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                <title>medical department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>medical department RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चिकित्सा विभाग में पदोन्नतियों की राह हुई साफ, जम्बो डीपीसी के बाद जारी होने लगे आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को लेकर बना असंतोष अब समाप्त होने लगा। विभाग ने जम्बो डीपीसी के फैसलों पर अमल करते हुए पदोन्नति आदेश जारी करने शुरू कर दिए। इससे प्रदेशभर के चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/path-for-promotions-in-medical-department-cleared-orders-started-being/article-142483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को लेकर बना असंतोष अब समाप्त होने लगा है। विभाग ने जम्बो डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) के फैसलों पर अमल करते हुए पदोन्नति आदेश जारी करने शुरू कर दिए हैं। इससे प्रदेशभर के चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली है। विभागीय जानकारी के अनुसार 16 जनवरी को आयोजित डीपीसी की बैठक में मेडिकल ऑफिसर से सीनियर मेडिकल ऑफिसर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर से डिप्टी डायरेक्टर तथा कनिष्ठ विशेषज्ञ से वरिष्ठ विशेषज्ञ के पद पर पदोन्नति सहित कुल 1550 से अधिक चिकित्सकों के पदोन्नति प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इसी बैठक में 16 ड्रग ऑफिसर्स को भी पदोन्नति देने का निर्णय लिया गया था।</p>
<p>हालांकि, डीपीसी बैठक के बाद करीब 25 दिन तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं होने से विभाग में असंतोष बढ़ता जा रहा था। चिकित्सक संगठनों और कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही थी। इस मुद्दे को फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद विभाग पर दबाव बढ़ा और अब पदोन्नति आदेश जारी होने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक विभाग द्वारा अधिकांश पदोन्नति आदेश बैक डेट में जारी किए गए हैं, ताकि वरिष्ठता, वेतनमान और अन्य सेवा लाभों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आदेश जारी होते ही चिकित्सकों में संतोष का माहौल है और लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शेष बचे पदोन्नति मामलों में भी जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इन पदोन्नतियों से न केवल चिकित्सकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की प्रशासनिक व्यवस्था भी और अधिक मजबूत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:26:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा के बेरोजगार कर्मचारियों की जयपुर में बैठक कल, आंदोलन की बनेगी रणनीति</title>
                                    <description><![CDATA[टेंडर खत्म होने से 600 जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस बंद होने पर 1200 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। बकाया ₹4.58 करोड़ वेतन और बहाली की मांग को लेकर कल झोटवाड़ा में रणनीति बनेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/meeting-of-unemployed-employees-of-104-janani-express-ambulance-service/article-139201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/104.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के बैनर तले 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा से जुड़े बेरोजगार कर्मचारियों की बैठक कल दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक सांगा मैरिज पैलेस, रावणगेट, झोटवाड़ा में होगी, जिसमें प्रदेशभर के कर्मचारी शामिल होंगे। राजस्थान एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि प्रदेश में 600 से अधिक 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवाएं बंद किए जाने से करीब 1200 एंबुलेंस कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा का संचालन कर रही कंपनी मॉडर्न इमरजेंसी सर्विसेज का स्टेट टेंडर 10 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया, लेकिन चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही के चलते समय पर नया टेंडर नहीं किया गया। इसके कारण सरकार ने 10 दिसंबर से एंबुलेंस सेवा बंद कर दी।</p>
<p>शेखावत ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से 2025 तक सेवा का संचालन करने वाली मॉडर्न इमरजेंसी सर्विसेज कंपनी ने एंबुलेंस कर्मचारियों को सितंबर, अक्टूबर और नवंबर—तीन महीने का वेतन नहीं दिया है। बकाया वेतन की राशि करीब 4 करोड़ 58 लाख 28 हजार रुपए है। वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है और कई कर्मचारी कर्ज में डूब गए हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बैठक में इन सभी मुद्दों पर चर्चा कर सरकार और भूतपूर्व एंबुलेंस संचालक कंपनी मॉडर्न इमरजेंसी सर्विसेज के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक कर्मचारियों को बकाया वेतन और रोजगार की सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 17:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जयपुरिया और आरयूएचएस के मरीजों को नहीं मिलेगी 24 घंटे सीटी एमआरआई की सुविधा, मरीजों की उम्मीदों पर पानी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के राजकीय जयपुरिया हॉस्पिटल और आरयूएचएस के मरीजों को सीटी एमआरआई जांच की सुविधा 24 घंटे नहीं मिलेगी। जांच करने वाली एजेंसी इंटर्नल हॉस्पिटल ने इस सुविधा को शुरू करने से मना कर दिया। इसे में अब मरीजों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। पिछले दिनों जयपुरिया हॉस्पिटल का निरीक्षण करने आई विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए ये सुविधा 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन शुरू करने के निर्देश दिए थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipuria-and-ruhs-patients-will-not-get-24-hours-ct/article-136508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के राजकीय जयपुरिया हॉस्पिटल और आरयूएचएस के मरीजों को सीटी एमआरआई जांच की सुविधा 24 घंटे नहीं मिलेगी। जांच करने वाली एजेंसी इंटर्नल हॉस्पिटल ने इस सुविधा को शुरू करने से मना कर दिया। इसे में अब मरीजों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों जयपुरिया हॉस्पिटल का निरीक्षण करने आई विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए ये सुविधा 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन शुरू करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कंपनी ने इनकार करते हुए 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा होने का हवाला दिया है।</p>
