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                <title>ईंधन संकट: श्रीलंका में आपूर्ति बाधाओं के बीच अनिवार्य क्यूआर कोड व्यवस्था लागू, साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम एशिया युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने पर श्रीलंका ने अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली फिर से शुरू की है। जमाखोरी रोकने के लिए कारों के लिए 15 लीटर और बाइक के लिए 5 लीटर जैसे साप्ताहिक कोटे तय किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्टॉक का कुशल प्रबंधन कर आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fuel-crisis-in-sri-lanka-amid-supply-constraints-mandatory-qr/article-146576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sri-lanka.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति मार्गों में आए व्यवधानों को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने रविवार से देश भर में वाहनों के लिए अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से ईंधन वितरण शुरू कर दिया है। ऊर्जा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कदम देश के ईंधन भंडार का कुशल प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था आज सुबह से प्रभावी हो गई है। अब किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना पंजीकृत क्यूआर कोड के वाहनों को ईंधन जारी नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस प्रणाली के साथ-साथ वाहनों के लिए साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित किया है। इसके तहत बसों को 60 लीटर, कारों को 15 लीटर, मोटरसाइकिल को 5 लीटर, वैन को 40 लीटर और भारी वाहनों (लॉरी) को 200 लीटर ईंधन आवंटित किया गया है। इसके अलावा थ्री-व्हीलर्स के लिए 15 लीटर और विशेष प्रयोजन वाहनों के लिए 40 लीटर की सीमा तय की गई है।</p>
<p>ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और घरेलू मांग में अचानक आई तेजी के कारण मौजूदा स्टॉक का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना आवश्यक हो गया था। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईंधन की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी ने भी मांग में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्यूआर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी पर लगाम लगाना और आम जनता के दैनिक कार्यों को बिना किसी व्यवधान के सुनिश्चित करना है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि श्रीलंका ने इससे पहले वर्ष 2022 के भीषण आर्थिक संकट के दौरान भी इसी प्रकार की क्यूआर प्रणाली का सफल कार्यान्वयन किया था। आवश्यक सेवाओं और उत्पादन गतिविधियों में लगे वाहनों के लिए अलग से वितरण व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:27:53 +0530</pubDate>
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                <title>खानपुर उपखंड की सरखंडिया ग्राम पंचायत का मामला : ओदपुर को सड़क नसीब नहीं, ‘रोड नहीं वोट नहीं’ की तैयारी </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पिछले विधानसभा चुनाव का भी ग्रामीणों ने किया था बहिष्कार।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-case-of-sarkhandia-gram-panchayat-of-khanpur-subdivision--odpur-does-not-get-a-road--no-road--no-preparation-for-voting/article-127116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>पनवाड़। पनवाड़ क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क न होने से लोगों को आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुझना पड़ रहा है, ऐसा ही मामला खानपुर उपखंड की ग्राम पंचायत सरखंडिया के ओदपुर गांव में देखने को मिला। जहां पर ग्रामीणों को दो किलोमीटर पक्की सड़क तक पहुंचने के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयासरत है, जिसके लिए ग्रामीणों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर भी अवगत करा चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने पिछले विधानसभा चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ चुनाव का बहिष्कार कर दिया गया था, तब उपखंड के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश कर गांव तक पक्की सड़क निर्माण का करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब आज ग्रामीण अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को देखते हुए पुन: गांव तक सड़क के लिए कमर कस चुके हैं और आगामी पंचायती राज चुनाव में बहिष्कार की ठान चुके हैं। ओदपुर गांव निवासी श्याम बिहारी शर्मा,गोविंद शर्मा,बिट्टू मीणा,विजय जांगिड़,ललित जांगिड़,त्रिलोक मीणा सहित अन्य लोगों ने बताया कि आजादी के 79 वर्ष बीत जाने पर भी झालावाड़ जिले की आखिरी सीमा पर स्थित ओदपुर गांव आज भी जिले की सड़क से वंचित है। गांव से खुमावदा गांव तक जोड़ने वाली मुख्य सड़क नहीं बन पाने के कारण ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा जैसे अस्पताल,स्कूल,पंचायत मुख्यालय,उपखंड मुख्यालय जैसी कई सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। ओदपुर गांव से खुमावदा गांव की दूरी मात्र दो किलोमीटर है, जिस पर आज तक सड़क नहीं बन पाने से बारिश के मौसम में सड़क की हालात बहुत ज्यादा खराब हो जाती है जिससे पैदल ही नहीं वाहनों से निकल पाना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे स्कूल आने जाने वाले छात्र छात्राओं से लेकर बीमार व्यक्ति व राशन पानी लेने के लिए भी कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय,उपखंड मुख्यालय सहित बीमारी व महिलाओं को प्रसवपीड़ा होने पर ग्रामीणों को अस्पताल पहुंचने के लिए कोटा जिले से सटे खजुरी गांव होकर अस्पताल पहुंचना पड़ता है जिसमें भी तेज बारिश में खजुरी गांव की नांगली नदी की पुलिया नीची होने के कारण पानी में डूबी रहती है वहा भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और ट्रैक्टरों की मदद से जान जोखिम में डालकर नदी पार कर अस्पताल जाना पड़ता है। इससे ग्रामीणों को 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता हे जिससे ग्रामीणों का समय के साथ धन की बबार्दी हो रही है ।</p>
<p>झालावाड़ जिले की अंतिम सीमा पर स्थित ओदपुर गांव आज तक जिले की सड़क से नहीं जुड़ पाया है। दो किलोमीटर कच्ची सड़क के अभाव के ग्रामीणों सहित विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को कच्चे रास्ते से ही स्कूल जाना पड़ रहा है। अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। <br /><strong>- श्याम शमा, ओदपुर निवासी</strong></p>
<p>ओदपुर गांव से ग्राम पंचायत मुख्यालय तहसील मुख्यालय पर सरकारी कामकाज रोजमर्रा के कामों के लिए आने जाने के लिए खजुरी होकर जाना पड़ता है जिसमें लगभग 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर जाना पड़ता है जिससे धन और समय की हानि होती है।<br /><strong>- बंटी शमा, ओदपुर निवासी</strong></p>
<p>ओदपुर गांव सड़क जैसी सुविधा के अभाव में जूूझ रहा है, दो किलोमीटर कच्ची होने के कारण ग्रामीणों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- गोविंद शमा, ओदपुर निवासी </strong></p>
<p>ओदपुर गांव में सड़क की मांग के लिए कई बार अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया। <br /><strong>- त्रिलोक मीणा, ओदपुर निवासी</strong></p>
<p>खुमावदा से ओदपुर तक सड़क का पहले से स्टीमेट बनाकर भेज रखा हैं। फिर स्टीमेट बनाकर भेज देंगे, स्वीकृति मिलने पर निर्माण कार्य शुरू  कराया जाएगा।<br /><strong>- विश्वेंद्र शर्मा, कनिष्ठ अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग खानपुर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 14:57:39 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रक ऑपरेटर की सरकार से मांग, राजस्थान में रोका जाए अवैध बजरी परिवहन</title>
