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                <title>ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात : अमेरिका-चीन संबंधों में 'नये दौर' का संकेत, इन अहम मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐतिहासिक मुलाकात हुई। शी ने ताइवान को 'रेड लाइन' बताते हुए कड़ी चेतावनी दी, लेकिन संबंधों को 'स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' का नया दौर भी कहा। व्यापार, AI और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ दोनों महाशक्तियाँ आपसी तनाव कम करने की कोशिश में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-jinping-meeting-signals-a-new-era-in-us-china-relations-discussion/article-153831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों के उभरते चरण को अधिक स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा का 'नया दौर' करार दिया है। साथ ही जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों में सबसे संवेदनशील और खतरनाक मुद्दा करार दिया है। चीन के राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के शुरुआत में की। वर्ष 2017 के बाद चीन में यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी, जिसने उन चर्चाओं की दिशा तय कर दी, जिनका मुख्य केंद्र रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा होने की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर तनाव का माहौल है। </p>
<p>ईरान में जारी संघर्ष, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा शामिल है। चर्चा के लिए मेज पर रखे गये प्रमुख मुद्दों में व्यापार और टैरिफ को स्थिर करना, अमेरिकी बाजारों तक चीन की पहुंच और चीन में अमेरिकी कंपनियों का विस्तार, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, चीन के इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात और वैश्विक ऑटो उद्योग पर इसका प्रभाव तथा ऊर्जा सुरक्षा और ईरान के तेल निर्यात जैसे विषय शामिल हैं। </p>
<p>ईरान के तेल निर्यात के मामले में चीन का काफी प्रभाव है और इस मुद्दे पर दोनों महाशक्तियां अपनी भूमिका निभाएंगी। यह बैठक ईरान युद्ध की छाया में हो रही है, जिसमें दोनों देशों के नेता व्यापक भू-राजनीतिक समीकरणों और दोनों नेता महाशक्तियों के बीच 'नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' पर चर्चा करेंगे। जिनपिंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां दोनों देशों को स्थिरता और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ताइवान चीन के लिए सबसे अहम चिंता का विषय है और चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने इसे एक 'रेड लाइन' (सीमा रेखा) बताया जो दोनों देशों के संबंधों की भविष्य की दिशा तय कर सकती है। तनाव के बावजूद जिनपिंग ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच चीन और अमेरिका को एक-दूसरे का विरोधी बनने के बजाय साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि समग्र स्थिरता बनाये रखने के लिए दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाया जा सकता है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों ने मध्य-पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मार्गों में आ रही बाधाओं पर भी अपने विचार साझा किये। ट्रंप अपने साथ वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिकी व्यापार जगत के दिग्गजों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर आये थे, जो संभावित निवेश और व्यापारिक समझौतों पर उनके विशेष ज़ोर का संकेत था। इस प्रतिनिधिमंडल में उनके मंत्रिमंडल और आर्थिक टीम के प्रमुख सदस्य शामिल थे, जो इस शिखर सम्मेलन के भारी आर्थिक महत्व को दर्शाता है।</p>
<p>जिनपिंग के साथ हालांकि सार्वजनिक रूप से उपस्थित रहने के दौरान ट्रंप ने ताइवान के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवालों का सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होता है, जबकि टकराव से दोनों को ही नुकसान पहुंचता है। ट्रंप ने आर्थिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के संबंधों को लेकर आशावादी दृष्टिकोण व्यक्त किया। अब दोनों नेता बंद दरवाज़ों के पीछे आपसी बातचीत (गोपनीय वार्ता) के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। आने वाले दिनों में उनके बीच और भी कई बैठकें, राजकीय कार्यक्रम और आधिकारिक भोज आयोजित किए जाने हैं। अभी तक हालांकि किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं की गयी है, फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष अपने संबंधों में स्थिरता लाने एवं तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। यह दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारतीय फार्मा नेटवर्क्स पर अमेरिका की सख्त कार्रवाई, फेंटानिल की आपूर्ति के लिए 13 दवा विक्रेताओं पर लगाए वीज़ा प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने अवैध फेंटानिल तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत स्थित 'केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स' से जुड़े 13 सहयोगियों पर वीज़ा प्रतिबंध लगा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा फेंटानिल को 'विनाशकारी हथियार' घोषित करने के बाद यह कदम उठाया गया। दोनों देश इस जानलेवा ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-strict-action-on-indian-pharma-networks-visa-ban-imposed/article-153670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/fentalin.