<p><strong>मरीजों ने की थी शिकायत</strong><br />पिछले दिनों प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ जयपुरिया हॉस्पिटल में निरीक्षण करने पहुंची थी। जहां कई मरीजों से जब बात की तो पता चला सीटी एमआरआई की जांच के लिए मरीजों को सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है। कुछ मरीज जो आर यू एच एस से ओपीडी में दिखाने के बाद एमआरआई जांच के लिए जयपुरिया हॉस्पिटल पहुंचते हैं तो इन जांचों पर साइन करने वाले यहां जिम्मेदार डॉक्टर नहीं मिलते। अगर मिल भी जाते हैं तो प्रक्रिया पूरी करते-करते शाम के 5-6 बज जाते हैं। इसके बाद जांच सेंटर पहुंचने पर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 14:46:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना में गुणवत्ता को लेकर चिकित्सा विभाग सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सख्त नीति के तहत राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन ने अमानक दवाएं सप्लाई करने पर इस वर्ष 7 फर्मों और 40 दवाओं को डिबार किया है। यह निगम के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि निःशुल्क दवा योजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा। 2011 से 2024 तक सिर्फ 26 फर्मों पर कार्रवाई हुई थी, जबकि 2025-26 में अकेले 7 कंपनियां प्रतिबंधित हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/medical-department-is-strict-regarding-quality-in-chief-minister-free/article-133110"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/dave.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर, 19 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा की पहल पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता एवं आमजन को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। साथ ही, लापरवाही या अनियमितताओं के मामलों में सख्त एक्शन लिया जा रहा है। इसी कड़ी में आमजन को मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना में गुणवत्तापूर्ण औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान मेडिकल सर्विसेज काॅरपोरेशन ने गुणवत्ता जांच में दवाओं के मानकों पर खरा नहीं उतरने पर इस वर्ष में ही अब तक 7 फर्मों और 40 उत्पादों को डिबार कर दिया है। यह निगम के गठन से लेकर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।</p>
<p>चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के सुचारू संचालन के साथ ही हमारी प्राथमिकता है कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलें। दवाओं की गुणवत्ता को लेकर जीरो टोलरेंस की नीति पर काम करते हुए विभाग ने गुणवत्ता मानकों में खरा नहीं उतरने वाली दवाओं से संबंधित फर्मों के विरूद्ध सख्त कदम उठाए हैं। इसी का परिणाम है कि इसी वर्ष में 7 फर्मों एवं 40 उत्पादों को डिबार कर दिया गया है। इतनी बड़ी कार्रवाई निगम के गठन से लेकर अब तक कभी नहीं की गई।</p>
<p><strong>2011 से 2024 तक केवल 26 फर्म हुई थी डिबार</strong></p>
<p>प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि निगम के गठन के पश्चात वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2024-25 के दौरान कुल 26 कम्पनियों को प्रतिबंधित किया गया था, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही अमानक दवा की आपूर्ति अथवा आपूर्ति नहीं करने के कारण 07 दवा कम्पनियों को प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही, 40 उत्पादों को डिबार किया गया है, जो किसी वित्तीय वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इसके अलावा 06 प्रकरणों में कम्पनियों पर शास्ति आरोपित की गई है।</p>
<p><strong>दवा जांच का है फुल प्रूफ सिस्टम</strong></p>
<p>राजस्थान मेडिकल सर्विसेज काॅरपोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री पुखराज सेन ने बताया कि अस्पतालों में आपूर्ति से पहले दवाओं की जांच का निगम ने फुल प्रूफ सिस्टम विकसित किया हुआ है, ताकि कोई भी अमानक दवा रोगी तक नहीं पहुंचे। निगम की गुणवत्ता नीति के अनुसार सप्लायर्स से क्रय की गई औषधियों को जिला औषधि भंडारों में क्वारंटाइन क्षेत्र में रखा जाता है तथा प्रत्येक दवा के प्रत्येक बैच की कॉर्पोरेशन की अधिकृत प्रयोगशालाओं से जांच कराई जाती है। जांच में मानक कोटि की पाए जाने पर ही दवा को चिकित्सालयों में वितरण हेतु ई-औषधि सॉफ्टवेयर के माध्यम से वितरण हेतु रिलीज किया जाता है। अधिकृत प्रयोगशाला से जांच में अमानक पाई गई औषधि के बैच को रिजेक्ट कर दिया जाता है।</p>
<p><strong>यह प्रक्रिया अपनाई जाती है प्रतिबंध के लिए</strong></p>
<p>प्रारंभिक स्तर पर अमानक पाई गई औषधि की गुणवत्ता की जांच की पुष्टि हेतु राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में सेम्पल प्रेषित किए जाते हैं। निगम की गुणवत्ता नीति के अनुसार औषधि नियंत्रक को भी लिखा जाता है, जिस पर औषधि नियंत्रक द्वारा संबंधित जिला औषधि भंडार गृह से सैम्पल लेकर राजकीय प्रयोगशाला में जांच कराई जाती है। निगम के स्तर पर टेस्टिंग के अतिरिक्त विभिन्न जिलों में औषधि नियंत्रण अधिकारियों द्वारा भी जांच हेतु रैंडम आधार पर सैम्पल लिए जाते हैं।</p>
