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                <title>political parties - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने की असम में प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ बैठक, इन मुद्दों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग ने गुवाहाटी में राजनीतिक दलों के साथ बैठक की। दलों ने बिहू उत्सव को देखते हुए एक या दो चरणों में मतदान कराने का सुझाव दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/before-the-upcoming-assembly-elections-the-election-commission-held-a/article-143526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ec.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ ने असम में आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मंगलवार को गुवाहाटी में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दलों के साथ बैठकें आयोजित की। इस बैठक में असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।</p>
<p>चर्चा में चार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मान्यता प्राप्त राज्य दलों में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के नेता मौजूद थे।आयोग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, अधिकांश राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया कि सुचारू संचालन सुनिश्चित करने और लंबे समय तक चलने वाले प्रचार को कम करने के लिए चुनाव एक ही चरण में या अधिकतम दो चरणों में कराये जायें।</p>
<p>आयोग ने विज्ञप्ति में कहा, ज्यादातर दलों का मानना था कि प्रशासनिक सुविधा और मतदाता भागीदारी के लिहाज से एक चरण का चुनाव, या अधिकतम दो चरण बेहतर होंगे। बैठक के दौरान उठायी गयी एक और प्रमुख मांग यह थी कि चुनाव कार्यक्रम में असम के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सवों में से एक बिहू उत्सव का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।</p>
<p>विज्ञप्ति में कहा गया है, राजनीतिक दलों ने अनुरोध किया कि चुनाव की तारीखों की घोषणा बिहू उत्सव को ध्यान में रखते हुए की जाए ताकि मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारंपरिक उत्सवों, दोनों में पूरी तरह से भाग ले सकें। दलों ने राज्य में हाल ही में किए गए मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की सराहना की और इसे मतदाता सूचियों की सटीकता और समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p>आयोग के अधिकारियों ने उल्लेख किया कि चुनाव के शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए भी सुझाव दिए गए, जिसमें जिला अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय शामिल है। बातचीत के दौरान, आयोग ने कानून के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आयोग ने कहा, आयोग राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए रचनात्मक सुझावों को महत्व देता है और चुनाव कार्यक्रम तथा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देते समय उन पर सावधानीपूर्वक विचार करेगा। गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल के आसपास होने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 15:07:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों में इलेक्शन के लिए अगले महीने तारीखों का ऐलान संभव, चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारियां</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल समेत इस वर्ष पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग इसी महीने के अंत से इन राज्यों का दौरा शुरू कर सकता है। इन दौरों का उद्देश्य चुनावों की औपचारिक घोषणा से पहले कानून-व्यवस्था की स्थिति, प्रशासनिक तैयारियों और अन्य जरूरी इंतजामों की समीक्षा करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/it-is-possible-to-announce-dates-for-elections-in-5/article-141989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल समेत इस साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां करना शुरू कर दी हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग इन राज्यों में इसी महीने से कुछ दिनों बाद ही विजिट करना भी शुरू कर देगा। ताकि चुनावों का ऐलान करने से पहले इन राज्यों में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से लेकर अन्य तरह के इंतजामों की जानकारी ली जा सके। </p>
