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                <title>'अफ्रीका दिवस' पर यूएन प्रमुख का संदेश: सतत विकास और समृद्धि के लिए अफ्रीका के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 'अफ्रीका दिवस' (25 मई 2026) पर अफ्रीकी संघ की 63वीं वर्षगांठ के अवसर पर बधाई दी। उन्होंने एक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता जताई। गुटेरेस ने महाद्वीप में मुक्त व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक एकजुटता के जरिए 'जल एवं स्वच्छता' की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-said-on-africa-day-un-will-work-together/article-154975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/antónio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को 'अफ्रीका दिवस' के अवसर पर अफ्रीकी देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए अफ्रीका के साथ मिलकर काम करने पर गर्व है। 'अफ्रीकी संघ' की 63वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, "आज और हर दिन, संयुक्त राष्ट्र उन सभी अफ्रीकी देशों के साथ काम करने में गर्व महसूस करता है जो एक ऐसे शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य का निर्माण कर रहे हैं जिसके हकदार न केवल सभी अफ्रीकी नागरिक हैं, बल्कि हमारी पूरी दुनिया है।"</p>
<p>गुटेरेस ने महाद्वीप की प्रचुर ताकत, लचीलेपन और वैश्विक मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के लोगों ने गुलामी और उपनिवेशवाद के विनाशकारी परिणामों का सामना करते हुए आपदा को एकता और संकल्प में बदला है। आज यही साझा संकल्प महाद्वीप में मुक्त व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विस्तार, नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देने और स्थायी शांति की नींव रखने के उद्देश्यों को गति दे रहा है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इस वर्ष के विषय (थीम) 'जल और स्वच्छता' पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ये सेवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य, मानवीय गरिमा और आर्थिक अवसरों की आधारशिला हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण महाद्वीप में लाखों लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को अभी भी इन आवश्यक सेवाओं तक पहुंच नहीं मिल पा रही है। उन्होंने अफ्रीकी देशों को फंड जुटाने, कर्ज राहत तंत्र तक पहुंच बनाने और सौर व पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष 25 मई को अफ्रीका दिवस मनाया जाता है। यह दिन 25 मई 1963 को 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी' (ओएयू) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसे अब 'अफ्रीकन यूनियन' (एयू) के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अफ्रीका संघ अपनी 63वीं वर्षगांठ 'एकता, एकीकरण और विकास के 63 वर्ष, आइए मिलकर जश्न मनाएं' थीम के तहत मना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:17:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला ने की मोदी से मुलाकात, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोम में इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/italian-president-sergio-mattarella-met-modi-and-discussed-various-aspects/article-154492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/italy.png" alt=""></a><br /><p>रोम। इटली की दो दिन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को यहां इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा ,"मैंने रोम में राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात की। हमने भारत और इटली के बीच मित्रता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।</p>
<p>हमने इस बारे में बात की कि हमारे देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रो में सहयोग कैसे बढा सकते हैं। "राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मोदी इटली की राष्ट्रपति जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद उनका स्वदेश लौटने का कार्यक्रम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:34:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नार्वे और भारत के बीच सहयोग की अपार संभावना,नार्वे की कंपनियों के लिए खुले हैं दरवाजे: पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में भारत-नॉर्वे व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण और समुद्री उद्योगों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। पीएम मोदी ने TEPA समझौते के तहत $100 अरब के निवेश और भारत में 10 लाख रोजगार सृजन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-is-immense-potential-for-cooperation-between-norway-and-india/article-154317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi8.png" alt=""></a><br /><p>ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और नार्वे के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि नॉर्वे की कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खुले हैं और उन्हें स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। नार्वे की दो दिन की यात्रा पर गये पीएम मोदी ने सोमवार रात भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने बाद में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ओस्लो सिटी हॉल में प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे और मैंने एक व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लिया। व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था। हमारे देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। मैंने नॉर्वे को भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। मैंने भारत के सुधार एजेंडा के समर्थन में भी अपने विचार रखे। जहाज निर्माण एक ऐसा क्षेत्र है जो व्यापक और असीम संभावनाएं प्रदान करता है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग का आह्वान करते हुए नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाने के लिए कहा। शिखर सम्मेलन में नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन के अलावा 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापार और अनुसंधान क्षेत्रों के 250 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने के बाद भारत-नॉर्वे संबंधों में बढ़ती गति को दर्शाता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के हितधारकों से व्यापार समझौते के तहत निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों के हितधारकों को टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य तथा भारत में 10 लाख रोजगार सृजन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने चाहिए।" प्रधानमंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, अनुकूल जनसांख्यिकी और निवेशक-अनुकूल नीतियों पर जोर देते हुए देश को वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बताया। उन्होंने नॉर्वे को समुद्री अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवर्तन, महत्वपूर्ण खनिज, नवप्रवर्तन उद्यमों और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया, साथ ही सतत विकास और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, "भारत का विशाल आकार, बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं और जलवायु प्रतिबद्धताएं नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना के तीव्र विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं।" उन्होंने समुद्री क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में कमी, महासागर स्थिरता और जलवायु वित्त में नॉर्वे की विशेषज्ञता की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के व्यवसायों को नई साझेदारी बनाने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और नार्वे की कंपनियों तथा संस्थानों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए। इससे पहले दिन में, ओस्लो में चार गोलमेज चर्चाएंआयोजित की गईं, जिनमें स्वास्थ्य सेवा नवाचार, समुद्री सहयोग, बैटरी और ऊर्जा भंडारण प्रणाली, डिजिटलीकरण और विद्युतीकरण तथा पवन ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:35:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का चीन के साथ 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीद का वादा, समझौते पर हस्ताक्षर </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और चीन ने 2017 के बाद का सबसे बड़ा ऐतिहासिक समझौता किया है। इसके तहत चीन अगले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष $17 अरब के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा और 200 बोइंग विमानों को मंजूरी देगा। आर्थिक समन्वय के लिए दो नए बोर्ड स्थापित किए गए हैं और दोनों देशों ने महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी सहमति जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-signs-agreement-with-china-promising-to-purchase-agricultural-products/article-154253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और चीन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत चीन ने अगले तीन वर्षों तक प्रतिवर्ष कम से कम 17 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। यह अक्टूबर 2025 में की गयी सोयाबीन संबंधी पूर्व प्रतिबद्धताओं के अतिरिक्त है। व्यापार के अलावा यह समझौता दो नए द्विपक्षीय तंत्रों, अमेरिका-चीन व्यापार बोर्ड और अमेरिका-चीन निवेश बोर्ड की स्थापना भी करता है, जिनका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा के बाद आर्थिक समन्वय को मजबूत करना है। दोनों पक्षों ने ईरान, उत्तर कोरिया और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी सहमति के संकेत दिए हैं।</p>
<p>द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के व्यापक प्रयास के तहत प्रस्तुत इस समझौते में चीन द्वारा 200 बोइंग विमानों के प्रारंभिक ऑर्डर की मंजूरी भी शामिल है, जो 2017 के बाद बीजिंग की पहली ऐसी प्रतिबद्धता है। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह समझौता अमेरिका में उच्च-कुशल विनिर्माण नौकरियों को बढ़ावा देगा और दीर्घकालिक वाणिज्यिक विमानन संबंधों को मजबूत करेगा। यह घोषणा उन वार्ताओं के बाद हुई जिनमें दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक स्थिरता में सुधार लाने के उद्देश्य से उपायों पर सहमति व्यक्त की। वाशिंगटन ने चर्चाओं को कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों को शामिल करने वाला बताया। व्हाइट हाउस इसे 2017 के बाद का सबसे महत्वपूर्ण अमेरिका-चीन समझौता मानता है।</p>
<p>इस ऐतिहासिक समझौते की आधारशिला के रूप में, राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दो नए संस्थान अमेरिका-चीन व्यापार बोर्ड और अमेरिका-चीन निवेश बोर्ड की स्थापना की है। इनका उद्देश्य गैर-संवेदनशील वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार के प्रबंधन और निवेश संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए संस्थागत ढांचा प्रदान करना है। व्हाइट हाउस ने कहा कि चीन ने यट्रियम, स्कैंडियम, नियोडिमियम और इंडियम जैसी दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर अमेरिका की चिंताओं को दूर करने और उत्पादन एवं प्रसंस्करण उपकरणों और प्रौद्योगिकियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की प्रतिबद्धता जताई है। चीन दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के उत्पादन और प्रसंस्करण उपकरणों और प्रौद्योगिकियों की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों या सीमाओं को लेकर अमेरिका की चिंताओं का भी समाधान करेगा।</p>