<p>औषधि परीक्षण प्रयोगशाला से अमानक कोटि की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर प्रकरण को अनुशासनात्मक समिति की बैठक में रखा जाता है तथा फर्म को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए अवसर दिया जाता है। निगम की अनुशासनात्मक समिति द्वारा निविदा शर्तों के उल्लंघन एवं ब्लैक लिस्टिंग या डिबारमेंट के सम्बन्ध में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार फर्म अथवा प्रोडक्ट को निश्चित अवधि के लिए डिबार अथवा पेनल्टी की कार्यवाही की जाती है।</p>
<p><strong>इस वर्ष में इन 7 फर्मों को किया डिबार</strong></p>
<p>निगम ने अमानक श्रेणी या मिलावटी दवाओं की आपूर्ति करने पर इस वर्ष 5 फर्मों को 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया है। मेसर्स एरियन हेल्थकेयर को सिप्रोफ्लॉक्सासिन और डेक्सामेथासोन आई एवं ईयर ड्राॅप, मेसर्स एग्रॉन रेमेडीज प्रा.लि. को सेफ्युरॉक्सिम एक्सिटिल टैबलेट तथा टोब्रामाइसिन आईड्रॉप, मेसर्स एफी पेरेंटेरल्स को कैल्शियम व विटामिन डी3 टैबलेट्स, जेपीईई ड्रग्स को कैल्शियम व विटामिन डी3 सस्पेंशन और मैसर्स साई पेरेंटेरल्स लि. को हेपरिन सोडियम इंजेक्शन अमानक श्रेणी का पाया जाने पर डिबार किया है। इसी प्रकार 2 फर्मों को सेवा शर्तों की पालना नहीं करने पर 3 वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया है। मैसर्स बायोजेनेटिक ड्रग्स प्रा.लि. एवं मैसर्स स्माइलैक्स हेल्थकेयर ड्रग कंपनी को सेवा शर्तों में उल्लंघन पर डिबार किया गया है। </p>
<p><strong>इन उत्पादों पर लगाया प्रतिबंध</strong></p>
<p>जांच में दवाओं के नमूने अमानक पाने पर कुल 40 दवाइयों की बिक्री व बेचान पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें मेसर्स मैक्सवेल लाइफ साइंसेज प्रा. लि. की प्राइमाक्वीन टैबलेट, मेसर्स स्कॉट एडिल फार्मेशिया लि. के हेपरिन सोडियम इंजेक्शन व मेसर्स यक्का फार्मास्युटिकल्स प्रा.लि. की कैल्शियम और विटामिन डी3 सस्पेंशन पर 3 वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इसी प्रकार मेसर्स सेंटलाइफ फार्मास्युटिकल्स लि. की फेक्सोफेनाडाइन टैबलेट, मैसर्स लाइफ मैक्स कैंसर लैबोरेट्रीज की लेवेटिरासिटम टैबलेट, मैसर्स टाइटेनियम टेक्नोलॉजीज (इंडिया) प्रा.लि. के कैल्सिट्रायॉल कैप्सूल, मैसर्स स्टेरिमेड मेडिकल डिवाइसेस प्रा.लि. के सक्शन कैथेटर स्टेराइल साइज एफजी-14 व सक्शन कैथेटर स्टेराइल साइज एफजी-12, मैसर्स लाइफ मैक्स कैंसर लैबोरेट्रीज के क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन टैबलेट्स, मैसर्स एफी पेरेंटेरल्स की मेटफॉर्मिन एचसीएल (सस्टेन्ड रिलीज) और ग्लिमेपिराइड टैबलेट, मेसर्स सेंटलाइफ फार्मास्युटिकल्स लि. के कैल्शियम और विटामिन डी3 सस्पेंशन एवं मेसर्स अस्तम हेल्थकेयर प्रा.लि. की सेफिक्सिम टैबलेट, डिस्पर्सिबल टैबलेट को 2 वर्ष की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया गया है। मैसर्स साई पेरेंटेरल्स लिमिटेड की सेफ्पोडॉक्सिम प्रॉक्सिटिल टैबलेट, मैसर्स कैप्टैब बायोटेक यूनिट-दो के ब्यूडेसोनाइड रेस्पिरेटरी सॉल्यूशन, मैसर्स जी लैबोरेट्रीज लि. के इट्राकोनाजोल कैप्सूल एवं मैसर्स विटाल हेल्थकेयर प्रा.लि. के ब्यूपिवाकेन हाइड्रोक्लोराइड इन डेक्सट्रोज इंजेक्शन पर 18 माह का प्रतिबंध लगाया गया है। मैसर्स रिलीफ बायोटेक प्रा.लि., रुड़की के ग्लिमेपिराइड 2 मिग्रा ़ पियोग्लिटाजोन 15 मिग्रा ़ मेटफॉर्मिन एचसीएल एसआर टैबलेट, मेसर्स एमेक्सफार्मा, तेलंगाना के लोसार्टन पोटैशियम हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड टैबलेट, मेसर्स एग्रॉन रेमेडीज प्रा.लि., काशीपुर की मेटफॉर्मिन एचसीएल एसआर ग्लिमेपिराइड टैबलेट  एवं मैसर्स सेंचुरियन रेमेडीज प्रा. लि., वडोदरा की पिरफेनीडोन टैबलेट अमानक पाए जाने पर 1 वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 19:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिकित्सा विभाग की बड़ी सख्ती : राजहेल्थ पोर्टल पर लापरवाही पर गिरेगी गाज, नवंबर से रुकेगी तनख्वाह</title>
                                    <description><![CDATA[राजहेल्थ पोर्टल पर आवश्यक अपडेशन कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कार्मिकों पर अब चिकित्सा विभाग ने बड़ी सख्ती दिखाई है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो अधिकारी या कर्मचारी समय पर पोर्टल पर सूचना अपडेट नहीं करेंगे, उनकी नवंबर माह की वेतन राशि रोक दी जाएगी। पिछले पांच महीनों में विभाग द्वारा छह बार सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं, बावजूद इसके कई अधिकारी और संस्थान अपडेशन में लापरवाही बरत रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/medical-department-will-be-very-strict-negligence-on-rajhealth-portal/article-131688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(19).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजहेल्थ पोर्टल पर आवश्यक अपडेशन कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कार्मिकों पर अब चिकित्सा विभाग ने बड़ी सख्ती दिखाई है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो अधिकारी या कर्मचारी समय पर पोर्टल पर सूचना अपडेट नहीं करेंगे, उनकी नवंबर माह की वेतन राशि रोक दी जाएगी। पिछले पांच महीनों में विभाग द्वारा छह बार सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं, बावजूद इसके कई अधिकारी और संस्थान अपडेशन में लापरवाही बरत रहे हैं। इस स्थिति पर प्रिंसिपल सेकेट्री गायत्री राठौड़ ने कड़ी नाराजगी जताई है। विभाग ने निर्देश दिए थे कि सभी कार्यालयों और चिकित्सा संस्थानों को अपने-अपने कार्मिकों के प्रोफाइल अपडेशन, वेरिफिकेशन, स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों का बजट मदवार विवरण राजहेल्थ पोर्टल पर अपलोड करना आवश्यक है।</p>
<p>इन निर्देशों की बार-बार अनदेखी के बाद अब निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रविप्रकाश शर्मा और निदेशक अराजपत्रित राकेश कुमार ने सभी प्राचार्य, अधीक्षक, संयुक्त निदेशक, सीएमएचओ, पीएमओ और आहरण वितरण अधिकारियों को पत्र लिखकर सख्त चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो वेतन रोकने की कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 17:22:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिकित्सा विभाग ने प्रारंभ की तैयारियां : मजबूत होगा आरजीएचएस का प्रबंधन, किए जाएंगे जरूरी सुधार</title>