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने भारत स्थित ऑनलाइन दवा विक्रेता केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स से जुड़े 13 करीबी व्यावसायिक सहयोगियों पर वीज़ा प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिका ने इस नेटवर्क पर देश में घातक और अवैध फेंटानिल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस 'टॉमी' पिगॉट ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई उन अंतरराष्ट्रीय तस्करी अभियानों को ध्वस्त करने के एक आक्रामक अभियान का हिस्सा है, जो अमेरिका में परिवारों को तबाह करने वाली अवैध फेंटानिल के लिए जिम्मेदार हैं।</p>
<p>विदेश विभाग के अनुसार, केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स ने कथित तौर पर पूरे अमेरिका में खरीदारों को अवैध फेंटानिल युक्त लाखों जाली दवाएं बेचीं। अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान ने देश भर में अत्यधिक मात्रा में नशीली दवाओं के सेवन से होने वाली मौतों में योगदान दिया और कंपनी ने भारी मुनाफा कमाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक कार्यकारी आदेश के तहत फेंटानिल को 'बड़े पैमाने पर विनाश का हथियार' घोषित किए जाने के बाद, आप्रवासन और राष्ट्रीयता अधिनियम की धारा के तहत ये वीज़ा प्रतिबंध लगाए गए थे।</p>
<p>बयान में घोषणा की गई कि अमेरिकियों को जहर देने में शामिल लोगों को अमेरिका में प्रवेश से वंचित कर दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय दवा तस्करों और उनके वित्तीय नेटवर्कों के लिए एक चेतावनी बताया और इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका और भारत फेंटानिल आपूर्ति श्रृंखलाओं को नष्ट करने और इस घातक दवा की बिक्री से लाभ कमाने वाले आपराधिक संगठनों को खत्म करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:13:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या अब अमेरिका का हिस्सा बनेगा वेनेजुएला? ट्रंप ने 51वां राज्य बताते हुए मानचित्र किया शेयर, दुनियाभर में बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मैप साझा कर वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बताया है। हालांकि इसे एक मजाक माना जा रहा है, लेकिन वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रंप पहले भी वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण की इच्छा जता चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/will-venezuela-become-a-part-of-america-now-trump-shared/article-153639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक मानचित्र साझा किया है जिसमें वेनेजुएला को अमेरिका के 51वें राज्य के रूप में दिखाया गया है। ट्रंप ने मजाक में वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की ओर संकेत तब दिया जब उन्होंने मार्च में विश्व बेसबॉल क्लासिक सेमीफाइनल में इटली को हराने पर वेनेजुएला की राष्ट्रीय बेसबॉल टीम को बधाई दी थी। उन्होंने इस जीत का श्रेय वेनेजुएला के अमेरिका के साथ सहयोग को दिया।</p>
<p>वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सोमवार को इस दक्षिण अमेरिकी देश के अमेरिका का 51वां राज्य बनने की कभी भी संभावना को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के बाद अमेरिका और वेनेजुएला ने राजनयिक संबंधों को बहाल करना शुरू कर दिया था। ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण करने के अपने इरादे की भी घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 14:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से खबर, पश्चिमी एशिया में सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने पर विचार कर रहे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। कूटनीति विफल होने पर अमेरिका अब लक्षित बमबारी और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर मंडराने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/news-quoting-trumps-aides-president-considering-resuming-military-action-in/article-153541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रम्प के सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत में ईरान के रुख से लगातार निराशा हाथ लगी है और अब वह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से अमेरिकी राष्ट्रपति का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका यह भी मानना है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब कई समूह बन गए हैं, जिनमें से कुछ बल प्रयोग के पक्ष में हैं और ईरान की स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लक्षित बमबारी जारी रखने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जबकि अन्य समूह संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक साधनों पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए एक अलग मुद्दा बनी हुई है। अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान कितनी स्पष्टता से अमेरिका का पक्ष ईरान तक पहुँचा रहा है और वह ईरान के दृष्टिकोण को कितनी निष्पक्षता से बता रहा है। पश्चिमी एशिया संघर्ष में अमेरिका क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है और राष्ट्रपति ट्रम्प की 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले किसी फैसले की संभावना कम है।</p>
