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                <title>गौशाला व बंधा गांव में हजारों पशु, फिर भी नहीं है चिकित्सालय की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ गौशाला में बीमारियों का बढ़ रहा प्रकोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-animals-in-the-cowshed-and-bandha-village--yet-there-is-no-hospital-facility/article-112416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर से कई किलोमीटर दूर बंधा गांव और वहां स्थित नगर निगम की गौशाला में जहां हजारों पशु हैं। वहां पशु चिकित्सालय की सुविधा तक नहीं है। निगम की गौशाला में इन दिनों बीमारियों का प्रकोप होने के बावजूद गौशाला कम्पाउंडरों के भरोसे है। बंधा धर्मपुरा में नगर निगम की गौशाला है।  जहां शहर से लावारिस हालत में पकड़े गए गौवंश को रखा गया है। वर्तमान में यहां करीब 3 हजार से अधिक मवेशी हैं। जिनमें सांड से लेकर गाय व बछड़े तक शामिल है। हालत यह है कि लावारिस हालत में पकड़े गए इन गौवंश में से अधिकतर बीमार  व कमजोर हालत में आते हैं। जिन्हें पशु चिकित्सक की देखभाल की आवश्यकता रहती है। गौशाला में बीमार व कमजोर गायों को अलग बाड़े में रखा हुआ है। हालांकि यहां पशु चिकित्सा केन्द्र तो बनाया हुआ है। लेकिन चिकित्सालय की सुविधा नहीं है। केन्द्र में मात्र कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं। जिनके भरोसे पूरी गौशाला में गौवंश की देखभाल व उपचार किया जा रहा है। बंधा में ही गायत्री परिवार की गौशाला भी है। साथ ही गांव में अन्य पशु पालकों के भी पशु है। ऐसे में उन सभी को  पशुओं के बीमार होने पर उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>चक्कर खाकर गिरने का बढ़ रहा रोग</strong><br />नगर निगम की गौशाला में पहले जहां लम्पी रोग से ग्रसित मवेशी सबसे पहले पाए गए थे। वहीं अब इनमें एक नई बीमारी चक्कर खाकर गिरने  वाली प्रोेयेजोमा बढ़ रही है। जिससे गौवंश की मृत्युदर में बढ़ोतरी हुई है। हालत यह है कि इस रोग के होने के बाद भी वहां न तो  पशु चिकित्सक की सुविधा है और न ही चिकित्सालय की। जिससे रोजाना मरने वाले गौवंश की संख्या सामान्य से अधिक हो गई है। </p>
<p><strong>सेवानिवृत्त उप निदेशक कार्यरत</strong><br />नगर निगम की ओर से पशु चिकित्सालय से सेवानिवृत्त उप निदेशक डॉ. नंद किशोर वर्मा को नियुक्त किया हुआ है। लेकिन वे अधिकतर समय किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में ही सेवाएं देते हैं। जबकि गौशाला में कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं।  हालांकि बोराबास पशु चिकित्सा केन्द्र से सरकारी डॉक्टर गौशाला में आते हैं लेकिन वह कभी-कभी ही आते हैं।  </p>
<p><strong>पशु चिकित्सालय व चिकित्सक हो</strong><br />निगम की गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश है।  इसके अलावा वहां निजी गौशाला व गांव में अन्य पशु भी हैं। ऐसे में वहां पशु चिकित्सालय और पशु चिकित्सक का होना आवश्यक है। जिससे इतने अधिक गौवंश के बीमार होने पर उन्हें समय पर तुरंत उपचार मिल सके। हालांकि गौशाला में कम्पाउंडर हैं लेकिन वे अपना काम तो कर रहे हैं जबकि डॉक्टर का काम तो डॉक्टर ही कर सकता है। <br /><strong>-डॉ. नंद किशोर वर्मा, रिटायर्ड उप निदेशक, पशु चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>आयुक्त समेत अधिकारियों को कई बार कराया अवगत</strong><br /> निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। यह क्षमता से काफी अधिक है। ऐसे में यहां शहर से लावारिस हालत में लाए जा रहे गौवंश को घूमने की पर्याप्त जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में वर्तमान में गौशाला में प्रोयेजोमा बीमारी का प्रकोप बढ़ा है। जिसमें पशु चक्कर खाकर गिरते हैं और वापस उठ नहीं पाते। जिससे उनकी मृत्युदर अधिक हुई है। इस बीमारी से रोजाना 5 से 6 गौवंश की मौत हो रही है। इस बीमारी के उपचार और गौशाला में पशु चिकित्सक की सुविधा करवाने के सबंध में निगम आयुक्त व अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लिखित में देने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। गौशाला में कम्पाउंडरों से काम चलाया जा रहा है। बोराबांस से पशु चिकित्सक कभी-कभी आकर गौशाला का निरीक्षण करते हैं। जबकि यहां नियमित पशु चिकित्सक होना चाहिए। <br /><strong>-जितेद्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की साप्ताहिक विजिट</strong><br />गौशाला में स्थायी रूप से तो कम्पाउंडर लगाए हुए हैं। वे पूरे समय वहां सेवाएं दे रहे हैं। उनके अलावा किशोरपुरा कायन हाउस में सेवानिवृत्त डॉक्टर को भी लगाया हुआ है।साथ ही बोराबांस से सरकारी डॉक्टर सप्ताह में निगम की गौशाला का विजिट करते हैं। वर्तमान में जो बीमारी गौशाला में हुई है  उसकी दवाईयां व उपचार की व्यवस्था की जा रही है। <br /><strong>-महेश गोयल, उपायुक्त व प्रभारी गौशाला नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 15:14:31 +0530</pubDate>
