निरीक्षण कर रही है। </p>
<p>ऑनलाइन खाद्य बेचने वालों के लिए भी नियम बनाए गए हैं ताकि वे ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त भोजन उपलब्ध कराएं। लेकिन केवल कानून बना देने से कार्य सिद्ध नहीं होता। आम नागरिक को भी यह समझना होगा कि भोजन की स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, बार-बार तले गए तेल में बना खाना, या सस्ते दाम पर बिकने वाला मिलावटी दूध उपभोक्ता को थोड़े समय में आर्थिक लाभ दे सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। जागरूक उपभोक्ता स्वयं ही मिलावट की पहचान करना, अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीदना, खाने से पहले धोना या गर्म करना जैसी आदतों से सुरक्षित रह सकता है। आज वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा को लेकर अनेक चुनौतियां हैं। जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण खेती में हो रहे बदलाव, फसल उत्पादन में कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग, आपूर्ति श्रृंखला की जटिलता, खाद्य पदार्थों की बर्बादी, और व्यापार में प्रतिस्पर्धा के चलते गुणवत्ता में गिरावट। इन सबके बीच एक छोटी सी गलती लाखों लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है। यह बात कोविड महामारी के समय विशेष रूप से स्पष्ट हुई थी, जब संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में असुरक्षित खाद्य पैकेजिंग और प्रसंस्करण की भूमिका भी देखी गई। खाद्य सुरक्षा का एक और महत्वपूर्ण पक्ष पोषण सुरक्षा है। केवल पेट भरना ही पर्याप्त नहीं है, भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों का होना जरूरी है। </p>
<p>आज भारत में एक ओर कुपोषण है तो दूसरी ओर मोटापा, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। इसका कारण भोजन में असंतुलन और गलत खानपान है। बहुत अधिक तला-भुना, रसायनयुक्त और संसाधित भोजन हमारी जीवनशैली को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में जागरूकता अभियान, पोषण शिक्षा और संतुलित आहार पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालयों में खाद्य सुरक्षा और पोषण से संबंधित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। जब बच्चे बचपन से यह समझेंगे कि क्या खाना है, कैसे खाना है और क्यों खाना है, तो वे बड़े होकर स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। इसके साथ महिला समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम सभाओं को भी खाद्य जागरूकता के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। बाजार में उपलब्ध पैकेज्ड खाद्य सामग्री में प्रयुक्त रसायनों और संरक्षकों पर भी निगरानी आवश्यक है। उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार है कि उसके द्वारा खरीदे गए उत्पाद में क्या मिला है, उसकी अंतिम तिथि क्या है और उसका स्रोत कहां है। फूड लेबल पढ़ना आज भी हमारे देश में अधिकांश उपभोक्ता नहीं जानते या नजरअंदाज करते हैं। जबकि यही एक साधारण आदत उन्हें असुरक्षित उत्पादों से बचा सकती है। </p>
<p>खेती के स्तर पर भी किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक कीटनाशक, फसल चक्र और खाद्य भंडारण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जानी चाहिए। सरकार की कई योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, पोषण अभियान, किसान उत्पादक संगठन आदि किसानों को सीधे जोड़कर खाद्य सुरक्षा मजबूत कर रही हैं। लेकिन इन योजनाओं का प्रभाव तभी होगा जब जमीनी स्तर पर सही तरीके से उनका पालन हो और किसानों को प्रशिक्षण मिले। खाद्य सुरक्षा केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक मसला भी है। आज दुनिया भर में खाद्य व्यापार इतना आपस में जुड़ गया है कि एक देश में हुआ उत्पादन दूसरे देश के लोगों के लिए भोजन बनता है। ऐसे में किसी एक देश की लापरवाही से पूरे क्षेत्र में खाद्य संकट फैल सकता है। </p>
