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                <title>अमेरिका ने की ईरान युद्ध खत्म होने की घोषणा, कहा-'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने हासिल किए लक्ष्य, भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर होगा। अमेरिका अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रक्षात्मक रुख अपनाते हुए वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, हालांकि जवाबी कार्रवाई के विकल्प खुले रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-announced-the-end-of-iran-war-said-operation/article-152877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया प्रमुख सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब समाप्त हो गया है। ह्वाइट हाउस में मंगलवार दोपहर 3:30 बजे के आसपास प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस अभियान के अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किये गये आक्रामक सैन्य अभियान के सभी रणनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर लिये गये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना ने अब अपने आक्रामक चरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अब ध्यान भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा।</p>
<p>इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। इसके तहत अब सेना 'आक्रामक' रुख छोड़कर 'रक्षात्मक' मुद्रा में आ गयी है। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब नयी जंग शुरू करने के बजाय अमन को प्राथमिकता देना चाहता है। उन्होंने हालांकि यह चेतावनी भी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में ताकत के इस्तेमाल का विकल्प अब भी खत्म नहीं हुआ है। यदि अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों के हितों पर हमला होता है तो अमेरिका अपनी पूरी शक्ति के साथ जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।</p>
<p>आक्रामक अभियान की समाप्ति के बाद अब अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत की है। इस नये मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना और फिर से खोलना है। 'टाइम' और 'सीएनए' की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना अब इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करेगी। रुबियो ने इसे एक 'रक्षात्मक कवच' बताते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी सेना पर गोली नहीं चलायी जायेगी, तब तक उनकी तरफ से कोई हमला नहीं होगा, लेकिन वे किसी भी खतरे का सामना करने के लिए मुस्तैद रहेंगे।</p>
<p>व्हाइट हाउस की इस ब्रीफिंग में यह संदेश भी दिया गया कि अब सारा ध्यान सैन्य कार्रवाई से हटकर कूटनीति पर रहेगा। अमेरिका का अगला लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अंत एक बड़े युद्ध के थमने का संकेत तो है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और कड़ी निगरानी अब भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:32 +0530</pubDate>
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                <title>दक्षिण कोरिया का ट्रंप को बड़ा झटका: अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में शामिल हो या नहीं, प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में शामिल होने पर विचार कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की मुक्त आवाजाही साझा वैश्विक हित में है। ऊर्जा आपूर्ति के लिए खाड़ी पर निर्भर सियोल, ईरान के बढ़ते नियंत्रण के बीच आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/south-koreas-big-blow-to-trump-the-proposal-to-join/article-152838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/south-korea.png" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह अमेरिका के नेतृत्व वाले 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में शामिल होने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी प्रतिबंध के बीच सहयोगी देशों के वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में सुरक्षा और मुक्त आवाजाही सभी देशों के साझा हित में है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार संरक्षित किया जाना चाहिए।"</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि इसी सिद्धांत के आधार पर अमेरिका के प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है, जिसमें कोरियाई प्रायद्वीप की सैन्य तैयारी और घरेलू कानूनों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। बयान में यह भी कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख समुद्री मार्गों के सुरक्षित उपयोग को लेकर दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच करीबी समन्वय बना हुआ है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा करने के बाद दक्षिण कोरिया सहित कई एशियाई देशों की समुद्री आपूर्ति प्रभावित हुई है, क्योंकि सियोल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाले आयात पर काफी निर्भर है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के आर्थिक प्रभाव से एशिया-प्रशांत क्षेत्र को सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है, वैश्विक ईंधन संकट गहरा सकता है और लाखों लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक विनिर्माण का आधे से अधिक हिस्सा एशिया में होने के कारण इस क्षेत्र में किसी भी आर्थिक झटके का व्यापक असर पूरी दुनिया की आपूर्ति शृंखला पर पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:03:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने ईरानी जहाज के चालक दल के 22 सदस्यों को पाकिस्तान को सौंपा, चेतावनियों के बावजूद की थी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में जब्त ईरानी जहाज 'एम/वी टूसका' के 22 चालक दल सदस्यों को पाकिस्तान को सौंप दिया है। पाकिस्तान इन्हें आज ईरानी अधिकारियों को सौंपेगा। इस कदम को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 'कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर' माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और कूटनीति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-handed-over-22-crew-members-of-an-iranian-ship/article-152651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अमेरिका ने एक ईरानी कंटेनर जहाज पर पकड़े गए चालक दल के 22 सदस्यों को सुरक्षित पाकिस्तान पहुँचा दिया है, जिन्हें आज ही ईरानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। पाकिस्तान ने चालक दल की इस वापसी को तनाव कम करने की दिशा में अमेरिका द्वारा उठाया गया एक 'विश्वास बढ़ाने वाला कदम' बताया है। ईरानी ध्वज वाला जहाज 'एम/वी टूसका', जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (आईआरआईएसएल) का हिस्सा है, पिछले महीने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा जब्त कर लिया गया था।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी। अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन रूम पर फायरिंग भी की थी। ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी और इसे 'समुद्री डकैती' करार दिया था। पाकिस्तान के मुताबिक, चालक दल के सदस्यों को रविवार रात उसकी हिरासत में सौंपा गया था और सोमवार को उन्हें ईरान भेज दिया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मरम्मत के बाद जहाज को उसके असली मालिकों को लौटा दिया जाएगा।</p>
<p>सीएनएन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि इन सदस्यों की वापसी ईरानी और अमेरिकी पक्षों के समर्थन से मिलकर की जा रही है। पाकिस्तान ने ऐसे सकारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति के लिए मध्यस्थता के प्रयासों को जारी रखेगा और बातचीत तथा कूटनीति को बढ़ावा देता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:52:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरानी सेना की ट्रंप को चेतावनी: अमेरिकी सेना ने होर्मुज में किया प्रवेश तो होगी कड़ी कार्रवाई ; जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है, पूरी ताकत से की जाएगी इसकी सुरक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में विदेशी सेना के प्रवेश का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फंसे जहाजों को निकालने के लिए 15,000 सैनिकों का मिशन शुरू कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र उसके पूर्ण नियंत्रण में है और बिना अनुमति प्रवेश पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-armys-warning-to-trump-if-us-army-enters-hormuz/article-152635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी सेना ने अमेरिकी को चेतावनी दी है कि उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल होने की कोशिश न करे। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐलान के बाद आई है जिसमें उन्होंने जलमार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान शुरू करने की बात कही है। अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि यह कोई औपचारिक 'एस्कॉर्ट मिशन' नहीं है। इस 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को सफल बनाने के लिए गाइडेड मिसाइल, 100 से अधिक विमान, ड्रोन प्लेटफॉर्म और 15,000 सैनिकों की मदद ली जाएगी।</p>
<p>जवाब में ईरान के सशस्त्र बलों की एकीकृत कमान के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान इस इलाके में आने वाली 'किसी भी विदेशी सेना' और खास तौर पर 'आक्रामक अमेरिकी सेना' को निशाना बनाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यह जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है और इसकी सुरक्षा पूरी ताकत से की जाएगी। अब्दुल्लाही ने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का प्रबंधन मजबूती से कर रहे हैं। हम सभी व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को सलाह देते हैं कि वे यहाँ तैनात हमारी सेना के साथ तालमेल बिठाए बिना यहाँ से न गुजरें, अन्यथा उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p>मेजर जनरल ने कहा कि यह पूरा समुद्री रास्ता ईरानी सेना के दायरे में आता है। अमेरिका की कोई भी 'आक्रामक हरकत' यहाँ के हालात को और खराब करेगी और जहाजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सुरक्षित आवाजाही के लिए 'हर हाल में' ईरानी सेना से संपर्क करना जरूरी है। दूसरी ओर, ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत सोमवार से फंसे हुए व्यापारिक जहाजों को बाहर