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                <title>सीवरेज संबंधी शिकायत की नहीं सुविधा, लोग हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[चैम्बर जाम होने से गंदा पानी घरों के आगे आ जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-facility-for-complaints-regarding-sewerage--people-are-facing-problems/article-94721"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शहर में  पिछले कई सालों से चल रहा आरयूआईडीपी का सीवरेज लाइन डालने का  प्रोजेक्ट पूरा होते ही यहां से अधिकारियों को भी अन्य जगह भेज दिया है। लेकिन यहां सीवरेज संबंधी समस्या होने पर न तो उसकी शिकायत की व्यवस्था है और न ही समस्या समाधान की सुविधा। जिससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  शहर में सीवरेज लाइनें पुरानी होने से आरयूआईडीपी द्वारा नई लाइनें डाली गई है। पिछले कई सालों से पूरे शहर में किए गए इस काम के चलते सड़कों व गलियों को खोदने से लोग बरसों तक परेशान होते रहे। जैसे-तैसे काम किया गया तो सड़कों को सही नहीं बनाने से बाद में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  कुन्हाड़ी निवासी अजय मेहरा का कहना है कि उनके क्षेत्र में आरयूआईडीपी ने सीवरेज लाइन डाली थी। लेकिन वह लाइन आए दिन जाम हो जाती है।जिससे चैम्बर से पानी बाहर सड़क पर गली में फेल जाता है। जिससे कई-कईदिन तक दुर्गंध से परेशानी होती है।  लेकिन इस बारे में किसे और कहां शिकायत करें कोई सुनने वाला नहीं है। नगर निगम के एक इंजीनियर का कहना है कि कुन्हाड़ी में सीवरेज की समस्या काफी  अधिक है। वह जिस क्षेत्र में रहते हैं वहां भी आए दिन चैम्बर जाम होने से गंदा पानी घरों केआगे आ जाता है। लेकिन इस संबंध में आरयूआईडीपी में किस अधिकारी व कार्यालय में शिकायत करें कोई सुनने वाला ही नहीं है।  आरयूआईडीपी के अधीक्षण अभियंता राकेश गर्ग ने बताया कि वर्ष 2016 कीडीपीआर के हिसाब से विभाग को शहर में जो काम दिया गया था। वह पूरा कर लिया गया है। करीब 48 हजार घरों के कनेक् शन मुख्य लाइन से जोड़ने थे वह काम पूरा कर लिया गया है। विभाग का सीवरेज संबंधी कोई काम शेष नहीं है। </p>
<p><strong>72 एमएलडीके 4 एसटीपी</strong><br />गर्ग ने बताया कि विभाग ने शहर में मुख्य लाइन डालने केसाथ ही घरों के कनेक् शन कर दिए।साथ ही विभाग केशहर में 72 एमएलडी के 4 एसटीपी बनाए गए हैं। इनमें धाकड़खेड़ी में  40 एमएलडी का,बालिता और काला तालाब में 15-15 एमएलडी के  व आॅक्सीजोन में 2 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए है। घरों से निकलने वाला वेस्ट सीवरेज के माध्यम से इन एसटीपी में ट्रीट हो रहा है। </p>
<p><strong>अब निगम व केडीए का काम</strong><br />एसई गर्ग ने बताया कि विभाग का काम पूरा हो गया है। अब शहर में अमृत -दो योजना के तहत नगर निगम व  कोटा विकास प्राधिकरण का काम चल रहा है। हालांकि विभाग ने जो काम किया है वह शहर के कुल क्षेत्र का 70 फीसदी है। अभी भी करीब 30 फीसदीकाम बाकी है। </p>
<p><strong>टोल फ्री नम्बर पर कर सकते हैं शिकायत</strong><br />गर्ग ने बताया कि कोटा शहर मं आरयूआईडीपी का काम व प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। उस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग के लिए उन्हें लगाया गया था। लेकिन काम पूरा होने के बाद उन्हें भी अन्य जिले में जहां काम चल रहा है वहां भेज दिया है। कोटा शहर में आरयूआईडीपी के सीवरेजसंबंधी शिकायत के लिए टोल फ्री नम्बर पर शिकायत की जा  सकती है। जिससे संबंधित संवेदक द्वारा ओ एंड एम के तहत निर्धारित समय तक उसे ही साफ सफाई संबंधी काम करना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Nov 2024 15:59:25 +0530</pubDate>