<p>गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे। अमेरिका और ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगर होर्मुज में गतिरोध लगातार जारी रहा, तो वैश्विक तेल बाजार में संकट 2027 तक जारी रहेगा: अमीन नासिर</title>
                                    <description><![CDATA[अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने में नहीं खुला, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होगा। दुनिया पहले ही 1 अरब बैरल तेल खो चुकी है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह मार्ग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/if-the-standoff-in-hormuz-continues-the-crisis-in-the/article-153501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/अमीन-नासिर.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। सऊदी अरब की कंपनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने कहा है कि यदि एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरुमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू नहीं होती, तो अगले साल तक वैश्विक तेल बाजार सामान्य स्थिति में नहीं लौटेगी। अरामको के पहली तिमाही के परिणामों पर चर्चा करने के लिए आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री नासिर ने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान जितने लंबे समय तक जारी रहेगा, तेल बाजार को स्थिर होने में उतना ही अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यदि जलडमरुमध्य में गतिरोध जून के मध्य तक बना रहता है, तो यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।</p>
<p>दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, उत्पादन या परिवहन की कमी के कारण बाजार पहले ही एक अरब बैरल तेल गंवा चुका है और जब तक यह मार्ग बंद रहेगा, बाजार को हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान होता रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 70 जहाज गुजरते थे। फारस की खाड़ी में तेल उत्पादक देशों पर हमलों और ईरान द्वारा होर्मुज को प्रभावी ढंग से बंद करने से उत्पादन और निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले, इस जलमार्ग के माध्यम से प्रतिदिन लगभग दो करोड बैरल तेल बाजार में आता था।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक 'एकीकृत प्रस्ताव' के साथ आने का समय देने के लिए युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया था। तीन मई को ट्रंप ने होर्मुज में फंसे जहाजों की सहायता के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी। फिर ट्रंप ने पांच मई को कहा कि उन्होंने यह देखने के लिए थोड़े समय के लिए ऑपरेशन को रोकने का फैसला किया है कि क्या ईरान के साथ शांति समझौता हो सकता है। हालांकि सोमवार को उन्होंने अमेरिकी शांति प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'अवास्तविक मांगों' पर अड़े इजरायल की सोच से प्रभावित अमेरिका: बघाई ने कहा- क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अपने शांति प्रस्ताव को "तार्किक" बताते हुए अमेरिकी रुख की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे केवल संपत्ति की मुक्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे वैध अधिकार मांग रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताने के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी इजरायली दबाव में काम कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए  ईरान ने कहा है कि उसका प्रस्ताव "उदार और तार्किक" था, जबकि अमेरिका अब भी इजरायल की सोच से प्रभावित "अवास्तविक मांगों" पर अड़ा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में जो योजना भेजी गयी, वह "हद से ज्यादा" नहीं थी और उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने किसी प्रकार की रियायत की मांग नहीं की। हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों की बात की है।" बघाई ने सवाल किया कि क्या क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने, ईरानी जहाजों के खिलाफ "समुद्री डकैती" रोकने तथा वर्षों से अवरुद्ध ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग अनुचित कही जा सकती है। उन्होंने कहा, "क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का हमारा प्रस्ताव अवास्तविक है? क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना है?"</p>
