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                <title>gangaur - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान का पौराणिक लोकोत्सव गणगौर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान का नाम सुनते ही मन ख़ुशी से झूम उठता है। राजस्थान के पर्व त्योहार अपने आप में अलग ही महत्व रखते हैं। राजस्थानी परम्परा के लोकोत्सव अपने में एक विरासत को संजोए हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/rajasthans-mythological-folk-festival-gangaur/article-74913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/photo-size-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>राजस्थान का नाम सुनते ही मन ख़ुशी से झूम उठता है। राजस्थान के पर्व त्योहार अपने आप में अलग ही महत्व रखते हैं। राजस्थानी परम्परा के लोकोत्सव अपने में एक विरासत को संजोए हुए हैं। राजस्थान को देव भूमि कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यहां सभी सम्प्रदाय फले-फूले हैं। यहां के शासकों ने विश्व कल्याण की भावना से अभिभूत होकर लोक मान्यताओं का सम्मान किया है। इसी कारण यहां सभी देवी देवताओं के उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। गणगौर का उत्सव भी ऐसा ही लोकोत्सव है। जिसकी पृष्ठ भूमि पौराणिक है। समय के प्रभाव से उनमें शास्त्राचार के स्थान पर लोकाचार हावी हो गया है। परन्तु भाव भंगिमा में कोई कमी नहीं आई है।</p>
<p>गणगौर भी राजस्थान का ऐसा ही एक प्रमुख लोक पर्व है। लगातार 17 दिनों तक चलने वाला गणगौर का पर्व मूलत: कुंवारी लड़कियों व महिलाओं का त्योहार है। राजस्थान की महिलाएं चाहें दुनिया के किसी भी कोने में हों गणगौर के पर्व को पूरी उत्साह के साथ मनाती हैं। विवाहिता एंव कुंवारी सभी आयु वर्ग की महिलाएं गणगौर की पूजा करती हैं। गणगौर शब्द भगवान शिव और पार्वती के नाम से बना है। गण यानि भगवान शिव और गौर यानि पार्वती। इसलिए शिव-पार्वती की पूजा के रूप में इस त्योहार को मनाया जाता है। होली के दूसरे दिन से सोलह दिनों तक लड़कियां प्रतिदिन प्रात: काल ईसर-गणगौर को पूजती हैं। जिस लड़की की शादी हो जाती है वो शादी के प्रथम वर्ष अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती है। इसी कारण इसे सुहागपर्व भी कहा जाता है। कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह शंकर भगवान के साथ हुआ था। उसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। गणगौर व्रत गौरी तृतीया चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि को किया जाता है। इस व्रत का राजस्थान में बड़ा महत्व है। कहते हैं इसी व्रत के दिन देवी पार्वती ने अपनी उंगली से रक्त निकालकर महिलाओं को सुहाग बांटा था। इसलिए महिलाएं इस दिन गणगौर की पूजा करती हैं।</p>
<p>राजस्थान की राजधानी जयपुर में गणगौर उत्सव दो दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है। सरकारी कार्यालयों में आधे दिन का अवकाश रहता है। ईसर और गणगौर की प्रतिमाओं की शोभायात्रा राजमहल से निकलती है। इनको देखने बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैनानी उमड़ते हैं। सभी उत्साह से भाग लेते हैं। इस उत्सव पर एकत्रित भीड़ जिस श्रृद्धा एवं भक्ति के साथ धार्मिक अनुशासन में बंधी गणगौर की जय-जयकार करती हुई भारत की सांस्कृतिक परम्परा