<p>कृषि क्षेत्र में, चीन ने 400 से अधिक अमेरिकी गोमांस उत्पादन इकाइयों की समाप्त हो चुकी सूचियों का नवीनीकरण करके और नए अनुमोदन जोड़कर अमेरिकी गोमांस के लिए बाजार पहुंच बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही अमेरिकी कृषि विभाग ने अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा से मुक्त प्रमाणित अमेरिकी राज्यों से मुर्गी पालन का आयात फिर से शुरू करने पर भी सहमति जताई है व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों पक्षों ने व्यापक भू-राजनीतिक चिंताओं पर सहयोग की पुष्टि की, जिनमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार प्राप्त करने का विरोध और उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन शामिल है।</p>
<p>दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि किसी भी देश या संगठन को टोल वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने साझा लक्ष्यों की पुष्टि की। राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रपति शी को 24 सितंबर को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया है। दोनों देश इस वर्ष के अंत में होने वाले जी20 और एपेक शिखर सम्मेलनों के मेजबान के रूप में एक-दूसरे का समर्थन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:41:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्वीडन के बाद ओस्लो पहुंचे पीएम मोदी: भारतीय समुदाय ने किया स्वागत, बोले-द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन की सफल यात्रा पूरी कर अपनी पांच देशों की यात्रा के चौथे पड़ाव, नॉर्वे के लिए रवाना हो गए हैं। प्रस्थान से पहले पीएम मोदी ने बताया कि स्वीडन दौरा बेहद सार्थक रहा। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने और अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-sweden-pm-modi-reached-oslo-welcomed-by-the-indian/article-154257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-niderland1.png" alt=""></a><br /><p>गोथेनबर्ग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वीडन की दो दिन की यात्रा संपन्न होने के बाद पांच देशों की अपनी यात्रा के चौथे पड़ाव के लिए सोमवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो रवाना हो गए। प्रस्थान से पहले पीएम मोदी ने कहा कि उनकी यात्रा बेहद सार्थक रही और इससे दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, "स्वीडन की मेरी यात्रा कई महत्वपूर्ण परिणामों से चिह्नित रही, जो भारत-स्वीडन संबंधों को नई गति प्रदान करेंगे। </p>
<p>हमारे संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत करने, संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0 तथा भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता गलियारे की शुरुआत करने से लेकर, अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने तक, चर्चाएँ अत्यंत फलदायी रहीं। मैं स्वीडन की जनता, स्वीडन सरकार और प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन का उनके स्नेह और मित्रता के लिए आभार व्यक्त करता हूँ।" उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी 15 मई को पांच देशों संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रवाना हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:33:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का स्वीडन दौरान: भारत-स्वीडन के संबंध रणनीतिक साझेदारी में बदले, मोदी को मिला स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टरसन के बीच द्विपक्षीय वार्ता में संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" स्तर पर ले जाने का निर्णय हुआ। पीएम मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार' से सम्मानित किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/during-pm-modis-visit-to-sweden-india-sweden-relations-transformed-into/article-154193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi6.png" alt=""></a><br /><p>गोथेनबर्ग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता को बेहद सार्थक बताते हुए कहा है कि परस्पर बढते सहयोग को देखते हुए दोनों देशों ने संबंधों को रणनीति साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय किया है। मोदी ने उन्हेंं स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार से सम्मानित किये जाने को भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान करार दिया। पांच देशों की यात्रा के तीसरे चरण में स्वीडन की दो दिन की यात्रा पर गये श्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद रविवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ," प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ अत्यंत उत्कृष्ट वार्तालाप हुए। यह भी अत्यंत प्रसन्नता की बात रही कि युवराज्ञी विक्टोरिया ने भी बैठक में भाग लिया। उन्होंने स्वीडन के महाराज और महारानी की ओर से शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं। उनके प्रति मेरा आभार।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत और स्वीडन के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन के सिद्धांतों और मानव-केंद्रित विकास की मजबूत नींव पर आधारित हैं। सभी क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को देखते हुए, हमने अपने संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान व्यापार, रक्षा, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी।</p>
