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                <title>bells - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : अब स्कूलों में बजेगी वाटर बेल, बसों में भी रखना होगा ठंडा पानी ,लू से बचाव को एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों को पहले से तैयारी के सख्त निर्देश दिए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--schools-to-now-ring--water-bells---cold-water-must-be-stocked-in-buses--advisory-issued-for-protection-against-heatstroke/article-152190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)61.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। अब सरकारी और निजी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही लू से बचाने के लिए सभी स्कूलों को वाटर बेल बजाने और 3 छोटे-छोटे ब्रेक्स (अतिरिक्त समय) दिया जाए ताकि बच्चों के पानी पीने व बाथरूम के लिए सुनिश्चित हो सके। दरअसल, भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को पहले से तैयारी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। ताकि, बच्चों को संभावित खतरों से बचाया जा सके।</p>
<p><strong>असेंबली शॉर्ट, आउटडोर गतिविधियों पर रोक</strong><br />नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी स्कूल में तेज धूप के दौरान खेलकूद, ड्रिल या कैंप जैसी गतिविधियां खुले में नहीं करवाई जाएंगी। प्रार्थना सभा को भी कम समय में और छायादार स्थान या कक्षाओं में आयोजित करना होगा।</p>
<p><strong>बैग का बोझ घटाएं, जरूरी किताबें ही मंगवाएं</strong><br />निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में उल्लेख किया गया है कि बच्चों को भारी स्कूल बैग से राहत दी जाए, केवल जरूरी किताबें ही मंगवाई जाने के स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>शिक्षक दिलाएं बच्चों को पानी पीने की याद</strong><br />गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों में वाटर बैल बजाई जाए। जिससे कम से कम 3 छोटे-छोटे ब्रेक्स पानी पीने व बाथरूम के लिए सुश्चित किए जाए। वहीं, शिक्षकों द्वारा समय-समय पर बच्चों को अपनी बोटल से पानी पीने की याद दिलाई जाए।</p>
<p><strong>स्कूल गेट के बाहर छाया व पानी की करें व्यवस्था</strong><br />छुट्टी के समय स्कूल गेट पर छाया और ठंडे पानी की व्यवस्था करने को भी स्कूल प्रशासन को व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही बच्चों की साइकिलों को छाया में पार्क किया जाए। वहीं, खुले वाहनों में बच्चों का परिवहन नहीं किया जाएगा और स्कूल बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर रोक रहेगी।</p>
<p><strong>बसों में पानी व फर्स्ट एड किट अनिवार्य</strong><br />बसों में पीने का पानी और फर्स्ट एड किट रखना अनिवार्य होगा। स्कूलों में ठंडा और साफ पानी उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। इसके लिए वाटर कूलर, घड़े या मटकों का उपयोग किया जाएगा और उनकी नियमित सफाई भी सुनिश्चित करनी होगी।भोजन व्यवस्था में भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को हल्का और ताजा भोजन करने की सलाह दी गई है। स्कूल कैंटीन में भी केवल ताजा और पौष्टिक खाना ही परोसा जाएगा। कक्षाओं को आरामदायक बनाने के लिए पंखों, वेंटिलेशन और वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पर जोर दिया गया है। खिड़कियों पर पर्दे या अन्य साधनों से धूप को रोकने और खसखस या जूट के पर्दों से ठंडक बनाए रखने की व्यवस्था की जाए।</p>