का निर्वाह करती है उसे देखकर अन्य धर्मावलम्बी भी इस संस्कृति के प्रति श्रृद्धा भाव से ओत-प्रोत हो जाते हैं। ढूंढाड़ की भांति ही मेवाड़, हाड़ौती, शेखावाटी सहित इस मरुधर प्रदेश के विशाल नगरों में ही नहीं बल्कि गांव-गांव में गणगौर पर्व मनाया जाता है एवं ईसर-गणगौर के गीतों से हर घर गुंजायमान रहता है। उकामदेव मदन की पत्नी रति ने भगवान शंकर की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर लिया तथा उन्हीं के तीसरे नेत्र से भस्म हुए अपने पति को पुन: जीवन देने की प्रार्थना की। रति की प्रार्थना से प्रसन्न हो भगवान शिव ने कामदेव को पुन: जीवित कर दिया तथा विष्णुलोक जाने का वरदान दिया। उसी की स्मृति में प्रति वर्ष गणगौर का उत्सव मनाया जाता है। गणगौर पर्व पर विवाह के समस्त नेगचार व रस्में की जाती हैं। होलिका दहन के दूसरे दिन गणगौर पूजने वाली लड़कियां होली दहन की राख लाकर उसके आठ पिण्ड बनाती हैं एवं आठ पिण्ड गोबर के बनाती हैं। उन्हें दूब पर रखकर प्रतिदिन पूजा करती हुई दीवार पर एक काजल व एक रोली की टिकी लगाती हैं। शीतलाष्टमी तक इन पिण्डों को पूजा जाता है। फिर मिट्टी से ईसर गणगौर की मूर्तियां बनाकर उन्हें पूजती हैं। <br />लड़कियां प्रात: ब्रह्ममुहुर्त में गणगौर पूजते हुए गीत गाती हैं:- गौर ये गणगोर माता खोल किवाड़ी, छोरी खड़ी है तन पूजण वाली। गीत गाने के बाद लड़कियां गणगौर की कहानी सुनती है। दोपहर को गणगौर के भोग लगाया जाता है तथा कुए से लाकर पानी पिलाया जाता है। लड़कियां कुए से ताजा पानी लेकर गीत गाती हुई आती हैं:-म्हारी गौर तिसाई ओ राज घाट्यारी मुकुट करो,बीरमदासजी रो ईसर ओराज, घाटी री मुकुट करो, म्हारी गौरल न थोड़ो पानी पावो जी राज घाटीरी मुकुट करो।</p>
<p>लड़कियां गीतों में गणगौर के प्यासी होने पर काफी चिन्तित लगती है एवं गणगौर को जल्दी से पानी पिलाना चाहती है। पानी पिलाने के बाद गणगौर को गेहूं चने से बनी घूघरी का प्रसाद लगाकर सबको बांटा जाता है और लड़कियां गीत गाती हैं:-म्हारा बाबाजी के माण्डी गणगौर, दादसरा जी के माण्ड्यो रंगरो झूमकड़ो, ल्यायोजी-ल्यायो ननद बाई का बीर, ल्यायो हजारी ढोला झुमकड़ो। रात को गणगौर की आरती की जाती है तथा लड़कियां नाचती हुई गाती हैं। गणगौर पूजन के मध्य आने वाले एक रविवार को लड़कियां उपवास करती हैं। प्रतिदिन शाम को क्रमवार हर लड़की के घर गणगौर ले जाई जाती है। </p>
<p>गणगौर की विदाई का बाद कई महिनों तक त्योहार नहीं आते इसलिए कहा गया है-तीज त्योहार बावड़ी ले डूबी गणगौर। अर्थात् जो त्योहार तीज (श्रावणमास) से प्रारम्भ होते हैं उन्हें गणगौर ले जाती है। ईसर-गणगौर को शिव पार्वती का रूप मानकर ही बालाएं उनका पूजन करती हैं। गणगौर के बाद बसन्त ऋतु की विदाई व ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होती है। दूर प्रान्तों में रहने वाले युवक गणगौर के पर्व पर अपनी नव विवाहित प्रियतमा से मिलने अवश्य आते हैं। जिस गोरी का साजन इस त्योहार पर भी घर नहीं आता वो सजनी नाराजगी से अपनी सास को उलाहना देती है। सासू भलरक जायो ये निकल गई गणगौर, मोल्यो मोड़ों आयो रे।</p>
<p><strong>-रमेश सर्राफ  धमोरा</strong><br /><strong>ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Apr 2024 11:12:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>ठाट-बाट से निकली गणगौर की सवारी</title>