<p>वैश्विक स्तर पर खाद्य गुणवत्ता के मानकों का आदान-प्रदान, आपातकालीन सूचनाओं का त्वरित संचार और खाद्य परीक्षण की पारदर्शी प्रणालियां आज की जरूरत हैं। यदि कोई खाद्य विक्रेता नियमों की अनदेखी कर रहा है, तो उसके विरुद्ध शिकायत करना भी एक सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि हम भोजन को बर्बाद करेंगे, तो किसानों की मेहनत और प्राकृतिक संसाधनों का अपमान होगा और यदि हम केवल दिखावे के लिए भोजन करेंगे, तो शरीर को रोग और समाज को असमानता का शिकार बनाएंगे। भविष्य की पीढ़ियों को एक ऐसा संसार देने के लिए जहां भूख, बीमारी और अस्वच्छता का स्थान न हो, हमें आज ही से प्रयास करना होगा।</p>
<p><strong>-रंजना मिश्रा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 11:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>गिवअप योजना में 4 हजार से ज्यादा लोगों ने स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा सूची से हटवाए नाम</title>
                                    <description><![CDATA[खाद्य सुरक्षा सूची से सक्षम लोगों के स्वेच्छा से नाम हटवाने की खाद्य विभाग की गिवअप योजना में प्रदेश भर में अब तक 4 हजार से ज्यादा लोग अपना नाम हटवा चुके हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/more-than-4-thousand-people-voluntarily-removed-their-names-from/article-96923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य सुरक्षा सूची से सक्षम लोगों के स्वेच्छा से नाम हटवाने की खाद्य विभाग की गिवअप योजना में प्रदेश भर में अब तक 4 हजार से ज्यादा लोग अपना नाम हटवा चुके हैं। कोटा जिले में सबसे ज्यादा 1962 लोगों ने अपने नाम हटवाए हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में खाद्य विभाग ने गिव अप अभियान चलाया है। जिसमें राशन कार्ड से नाम हटाने के लिए अभियान में कार्यवाही की जा रही है। सरकार का कहना है कि जो लोग सक्षम है वह खुद ही अपना नाम खाद्य सुरक्षा सूची से अपना नाम हटा लें,ताकि पात्र लाभार्थियों को जोड़ा जा सके। स्वेच्छा से राशन कार्ड से अपना नाम हटाने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है। खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने भी कहा है कि अगर 31 जनवरी तक स्वेच्छा से अपना नाम नहीं हटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>कोटा में सबसे ज्यादा नाम हटे, 12 जिलों में एक भी नाम नहीं हटा</strong><br />खाद्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार विभाग के पास 41 जिलों की रिपोर्ट देखें तो अब तक करीब 4 हजार से ज्यादा लोगों ने स्वेच्छा से अपना नाम सूची से हटवा लिया है। सबसे अधिक नाम हटवाने वाले जिलों में कोटा में सबसे ज्यादा 1962 लोगों ने नाम हटवाया। इसके अलावा डीडवाना कुचामन में 374, नागौर में 374, श्रीगंगानगर में 290, हनुमानगढ़ में 218, करौली में 209, झुंझुनूं में 196, चूरू में 142, बीकानेर में 113 लोगों ने अपने नाम स्वेच्छा से हटवाए। सबसे कम डीग जिले में में 2 लोगों ने ही अपने नाम हटवाए। वंही,12 जिलों में एक भी व्यक्ति ने अपना नाम नहीं हटवाया। जयपुर शहर सहित बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर-बालोतरा, धौलपुर, सिरोही, उदयपुर, सांचौर, दूदू, जैसलमेर, अनूपगढ़ और नीमकाथाना जिले शून्य नाम वाले जिलों में शामिल हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है.</strong><br />गिवअप योजना में 31 जनवरी तक लोग स्वेच्छा से नाम हटवा सकते हैं। इसके बाद सक्षम लोगों के नाम विभागीय स्तर पर हटाने की कार्यवाही की जाएगी। इन नामों के हटने पर हम इनकी जगह पात्र लाभार्थियों को जोड़ेंगे, ताकि उनको गेंहू उपलब्ध कराया जा सके।<br />- पूनम प्रसाद सागर, अतिरिक्त खाद्य आयुक्त, खाद्य विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 18:55:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>खाद्य सुरक्षा: 66 हजार कर्मचारियों से 80 करोड़ रुपए की वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[अभियान के बाद विभाग डीएसओ के माध्यम से अभी तक योजना से जुड़े सरकारी कर्मचारियों को नोटिस देकर वसूली की कार्रवाई करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/food-security-recovery-of-rs-80-crore-from-66-thousand/article-89139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/food-grain-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य सुरक्षा योजना में गरीब का एक रुपए किलो गेंहू डकारने वाले हजारों कर्मचारियों को खाद्य विभाग डीएसओ के माध्यम से नोटिस जारी कर अब तक उठाए गेंहू की राशि 27 रुपए प्रति किलो के हिसाब से वसूलेगा। आरजीएचएस में जनाधार लिंक के बाद अब तक 66 हजार कर्मचारियों से 80 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है। शेष कर्मचारियों को अगले महीने डीएसओ के माध्यम से नोटिस देने की तैयारी तेज कर दी है। </p>