                                    <description><![CDATA[राठौड़ ने एजेंसी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द आरजीएचएस योजना के सभी पक्षों का अध्ययन कर उसमें सुधार के लिए एक्शन प्लान तैयार करें ताकि योजना में किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश नहीं रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rghs-will-be-strengthened-and-necessary-improvements-will-be-made/article-116747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(8).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान गवर्नमेंट हैल्थ स्कीम का संचालन अब चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग की ओर से किया जाएगा। चिकित्सा विभाग ने रोगियों को योजना का समुचित लाभ दिलाने के लिए योजना के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने, अस्पतालों तथा फार्मेसी स्टोर के एम्पेनलमेंट, क्लेम प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सुगम बनाने के लिए काम प्रारंभ कर दिया है। योजना का प्रबंधन और क्रियान्वयन अब नए स्वरूप में सामने आएगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता पर जीरो टोलरेंस की नीति के साथ एक्शन लिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभार्थी का किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं हो।</p>
<p>चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने यह योजना चिकित्सा विभाग के अधीन आने के बाद शनिवार को पहली बैठक ली और योजना में आवश्यक सुधार के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी के माध्यम से मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना का प्रभावी रूप से संचालन किया जा रहा है और इस योजना से प्रदेश के करीब 1 करोड़ 34 लाख परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इसी अनुभव को देखते हुए राज्य सरकार ने आरजीएचएस योजना के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी को सौंपी है। </p>
<p><strong>सुधार के लिए तैयार करें एक्शन प्लान</strong><br />राठौड़ ने एजेंसी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द आरजीएचएस योजना के सभी पक्षों का अध्ययन कर उसमें सुधार के लिए एक्शन प्लान तैयार करें ताकि योजना में किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश नहीं रहे। योजना में अस्पतालों और दवा दुकानों का एम्पेनलमेंट, रोगियों का ओपीडी एवं आईपीडी में रजिस्ट्रेशन, टीआईडी जनरेशन, उपचार की एप्रुव्वल सहित सभी प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कर उन्हें सुदृढ़ बनाया जाए। जहां भी सुधार की आवश्यकता हो तत्काल उसके संबंध में कार्रवाई की जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Jun 2025 14:41:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक तिहाई ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट ही कर रहे काम</title>
                                    <description><![CDATA[तीनों अस्पतालों में 300 बैड किए रिजर्व। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-one-auxiliary-oxygen-generation-plant-is-working/article-116562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(13).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिस तरह से देश व प्रदेश में एक बार फिर से कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उसे देखते हुए केन्द्र व रा’य सरकार द्वारा चिकित्सा विभाग को अलर्ट किया गया है। कोटा में भी विभाग की ओर से तैयारियां तो की जा रही हैं लेकिन अभी भी जो कमियां हैं उन्हें सुधारा जा रहा है। प्रदेश में अब तक कोरोना के कई मरीज सामने आ चुके हैं। हालांकि कोटा में अभी तक तो कोई मरीज नहीं मिला है। लेकिन प्रदेश में बढ़ रहे मामलों को देखते हुए कोटा में भी कभी भी पुरानी स्थिति बनने की संभावना के मद्देनजर तैयारियां की जा रही है। </p>
<p>चिकित्सा विभाग की ओर से दो दिन तक सरकारी अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मॉकड्रिल की गई है। जहां अभी भी पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं पाई गई है। सीएमएचओ व डिप्टी सीएमएचओ द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान मिली कमियों को सुधार के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि चिकित्सा विभाग की ओर से अपने स्तर पर तैयारियां तो की जा रही हैं। लेकिन पिछली बार कोरोना के समय में सबसे अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता महसूस हुई थी। हालांकि कोटा में उसकी व्यवस्था कर दी गई थी लेकिन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। वह भी उस स्थिति में जब यहां तीनों बड़े अस्पतालों में करीब दो दर्जन ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए हुए हैं। एलएमओ की व्यवस्था है। ऑक्सीजन कंसंट्रेट काफी संख्या में मंगवाए गए थे। उनमें से काफी उपकरण व संसाधन तो पड़े-पड़े अनुपयोगी भी हो गए हैं। </p>
<p><strong>एक तिहाई प्लांट कार्यशाील</strong><br />प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना ने बताया कि कोटा के तीनों बड़े अस्पतालों में कुल 24 जनरेशन प्लांट हैं। उनमें से एक तिहाई 8 से 9 ही कार्यशील अवस्था में है। 3 प्लांट अभी तक  विभाग को हैंड ओवर ही नहीं हुए हैं। शेष जो प्लांट बंद या खराब हैं उन्हें सही करने के निर्देश दिए हुए हैं।  इसके अलावा लिक्विड ऑक्सीजन सिलेंडर, आॅक्सीजन कंसंट्रेट समेत अन्य व्यवस्थाएं भी पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन इसके आने से पहले ही सावधानी व तैयारी रखी जा रही है। </p>