                                    <description><![CDATA[ देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत, आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेन्द राठौड़ सहित अन्य गणमान्यों ने भी गणगौर की सवारी को देखा।
 ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gangaurs-ride-came-out-with-pomp/article-40760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/aa1.png" alt=""></a><br /><p>नवज्योति, जयपुर। सुर्ख लाल की रंग की पोशाक धारण कर सजी-धजी गणगौर माता की सवारी के दर्शन करने के लिए शहर में लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा। पूर्व राजपरिवार के मुखिया पद्मनाभ सिंह ने त्रिपोलिया गेट पर गणगौर माता की आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत, आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेन्द राठौड़ सहित अन्य गणमान्यों ने भी गणगौर की सवारी को देखा।<br /><br />गणगौर माता के दर्शन कर लोगों ने जयकारे लगाकर माहौल में जोश भर दिया। सबसे आगे हाथी पर पूर्व राजपरिवार का पचरंगा निशान थामे सेवक चल रहे थे। हाथी, घोड़े, ऊंटगाड़ी, बैलगाड़ी, बग्घी, हैरतअंगेज करतब दिखाने वाले, बैण्डबाजा, अलगोजा वादक, कच्ची घोड़ी, कालबेलियां और गैर नृत्य करते लोक कलाकारों के साथ देशी-विदेशी सैलानियों ने जमकर डांस किया। बहरूपिया कलाकार जोकर, बंदर आदि रूप में करतब दिखाते हुए चल रहे थे। पारंपरिक तोप धारक वाहन के साथ सजे हुए रथ भी शोभायात्रा का हिस्सा बने। पर्यटकों ने रियासतकालीन शोभायात्रा के नजारों को अपने मोबाइल में कैद किया। मार्ग में जिधर से भी शोभायात्रा निकली, वहीं छतों पर लोगों का हुजूम घंटों से इंतजार करता मिला। लोगों ने पुष्प वर्षा कर गणगौर माता से आशीर्वाद मांगा। गणगौर की सवारी के अंत में ढालधारी चौबदार और पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं शामिल थी। तालकटोरा पहुंचकर शोभायात्रा संपन्न हुई। शनिवार को बूढ़ी गणगौर की शोभायात्रा निकलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Mar 2023 11:40:42 +0530</pubDate>
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                <title>लाखेरी गणगौर समारोह में अव्यवस्थाओं का आलम, दर्शक  निराश लौट रहे</title>
                                    <description><![CDATA[लाखों रुपए की फिजुलखर्ची की जा रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान सुविधाओं के अभाव के कारण दर्शक बैरंग लौट रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/clutter-in-lakheri-gangaur-ceremony--spectators-returning-disappointed/article-7543"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/22.jpg" alt=""></a><br /><p>लाखेरी। लाखेरी नगर पालिका की ओर से 6 दिवसीय गणगौर महोत्सव में अव्यवस्थाओं का आलम है। लाखों रुपए की फिजुलखर्ची की जा रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान सुविधाओं के अभाव के कारण दर्शक बैरंग लौट रहे है। सांस्कृतिक समारोह की प्रस्तुतियों के लिए स्टेज की ऊंचाई बहुत कम रखी गई है। जिससे दर्शक कार्यक्रम का मजा तक नहीं ले पा रहे। यहीं नही प्रस्तुतियों की बजाय दो घंटे तो अतिथियों के स्वागत सत्कार में ही खराब किए जा रहे है। गणगौर उत्सव के तहत तीसरे दिन मंगलवार रात को स्टार नाईट पार्टी द्वारा