<p><strong>यूनिफॉर्म में दी राहत</strong><br />यूनिफॉर्म में भी राहत दी गई है। बच्चों को ढीले और सूती कपड़े पहनने, टाई जैसे नियमों में ढील देने और चमड़े के जूतों की जगह स्पोर्ट्स जूते पहनने की अनुमति दी जा सकती है। वहीं, स्कूलों में फर्स्ट एड किट और जरूरी दवाएं उपलब्ध रखना अनिवार्य होगा। लू या हीट स्ट्रोक की स्थिति में ओआरएस घोल, नमक-चीनी का घोल और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p><strong>नवज्योति की खबर पर चेता निदेशालय</strong><br />लू के थपेड़ों के बीच स्कूल से लौटते बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे को लेकर दैनिक नवज्योति ने 29 अप्रेल को प्रचंड गर्मी : हीटवेव झुलसा रही बचपन...., 28 अप्रेल को टन-टन-टन...गर्मी तेज है, पानी पी लें...शीर्षक से खबरें प्रकाशित कर शिक्षा निदेशालय व जिला प्रशासन को चेताया था। जिसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और प्रदेश के सभी सरकारी व निजी विद्यालय प्रबंधन को एडवाइजरी जारी कर बच्चों की सुरक्षा इंतजाम करने के सख्त निर्देश जारी किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:24:54 +0530</pubDate>
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                <title>गिरिजाघरों पर लगे घंटे का होता है विशेष महत्व </title>
                                    <description><![CDATA[गिरजाघरों की छत पर लगे बड़े घंटे ईसाई धर्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-bells-installed-on-churches-have-special-significance/article-98100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)30.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गिरजाघरों की छत पर लगे बड़े घंटे ईसाई धर्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये घंटे समय की सूचना, धार्मिक अनुष्ठानों की घोषणा करने और समुदाय को एकत्रित करने के उद्देश्य से बजाए जाते हैं। घंटे की ध्वनि प्रार्थना, उत्सव, शोक और विशेष आयोजनों के संकेत के रूप में कार्य करती है।</p>
<p><strong>घंटे का महत्व और बजाने के अवसर :</strong></p>
<p>समय की सूचना : पारंपरिक रूप से घंटे, हर घंटे या निर्धारित समय पर बजते हैं, जिससे लोगों को समय का पता चलता है।</p>
<p>प्रार्थना और आराधना : प्रात : दोपहर और संध्या प्रार्थना के समय घंटे बजाए जाते हैं, जिससे भक्तों को प्रार्थना के लिए स्मरण कराया जाता है।</p>
<p>विशेष अवसर : जन्म, विवाह, बच्चे का जन्म, और मृत्यु जैसे अवसरों पर घंटे की ध्वनि विशेष महत्व रखती है।</p>
<p><br /><strong>विभिन्न अवसरों पर घंटे की ध्वनि :</strong></p>
<p>जन्म : बच्चे के जन्म की खुशी में घंटे उत्साहपूर्वक बजाए जाते हैं, जिससे समुदाय में आनंद का संचार होता है।</p>
<p>विवाह: शादी के अवसर पर घंटे मधुर ध्वनि में बजते हैं, जो नवविवाहित जोड़े के लिए आशीर्वाद और खुशी का प्रतीक है।</p>
<p>मृत्यु: किसी व्यक्ति की मृत्यु पर घंटे धीमी और गंभीर ध्वनि में बजते हैं, जो शोक और सम्मान का संकेत देते हैं।</p>
<p><br /><strong>घंटे की ध्वनि और उनका प्रभाव :</strong></p>
<p>घंटे की ध्वनि की तीव्रता, गति और आवृत्ति अवसर के अनुसार भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, उत्सव के समय घंटे तेज और लगातार बजते हैं, जबकि शोक के समय धीमी और विरामयुक्त ध्वनि उत्पन्न करते हैं । घंटों की ध्वनि वातावरण को पवित्र और आध्यात्मिक बनाती है, जिससे समुदाय के लोग एकजुट महसूस करते हैं।</p>
<p>इस प्रकार, गिरजाघरों के घंटे धार्मिक और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो विभिन्न अवसरों पर अपनी विशेष ध्वनि के माध्यम से समुदाय को संदेश और भावना प्रेषित करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 14:49:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>धरती पर खतरे की घंटी! अंतरिक्ष में खड़ा हो रहा ‘कूड़े का पहाड़’</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ नहीं किया तो मलबे से ‘बेकार’ हो जाएगा स्पेस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/washington--slarm-bells-on-earth--a--mountain-of-garbage--rising-in-space/article-7400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/space.