<p>यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयन से मुलाकात पर पीएम मोदी ने कहा,"गोथेनबर्ग में आपसे मिलकर अत्यंत प्रसन्नता हुई, अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन। भारत-यूरोप संबंधों की प्रबल संभावनाओं पर, विशेषकर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में, मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूं।" स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार से सम्मानित किये जाने पर उन्होंने कहा," मुझे अभी ऑर्डर ऑफ द नॉर्थ स्टार से सम्मानित किया गया है। यह केवल मेरे लिए ही नहीं, बल्कि भारत के 1.4 अरब लोगों के लिए भी सम्मान है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्वीडन में हमारे उन सभी मित्रों को भी श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारत और स्वीडन के संबंधों को सुदृढ़ किया और एक मजबूत आधार तैयार किया। हमारी दोनों राष्ट्रों के बीच मित्रता निरंतर प्रगाढ़ होती रहे। पीएम मोदी को एक विशेष समारोह में, स्वीडन की युवराज्ञी विक्टोरिया ने 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया, जो स्वीडन के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जिसकी स्थापना 18वीं शताब्दी में हुई थी। यह सम्मान स्वीडन द्वारा विदेशी शासनाध्यक्षों को असाधारण लोकसेवा और स्वीडन के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने में योगदान के लिए प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।</p>
<p>स्टरसन और मोदी ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को रेखांकित करते हुए विशेष स्मारक उपहारों का आदान-प्रदान किया। क्रिस्टरसन द्वारा दिए गए उपहार में एक बॉक्स शामिल था, जिसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा हस्तलिखित दो नीति-वचनों (एपिग्राम) की प्रतिकृतियां, एक संक्षिप्त व्याख्यात्मक लेख और वर्ष 1921 में उप्साला विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान ली गई गुरुदेव टैगोर की एक तस्वीर थी। हाल ही में स्वीडिश राष्ट्रीय अभिलेखागार में खोजे गए ये मूल दस्तावेज, गुरुदेव टैगोर द्वारा वर्ष 1921 और 1926 में अपनी स्वीडन यात्राओं के दौरान तैयार किए गए थे।</p>
<p>मोदी ने क्रिस्टरसन को रवींद्रनाथ टैगोर की संकलित रचनाओं का एक संग्रह भेंट किया, साथ ही शांतिनिकेतन का विशेष रूप से हस्तनिर्मित एक बैग भी प्रदान किया, जिस पर वे रूपांकन (मोटिफ्स) अंकित हैं जिन्हें गुरुदेव ने स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए चुना था।प्रधानमंत्री ने गोथेनबर्ग में उद्योग के लिए यूरोपीय गोलमेज सम्मेलन को भी संबोधित किया। क्रिस्टरसन, वान डेर लेयेन, यूरोप के वरिष्ठ उद्योग जगत की हस्तियों तथा प्रमुख यूरोपीय और भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वोल्वो समूह द्वारा आयोजित इस संवाद में भाग लिया। पीएम मोदी ने भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक सामंजस्य को रेखांकित किया और लगातार जटिल तथा अनिश्चित होते वैश्विक परिवेश में विश्वसनीय साझेदारियों के महत्व को उजागर किया। उन्होंंने स्वीडन की कंपनियों से भारत में महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने का आह्वान किया। पीएम मोदी स्वीडन से यात्रा के चौथे पड़ाव में नावें जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:25:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी नीदरलैंड दौरा: भारत-नीदरलैंड ने आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जताई सहमति, कई अहम समझौतों पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के पीएम रोब जेटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" स्तर पर ले जाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता हुई। व्यापार, रक्षा, एआई और हरित ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर भी जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-visits-netherlands-india-netherlands-agreed-to-strengthen-mutual-relations/article-154149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेटेन के साथ आधिकारिक वार्ता में दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। साझा मूल्यों और आपसी विश्वास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बढ़ते सामंजस्य और सहयोग को देखते हुए, नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया। उन्होंने व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए एक महत्वाकांक्षी सामरिक साझेदारी रोडमैप अपनाने पर भी सहमति व्यक्त की। बढ़ते व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी पर ध्यान देते हुए, नेताओं ने कहा कि भारत की विकास गाथा द्वारा प्रस्तुत अवसर डच कंपनियों के लिए बेहतर व्यावसायिक संभावनाएं प्रदान करते हैं।</p>
<p>दोनों नेताओं ने निरंतर उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। जल, कृषि और स्वास्थ्य] में सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने बड़े पैमाने की जल परियोजनाओं पर सहयोग के माध्यम से 'जल पर रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक सुदृढ़ करने पर करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य सुरक्षा सहित प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का भी स्वागत किया।</p>
<p>पीएम मोदी और जेटेन ने बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार को महत्वपूर्ण बताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (भारत-ईयू एफटीए) की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इस पर जल्द हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगा।</p>