प्रोग्राम की प्रस्तुति सीनियर विद्यालय के प्रांगण में बनाए गए एसीसी सीमेंट फैक्ट्री के रंगमंच मंच पर प्रस्तुतियां दी गई। प्रोग्राम रात्रि के 10:30 बजे प्रारंभ किया गया। उसके पूर्व अतिथियों के स्वागत के में ही 2 घंटे लगाए गए जिससे काफी संख्या में उपस्थित श्रोता अपने घरों की ओर लौटने लगे। श्रोताओं को आयोजन की प्रस्तुतियां पर उदास नजर आए। पूरे कार्यक्रम के दौरान एक बार भी वंस मोर की आवाज कहीं से नहीं आई। एक डेढ़ घंटे बाद ही आधे दर्शकों ने अपने घरों पर जाने का मानस बनाते हुए अपने घरों की ओर चल दिए जिससे 12:00 बजे के बाद आधे से भी कम श्रोता। वहां पर केवल पुलिस प्रशासन और नगर पालिका कर्मचारी वह आयोजन समिति के सदस्य वह कुछ लोग प्रोगाम देखते नजर आए। <br /><br /><strong>गणगौर महोत्सव में की जा रही फिजुलखर्ची</strong><br />वहां पर मौजूद पूर्व पालिका उपाध्यक्ष गणेश सैनी पूर्व पालिका उपाध्यक्ष दिनेश सैनी ने बताया कि आयोजन समिति द्वारा आयोजन को भव्य बनाने के लिए कॉपी फिजूल पैसा खर्च किया गया है। अगर आयोजन समितियों को एलसीडी में ही प्रोग्राम को दिखाना था तो दर्शकों को के द्वारा अपने घर पर लगी हुई एलसीडी पर ही प्रोग्राम अपने परिवार के साथ देख लेते लेकिन यहां पर दर्शक इसलिए आते हैं। कलाकार को मंच पर रूबरू देखकर प्रोग्राम का आनंद उठा सकें लेकिन यहां पर इस प्रकार का आनंद नहीं उठा पा रहे हैं। यहां पर जो रंगमंच पर स्टेज बना रखा है वह काफी नीचा बना रखा है जिससे दूर से देखने वाले दर्शक को कलाकारों की प्रस्तुती भी नहीं दिख पा रही हैं जिससे आयोजन में किसी प्रकार का लुफ्त उठाने में दर्शकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।<br />  <br />इसी प्रकार पालिका के पास मेला ग्राउंड नहीं होने के कारण बाहर से आने वाले दुकानदारों व झूले चकरी वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनको कम जगह पर ही अपना व्यवसाय करके कार्य करना पड़ रहा है जिससे वह अपने आने जाने का खर्चा निकालने में भी काफी मुश्किल का कार्य लग रहा है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br /> पालिका की चेयरमैन आशा शर्मा का कहना है कि समारोह को लेकर व्यवस्थाओं को सुचारू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 15:39:39 +0530</pubDate>
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                <title>बोर्ड की सहमति लिए बिना ही गणगौर समारोह में किए जा रहे लाखों रुपए खर्च !</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में नगर पालिका लाखेरी की ओर से छह दिवसीय गणगौर महोत्सव में करीब 30 लाख से अधिक बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन इतने बड़े आयोजन में पालिका की बोर्ड में बिना सलाह मशवरे के ही आयोजन किया जा रहा है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lakhs-of-rupees-are-being-spent-in-gangaur-celebration-without-taking-the-consent-of-the-board/article-7477"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/logo.jpg" alt=""></a><br /><p>लाखेरी। शहर में नगर पालिका लाखेरी की ओर से छह दिवसीय गणगौर महोत्सव में करीब 30 लाख से अधिक बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन इतने बड़े आयोजन में पालिका की बोर्ड में बिना सलाह मशवरे के ही आयोजन किया जा रहा है। कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद हो रहे इस गणगौर समारोह के पूर्व तैयारियों को लेकरभी पार्षदों से भी सलाह तक नहीं ली गई। ऐसे में समारोह को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। <br /><br /><strong>गणगौर शोभायात्रा भी रही फिकी</strong><br />गौरतलब है कि सोमवार को गणगौर महोत्सव के तहत शहर में शोभायात्रा निकाली गई। कोरोना के चलते पिछले 2 साल से शोभायात्रा नहीं निकाली जा रही थी। ऐसे में गणगौर महोत्सव को लेकर लाखेरी के लोगों इंतजार था।  सोमवार को पालिका प्रशासन ने शोभायात्रा लाखेरी के प्रमुख मार्ग से निकाली। शोभा यात्रा को लेकर शहर वासियों ने उत्साह के भाव नजर नहीं आए।  शहर वासियों ने बताया की पूर्व में गणगौर की यात्रा निकलने के पूर्व बाजार में खड़े रहने की जगह भी नहीं मिल पाती थी लेकिन  पालिका द्वारा सोमवार को निकाली शोभायात्रा में बहुत कम संख्या में शहरवासी नजर आए। शोभायात्रा में झांकियां भी पूरी नहीं सजाने से खाली टैÑैक्टर  शामिल किए गए। जबकि हर टैÑक्टर में झांकी शामिल होती है। शोभायात्रा में भाजपा के पार्षद नजर नहीं आए।   गणगौर शोभायात्रा के दौरान मुख्य बाजार विजय द्वार के पास जहां आवारा पशु, पुलिस की गाड़ी और कुछ लोग नजर आ रहे हैं। जबकि यहां पर पैर रखने की जगह नहीं होती थी। <br /><br />शहर के व्यापारी रूपेश अरोड़ा,समाजसेवी मुकेश राठौर, ईट भट्टा संचालक बाली पूर्व पार्षद महेंद्र सैनी आदि ने बताया कि नगरपालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते गणगौर शोभायात्रा में इस प्रकार के हालात नजर आ रहे हैं। अगर पालिका प्रशासन द्वारा समय रहते हुए गणगौर उत्सव की तैयारियां और उत्सव को आकर्षक बनाने के लिए सभी पार्षदों से सलाह मशवरा करके कार्य किया जाता तो इस प्रकार के हालात नजर नहीं आते। <br /><br />भाजपा नगर अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने बताया यह शहर के राज्य सरकार के विकास कार्य के बजट के पैसे का उपयोग पालिका प्रशासन नगर पालिका बोर्ड की सहमति के बिना ही लाखों रुपयों को लगा रही है जो पैसा शहर का विकास में खर्च किया जाना चाहिए। <br /><br />शहर के बोर्ड को बने हुए एक वर्ष से अधिक समय गुजर गया लेकिन अभी तक पालिका ने शहर के एक रुपए आमद का जरिया नहीं बना सकी। वर्तमान में पालिका राज्य सरकार बजट पर ही अपना कार्य कर रही है जिसको भी बोर्ड की सहमति बिना ही लाखों रुपए आयोजनों में खर्च किए जा रहे है। पार्टी के नगर अध्यक्ष ने बताया जहां पालिका द्वारा गणगौर आमंत्रण पत्र भी हमारे पास नहीं पहुंचाए जिससे लगता है यह आयोजन केवल एक युक्ति का नजर आता है। भेदभाव रखते हुए राष्ट्रीय पार्टी के नगर अध्यक्ष  के पास बी आमंत्रण पत्र अभी पहुंचा सके।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />विधानसभा सत्र चलने के कारण गणगौर समारोह को लेकर बोर्ड की बैठक नहीं हो सकी थी। इसको ध्यान में रखते हुए नियमानुसार प्रशासनिक समिति के सदस्यों की बैठक कर गणगौर समारोह को लेकर चर्चा कर ली गई थी। इसके साथ ही जहां तक निमंत्रण का सवाल है सभी को आॅफिसियल निमंत्रण भेजा गया था। विपक्ष के लोग गलत आरोप लगा रहे है। <br />-आशा शर्मा,चेयरमैन लाखेरी नगर पालिका</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 14:13:37 +0530</pubDate>
