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                <title>अब नहीं होगी रोड लाइटों में भ्रम की स्थिति, केडीए लगा रहा नई लाइटें</title>
                                    <description><![CDATA[लाइट खराब होने पर निगम और केडीए के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं रहती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-more-confusion-regarding-streetlights/article-152613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में हजारों की संख्या में रोड लाइटें तो लगी हुई हैं लेकिन उन लाइटों के खराब या बंद होने पर सही करने में नगर निगम व केडीए में भ्रम की स्थिति रहती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।शहर में आधा एरिया नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में हैं और आधा एरिया कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में। पुराना शहर अधिकतर नगर निगम क्षेत्र में आता है और नए कोटा शहर का अधिकतर क्षेत्र केडीए में आता है। शहर में वैसे तो मेन रोड व डिवाइडर साइट पर अधिकतर लाइटें केडीए ने लगाई हैं और गलियों व वार्डों में नगर निगम ने। लेकिन कई इलाके ऐसे हैं जहां कहीं निगम ने तो कहीं केडीए ने सुविधा की दृष्टि से लाइटें तो लगा दी लेकिन उनके खराब होने पर दोनों ही विभागों में भ्रम की स्थिति रहती है कि लाइट किस विभाग की है। उसे कौन सही करेगा। ऐसे में शिकायतकर्ता से वहां की लोकेशन व फोटो समेत कई तरह की जानकारी ली जाती है। उसके आधार पर तय होता है कि लाइट किस एरिया में है और वह किसके अधिकार क्षेत्र में है। जिससे उन बंद व खराब लाइटों को सही करने में काफी समय तक लग जाता है। लेकिन अब इस भ्रम की स्थिति को समाप्त किया जा रहा है।</p>
<p><strong>केडीए लगा रहा नई लाइटें</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) ललित मीणा ने बताया कि दोनों विभागों के बीच की इस भ्रम वाली स्थिति को समाप्त किया गया है। इसके लिए अब केडीए की ओर से जो भी नई रोड लाइटें लगाई जा रही हैं वह गोल्डन रंग की है। खम्बे तो एक जैसे हो सकते हैं लेकिन उनके ऊपर की तरफ लाइटें व आसपास का रंग गोल्डन रखा गया है। जिससे दूर से ही देखकर पता चल जाएगा कि ये लाइटें केडीए की है। साथ ही इन पर ऊपर की तरफ केडीए लिखा भी गया है।</p>
<p><strong>चोरी होने पर भी पहचान होगी आसान</strong><br />अधिशाषी अभियंता मीणा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में रोड लाइटें चाहे वे सजावटी हों या सामान्य चोरी हो गई है। लाइटें चोरी होने के बाद भी पता नहीं चलता कि ये लाइटें किसकी हैं। लेकिन इन लाइटों पर केडीए लिखा गया है। जिससे इनके चोरी होने पर आसानी से पहचान हो सकेगी कि ये लाइटें केडीए की है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार एसपी ऑफिस चौराहे से लेकर स्टेशन की तरफ जाने वाले रास्ते, जेडीबी कॉलज रोड, नयापुरा समेत कई जगह से तो रोड लाइटें चोरी हो चुकी हैं। यहां तक कि डेकोरेटिव लाइटें तक चोरी हो गई है। जिससे लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़कों पर अंधेरा ही छाया हुआ है।</p>
<p><strong>शहर में ऐसी 500 लाइटें लगाई</strong><br />केडीए अभियंता ने बताया कि शहर में अब नई लाइटें ही लगाई जा रही है। अब तक ऐसी करीब 500 रोड लाइटें लगाई जा चुकी हैं। जिनमें रायपुरा से कैथून रोड, के. पाटन तिराहे से जैन मंदिर तक और बारां रोड समेत कई जगह पर इस तरह की लाइटें लगाई गई हैं।</p>
<p><strong>निगम की करीब 56 हजार लाइटें</strong><br />इधर नगर निगम के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) सचिन यादव ने बताया कि कोटा शहर में नगर निगम की करीब 56 हजार रोड लाइटें लगी हुई हैं। समय-समय पर इन लाइटों के बंद व खराब होने पर मेंटेनेंस की जा रही है। फिलहाल शहर में अधिकतर रोड लाइटें एलईडी ही हैं। जिससे कम से कम बिजली में अधिक से अधिक रोशनी लोगों को मिल सके।</p>
<p><strong>एसपी को लिखा है पत्र</strong><br />कोटा आने के बाद अधिकतर यही सुनाई में आता है कि रोड लाइटें अधिक चोरी हो रही है। कई जगह से लाइटें चोरी होने के मामले में तो पुलिस को फोटो व वीडियो तक उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। यहा तक कि एसपी को भी पत्र लिखकर लाइटें व अन्य सामान चोरी के मामले में कार्रवाई करने के संबंध में कहा गया है। अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।<br /><strong>- बचनेश कुमार अग्रवाल, आयुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:12:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उतर वार्ड 47- कॉलोनियों में बने ऊंचे डिवाइडर व आवारा पशुओं से परेशान रहवासी, ओवरफ्लो हो रही नालियां, घरों के आगे झूल रहे तारों की समस्या </title>
                                    <description><![CDATA[खुले नाले व कचरा संग्रहण में हो रही लापरवाही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-47---residents-are-troubled-by-high-dividers-and-stray-animals-in-colonies--overflowing-drains--and-dangling-wires-in-front-of-homes/article-132478"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम के उतर वार्ड 47 में बदहाली का आलम छाया हुआ है। वार्ड की अधिकतर कॉलोनियों में नालियां ओवरफ्लो हो रही है। बरसात के दिनों में पानी नालियों के बाहर भी आ जाता है।  वहीं वार्ड में आवारा कुत्तों से भी राहगीर व रहवासी परेशान है। रात को वाहन चालकों के पीछे दौड़ते रहते है जिससे चोटिल होने कीआशंका बनी रहती है। वार्ड में भोलेनाथ मंदिर के पास नाला खुला हुआ तथा जाम हो रखा है। वहीं कई कॉलोनियों में तार नीचे की तरफ झूल रहे है। वहीं मुख्य सड़कों पर गायें बेसहारा घूम रही है। रहवासियों का कहना है कि वार्ड पार्षद को इस समस्या की तरफ कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई। वहीं कचरा गाड़ी के आने-जाने का कोई निर्धारित समय नहीं होने से स्थिति और खराब हो जाती है। गाड़ी के साथ हेल्पर भी नहीं आते, जिससे कचरा उठाने में बेहद लापरवाही देखने को मिल रही है।</p>