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                        <![CDATA[ऑल राजस्थान बजरी ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर सोसाइटी ने सरकार से मांग की है कि वह अवैध बजरी के परिवहन को रोक और आमजन को सस्ती बजरी उपलब्ध कराने के लिए नई लीज शुरू करे]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/illegal-gravel-transportation-should-be-stopped-in-rajasthan-gravel-truck/article-96479"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ऑल राजस्थान बजरी ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर सोसाइटी ने सरकार से मांग की है कि वह अवैध बजरी के परिवहन को रोक और आमजन को सस्ती बजरी उपलब्ध कराने के लिए नई लीज शुरू करे। सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष नवीन शर्मा ने सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थान में करीब 7000 ट्रक ऑपरेटर है, जो की बजरी का लीगल ट्रांसपोर्टेशन करते हैं। लेकिन उनके पास पूरे दस्तावेज होने के बावजूद पुलिस उन पर कार्रवाई कर रही है। ट्रकों को थाने में ले जाकर सीज कर दिया जाता है। इसके चलते उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जबकि अवैध रूप से बजरी भरकर भेज रहे माफिया को पुलिस नहीं रोकती है, क्योंकि उनकी पुलिस से मिलीभगत होती है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि वे मनमानी कीमतों पर बजरी को बेच रहे हैं।  ऐसे में अगर सरकार और भी बंद पड़ी माइनिंग लीजो को शुरू करेगी तो आम जनता को सस्ती दरों पर बजरी उपलब्ध हो पाएगी और अवैध माइनिंग पर अंकुश लगेगा । इससे बजरी का लीगल ट्रांसपोर्टेशन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों को भी राहत मिलेगी।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 17:46:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>डाबी से बूंदी के लिए सीधी रोडवेज बस का इंतजार</title>
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                        <![CDATA[बसों की कमी से क्षेत्रवासी परेशान। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/waiting-for-a-direct-roadways-bus-from-dabi-to-bundi/article-95270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>डाबी। बरड़ क्षेत्र में स्टेट हाइवे-115 पर डाबी-बरुंधन वाया बूंदी के बीच यात्रियों के लिए आवाजाही के लिए साधन नहीं होने से क्षेत्रवासियों को परेशान होना पड़ रहा है। इसके चलते डाबी बरड़ क्षेत्र में स्टेट हाईवे 115 पर जिला मुख्यालय तक जाने के लिए डाबी से कोई सरकारी बस सेवा उपलब्ध नहीं होने ग्रामीण परेशान है। स्थानिय जन प्रतिनिधियों को बहुत बार समस्या से अवगत कराने के बाद भी कोई ध्यान नही दिया जा रहा है जिसके चलते ग्रामीण को अतिरिक्त 60 से  70 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर बून्दी पहुंच रहे है। डाबी में उपतहसील होने बावजूद  जिला प्रशासन का कोई ध्यान नही है। बार-बार बस सेवा शुरू करने की मांग रखने के बाद भी जिला प्रशासन व बूंदी परिवहन विभाग चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीणों का कहना है जल्दी ध्यान देकर बस सेवा चालू की जाए जिससे सरकारी काम काज के लिए आने जाने में सुविधा हो। स्थानीय कस्बेवासियों ने जनप्रतिनिधियों और बूंदी आगार प्रबंधक से डाबी से जिला मुख्यालय के बीच रोडवेज बस सेवा शुरू कराने की मांग रखी है। ग्रामीणों ने बताया कि डाबी से बूंदी के बीच सीधी रोडवेज बस सेवा सुचारू नहीं होने से तीज त्योहारों पर महिलाओं, बच्चो को परेशान नहीं होना पड़े। बस चालू नहीं होने पर यात्रियों को कोटा होते हुए बूंदी जाना पड़ता है। इससे यात्रियों को पैसे और समय का नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने स्टेट हाइवे-115 पर जल्द रोडवेज बस शुरू कराने की मांग रखी है। </p>
<p><strong>व्यापारियों और क्षेत्रवासियों की पीड़ा</strong><br />कस्बे के व्यापारी सुरेश जैन ने कहा कि दस साल पहले दो प्राइवेट शंकर बसे बूंदी से चलती थी। इन बसों के बंद होने से अब जिला मुख्यालय तक जाने के लिए कोई बस सेवा नहीं है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद कोई ध्यान नहीं है जिस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को ध्यान देकर जल्दी बस चालू करानी चाहिए। सब्जी व्यापारी गोपाल मेघवाल ने कहा कि डाबी से बूंदी व डाबी से तालेड़ा जाने के लिये कोटा जाना पड़ता है जिससे आने जाने के लिए यात्रियों को परेशानी हो रही है। विमल जैन ने कहा कि लंबे समय से डाबी से जिला मुख्यालय के बीच रोडवेज बस सेवा की स्थानीय जनप्रतिनिधि मांग करते रहे हैं। मोनू पोखरणा ने कहा कि कस्बे से जिला मुख्यालय के बीच रोडवेज बस सेवा शुरू हो तो सैकड़ों लोगों को राहत मिल सकती हैं। इस तरह सीताराम बंजारा, देवजी का खेड़ा के केशु बंजारा, गोरू बंजारा, घीसू बंजारा सहित ग्रामीणों ने रोडवेज बस सेवा शुरू कराने की मांग रखी है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />परिवहन विभाग ग्रामीण बस सेवा फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहा है। फिलहाल अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किए गए है। जब आदेश जारी होंगे तो डाबी के लिए बस सेवा शुरू कर दी जाएगी।                          <br /><strong> - सुनीता जैन, प्रबंधक बूंदी रोडवेज डीपो</strong></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 14:56:05 +0530</pubDate>
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                <title>ई ऑटो दे सकते हैं बच्चों को सुरक्षा, संरक्षा और सस्ती सुविधा </title>
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                        <![CDATA[स्कूली बच्चों के लिए ई- आॅटो चलें तो फायदा ही फायदा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-autos-can-provide-safety--security-and-affordable-facilities-to-children/article-73248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/e-auto-de-skte-h-bachho-ko-suraksha,-sanraksha-or-sasti-suvidha...kota-news-20-03-2024.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक ओर देश दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयोगिता बढ़ती जा रही है, दूसरी ओर शहर में आज भी लगभग सभी  स्कूल अपने विद्यार्थियों के लिए परिवहन के रूप में ऑटो, वैन या बस का उपयोग कर रहे हैं। जहां पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण स्कूलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले इन वाहनों का भार अभिभावकों पर पड़ता है। साथ ही उन्हें स्कूल की मोटी फीस के अलावा अतिरिक्त रूप से वाहनों का किराया भी देना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों पर दोगुनी मार पड़ रही है। इसके साथ पेट्रोल व गैस से संचालित ऑटो बच्चों के लिए सुरक्षित भी नहीं रहते। कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी है। ऐसे में निजी विद्यालयों में ई वाहनों का उपयोग बढ़ाने पर सरकार को ध्यान देना चाहिए जो अभिभावकों पर अतिरिक्त भार के साथ पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी कारक साबित हो और बच्चों को लिए सुरक्षित हो सके।</p>