<p>दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) और सेमीकंडक्टर सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में अधिक सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं की भागीदारी वाले शामिल हैकाथॉन आयोजित करने को भी प्रोत्साहित किया। नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताते हुए, उन्होंने एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हरित हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, हरित शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'मोबिलिटी पार्टनरशिप' (प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी) और उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने के लिए की गई नयी पहलों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस संबंध में, उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुए समझौते पर विशेष रूप से उल्लेख किया।</p>
<p>दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने 11वीं शताब्दी की चोल कालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहायता करने के लिए डच सरकार का आभार व्यक्त किया। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने लीडेन विश्वविद्यालय पुस्तकालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) के बीच सहयोग का भी स्वागत किया, जो इन ऐतिहासिक कलाकृतियों के ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। आधिकारिक वार्ता के बाद, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, व्यापार, मोबिलिटी, जल, कृषि और स्वास्थ्य,शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में 14 समझौता ज्ञापनों(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री जेटेन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। भारत और नीदरलैंड्स के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी सहयोग पर आधारित मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:09:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप-जिंनपिग समिट: बीजिंग शिखर सम्मेलन के बाद बनी सहमति, चीन-अमेरिका के बीच विमान खरीद पर समझौता, 200 विमानों की डील</title>
                                    <description><![CDATA[चीन और अमेरिका के बीच विमानों, इंजनों और कलपुर्जों की खरीद को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बीजिंग शिखर सम्मेलन के बाद इस डील पर मुहर लगी। चीन 200 बोइंग विमान खरीदेगा, जिसे भविष्य में 750 तक बढ़ाया जा सकता है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मोड़ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-jinpig-summit-agreement-reached-after-beijing-summit-agreement-on-aircraft/article-154108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china5.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि चीन और अमेरिका के बीच विमानों, विमान इंजनों और अन्य कलपुर्जों की खरीद को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने चीन द्वारा अमेरिकी विमानों की खरीद के साथ-साथ चीन को अमेरिकी विमान इंजनों और अन्य घटकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही दोनों देश संबंधित क्षेत्रों में सहयोग को और विकसित करना जारी रखने पर भी सहमत हुए हैं। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया था कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने पर सहमत हुआ है और इस ऑर्डर को भविष्य में 750 विमानों तक बढ़ाने की भी संभावना है। यह महत्वपूर्ण सौदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रंप के बीच बीजिंग में हुए शिखर सम्मेलन के तत्काल बाद हुआ है, जिसे चीन ने ह्यऐतिहासिकह्य करार दिया है।</p>
<p><strong>चीन-अमेरिका संबंधों में नया अध्याय </strong></p>
<p>इस शिखर सम्मेलन को दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित करने वाले एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों नेता रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस वार्ता को द्विपक्षीय संबंधों का एक नया शुरूआती बिंदु करार दिया है जो एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने के सही रास्ते को खोजने के प्रयासों को दशार्ता है।</p>
<p><strong>चीन-अमेरिका सहयोग पर वांग यी का बयान, एक साथ चल सकते हैं दोनों लक्ष्य</strong></p>
<p>विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग शिखर सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि इस बैठक ने दुनिया को संदेश दिया है कि चीनी राष्ट्र का पुनरुद्धार और ह्यअमेरिका को फिर से महान बनानाह्ण(मागा) एक साथ चल सकते हैं और दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में सहायक होकर पूरी दुनिया का कल्याण कर सकते हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा: अमीरात की सफल यात्रा के बाद नीदरलैंड रवाना हुए मोदी, बोले-यूएई के संक्षिप्त लेकिन अत्यंत परिणामोन्मुखी दौरे का समापन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई की अपनी यात्रा को अत्यंत परिणामोन्मुखी बताया। $5 बिलियन के निवेश और ऊर्जा, रक्षा एवं तकनीक में हुए समझौतों से रणनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। अबू धाबी में सफल वार्ता के बाद, पीएम अब अपनी चार देशों की यूरोपीय यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड पहुंचेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modis-visit-to-netherlands-modi-left-for-netherlands-after/article-153963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-niderland1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात की संक्षिप्त यात्रा के समापन के बाद शुक्रवार को चार यूरोपीय देशों की यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड रवाना हो गये। अमीरात