<p><strong>भोलेनाथ मंदिर के पास खुला और जाम नाला</strong><br />वार्ड के भोलेनाथ मंदिर क्षेत्र में एक बड़ा नाला वर्षों से खुला पड़ा है। यह नाला जाम होकर बदहाल स्थिति में है। रात के समय राहगीरों को यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि खुला नाला दुर्घटना की आशंका पैदा करता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह नाला लोगों की सेहत और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>घरों के आगे झूलते तार</strong><br />कई कॉलोनियों में बिजली के तार काफी नीचे झूल रहे हैं। यह स्थिति बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार बिजली विभाग को इस बारे में सूचना दी जा चुकी है, लेकिन सुधार के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलता है। गर्मी और बरसात के मौसम में इन तारों से हादसे होने की संभावना और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>नालियों में साफ-सफाई का अभाव</strong><br />वार्ड की सबसे गंभीर समस्याओं में नालियों का ओवरफ्लो होना प्रमुख है। कई कॉलोनियों में नालियां महीनों से साफ नहीं हुई हैं, जिसके कारण गंदा पानी बाहर बहने लगता है। बरसात के दौरान यह जलजमाव घरों के बाहर तक पहुंच जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बदबू, मच्छर और संक्रमण की आशंका हर समय मंडराती रहती है।</p>
<p><strong>वार्ड एरिया</strong><br />सम्पूर्ण चौपड़ा फार्म, मानसिंह बिल्डिंग, राधाकृष्ण मंदिर, आर्य समाज, न्यू कविता स्कूल, शंकर भवन का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>ये बोले वार्डवासी</strong><br />गलियों में घूम रहे आवारा पशु कई सालों से यही समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन नगर निगम और जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। रहवासियों ने बताया कि साफ-सफाई, नालियों की व्यवस्था, बिजली के तारों का सुधार और आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए बार-बार शिकायतें दी गईं, परन्तु स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।   <br /><strong>   -लाला शर्मा, रहवासी</strong></p>
<p><strong>वार्ड में नहीं है बच्चों के खेलने का पार्क</strong><br />रहवासियों ने बताया कि बच्चों के खेलने के लिए पार्क का न होना है। आज की जीवनशैली में जहां बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खुली जगहें आवश्यक हैं, वहीं इस वार्ड में किसी भी कॉलोनी में पार्क उपलब्ध नहीं है। बच्चों को खेलने के लिए अन्य इलाकों में जाना पड़ता है। इस दौरान मुख्य सड़कों को पार करना पड़ता है, जो छोटे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। अभिभावक बताते हैं कि पार्क की कमी के कारण बच्चे घरों में कैद होकर मोबाइल और टीवी में व्यस्त रहने लगे हैं।    <br /><strong> -जीविका कुमारी, रहवासी</strong></p>
<p><strong>आवारा कुत्तों और गायों से बढ़ी परेशानी</strong><br />आवारा पशु भी लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बने हुए हैं। रात के समय आवारा कुत्ते राहगीरों और वाहन चालकों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। कई बुजुर्ग और बच्चे इनके कारण घायल भी हो चुके हैं। साथ ही मुख्य सड़कों पर बेसहारा घूमती गायें भी यातायात में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। वाहन चालकों के लिए अचानक सड़क पर आ जाने वाली गायें अक्सर खतरा बन जाती हैं। रहवासी नगर निगम से बार-बार शिकायत कर चुके हैं, परन्तु स्थिति जस की तस बनी हुई है।          <br /><strong>-हरिराम, रहवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मैं कांग्रेस का पार्षद हूं। हमारी सरकार जाने के बाद अधिकारियों ने हमारी बातों पर ध्यान देना लगभग बंद कर दिया, जबकि हमारे कार्यकाल में वार्ड में अनेक विकास कार्य कराए गए और सफाई व्यवस्था भी नियमित रूप से संचालित होती थी। अब जबकि हमारा कार्यकाल समाप्त हो चुका है, पद पर रहते हुए जैसी सक्रिय भूमिका निभा पाना संभव नहीं है, परंतु हम वार्ड हित के मुद्दों को उठाते रहेंगे।<br /><strong>- गोपालदास, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:26:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खतरनाक सफर: नेशनल हाइवे 27 पर मौत के गड्ढे, अव्यवस्था से बढ़ रहे हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[ अव्यवस्थित डिवाइडर और मवेशियों का जमावड़ा दुर्घटना का कारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/dangerous-journey--death-potholes-on-national-highway-27--accidents-increasing-due-to-chaos/article-126545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। कोटा-शिवपुरी नेशनल हाईवे 27 पर लगातार बढ़ती समस्याएं वाहन चालकों के लिए खौफनाक सफर का कारण बन रही हैं। खस्ताहाल सड़क, डिवाइडर में उगे पेड़-पौधे, गहरे गड्ढे और मवेशियों की मौजूदगी हाईवे को रोजाना खतरनाक बना रही है। कई वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी अब तक गंभीरता नहीं दिखा पाए हैं। </p>
<p><strong> गड्ढों से मौत कागढ़ बना हाईवे</strong><br />सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। वाहन चालक अक्सर गहरे गड्ढों में फंस जाते हैं या अचानक घूमते मवेशियों से टकराकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। हादसों की संभावना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।</p>