<p>उम्मीद है कि मार्च के पहले सप्ताह के बाद कभी भी इन राज्यों के लिए चुनावों का ऐलान कर दिया जाएगा। इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें 294 विधानसभा सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल सात मई 2026 तक है। इसके अलावा 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई, 140 सीटों वाले केरल विधानसभा का कार्यकाल 23 मई, 126 विधानसभा सीटों वाले असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को और 30 सीटों वाले पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल इस साल 15 जून को खत्म हो रहा है। इससे पहले इन राज्यों में नई विधानसभा का गठन होना जरूरी है। जिसे देखते हुए ही चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।</p>
<p><strong>चुनाव कराने से पहले विजिट करना शुरू करेगा आयोग </strong></p>
<p>इनमें चार राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल मई में और पुडुचेरी का जून में खत्म हो रहा है। इनमें भी सबसे पहले सात मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसे देखते हुए सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग फरवरी से मार्च के पहले सप्ताह तक इन राज्यों में चुनाव कराने से पहले विजिट करना शुरू करेगा। इसमें इन राज्यों के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और सीईओ के अलावा राजनीतिक पार्टियों से भी बैठक की जाएंगी। ताकि अगर किसी राजनीतिक पार्टी को चुनावों को लेकर कोई वैलिड पाइंट भी हो तो चुनावी प्रक्रिया में उसे भी अपनाया जा सके।</p>
<p><strong>मार्च के पहले सप्ताह में घोषणा संभव</strong></p>
<p>सूत्रों का कहना है कि पिछले साल बिहार में हुए विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान करने से लेकर पूरी चुनावी प्रक्रिया खत्म होने तक 42 दिन का समय लगा था। चुनावों की घोषणा छह अक्टूबर 2025 को की गई थी। दो चरणों में हुए बिहार में चुनावी प्रक्रिया 16 नवंबर को खत्म हो गई थी। जबकि बिहार की विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक था। इसे देखते हुए इन पांच राज्यों में भी मार्च के पहले सप्ताह के बाद ही चुनावों की घोषणा होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>थाईलैंड में आम चुनाव के लिए मतदान जारी, 20 लाख से ज्यादा लोग करेंगे वोटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[थाईलैंड में आम चुनाव से पहले पूर्व मतदान शुरू हुआ। 20 लाख से अधिक मतदाता हिस्सा ले रहे हैं। 57 दलों के बीच 500 सीटों के लिए मुकाबला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/voting-continues-for-general-elections-in-thailand-more-than-20/article-141536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(3).png" alt=""></a><br /><p>बैंकॉक। थाईलैंड में आम चुनाव के लिए पूर्व मतदान रविवार को सुबह आठ बजे शुरू हुआ। इस प्रक्रिया में 20 लाख से ज्यादा पात्र मतदाता हिस्सा ले रहे हैं, जो आठ फरवरी को आधिकारिक मतदान के दिन अपना वोट नहीं डाल पाएंगे।</p>
<p>इस मतदान में हिस्सा लेने वाले मतदाताओं को मतदान केन्द्र पर दो बैलेट पेपर दिए गए है जिनमें एक प्रतिनिधि सभा सदस्य को चुनने के लिए और दूसरा अपनी पसंदीदा राजनीति दल को वोट देने के लिए। मतदान आज शाम 5 बजे समाप्त होगा और आठ फरवरी के बाद सभी मतपत्रों की गिनती एक साथ की जाएगी।</p>
<p>चुनाव में पांच करोड़ से ज्यादा मतदाता प्रतिनिधि सभा के कुल 500 सदस्य चुनेंगे, जिनमें से 400 स्थानीय चुनाव क्षेत्रों से चुने जाएंगे और बाकी 100 पार्टी सूची के आधार पर आवंटित किए जायेंगे।</p>
<p>थाईलैंड के चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक चुनाव में 57 राजनीतिक दल प्रतिनिधि सभा सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। आधिकारिक चुनाव परिणाम नौ अप्रैल तक घोषित कर दिए जायेंगे। नई संसद को अध्यक्ष चुनने के लिए 15 दिनों के अंदर एक सत्र बुलाना होगा, जिसके बाद प्रतिनिधि सभा नए प्रधानमंत्री को चुनने के लिए मतदान करेगी। थाईलैंड में पिछला आम चुनाव मई 2023 में हुआ था और मौजूदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनुतिन तब से तीसरे प्रधानमंत्री हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:38:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान के 18 और रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को  हटाने की कार्यवाही शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[निर्वाचन आयोग की सूची में शामिल ऐसे राजनीतिक दलों को सूची से बाहर करने की कार्यवाही शुरू हो गई है, जिन्होंने पिछले 6 साल से कोई चुनाव नहीं लड़ा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/action-to-remove-18-more-registered-political-parties-of-rajasthan/article-123363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निर्वाचन आयोग की सूची में शामिल ऐसे राजनीतिक दलों को सूची से बाहर करने की कार्यवाही शुरू हो गई है, जिन्होंने पिछले 6 साल से कोई चुनाव नहीं लड़ा है। राजस्थान में ऐसे 18 रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों पर यह कार्यवाही शुरू हुई है। इन दलों को अपना पक्ष रखने के लिए सूचना दी जा रही है।