निकालने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि कई देशों ने अपने जहाजों को मुक्त कराने के लिए अमेरिका से मदद मांगी है, जो इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। उन्होंने इन जहाजों को निर्दोष और इस विवाद से पूरी तरह अलग बताया है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इन तटस्थ देशों के जहाजों को प्रतिबंधित जलमार्ग से सुरक्षित बाहर लाएगी, ताकि वे अपना व्यापारिक कामकाज फिर से शुरू कर सकें। उन्होंने दावा किया कि इस पहल से अमेरिका के साथ-साथ ईरान और पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। घोषणा के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित देशों को सूचित कर दें कि अमेरिका उनके जहाजों और चालक दल की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि सोमवार सुबह से शुरू होने वाली 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' प्रक्रिया के लिए ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने इसे एक मानवीय मिशन बताते हुए कहा कि कई जहाजों पर भोजन और जरूरी सामान खत्म हो रहा है, जिससे वहाँ के कर्मियों की हालत चिंताजनक है। हालाँकि, ट्रंप ने सख्त चेतावनी भी दी कि इस मानवीय काम में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में किसी ने दखल दिया, तो उससे पूरी ताकत के साथ निपटा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 14:58:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी नाकाबंदी के चलते ईरान तेल उत्पादन में कर सकता है कटौती, अमेरिकी सेना ने की ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के दबाव में ईरान ने अपने तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी इंजीनियरों ने कुओं को बंद करना शुरू किया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने शत्रुता समाप्ति की घोषणा की है, लेकिन क्षेत्र में तनाव और अमेरिकी सेना की मौजूदगी बरकरार है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-may-cut-oil-production-due-to-us-blockade-us/article-152526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/iran.png" alt=""></a><br /><p>माॅस्को। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह दावा किया है। एजेंसी ने कहा कि ईरान तेल उत्पादन में कटौती कर रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी इंजीनियर कुओं को बंद करने और गंभीर नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन को तुरंत फिर से शुरू करने में सक्षम हैं। गौरतलब है कि 28 फरवरी को, अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किए, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। </p>
<p>अमेरिका और ईरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बाद में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। दाेनों देशों के बीच फिलहाल किसी तरह की गोलीबारी की कोई खबर नहीं है, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी इंजीनियर कुओं को बंद करने और गंभीर नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन फिर से शुरू करने में सक्षम हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कांग्रेस को पत्र भेजकर ईरान के खिलाफ शत्रुता समाप्त करने की घोषणा की और स्पष्ट किया कि ईरान से संभावित खतरों को रोकने के लिए अमेरिकी सेना क्षेत्र में बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:29:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला : 60 दिन की अनिवार्य संसदीय अनुमति की समयसीमा पूरी होने से पहले युद्ध समाप्ति का ऐलान, सीजफायर जारी रखने के लिए रखी शर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ दो महीने से जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने की घोषणा की है। यह निर्णय वॉर पावर रिज़ॉल्यूशन की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले लिया गया। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में हमले की स्थिति में रक्षात्मक कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित है, जबकि इजरायल को सैन्य सहायता जारी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-trump-government-declaration-of-end-of-war/article-152348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बीते दो महीनों से जारी सैन्य तनाव पर अब विराम लगने की खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब समाप्त माना जाएगा। यह टकराव उस समय शुरू हुआ था जब क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गई थीं। इसके बाद हालात धीरे-धीरे युद्ध जैसी स्थिति में बदल गए, जिसमें समुद्री और सामरिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ीं।</p>
<p>अब अमेरिकी प्रशासन ने वॉर पावर रिज़ॉल्यूशन के तहत 60 दिन की अनिवार्य संसदीय अनुमति की समयसीमा पूरी होने से ठीक पहले युद्ध समाप्ति का ऐलान किया है। हालांकि इस निर्णय में नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में ईरान की ओर से किसी अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला होता है, तो राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की पूर्व अनुमति के रक्षात्मक कार्रवाई करने का अधिकार होगा।</p>