<p><strong>डिवाइडर में पेड़-पौधे, खतरे का कारण</strong><br />डिवाइडर में उगे पेड़-पौधों की कटाई महीनों से नहीं हुई। टहनियां सड़क पर झुक जाती हैं और अचानक वाहन चालकों के सामने आ जाती हैं। मवेशी भी इन्हीं पेड़ों के बीच छिपकर सड़क पर आ जाते हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया है।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों की चुप्पी</strong><br />लोगों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर मौन हैं। अब जनता उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।</p>
<p><strong> टोल वसूली लेकिन मरम्मत नहीं</strong><br />स्थानीय लोगों ने बताया कि टोल प्लाजा पर वसूली तो की जाती है, लेकिन मरम्मत व साफ-सफाई पर खर्च नहीं किया जाता। वाहन चालक भारत सिंह, राहुल, देवेंद्र, पवन, श्रीकृष्ण, अकरम खान, मूनब्बर खान ने कहा कि सड़क पर सुरक्षा संकेत बोर्ड भी नहीं लगे हैं।<br /> <br /><strong> दुर्घटनाओं का बढ़ता आंकड़ा</strong><br />कोटा से झांसी तक इस हाईवे पर प्रतिदिन दर्जनों दुर्घटनाएं होती हैं। कई हादसे जानलेवा साबित होते हैं। लोगों ने हाईवे विभाग के अधिकारियों से सड़क की मरम्मत, डिवाइडर की सफाई, संकेत बोर्ड लगाने और मवेशियों की रोकथाम की मांग की है।</p>
<p>कार्यकारी एजेंसी को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही हाईवे पर बनी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- उमाकांत मीणा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 14:59:20 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 11- स्थानीय रहवासी लगा रहे जनप्रतिनिधियों के चक्कर, जिम्मेदार अधिकारी मौन</title>
                                    <description><![CDATA[डिवाइडर बने बाधा, पार्क और सामुदायिक भवन का अभाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-11---local-residents-are-making-rounds-of-public-representatives--responsible-officials-are-silent/article-124772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)81.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के उत्तर कोटा वार्ड 11 समस्याओं का झाला बना हुआ है। वार्डवासियों के अनुसार गांधी कॉलोनी अधिकतर नाले खुले पड़े है। नालियों में पानी की निकासी सही नहीं होने पर ओवरफ्लो हो जाती है। सड़कों पर जलभराव हो जाताहै। वार्ड की गली नं. तीन में बारिश के दिनों पीछे की तरफ बने नाले के पानी से जलभराव की समस्या हो जाती है। वहां के निवासियों को रोजमर्रा की वस्तुएं लेने के लिए भी पानी में से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में तो पानी घरों में घुस जाता है। वार्ड की ली नं. 7 में बड़ा गड्डा होने के कारण रात्रि में आए दिन हादसे होते रहते है। राहगीर व वाहनचालकों को चोटिल होने का खतरा बना रहता है। सड़कों पर बने डिवाइडर ज्यादातर ऊंचे होने के कारण बाइक सवार व चौपहिया वाहनों को काफी दिक्कत आती है। वार्ड की कॉलोनियों में पार्क की भी व्यवस्था नहीं है और ना ही सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम के लिए सामुदायिक भवन भी बना हुआ नहीं है।</p>
<p><strong>वार्ड एरिया</strong><br />मण्डीपाडा चित्रेष नगर, महात्मा गांधी कॉलोनी, खारी बावडी, सुमन नगर, पार्वती पुरम, शिवालय विहार, श्रीजी विहार, रेल विहार कॉलोनी, कृषि फार्म का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>घर के बाहर सड़क पर होता है जलभराव</strong><br />वार्ड की शाहीना खान ने बताया कि बारिश के दिनों घर की बाहर सड़क पर तीन से चार फीट पानी भरने से रोजमर्रा के कार्य बाधित हो जाते है। इस बारे में जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत करवाया लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। घर के पास ही बह रहा नाला में इतनी गंदगी रहती है कि कई बार ओवरफ्लो होकर पानी सड़कों पर इकट्ठा हो जाता है। वहीं गली की ढलान भी नीचे की तरह होने से पानी घरों के अंदर घुस जाता है। इस वजह से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>वार्ड में नहीं है पार्क, सामुदायिक भवन</strong><br />स्थानीय निवासी अख्तर हुसैन ने बताया कि वार्ड में बच्चों के खेलने के पार्क भी नहीं है। धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के लिए सामुदायिक भवन भी नहीं है। बच्चों को खेलने के लिए अन्य वार्ड में बने पार्कों में जाना पड़ता है। वार्ड में नाले खुले पड़े है तथा मवेशियों का घिरने का डर बना रहता है।</p>
<p><strong>कॉलोनी में नालियां अवरुद्ध</strong><br />कॉलोनी की गली नं. 3 के निवासी मोहम्मद निसार व रामप्रताप ने बताया कि यहां हर वक्त नालियां अवरूद्ध रहती है। नालियों में पानी की निकासी व्यवस्था सही नहीं होने से पानी घरों के बाहर सड़क पर फैल जाता है। गंदे पानी से आए दिन दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। पार्षद भी 5 नं. गली में ही रहते है लेकिन वो कभी 3 नं. गली में झांकते तक नहीं है। बारिश के दिनों में हालत और ज्यादा खराब हो जाती है। सड़कों पर जलभराव होने से रूटिन काम भी प्रभावित हो जाते है।</p>
<p><strong>चूने वाले भट्टे बाबा मंदिर के चारों तरफ कचरे का अंबार</strong><br />कॉलोनीवासी निवासी आकाश वर्मा ने बताया कि यहां वर्षों पुराना मंदिर बना हुआ है। मंदिर की सार-संभाल नहीं होने से अव्यवस्थाओं का शिकार हो रखा है। मंदिर में दर्शन करने के बाद परिक्रमा तक नहीं लगा सकते है। परिक्रमा वाले परिसर में जंगली झाड़ियां उगी हुई है। मंदिर में बनी सीढिंयों पर बड़ी-बड़ी बेलों का झाल फैला हुआ है। मंदिर के सामने पड़े खाली प्लॉट कचरा प्वांइट बना हुआ है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे वार्ड में कोई समस्या नहीं है। हमारे वार्ड में नालियों की बढ़िया सफाई होती है। वार्ड को लेकर स्थानीय निवासियों को कोई शिकायत नहीं है।