</p>
<p>निर्वाचन आयोग के इस अभियान में पहले चरण में देशभर में 334 राजनीतिक दलों को सूची से बाहर किया गया, जिनमें राजस्थान के 9 राजनीतिक दल शामिल थे। अभियान के दूसरे चरण में 476 दलों की पहचान की गई है, जिनमें राजस्थान के 18 राजनीतिक दल शामिल हैं। इन दलों को सूची से बाहर करने से पहले उस राज्य के संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने सुनवाई के मौका दिया जाएगा। सुनवाई के बाद सम्बंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट पर भारत निर्वाचन आयोग दल को सूची से बाहर करने पर निर्णय लेगा।</p>
<p><strong>राजस्थान में इन 18 पार्टियों को सुनवाई का मौका : </strong></p>
<p>अखंड समता पार्टी, अवामी आमजन पार्टी, भारत नव निर्माण पार्टी, भारतीय हिन्दू सेना रिस्टोर्ड,भारतीय युवा शक्ति, भारतीय जनतांत्रिक पार्टी, भारतीय प्रजाजन पार्टी, ग्रीन पार्टी ऑफ इंडिया, नेशनल बैकवर्ड(मूल) दलित माइनॉरिटीज क्रांति दल, नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी, नया भारत पार्टी, पंच पार्टी, राजस्थान जन सत्ता, राष्ट्रीय अतुल्य युवा पार्टी, राष्ट्रीय मार्क्सवादी दलित लहर पार्टी, राष्ट्रीय साफ नीति पार्टी, सर्वशक्ति दल और शाइनिंग इंडिया पार्टी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 17:26:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसे है जहरीली यमुना नदी की चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[ हरियाणा और दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना की किसी को चिन्ता नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/who-is-worried-about-poisonous-yamuna-river/article-91399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/yamuna.png" alt=""></a><br /><p>आज यमुना की चिंता किसी को नहीं है। न दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी की सरकार को और न केन्द्र की भाजपा सरकार को। न दिल्ली और केन्द्र की सत्ता से बाहर हो चुकी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को। आजकल दिल्ली व केन्द्र में सत्तासीन दोनों दलों के साथ कांग्रेस को हरियाणा चुनाव में कैसे सत्ता मिले, इसकी चिंता सताए जा रही है और इस के लिए हरसंभव जोड़-तोड़ में भी वे लगी हैं। लेकिन विडम्बना यह है कि हरियाणा और दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना की किसी को चिन्ता नहीं है।</p>
<p>दुखदायी बात तो यह है कि किसी भी दल ने यमुना के प्रदूषण के बाबत चुनाव में आजतक एक भी टिप्पणी करना तो दूर एक शब्द तक नहीं बोला है। यह राजनीतिक दलों की यमुना के प्रति संवेदनहीनता का जीता जागता सबूत है। भले दिल्ली-हरियाणा की जीवनदायिनी यमुना मर रही हो, वह जहरीली हो गई हो, उसमें कॉपर, जिंक, निकेल, कैडमियम और क्रोमियम जैसे सेहत के लिए हानिकारक तत्व मौजूद हैं और तो और यमुना में रसायन के चलते झाग को रोकने के लिए समूचे सीवरेज के ट्रीटमेंट की जरूरत है, उसकी चिंता इस चुनाव में किसी को नहीं है। उनका येन-केन प्रयास केवल और केवल हरियाणा की सत्ता पर काबिज होना ही है और कुछ नहीं। जबकि निकट भविष्य में दिल्ली में सत्ता पर काबिज आप को पुन: सत्ता में वापसी के लिए विधान सभा चुनाव का सामना भी करना है। उस हालत में आप संयोजक दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विधानसभा चुनाव से पहले कहते नहीं थकते थे कि यमुना शुद्ध होने पर सबसे पहले उसमें मैं खुद स्रान करूंगा। वह दावा कहें या वायदा थोथा ही साबित हुआ। विडम्बना यह कि आप सरकार के पांच साल पूरे होने के बाद भी यमुना आज पहले से ज्यादा मैली है। बीते दशकों का इतिहास इसका जीता-जागता गवाह है कि यमुना साल-दर-साल कितनी प्रदूषित हुई है। <br /> <br />दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की ही मानें तो यमुना नदी के