की अपनी यात्रा को सार्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की समग्र रणनीतिक साझेदारी को नयी गति मिलेगी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा , "यूएई के संक्षिप्त लेकिन अत्यंत परिणामोन्मुखी दौरे का समापन। मैंने अपने भाई, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, के साथ भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर व्यापक चर्चा की। मुझे विश्वास है कि इस दौरे के परिणाम हमारी मित्रता को और मजबूत करेंगे और विकास और समृद्धि में योगदान देंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूएई की भारत में पांच अरब डालर के निवेश की घोषणा से दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा," इस यूएई दौरे के दौरान ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना, शिपिंग और उन्नत तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमुख समझौतों को भी अंतिम रूप दिया गया, जिससे भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली। एक अन्य महत्वपूर्ण विकास में, यूएई ने भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की, जो आर्थिक संबंधों को और गहरा करेगा।" उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी चार यूरोपीय देशों की यात्रा से पहले अमीरात की संक्षिप्त यात्रा पर आये थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:50:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का यूएई का दौरा: राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद से की बात, पांच अरब डॉलर का होगा निवेश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ऐतिहासिक रही, जहाँ यूएई ने भारत में $5 बिलियन के निवेश की घोषणा की। ऊर्जा, रक्षा, शिपिंग और सुपर कंप्यूटर समेत 6 प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। यह निवेश भारतीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और ऊर्जा सुरक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-visit-to-uae-president-mohammed-bin-zayeds-talk/article-153956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi4.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत में पांच अरब डालर के निवेश की घोषणा की है इसके अलावा दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, जहाजरानी और सुपर कंप्यूटर सहित छह क्षेत्रों में सहयोग के समझौते किये हैं। शुक्रवार सुबह अमीरात की संक्षिप्त यात्रा पर पहुंचे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद अल नहयान के साथ शिष्टमंडल स्तर की और द्विपक्षीय वार्ता की जिसके बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये ।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा, व्यापार और निवेश, समुद्री अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र जिसमें फिनटेक शामिल है, रक्षा और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। प्रधान मंत्री मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों और इसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>दोनों पक्षों ने ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना जिसमें जहाजरानी भी शामिल है, और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों का भी आदान-प्रदान किया। इससे भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को और गति मिलेगी। एक महत्वपूर्ण कदम में यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है जिससे भारतीय बाजारों और अवसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा देश में रोजगार के अवसर बढेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:55:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात : अमेरिका-चीन संबंधों में 'नये दौर' का संकेत, इन अहम मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐतिहासिक मुलाकात हुई। शी ने ताइवान को 'रेड लाइन' बताते हुए कड़ी चेतावनी दी, लेकिन संबंधों को 'स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' का नया दौर भी कहा। व्यापार, AI और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ दोनों महाशक्तियाँ आपसी तनाव कम करने की कोशिश में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-jinping-meeting-signals-a-new-era-in-us-china-relations-discussion/article-153831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों के उभरते चरण को अधिक स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा का 'नया दौर' करार दिया है। साथ ही जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों में सबसे संवेदनशील और खतरनाक मुद्दा करार दिया है। चीन के राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के शुरुआत में की। वर्ष 2017 के बाद चीन में यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी, जिसने उन चर्चाओं की दिशा तय कर दी, जिनका मुख्य केंद्र रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा होने की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर तनाव का माहौल है। </p>
<p>ईरान में जारी संघर्ष, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा शामिल है। चर्चा के लिए मेज पर रखे गये प्रमुख मुद्दों में व्यापार और टैरिफ को स्थिर करना, अमेरिकी बाजारों तक चीन की पहुंच और चीन में अमेरिकी कंपनियों का विस्तार, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, चीन के इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात और वैश्विक ऑटो उद्योग पर इसका प्रभाव तथा ऊर्जा सुरक्षा और ईरान के तेल निर्यात जैसे विषय शामिल हैं। </p>