<br /><strong> -रचना शर्मा, वार्ड पार्षद 11</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Aug 2025 14:41:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 68 - ऊंचे डिवाइडर, खुले नालों में गिरते पशु </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य सड़कों पर घूमते रहते पशु राहगीरों की बने मुसीबत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-68---high-dividers--animals-falling-in-open-drains/article-123910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(5)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा उत्तर नगर निगम वार्ड 68 में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इस वार्ड में नाले भी खुले पड़े हुए है। गार्डन की दीवारें भी क्षतिग्रस्त है। रहवासियों के अनुसार खुले नाले में कई बार पशु भी गिरकर घायल भी हुए है। यहां की मुख्य सड़कों के डिवाइडर भी बहुत ऊंचे है, जिसके चलते राहगीरों को काफी परेशानी होती है। यहां सीवरेज के चैम्बर व सड़क का लेवल सही नहीं है। इस वार्ड में पानी की भी समस्या है। कम दबाव के चलते घरों में पानी के लिए मोटरों का सहारा लेना पड़ता है। यहां के पार्षद भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि खुले नाले व गार्डन की टूटी हुई दीवार के लिए केडीए सचिव, नगर निगम महापौर को कई बार अवगत करवाया लेकिन समस्या जस की तस है। सामाजिक कार्यक्रम के लिए इस वार्ड में सामुदायिक भवन भी नहीं है। हनुमान मंदिर के थोड़ा आगे कचरा प्वाइंट भी बना हुआ है। यहां बनी नालियों की साफ-सफाई के अभाव के चलते सारे दिन दुर्गन्ध का सामना करना पड़ता है। वार्डवासियों के अनुसार यहां मुख्य सड़क पर डिवाइडर बड़े बने हुए है। वहीं कॉलोनियों में खुले नाले होने से पशुओं के गिरने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बारिश के दिनों में नालियां ओवर फ्लो हो जाती है। बापू बस्ती क्षेत्र में कचरा प्वाइंट व कई आवाराद पशु घूमते रहते है। कचरा प्वाइंट पर कचरा इधर-उधर बिखरा रहता है। रहवासियों ने कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत भी करवाया है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />इस वार्ड में शीतला माता मंदिर, गोरी आश्रम, हरिजन बस्ती एवं बापू बस्ती का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>खुले पड़े बिजली के तार, पेयजल संकट</strong><br />वार्ड की कुछ कॉलोनियों में स्विच बॉक्स खुले है। वहीं बिजली के तार भी खुले है। इस कारण हादसे की आशंका भी बनी रहती है। कुछ कॉलोनियों में पेयजल का संकट भी है। यहां कम दबाव से पेयजल आपूर्ति होने लोग काफी परेशान है। <br /><strong>- सुरज केवट, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>खाली प्लॉट बन रहे कचरा पाइंट</strong><br />खाली पड़े प्लॉट कचरा प्वांइट बने हुए है। यहां कचरे की गाड़ी तो रोजाना आती है लेकिन समय निर्धारण नहीं है। वार्डवासी खाली पड़े प्लॉटों में भी कचरा फेंक देते हैं। बारिश के दिनों दुर्गन्ध की समस्या ज्यादा रहती है।<br /><strong>- गंगा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>नहीं होती नियमित सफाई</strong><br />यहां नाले व नालियां कचरे से अटे पड़े है। इस कारण निकासी व्यवस्था भी सही नहीं है। पानी आगे नहीं जाने से कई बार नालियां ओवर फ्लो भी हो जाती है। यहां नाले खुले होने से कई बार पशु भी गिर जाते है।<br /><strong>-अनिता, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड की समस्याओं के लिए कई बार केडीए सचिव व नगर निगम महापौर से पत्राचार भी किया था। कई बार अधिकारी मौके पर भी आकर गए है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। वार्ड में सामुदायिक भवन भी नहीं है। जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को सुनते है।      <br /><strong>- मोहनलाल मेघवाल, पार्षद  कांग्रेस, वार्ड 68 </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 15:48:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 49- सड़कों पर बने बडे डिवाइडर दे रहे दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलोनी में सफाई भी नहीं होती जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-49--big-dividers-on-the-roads-are-causing-pain/article-123543"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 49 में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। वार्ड में विकास कार्य तो हुए लेकिन आधे अधूरे, जिससे वार्ड वासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बापू बस्ती में खुले पड़े नालों व कचरा पाइंट से वार्डवासी परेशान हो रहे हैं। वार्ड में खाली प्लाट कचरा पाइंट बने हुए है। वार्ड क्षेत्र में आने वाली स्वीट होम कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि अगर एक बार लाइट चली जाती है तो घंटों तक नहीं आती है, वही कॉलोनी में सफाई भी नहीं होती जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />विमल किराना स्टोर, हनुमान मंदिर, मरडिया, रामचन्द्रपुरिया, स्वीट होम कॉलोनी एवं बापू बस्ती का क्षैत्र शामिल है।</p>
<p><strong>नहीं होती वार्ड में सफाई</strong><br />नाले खुले पड़े हुए है, सफाईकर्मी भी रोजाना वार्ड में नही आते। पहले तो एक दिन में तीन बार सफाई होती थी, लेकिन अब तो तीन दिन में एक बार ही वार्ड में सफाई हो रही है।<br /><strong>-कैला देवी, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>पानी और लाइट की परेशानी</strong><br />वार्ड क्षेत्र में बनी स्वीट होम कॉलोनीवासियों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। कॉलोनी में एक बार लाइट जाने के बाद घंटों तक नहीं आती, वहीं पानी के आने जाने का समय भी नहीं है, जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-बृजमोहन बाई, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में कई विकास कार्य करवाए गए है। कुछ काम अधूरे रह गए, जिसके लिए मैने कई बार निगम के अधिकारियों को लिखित रूप से कई बार अवगत करवाया, लेकिन राजनीतिक भेदभाव के कारण वार्ड के विकास कार्य रूके हुए है। जिसका खामियाजा वार्डवासियों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>-बलविन्दर सिंह, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 15:20:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पालिका का मामला : लाखों के डिवाइडर बने कचरा पात्र, शिवनगरवासियों ने सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[ जिसके कारण आवागमन के दौरान राहगीरों एवं वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/municipality-s-matter--dividers-worth-lakhs-have-become-garbage-containers/article-115953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(4)15.