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                <title>mountain - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भाजपा सरकार में हर विभाग में भ्रष्टाचार का पहाड़ : मूल कारण मुख्य सत्ताधारी लोग, अखिलेश बोले- वसूली और चंदे से जमा धन से महापद की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[वो मुख्य सत्ताधारी लोग हैं, जो वसूली करवा रहे हैं, क्योंकि उनकी आपस की लड़ाई बहुत बड़ी है और पद की प्रधान महत्वाकांक्षा भी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-root-cause-of-the-mountain-of-corruption-in-every/article-130260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/akhilesh.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार में हर विभाग में भ्रष्टाचार का पहाड़ खड़ा हो रहा है। यादव ने एक्स पर एक वीडियो जारी करते हुए लिखा कि  भाजपा सरकार में हर विभाग में भ्रष्टाचार का जो पहाड़ खड़ा हो रहा है, उसका मूल कारण वसूली करने वाले नहीं हैं, बल्कि वो मुख्य सत्ताधारी लोग हैं, जो वसूली करवा रहे हैं, क्योंकि उनकी आपस की लड़ाई बहुत बड़ी है और पद की प्रधान महत्वाकांक्षा भी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वसूली, घूस, कमीशन और चंदे से जमा किये जा रहे अकूत धन से दरअसल महापद की तैयारी हो रही है। मुख्यकोष को प्रधानकोष से बड़ा किया जा रहा है क्योंकि भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की यही परंपरा रही है कि जिसके पास महाकोष की व्यवस्था होगी, उस की ही प्रधान दावेदारी होगी। महापद की इस प्रतिस्पर्धा में वसूली के कारण हर चीज का दाम बढ़ रहा है और आखिर में इस रस्साकशी में आम जनता को सब खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>सपा मुखिया अखिलेश यादव भ्रष्टाचार पर भाजपा को घेरने में लगातार जुटे हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर वह सवाल उठा चुके हैं। अभी हाल में उन्होंने कहा था कि उन्होंने कहा कि अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी समेत कई जिलों में भाजपा समर्थकों ने अवैध रजिस्ट्रियां कर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया है, जबकि गरीब जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में अवैध खनन, सरकारी जमीनों पर कब्जा और जानवरों के अवैध व्यापार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी हैं। कई जिलों में पानी की टंकियां और पाइपलाइनें फट गईं, जबकि सड़कों के गड्ढामुक्त अभियान में भी भारी घपले हुए हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Oct 2025 14:29:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बदरीनाथ में कुबेर पर्वत से गिरी चट्टान : ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अक्सर होती है  ऐसी घटना, किसी प्रकार की हानि नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[ वहीं पुलिस ने बताया कि गिरा हुआ हिस्सा नीचे एक जगह डिपॉजिट हो गया है और इससे किसी भी प्रकार की कोई जान-माल की हानि नहीं हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rock-falling-from-kuber-mountain-in-badrinath-happens-frequently-in/article-129984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/6622-copy63.jpg" alt=""></a><br /><p>चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के बदरीनाथ स्थित कुबेर पर्वत से एक चट्टान का छोटा हिस्सा गिरता हुआ दिखाई दिया। इस घटना पर चमोली पुलिस ने घटना को एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया बताया है, जो कि ऐसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अक्सर होती रहती है। </p>