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                <title>क्या देख रहे हैं, पर्यटकों को पता ही नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[उद्घाटन के बाद से लेकर अभी तक वही पुरानी सुविधाएं ही है। सिर्फ वाटर पार्क को शुरु किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-do-not-know-what-they-are-looking-at/article-93117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट को शुरु हुए एक साल हो चुका है।  लेकिन अभी तक भी यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया है। न तो पूरी दुकानें शुरू हुई और न ही मॉन्यूमेंट की पूरी जानकारी लिखी गई है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से कांग्रेस सरकार के समय में चम्बल नदी के दोनों किनारों पर रिवर फ्रंट का निर्माण कराया गया। करीब साढ़े पांच कि.मी. के इस रिवर फ्रंट को शुरु हुए अभी एक साल हो चुका है। इस दौरान केडीए की ओर से यहां कोई सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई है। उद्घाटन के बाद से लेकर अभी तक वही पुरानी सुविधाएं ही है। सिर्फ वाटर पार्क को शुरु किया गया है। </p>
<p><strong>गिनती की दुकानें, पर्यटकों को सुविधाएं नहीं</strong><br />रिवर फ्रंट पर नदी के दोनों किनारों पर एक से बेहतर एक घाट तो बनाए गए है। उन घाटों के बीच में  व्यवसायिक दुकानें भी बनाई गई है। लेकिन हालत यह है कि उनमें से गिनती की कुछ ही दुकानें शुरू हो सकी है। ऐसे में यहां घूमने आने वालों को खाने-पीने से लेकर खरीदारी की कोई सुविधा नहीं है। </p>
<p><strong>बरसात में बोटिंग भी हुई बंद</strong><br />रिवर फ्रंट पर आने वालों के लिए केडीए की ओर से बोटिंग की सुविधा शुरू की गई थी। इसे शुरू हुए अधिक समय भी नहीं हुआ था कि बरसात में बैराज से पानी छोड़ने के दौरान  उसे भी बंद कर दिया गया। अब अक्टूबर के बाद ही फिर से बोटिंग शुरू होने की संभावना है।  जानकारों के अनुसार केडीए ने आॅफ लाइनकेसाथ ही आॅनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा की वेबसाइट के माध्यम से की है। लेकिन वेबसाइट पर आॅनलाइन बुकिंग करवाने का रेस्पोंस कम आ रहा है। </p>
<p><strong>नदी में गिर रहा नालों का गंदा पानी </strong><br />रिवर फ्रंट पर नदी में नालों का गंदा पानीजाने से रोकने के लिए एसटीपी बनाया गया था। साथ  ही नदी में गिर रही सीवरेज लाइनों को भी शिफ्ट ुकिया गया था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यहां के अधिकतम इंजीनियर भी बदल गए हैं। जानकारों के अनुसार वर्तमान में रिवर फ्रंट की तरफ नदी में नालों व सीवरेज का गंदा पानी गिर रहा है। ऐसा अधिकतर लाड़पुरा करबला व शिवदास घाट मुक्तिधाम की तरफ से हो रहा है। </p>
<p><strong>मॉन्यूमेंट के नाम हैं , जानकारी नहीं</strong><br />रिवर फ्रंट का निर्माण करते समय बनाए गए मॉन्यूमेंट के नाम तो सभी 26 स्थानों पर लिखे गए हैं। कई की पहचान तो इमारत देखने से ही हो रही है। लेकिन जिन लोगों को उनके बारे में पता नहीं है वे तो सिर्फ बिल्डिंग को देखकर ही आगे बढ़ रहे है। नदी के दोनों छोर पर जो 26 मॉन्यूमेंट व घाट बनाए गए हैं। वे कहां से लिए गए हैं। उनका क्या इतिहास है। उनके बारे में लोगों को कोई जानकारी अभी तक भी नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>बार कोड़ से जानकारी देने की थी योजना</strong><br />कांग्रेस सरकार के समय बनाए गए रिवर फ्रंट पर उस समय इंजीनियरों व आर्किटेक्ट द्वारा बताया गया था कि हर मॉन्यूमेंट की जानकारी वहां लगे बार कोड़ से मिलेगी। जैसे ही मोबाइलसे बार कोड को स्केन किया जाएगा वैसे ही उसकी जानकारी मिलेगी। लेकिन हालत यह है न तो बार कोड़ लगे हैं और न ही लिखित में कहीं जानकारी दी गई है। </p>
<p><strong>अच्छी चीज है सुुविधाएं बढ़नी चाहिए</strong><br />लोगों का कहना है कि रिवर फ्रंट शहर में एक अच्छा पर्यटन स्थल बना है। जिसे कोटा ही नहीं देशभर से लोग देखने आ रहेहै। ऐसे में इसकी सही ढंग से रखरखाव व सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।  </p>
<p><strong>दादाबाड़ी निवासी महेश कुमार शर्मा</strong> ने बताया कि एक साल पहले जिस तरह की स्थिति थी अभी भी वही स्थिति है। न तो अधिक दुकानें शुरू हुई हैं और न ही कोई अन्य सुविधाएं है। </p>
<p><strong>बसंत विहार निवासी नीरज सुमन</strong> ने बताया कि रिवर फ्रंट पर टिकट की रेट बढ़ाकर गोल्फ कोर्ट की सुविधा दी गई है। लेकिन यदि कोई गोल्फ कोर्ट की जगह पैदल  ही घूमना चाहता है तब भी उसे प्रवेश टिकट तो उतना ही देना पड़ेगा। ऐसा करना गलत है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रिवर फ्रंट पर सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। यहां की दुकानों को किराए पर देने की योजना थी।लेकिन अब सभी दुकानों को एक साथ लीज देने की योजना से चलते दुकानों को शुरू करने में देरी हो रही है। मॉन्यूमेंट की जानकारी भी लिखी जाएगी। प्रवेश टिकट में 200 रुपए के साथ ही 100 रुपए गोल्फ कोर्ट के भी शामिल है।  <br /><strong>- भूपेन्द्र बंशीवाल, एक्सईएन, कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 16:32:52 +0530</pubDate>