<p>खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों सहित सक्षम लोगों से अपील की थी कि वे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान के तहत योजना में स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले सकते हैं, जिससे गरीबों को उनके हिस्से का अन्न मिल सके। गिवअप करने वाले के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अभियान के बाद विभाग डीएसओ के माध्यम से अभी तक योजना से जुड़े सरकारी कर्मचारियों को नोटिस देकर वसूली की कार्रवाई करेगा। खाद्य विभाग के अफसरों का कहना है कि पिछले दो साल से सरकारी कर्मचारियों को गेंहू देने पर रोक लगा रखी है। गेंहू नहीं मिल पाने के कारण बाद में उनका नाम पोर्टल से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p><strong>अपात्र होने के बावजूद उठाया गेंहू, वसूली से बचने की जुगत</strong><br />जब योजना 2013 में शुरू हुई तो योजना से जुड़ने के लिए लाखों आवेदन आए। इसमें बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल थे। चुनावी समय नजदीक होने के कारण राजनीतिक दबाव में पर्याप्त जांच नहीं होने से बडी संख्या में नाम जुड़ गए। गहलोत सरकार में मंत्री रहे रमेशचन्द्र मीणा ने सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों से वसूली की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद सरकार बदलने के बाद प्रक्रिया सुस्त पड़ गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केन्द्र सरकार के आदेशों की पालना में अब यह कार्रवाई फिर से शुरू की जाएगी। कुछ कर्मचारी अभी भी वसूली से बचने की जुगत में लगे हुए हैं।</p>
<p><strong>वेतन से भी हो सकती है वसूली</strong><br />उन सरकारी कर्मचारियों से वसूली होगी, जो अपात्र होने के बावजूद गेंहू उठा रहे हैं। कई जगह अभी भी गरीबों को मिलने वाले गेंहू को सरकारी कर्मचारी और अधिकारी फर्जी तरीके से उठा लेते हैं। इनसे वसूली के लिए संबंधित एसडीएम राशि जमा कराने का नोटिस करता है। राशि जमा नहीं कराने पर वेतन से भी वसूली करने का प्रावधान है।</p>
<p>वहीं, हाल ही में खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने चौपहिया वाहन मालिक और आयकर दाताओं का खाद्य सुरक्षा सूची से नाम हटाने का फैसला लिया। इसके लिए परिवहन विभाग और आयकर विभाग से ब्यौरा मांगा है। परिवहन विभाग से ट्रेक्टर और कॉमर्शियल श्रेणी छोड़कर सभी चौपहिया वाहन मालिकों के आधार कार्ड का ब्यौरा मांगा है तथा आयकर विभाग से इन्कम टैक्स देने वालों की सूची मांगी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Aug 2024 11:01:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>खाद्य सुरक्षा का सर्वर बार-बार ठप्प, राशन लाभार्थी हो रहे परेशान </title>
                                    <description><![CDATA[राशन की दुकानों के बाहर सीनियर सिटीजन वृद्ध महिलाएं पुरुष मशीन पर सही से अंगूठा का निशान नहीं आने से परेशान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/food-security-server-keeps-crashing-ration-beneficiaries-are-getting-worried%C2%A0/article-81161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy11rer-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी जयपुर में राशन दुकानदारों के यहां खाद्य सुरक्षा योजना में चयनित परिवारों की आधार कार्ड से केवाईसी सरकार द्वारा  करवाई जा रही है।</p>