<p><strong>वैन एलपीजी से चलती हैं जिससे हादसे का रहता है खतरा</strong><br />निजी विद्यालयों में बच्चों को लाने ले जाने के लिए सबसे अधिक ऑटो या वैन का उपयोग किया जाता है जिनमें वाहन मालिक मोडिफिकेशन करवाकर एलपीजी किट लगवा लेते हैं। बिना किसी सुरक्षा जांच के लगी इन किट से कभी भी हादसा हो सकता है जो बच्चो की जान को भी खतरा पैदा कर सकता है। वहीं गैस लीकेज होने की दशा में भी दम घुटने से बच्चों की जान पर बन सकती है। कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में इन वाहनों के स्थान पर ई वाहनों का उपयोग किया जाए तो इस प्रकार के हादसे की संभावनाओं से बचा जा सकता है। इसके अलावा ई वाहन बच्चों के लिए बेहतर परिवहन भी साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>नियमों की नहीं कर रहे पालना</strong><br />वर्तमान में कई निजी विद्यालयों में संचालित बाल वाहिनियां तय मापदंडों का खुले रूप से उल्लघंन कर रही हैं। नियमानुसार विद्यालयों में बच्चों के परिवहन के लिए उपयोग की जाने वाली बाल वाहिनियों में बच्चों के बैठने व बैग रखने के लिए पर्याप्त जगह, फर्स्ट एड किट बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और सीसीटीवी कैमरा होना आवश्यक है। इसके अलावा बाल वाहिनियों में सही अक्षरों में विद्यालय का नाम, पता सपंर्क संख्या तथा विद्यालय की बीट के पुलिस अधिकारी और थाने की जानकारी भी प्रदर्शित होना आवश्यक है। लेकिन शहर में दौड़ रही बाल वाहिनियों में ना तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और ना ही उन पर बाल वहिनी लिखा हुआ है।</p>
<p><strong>ई वाहन में दूसरों के मुकाबले कई गुना कम खर्चा</strong><br />विद्यार्थियों के स्कूल तक आवागमन में ऑटो, वैन और बसों को उपयोग किया जाता है। ये सभी वाहन पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी जैसे जीवाश्म र्इंधनों पर चलते हैं, साथ ही इन्हें मेंटिनेंस करने का भी खर्चा अधिक होता है। ऐसे में इन वाहनों के उपयोग का सीधा खर्चा अभिभावकों की जेब पर पड़ता है। जहां अभिभावकों को प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिमाह हजारों रुपए स्कूलों में अतिरिक्त शुल्क के रूप में जमा करवाने पड़ते हैं। वहीं अगर इन वाहनों के स्थान पर स्कूलों द्वारा ई वाहनों का उपयोग किया जाए तो स्कूल के साथ अभिभावकों के खर्च में भी कमी आएगी। दरअसल ई वाहन के बिजली से चलने के कारण उसका मेंटिनेंस कम होता है। जहां एक वैन 100 किलो मीटर चलने के लिए करीब 4 लीटर यानी 450 रुपए की खपत होगी वहीं ई वाहन में यही खर्च 450 से घटकर 50 से 100 रुपए के बीच होगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विद्यालयों में बाल वाहिनियों के उपयोग के लिए शिक्षा निदेशालय द्वारा ही दिशा निर्देश बनाए जाते हैं। शिक्षा विभाग का कार्य केवल मोनिटिरिंग का है। किसी भी प्रकार के सुझाव को राज्य सरकार द्वारा ही अमल में लाया जा सकता है। स्कूलों में ई वाहनों का उपयोग बढ़े तो सभी का फायदा है। इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।<br /><strong>- चारूमित्रा सोनी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी</strong></p>
<p>स्कूलों में संचालित बाल वाहिनियों के लिए दिशा निर्देश तय किए हुए हैं। जिनकी पालना के बाद ही बाल वाहिनियां चलाई जा सकती हैं। वहीं ई वाहनों के लिए सरकार द्वारा टैक्स में छूट दी हुई है जिसमें व्यक्ति को ग्रीन टैक्स नहीं भरना होता साथ ही ई वैन खरीदने पर 50 से 60 हजार, ई बस खरीदने पर 2 लाख तक की छूट का प्रावधान है। ई वाहन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन के रूप में ये छूट दी जाती है। <br /><strong>- दिनेश सिंह सागर, आरटीओ, कोटा</strong></p>
<p><strong>सरकार टैक्स में छूट दे तो कदम अच्छा होगा</strong><br />विद्यालयों में बच्चों के आवागमन के लिए वर्तमान में संचालित वाहनों के स्थान पर अगर ई वाहनों का उपयोग किया जाए तो, ये बहुत अच्छा कदम होगा। सरकार भी इस पर गाइडलाइन बनाकर ई वाहन खरीदने वाले चालाकों को सब्सिडी देना चाहिए। क्योंकि मौजूदा समय में ई वाहन मंहगे हैं। ई वाहन के उपयोग से प्रदुषण के साथ बच्चों की सेहत पर भी कम असर पड़ेगा। <br /><strong>- गौरव सेन झाला, निदेशक, सेंट्रल अकेडमी शिक्षांतर</strong></p>
<p>हम भी अभिभावक हैं और हम भी चाहते हैं कि कम खर्च में अधिक काम हो जाए और अभिभावकों के उपर भी भार नहीं पड़े। लेकिन ई वाहन मंहगे आ रहे हैं और हम सालों से ऑटो चला रहे हैं ऐसे में एकदम बेच भी नहीं सकते सरकार सहायता करे और टैक्स में छूट मिले तो ई वाहन का प्रयास अच्छा होगा। <br /><strong>- शंभुनाथ राठौर, ऑटो चालक</strong></p>
<p>स्कूलों में ई वाहन का उपयोग बहुत कारगर साबित होगा, क्योंकि इनसे प्रदूषण नहीं होता है और ना ही ये खर्चीले होते हैं। सरकार विद्यालयों के लिए गाइडलाइन बनाएगी तो पालना करेंगे ही साथ ही स्कूलों में ई वाहनों के उपयोग पर जोर देंगे। <br /><strong>- राजेंद्र शर्मा, प्रधानाध्यापक, सुभाष सीनियर सैकंड्री स्कूल</strong></p>
<p><strong>अभिभावकों का कहना है</strong><br />स्कूलों में बच्चों के आने जाने के लिए ई वाहनों का उपयोग कई पहलुओं पर कारगर साबित होगा। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बच्चों की सुरक्षा है क्योंकि दूसरे वाहनों में गैस के लीकेज होने के अलावा आग पकड़ने का भी खतरा रहता है। वहीं ई वाहन से प्रदुषण नहीं होने पर बच्चों की सेहत पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।<br /><strong>- दीपक कुमार, अभिभावक नयापुरा</strong></p>
<p>निजी स्कूल संचालक बसों की फीस लेकर ऑटो या वैन से बच्चों का परिवहन करते हैं जो गलत है साथ ही इनका उपयोग करने पर स्कूल की मोटी फीस के साथ अतिरिक्त रूप से वाहन शुल्क देना होता है जो वित्तीय भार को बढ़ा देता है। अगर ई वाहनों का उपयोग हो तो स्कूल के साथ में अभिभावकों का भी खर्चा कम हो। वहीं ई वाहन में बच्चे ऑटो या वैन की तुलना में अधिक सुरक्षित होंगे क्योंकि ई वाहन में ज्वलनशील पदार्थ नहीं होने के साथ प्रदूषण भी कम होता है।<br /><strong>- हरिराम गुर्जर, अभिभावक प्रेम नगर </strong></p>
<p>बच्चों के स्कूल वाहन अगर ई वाहन हो तो उससे काफी सकारात्मक बदलाव होंगे जिसमें सबसे पहले अभिभावकों पर वाहन शुल्क का अतिरिक्त भार कम होगा। उसके अलावा प्रदूषण कम होने से बच्चों की सेहत पर भी कोई बुरा प्रभाव वहीं पड़ेगा। वहीं बच्चों को गर्मी के मौसम में र्इंजन की गर्मी से होने वाली परेशानी से भी राहत मिलेगी। <br /><strong>- अतीक अहमद, अभिभावक स्टेशन क्षेत्र</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 16:25:05 +0530</pubDate>
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                <title>खड़ी-खड़ी कंडम हुई सिटी बसें, स्टीयरिंग हुए जाम</title>
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                        <![CDATA[निगम द्वारा खरीदी गई इन 34 बसों में से दो बसों के रूट तय नहीं होने और चार बसों को स्पेयर में रखने के कारण बिल्कुल कंडम की अवस्था में पहुंच चुकी हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/city-buses-stopped-standing--steering-jammed/article-67147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/khdi-khdi-candom-hui-city-buse,-steering-hue-jaam...kota-news-16-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में लोगों के लिए आवागमन किफायती और आसान बनाने के लिए निगम द्वारा 2013 में खरीदी गई 34 सिटी बसों में से 6 बसें स्टेण्ड पर खड़ी खड़ी कंडम हो रही हैं। निगम द्वारा मंगवाई गई ये बसें कुछ सालों तक तो कुन्हाड़ी स्थित पुराने रोडवेज डीपो पर ही खड़ी रहीं। दूसरी ओर जब इन्हें संचालित किया गया तो निगम और संचालक कंपनी के बीच विवाद से ये फिर से बंद हो गई। वहीं कोरोना काल के बाद निगम की कोटा बस सर्विस लिमिटेड कंपनी द्वारा इनके संचालन का ठेका एक निजी फर्म को दिया गया। लेकिन कुछ ही बसे आॅन रोड हो सकी करीब बसे अभी डिपो में कंडम हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है की निगम द्वारा खर्च किए गए करोड़ों रुपए की बर्बादी क्यों हो रही है।</p>