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                <title>बारूद के ढेर पर खड़ा हजारों बच्चों का जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन द्वारा ऐसे हॉस्टल सचालकों के खिलाफ सख्ती व कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-children-s-lives-standing-on-a-pile-of-gunpowder/article-48775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/barood-k-dher-pr-khada-hazaro-bachho-ka-jivan...kota-news-14-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस 1</strong> - कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित लैंडमार्क सिटी के एक हॉस्टल में गत दिनों आग लगने की घटना हुई थी। रात के समय अचानक हुई इस घटना से उस हॉस्टल में रहने वाले बच्चे घबरा गए थे। बड़ी मुश्किल से उन्हें हॉस्टल से बाहर निकाला गया। जांच में उस हॉस्टल में फायर सिस्टम लगा हुआ नहीं मिला। जिस पर हॉस्टल सचालक को नोटिस दिया गया। </p>
<p><strong>केस 2 </strong>- जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में गत दिनों आग लगने की घटना हुई थी। जिससे उस हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का जीवन संकट में पड़ गया था। फायर टीम ने मौके पर पहुंचकर आग तो बुझा दी लेकिन वहां जांच करने पर फायर सिस्टम ही लगा हुआ नहीं मिला। इस पर हॉस्टल सचालक को नोटिस दिया गया। </p>
<p><strong>केस 3</strong> - तलवंडी स्थित एक बहुमंजिला हॉस्टल में कुछ समय पहले आग लग चुकी है। आग ऊपरी हिस्से में लगी थी। लेकिन उस हॉस्टल से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। जिससे बड़ी मुश्किल से बच्चों को बाहर निकाला गया। यहां भी जांच करने में फायर सिस्टम नहीं मिले। जिस पर निगम के फायर अनुभाग ने संचालक को नोटिस दिया। </p>
<p> ये उदाहरण पर्याप्त हैं शहर के हॉस्टलों की दशा बताने को। शहर में ऐसे सैकड़ों हॉस्टल हैं जो बहुमंजिला बने हुए हैं। करोड़ों रुपए की लागत से बने इस हॉस्टलों में देशभर से यहां मेडिकल व इंजीनियरिंग की कोचिंग करने वाले हजारों छात्र छात्राएं रह रहे हैं। 3 से 8 मंजिला तक बने इस हॉस्टलों में बच्चों के रहने व खाने से लेकर हर तरह की सुविधा दी हुई है। लेकिन सबसे जरूरी सुविधा आग से बचाव के लिए फायर सिस्टम की है वही लगे हुए नहीं है। इसका अंदाजा नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा समय-समय पर हॉस्टलों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जांच से लगाया जा सकता है। जहां जांच में अधिकतर की स्थिति बदतर पाई जाने पर उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि निगम भी मात्र नोटिस देकर ही इतिश्री कर रहा है। प्रशासन द्वारा ऐसे हॉस्टल सचालकों के खिलाफ सख्ती व कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं हॉस्टलों की बाढ़</strong><br />शहर का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां बहुमंजिला हॉस्टल बने हुए नहीं हों। विशेष रूप से नए कोटा से लेकर नदी पार और बारां रोड तक यही हालत है। जिस क्षेत्र में कोचिंग संस्थान हैं वहां इन हॉस्टलों की संख्या काफी अधिक है। हालत यह है कि कतार से एक के बाद एक कई हॉस्टल बने हुए हैं। जिससे उनकी बाढ़ सी आई हुई है। जवाहर नगर, तलवंडी, राजीव गांधी नगर, इंद्र विहार, दादाबाड़ी, विज्ञान नगर, महावीर नगर, परिजात कॉलोनी, लैंडमार्क सिटी कुन्हाडी, बारां रोड नया नोहरा, कोरल पार्क, इलेक्ट्रोनिक्स कॉम्पलेक्स, रीको इंडस्ट्रीयल एरिया, रानपुर समेत कई क्षेत्रों में तो हॉस्टल रेल के डिब्बों की तरह बने हुए हैं। कई हॉस्टल तो वाच टावर की तरह के हैं। जहां छोटे से भूखंड पर कई मंजिला हॉस्टल हैं। </p>
<p><strong>इस तरह की कमियां हैं हॉस्टलों में</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा समय-समय पर हॉस्टलों की जांच की जा रही है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से पूर्व में की गई जांच के दौरान करीब 80 फीसदी ऐसे हॉस्टल व बहुमंजिला इमारतें पाई गई थी जिनमें आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम ही नहीं थे। जहां सिस्टम लगे हुए हैं लेकिन वे सिर्फ दिखाने के लिए लगाए हुए हैं। उनमें से अधिकतर कार्यशील नहीं है। निगम अधिकारियों के अनुसार अधिकतर हॉस्टलों में प्रवेश व निकास का एक ही रास्ता है। आग लगने की घटना होने पर वहां से बच्चों को निकलने में परेशानी हो सकती है। कहीं फायर सिस्टम है तो चालू हालत में नहीं है। कहीं फायर के छोटे उपकरण लगे हुए हैं लेकिन वे अवधि पार हो चुके हैं। कहीं पानी की सुविधा तक नहीं है। कई हॉस्टलों में तो दमकलों तक पहुंचने तक की सुविधा नहीं है।</p>