<p>हालांकि सोशल मीडिया पर गिरते चट्टान का दृश्य वायरल हो रहा है। वहीं पुलिस ने बताया कि गिरा हुआ हिस्सा नीचे एक जगह डिपॉजिट हो गया है और इससे किसी भी प्रकार की कोई जान-माल की हानि नहीं हुई है। साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है और सभी रास्ते पहले की तरह खुले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 13:24:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर तंज कसा, कहा- जयपुर की जनता पर टूट रहे मुसीबत के पहाड़ </title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में जयपुर की सड़कों पर पानी भरने से बदहाल हालातों पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर तंज कसा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/julie-a-mountain-of-trouble-on-the-people-of-jaipur/article-118490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/tikaram-jully.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मानसून में जयपुर की सड़कों पर पानी भरने से बदहाल हालातों पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर तंज कसा है।<br />जूली ने कहा है कि तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि क़ाफ़िले क्यूँ लुटे? सवाल सड़कों का है, सवाल जनता की ज़िंदगी का है। उन्हें सरकार के झूठे भाषणों, वादों और भ्रमण यात्राओं में कोई रुचि नहीं हैं। जयपुर की जनता सड़कों के गड्ढों में डूब रही है, गाड़ियां पानी में तैर रही हैं, और माननीय जी भ्रमण कर, झूठे भाषणों से भ्रम फैला रहे है।</p>
<p>जयपुर की जनता पर मुसीबत के पहाड़ टूट रहे है जो राजधानी से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और एक कैबिनेट मंत्री बनाकर रोजाना पूछती है माननीय जी 47 की नहीं अभी तो 25 की बात कर लो। जब राजधानी की हालत इतनी खराब है, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 15:16:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक तरफ खाई दूसरी तरफ जंगल, बीच में स्थित है मां जोगणिया का मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[अरावली की पर्वतमाला और प्रकृति की गोद में स्थित है शक्तिपीठ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ditch-on-one-side-and-forest-on-the-other--maa-joganiya-temple-is-situated-in-the-middle/article-97137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के मध्य सीमा पर स्थित जोगणिया माता मंदिर अपने आप में बेहद खास है। मां के दर से कोई खाली हाथ नहीं जाता। माता रानी सबकी मन्नतों को पूरा किया है। यहां के चमत्कार लोगों को अपनी आस्था के साथ खिंचे चले आते हैं।  जोगणिया माता का मंदिर तीन दिशााओं में अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ और प्रकृति की गोद में है। मंदिर की दीवार के पश्चिम दिशा में सैकड़ों फीट गहरी खाई है और विशाल जंगल फैला हुआ है। यहां से 3 किमी दूरी पर प्रदेश का सबसे बड़ा जलप्रपात मेनाल जलप्रपात मौजूद है। </p>
<p><strong>जोगणिया माता मंदिर हाड़ाओ की कुलदेवी:</strong> यहां पर माता लक्ष्मी, सरस्वती और मां दुर्गा के रूप में विराजमान है। लोककथाओं के अनुसार बम्बावदा के समीपस्थ ही जोगणिया माता हाड़ाओ की कुलदेवी थी। राव देवा की पुत्री के विवाहोत्सव पर राव देवा ने जगदम्बा जोगणिया को सादर आमंत्रित कर प्रार्थना की कि मां उसका निमंत्रण स्वीकार कर उसे धन्य करें, माता रानी ने यहां जोगण के रूप में दर्शन दिए थे। तब से मां का नाम जोगणिया माता के रूप में प्रसिद्ध हो गया। इतिहास के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 8 वीं शताब्दी ईस्वी के लगभग हुआ था। मान्यता है कि पहले यहां अन्नपूर्णा देवी का मंदिर हुआ करता था। जिसके बाद अन्नपूर्णा के बजाय जोगणिया माता के नाम से यह शक्तिपीठ पूरे लोक में प्रसिद्ध हुआ। </p>