<p>इससे पूर्व, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और उसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" पाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार पोर्टल एक्सियोस को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने ईरान के जवाब पर बेंजमिन नेतन्याहू से भी चर्चा की है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मौजूदा चरण में वार्ता का केंद्र केवल क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या फिर शुरू होगा युद्व! ईरान ने खारिज किया अमेरिकी शांति प्रस्ताव, तेहरान ने पेश किया अपना 10-सूत्रीय प्लान, जानें क्या रखी शर्ते?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को अत्यधिक मांगें बताकर खारिज कर दिया है। तेहरान ने बदले में युद्ध क्षतिपूर्ति, संपत्तियों को मुक्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण की मांग रखी है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इसे "अस्वीकार्य" बताने के बाद, खाड़ी में तनाव और बंदरगाहों की नाकाबंदी ने शांति की उम्मीदों को मुश्किल बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/will-war-start-again-iran-rejected-american-peace-proposal-tehran/article-153382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान ने अमेरिका को दिए अपने जवाब में अमेरिकी शांति प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसका मतलब अमेरिकी सरकार की अत्यधिक मांगों के आगे झुकना होगा। ईरानी समाचार एजेंसी ने पहले बताया था कि अमेरिकी संदेश पर ईरान की प्रतिक्रिया युद्ध समाप्त करने और फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संघर्ष समाधान के लिए अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।</p>
<p>प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान की प्रतिक्रिया योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिका को इस्लामिक गणराज्य को युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा। मई की शुरुआत में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान को इस्लामिक गणराज्य के नए 14 सूत्री प्रस्ताव के संबंध में पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका से जवाब मिला है। समाचार एजेंसी ने रविवार को बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए ईरान के प्रस्तावों का पाठ, जिसे तेहरान ने वाशिंगटन को भेजकर जवाब दिया था, में प्रतिबंध हटाने, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण और विदेशों में ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने के प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p>28 फरवरी को, अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किए, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। वाशिंगटन और तेहरान ने 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में बाद की बातचीत बेनतीजा रही, शत्रुता के फिर से शुरू होने की कोई खबर नहीं मिली, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ बातचीत के एक नए दौर का आयोजन करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 14:05:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या फिर बढ़ेगा टकराव! अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर ईरान के जवाब को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया खारिज, बोले- हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया है। तेहरान ने नाकाबंदी हटाने और हमलों पर गारंटी मांगी थी, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया। वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के यूरेनियम भंडार नष्ट नहीं होते, युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-the-conflict-increase-again-president-donald-trump-rejected-irans/article-153377"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को "पूरी तरह अस्वीकार्य" करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया कि पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए तेहरान के प्रस्ताव में सभी मोर्चों पर युद्ध की तत्काल समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकना और ईरान पर आगे कोई हमला न करने की गारंटी शामिल है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल द्वारा फरवरी में शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किए गए युद्धविराम का, छिटपुट गोलीबारी के बावजूद, काफी हद तक पालन किया गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, ट्रम्प ने दोहराया कि ईरान में युद्ध "जल्द ही समाप्त हो जाएगा"। लेकिन इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध को समाप्त मानने से पहले ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को "नष्ट" किया जाना चाहिए।</p>
<p>सीबीएस के '60 मिनट्स' कार्यक्रम में दिए एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, "अभी भी ऐसे संवर्धन स्थल हैं जिन्हें नष्ट करना बाकी है।"<br />रविवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने तेहरान के प्रस्ताव का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन कहा, "हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे, और अगर बातचीत या समझौता करने की बात उठती है, तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है।" ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया: "मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया - बिल्कुल अस्वीकार्य।"</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक पृष्ठ के 14 सूत्रीय अमेरिकी ज्ञापन में ईरानी परमाणु संवर्धन पर रोक, प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवागमन बहाल करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसमें दो अमेरिकी अधिकारियों और दो अन्य सूत्रों का हवाला दिया गया है - सभी के नाम गुप्त रखे गए हैं - जिन्हें मुद्दों की जानकारी दी गई थी। इन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ज्ञापन में बताई गई कई शर्तें अंतिम समझौते पर पहुंचने पर ही लागू होंगी। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना जारी रखा है, जिससे विश्व स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।</p>