<p>चयनित परिवार खाद्य सुरक्षा योजना में गेहूं प्राप्त करने के लिए केवाईसी कराने के लिए दुकान पर पहुंचता है तो उसे सर्वर ठप की समस्या<br />दुकानदार द्वारा बताई जा रही है। बार-बार सर्वर के ठप होने से दुकानदार भी बहुत ज्यादा परेशान है। राशन की दुकानों के बाहर सीनियर सिटीजन वृद्ध महिलाएं पुरुष मशीन पर सही से अंगूठा का निशान नहीं आने से परेशान है।</p>
<p>लोकसभा चुनाव सम्पन होने के बाद केवाईसी के कार्य चालू हुआ तो, लेकिन बार बार सर्वर के ठप्प होने से समस्याएं बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 18:59:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>खाद्य सुरक्षा पर बीजेपी ने उठाए सवाल: सरकार से वायदा पूरा करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[खाद सुरक्षा से वंचित 10 लाख लोगों का नाम सरकार योजना से जोड़ेगी बात पर दिया जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bjp-raises-questions-on-food-security-demands-from-the-government--to-fulfill-the-promise/article-17400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/lal.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रमुख प्रवक्ता और चोमूं के विधायक रामलाल शर्मा ने बयान जारी करके कहा है राजस्थान सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि खाद सुरक्षा से वंचित 10 लाख लोगों का नाम सरकार योजना से जोड़ेगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी एक दिन पहले ही अपनी सभी बजट घोषणाओं को पूरा करने की बात कही है। लेकिन अभी भी आवेदन कर चुके लोगों यह नाम योजना से नहीं जुड़े हैं। इसलिए सरकार अपना वादा पूरा करके जल्द इन लोगों के नाम खाद सुरक्षा से जोड़ें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 14:58:07 +0530</pubDate>
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                <title>फूड सिक्योरिटी लिस्ट से 70 लाख अपात्र हटाए</title>
                                    <description><![CDATA[खाद्य विभाग ने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत जुड़े पांच करोड़ नामों में से अब तक 70 लाख अपात्र लोगों की पहचान कर ली है। इन लोगों से राशि वसूलने के साथ ही प्रदेश में दस लाख नए परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में जोड़ने की कवायद भी शुरू कर दी गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/70-lakh-ineligible-removed-from-food-security-list/article-7364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/02-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य विभाग ने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत जुड़े पांच करोड़ नामों में से अब तक 70 लाख अपात्र लोगों की पहचान कर ली है। इन लोगों से राशि वसूलने के साथ ही प्रदेश में दस लाख नए परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में जोड़ने की कवायद भी शुरू कर दी गई हैं। विभाग ने प्रदेश में एनएफएसए पोर्टल को फिर से शुरू किया है, जहां ई-मित्र से भी आवेदन किए जा सकते हैं। पोर्टल पर आवेदन के लिए जन आधार कार्ड और आधार नंबर होना जरूरी है। केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में प्रदेश के एनएफएसए लाभार्थियों की अधिकतम संख्या 4.46 करोड़ होने पर एनएफएसए पोर्टल को बंद कर दिया गया था, लेकिन अब पोर्टल फिर शुरू किया गया है।</p>
<p>विभाग का मकसद बजट घोषणा के अनुसार दस लाख नए परिवारों को खाद्य सुरक्षा सूची में जोड़ना है, ताकि उन्हें सस्ता गेहूं मिल सके। विभाग की एक रुपए किलो गेहूं फ्लैगशिप योजना के तहत प्रदेश में बीपीएल, स्टेट बीपीएल परिवारों को 5 किलो गेहूं प्रति यूनिट और अंत्योदय परिवारों को 35 किलो गेहूं प्रति परिवार हर महीने दिया जाता है। शेष सभी श्रेणी के लाभार्थियों को दो रुपए प्रति किलो गेहूं दिया जा रहा है। हाल ही में जनआधार कार्ड से राशनकार्ड की मैपिंग के बाद 28 हजार सरकारी कर्मचारी जुड़े मिले थे। इन अपात्रों से वसूली की कार्रवाई जारी है। राज्य में अलग-अलग कार्रवाई के बाद करीब 70 लाख अपात्र लाभार्थियों के नाम एनएफएसए सूची से हटाया जा चुका है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 10:38:26 +0530</pubDate>
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