<p>मंदिर परिसर में लगी है हथकड़िया इस मंदिर परिसर में बहुत सारी हथकड़िया लटकी हुई है। इसके बारे में कहा जाता है कि चोर और डाकू वारदात को अंजाम देने से पहले माता का आशीर्वाद लिया करते थे। जिनके पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद मौके के फरार होते हुए मां के दरबार पहुंचता था। जहां उनके हाथों में लगी बेड़िया अपने आप ही खुल जाया करती थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 17:47:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में 1,270 लोगों को दी पर्वत पर चढ़ने की अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[ विभाग के निदेशक राकेश गुरुंग ने मीडिया को बताया कि हमसे लोग अब भी पर्वतारोहण को लेकर जानकारी मांग रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/permission-give-of-peoples-to-climb-the-mountain-in-nepal/article-94640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy60.jpg" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल के पर्यटन विभाग ने घोषणा की है कि नेपाल में 45 पर्वतों पर चढ़ने के लिए 1,270 पर्वतारोहियों को परमिट देकर अनुमति मिली हैं। कुल में से 463 को माउंट अमा डबलम, 308 को माउंट मनास्लू और 144 को माउंट हिमलुंग हिमालय पर चढ़ने की अनुमति है। </p>
<p>पर्वतारोही, जिनमें 289 महिलाएं शामिल हैं, 73 देशों और क्षेत्रों से हैं। विभाग के निदेशक राकेश गुरुंग ने मीडिया को बताया कि हमसे लोग अब भी पर्वतारोहण को लेकर जानकारी मांग रहे हैं। आने वाले हफ्तों में संख्या में थोड़ी वृद्धि होगी। परमिट जारी करके नेपाल ने रॉयल्टी के रूप में 575,253 अमेरिकी डॉलर कमाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2024 10:13:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तराखण्ड में पर्वत में फंसे 2 विदेशी नागरिक, एसडीआरएफ ने निकाला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[आईएमएफ से प्राप्त सूचना के क्रम मे सभी संबंधितो को अलर्ट करते हुए भारतीय वायु सेना से  चौखम्भा पर्वत ट्रेक पर फंसे हुए नागरिको को सुरक्षित निकाले जाने का अनुरोध किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/foreign-trapped-in-mountain-in-the-uttarakhand--sdrf-rescued/article-92403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/6633-copy10.jpg" alt=""></a><br /><p>चमोली। उत्तराखण्ड के चमोली जिले में चौखम्भा पर्वत पर फंसे 2 विदेशी  पर्वतारोहियों को वायु सेना, एसडीआरएफ ने सुरक्षित निकाल लिया है। आपदा प्रबंधन विभाग चमोली को 3 अक्टूबर की सांय को भारतीय पर्वतारोही महासंघ (आईएमएफ) के माध्यम से सुचना प्राप्त हुई कि जनपद अन्तर्गत चौखम्भा पर्वत मे 6015 मीटर की ऊंचाई पर 2 पर्वतारोही जिनमे एक अमेरिकन और दूसरा ब्रिटेन का नागरिक है फंस गए है,  जिनका तुरंत हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू किया जाना है। </p>
<p>आईएमएफ से प्राप्त सूचना के क्रम मे सभी संबंधितो को अलर्ट करते हुए भारतीय वायु सेना से चौखम्भा पर्वत ट्रेक पर फंसे हुए नागरिको को सुरक्षित निकाले जाने का अनुरोध किया गया। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन बिभाग चमोली, भारतीय वायु सेना एवं एसडीआरएफ उत्तराखंड एवं अन्य विभागों के सहयोग से 4 अक्टूबर से तत्काल बचाव अभियान प्रारम्भ किया गया। बचाव अभियान के तीसरे दिन  रविवार को दोनों पर्वतारोही को सुरक्षित रेस्क्यू कर दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Oct 2024 13:00:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पहाड़ पर पानी स्टोरेज कर बनाएंगे सस्ती बिजली</title>