<p><strong>300 अतिरिक्त बैड, ऑक्सीजन पर्याप्त</strong><br />कोविड की तैयारियों के बारे में मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना का कहना है कि कोटा में अभी तक कोविड का कोई मरीज नहीं मिला है। लेकिन चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग द्वारा इससे निपटने की पूरी तैयारी की हुई है। उन्होंने बताया कि तीनों बड़े अस्पतालों में कुल 300 अतिरिक्त बैड तैयार किए गए हैं। जिनमें से 200 बैड न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में, 52 एमबीएस में और 48 जे.के. लोन अस्पताल में रिजर्व किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर पूरा एक अस्पताल तैयार किया जा सकता है जिस तरह से पिछली बार सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को तैयार किया गया था। </p>
<p><strong>घबराएं नहीं, सावधानी रखें</strong><br />उन्होंने बताया कि कोरोना के बढ़ते मामलों से घबराने की जरूरत नहीं है। इस बार यह उतना घातक नहीं होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 16:24:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मलेरिया नियंत्रण के लिए क्रैश कार्यक्रम शुरू : मलेरिया को लेकर चिकित्सा विभाग अलर्ट, जिले में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए 14 मई तक चलेगा विशेष अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया क्रैश कार्यक्रम 2025 (प्रथम चरण) की शुरुआत की है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/crash-program-for-malaria-control-starts-with-malaria-medical-department/article-109521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया क्रैश कार्यक्रम 2025 (प्रथम चरण) की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम 14 मई तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने और मलेरिया सहित अन्य मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p>मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और राज्य को मच्छर जनित रोगों से मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिले में 14 मई तक चलाए जा रहे इस अभियान के तहत मच्छर प्रजनन स्थलों पर विभिन्न नियंत्रण उपायों को अपनाया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से सोर्स रिडक्शन के माध्यम से मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों को समाप्त किया जाएगा। एन्टीलार्वल और एन्टी एडल्ट गतिविधियाँ, लार्वा और व्यस्क मच्छरों को नष्ट करने के लिए उचित दवाओं का छिड़काव किया जाएगा। जनता को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर व्यापक स्तर पर आईईसी गतिविधियां संचालित की जायेगी। ड्राई-डे व लार्वा प्रदर्शन के माध्यम से समुदाय को मच्छर जनित रोगों से बचाव की जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से जनता को मलेरिया से बचाव के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत सभी ब्लॉक स्तर पर समस्त प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए जिला स्तर से चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।</p>
<p>डिप्टी सीएमएचओ( हेल्थ) जयपुर प्रथम डॉ. इंद्रा गुप्ता  ने बताया कि मलेरिया क्रैश प्रथम चरण के कार्यक्रम के तहत ब्लॉक स्तर पर पॉजिटिव केसों के लिए समयबद्व सोर्स रिडक्शन, एन्टीलार्वल, एन्टी एडल्ट व विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के आयोजन करने के साथ ही बायोलॉजिकल कंट्रोल की रणनीति को भी अपनाया जाएगा। इसके तहत हैचरी को सक्रिय किया जाएगा ताकि प्राकृतिक रूप से मच्छरों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। स्थायी जल स्रोतों में गम्बुशिया मछलियों को छोड़ा जाएगा, जो मच्छरों के लार्वा का सेवन कर उनके प्रसार को रोकने में सहायक होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 16:33:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिकित्सा विभाग में एक साल 24 हजार भर्ती : 6.23 करोड़ लोगों की हैल्थ हिस्ट्री डाटा तैयार दूसरे राज्यों में भी निशुल्क इलाज जल्द</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश को मेडिकल हब बनाने को राइजिंग राजस्थान में 62 हजार करोड़ के निवेश एमओयू आए थे, जिनमें से 50 फीसदी से अधिक 36,575 करोड़ के जमीन पर उतर आए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-the-medical-department-a-record-24-thousand-recruitment-in/article-108770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bhajanlal-sharmaa-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में चिकित्सा विभाग ने प्रदेश के 6.23 करोड़ लोगों की हैल्थ हिस्ट्री तैयार कर उनके आभा आईडी बना दी है। अब लोगों को अपनी हैल्थ हिस्ट्री के लिए पर्चियों का रिकॉर्ड नहीं रखना पड़ेगा। ये डाटा स्वत: ही ऑनलाइन हो जाएगा। वहीं दूसरे राज्यों में भी प्रदेश के लोगों को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में 25 लाख तक का निशुल्क इलाज इंटर स्टेट पोर्टबिलिटी स्कीम से मिलने जा रहा है। वे बाहरी राज्यों के अस्पतालों में भी 25 लाख तक का इलाज निशुल्क ले सकेंगे। भजनलाल सरकार ने हैल्थ सिस्टम मजबूती को एक साल में रिकॉर्ड 24 हजार भर्तियां विभाग में की हैं। वहीं 26 हजार प्रक्रियाधीन हैं। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना लागू की गई। जिसमें रोज 8200 लोग निशुल्क इलाज ले रहे हैं। अब तक 66 लाख लोगों ने बीमा राशि से 3394 करोड़ का निशुल्क इलाज लिया है। जल्द इसमें ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी की अत्याधुनिक सेवाएं भी जुड़ेंगी। 25 लाख तक के 2407 बीमारियों के निशुल्क इलाज पैकेज विभाग दे रहा है। प्रदेश को मेडिकल हब बनाने को राइजिंग राजस्थान में 62 हजार करोड़ के निवेश एमओयू आए थे, जिनमें से 50 फीसदी से अधिक 36,575 करोड़ के जमीन पर उतर आए हैं। </p>
<p><strong>जयपुर में अत्याधुनिक सेवाएं यूं विकसित हो रही</strong><br />आरयूएचएस को एम्स की तर्ज पर रिम्स बनाया जा रहा है। बीते साल 200 करोड़ और अब 500 करोड़ दिए गए हैं। इसमें 700 बैड और 270 आईसीयू बैड होंगे। सभी गंभीर बीमारियों का इलाज होगा। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में 85 करोड़ अत्याधुनिक सेवा-चौबीस घंटे इलाज में खर्च हो रहे हैं। 1100 करोड़ का आईपीडी टॉवर 2026 तक बन जाएगा। इसमें 1243 बैड, 20 ओटी, 4 कैथलैब, 100 ओपीडी काउंटर होंगे। यहीं हॉर्ट के मरीजों को चौबीसों घंटे त्वरित इलाज को इंस्टीटयूट ऑफ कार्डियो वेस्कुलर साइंसेज टॉवर इसी साल शुरू हो जाएगा। </p>