<p><strong>खड़ी-खड़ी हो गई कंडम</strong><br />निगम द्वारा खरीदी गई इन 34 बसों में से दो बसों के रूट तय नहीं होने और चार बसों को स्पेयर में रखने के कारण बिल्कुल कंडम की अवस्था में पहुंच चुकी हैं। नगर निगम के संजय नगर स्थित बस स्टैंड पर खड़ी इन बसों में कुछ के इंजन खुले पड़े हैं, तो कुछ बसों के पहिए ही गायब हैं। दूसरी ओर पर्यटन विभाग को दी गई दो बसों में से एक बस अभी भी स्टैंड पर खड़ी हुई जिसकी हालत धूल खाने की हो चुकी है। करीब 25 से 30 लाख रुपए की कीमत वाली ये बसें किसी काम ना आकर यूं ही खड़े रहकर खराब होती जा रही हैं। वहीं बस संचालन कंपनी का कहना है कि हमारे पास 28 बसों का परमिट है जिसके अनुसार बसें संचालित की जा रही हैं। 6 बसों में से दो का परमिट है लेकिन 4 बसों के रूट का परमिट नहीं होने से बाकी बसें स्पेयर में खड़ी हैं। जिसमें 28 बसें संचालित करने का प्रस्ताव था वहीं 2 बसें पर्यटन विभाग के लिए रखी थी। जिसके बाद बसों का संचालन तो शुरू हुआ लेकिन ये बसें स्टैंड पर परमिट के लिए खड़ी ही रही और कंडम होने की अवस्था में पहुंच गई।</p>
<p><strong>बस खराब होने की दशा में स्पेयर में बस नहीं</strong><br />कोटा बस सर्विसेज लिमिटेड के पास कुल 34 बसें हैं जिनमें से 28 संचालित हैं और 6 बसें स्टेण्ड पर खड़ी हैं जो कंडम अवस्था में पहुंच चुकी हैं। ऐसे में अगर किसी रूट पर संचालित बस खराब हो जाने की दशा में स्पेयर में बस ना होने पर संचालन में भी कमी होती है। वर्तमान में कोटा बस सर्विस लिमिटेड द्वारा शहर में 5 रूटों पर बसें संचालित हैं। इन सभी रूटों पर प्रत्येक पर चार से पांच बसें संचालित हैं जो हर दिन चार से पांच चक्कर लगाती हैं। </p>
<p><strong>साल 2013 में खरीदी थी 34 बसें</strong><br />निगम द्वारा शहर की आम जनता को किफायती साधन उपलब्ध कराने और शहर में ट्रैफिक कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में कुल 34 बसें खरीदी गई थी। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही इन बसोें के संचालन की प्रक्रिया में भी ब्रेक लग गया। वहीं वर्ष 2017 में इन बसों का निजी फर्म द्वारा संचालन शुरू किया था जहां कंपनी ने निगम पर भुगतान न करने का आरोप लगाकर संचालन बंद कर दिया था। </p>
<p><strong>अलनिया तक चलने वाली बस अब बंद है</strong><br />कोरोना काल के बाद वर्ष 2020 से निगम द्वारा फिर से एक निजी कंपनी को ठेका देकर इन बसों का संचालन शुरू तो कर दिया लेकिन शहर के कई रूट अभी बसे फिर से नहीं चलाई जिससे डेली अपडाउन करने वाले यात्रियों को महंगे परिवहन साधनों से अपने गतंव्य तक जाना पड़ता है। मैं 2020 पहले तक अलनिया तक रोड अपडाउन करता था लेकिन अब इस रूट पर बस नहीं चल रही है। निजी वाहन से काम पर जाना पड़ रहा है। जो महंगा पड़ रहा है।  <br /><strong>- करण, केथोलिया, निवासी प्रेमनगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />जो बसें हैं वो खराब हो चुकी हैं जिसमें नई बसों के आॅर्डर और वर्तमान बसों से संबधित सभी निर्णय सरकार द्वारा गठित राज्य स्तरीय सिटी बस संचालन बोर्ड द्वारा लिया जाएगा। कोई नया प्रस्ताव या आदेश आने पर ही आगे की कारवाई होगी।<br /><strong>-अनुराग भार्गव, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jan 2024 17:47:41 +0530</pubDate>
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                <title>डबल इंजन की सरकार से जागी उम्मीदें...</title>
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                        <![CDATA[कस्बे से दोपहर के समय जिला मुख्यालय और शहरी क्षेत्रों तक जाने के लिए बारां आगार की एक भी रोडवेज बस संचालित नहीं है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/expectations-raised-from-the-government-of-double-engine/article-67010"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(1)4.jpg" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। हरनावदाशाहजी में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर राजस्थान रोडवेज बसों की कमी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। वहीं ग्रामीणों को अब डबल इंजन की सरकार से उम्मीदें जागी है कि उनके लिए अब रोडवेज बसों की जल्द ही व्यवस्था हो जाएगी। जिससे आवागमन में परेशानियों से अब निजात मिलेगी। कस्बे सहित क्षेत्र के लोगों को डबल इंजन की नई सरकार से उम्मीद है कि क्षेत्र में रोडवेज की नई बसों का संचालन शुरू करें। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नई सरकार के गठन के बाद एक बार लोगों की आस जगी है कि क्षेत्र को रोडवेज की नई बस सेवा का लाभ मिलेगा। लोगों ने अरसे से बंद पडी बारां-इंदौर, बारां -भोपाल समेत कोटा, बारां, झालावाड आगार की नई बसों का संचालन शुरू करने की मांग की है। रोडवेज बसों के अभाव में लोगों का सफर महंगा और कष्टदायक बना हुआ है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। कस्बे में रोडवेज बसों के नाम पर पहले कोटा, बूंदी, झालावाड़ एवं बारां आगार की आधा दर्जन से अधिक बसों का नियमित संचालन होता था। इनमें बारां-इंदौर व बारां-भोपाल बस का संचालन काफी सालों तक भी रहा लेकिन बाद में अचानक से बंद हुआ संचालन दोबारा शुरू नही हो सका जिससे आज भी लोग परेशानी का दंश झेलकर टुकडों में यात्रा कर रहे हैं। </p>
<p><strong>निजी बसों में अधिक किराया देकर कर रहे यात्रा</strong><br />आमजन, यात्रियों, विद्यार्थियों का कहना है कि हरनावदाशाहजी से छबड़ा जाने के लिए निजी बसों में अधिक किराया देकर बसों में यात्रा कर धक्का खा रहे हैं। वहीं हरनावदा शाहजी से बारां व कोटा जाने के लिए भी रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से निजी बसों में मनमानी किराया देकर यात्रा करनी पड़ रही है। कस्बेवासियों ने रोडवेज बसों के संचालन की मांग को लेकर कई बार रोडवेज अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करा दिया गया। लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। कस्बा निवासी वरिष्ठ नागरिक कल्लू खां, कुंदलमल जैन, भाजयुमो नगर अध्यक्ष अमित गौतम, युवा आशु मंसूरी, चंद्रमोहन गौतम, अय्यूब भाई, प्रतीक तिवारी ने बताया कि हरनावदा शाहजी छीपाबडौद तहसील के बड़ा कस्बा होने के बाद भी बारां डिपो की एक ही बस बारां-मनोहरथाना रोडवेज बस संचालित हो रही है। कस्बे से दोपहर के समय जिला मुख्यालय और शहरी क्षेत्रों तक जाने के लिए बारां आगार की एक भी रोडवेज बस संचालित नहीं है। </p>
<p><strong>रोडवेज बसों का आवागमन शुरू होने से बढेगा राजस्व</strong><br />हरनावदाशाहजी कस्बे से 100 किलोमीटर जिला मुख्यालय एवं शहरी क्षेत्रों में जाने के लिए रोडवेज की सुविधा को तरस रहे है। जिला मुख्यालय से रोडवेज बसों का आवागमन शुरू होने से कस्बे से शहरों की ओर यात्रा करने के लिए फायदा भी मिलेगा और रोडवेज का राजस्व भी बढ़ेगा। रोडवेज बसों की सुविधा नहीं मिलने से कस्बे से संचालित हो रही निजी बसों में यात्रियों को छीपाबडौद, छबड़ा, बारां, झालावाड़, कोटा, जयपुर की और यात्रा करने पर मनमानी किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। कस्बेवासियों ने बारां आगार रोडवेज मुख्य प्रबंधक से सुबह व दोपहर के समय हरनावदा शाहजी से होकर छीपाबडौद, छबड़ा, बारां, कोटा, जयपुर, भोपाल, इंदौर की और नई रोडवेज बसों का संचालन करने और बारां से अकलेरा संचालित एवं झालावाड़ आगार मुख्य प्रबंधक से दोपहर के समय एक-दो बस अकलेरा तक संचालित हो रही रोडवेज बसों का संचालन वाया हरनावदाशाहजी तक करने की मांग की है।</p>
<p><strong>जिला मुख्यालय से केवल एक बस</strong><br />रोडवेज के नाम पर कस्बे में केवल रोडवेज की तीन बसें इन दिनों संचालित है। इनमें भी जिला मुख्यालय से आने वाली एक मात्र बस भी मनोहरथाना रात्रि ठहराव कर सुबह वापस हरनावदाशाहजी होकर बारां के लिए जाती है। इसके अलावा झालावाड़ आगार की झालावाड़ रुट पर एक बस सुबह 6 बजे कोटा तथा दूसरी बस कोटा आगार की दोपहर डेढ़ बजे कोटा के लिए जाती है। इनके अलावा बाकी समय में यात्रियों को प्राइवेट साधनों ,मिनीडोर या आॅटो में बैठकर सफर करना पडता है। इससे आमजन, यात्री परेशान हो रहे हैं। </p>