<p>ईरान के तेल निर्यात के मामले में चीन का काफी प्रभाव है और इस मुद्दे पर दोनों महाशक्तियां अपनी भूमिका निभाएंगी। यह बैठक ईरान युद्ध की छाया में हो रही है, जिसमें दोनों देशों के नेता व्यापक भू-राजनीतिक समीकरणों और दोनों नेता महाशक्तियों के बीच 'नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' पर चर्चा करेंगे। जिनपिंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां दोनों देशों को स्थिरता और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ताइवान चीन के लिए सबसे अहम चिंता का विषय है और चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने इसे एक 'रेड लाइन' (सीमा रेखा) बताया जो दोनों देशों के संबंधों की भविष्य की दिशा तय कर सकती है। तनाव के बावजूद जिनपिंग ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच चीन और अमेरिका को एक-दूसरे का विरोधी बनने के बजाय साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि समग्र स्थिरता बनाये रखने के लिए दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाया जा सकता है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों ने मध्य-पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मार्गों में आ रही बाधाओं पर भी अपने विचार साझा किये। ट्रंप अपने साथ वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिकी व्यापार जगत के दिग्गजों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर आये थे, जो संभावित निवेश और व्यापारिक समझौतों पर उनके विशेष ज़ोर का संकेत था। इस प्रतिनिधिमंडल में उनके मंत्रिमंडल और आर्थिक टीम के प्रमुख सदस्य शामिल थे, जो इस शिखर सम्मेलन के भारी आर्थिक महत्व को दर्शाता है।</p>
<p>जिनपिंग के साथ हालांकि सार्वजनिक रूप से उपस्थित रहने के दौरान ट्रंप ने ताइवान के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवालों का सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होता है, जबकि टकराव से दोनों को ही नुकसान पहुंचता है। ट्रंप ने आर्थिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के संबंधों को लेकर आशावादी दृष्टिकोण व्यक्त किया। अब दोनों नेता बंद दरवाज़ों के पीछे आपसी बातचीत (गोपनीय वार्ता) के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। आने वाले दिनों में उनके बीच और भी कई बैठकें, राजकीय कार्यक्रम और आधिकारिक भोज आयोजित किए जाने हैं। अभी तक हालांकि किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं की गयी है, फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष अपने संबंधों में स्थिरता लाने एवं तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। यह दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:29:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीनी विदेश मंत्रालय का दावा: मतभेदों को दूर कर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार, वैश्विक शांति और विकास के मुद्दों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजing यात्रा से पहले चीन ने समानता और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग का हाथ बढ़ाया है। दोनों नेता दुर्लभ खनिज (Rare Earth) निर्यात और वैश्विक स्थिरता पर चर्चा करेंगे। हालांकि, चीन ने ताइवान हथियार बिक्री और जिमी लाई मामले को अपना आंतरिक मुद्दा बताते हुए कड़ा रुख बरकरार रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinese-foreign-ministry-claims-ready-to-overcome-differences-and-increase/article-153708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजकीय यात्रा से पहले बुधवार को कहा कि वह समानता, आपसी सम्मान और साझा लाभ के आधार पर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को दूर करने के लिए तैयार है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि चीन 'परिवर्तनशील और अस्थिर दुनिया' में अधिक स्थिरता और निश्चितता लाने के लिए अमेरिका के साथ काम करने का इच्छुक है। गुओ ने कहा, "चीन समानता, सम्मान और आपसी लाभ की भावना के साथ सहयोग का विस्तार करने और मतभेदों को प्रबंधित करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।" प्रवक्ता ने कहा कि चीन ट्रंप की यात्रा का स्वागत करता है, जिसके दौरान दोनों देशों के नेता चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ वैश्विक शांति और विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर 'गहन विचारों का आदान-प्रदान' करेंगे।</p>
<p>नेताओं के बीच आगामी बैठक के दौरान चीन और अमेरिका द्वारा दुर्लभ मृदा पदार्थ (रेयर अर्थ मैटेरियल) के चीनी निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करने वाले एक अस्थायी समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। हालांकि, इस संभावित विस्तार के बावजूद, चीन अभी भी कुछ प्रमुख सामग्रियों के निर्यात को सीमित कर रहा है जो रक्षा और उच्च-तकनीकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। गुओ ने ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करते हुए दोहराया कि इस मुद्दे पर चीन का रुख 'स्थिर और स्पष्ट' बना हुआ है।</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप द्वारा बातचीत के दौरान मुद्दा उठाए जाने पर चीन हांगकांग के मीडिया उद्यमी जिमी लाई की रिहाई पर विचार करेगा, गुओ ने इस सुझाव को खारिज कर दिया और मामले को चीन का आंतरिक मामला बताया। गुओ ने कहा, "लाई ची-यिंग हांगकांग को हिला देने वाले दंगों के पीछे मुख्य साजिशकर्ता और अपराधी हैं।" उन्होंने कहा कि चीनी सरकार कानून के अनुसार मामले को संभालने में हांगकांग के न्यायिक अधिकारियों का दृढ़ता से समर्थन करती है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप की चीन यात्रा बुधवार से शुरू होकर 15 मई तक जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:23:08 +0530</pubDate>
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