                                    <description><![CDATA[  बिजली उत्पादन के लिए अब पहाड़ी पर पानी का स्टोरेज होगा। चंबल नदी पर बने जवाहर सागर बांध से सटी पहाड़ी को इसके लिए चिह्नित किया गया है। यहां पर स्टोरेज टैंक बनाया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/will-make-cheap-electricity-by-storing-water-on-the-mountain/article-15588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/pahad-par-paaani-stroage,-jawahar-sagar..kota-news-21.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बिजली उत्पादन के लिए अब पहाड़ी पर पानी का स्टोरेज होगा। चंबल नदी पर बने जवाहर सागर बांध से सटी पहाड़ी को इसके लिए चिह्नित किया गया है। यहां पर स्टोरेज टैंक बनाया जाएगा। पहले बांध से यहां पानी एकत्रित करेंगे और जरूरत के आधार पर पानी को नीचे लाकर टरबाइन के जरिए बिजली उत्पादन किया जाएगा। यहां 200 मेगावाट क्षमता का पम्प स्टोरेज प्लांट बनाने की तैयारी चल रही है। इससे एक दिन में अधिकतम 16 लाख यूनिट सस्ती बिजली मिलेगी। राजस्थान में ऐसा पहला प्रोजेक्ट होगा। सरकार इसकी कमान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को दे रही है। निगम के सीएमडी आर.के. शर्मा ने पिछले दिनों ही मौका स्थिति देखी है। प्रोजेक्ट निर्माण की समय सीमा अधिकतम तीन साल होगी। <br /><br /><strong>एक दिन में होगा 16 लाख यूनिट बिजली उत्पादन</strong><br />जानकारी के अनुसार इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण होने के बाद यहां पर एक घंटे में लगभग 2 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होगा। ऐसे में एक ही दिन में  16 लाख यूनिट बिजली बनेगी। वर्तमान में जवाहर सागर पनबिजलीघर में 33 मेगावाट की तीन यूनिट से बिजली उत्पादन होता है। इस पन बिजलीघर के माध्यम से सालभर में करीब 8 महीने बिजली उत्पादन होता है। <br /><br /><strong>चार्ज केवल 30 पैसे यूनिट</strong> <br />राजस्थान में कोयला आधारित पावर प्लांट भी लगे हुए हैं। इन प्लांटों के माध्यम से भी बिजली उत्पादन किया जाता है। कोयले की आपूर्ति देश के छतीसगढ़ में स्थित कोल ब्लॉक से की जाती है। कोयले की आपूर्ति महंगी होने के कारण इसके पावर प्लांट से बनने वाली बिजली काफी महंगी होती है। वहीं पानी आधारित पावर प्लांटों से बनने वाली कोयले की तुलना में कई गुना सस्ती होती है। चंबल नदी पर बने राणाप्रताप सागर बांध और जवाहर सागर बांध के पनबिजलीघर में पानी के माध्यम से बिजली बनती है। इसका वेरिएबल चार्ज केवल 30 पैसे प्रति यूनिट है। ऐसे में यह काफी सस्ती है।<br /><br /><strong>इस तरह होगा स्टोरेज</strong><br />हाइड्रो पम्प स्टोरेज सिस्टम के लिए पहाड़ी पर दो जगह जलाशय बनाए जाएंगे। दोनों जलाशय में 2.4 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भरा (केवल एक बार) जाएगा। यहीं टरबाइन लगेगा। टरबाइन के जरिए निचले वाले तालाब से पानी को उपर पंप करेंगे और पानी स्टोर किया जाएगा। जब बिजली की जरूरत होगी तो पानी को वापस टरबाइन के जरिए नीचे वाले जलाशय में लाएंगे। इस प्रक्रिया से बिजली उत्पादन होगा, जिसे डिस्कॉम्स को सप्लाई किया जाएगा। रात में सौर ऊर्जा का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए जहां भी बिजली की जरूरत होगी तो ग्रिड से लेने की बजाय इस बिजली का उपयोग किया जा सकेगा।<br /><br />बिजली उत्पादन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह कवायद की जा रही है। इस सम्बंध में गत दिनों विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी ने जवाहर सागर बांध क्षेत्र और झालावाड़ में कालीसिंध बांध क्षेत्र का दौरा किया था।  यह मामला प्रक्रियाधीन है।