<p><strong>निजी वाहन चालकों के रवैये से परेशान है यात्री</strong><br />वहीं निजी वाहन चालकों के द्वारा यात्रियों से अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है। अकलेरा 15 किमी का किराया 30 रुपए वसूलते हैं जबकि सवारियां भी अपनी निर्धारित संख्या तक नही हो जाने तक आगे नही बढते। इस कारण नम्बर आगे पीछे होने के चक्कर में कई बार वाहन चालकों के बीच तकरार तक होती रहती है।</p>
<p><strong>यात्रियों को घंटों तक करनी पड़ती है प्रतीक्षा</strong><br />इन जीप या आॅटो के आने जाने का समय कोई निर्धारित नहीं है। जब तक पूरी सवारियां नही भर जाती तब तक आगे नहीं बढाते। अगर यात्री जीप या आॅटो सवारियों से भर जाता है तो फिर भी ज्यादा की संख्या में संवारियों को बैठाकर यात्रा करवाते हैं। ऐसे में कई बार एक-एक घंटे से भी अधिक समय तक सवारियां भरने का इंतजार करते लोग परेशान होते रहते हैं।</p>
<p><strong>बस चलें तो फिर जुड़ जाएंगे नए बस स्टैंड</strong><br />लोगों का कहना है कि झालावाड जिले के मनोहरथाना तक चलने वाली रोडवेज बसों में से कुछ बसों का संचालन वाया हरनावदाशाहजी होकर कर दिया जाए तो इससे रोडवेज की आय बढेगी और कई नए बस स्टैंड जुड जाएंगे। जबकि इस बदलाव में बस का करीब पांच किमी का फेरा बढ़ेगा। वहीं यात्रियों को शहर की और जाने के लिए सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। </p>
<p><strong>कोटा, बारां, झालावाड़ रोडवेज आगार की एक-एक बस संचालित</strong><br />हरनावदाशाहजी कस्बा जिले का बड़ा कस्बा होने के बावजूद भी बारां डिपो की ओर से यहां तक प्रयाप्त रोडवेज बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। बारां, झालावाड़, कोटा डिपो की नई रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यात्री रोडवेज बस सेवा से महरूम है। बारां, झालावाड़ ओर कोटा डिपो की मात्र एक-एक बस संचालित हो रही है। वहीं कोटा व झालावाड़ डिपो की एक-एक बस कोटा वाया अकलेरा हरनावदाशाहजी का संचालन हो रहा है। वर्तमान में मात्र तीन बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं कई वर्षों से हरनावदाशाहजी से छीपाबड़ौद, छबड़ा के रास्ते पर रोड़वेज बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इससे यात्रियों को रोडवेज बसों की सुविधा नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>परिवहन विभाग के अधिकारियों को लिखे पत्र</strong><br />कस्बे से होकर रोडवेज बसों का संचालन करने की मांग को लेकर कस्बेवासियों ओर जनप्रतिनिधियों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे, लेकिन बसों का संचालन नहीं हो पाया है।</p>
<p>हरनावदाशाहजी छीपाबडौद तहसील का बड़ा कस्बा होने के बावजूद प्रयाप्त बसें नहीं चलती। लाखों रुपए बस स्टैंड पर खर्च करने के बावजूद यहां बसों की कमी है।   <br /><strong>- नरेंद्र नागर, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>हरनावदाशाहजी कस्बेवासियों को रोडवेज बसों की दरकार है। यहां आमजन के साथ - साथ व्यापारियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सालों पहले इंदोर बस चलती थी उससे सभी को राहत मिलती थी। आज भी आमजन को नई सरकार से उम्मीद है कि बारां से इंदोर बस सेवा को फिर से शुरू किया जाए।     <br /><strong> - योगेश विजयवर्गीय, कस्बेवासी।   </strong></p>
<p>विद्यायक प्रतापसिंह सिंघवी और परिवहन विभाग के अधिकारियों को पत्र के माध्यम से हरनावदाशाहजी तक बसों के संचालन के लिए अवगत कराया हुआ। अब  नई सरकार से उम्मीद है कि जल्द हमारी मांग पूरी हो जाएगी।  <br /><strong> - अमित गौतम, ग्रामीण।  </strong></p>
<p>हरनावदाशाहजी तक बसों का संचालन बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों से बात की जा रही है। जल्द ही बसें मिलने की उम्मीद है। एक और बस कोटा से भी संचालित करने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।<br /><strong>- कुलदीप शर्मा, चीफ मैनेजर, परिवहन विभाग, बारां। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jan 2024 17:11:41 +0530</pubDate>
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                <title>अव्यवस्था के चक्कों पर चढ़ी कोटा की सिटी बसें</title>
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                        <![CDATA[बसों की हालत यहां तक खराब है कि उनका नीचे का फ्लोर तक उखड़ गया है। जो यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-city-s-city-buses-were-in-chaos/article-66309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/city-bus.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में कोटा बस सर्विस लिमिटेड द्वारा संचालित सिटी बसें शहरवासियों के लिए आवागमन का एक किफायती साधन है जिससे हजारों लोग रोज सफर करते हैं। इसके अलावा कई कोशिशों और मुश्किलों के बाद ये सिटी बसें शहर में संचालित हो पाई थी। इन बसों का संचालन तो कर लिया गया लेकिन बसों की हालत में कोई सुधार नहीं किया गया। आज भी शहर में संचालित इन सिटी बसों में से कई बसों की हालत खराब हुई पड़ी है। </p>
<p><strong>एलईडी सालों से बंद</strong><br />शहर में करीब 10 रूटों पर ये सिटी बसें संचालित हैं, इन सभी रूटों पर चलने वाली बसों के विंडशिल्ड पर लगी एलईडी में रूट की जानकारी प्रदर्शित होना तय था, जो शुरूआती संचालन में तो हुआ लेकिन उसके बाद बंद हो गया और अभी तक बंद ही है। एलईडी के खराब होने पर बसों की विंडशिल्ड पर रूट की जानकारी भी चस्पा नहीं है। एलईडी बंद होने और जानकारी चस्पा नहीं होने से यात्रियों को बसों के रूट के बारे में पता नहीं चलता और वे बहुत बार गलत बस में चढ़ जाते हैं। </p>
<p><strong>फ्लोर उखड़ा, सीटें टूटी</strong><br />बसों की हालत यहां तक खराब है कि उनका नीचे का फ्लोर तक उखड़ गया है। जो यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। जरा सी चूक से गम्भीर चोट लग सकती है। नयागांव दौलतगंज रूट पर चलने वाली बसों के फ्लोर इस तरह से उखड़े हैं कि ध्यान से चलने के बावजूद कोई भी आसानी से चोटिल हो सकता है। वहीं बात करें सीटों की स्थिति की तो इनमें से कई बसों की सीटें भी टूटी पड़ी हैं, जो सवारियों को बैठने में भी परेशानी खड़ी करती है। </p>
<p><strong>आपातकालीन स्थितियों के लिए नहीं उपकरण</strong><br />मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक हर यात्री वाहन में फर्स्ट एड किट बॉक्स और फायर एक्सटिंग्विशर होना आवश्यक है ताकि आपातकालीन या दूर्घटना की स्थिति में घायलों को प्राथमिक उपचार किया जा सके या ऐसी स्थिति को संभाला जा सके। लेकिन कोटा में संचालित इन बसों में फर्स्ट एड किट बॉक्स तो मिले लेकिन उनमें रहने वाली दवाईयां मौजूद ही नहीं थी और जो थी वो कभी बदली ही नहीं गई। इसके अलावा बसों में उपस्थित फायर एक्सटिंग्विशर की एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी है दूसरी ओर इनके बक्सों पर जंग तक लग चुका है। </p>
<p><strong>दरवाजे रस्सियों से बंधे, हैण्डलबार टूटे</strong><br />इन बसों के आॅटोमैटिक बंद होने वाले दरवाजे रस्सियों से बंधे मिले ड्राइवर से इसके बारे में पूछा तो बताया कि दरवाजे ठीक कराने के लिए संचालन कम्पनी को बोला हुआ अब कब होंगे ये पता नहीं। वहीं दूसरी ओर बसों में खड़े रहने वाले यात्रियों के लगे हैण्डलबार भी मौजूद नहीं है। जबकी इन बसों में शुराआती दौर में ये सब सुविधाएं उपलब्ध थी निगम की ओर से निगरानी की कमी और कम्पनी की लापरवाही के कारण ये बसें खस्ताल में पहुंच चुकी हैं, जिनमें चारों और कमियां ही कमियां नजर आ रही हैं।</p>
<p>सिटी बसों में रोज आना जाना होता है अभी सर्दी के मौसम में बस में जाते हैं तो गेट खुले होने से ठंड का सामना करना पड़ता है। हैण्डलबार टूटे होने से कई बार खड़े होकर सफर करने में परेशानी होती है। <br /><strong>- राकेश जादम, संजय नगर</strong></p>
<p>बसें चली थी तब खुशी हुई थी की अब हमारे कोटा में भी सिटी बसें चलेगी लेकिन धीरे धीरे ये भी लापरवाही और रखरखाव में कमी बरतने के चलते कंडम हो रही है।<br /><strong>- सौहेल कुरैशी, गोविंद नगर</strong></p>