<p><strong>करीब एक हजार से अधिक नोटिस</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के फायर अनुभाग की ओर से पूर्व में की गई हॉस्टलों व बहुमंजिला इमारतों की जांच में फायर सिस्टम नहीं पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए हैं। नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से करीब 700 से अधिक और कोटा उत्तर में 300 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं।  हालत यह है कि नगर निगम कोटा दक्षिण के फायर अनुभाग की ओर से वर्तमान में इलेक्ट्रोनिक्स कॉम्पलेक्स में हॉस्टलों की जांच की जा रही है। दो दिन में ही 21 हॉस्टलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। </p>
<p><strong>फायर एनओसी की औपचारिकता निभा रहे</strong><br />जानकारों के अनुसार नगर निगम के फायर अनुभाग कीओर से जांच में कमी पाए जाने पर नोटिस देकर इतिश्री की जा रही है। हालत यह है कि 7 दिन का नोटिस मिलने पर कई हॉस्टल संचालक नगर निगम में फायर एनओसी के लिए आवेदन कर औपचारिकता निभा रहे हैं। जबकि फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स जमा होना आवश्यक है। अधिकतर हॉस्टल संचालकों का यूडी टैक्स ही जमा नहीं है। ऐसे में उन्हें एनओसी ही नहीं मिल सकती। </p>
<p><strong>सीजिंग होने पर ही लगाएंगे सिस्टम</strong><br />हॉस्टलों को बनाने पर जब लाखों करोÞड़ों रुपए खर्च कर सकते हैं तो कुछ रुपए फायर सिस्टम लगाने पर भी खर्च होने चाहिए। फायर सिस्टम नहीं होने  पर हॉस्टल संचालन की अनुमति ही नहीं मिलनी चाहिए। यदि फायर सिस्टम नहीं है तो उन हॉस्टलों को सीज किया जाए। पूर्व में कई हॉस्टल, मॉल व होटलों को सीज करने पर उन्होंने फायर सिस्टम लगाए हैं।            <br /><strong>- देवेन्द्र जांगिड़, कैथूनीपोल</strong></p>
<p><strong>ठोस कार्रवाई हो, तभी सुधार संभव</strong><br />कोटा की छवि देशभर में शिक्षा नगरी के रूप में बनी है। उसी कारण यहां करीब दो लाख बच्चे बाहर से आकर रह रहे हैं। उनकी सुरक्षा करना प्रशासन के साथ हॉस्टल सचालकों की है। आग से सुरक्षा के इंतजाम प्राथमिकता है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो हॉस्टल संचालकों के खिलाफ सख्त  कार्रवाई करने पर ही सुधार संभव होगा। <br /><strong>- संजय विजय, छावनी</strong></p>
<p><strong>किराया हजारों रुपए तो सुरक्षा भी हो</strong><br />हॉस्टलों में रहने वाले हर बच्चे से महीने का करीब 15 से 20 हजार रुपए किराया लिया जा रहा है। जिसमें सुविधाएं तो सभी दी जा रही है। लेकिन आग की घटना से सुरक्षा के इंतजाम नहीं होना गम्भीर है। जब किराया अधिक ले रहे हैं तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हॉस्टल संचालकों की है। <br /><strong>- हरीश नामा, महावीर नगर प्रथम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में फायर अनुभाग की टीमें समय-समय पर हॉस्टल व बहुमंजिला आवासीय इमारतों की जांच करती रहती है। अधिकतर हॉस्टलों में फायर सिस्टम लगे हुए नहीं हैं। ऐसे में कोटा दक्षिण में 700 से अधिक व कोटा उत्तर में 300 से अधिक नोटिस दे रखे हैं। उनमें से कई संचालकों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन किए हुए हैं।  दक्षिण में करीब 500 और उत्तर में 250 एनओसी जारी की जा चुकी है। हॉस्टलों की जांच का अभियान लगातार जारी है। पूर्व में हॉस्टल, होटल व मॉल तक को सीज किया गया है। <br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2023 14:31:42 +0530</pubDate>
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                <title>जेठ से ज्यादा झुलसा रही अव्यवस्था की तपन</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा का तापमान 41 डिग्री पार चल रहा है लेकिन एमबीएस अस्पताल के अधिकांश कूलर पंखे अभी खराब पड़े है। तेज गर्मी के कारण हैंड फैन से मरीज को पंखा करना पड़ रहा है। वार्ड चार पांच एसी लगे हुए लेकिन कुलिंग नहीं कर रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-heat-of-chaos-is-scorching-more-than-the-brother-in-law/article-45183"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/jeth-se-jyada-jhulsa-rhi-avyavastha-ki-tapan...kota-news-10-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेठ माह की शुरुआत के साथ ही सूर्य ने गर्मी के तीखे तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान पिछले दो दिनों से 41 पार चल रहा है।  