<p><strong>प्रदेश में हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपए अलग से दिए</strong><br />भजनलाल सरकार ने आते ही प्रदेश में हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूती को 15 हजार करोड़ अलग से दिए थे। इससे बीते साल में 38 सीएचसी, 149 पीएचसी, 400 सब सेंटर, 57 ब्लॉक पब्लिक हैल्थ यूनिट, 6 इंटिग्रेटेड पीएचएल, 16 जिला औषधिक भंडर, 4 ट्रोमा सेंटर, 7 बीसीएमओ ऑफिस, 1 क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, 5 ब्लड बैंक बन चुके हैं।</p>
<p><strong>71 हजार गर्भवतियों की निशुल्क सोनोग्राफी हुई बुजुर्गों को विशेष सेवाएं</strong><br />मां वाउचर योजना के तहत अब तक 1.27 लाख गर्भवतियों को प्राइवेट अस्पतालों में 71 हजार महिलाओं ने सोनोग्राफी निशुल्क करवाई है। 1200 प्राइवेट अस्पताल इससे जोड़े हैं। हर साल 3 लाख गर्भवती महिलाओं को ये कूपन बांटे जाएंगे। वहीं जिला अस्पतालों में बुजुर्गों को अलग और खास इलाज को रामाश्रय वार्ड खोले गए हैं। यहीं उनकी जांच, उपचार, दवा सब सुविधाएं हैं। अब तक 14.21 लाख बुजुर्ग यहां इलाज ले चुके हैं। 20 हजार को फिजियोथैरेपी की सुविधा भी मिली है।</p>
<p><strong>ये भी बड़ी उपलब्धियां</strong><br />एक साल में 5 नए मेडिकल कॉलेज बारां, बांसवाड़ा, नागौर, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर में शुरू किए गए। जोधपुर में दो, कोटा में एक प्राइवेट कॉलेज शुरू हुआ। 750 मेडिकल सीटें बढ़ी। <br />20348 आयुष्मान आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले जा रहे, 11655 बनाए जा चुके। <br />111 बेसिक लाइफ सपोर्ट, 58 एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस वाहन खरीद कर सेवाओं में लगाए। <br />अंग प्रत्यारोपण के फर्जीवाड़े को रोकने को राज्यस्तरीय प्राधिकार समिति, सलाहकार समिति, सोटो, स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई। नई एसओपी जारी की गई। ऑनलाइन वेब पोर्टल भी बनाया जा रहा है। <br />आमजन में बीमारी स्क्रीनिंग को 3224 आयुष्मान आरोग्य शिविर लगे। 11.59 लाख लोगों की जांच-इलाज हुआ। <br />13,711 खाद्य पदार्थ दुकान-प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण कर मिलावटखोरों पर कार्रवाई हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 09:17:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चिकित्सा विभाग ने वीडियो कॉल से प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का किया औचक निरीक्षण, आमजन ने दिया फीडबैक</title>
                                    <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल एवं चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवा तंत्र निरंतर सुदृढ़ हो रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/medical-department-conducted-surprise-inspection-of-health-services-across-the/article-98131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल एवं चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवा तंत्र निरंतर सुदृढ़ हो रहा है। चिकित्सा विभाग की ओर से वीडियो कॉल के माध्यम से प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का औचक निरीक्षण एवं स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद का नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। विभाग की प्रमुख शासन सचिव से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों ने गांव-ढाणी तक स्वास्थ्य केंद्रों पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित अन्य सेवाओं का वीडियो कॉल के माध्यम से हाल जाना और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। </p>
<p>प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी, ब्यावर के जवाजा, अलवर के थानागाजी, झालावाड़ सहित अन्य स्थानों पर वीडियो कॉल कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जांची। उन्होंने बीसीएमओ, चिकित्सा संस्थानों पर कार्यरत चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद किया। संवाद के दौरान गायत्री  राठौड़ ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के तहत संस्थागत प्रसव, टीकाकरण आदि मानकों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और इन्हें और बेहतर करने के निर्देश दिए। </p>
<p><strong>आयुष्मान आरोग्य शिविरों का पहुंचाएं अधिक से अधिक लाभ</strong><br />प्रमुख शासन सचिव ने चिकित्सा अधिकारियों से मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य शिविरों के आयोजन एवं इनमें उपलब्ध करवाई जा रही सेवाओं के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इन कैम्पों में कैंसर व टीबी स्क्रीनिंग सहित अन्य जांचों पर फोकस किया जाए, ताकि आमजन के स्वास्थ्य के संबंध में फील्ड स्तर से वास्तविक जानकारियां प्राप्त हो सके और लोगों को बीमारी के गंभीर स्तर पर पहुंचने से पहले ही उपचार और परामर्श उपलब्ध करवाया जा सके। साथ ही स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आवश्यक सुधार कर इनका अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जाना सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि​इन शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को इनसे लाभान्वित किया जाए। </p>
<p><strong>अधिकांश स्थानों पर सुचारू पाई गईं व्यवस्थाएं</strong><br />गायत्री राठौड़ ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर आयोजित इस संवाद के दौरान अधिकांश स्थानों पर सुचारू व्यवस्थाएं देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों पर इसी तरह सेवाभाव के साथ काम करते हुए आमजन को राहत पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि अच्छा काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को विभाग की ओर से भरपूर प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्हें उल्लेखनीय सेवाओं के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया जाएगा। </p>