<br /><strong>- विनोद कुमार, प्रभारी, जवाहर सागर पनबिजलीघर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 14:36:08 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तराखण्ड में सड़क बनाते समय पहाड़ से गिरा मलबा, एक महिला की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत सड़क बना रही महिलाओं पर अचानक पहाड़ से मलवा गिरने से एक महिला की मौत हो गयी, जबकि अन्य तीन अन्य घायल हो गए उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/debris-fell-from-the-mountain-while-building-a-road-in-uttarakhand/article-12792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/smart-dussehara-maidan-hua-durdasha-ka-shikar-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तरकाशी। उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत सड़क बना रही महिलाओं पर अचानक पहाड़ से मलवा गिरने से एक महिला की मौत हो गयी, जबकि अन्य तीन अन्य घायल हो गए उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डीएस पटवाल ने बताया कि सुबह तहसील मोरी के ग्राम कीताडी में मनरेगा योजना के अन्तर्गत चार महिलाएं काम कर रही थी। सड़क बनाने के काम में लगी चारों महिलाएं सुबह लगभग 7.30 बजे अचानक पहाड़ से गिरे मलवे की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही, स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस एवं एसडीआरएफ की मदद से सभी को मलवे से निकाला।</p>
<p>पटवाल ने मिली सूचना के आधार पर बताया कि ग्राम रेल्वा की सूरी देवी की मृत्यु हो गई। इसके अतिरिक्त सुशीला देवी तथा कस्तूरी देवी और  विपीना पत्नी रामलाल घायल हो गई है, जिन्हें उपचार के लिये अस्पताल भेजा गया है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 17:49:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आमेर-सागर के पहाड़ की गुफा के बाहर बघेरा  </title>
                                    <description><![CDATA[आमेर स्थित सागर की ओर सुबह 7 बजे लोगों को पहाड़ की चट्टाननुमा गुफा के बाहर बघेरा दिखाई दिया। हुआ यूँ कि शनिवार को लोगो को हनुमान मंदिर जाते समय पहाड़ी पर दूर से बघेरा दिखाई दिया। ऐसे में लोगों ने दूर से मोबाइल के ज़रिए विडीओ बनाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bagheera-outside-the-rock-like-cave-of-the-mountain-of-sagar/article-11903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/1111.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जयपुर</span></strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">।</span></strong> आमेर स्थित सागर की ओर सुबह </span>7<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> बजे लोगों को पहाड़ की चट्टाननुमा गुफा के बाहर बघेरा दिखाई दिया। हुआ यूँ कि शनिवार को लोगो को हनुमान मंदिर जाते समय पहाड़ी पर दूर से बघेरा दिखाई दिया। ऐसे में लोगों ने दूर से मोबाइल के ज़रिए विडीओ बनाए। </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">वीके पुरोहित ने बताया कि सुबह दोस्तों के साथ हनुमान मंदिर जा रहे थे</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">तो दूर पहाड़ी पर बघेरा दिखाई दिया। कुछ देर दिखाई देने के बाद वो ओझल हो गया। इस एरिया में अक्सर बघेरा दिखाई दे जाता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 14:33:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>धरती पर खतरे की घंटी! अंतरिक्ष में खड़ा हो रहा ‘कूड़े का पहाड़’</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ नहीं किया तो मलबे से ‘बेकार’ हो जाएगा स्पेस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/washington--slarm-bells-on-earth--a--mountain-of-garbage--rising-in-space/article-7400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/space.