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगर पालिका प्रशासन द्वारा शहर में आवागमन को सुगम बनाने और दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए शहर की मुख्य सड़क पर मेगा हाइवे लाखेरी बायपास तिराहे से शिव नगर हायर सैकंडरी स्कूल तक और कोटा रोड बायपास तिराहे से वेरा हाउस तक सड़क के बीच बने डिवाइडर के बीच में पौधरोपण के लिए छोड़ी गई जगह में पालिका प्रशासन पौधे लगाना ही भूलने के कारण डिवाइडर अब कचरा पात्र बने हुए हैं। जिसके कारण आवागमन के दौरान राहगीरों एवं वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  भाजपा नेता ललित मीणा, पूर्व पार्षद गोपाल पांचाल ने बताया कि पालिका प्रशासन से डिवाइडर में डाले जा रहे कचरे पर पाबंदी लगाने और पौधरोपण करवाने की मांग की है, जिससे आमजन को दुर्गंध से निजात मिले और शहर का सौन्दर्यकरण भी बढ़े।</p>
<p><strong>पौधे लगते तो निखरता सौंदर्य</strong><br />शहरवासियों का कहना है कि पालिका प्रशासन द्वारा बढ़ते आवागमन और दुर्घटनाओं को देखते हुए शहर की मुख्य सड़क की सड़क की चौड़ाई बढ़ाई गई। वहीं सड़क के बीच डिवाइडर बना दिए जाने से आवागमन सुगम हो गया। सौंदर्यकरण को बढ़ावा देने के लिए डिवाइडर बनने के दौरान बीच में पौधरोपण के लिए जगह छोड़ी गई थी। इनमें रंग बिरंगे फूलदार पौधे लगाएं जाने पर शहर की सुंदरता निखर जाती, लेकिन सौंदर्य बढ़ने की जगह अब गंदगी पनप रही है।</p>
<p><strong>कई डिवाइडर क्षतिग्रस्त</strong><br />पालिका प्रशासन द्वारा सड़क के बीच बनाए गए डिवाइडर आवागमन के साथ शहर ही सौंदर्यकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनवाए गए थे,लेकिन डेढ़ साल बाद भी इनमें पौधे नहीं लगाए है। वहीं कार्य पूरा होने से पहले ही डिवाइडर कई जगह पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।</p>
<p><strong>डिवाइडर में डाल रहे कचरा</strong><br />स्थानीय लोग सड़क के दोनों ओर स्थित मकानों, दुकानों से रोजाना कचरा इकट्ठा कर डिवाइडर में डाल रहे हैं। यहां तक कि पालिका के सफाई कर्मचारी भी डिवाइडर में कचरा डाल रहे हैं। कचरे से भरने के बाद लोग इस कचरे में आग लगा देते हैं, जिससे खतनाक धुंआ उठने से कई प्रकार की बीमारी होने का डर रहता है, साथ ही वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। दुर्गा लाल मीणा ने बताया कि सड़क किनारे के दुकानदार दुकान की सफाई के बाद कचरा डिवाइडर के बीच खाली पड़ी जगह में भर देते हैं।</p>
<p><strong>इधर शिव नगरवासियों ने सौंपा ज्ञापन 8 दिन का दिया अल्टीमेटम</strong><br />कस्बे के शिवनगर में डिवाडर कचरा पात्र बन गए हैं। इनसे उठती बदबू से लोग परेशान हैं। शुक्रवार को शिवनगर वासियों ने पालिका कार्यालय पहुंचकर ईओ को ज्ञापन सौंपा। जिसमें डीवाडर से कचरा हटवाकर इसमें मिट्टी भरवाने की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि एक साल पहले पालिका प्रशासन ने सीनियर सैकेंडरी स्कूल से बाईपास तक सड़क के बीचोंबीच डिवाडर बनवाए थे। योजना थी कि इनमें मिट्टी भरकर पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी मिट्टी नहीं भरी गई। स्थानीय लोगों ने इनमें कचरा डालना शुरू कर दिया। अब ये डिवाडर कचरा पात्र बन चुके हैं। पालिका के सफाईकर्मी नियमित सफाई नहीं करते। इससे डिवाडर में गंदगी जमा हो गई है। कचरे के सड़ने से दिनभर बदबू आती है। सड़क किनारे रहने वाले और सुबह-शाम टहलने वाले लोग परेशान हैं। कई बार लोग कचरे में आग लगा देते हैं। इससे निकलने वाला धुआं सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है। मवेशी दिनभर डिवाडर में पड़ा पॉलीथिन खा जाते हैं, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है। पूर्व पार्षद गोपाल पांचाल, गिरिराज पांचाल, ललित मीना, लखन पांचाल, भवानी शंकर पांचाल और रामराज गुर्जर ने बताया कि डिवाडर कई जगह से टूट चुके हैं। अगर निर्माण के समय ही इनमें मिट्टी भर दी जाती तो आज हजारों पेड़-पौधे की हरीयाली से जगमग होने यह मार्ग सुंदर दिखता। लेकिन अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर 8 दिन में डिवाडर से कचरा हटाकर मिट्टी नहीं भरी गई तो पालिका प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेंदारी प्रशासन की होगी।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />हफ्ते भर में डिवाइडरों कि सफाई करवाकर मिट्टी भरवा दी जाएगी, उसके बाद फूलदार पौधे लगवाएंगे। <br /><strong>- रवि दाधिच ई.ओ. नगरपालिका, कापरेन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 14:41:43 +0530</pubDate>
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                <title>शॉर्टकट के दांव पर जिंदगी की डोर, डिवाइडर पार कर रोंग साइड चल रहे वाहन चालक</title>