<p>इसी बीच, अमेरिका की ओर से इजरायल को सैन्य सहायता जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में करीब 6,500 टन हथियार और सैन्य सामग्री भेजी गई है, जबकि पूरे 60 दिनों में यह आंकड़ा 1.15 लाख टन से अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्ध समाप्ति की घोषणा हो गई हो, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 15:58:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-पाकिस्तान वार्ता : मॉस्को रवाना हुए Abbas Araghchi ; पुतिन से करेंगे अहम मुलाकात, मध्यस्थता प्रयासों के बीच अमेरिका से वार्ता जारी रखने पर चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ गहन कूटनीतिक चर्चा की है। अमेरिका के साथ संवाद बहाली और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वे अब मास्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-pakistan-talks-abbas-araghchi-leaves-for-moscow-will-have-an/article-151885"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran7.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कई मध्यस्थों की भागीदारी वाले क्षेत्रीय राजनयिक प्रयासों के बीच अमेरिका के साथ बातचीत को निरंतर जारी रखे जाने को लेकर पाकिस्तान के साथ चर्चा की गयी है। अराघची ने टेलीग्राम पर लिखा, "पाकिस्तान में मेरे दोस्तों के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई और यह दौरा सफल रहा। हमने इस बात पर चर्चा की कि किन परिस्थितियों में और किस तरह से बातचीत जारी रखी जा सकती है।"</p>
<p>क्षेत्रीय स्तर पर समानांतर परामर्श के दौरान, अराघची ने ओमान में हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया जहां ईरानी और ओमानी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हो रहे घटनाक्रमों पर बात की। उनका कहना है कि दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा पर समान रुख अपनाया और इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर का संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। ईरानी विदेश मंत्री आगे की बातचीत के लिए मास्को रवाना हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे और वार्ता की वर्तमान स्थिति, युद्धविराम से संबंधित घटनाक्रम और व्यापक क्षेत्रीय स्थितियों पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>हाल के वर्षों में रूस और ईरान के राजनीतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं खासकर तब जब दोनों देश व्यापक पश्चिम देशों के प्रतिबंधों के साए में हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चर्चा में मध्यस्थता प्रयासों और चल रहे क्षेत्रीय संघर्षों पर अद्यतन जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ओमान के अधिकारियों ने यह भी कहा कि श्री अराघची के साथ हुई चर्चा में क्षेत्रीय स्थिरता, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और तनाव कम करने के उद्देश्य से चल रहे मध्यस्थता प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ओमान के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में चल रहे संकटों के लिए संवाद और राजनयिक समाधानों के महत्व पर बल दिया।</p>
<p>ये राजनयिक प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ क्षेत्र में पहले के संघर्ष संबंधी तनावों और प्रत्यक्ष वार्ता में लंबे समय तक विराम के बाद ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:26:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता पर तनाव : ईरानी प्रवक्ता इब्राहिम रजाई का कड़ा रुख, बोले-मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास नहीं है आवश्यक विश्वसनीयता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के पास अमेरिका के साथ बातचीत के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है। प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि इस्लामाबाद डोनाल्ड ट्रंप के हितों के आगे निष्पक्ष रहने में विफल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ऊर्जा युद्ध के बीच, ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए तटस्थ मध्यस्थ की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-on-iran-america-talks-iranian-spokesperson-takes-a-tough-stance/article-151845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़ी आलोचना करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि 'मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।' सांसद ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद 'हमेशा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोलता। पाकिस्तान हमारा एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।' उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए और दोनों पक्षों को असहज सच बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें पाकिस्तान विफल रहा है।</p>
<p>रजाई के अनुसार, पाकिस्तान यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि अमेरिका ने शुरू में प्रस्ताव स्वीकार किया और फिर उससे पीछे हट गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लेबनान और ईरान की रुकी हुई वित्तीय संपत्तियों के संबंध में अमेरिका को उसकी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है। सबसे गंभीर आरोप उस 10-सूत्रीय वार्ता ढांचे को लेकर है, जिसे ईरान का दावा है कि तेहरान यात्रा के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को सीधे सौंपा गया था। ईरान के अनुसार, जनरल मुनीर को यह प्रस्ताव इस समझ के साथ दिया गया था कि इसे अमेरिकी पक्ष तक पहुँचाया जाएगा, लेकिन ईरान का कहना है कि उसे अब तक कोई प्रतिक्रिया या पावती नहीं मिली है।</p>