<p>अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू कर दी है, जिससे ईरान बेहद नाराज है। इजरायली और अमेरिकी सेनाओं ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। ईरान युद्ध में पिछले महीने युद्धविराम लागू हुआ। अपने साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, "मैं इजरायल की सेना के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता को शून्य तक कम करना चाहता हूं।" उन्होंने कहा, "हमें प्रति वर्ष 3.8 अरब डॉलर मिलते हैं। और मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि हम शेष सैन्य सहायता से भी खुद को अलग कर लें।" उन्होंने आगे कहा, "आइए अभी से शुरुआत करें और इसे अगले दशक में पूरा करें।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:36:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[हमले में घायल होने के बावजूद मुजतबा खामेनेई ईरान की युद्ध रणनीति और राजनयिक वार्ताओं का गुप्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से बचते हुए, वह हस्तलिखित नोटों के जरिए सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अब भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को पुनः संगठित करने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-president-pejeshkyan-claims-that-mujtaba-khamenei-has-emerged-as/article-153244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mojtaba-khamenei-iran-new-supreme-leader.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई संघर्ष के दौरान देश की युद्ध रणनीति को आकार देने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ राजनयिक बातचीत में शामिल अधिकारियों को निर्देशित करने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के पहले ही दिन उनके पिता और ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गये थे। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आकलन के अनुसार, उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मुजतबा कथित तौर पर ईरान की युद्धकालीन रणनीति बनाने, सैन्य अभियानों का निर्देशन करने और अमेरिका से समझौते के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करने में गहराई से लगे हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा के चेहरे, हाथ, धड़ और पैर काफी ज्यादा झुलस गये थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि वह सार्वजनिक नजरों से दूर रहकर स्वस्थ होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार से जानबूझकर बच रहे हैं और केवल व्यक्तिगत मुलाकातों या संदेशवाहकों के जरिये हस्तलिखित नोटों से ही संवाद कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस सप्ताह पुष्टि की कि उन्होंने मुजतबा के साथ ढाई घंटे तक आमने-सामने बैठक की। हमले के बाद नये सर्वोच्च नेता और ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी के बीच यह पहली सार्वजनिक रूप से पुष्ट मुलाकात थी।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी ने शुक्रवार को कहा, "खामेनेई अपनी चोटों से उबर रहे हैं और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, हुसैनी ने सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर चिंताओं को कम करने की कोशिश की और कहा कि खामेनेई के पैर और पीठ के निचले हिस्से में मामूली चोटें आयी थीं। उन्होंने यह भी बताया, "छर्रे का एक छोटा-सा टुकड़ा उनके कान के पीछे लगा था, लेकिन घाव अब भर रहे हैं।"</p>
<p>ईरान में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए हुसैनी ने कहा, "खुदा का शुक्र है कि वह स्वस्थ हैं। दुश्मन हर तरह की अफवाहें फैला रहा है और झूठे दावे कर रहा है। वे उन्हें देखना और ढूंढ़ना चाहते हैं, लेकिन लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सही समय आने पर वह आपसे बात करेंगे।" अमेरिकी विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि वे मुजतबा की मौजूदगी की पुष्टि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कर सकते। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर मौजूद अधिकारी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उन तक अपनी पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।</p>
<p>आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सहयोग से चलता प्रतीत होता है। गालिबाफ ने ही अमेरिका के साथ परमाणु और युद्धविराम वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई वह वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गयी थी और दूसरे दौर की प्रस्तावित बैठक कभी नहीं हो पायी। बाद में ट्रंप ने इस विफलता का कारण ईरान के नेतृत्व के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों को बताया।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अनिश्चितता के बावजूद युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम जरूर किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के लगभग दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर अब भी चालू माने जा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसका आंशिक कारण वर्तमान में जारी युद्धविराम है, जिसने ईरान को संभलने और उन लॉन्चरों को बाहर निकालने का समय दे दिया है, जो पिछले हमलों के दौरान दब गये थे।