लेकिन संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस  के कूलर, पंखे और एसी खराब होने से मरीज गर्मी से बेहाल हो रहे है। अस्पताल प्रशासन की ओर से गर्मी शुरू होने से पूर्व ही सभी वार्डो के एसी पंखे कूलर की मरम्मत करने के ठेकेदार को आदेश दे दिए उसके बावजूद एमबीएस अस्पताल के अधिकांश वार्ड में पंखे काम ही नहीं कर रहे है। जिससे मरीजों के परिजनों को घर से पंखा लाकर काम चलना पड़ रहा है। इमरजेंसी वार्ड के अधिकांश एसी खराब पड़े है, जो चल रहे वो कुलिंग नहीं कर रहे है। </p><p><strong>इमजेंसी मेडिकल वार्ड में एसी बंद, हाथ से करनी पड़ रही हवा</strong><br />इमरजेंसी में मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज की परिजन कांता वर्मा ने बताया कि वार्ड में अधिकांश एसी खराब है। तेज गर्मी के कारण हैंड फैन से मरीज को पंखा करना पड़ रहा है। वार्ड चार पांच एसी लगे हुए लेकिन कुलिंग नहीं कर रहे है। जिससे बेड तक हवा नहीं पहुंच रही मरीज गर्मी से परेशान हो रहे है। </p><p><strong>अस्थि रोग वार्ड में डक सिस्टम खराब, गर्मी से मरीज परेशान </strong><br />अस्थि रोग वार्ड का कूलिंग डक सिस्टम खराब होने से यहां मरीज गर्मी से परेशान हो रहे है। यहां डक ही लगा हुआ है। पंखे बहुत कम है ऐसे मरीजों को घरों से पंखे लाकर काम चलना पड़ रहा है। </p><p><strong>न्यूरोवार्ड में खराब पड़े कूलर</strong><br />गंभीर बीमारियों के न्यूरो वार्ड में कूलर और पंखे खराब होने से मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों ने बताया कि वार्ड कूलर तो रखे है लेकिन उनमें ना तो पानी भरा जाता है। कुछ कूलर तो पूरे खराब पड़े है। घर से पंखा लाकर मरीज को गर्मी से बचाया जा रहा है। संसाधन होने के बावजूद उनकी मरम्मत नहीं हो रही है। जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।</p><p><strong>मेडिकल वार्ड में खराब पड़ा पंखा </strong><br />मेडिकल वार्ड में भती मरीजों ने बताया कि वार्ड के पंखे खराब होने से घर टेबल फेन लाकर लगाया तब जाकर गर्मी से राहत मिली। अस्पताल के अधिकांश पंखे पुराने हो गए है। आए दिन मरम्मत करने के बाद भी खराब हो जाते है। उनको बदलने की आवश्यकता है।</p><p><strong>वार्ड में पंखा नहीं, घर से लाकर लगाया </strong><br />इमरजेंसी मेडिकल वार्ड में भर्ती महिला के परिजन  विष्णुकांत  ने बताया कि संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद मूलभूत सुविधा तक अस्पताल नहीं है। मरीजों के लिए वार्ड में ना तो एसी काम कर रहे ना ही पंखे है। घर से पंखा लाकर लगाना हर मरीज की मजबूरी बन गई है। </p><p><strong>खराब पड़े कूलर मरीजों का बढ़ा रहे ताप</strong><br />कोटा का तापमान 41 डिग्री पार चल रहा है लेकिन एमबीएस अस्पताल के अधिकांश कूलर पंखे अभी खराब पड़े है। मेडिकल वार्ड में सबसे ज्यादा मरीज आते वहां के कूलर, पंखे खराब पड़े है। कई कूलर पूरे खराब हो गए उसके बावजूद वार्ड की शोभा बढ़ा रहे है। वार्ड मेें भर्ती मरीजों का कहना है कि कई बार नर्सिंग आॅफिसर को कूलर ठीक कराने के लिए कहा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई मरीजों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।</p><p><strong>महिला मेडिकल वार्ड का कूलर खराब , महिलाएं परेशान</strong><br />एमबीएस अस्पताल के महिला मेडिकल वार्ड के हालात तो और भी खराब है। यहां कूलर चल रहे लेकिन पानी नहीं भरने गर्म हवा दे रहे कुछ कूलर खराब पड़े हुए है। जिससे परिजन हाथ से पंखा कर मरीज को गर्मी से बचाने का जतन कर रहे है।</p><p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में करीब 148 कूलर पंखे मरम्मत कराए और नए कूलर पंखे भी लगवाए है। दो बार सभी वार्डो के पंखे कूलर ठीक करा चुके है। अब भी किसी वार्ड में पंखे खराब है तो बुधवार को एक बार सभी वार्डो के पंखे कूलर और एसी चैक करा लेते है।<br /><strong>- डॉ. दिनेश वर्मा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 14:23:39 +0530</pubDate>
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                <title> सिर्फ कागजों में क्रमोन्नत होकर रह गया इटावा का अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[ सरकार ने इटावा अस्पताल में बेड बढ़ाकर व ट्रोमा सेंटर में कागजों में तो क्रमोन्नत तो कर दिया है, लेकिन धरातल पर अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। जिसके चलते मरीजों को हर तरफ असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। इटावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस क्षेत्र का सबसे बड़ा चिकित्सालय होने के कारण इटावा सहित करीब 100 गांवों के लोग अस्पताल में इलाज कराने