<p>यह कूटनीतिक तनाव 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि यदि ईरान बात करना चाहता है, तो उन्हें बस फोन करना चाहिए, लेकिन अमेरिका अब इस्लामाबाद में वरिष्ठ वार्ताकार नहीं भेजेगा। पाकिस्तान की मुस्लिम जगत के शांति मध्यस्थ बनने की महत्वाकांक्षा को इस कूटनीतिक गतिरोध से बड़ा झटका लगा है। ईरान का संदेश स्पष्ट है- तटस्थता दिखाई देनी चाहिए, केवल उसका दावा करना पर्याप्त नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पहलगाम हमले की बरसी पर अमेरिकी सांसदों की पाकिस्तान को दो टूक : लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई की मांग, आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में की निंदा </title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन में आयोजित प्रदर्शनी में अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान को लश्कर जैसे आतंकी संगठनों पर नकेल कसने की चेतावनी दी। पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए ब्रैड शेरमन ने आतंकियों को मिलने वाली पनाह की निंदा की। राजदूत क्वात्रा ने भारत के कड़े रुख और 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता को दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-anniversary-of-pahalgam-attack-us-lawmakers-demand-pakistan/article-151501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी सांसदों ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता का आह्वान करते हुए पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों पर कठोर नकेल कसने की अपील की है। वाशिंगटन डी.सी. स्थित कैपिटल हिल में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित प्रदर्शनी 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' के दौरान सांसदों ने 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पहलगाम हमले की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में अमेरिकी कांग्रेस के 19 सदस्य और 60 से अधिक कांग्रेसी कार्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, थिंक टैंक और भारतीय समुदाय के बीच आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में निंदा की गई।</p>
<p>कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमन ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) को लश्कर-ए-तैयबा का ही हिस्सा माना जाता है, जिसे पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। हमें पाकिस्तान सरकार से यह स्पष्ट मांग करनी चाहिए कि वह लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों को पूरी तरह खत्म करे।" संबोधन के दौरान राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने जोर दिया कि मानवता की रक्षा के लिए दुनिया भर के देशों को आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।</p>
<p>हाउस रिपब्लिकन कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष लिसा मैकक्लेन और सांसद रिचर्ड मैककॉर्मिक ने भी इस खतरे को एक 'साझा दुश्मन' बताया। मैकक्लेन ने खुफिया जानकारी साझा करने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि मैककॉर्मिक ने इसे एक ऐसी "अनोखी बुराई" करार दिया जो स्वतंत्रता और एकता पर प्रहार करती है। डिजिटल और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से इस प्रदर्शनी में 1993 के मुंबई बम धमाकों से लेकर 2008 के मुंबई हमलों और पिछले साल हुए पहलगाम हमले के विनाशकारी परिणामों को दिखाया गया। यह आयोजन उन परिवारों और समुदायों को समर्पित था जिन्होंने आतंकी हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है।</p>
<p>कार्यक्रम में भारत की रक्षा नीति के उस कड़े संदेश को भी याद किया गया, जिसके तहत 7 मई, 2025 को भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इस ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान और पीओके में स्थित लश्कर और जैश के नौ प्रमुख ठिकानों एवं ट्रेनिंग सेंटरों को ध्वस्त किया गया था। इस मिशन की विशेषता इसकी सटीक खुफिया जानकारी और नैतिक संयम रही, जिससे आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। इस दौरान रिपब्लिकन सांसद माइकल बॉमगार्टनर, बिल हुइज़ेंगा और डेमोक्रेट नेता रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, जूली जॉनसन, और श्री थानेदार सहित कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:23:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Donald Trump का बयान : इजरायल को बताया अमेरिका का ‘महान सहयोगी’, कहा-वह जीतना जानता है</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की प्रशंसा करते हुए उसे एक ऐसा सहयोगी बताया जो जीतना जानता है। ट्रूथ सोशल पर उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी काबिलियत साबित की है। हालांकि, यह बयान उनके उस निर्देश के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने इजरायल को लेबनान पर बमबारी तुरंत बंद करने को कहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-statement-called-israel-a-great-ally-of-america/article-150998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है जो जीतना जानता है। ट्रंप ने ट्रूथसोशल पर कहा, "चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, उसने अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है।" उन्होंने कहा कि इजरायल जीतना जानता है, "कुछ लोगों के विपरीत" जिन्होंने संघर्ष और तनाव के दौरान अपना असली रंग दिखाया है। राष्ट्रपति ने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। यह टिप्पणी उनके उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने इजरायल से कहा था कि लेबनान पर बमबारी करना "निषिद्ध" है और "बहुत हो गया"।