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                <title>लवाजमे के साथ निकली गणगौर की सवारी </title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद जयपुर शहर में लोकपर्व गणगौर पर बैण्डबाजे और लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट जनानी ड्योढी से गणगौर माता की सवारी निकली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/womens-worship-of-gangaur-in-residence/article-7368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/04-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दो साल बाद जयपुर शहर में लोकपर्व गणगौर पर बैण्डबाजे और लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट जनानी ड्योढी से गणगौर माता की सवारी निकली। सिटी पैलेस में पूर्व राजपरिवार की महिलाओं ने गणगौर माता का पूजन किया। सवारी को देखने के लिए जयपुरवासी उत्साह व उमंग के साथ उमड़े तो मानो मेला सा लग गया। परकोटे की दीवारों पर बैठे ग्रामीण शोभायात्रा को देखने के लिए दूर दराज से यहां पहुंचे थे। दोपहर में ही लोग बरामदों में खड़े हो गए। शाम तक चौड़ा रास्ता सहित आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर गया। त्रिपोलिया गेट से सजे-धजे हाथी, ऊंट, घोड़े, बैल, बग्गी निकलनी शुरू हुई तो लोगों का उत्साह बढ़ गया। कुछ ही देर बाद लाल सुर्ख रंग के परिधान में गणगौर और ईसर की सवारी त्रिपोलिया गेट से निकली तो लोगों ने हाथ जोड़कर उन्हें नमन किया और भावुक हो उठे।</p>
<p><strong>महिलाओं ने किया पूजन</strong><br />गणगौर पर्व पारंपरिक रूप में मनाया। महिलाओं ने साड़ी पहनकर सामूहिक रूप से गणगौर माता का घरों में पूजन किया। कुछ महिला संगठनों ने भी सामूहिक पूजा कराई। इससे पूर्व अखंड सौभाग्य की कामना के साथ भगवान शंकर और पार्वती के रूप में गौर-ईसर की पूजा कर घेवर का भोग लगाया। वहीं गोविंददेवजी सहित अन्य मंदिरों में ठाकुरजी को घेवर का भोग लगाया।<br /><br /><strong>पंचरंगा निशान के साथ चल रहे थे गजराज</strong><br />सवारी के आगे-आगे प्रदेश के लोक कलाकारों के नृत्य, संगीत ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। घूमर, कालबेलिया, कच्ची घोड़ी, चरी नृत्य और चंग-ढाप पर कलाकारों ने जोरदार प्रस्तुति दी। बैंड की धुनों में पारम्परिक राजस्थानी संगीत की स्वरलहरियां बिखर रही थी। छोटी चौपड़ पर लोग घर और बरामदों की छतों पर खडेÞ होकर शोभायात्रा को निहार रहे थे। जयपुरवासियों ने गणगौर माता से महामारी को सम्पूर्ण समाप्त कर सुख, समृद्धि की प्रार्थना की। सवारी में सबसे आगे गजराज पर पंचरंगा निशान लिए महावत बैठा था। पीछे ऊंट और घोड़े का लवाजमा चल रहा था। सौ से अधिक लोक कलाकार राजस्थानी गीत-संगीत और नृत्य करते हुए चल रहे थे। छोटी चौपड़ से शोभायात्रा चौगान स्टेडियम होते हुए तालकटोरा पहुंची। यहां गणगौर को पानी पिलाया गया। मंगलवार को बूढ़ी गणगौर की सवारी निकलेगी।</p>
<p><strong>गणगौर माता की पूजा-अर्चना की</strong><br />जयपुर। गणगौर पर्व पर जयपुर नगर निगम गे्रटर की मेयर सौम्या गुर्जर के नेतृत्व में वार्ड 43 की पार्षद अर्चना शर्मा, मीनाक्षी, दुर्गेश नंदिनी, संजू चौधरी और वार्ड 43 की मातृशक्ति बहनों ने गणमौर माता की पूजा अर्चना की।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 11:01:58 +0530</pubDate>
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