आते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/--itawah-s-hospital-was-upgraded-only-on-paper/article-7742"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/chh.jpg" alt=""></a><br /><p> इटावा। सरकार ने इटावा अस्पताल में बेड बढ़ाकर व ट्रोमा सेंटर में कागजों में तो क्रमोन्नत तो कर दिया है, लेकिन धरातल पर अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। जिसके चलते मरीजों को हर तरफ असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। इटावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस क्षेत्र का सबसे बड़ा चिकित्सालय होने के कारण इटावा सहित करीब 100 गांवों के लोग अस्पताल में इलाज कराने आते हैं। लेकिन व्यवस्थाओं में कमी और कर्मचारियों के रिक्त पदों के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस अस्पताल से खातौली सामुदायिक केंद्र और 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जुड़े हुए हैं। लेकिन व्यवस्थाओं की कमी के कारण मरीजों को हमेशा परेशानी का सामना करना पड़ता है। इटावा अस्पताल में कनिष्ठ विशेषज्ञ का एक पद रिक्त है। इसके साथ ही नर्स ग्रेड द्वितीय के 15 पदों में से 7 पद रिक्त है। वार्ड ब्याय के 5 पद रिक्त हैं। लेब ब्याय, तकनीकी सहायक, सीनियर लैब टेक्नीशियन, नेत्र सहायक, दंत सहायक के पद रिक्त हैं। अस्पताल में 48 पदों में से 22 पद रिक्त चल रहे हैं।  <br /><br /><strong>लंबे समय से नहीं है महिला विशेषज्ञ</strong><br />इटावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से महिला रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने के कारण महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इटावा अस्पताल में कोटा के बाद सर्वाधिक प्रसव होते है। हर वर्ष 2 हजार से अधिक प्रसव होते हैं। लेकिन महिलाओं को प्रसव के दौरान जरा सी परेशानी आने पर कोटा रैफर करना पड़ता है। इसके साथ ही महिलाओं को ब्लड बैंक सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं मिलती। आॅपरेशन थिएटर होने के बाद भी सीजेरियन के लिए कोटा जाना पड़ता है। <br /><br /><strong>16 लाख की सोनाग्राफी मशीन खा रही धूल</strong><br />इटावा अस्पताल में कोटा-बूंदी सांसद व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सोनाग्राफी मशीन स्थानीय लोगो की मांग पर उपलब्ध कराई गई। लेकिन मशीन आने के बाद व उसका शुभारंभ हो जाने के बाद भी अभी तक कोई सोनाग्राफी नहीं हुई। सोनालोजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो पाने के कारण मशीन धूल खा रही है। महिलाओं व मरीजों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। <br /><br /><br /><strong>मौसमी बीमारियों के बढ़े मरीज</strong><br />मौसम के बदलने के साथ ही मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी तेजी से इन दिनों इजाफा हो रहा है। इटावा चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर जयकिशन मीना ने बताया कि गर्मी के साथ ही मौसमी बुखार, जुकाम, खांसी सहित अन्य बीमारियों के पीड़ितों की संख्या बढ़ गई है। <br /><br />इन दिनों मौसमी बीमारियों में इजाफा हो रहा है। अस्पताल में सुविधाओं व स्टॉफ की कमी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br />-महावीर सुमन, नागरिक<br /><br />इटावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला रोग विशेषज्ञ और सोनाग्राफी सुविधा नहीं होने के कारण महिला रोगियों को काफी परेशानी होती है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक प्रसव होते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलने से प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br />-रूपकंवर गुप्ता, पार्षद, नगर पालिका, इटावा<br /><br />सभी लोगों की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इटावा अस्पताल को सोनाग्राफी मशीन उपलब्ध करा दी है। लेकिन चिकित्सा विभाग द्वारा अभी तक सोनालोजिस्ट नहीं लगाने के कारण सोनाग्राफी नहीं हो रही। प्रसूताओं व अन्य मरीजों को निजी केंद्रों पर सोनाग्राफी कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके लिए जिला कलक्टर व कोटा सीएमएचओ को भी पत्र लिखकर अवगत करा चुके हैं। <br />-रजनी सोनी, अध्यक्ष, नगर पालिका, इटावा<br /><br />इटावा सामुदायिक केंद्र में सोनाग्राफी मशीन लग गई है। सोनालोजिस्ट नहीं होने के कारण अभी सोनाग्राफी नहीं हो रही। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा रखा है। साथ ही अस्पताल में जिन पदों पर रिक्त है, उनको लेकर भी उच्चाधिकारियों को अवगत करा रखा है। अस्पताल में जो सुविधाएं हैं, वह मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। <br />-डॉक्टर जयकिशन मीना, चिकित्सा प्रभारी,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, इटावा <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 15:20:29 +0530</pubDate>