राष्टट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़ने वाले हिस्से में जल प्रवाह 23 घन मीटर प्रति सैकेण्ड क्यूमैक्स कम है। यह जल प्रवाह स्नान योग्य होने और नदी में पारिस्थितिकी बरकरार रखने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। यहां यह जान लेना जरूरी है कि दिल्ली में पड़ने वाला नदी का हिस्सा इसके तकरीब 80 फीसदी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। ई-फ्लो जल प्रवाह की न्यूनतम मात्रा है जो किसी भी नदी या जलाशय को अपनी पारिस्थितिकी बरकरार रखने और उसके स्नान योग्य होने के लिए जरूरी है। हकीकत यह है कि आमतौर पर हरियाणा के यमुना नगर स्थित हथिनी कुंड बैराज से मात्र 10 क्यूमैक्स पानी छोड़ा जाता है। जबकि 23 क्यूमैक्स पानी यानी 43.7 करोड़ गैलन रोजाना अक्टूबर से जून के महीने के दौरान नदी में छोड़ा जाना चाहिए। उस हालत में जबकि इसकी सिफारिश राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की 2019 में ही कर चुका है। यह तो एक बानगी भर है। लोकसभा की स्थाई समिति द्वारा यमुना पर तैयार रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि यमुना के जल में भारी धातु के तत्वों की भरमार है जो जानलेवा बीमारियों के कारण हैं। समिति ने यमुना में झाग बनने से रोकने हेतु दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से प्रवाहित होने वाले समूचे सीवरेज का ट्रीटमेंट किए जाने की जरूरत बताई है। इस झाग से त्वचा रोग और संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही समिति ने जल संसाधन विभाग से ऐसे नियम, दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है कि जिसमें यमुना सहित देश की सभी नदियों में अपशिष्ट प्रवाहित किए जाने के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान हो। </p>
<p>समिति ने पर्यावरण मंत्रालय की इस बात पर खिंचाई की कि उसने 2018 में की गई सिफारिश पर एक्शन टेकन नोट दाखिल करने में देरी क्यों की और इसका कारण क्या था। समिति ने जल संसाधन विभाग को सुझाव दिया है कि वह यमुना नदी के लिए भी स्वच्छ गंगा मिशन की तर्ज पर एक कोष की स्थापना करे ताकि नदी की सफाई से जुडे़ कामों में पैसे की कमी आडे़ न आए। यमुना की सफाई पर बीते दो दशकों से भी ज्यादा के दौरान अभी तक करोड़ों स्वाहा हो चुके है। उसके बाद भी यमुना में अमोनिया के बढ़ते स्तर पर कोई अंकुश नहीं लग सका है। हरिद्वार और वाराणसी की तर्ज पर उसके घाटों का सौंदर्यीकरण कर पर्यटक स्थल बना और वहां आरती का कार्यक्रम आयोजित करने से यमुना की बदहाली छिप जाएगी, यह जनता को धोखे में रखने के सिवाय कुछ नहीं। इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता। </p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Sep 2024 10:43:55 +0530</pubDate>
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                <title>चुनावी बांड की बिक्री 3 जुलाई से</title>
                                    <description><![CDATA[ सरकार ने राजनीति दलों को चंदा देने के इच्छुक लोगों के लिए चुनावी बांड की बिक्री का 27वां चरण तीन जुलाई से शुरू करने की घोषणा की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sale-of-electoral-bonds-from-july-3/article-50499"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/eb.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने राजनीति दलों को चंदा देने के इच्छुक लोगों के लिए चुनावी बांड की बिक्री का 27वां चरण तीन जुलाई से शुरू करने की घोषणा की है। सरकार ने आज यहां जारी बयान में कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को बिक्री के 27वें चरण में 03 जुलाई 2023 से 12 जुलाई 023 तक अपनी 29 अधिकृत शाखाओं  के माध्यम से चुनावी बांड जारी करने और भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है।</p>
<p>सरकार ने 02 जनवरी, 2018 की अधिसूचना के माध्यम से चुनावी बांड स्कीम 2018 अधिसूचित की है। इस स्कीम के प्रावधानों के अनुसार ये बांड ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो भारत का एक नागरिक अथवा भारत में निगमित या स्थापित है, खरीदा जा सकता है। कोई व्यक्ति अकेले अथवा अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से बांड खरीद सकता है। इसके लिए केवल वही राजनीतिक पार्टियां बांड प्राप्त करने की पात्र होंगी जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 29क के तहत पंजीकृत हों और जिन्हें लोक सभा अथवा राज्य की विधान सभा में  पिछले आम चुनाव में डाले गए कुल वोटों का कम से कम एक प्रतिशत वोट प्राप्त हुआ हो। इस बांड का नकदीकरण केवल पात्र राजनीतिक पार्टी द्वारा प्राधिकृत बैंक के निर्दिष्ट बैंक खाते के माध्यम से किया जाएगा। </p>