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। बात है 1978 की नासा के वैज्ञानिक डोनाल्ड केसलर ने अंतरिक्ष के ‘कबाड़खाने’ में तब्दील होने की चेतावनी दी। उनकी इस थ्योरी को ‘केसलर सिन्ड्रोम’ के नाम से जाना गया जिसके मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में मौजूद कचरा एक ऐसे बिंदु पर पहुंच जाएगा जहां यह और अधिक मात्रा में खगोलीय मलबा पैदा करेगा जो सक्रिय सैटेलाइट्स, ऐस्ट्रोनॉट्स और मिशन प्लानर्स के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। इंसान को अंतरिक्ष में पहला कदम रखे 50 साल से अधिक समय हो गया है। अब वैज्ञानिकों की नजर मंगल जैसे ग्रह पर है जो कभी एक सपना हुआ करता था।  कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में लोगों को कई उल्कापिंड की आतिशबाजी दिखाई पड़ी थी। इस रहस्यमय रोशनी को लेकर खगोलविद जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि यह दरअसल चीनी रॉकेट का मलबा था जो पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर रहा था। इसी तरह का मलबा बड़ी मात्रा में हमारी पृथ्वी की कक्षा में मौजूद है। अक्सर इसी मलबे के टुकडेÞ धरती पर जलते हुए गिरते हैं जो कई बार रिहायशी इलाकों में गिरने पर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। <br /><br /><strong>कुछ नहीं किया तो मलबे से ‘बेकार’ हो जाएगा स्पेस</strong><br /><strong>हर सैटेलाइट एक दिन बन सकती है मलबा</strong><br />यह मलबा इसलिए खतरनाक है कि क्योंकि यह 25,265 किमी/घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगाता है। यह रफ्तार किसी भी बड़े धमाके को अंजाम देने के लिए काफी है। एक्सपर्ट कहते हैं हर सैटेलाइट जो आॅर्बिट में प्रवेश करती है उसके खगोलीय मलबा बनने की संभावना होती है। एलन मस्क के स्टारलिंक जैसे प्रोजेक्ट अंतरिक्ष के मलबे को कई गुना बढ़ा सकते हैं। अमेरिकी सरकार के मुताबिक सॉफ्टबॉल से बड़े मलबे के लगभग 23,000 टुकड़े पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं। 1 सेमी से बड़े मलबे के 5 लाख टुकड़े हैं और करीब 1 मिमी या उससे बड़े मलबे के 100 मिलियन टुकड़े ऑर्बिट में मौजूद हैं।<br /><br /><strong>9,600 टन से अधिक कचरा अंतरिक्ष में मौजूद</strong><br />आईएसएस के पास मौजूद मलबे के टुकड़े दिन में 15-16 बार धरती का चक्कर लगाते हैं जिससे टकराव का खतरा बढ़ जाता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का अनुमान है कि पृथ्वी की कक्षा में सभी अंतरिक्ष पिंडों का कुल द्रव्यमान 9,600 टन से अधिक है। नासा का कहना है कि कक्षा में 600 किमी से कम ऊंचाई पर मौजूद मलबा कुछ साल में धरती पर वापस गिरेगा। लेकिन 1000 किमी से ज्यादा की ऊंचाई पर मौजूद कचरा करीब एक शताब्दी या उससे अधिक समय पर पृथ्वी के चक्कर लगाता रहेगा। देवेसॉफ्ट की 1 सितंबर 2021 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी की कक्षा में कुल 4550 सैटेलाइट्स मौजूद हैं। इसमें 3790 सैटेलाइट्स निचली कक्षा में मौजूद हैं।<br /><br />किस देश की कितनी सैटेलाइट्स<br />देशों की 50 अलग-अलग ऑपरेटर्स या स्पेस एजेंसियां संचालित करती हैं। अंतरिक्ष में सबसे अधिक सैटेलाइट्स एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की हैं (1655)। इसके अलावा चीन के रक्षा मंत्रालय की 129, रूसी रक्षा मंत्रालय की 125, नासा की 60, इसरो की 47 और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की 45 सैटेलाइट ऑर्बिट में मौजूद हैं। देशवार देखें तो अमेरिका की सबसे अधिक 2804, चीन की 467, ब्रिटेन की 349, रूस की 168, जापान की 93 और भारत की 61 सैटेलाइट अंतरिक्ष ऑर्बिट में चक्कर लगा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 14:22:20 +0530</pubDate>
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