                                    <description><![CDATA[शहर से गुजर रहे नेशनल हाइवे पर वाहन चालक शोटकर्ट के फेर में अपनी जांन दांव पर लगा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-at-stake-in-shortcuts/article-113519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर से गुजर रहे नेशनल हाइवे पर वाहन चालक शोटकर्ट के फेर में अपनी जांन दांव पर लगा रहे हैं। हाइवे के डिवाइडर सड़क की ऊंचाई के बराबर है। ऐसे में बाइक सवार व ट्रैक्टर चालक  वाहनों को बीच रास्ते में ही डिवाइडर पर चढ़ाकर गलत दिशा में आते हुए बीच सड़क पर आ जाते हैं। जिससे सामने से आने वाले वाहनों से टकराकर हादसे का शिकार होने का खतरा बना रहता है। एनएच-27, बारां फोरलेन तथा कोटा बाइपास पर इस तरह के नजारे आए दिन देखने को मिल रहे हैं। जबकि, एनएचआई द्वारा दिनभर हाइवे पर पेट्रोलिंग  करने की बात कही जाती है, जिसकी सच्चाई जानने  दैनिक नवज्योति एनएच-27 पर पहुंची तो वहां करीब एक घंटे तक कोई पेट्रोलिंग टीम नजर नहीं आई। हालांकि, हाइवे पर जमा धूल-मिट्टी को साफ करते संवेदक कर्मचारी जरूर मिले।  </p>
<p><strong>हाइवे पर जगह-जगह बने कट</strong><br />रोजड़ी निवासी राधेश्याम, मनोहर लाल, मुरली प्रजापति ने बताया कि बारां फोरलेन व कोटा बाइपास पर कई जगहों पर लोगों ने अनाधिकृत रूप से कट बना रखे हैं। जहां से लोग एक लेने से दूसरी लेन में जाने के लिए आसानी से डिवाइडर पार कर लेते हैं। जिसमें हर पल जान का जोखिम बना रहता है। जबकि, डिवाइडर में लगे पौधों की सार-संभाल के लिए एनएचएआई की टीम आती है, जिनसे कट बंद करने की मांग की लेकिन ध्यान नहीं दिया। </p>
<p><strong>बाइक, कार व ट्रैक्टर-ट्रॉली तक डिवाइडर कर रहे क्रोस </strong><br />दाढ़देवी की तरफ से गुजर रहे एनएच-27 पर वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में रोंग साइड में चलते हैं। यहां बाइक सवार ही नहीं, ट्रैक्टर चालक भी वाहनों को डिवाइडर से वाहनों को कूदा रहे हैं। दाढ़देवी की तरफ से हैंगिंग ब्रिज की ओर जाने वाले वाहनों से टकराने का खतरा बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>इन प्वाइंट्स पर डिवाइडरों से कुदा रहे वाहन</strong><br />कोटा यूनिवर्सिटी के पीछे गुजर रहे बारां फोरलेन पर  प्रतिदिन बाइक सवार हाइवे की एक लेन से दूसरी लेन में जाने के बीच डिवाइडर क्रोस करते हैं। वहीं, रोजड़ी इलाके के बाशिंदे वाहनों के साथ डिवाइडर  पार कर कोटा विश्वविद्यालय की तरफ जाते हैं। जबकि, फोरलेन की दोनों साइड़ों से बड़े वाहन स्पीड से गुजरते हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।  रोजड़ी क्षेत्र के बाशिंदों ने एनएचएआई अधिकारियों से डिवाइडर कट बंद करने की मांग की थी लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। </p>
<p><strong>न कट बंद करवाए न डिवाइडर ऊंचे करवाए</strong><br />हाड़ौती व सुमन कॉलोनी के बाशिंदे अखिलेश मालव, राधेश्याम, दयाराम गुर्जर बताते हैं, बारां फोरलेन पर  विभिन्न जगहों पर कट बने हुए हैं। वहीं, हाइवे की सड़क से डिवाइडर की ऊंचाई न के बराबर है। जबकि, पौधों के मेंटिनेंस को आने वाली एनएचएआई की टीम को कई बार अवगत करा चुके हैं। इसके  बावजूद कोई सुधार नहीं करवाया गया। वहीं, एनएचएआई द्वारा पेट्रोलिंग टीम सप्ताह में एक या दो दिन ही यहां से गुजरती है। नियमित पेट्रोलिंग नहीं होती। </p>
<p><strong>डिवाइडरों पर लगेगी लोहे की जालियां</strong><br />एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रोड सेफ्टी के तहत हाइवे के ऐसे प्वाइंट चिन्हित कर लिए हैं। जहां लोहे की जालियां लगाई जाएगी। इसके लिए गत माह टैंडर भी किए जा चुके हैं। जुलाई में टैंडर खुलने के साथ ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>रात को हाइवे पर अंधेरा</strong><br />क्षेत्रवासियों का कहना है कि नेशनल हाइवे पर लाइटें नहीं होने से अंधेरा रहता है। ऐस में दुपहिया वाहन चालकों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एनचए-27 पर कई बार हादसे भी हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों ने यहां रोड लाइटें लगवाने की मांग भी कर चुके हैं। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जाता है। वाहन चालकों से टोल टैक्स वसूलने के बाद भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जाती। इससे लोगों में रोष है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />इस संबंध में कोटा में हमारे अधिकारियों से बात की जा सकती है। यदि, कोई ईश्यू हो तो हमें बता दीजिए, समाधान करवा देंगे।<br /><strong>- प्रदीप कुमार, रीजनल आॅफिसर एनएचएआई जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 May 2025 15:33:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राष्ट्रीय राजमार्गों पर जगह-जगह हादसों को न्यौता</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति की टीम ने रविवार को शहर के नया नोहरा से हैंगिंग ब्रिज तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 पर ग्राउंड रियालिटी को चैक किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/invitation-of-accidents-at-many-places-on-national-highways/article-91352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस 1 - </strong>इसी साल मार्च माह में एनएच 27 पर बारां में बटावदा गांव के पास आवारा मवेशी से कार टकरा गई थी। जिसमें सवार परिवार के आठ जनों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं 6 जन घायल हो गए थे। इनमें से भी 5 गंभीर घायलों को कोटा रैफर करना पड़ा था।</p>
<p><strong>केस 2 - </strong>वर्ष 2023 में बारां निवासी सानिध्य कुमरा अपने दोस्तों के साथ कोटा से बारां जा रहे थे। जहां सीमलिया टोल नाके के पास गड्ढे के कारण उनकी कार अनियंत्रित हो जाने से बड़ा हादसा हो गया और सानिध्य की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं तीन दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए थे।</p>
<p><strong>केस -</strong> पिछले साल 11 जून को भी एनएच 27 पर एक जीप अनियंत्रित होकर हाई वे से नीचे उतर गई थी। जिसमें तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। साथ ही चार लोग गंभीर रूप से घयल हो गए थे। जांच में हादसे का कारण गड्ढे से जीप को बचाने के दौरान वाहन अनियंत्रित होेना पाया गया था।</p>