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक आकलन में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि ईरान भारी आर्थिक संकट का सामना करने से पहले अमेरिका के नेतृत्व वाली वर्तमान नाकेबंदी को अगले चार महीनों तक और झेल सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के शासन ढांचे को 'पूरी तरह से बिखरा' बताया है। वहीं ह्वाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य दबाव, आर्थिक अलगाव और आंतरिक कलह ने ईरानी शासन को काफी कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर तर्क दिया है कि ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान वार्ताकार पहले वालों की तुलना में अधिक 'समझदार' हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगले हफ्ते इस्लामाबाद में बातचीत शुरू कर सकते हैं अमेरिका और ईरान : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते पर अगले सप्ताह इस्लामाबाद में वार्ता फिर शुरू हो सकती है। मसौदे में परमाणु कार्यक्रम, यूरिनियम स्थानांतरण और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जो क्षेत्र में शांति का भविष्य तय करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-and-iran-may-start-talks-in-islamabad-next-week/article-153264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-casefire.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। व्हाइट हाउस द्वारा ईरान से संघर्ष समाप्ति संबंधी प्रस्ताव पर जवाब की प्रतीक्षा के बीच खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता अगले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में फिर शुरू हो सकती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों पक्ष मध्यस्थों के साथ मिलकर एक पृष्ठ के 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित रूपरेखा के तहत एक महीने की वार्ता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसका उद्देश्य जारी संघर्ष को समाप्त करना है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत का मुद्दा सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है और माना जा रहा है कि यही वार्ता में देरी या विफलता का कारण बन सकता है। ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किये गये हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था। ईरान ने जवाबी हमले किए थे और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन प्रभावित हुआ था।</p>
<p>पाकिस्तान की मध्यस्थता में आठ अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई वार्ता का पहला दौर किसी स्थायी समझौते तक नहीं पहुंच सका था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को बिना किसी समय सीमा के आगे बढ़ा दिया था। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से कहा कि प्रशासन को संघर्ष समाप्ति के प्रस्ताव पर ईरान के जवाब का इंतजार है। उन्होंने सीएनएन से कहा, "हमें आज रात तक जवाब मिलने की उम्मीद है", हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि तेहरान जानबूझकर जवाब में देरी कर रहा है या नहीं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि वॉशिंगटन को शुक्रवार तक ईरान के जवाब की उम्मीद है, हालांकि शनिवार सुबह तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि ईरान ने औपचारिक रूप से कोई जवाब दिया है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:32:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा ऐलान: ईरान के विदेशी सैन्य खरीद नेटवर्क पर लगाया प्रतिबंध, ईरानी हमलों में मदद करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने का आरोप, प्रतिबंधित संस्थाओं में चीनी कंपनियां शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के सैन्य नेटवर्क और ड्रोन कार्यक्रमों को कुचलने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने वाली चीनी कंपनियां भी शामिल हैं, जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बनी थीं। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की आपूर्ति शृंखला को वैश्विक स्तर पर बाधित करने का यह सख्त कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-governments-big-announcement-ban-on-irans-foreign-military-procurement/article-153241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के सैन्य खरीद नेटवर्क की सहायता करने के आरोप में कई संस्थानों पर नये प्रतिबंध लगाये हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर पश्चिम एशिया में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाओं के खिलाफ ईरानी हमलों में मदद करने के लिए उपग्रह चित्र (सैटेलाइट इमेजरी) प्रदान करने का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी फैक्ट शीट के अनुसार, मिसाइल  और ड्रोन संचालन सहित ईरानी सैन्य गतिविधियों को सक्षम बनाने वाली उपग्रह चित्र और संबंधित तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए चार संस्थाओं को प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>अमेरिका ने कहा कि इस तरह की सहायता