<p>मैं रोज एरोड्राम से रानपुर तक कॉलेज जाने के लिए सिटी बस का उपयोग करती हूं शुरूआत में ये बसें एक दम ठीक थी लेकिन अब सीटों से लेकर गेट सब खराब हो रहे हैं इन बसों की ठीक से मरम्मत भी नहीं की जा रही है।<br /><strong>- कृतिका शर्मा, छावनी</strong></p>
<p>बसों को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है, बसों से जुड़ी समस्या में जो कमी है उसे अभियान चलाकर ठीक करवाया जाएगा। अगर कहीं पर खमी है तो संचालक कम्पनी को नोटिस देकर कारवाई जुर्माना वसूला जाएगा।<br /><strong>- अजय कुमार बब्बर, सहायक अभियंता, गैराज नगर निगम </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jan 2024 14:59:45 +0530</pubDate>
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                <title>इलेक्ट्रिक वाहनों की दौड़ पर चार्जिंग और मरम्मत लगा रही ब्रेक</title>
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                        <![CDATA[सार्वजनिक स्थानों पर बेटरी चार्जिंग की सुविधा शुरू होने के बाद शहर में ई बाइक की बिक्री में इजाफा होगा अभी 30 फीसदी का इजाफा हो चुका है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/charging-and-repairing-brakes-on-the-race-of-electric-vehicles/article-54863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/electric-vahano-ki-daud-pr-charing-or-marammat-lga-rhi-brake...kota-news-18-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में पिछले तीन सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। सरकार की ओर से पर्यावरण को बेहतर बनाने और परिवहन के लिए सस्ता विकल्प मुहैया कराने के मकसद से इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले दो साल से पेट्रोल डीजल के दामों हो रही लगातार बढ़ोतरी के चलते लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की ओर रुझान बढ़ा है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों डिमांड का अंदाजा इस से लगा सकते है कि जून में खूले एक ई रिक्शा शो रूम ढाई महीने में ही 60 से अधिक ई रिक्शा बेच दिए हैं। शहर में करीब एक दर्जन से अधिक इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहनों के शो रूम है। सरकार की ओर से दी जा रही पांच हजार रुपए तक छूट दी जा रही जिसके चलते  लोगों रुझान बढ़ा है। ईवी एक्सपर्ट रामचंद्र ने बताया कि  ई वाहनों की बिक्री बढ़ने में दो बाधाए लोगों इसको खरीदने से रोक रही है एक तो शहर में पेट्रोल पंप की तर्ज पर चार्जिंग पॉइन्ट की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। दूसरा इन वाहनों की मरम्मत के लिए हर जगह मिस्त्री नहीं होने से वाहन खराब होने पर उसे शो रूम में ले जाना ही विकल्प है। जिससे इसकी बिक्री 30 फीसदी तक ही पहुंची है। ये दोनों बाधाओं का निस्तारण हो जाए तो शहर में ई वाहन की 70 से 80 फीसदी तक पहुंच जाए। दूसरा सरकार की ओर से दिए जा रहे  प्रोत्साहन वाहनों और इनके कंपोनेंट को ज्यादा मिलता दिखाई दे रहा है। महंगे होने के बावजूद सप्लाई होने वाले करीब 25 फीसदी दोपहिया और करीब 10 फीसदी तिपहिया वाहनों में बैटरी या कंपोनेंट के जल्द खराब होने की शिकायतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल </strong><br />- 65 ईवी कार<br />- 4264  इलेक्ट्रिक वाहन। <br />- 3750 से अधिक ई स्कूटर<br />- 341 ई रिक्शा<br />- 300 लोडिंग ई रिक्शा<br />- 50 लोडिंग वाहन</p>
<p><strong>पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी से डिमांड बढ़ी</strong><br />इलेक्ट्रिक वाहन विक्रेता अजय शर्मा ने बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम में बेलगाम बढोतरी के कारण ई बाइक, ई रिक्शा और ई स्कूटी की डिमांड बढ़ गई है। अभी ई दोपहिया वाहनों की 15 दिन की वेटिंग चल रही है। सार्वजनिक स्थानों पर बेटरी चार्जिंग की सुविधा शुरू होने के बाद शहर में ई बाइक की बिक्री में इजाफा होगा अभी 30 फीसदी का इजाफा हो चुका है। शहर में अब तक करीब 5 हजार 6 हजार से अधिक दो पहिया व तीन पहिया व चौपहिया वाहन सड़को पर दौड़ रहे है। पेट्रोल डीजल के दाम में बढोतरी के बाद से इलेक्ट्रिक व्हीकल का चलन बढ़ रहा है। यही वजह है कि अब जीवाश्म र्इंधन से चलने वाली कारें बनाने वाली कंपनिया ईवी बनाने लगी है। दो पहिया वाहन मैन्युफैक्चर 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। </p>
<p><strong>नवज्योति लगातार उठाता रहा है ई -बसों की मांग</strong><br />कोटा सार्वजनिक परिवहन और यातायात को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए मोदी केबिनेट ने बुधवार को पीएम ई बस योजना को मंजूरी प्रदान की है। इस योजना के तहत देश के 169 में से प्रथम चरण में 100 शहरों में लगभग 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इस योजना से देश में पारंपरिक कौशल वाले लोगों को समर्थन मिलेगा। ई- बस चलाने की जरूरत  को लेकर दैनिक नवज्योति पिछले दो वर्ष से इस मामले को लगातार उठाता रहा है। दैनिक नवज्योति ने वर्ष 2022 में 18 मई को विशेष समाचार प्रकाशित कर ई बसों को चालू करने से जनता को होने वाले फायदे बताए थे। इसी प्रकार दैनिक नवज्योति ने 6 अप्रेल 2023 को लगातार तीन दिन तक 7 अप्रेल, 9 अप्रेल को  ई बसों की जरूरत, फायदे, क्या परेशानी है। लोगों के सामने अपॉर्चयुनिटी क्या-क्या हैं। सभा संभावनों को तलाशते हुए विशेष समाचार प्रकाशित किए थे। ई बसें यदि कोटा शहर में भी चलती हैं तो इससे काफी फायदा होगा। यहां के शिल्पकार,  मूर्तिकार, कुम्हार, सुनार, औजार बनाने वाले, आटोमोबाइल में काम करने वाले कामगारों को नया रोजगार मिलेगा। इसके साथ कोटा घरेलू बाजार के साथ वैश्विक बाजार से भी जुडने की संभावनाएं बनेंगी।  </p>
<p><strong>ई-व्हीकल छह साल से सड़कों पर, फिर भी चार्जिंग सुविधा नहीं </strong><br />ईवी यूजर कुन्हाडी निवासी उमेश व्यास ने बताया कि तिपहिया ई-व्हीकल तो शहर में करीब 6 साल से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। लेकिन अभी तक शहर में पेट्रोल पंप जैसे ईवी चार्जिंग पाइंट नहीं बने जिससे वाहनधारियों को लंबी दूरी का सफर सोच समझ कर तय करना होता है। शहर में बैटरी स्वेपिंग सेंटर बन जाए तो लोगों बेहतर सुविधा मिलेगी। कई दोपहिया वाहनों की बैटरी कमजोर पाई जा रही है, इनमें लीड एसिड बैटरी के तीन साल और लीथियम आयन बैटरी के 5 साल तक चलने का दावा किया जाता है, लो स्पीड वाले व्हीकल की गति 25 किमी प्रतिघंटा और माइलेज 40 से 50 किमी के आसपास बताया जाता है। कुछ वाहन 60 तक का माइलेज देते हैं। ऐसे में लंबी दूरी जाने के लिए वाहनधारी को सोचना पड़ता है। बिना चार्जिंग के गाड़ी लेकर चले गए रास्ते में बेटरी खत्म हो गई तो उसे चार्जिंग करने के लिए कोई पाइंट नहीं है। </p>
<p><strong>मरम्मत के लिए नहीं है जगह जगह मिस्त्री </strong><br />ईवी विक्रेता रामचंद्र ने बताया कि शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी बढ़ रही है लेकिन सबसे बड़ी बाधा यहां ग्राहको ये आ रही है कि एक तो वाहनों की मरम्मत के लिए अभी मिस्त्री नहीं है। कंपनी में इसकी मरम्मत और बेटरी का काम होता है। दूसरी बड़ी समस्या ये है कि इसके चार्जिंग पाइंट नहीं है। मध्यप्रदेश, दिल्ली, नागपुर, महाराष्टÑ में ईवी वाहनों के लिए पेट्रोल पंप के जैसे हर 10 किमी पर चार्जिंग पाइंट है। जिससे इन प्रदेशों में इनकी बिक्री बढ़ी है। कोटा में सार्वजनिक रूप से ईवी चार्जिंग पाइंट नहीं है। शहर में चार पांच स्थानों पर ईवी को चार्ज किया जाता है। वो पाइंट या तो होटल, पार्किंग एरिया या सर्विस सेंटर है या फिर ईवी विक्रेता का शो रूम जहां ये सुविधा आॅन रिकवेस्ट मिल रही है। कोटा में यदि जगह-जगह सस्ते चार्जिंग स्टेशन बनाए जाते तो ई-व्हीकल उपयोगकतार्ओं को सुविधा मिल सकती और यह पर्यावरण के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>शहर में चल रहे अनाधिकृत रूप से चार्जिंग सेंटर</strong><br />ई रिक्शा चालक असलम अंसारी ने बताया कि शहर में ई रिक्शा की लगातार बढोतरी हो रही है। घर से सुबह ई रिक्शा चार्ज करके लाते है तो दिन में तीन चार ट्रीप तक तो कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन बाद चार्जिंग के लिए  पाइंट ढूंढना पड़ता है। बार बार घर जाकर तो चार्ज नहीं कर सकते है। शहर में छावनी, सिटी मॉल के सामाने की होटल की पार्किंग में,एरोड्रम चौराहा, थेगडा रोड स्थित एक  रिसोर्ट, गढ पैलेस के पास चार्जिंग पाइंट है लेकिन ये सभी अनाधिकृत है यहां 21 रुपए से 25 रुपए यूनिट तक लेते है। एक बार चार्ज करने के लिए पांच से छह यूनिट खर्च आता है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रिकल वाहनों का यह है फायदा</strong><br />ई-रिक्शा डीलर अब्बास अली ने बताया कि शहर में दो साल से लेक्ट्रिकल वाहनों की डिमांड बढ़ गई है। सबसे ज्यादा ई-रिक्शा, स्कूटी, बाइक की मांग ज्यादा है। इसमें महंगे पेट्रोल से तो निजात मिलती ही है साथ ही वायु और ध्वनी प्रदूषण नहीं फैलाती है। कंपनी को तरसे शोरूम पर फ्री चार्जिंग की सुविधा है। घर पर चार्जिंग स्टेशन लगा सकते हैं। 