<p><strong>एक हजार से अधिक कॉल कर जांची स्थिति</strong><br />राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक भारती दीक्षित, निदेशक आईईसी शाहीन अली खान, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश माथुर सहित राज्य, संभाग एवं जिला स्तरीय करीब 100 अधिकारियों ने एक हजार से अधिक कॉल कर प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान सामने आया कि स्वास्थ्य सेवाओं में पहले के मुकाबले निरंतर सुधार हो रहा है। </p>
<p><strong>आमजन ने कहा- पहले से बेहतर हुईं सेवाएं</strong><br />आमजन ने भी संवाद के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर सकारात्मक फीडबैक दिया। उन्होंने बताया कि आमतौर पर चिकित्सा संस्थानों में स्टाफ समय पर आ रहा है। साफ-सफाई ​की स्थिति पहले से बेहतर है एवं जांच, परामर्श और उपचार भी सुगमता से मिल रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 18:43:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुगारी अस्पताल में कर्मचारियों का टोटा</title>
                                    <description><![CDATA[मौके पर रोगियों सहित तीमारदारों ने जताया आक्रोश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/shortage-of-staff-in-dugari-hospital/article-94948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/dugari-asptal-mai-karmchariyon-la-tota...bhandeda,-bundi-news-13-11-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के दुगारी कस्बे में स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर चिकित्सा विभागीय कर्मचारियों की लंबे समय से कमी बनी हुई है। डॉक्टर नही रहने पर रोगियों को नर्सिंग ऑफिसर से उपचार लेने की मजबूरी बनी हुई है। फिर भी रोगियों की बीमारी ठीक नहीं हो रही है। जिम्मेदार के अभाव में मौके पर रखी सीबीसी मशीन आठ माह से बंद है। मजबूरन जांच के लिए भी बांसी, नैनवां, बूंदी पहुंचते है। मौके पर पर्ची काउंटर पर कर्मचारी नही होने से सफाई कर्मचारी ही पर्ची बनाते है। केंद्र पर मरीजों का तांता लगा रहता है। यहां की अव्यवस्थाओं को लेकर मंगलवार को लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। मौके पर आए लोगों ने अस्पताल के गेट पर चिकित्सा विभाग के प्रति रोगियों और तीमारदारों ने आधे घंटे तक नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। जानकारी के अनुसार बांसी-नैनवां मुख्य मार्ग पर स्थित दुगारी सरकारी अस्पताल में लंबे समय से ही कर्मचारियों का टोटा बना हुआ है। संबंधित विभाग ने चिकित्सक सहित 7 कर्मचारी लगा रखे है। जिनमें दो कर्मचारी स्थाई, 1 नर्सिंग कर्मचारी, एक एएनएम कार्यरत है। बाकी चिकित्सक सहित अन्य कर्मचारी संविदा पर कार्यरत है। मगंलवार को जब रोगी उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे, तो 4 कर्मचारी ही मौके पर मिले। चिकित्सक सहित 3 कर्मचारी मौके पर नही होने से रोगियों व तीमारदारों में आक्रोश हो गया। पर्ची काउंटर पर भी जो कर्मचारी पर्ची बना रहा था वही कर्मचारी दवा वितरण भी वितरित कर रहा था। ऐसे हाल में कर्मचारी सफाई कर्मचारी का सहयोग लेकर पर्ची काउंटर का कार्य करवाते नजर आए है। मौके पर रोगियों का कहना है कि सफाई कर्मचारी ज्यादा पढा-लिखा नही है, फिर भी इस तरह से कार्य करवाते है। जो रोगियों सहित तीमारदारों में आक्रोश जताया है कि लगभग तीन-चार रोज से लगातार आ रहे है। दवा पट्टी करवाने के लिए भी एक से दो घंटे तक बैठकर इंतजार करना पड़ता है। तब कर्मचारी इस काम को करते है। इस तरह की समस्याओं का सामना करते हुए आ रहे है। पर फिर भी संबंधित विभाग यहां रोगियों की समस्या को लेकर गंभीरता नहीं बरत रहे है। जो रोगियों सहित तीमारदारों को जांच व उचित उपचार के लिए अन्यत्र पहुंचकर उपचार करवाने की मजबूरी बनी हुई है। जो प्राथमिक उपचार लेने में आर्थिक खर्च सहित अतिरिक्त समय लग रहा है। </p>
<p>चिकित्सक के अभाव में नर्सिंग आॅफिसर के भरोसे अस्पताल चलने से ग्रामीण क्षेत्रीय लोगों की उचित उपचार के लिए भी इधर-उधर भागा दौड़ी होती है।  दुगारी निवासी मुकुट बिहारी दाधीच, शैलेंद्र कुमार गौतम, रूद्रेश कुमार गौतम, हनुमान गौतम, राधेश्याम गुर्जर, रामलाल कहार, रवि दाधीच, दौलतपुरा निवासी पुष्पा बाई मीणा, मायाराम मीणा आदि ने बताया कि लंबे समय से यहां पर अव्यवस्थाओं का आलम हो रहा है। पर संबंधित विभाग लोगों की परेशानी को दूर नहीं कर रहा है। जो मजबूरन उचित उपचार के लिए नैनवां, देई व जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार करवानी की मजबूरी बनी हुई है। जिम्मेदार समस्या का जल्द निराकरण करावें तो ग्रामीण अंचलों से आने वाले लोगों को भी राहत मिलें। अस्पताल के नाम अनुरूप व्यवस्था नहीं है। </p>
<p><strong>जांच मशीन, आठ माह से बंद</strong><br />इस अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्रों से उचित उपचार की मंशा लेकर आने वाले लोगों को नि:शुल्क जांच से लाभान्वित होकर समय पर जांच अनुरूप उपचार मुहैया हो सके। पर वह भी अस्पताल की लापरवाही की भेट चढ़ी हुई है। यहां सीबीसी मशीन आठ माह से बंद है। पर स्वास्थ्य महकमा अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नहीं होने से लोगों में भी विभाग के प्रति नाराजगी है।</p>
<p><strong>रोगियों की जुबानी </strong><br />एक घंटे से बैठा हूं, पट्टी करवानी है। इंजेक्शन भी लगवाने है। मगर कर्मचारी ही नही आ रहे है। मरहमपट्टी कक्ष में परेशान हो रहे है। अस्पताल में लापरवाही के चलते अव्यवस्थाएं हो रही है। जिम्मेदार सुधार करावें तो राहत मिलें।<br /><strong>- रामप्रसाद, पुरुष रोगी निवासी भजनेरी </strong></p>
<p>दो रोज से अस्पताल में उपचार के लिए आ रही हूं। मगर यहां पर चिकित्सक नही मिलने से उचित उपचार नही हो रहा है। बहुत समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, फिर भी स्वास्थ्य में आराम नही मिल रहा है। संबंधित विभाग यहां सुध लेवें तो लोगों को भी राहत मिलें।<br /><strong>- पुष्पा बाई मीणा, महिला रोगी निवासी दौलतपुरा</strong></p>