<p>राष्ट्रीय राजमार्गों को देश की नब्ज कहा जाता है, इन मार्गों से होकर ही देश का अधिकतम ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई का कार्य किया जाता है। अगर इन मार्गों पर खड्डे या अन्य कोई बाधाएं आती हैं तो वाहनों चालाकों को परेशानी होना निश्चित है। कोटा में निकल रहे दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी यही स्थिति है जहां कई स्थानों पर या तो डिवाइडर टूटे हुए हैं या साइड वाली रेलिंग तोड़कर लोगों ने रस्ते बना लिए हैं। जिसके चलते कई बार गंभीर हादसे हो चुके हैं। वहीं हाई वे होने के कारण इन मार्गों पर वाहनों की गति भी हमेशा अधिक होती है। जो दुर्घटना की संभावना को और ज्यादा बढ़ा देती है।</p>
<p><strong>कोटा के 18 किलोमीटर में दर्जनभर स्थानों पर टूटे डिवाइडर</strong><br />कोटा शहर से दो राष्ट्रीय राजमार्ग निकल रहे हैं, जिनमें एक एनएच 27 और दूसरा एनएच 52 है। इन दोनों ही राजमार्गों पर दर्जनभर स्थानों पर डिवाइडर टूटे हुए हैं। साथ ही कई स्थान ऐसे हैं जहां हाईवे के किनारों पर मौजूद रेलिंग भी टूटी हुई है। गौरतलब है कि इन हाई वे पर आए दिन हादसों की खबरें आती रहती हैं। जिनमें कई हादसे तो इतने गंभीर होते हैं कि घायलों की मौके पर ही मृत्यु हो जाती है। इन दोनों ही हाईवे पर हर दिन हजारों वाहन निकलते हैं। इन हजारों वाहनों में भी अधिकतर वाहन चौपहिया और भारी वाहन होते हैं। इनकी रफ्तार भी तेज होती है जिसके चलते कई बार वाहन नियंत्रण में नहीं आता और हादसा हो जाता है। </p>
<p><strong>ये बड़े हादसे हो चुके हाई वे पर</strong><br />27 और 52 पर पिछले दो सालों में 300 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर हादसे मवेशियों के सामने आने से वाहन के अनियंत्रित होने, डिवाइडरों से वाहनों के पार करने और ओवरटेक करते समय भिडंत होना सबसे बड़े कारण हैं। </p>
<p><strong>इन स्थानों पर टूटे  हैं डिवाइडर और रेलिंग</strong><br />नवज्योति की टीम ने रविवार को शहर के नया नोहरा से हैंगिंग ब्रिज तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 पर ग्राउंड रियालिटी को चैक किया। नया नोहरा से हैंगिंग बिंज तक की दूरी करीब 16 किलोमीटर है, इसमें नयागांव, डाढ़देवी, कंवरपुरा उम्मेदगंज, धाकड़खेड़ी और बंधा धर्मपुरा क्षेत्र में कई स्थानों पर लोगों ने डिवाइडर को तोड़कर आने जाने और यू टर्न लेने के लिए जबह बनाई हुई है। साथ ही कई स्थानों पर तो किनारे पर लगने वाली रेलिंग को भी तोड़ा हुआ है जो दुर्घटना के समय वाहन को नीचे उतरने से रोकती है। लेकिन रेलिंग के टूटे होने के चलते कई बार वाहन मार्ग से नीचे उतर जाते हैं। रेलिंग के अलावा हाई वे पर कई स्थानों पर पर्याप्त रिफ्लेक्टर और संकेतकों की कमी भी पाई गई। जिनसे वाहन चालक कई असंमजस की स्थिति में पहुंच जाते हैं।</p>
<p><strong>गायों का झुंड बना रहता है परेशानी</strong><br />राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर रेलिंग टूटी होने के कारण आवारा मवेशी हाई वे पर आ जाते हैं। हाई वे पर ये मवेशी कई बार नजर तक नहीं आते और वाहनों से टकरा जाते हैं। पूरे 16 किलोमीटर के हाई वे पर 8 स्थान ऐसे थे जहां मवेशी मार्ग या तो घूमते हुए मिले या झुंड बनाकर बैठे हुए थे। जो भी हादसों का एक बड़ा कारण है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से हादसों की जानकारी रिकॉर्ड कर उन्हें भविष्य में हादसे रोकने का कार्य किया जाता है। साथ ही हाईवे पर डिवाइडरों को तोड़ने की जानकारी है, जिन्हें ब्लैक स्पॉट घोषित कर कई जगह मरम्मत कराई है। बाकी स्थानों पर भी मरम्मत कराई जाएगी। साथ ही संकेतकों को भी ठीक कराया जाएगा। <br /><strong>- संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट डारेक्टर, एनएचएआई, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 18:45:42 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा को सुंदर बनाने वाले पेड़ गिन रहे अंतिम सांसें</title>
                                    <description><![CDATA[वहीं यूआईटी की ओर से इतनी भीषण गर्मी होने के बावजू भी इन पौधों में पानी की सिंचाई नहीं की जा रही है। जो समस्या को ओर बढ़ा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-that-make-kota-beautiful-are-counting-their-last-breaths/article-79526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/kota-ko-sunder-banane-wala-ped-gin-rahe-antim-sansen...kota-news-27.05.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के सौंदर्यकरण के दौरान चौराहों को विकसित करने के साथ ही शहर के लगभग सभी मार्गों पर बने डिवाइडरों पर पौधे लगाए गए थे। जिनका उद्देश्य शहर की हरियाली को बढ़ाने का था। लेकिन दो साल पहले लगाए गए हजारों पौधों में से शहर के अधिकतर पौधे अब सूख चुके हैं, जो बाकि बचे हैं वो भी धीरे धीरे सूख रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कोटा की सड़कों के सभी डिवाइडरों पर हरियाली की गई थी। जिस दौरान देश विदेश से कई प्रकार के पौधे मंगाकर लगाए गए थे। वहीं यूआईटी की ओर से इतनी भीषण गर्मी होने के बावजू भी इन पौधों में पानी की सिंचाई नहीं की जा रही है। जो समस्या को ओर बढ़ा रहा है।</p>
<p><strong>बूंदी रोड से अनंतपुरा चौराहा तक सूखे पौधे</strong><br />शहर में बूंदी रोड से नयापुरा चौराहे तक डिवाइडरों पर लगे लगभग सारे पौधे सूख चुके हैं। जिनमें छोटे से लेकर बड़े पौधे तक शामिल हैं। साल 2022 में यूआईटी की ओर से शहर के सभी डिवाइडरों पर लगे छोटे और पूराने पौधों को हटाकर उनके स्थान पर नए पौधे लगाने की योजना बनाई थी जिसके तहत शहर में अलग अलग किस्म के करीब 2 लाख पौधे लगाए गए थे। लेकिन वर्तमान में इन सभी पौधों की हालत बिल्कुल खराब हो चुकी है। साथ ही कई पौधे तो मर चुके हैं। यही हालात बारां रोड के जहां भी डिवाइडरों में पहले पौधे लग नहीं पाए और अब लगने के बाद उनमें पर्याप्त पानी नहीं डालने से वो भी सूख रहे हैं।</p>