10 घंटे में फुल चार्ज में बाइक व स्कूली वाहन 60 से 70 किमी व ईवी कार  220 से 250 किमी चलते हैं। कोटा के बाहर ले जाना संभव नहीं है। कारण की अभी रोड पर जगह जगह चार्जिंग स्टेशन नहीं लगे हुए है। ईवी कार की कीमत बहुत अधिक है। इसके अलवा कोटा में अभी कार चार्जिंग के पॉइंट नहीं है।</p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2023 17:46:00 +0530</pubDate>
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                <title>बिना टेंडर 40 लाख से अधिक का कार्यादेश जारी करने का आरोप</title>
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                        <![CDATA[अतिरिक्त आयुक्त ने वार्डों में कचरा परिवहन के लिए लगने वाली हाइड्रोलिक ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली का काम एक संवेदक को लाभ पहुंचाने के लिए बिना टेंडर के ही जारी कर दिया है। जबकि नियमानुसार एक लाख से अधिक का कोई भी काम बिना टेंडर जारी किए नहीं कराया जा सकता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/allegations-of-issuing-work-order-of-more-than-40-lakhs-without-tender/article-31312"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/bina-tender-40-lakh-se-adhik-ka-karyadesh-jaari...kota-news...2.12.2022---copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा दक्षिण में अधिकारियों द्वारा संवेदक को लाभ पहुंचाने के लिए करीब 40 लाख से अधिक के काम का कार्यादेश बिना टेंडर के ही जारी करने का आरोप लगाया गया है। यह कार्य 5 सेक्टरों में कचरा परिवहन की ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली लगाने का है। यह मामला एक दिन पहले नगर निगम कोटा दक्षिण की वित्त समिति की बैठक में उठा। समिति के अध्यक्ष पार्षद देवेश तिवारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में वार्ड 1 से भाजपा पार्षद दिलीप अरोड़ा समेत कई अन्य पार्षदों ने आरोप लगाया कि  अतिरिक्त आयुक्त ने वार्डों में कचरा परिवहन के लिए लगने वाली हाइड्रोलिक ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली का काम एक संवेदक को लाभ पहुंचाने के लिए बिना टेंडर के ही जारी कर दिया है। जबकि नियमानुसार एक लाख से अधिक का कोई भी काम बिना टेंडर जारी किए नहीं कराया जा सकता है। इस मामले को लेकर बैठक में आरोप प्रत्यारोप का दौर चला। साथ ही अधिकारियों व पार्षदों के बीच विवाद भी हुआ था। </p>
<p><strong>41 वार्डों में लगेंगी 27 ट्रॉलियां</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के अतिरिक्त आयुक्त अम्बालाल मीणा के हस्ताक्षर से 4 अक्टूबर को यह कार्यादेश साबरमती कॉलोनी स्थित एक फर्म के संवेदक को जारी किया गया। इस कार्यादेश के अनुसार संवेदक को 7 अक्टूबर से 3 माह के लिए काम करना होगा।  कार्य के तहत सेक्टर 5 से 9 के 41 वार्डों में 27 हाइड्रोलिक ट्रेक्टर ट्रॉली के माध्यम से वार्डों में कचरा पाइंट से कचरा उठवाकर कचरा ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाना है। </p>
<p><strong>मामले की जांच करवाई जाए</strong><br />वित्त समिति की बैठक में इस मामले को गम्भीर मानते हुए समिति के सदस्य पार्षद दिलीप अरोड़ा ने कहा कि निगम ने एक संवेदक को सीधा लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया है। जबकि नियमानुसार अन्य संवेदकों को भी मौका देने के लिए टेंडर जारीे करना चाहिए था।  वहीं वित्त समिति के अध्यक्ष देवेश तिवारी ने बताया कि जब निगम में नियम है कि 1 लाख से अधिक के काम का टेंडर जारी होगा। उसमें भाग लेने वाली फर्मों को नियमानुसार ही टेंडर में सफल होने पर कार्यादेश जारी किया जाएगा। फिर निगम अधिकारियों द्वारा बिना टेंडर सीधे कार्यादेश जारी करना गलत है। वह भी 40 लाख से अधिक के काम का। एक दिन पहले वित्त समिति की बैठक में यह मामला उठा था। उसके बाद समिति ने निर्णय लिया है कि इस मामले की जांच करवाई जाए। इस संबंध में अधिकारियों को जांच करने के लिए कहा गया है।  अतिरिक्त आयुक्त अम्बालाल को इस संबंध में फोन किए लेकिन उन्होंने कोई  फोन नहीं उठाया।</p>
<p><strong>47885 रुपए प्रतिमाह प्रति ट्रेैक्ट्रर  ट्रॉली से होगा भुगतान</strong><br />कार्यादेश के अनुसार नगर निगम द्वारा संवेदक को 47 हजार 885 रुपए प्रति माह प्रति ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। यह कार्य तीन माह तक करना है। ऐसे में 41 वार्डों में 27 ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली हर माह के हिसाब से तीन माह में कुल 81 ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली का भुगतान किया जाएगा। यह भृगतान 47885 रुपए प्रति ट्रेैक्ट्रर ट्रॉली होगा। इस हिसाब से यह राशि करीब 40 लाख से अधिक की हो रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> संवेदक को पूर्व में स्वीकृत दर पर ही कार्यादेश जारी किया होगा।  पुराना कार्यादेश की अवधि पूरी होने पर उस अवधि को बढ़ाने का प्रावधान भी है। यदि इस मामले में बिना टेंडर के इतनी अधिक राशि का कार्यादेश जारी करने का मामला है तो उसे दिखवाकर उसकी जांच करवाई जाएगी। <br /><strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2022 14:31:36 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान रोडवेज को सरकारी बेड़े में शामिल करने की योजना ठंडे बस्ते में</title>
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                        <![CDATA[ रोडवेज को सरकारी बेड़े में शामिल करने की योजना ठंडे बस्ते में है। हरियाणा सरकार के बाद अब आन्ध्रप्रदेश सरकार ने भी कॉरपोरेशन को बंद कर रोडवेज को अपने अधीन कर लिया है। अब सरकार ही बसों का संचालन करने व कर्मचारियों के हित में फैसला ले रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-plan-to-include-rajasthan-roadways-in-the-government-fleet-is-in-cold-storage/article-12439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/roadways1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> रोडवेज को सरकारी बेड़े में शामिल करने की योजना ठंडे बस्ते में है। हरियाणा सरकार के बाद अब आन्ध्रप्रदेश सरकार ने भी कॉरपोरेशन को बंद कर रोडवेज को अपने अधीन कर लिया है। अब सरकार ही बसों का संचालन करने व कर्मचारियों के हित में फैसला ले रही है। राजस्थान रोडवेज की स्थापना एक अक्टूबर 1964 में हुई थी। रोडवेज का संचालन फिलहाल कॉरपोरेशन से हो रहा है। रोडवेज संचालन अवधि के बाद से ही लगातार घाटे में चल रही है।</p>
<p>वर्तमान में रोडवेज करीब 5000 करोड़ रुपए से अधिक घाटे में है। राजस्थान सरकार भी पिछले कुछ समय से रोडवेज को आर्थिक तंगी से देखते हुए अपने अधीन करने की कवायद शुरू की थी। इसको लेकर तत्कालीन परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने 18 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री और सीएमडी संदीप वर्मा ने 24 अगस्त को प्रमुख सचिव (परिवहन) को पत्र लिखा था। रोडवेज के पास अभी कुल 3300 (अनुबंधित सहित) बसें हैं। इनमें से अगले साल मार्च में 1600 बसें कंडम हो जाएंगी। वर्ष 2019 के बाद रोडवेज ने नई बसों की खरीद नहीं हुई है।</p>