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बातचीत के बावजूद ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार : संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के साथ शांति वार्ता के बावजूद, ईरान ने अपने सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आदेश दिया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ़ ने 'दुश्मन' पर अविश्वास जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन बंदरगाहों की नाकाबंदी से संघर्ष का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-talks-iranian-armed-forces-are-fully-prepared-for-war/article-150996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/मोहम्मद-बगेर-ग़ालिबफ़.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत के बावजूद, ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं। प्रेस टीवी ने ग़ालिबफ़ के हवाले से कहा, "हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। अभी भी, जब हम यहां बैठे हैं, युद्ध छिड़ सकता है। सशस्त्र बल ज़मीन पर पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।"</p>
<p>प्रसारक के अनुसार, संसद अध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया कि जारी बातचीत से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही हो सकती है।  ग़ालिबफ़ ने कहा, "हमारा मानना है कि बातचीत के कारण सशस्त्र बल तैयार नहीं हैं। इसके विपरीत, सड़कों पर आम लोगों की तरह, हमारे सशस्त्र बल भी तैयार हैं।"</p>
<p>इससे पहले, पाकिस्तानी प्रसारक जियो टीवी ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में अगले सप्ताह के अंत में होने की संभावना है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता फिर से शुरू करने की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। मध्यस्थ बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 15:39:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सर्गेई लावरोव ने की कूटनीतिक रवैये की आलोचना, बोले- वादाखिलाफी की आदत छोड़ बातचीत को प्राथमिकता दे अमेरिका, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दे। रूस ने आरोप लगाया कि अमेरिका समझौतों से पीछे हटकर सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका वार्ता जारी है, जबकि रूस ने ईरान की सैन्य शक्ति का समर्थन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sergei-lavrov-criticized-the-diplomatic-attitude-said-give-up/article-150753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sergei-lavrov.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका के कूटनीतिक रवैये की आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन को विरोधी सरकारों के साथ टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए। लावरोव ने कहा कि जब भी अमेरिका को कोई सरकार पसंद न आए तो उसे 'बातचीत के ज़रिए' शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देश अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार रहते हैं और अब तक किसी देश ने अमेरिका के साथ बैठकर बात करने से इनकार नहीं किया है।</p>
<p>सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने कई बार वादों से पांव वापस खींचे हैं। उन्होंने कहा, "वह अमेरिका ही था जिसने पहले समझौते किए और फिर उनसे पलट गया।" लावरोव की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजरायल वर्तमान बातचीत के प्रयासों के पीछे ईरान में सेना उतारने की तैयारी कर रहे हो सकते हैं।</p>
<p>रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, परिषद ने पाया है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति में इजाफा हुआ है। रूस ने ईरान की रक्षा क्षमताओं पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ईरान के पास इतनी सैन्य ताक़त है कि वह अमेरिका या इज़रायल की किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब दे सके। इन चेतावनियों के बावजूद, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष बातचीत अभी भी चल रही है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के संदेश पहुंचाने और आगे की बातचीत को आसान बनाने के लिए ईरान में है। उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत की। यह बातचीत इस्लामाबाद में हुए पिछले दौर के बाद रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशों का हिस्सा थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:17:43 +0530</pubDate>
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