<p>उचित उपचार के लिए में मेरी मम्मी को लेकर ग्रामीण क्षेत्र से आया हूं। लेकिन यहां पर मौके पर चिकित्सक नही है। एक कंपाउंडर स्थानीय है, जो यही उपचार दे रहा है। उचित उपचार के लिए आते है। मगर चिकित्सक के नही मिलने से निराश हो रहे है। जिम्मेदार अस्पताल की समस्या का जल्द निराकरण करावें तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी राहत मिले।<br /><strong>- मायाराम मीणा, तीमारदार निवासी दौलतपुरा </strong></p>
<p>मैंने अन्यत्र जांचे करवाई है। जो मेरे प्लेटलेट्स कम आ रही है। जो यहां पर तीन रोज से आ रहा हूं। मगर उचित उपचार ही नही मिल रहा है। पर्ची काउंटर पर कम पढा-लिखा व्यक्ति काम कर रहा है। यहां पर जिम्मेदारों के अभाव में अस्पताल पर आने वाले रोगी व तीमारदार परेशान हो रहे है। संबंधित विभाग जल्द समस्या का निराकरण करावें।<br /><strong>- राधेश्याम गुर्जर, रोगी निवासी दुगारी </strong></p>
<p>उचित उपचार के लिए अस्पताल आया हूँ, तो यहां पर सीबीसी जांच मशीन ही बंद है। चिकित्सक कक्ष में चिकित्सक नही होने से निराश हुए है। मजबूरन नर्सिंग कर्मचारी द्वारा दिए उपचार को लेकर संतुष्ट होना पड़ रहा है। संबंधित विभाग रोगियों की समस्या को गंभीरता से नही देख रहा है, जो अस्पताल में उचित उपचार के लिए आने वाले लोग परेशानियों का सामना कर रहे है। जिम्मेदार जल्द समस्या को संज्ञान में लेकर समाधान करावे तो ग्रामीण क्षेत्रीय लोगों को उपचार में राहत मिले। <br /><strong>- रामलाल कहार, रोगी निवासी दुगारी</strong></p>
<p>जो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के आधार पर एक पद पर कर्मचारी की कमी है। अन्य पद भरे हुए है। अस्पताल में कर्मचारी क्यों नही है, इसकी जानकारी लेते है। अस्पताल में पहुंचने वाले रोगियों सहित तीमारदारों की समस्या का समाधान जल्द करवाया जाएगा। <br /><strong>- डॉ.एलपी नागर, बीसीएमओ, चिकित्सा विभाग नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Nov 2024 14:12:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बीमारियों की जद में लाखों नन्हे-मुन्ने, हर साल टीकाकरण से छूट रहे 10 फीसदी से अधिक बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[ गांवों में टीकों को लेकर भम्र, जागरूकता का अभाव है। वहीं शहरों में चुनौतियां बच्चों के चिन्हिकरण की है। शहरों में सभी जगह आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/more-than-10-percent-of-lakhs-of-small-children-are/article-88944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1r1er.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में एक साल तक के लाखों बच्चे बीमारियों की जद में है। प्रदेश में चिकित्सा विभाग के टीकाकरण अभियान में एक साल तक के बच्चों को कुल 9 प्राणघातक बीमारियों से बचाने के लिए 17 टीके अलग-अलग समयावधि में दिए जाते हैं, लेकिन प्रदेश में हर साल 10 फीसदी से अधिक बच्चों को टीकों को सभी डोज नहीं लग पा रही है। ऐसे में वैक्सीनेशन नहीं होने से बच्चों के बीमारियों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p>चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में बीते दो साल में करीब 13 फीसदी बच्चें यानी करीब 4.36 लाख बच्चे टीकाकरण से छूटे हैं। वहीं इस साल के मार्च से 8 अगस्त, 2024 तक 5 माह के बीच 8 फीसदी यानी 43,731 बच्चे अभियान में टीकाकरण कराने नहीं आए। यह आंकड़ा केवल ढाई साल का है। इससे पूर्व भी लाखों बच्चे टीकाकरण से वंचित रह कर बीमारियों की जद में हैं। चिकित्सा विभाग अभियान में घर-घर जाकर बच्चों की ट्रेकिंग करता है। कई बच्चे टीका लगाने के वक्त ट्रेक नहीं हो पाते, लेकिन टीके नहीं लगाने के लिए बडे़ जिम्मेदार बच्चों के माता-पिता हैं।</p>
<p><strong>प्रतिरोधकता को विभाग का प्रयास, परिजनों से आस</strong><br />सभी बच्चों को सभी टीके लग सके इसके लिए चिकित्सा विभाग स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, एएनएम के जरिये बच्चों को चिन्हित करता है, उनका टीकाकरण करता है। टीकाकरण के विशेष अभियान संचालित करता है। घर-घर जाकर टीके लगाए जाते हैं। वंचित बच्चों और क्षेत्रों की ट्रेकिंग को मिशन इन्द्रधनुष अभियान चलाता है। टीकाकरण से किन बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है, इसकी जानकारी परिजनों को देता है, लेकिन दुर्भाग्य से परिजन टीका केन्द्रों तक नहीं जाते। प्रदेश की सभी पीएचसी में टीकाकरण की व्यवस्था है।</p>
<p><strong>एक साल के भीतर ये टीके  जरूरी</strong><br />बीसीजी, हैपेटाइटिस बी, ओपीवी की जीरो डोज पैदा होने के तुरंत बाद 15 दिन के भीतर, ओपीवी की तीन डोज और पेंटावेलेंट टीके की डोज 6वें, 10वें और 14वें सप्ताह में डोज, एफआईपीवी 1 व 2 डोज  6वें और 14 वें सप्ताह में दो डोज, एफआईपीवी की 9 माह के होने पर बूस्टर डोज, पीसीवी की पहले 1 व 2 और बूस्टर डोज 6वें, 14वें सप्ताह में और फिर नौ माह पूरे होने पर, मीजेल्स/ रूबेला की नौ माह पूरे होने पर एक साल के होने तक, विटामिन-ए की नौ माह पूरे होने पर एक साल के होने तक। </p>
<p><strong>टीकाकरण में बड़ी चुनौतियां</strong><br />गांवों में टीकों को लेकर भम्र, जागरूकता का अभाव है। वहीं शहरों में चुनौतियां बच्चों के चिन्हिकरण की है। शहरों में सभी जगह आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं है। शहरी पीएचसी क्षेत्र का नोडल टीकाकरण केन्द्र होता है। यहां एएनएम बच्चों को घर-घर जाकर ट्रेक करती है, लेकिन दिन-प्रतिदिन कॉलोनियों का विस्तार, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स में इनकी नो एंट्री जैसी समस्याएं ट्रेकिंग में बाधक है। </p>
<p>विभाग टीकाकरण की सालभर मुहिम चलाता है। कई कार्यक्रम, अभियान चलते हैं। घर-घर और स्कूलों तक हैल्थ वर्कर्स जाते हैं। पिछले पांच माह में 92 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया है। प्राइवेट अस्पतालों को भी यू-विन पोर्टल से जोड़कर बच्चों को ट्रेक करने का काम शुरू किया है। अभी सभी को इससे जोड़ना बाकी है।’<br />-डॉ. रघुराज सिंह, स्टेट नोडल अधिकारी, टीकाकरण, चिकित्सा विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Aug 2024 11:59:47 +0530</pubDate>
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