<p><span style="background-color:#ff0000;"><strong>सरकार में शामिल होने से यह होगा फायदा</strong></span><br />विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी यूनियनों की ओर से आए दिन हड़ताल करते हुए बसों का संचालन बंद कर दिया जाता है। इससे रोडवेज को नुकसान के साथ जनता को भी परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार के बेड़े में शामिल होने के बाद यह परेशानी दूर हो जाएगी। कर्मचारियों की वेतन विसंगति के साथ सभी मांगों का फैसला सरकार खुद ले सकेगी। सरकार के अधीन होने के बाद रोडवेज का घाटे से उभरने के साथ ही सफल संचालन भी हो सकेगा।</p>
<table style="width:509px;height:418px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:505px;" colspan="2"><span style="color:#ff0000;"><strong>हरियाणा और आंध्रप्रदेश सरकार में शामिल है रोडवेज</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:505px;text-align:left;" colspan="2"><strong>हरियाणा</strong></td>
</tr>
<tr style="height:10px;">
<td style="height:10px;width:103.467px;">
<p><strong>बसें </strong></p>
<p><strong>कर्मचारी</strong></p>
</td>
<td style="height:10px;width:401.533px;">
<p><strong>3900</strong></p>
<p><strong>19000</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:505px;" colspan="2"><strong>आन्ध्रप्रदेश                   </strong>  </td>
</tr>
<tr style="height:23.45px;">
<td style="height:23.45px;width:103.467px;">
<p><strong>बसें  </strong></p>
<p><strong>कर्मचारी   </strong></p>
</td>
<td style="height:23.45px;width:401.533px;">
<p><strong> 12000</strong></p>
<p><strong>50 हजार से अधिक</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:505px;text-align:left;" colspan="2"><strong>राजस्थान</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:103.467px;">
<p><strong>बसें   </strong></p>
<p><strong>कर्मचारी  </strong></p>
</td>
<td style="height:41px;width:401.533px;">
<p><strong>3300 (अनुबंधित सहित)</strong></p>
<p><strong>12 से 13 हजार</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 13:39:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाइजनिक परिवहन से फिर डम्परों पर लौटा निगम</title>
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                        <![CDATA[ हालत यह है कि आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कचरे का परिवहन ही बंद हो गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota--nigam-returned-to-dumpers-from-hygienic-transport/article-7476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/truck.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 के भौतिक सत्यापन के लिए केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीम इन  दिनों कोटा आई हुई है। उस टीम को जब निगम द्वारा  आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से होने वाले हाइजनिक कचरा परिवहन को दिखाने का मौका आया था। उस समय हालत यह है कि आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कचरे का परिवहन ही बंद हो गया है। नगर निगम के नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ में आग लगते ही कचरा ट्रांसफर स्टेशन की दूरी बढ़ गई है। पहले जहां साजीदेहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कंटेनरों के जरिए कचरे को हाइजनिक तरीके से परिवहन किया जा रहा था वह अब नयागांव से डम्परों के माध्यम से हो रहा है। <br /><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण को कचरे का हाइजनिक तरीके से परिवहन करने के लिए आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाने थे। नगर निगम कोटा दक्षिण ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से साजीदेहड़ा में धार का अखाड़ा के पास आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन तैयार भी कर लिया। जहां से कोटा दक्षिण निगम के आधे सेक्टरों का कचरा कंटेनरों के माध्यम से बंद होकर हाइजनिक तरीके से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड जा रहा था। ट्रेचिंग ग्राउंड में पहुंच रहे रोजाना करीब 400 टन कचरे में से आधा कोटा दक्षिण क्षेत्र का कचरा है। लेकिन ट्रेचिंग ग्राउंड के कचरे में गत दिनों आग लगी। आग पर काबू पाने में नगर निगम को दस दिन से अधिक का समय लगा। ऐसे में कोटा उत्तर निगम के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कोटा दक्षिण से कंटेनरों में आ रहे कचरे के कारण यहां आग लगी है। इस आरोप को देखते हुए नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकािरयों  ने अस्थायी रूप से आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कचरे का परिवहन कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। <br /><br /><strong>नयागांव में डाला जा रहा कोटा दक्षिण का कचरा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण का कचरा साजीदेहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन में डलना बंद होने के बाद उसे नयागांव में डाला जा रहा है। नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा ट्रक यूनियन के पास ट्रांसपोर्ट नगर में निगम के कचरा ट्रांसफर स्टेशन को आधुनिक बनाने का काम चल रहा है। जिससे वहां का कचरा भी नयागांव में डाला जा रहा है। उसी जगह पर साजीदेहड़ा वाले कचरे को भी डाला जा रहा है। हालांकि शहर के आधे सेक्टरों का कचरा वहां जाने से टिपरों व ट्रैक्टर ट्रॉलियों को समय व डीजल दोनों अधिक लग रहे हैं। <br /><br /><strong>साजीदेहड़ा की जगह नयागांव से हो रहा परिवहन</strong><br />पहले जहां साजीदेहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कचरे का परिवहन ट्रेचिंग ग्राउंड में हो रहा था। वह अब नयागांव से हो रहा है। हालांकि दोनों उल्टी दिशा में हैं। नयागांव रावतभाटा रोड पर शहर से करीब 12 किमी दूर है। जबकि ट्रेचिंग ग्राउंड नदी पार नांता क्षेत्र में है। ऐसे में नयागांव से नांता तक की दूरी काफी अधिक बढ़ गई है। जिससे कचरा परिवहन में समय और डीजल दोनों अधिक लग रहे हैं। <br /><br /><strong>टीम को दिखाने के लिए कुछ नहीं</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा शहर की सफाई के लिए काम तो किए गए लेकिन ऐसा कोई काम नहीं है जिससे रैकिंग सुधार हो सके। साथ ही अधिकारी केन्द्रीय टीम को कुछ अच्छा दिखा सकें। हालाकि सफाई के संसाधन व मशीनरी तो खूब आ चुकी है। लेकिन गीला व सूखा कचरा और ट्रेचिंग ग्राउंड के कचरे के निस्तारण संबंधी कोई काम नहीं किया जा सका है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा अधिक होने से बड़े वाहन जाने में समस्या हो रही थी। इस कारण से फिलहाल आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कंटेनरों से कचरे का परिवहन बंद कर दिया है। वर्तमान में कोटा दक्षिण के कचरे का परिवहन नयागांव क्षेत्र से हो रहा है। <br />-कीर्ति राठौड़, आयुक्त , नगर निगम कोटा दक्षिण<br /><br /><strong>फैक्ट फाइल:</strong><br />कोटा में नगर निगम-2<br />कोटा उत्तर निगम में वार्ड-70<br />कोटा दक्षिण निगम में वार्ड-80<br />कोटा शहर से रोजाना निकल रहा कचरा-400 टन<br />कोटा उत्तर क्षेत्र का कचरा-200 टन <br />कोटा दक्षिण क्षेत्र का कचरा -200 टन</p>]]>
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                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 14:12:06 +0530</pubDate>
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