<p><strong>चौराहों पर लगाए पेड़ भी सूखे</strong><br />डिवाइडरों पर पौधे लगाने के साथ यूआईटी की ओर से शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर पाम के पेड़ लगाए गए थे। जिसमें सबसे ज्यादा एयरोड्रॉम चौराहे और अनंतपुरा पुलिस थाने के सामने और अभय कमांड सेंटर के सामने लगाए गए थे। जहां इन स्थानों पर अब पेड़ों का बस सूखा तना नजर आ रहा है, पेड़ बिल्कुल गायब हो चुके हैं। इसी तरह एयरोड्रॉम सर्किल पर भी सारे पेड़ सुख चुके हैं। चौराहे से डीसीएम की ओर जाने वाले मार्ग पर यूआईटी ने पौधों की सुरक्षा के लिए जाली भी लगाई हुई है लेकिन पौधा एक भी नहीं बचा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पौधों के सूखने का मुख्य कारण भीषण गर्मी है, वर्तमान में जल समस्या के कारण पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है। अन्यथा सिंचाई पर्याप्त रूप से होती है वहीं जिन भी इलाकों में समस्या है वहां ठेकेदार को पानी की सिंचाई करने के निर्देशित करेंगे। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव, यूआईटी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 16:46:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डिवाइडरों से सड़कें ऊपर चढ़ने से हादसों में हो रही है बढ़ोतरी </title>
                                    <description><![CDATA[सड़कों पर आमजन सुरक्षित चल सके इसलिए डिवाइडर और फुटपाथ बनाए जाते हैं। परत दर परत चढ़ाई जा रही डामर से बीच में बने डिवाइडरों से सड़कें ऊपर चढ़ने से हादसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-accidents-are-increasing-due-to-dividers/article-8530"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/465464644.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सड़कों पर आमजन सुरक्षित चल सके इसलिए डिवाइडर और फुटपाथ बनाए जाते हैं। परत दर परत चढ़ाई जा रही डामर से बीच में बने डिवाइडरों से सड़कें ऊपर चढ़ने से हादसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सुरक्षित यातायात के लिए सरकार करोड़ों खर्च करती है, ताकि हादसों पर नियंत्रण लग सके, लेकिन अधिकारियों की अनियमितता से सड़कों पर चढ़ाई जा रही डामर की परत से डिवाइडर की ऊंचाई कम हो जाती है और सड़क इसके लेवल में आ जाती है। इसके कारण कई हादसे होने की आशंका बनी रहती है। ऐसा ही कुछ नजारा शहर के चौड़ा रास्ता में देखने को मिलता है। इसी प्रकार सहकार मार्ग पर डिवाइडर पर चढ़ी सड़क के बाद अब पुरानी डिवाइडरों को हटाकर दोबारा से बनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>सड़क की मरम्मत के लिए हटानी होती है पुरानी डाबर</strong><br />सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजीव माथुर ने बताया कि पुरानी सड़क की मरम्मत से पूर्व पुरानी डाबर को हटाकर ही नई परत डालनी चाहिए, जिससे सड़कों की बेहताश बढ़ रही ऊंचाई पर रोक लगाई जा सके। प्रदेश में पुरानी डाबर को हटाकर रिसाइकिल करने का कोई प्लांट नहीं होने से उस ही परत चढ़ा दी जाती है, जिससे डिवाइडर छोटे होने के साथ ही घरों में भी पानी भरता है। शहर में नगर निगम समय पर सड़कों की मरम्मत नहीं कर पा रहा।</p>
<p><strong>यह हैं नियम</strong><br />सुरक्षित यातायात के लिए सड़क के बीच में डिवाइडर बनाया जाता है। डिवाइडर की सड़क के न्यूनतम ऊंचाई नौ इंच और अधिकतक एक मीटर है। पेड़-पौधे लगाने के लिए डिवाइडरों की ऊंचाई मौके की स्थिति के साथ ही रोड की चौड़ाई के आधार पर भी इंजीनियर निर्धारित करते हैं।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 10:43:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>  शहर में बन रहे स्मार्ट डिवाइडर</title>
                                    <description><![CDATA[   स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में चल रहे विकास कार्यों के दौरान डिवाइडरों को भी स्मार्ट बनाया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/smart-dividers-being-built-in-the-city/article-7438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/13.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में चल रहे विकास कार्यों के दौरान डिवाइडरों को भी स्मार्ट बनाया जा रहा है।  पुराने डिवाइडरो को तोड़कर उन्हें नया रूप दिया जा रहा है जिससे डिवाइडर  का आकर्षण अलग ही नजर आ रहा है । </p>
<p>स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में करीब 80 करोड़ रुपए की 100 किलोमीटर सड़कें बनाई जानी है । उसके साथ ही नए डिवाइडर भी बनाए जा रहे हैं।  रेलवे स्टेशन से आरके पुरम तक बनाए जाने वाले इन डिवाइडर को अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से टुकड़ों में नया रूप दिया जा रहा है । नयापुरा इलाके में सर्किट हाउस से अंटाघर चौराहे तक पुराने डिवाइडर को तोड़कर नया डिवाइडर बनाया गया है।  जिसमें टाइल्स लगाई गई है , जिससे डिवाइडर का आकर्षण अलग ही नजर आ रहा है । उसी तरह से दक्षिण इलाके में घोड़े वाले बाबा चौराहे पर, घोड़ा चौराहे से वल्लभनगर और सीएडी रोड पर मनाए जा रहे।  डिवाइडरो को पेंटिंग कर आकर्षक रूप दिया जा रहा है जिससे पूर्व में बने डिवाइडर से यह डिवाइडर अलग नजर आ रहे हैं और इनका आकर्षण भी देखने को मिल रहा है ।  डिवाइडर में मिट्टी भरने और प्लांटर बनाकर उनमें विभिन्न प्रकार के छायादार और फूलदार पौधे लगाए जाएंगे ।  </p>
<p>नगर विकास न्यास के अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में डिवाइडरों को स्मार्ट बनाने का काम किया जा रहा है । कुछ जगह पर काम चल रहा है जबकि अधिकतर जगहों पर अगले 1 साल में काम पूरा कर लिया जाएगा । इन दीवारों को तैयार होने के बाद इनमें अलग से लाइटिंग भी लगाई जाएगी जिससे रात के समय इन दीवारों की अलग ही शोभा नजर आएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 18:52:35 +0530</pubDate>
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