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                <title> कोटा में खाली डिब्बे बन सड़कों पर दौड़ रही एम्बुलेंस</title>
                                    <description><![CDATA[ न ईसीजी मॉनीटर, न ऑक्सीजन की सुविधा, जिम्मेदारी किसकी किसी को पता नहीं, सांसत में मरीजों की जान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ambulance-running-on-the-roads-as-an-empty-coach-in-kota/article-7399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/van.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में चिकित्सा विभाग की अनदेखी के चलते मरीजों की जान सांसत में है। क्योंकि, एंबुलेंस संचालक उनकी जान संकट में डाल रहे हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश एंबुलेंस में तो जरूरी उपकरण भी नहीं है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन, ईसीजी मॉनीटर, स्पाइनल बोर्ड, ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर होने चाहिए, लेकिन ऐसे गिनती की एंबुलेंस में है। सरकारी में तो फिर भी जरूरी उपकरण हैं। निजी में आधे से अधिक उपकरण नहीं है। जिसके चलते मरीजों की जान संकट में डाली जा रही है। ऐसा भी नहीं है कि एंबुलेंस संचालकों द्वारा मरीजों को फ्री सेवाएं दी जा रही हो। मरीजों के परिजनों से पूरा किराया वसूला जा रहा है। इसके बावजूद भी एंबुलेंस में जरूरी उपकरण नहीं रखते। ऐसे में मरीज को इन उपकरणों की जरुरत पड़ जाए तो अनहोनी से इनकार नहीं कर सकते हैं। ऐसा पूर्व में हो भी चुका है। पिछले साल बोरखेड़ा पुलिया पर एक एंबुलेंस  खराब हो गई थी। जिसके चलते गर्भवती महिला को दिक्कत हुई थी। ऐसे मामलों पर भी चिकित्सा विभाग ने सबक नहीं लिया है।<br /><br /><strong>मॉनीटरिंग की प्रॉपर नहीं व्यवस्था</strong><br />बड़ी संख्या में इस तरह की एंबुलेंस कोटा शहर में संचालित हो रही है, लेकिन इनकी मॉनीटरिंग की व्यवस्था नहीं है। क्योंकि, अधिकांश एंबुलेंस निजी और सरकारी अस्पतालों के बाहर खड़ी होती है। नियमानुसार इनकी मॉनीटरिंग अस्पताल प्रशासन को करनी होती है, लेकिन ये सीएमएचओ  के अधिकार क्षेत्र में होने की बात कह कर पल्ला झाड़ देते हैं।  उधर, सीएमएचओ भी अपने अधिकार क्षेत्र में होने की बात से इनकार करते हैं।  बताया जाता है कि  सीएमएचओ के नियंत्रण में 31 एंबुलेंस है। इनमें 108 एंबुलेंस की संख्या 17 है। जबकि, 104 एंबुलेंस 14 है।<br /><br /><strong>ये उपकरण अनिवार्य</strong><br />. स्पाइनल बोर्ड: यह एम्बुलेंस उपकरण की एक प्रणाली प्रदान करता है। इमरजेंसी की स्थिति में संदिग्ध रीढ़ आघात के साथ रोगी को परिवहन करने के काम आता है।</p>
<p>. ईसीजी मॉनीटर और एक डीफिब्रिलेटर: ईसीजी मॉनीटर रोगी के महत्वपूर्ण संकेतों पर नजर रखता है। हृदय को स्थिर करने या दुर्घटनाग्रस्त रोगी को पुनर्जीवित करने के लिए किया जाता है।<br />. ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर: ये स्वचालित परिवहन मैकेनिकल वेंटिलेटर का एक पार्ट है, जो बैगिंग (मैनुअल वेंटिलेशन) की जगह लेने के लिए होता है जब एक मरीज जो स्वतंत्र रूप से सांस नहीं ले सकता तो इसको उपयोग में लेते हैं।<br />. सक्शन यूनिट: इसका उपयोग जब रोगी आंतरिक रूप से खून बह रहा है तो महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डाला जा सकता है। इसका उपयोग उन तरल पदार्थों को हटाने के लिए भी किया जाता है जो शरीर या मुंह के अंदर एकत्र होते हैं।<br />. सिरिंज पंप: सिरिंज पंप वह उपकरण है जो नियंत्रित लक्ष्य संस्करणों के साथ एक निर्धारित प्रवाह दर पर रोगी के शरीर में या तो तरल को संक्रमित या वापस ले सकता है।<br />.  ऑक्सीजन आपूर्ति इकाइयां: एंबुलेंस उपकरणों के सबसे महत्वपूर्ण  है। क्योंकि, उनका उपयोग अग्नि से बचे लोगों में किया जा सकता है। सांस लेने में कठिनाई वाले रोगियों जैसे अस्थमा या अन्य रोगियों के लिए जरूरी है। इसके अलावा स्फिग्मोमैनोमीटर तथा अन्य उपकरण भी जरूरी है।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />इनकी मॉनीटरिंग संबंधित अस्पताल द्वारा की जाती है। सीएमएचओ स्तर पर तो केवल सरकारी एम्बुलेंस की मॉनीटरिंग की जाती है। फिटनेस की जांच परिवहन विभाग करता है।<br /><strong>- डॉ. बीएस तंवर, सीएमएचओ, कोटा</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 14:31:44 +0530</pubDate>
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