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। बात है 1978 की नासा के वैज्ञानिक डोनाल्ड केसलर ने अंतरिक्ष के ‘कबाड़खाने’ में तब्दील होने की चेतावनी दी। उनकी इस थ्योरी को ‘केसलर सिन्ड्रोम’ के नाम से जाना गया जिसके मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में मौजूद कचरा एक ऐसे बिंदु पर पहुंच जाएगा जहां यह और अधिक मात्रा में खगोलीय मलबा पैदा करेगा जो सक्रिय सैटेलाइट्स, ऐस्ट्रोनॉट्स और मिशन प्लानर्स के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। इंसान को अंतरिक्ष में पहला कदम रखे 50 साल से अधिक समय हो गया है। अब वैज्ञानिकों की नजर मंगल जैसे ग्रह पर है जो कभी एक सपना हुआ करता था।  कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में लोगों को कई उल्कापिंड की आतिशबाजी दिखाई पड़ी थी। इस रहस्यमय रोशनी को लेकर खगोलविद जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि यह दरअसल चीनी रॉकेट का मलबा था जो पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर रहा था। इसी तरह का मलबा बड़ी मात्रा में हमारी पृथ्वी की कक्षा में मौजूद है। अक्सर इसी मलबे के टुकडेÞ धरती पर जलते हुए गिरते हैं जो कई बार रिहायशी इलाकों में गिरने पर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। <br /><br /><strong>कुछ नहीं किया तो मलबे से ‘बेकार’ हो जाएगा स्पेस</strong><br /><strong>हर सैटेलाइट एक दिन बन सकती है मलबा</strong><br />यह मलबा इसलिए खतरनाक है कि क्योंकि यह 25,265 किमी/घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगाता है। यह रफ्तार किसी भी बड़े धमाके को अंजाम देने के लिए काफी है। एक्सपर्ट कहते हैं हर सैटेलाइट जो आॅर्बिट में प्रवेश करती है उसके खगोलीय मलबा बनने की संभावना होती है। एलन मस्क के स्टारलिंक जैसे प्रोजेक्ट अंतरिक्ष के मलबे को कई गुना बढ़ा सकते हैं। अमेरिकी सरकार के मुताबिक सॉफ्टबॉल से बड़े मलबे के लगभग 23,000 टुकड़े पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं। 1 सेमी से बड़े मलबे के 5 लाख टुकड़े हैं और करीब 1 मिमी या उससे बड़े मलबे के 100 मिलियन टुकड़े ऑर्बिट में मौजूद हैं।<br /><br /><strong>9,600 टन से अधिक कचरा अंतरिक्ष में मौजूद</strong><br />आईएसएस के पास मौजूद मलबे के टुकड़े दिन में 15-16 बार धरती का चक्कर लगाते हैं जिससे टकराव का खतरा बढ़ जाता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का अनुमान है कि पृथ्वी की कक्षा में सभी अंतरिक्ष पिंडों का कुल द्रव्यमान 9,600 टन से अधिक है। नासा का कहना है कि कक्षा में 600 किमी से कम ऊंचाई पर मौजूद मलबा कुछ साल में धरती पर वापस गिरेगा। लेकिन 1000 किमी से ज्यादा की ऊंचाई पर मौजूद कचरा करीब एक शताब्दी या उससे अधिक समय पर पृथ्वी के चक्कर लगाता रहेगा। देवेसॉफ्ट की 1 सितंबर 2021 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी की कक्षा में कुल 4550 सैटेलाइट्स मौजूद हैं। इसमें 3790 सैटेलाइट्स निचली कक्षा में मौजूद हैं।<br /><br />किस देश की कितनी सैटेलाइट्स<br />देशों की 50 अलग-अलग ऑपरेटर्स या स्पेस एजेंसियां संचालित करती हैं। अंतरिक्ष में सबसे अधिक सैटेलाइट्स एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की हैं (1655)। इसके अलावा चीन के रक्षा मंत्रालय की 129, रूसी रक्षा मंत्रालय की 125, नासा की 60, इसरो की 47 और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की 45 सैटेलाइट ऑर्बिट में मौजूद हैं। देशवार देखें तो अमेरिका की सबसे अधिक 2804, चीन की 467, ब्रिटेन की 349, रूस की 168, जापान की 93 और भारत की 61 सैटेलाइट अंतरिक्ष ऑर्बिट में चक्कर लगा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 14:22:20 +0530</pubDate>
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