क्षेत्र में अमेरिकी और भागीदार सेनाओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने भी 10 व्यक्तियों और संस्थाओं को नामित किया है, जिन पर ईरान को उसके मानवरहित विमान (यूएवी) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से संबंधित हथियार और कच्चा माल प्राप्त करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये उपाय 'नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम 2' के तहत ईरान की सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद उसके प्रसार-संवेदनशील कार्यक्रमों को फिर से खड़ा करने के किसी भी प्रयास को रोकने के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई परमाणु प्रतिबद्धताओं के प्रति ईरान की 'बेहद लापरवाही' दिखाने के बाद सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रतिबंधों को फिर से लागू किये जाने के बाद की गयी है। इन उपायों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1929 के तहत ईरान को पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण, तकनीकी सहायता और संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध शामिल हैं। प्रतिबंधित संस्थाओं में चीन स्थित कंपनियां जैसे मीनट्रॉपी टेक्नोलॉजी (मिज़ारविज़न) और द अर्थ आई (टीईई) शामिल हैं, जिन पर ईरानी सैन्य उपयोग से जुड़ी उपग्रह चित्र प्रदान करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य चीनी कंपनी, चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड पर अमेरिकी और सहयोगी सैन्य स्थलों की तस्वीरें एकत्र करने और उनकी आपूर्ति करने तथा पहले अमेरिका के प्रतिबंधित हूतियों को डाटा प्रदान करने का आरोप लगाया गया है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के निर्यात केंद्र (माइंडेक्स), जिसे पहले मॉडलेक्स के नाम से जाना जाता था, को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका के लिए नामित किया गया है। अमेरिकी सरकार ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के उल्लंघन में ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाले किसी भी समर्थन के गंभीर परिणाम होंगे और ऐसी कार्रवाइयों का करारा जवाब दिया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:10:20 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका ने की ईरान युद्ध खत्म होने की घोषणा, कहा-'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने हासिल किए लक्ष्य, भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर होगा। अमेरिका अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रक्षात्मक रुख अपनाते हुए वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, हालांकि जवाबी कार्रवाई के विकल्प खुले रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-announced-the-end-of-iran-war-said-operation/article-152877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया प्रमुख सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब समाप्त हो गया है। ह्वाइट हाउस में मंगलवार दोपहर 3:30 बजे के आसपास प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस अभियान के अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किये गये आक्रामक सैन्य अभियान के सभी रणनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर लिये गये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना ने अब अपने आक्रामक चरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अब ध्यान भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा।</p>
<p>इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। इसके तहत अब सेना 'आक्रामक' रुख छोड़कर 'रक्षात्मक' मुद्रा में आ गयी है। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब नयी जंग शुरू करने के बजाय अमन को प्राथमिकता देना चाहता है। उन्होंने हालांकि यह चेतावनी भी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में ताकत के इस्तेमाल का विकल्प अब भी खत्म नहीं हुआ है। यदि अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों के हितों पर हमला होता है तो अमेरिका अपनी पूरी शक्ति के साथ जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।</p>
<p>आक्रामक अभियान की समाप्ति के बाद अब अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत की है। इस नये मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना और फिर से खोलना है। 'टाइम' और 'सीएनए' की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना अब इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करेगी। रुबियो ने इसे एक 'रक्षात्मक कवच' बताते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी सेना पर गोली नहीं चलायी जायेगी, तब तक उनकी तरफ से कोई हमला नहीं होगा, लेकिन वे किसी भी खतरे का सामना करने के लिए मुस्तैद रहेंगे।</p>
<p>व्हाइट हाउस की इस ब्रीफिंग में यह संदेश भी दिया गया कि अब सारा ध्यान सैन्य कार्रवाई से हटकर कूटनीति पर रहेगा। अमेरिका का अगला लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अंत एक बड़े युद्ध के थमने का संकेत तो है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और कड़ी निगरानी अब भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:32 +0530</pubDate>
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