<p>बांड जारी करने की तिथि से पन्द्रह कैलेण्डर दिवस के लिए वैध होंगे और किसी आदाता राजनीतिक दल के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाएगा यदि बांड वैध अवधि की समाप्ति के पश्चात् जमा किया जाता है। किसी पात्र राजनीतिक दल द्वारा अपने खाते में जमा किया गया बांड को उसी दिन क्रेडिट किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 14:29:34 +0530</pubDate>
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                <title>लोकतंत्र की दुश्मन है परिवारवादी राजनीति : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिवारवादी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा है कि परिवारवादी राजनीति लोकतंत्र की दुश्मन है और इसे बढ़ावा देने वाले दलों ने हमेशा वोट बैंक की राजनीति की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/political-parties-only-vote-bank-politics-in-india--says-modi/article-7467"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/65465464.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिवारवादी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा है कि परिवारवादी राजनीति लोकतंत्र की दुश्मन है और इसे बढ़ावा देने वाले दलों ने हमेशा वोट बैंक की राजनीति की है। मोदी ने आभासी माध्यम से यहां भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं, मंत्रियों, सांसदों और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में दशकों तक कुछ राजनीतिक दलों ने सिर्फ वोटबैंक की राजनीति की। कुछ लोगों को ही वायदे करो, ज्यादातर लोगों को तरसाकर रखो, भेदभाव-भ्रष्टाचार ये सब वोटबैंक की राजनीति का साइड इफेक्ट था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस वोटबैंक की राजनीति को ना सिर्फ टक्कर दी है, बल्कि देशवासियों को इसके बारे में सतर्क करके इसके नुकसान को समझाने में भी सफल रही है। उन्होंने कहा कि तीन-चार पीढिय़ों ने खुद को खपाकर भाजपा को यशस्वी पार्टी बनाया है। भाजपा एक भारत, श्रेष्ठ भारत के मंत्र पर चल रही है। 4 राज्यों में भाजपा की डबल इंजन सरकार लौटी है। मोदी ने कहा कि इस बार का भाजपा स्थापना दिवस तीन कारणों से अहम है। पहला कारण इस समय हम देश की आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। दूसरा कारण तेजी से बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियां भी हैं। तीसरा भारत के लिए नए अवसर लगातार आ रहे हैं।</p>
<p>सरकार की जनकल्याण योजनाएं लाभार्थी तक पहुंच रही हैं। कोरोना काल में देश ने बड़ा लक्ष्य हासिल किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार का प्रयासभेदभाव की सारी गुंजाइश को खत्म करना, तुष्टिकरण की आशंकाओं को समाप्त करना, स्वार्थ के आधार पर लाभ पहुंचाने की प्रवृत्ति को खत्म करना और समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े आखिरी व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुंचे, ये सुनिश्चित करना है। हमारी सरकार राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए काम कर रही है। देश के पास नीतियां भी हैं, नियत भी है। देश के पास निर्णयशक्ति भी है, और निश्चयशक्ति भी है।  आज दुनिया के सामने एक ऐसा भारत है जो बिना किसी डर या दबाव के, अपने हितों के लिए अडिग रहता है। जब पूरी दुनिया दो विरोधी ध्रुवों में बंटी हो, तब भारत को ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है, जो दृढ़ता के साथ मानवता की बात कर सकता। मोदी ने कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण से देखें या राष्ट्रीय दृष्टिकोण से, भाजपा और इसके प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व लगातार बढ़ रहा है। इसलिए भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता, देश के सपनों का प्रतिनिधि है, देश के संकल्पों का प्रतिनिधि है। इस अमृत काल में भारत की सोच आत्मनिर्भरता की है, लोकल को ग्लोबल बनाने की है, सामाजिक न्याय और समरसता की है। इन्हीं संकल्पों को लेकर एक विचारबीज के रूप में पार्टी की स्थापना हुई थी। इसलिए ये अमृत काल भाजपा के हर कार्यकर्ता के लिए कर्तव्य काल है।<br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 13:09:49 +0530</pubDate>
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