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                <title>summer season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बदलाव की आस में थम गया वक्त : आज भी मूलभूत सुविधा पानी के लिए तरस रही पीथपुर ग्राम पंचायत, हर चेहरे पर एक ही सवाल कब मिलेगा पानी, </title>
                                    <description><![CDATA[ गांव की हालत इतनी बदतर है कि यहां की महिलाएं आज भी मीलों पैदल चलकर, सिर पर मटके उठाए कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/time-stopped-in-the-hope-of-change--pots-on-heads/article-114654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। एक ओर सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है। वहीं छीपाबड़ौद तहसील की पीथपुर ग्राम पंचायत आज भी मूलभूत सुविधा पानी के लिए तरस रही है। गांव की हालत इतनी बदतर है कि यहां की महिलाएं आज भी मीलों पैदल चलकर, सिर पर मटके उठाए कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं। ये मटके केवल पानी नहीं, बल्कि वर्षों से झेली जा रही उपेक्षा और पीड़ा का भार ढो रहे हैं। पूरे पंचायत क्षेत्र में न तो एक भी हैडपंप है, न ही जल संग्रहण टंकी। गर्मी के मौसम में जब कुएं भी सूखने लगते हैं, तब हालात और भी भयावह हो जाते हैं। महिलाएं सूरज चढ़ने से पहले ही निकल पड़ती हैं ताकि दिन के लिए थोड़ा बहुत पानी मिल सके। बच्चों की प्यास, बुजुर्गों की बेबसी और महिलाओं की थकान इस गांव की रोजमर्रा की कहानी बन गई है। धूप में तपती धरती, सर पर पानी के मटके उठाए महिलाएं, और हर चेहरे पर एक ही सवाल कब मिलेगा पानी। </p>
<p><strong>अब तो उम्मीद करना भी छोड़ दिया </strong><br />गांववासियों ने बताया कि वे कई बार पंचायत और अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीण महिला कमला बाई ने कहा कि हमने तो अब उम्मीद करना भी छोड़ दिया है, बस जी रहे हैं जैसे तैसे। </p>
<p><strong>सरकार और प्रशासन से गुहार</strong><br />अब गांववाले एक बार फिर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनकी इस आवाज को कोई सुने, और जल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए कोई स्थायी समाधान निकले। </p>
<p>हम रोज दो किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाने जाते हैं। कभी-कभी तो दो-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब जाकर घर का काम चलता है। शरीर थक जाता है, लेकिन कोई उपाय नहीं है। कई बार हाथ-पैर छिल जाते हैं, पर कोई देखने वाला नहीं। अब तो पानी के लिए जीना भी बोझ लगने लगा है। <br /><strong>-रामप्यारी, ग्रामीण महिला</strong></p>
<p>हमने पंचायत में कई बार आवेदन दिए। अधिकारियों से गुहार लगाई। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। गांव में न हैंडपंप है, और न ही कोई टंकी। बरसों से हालात ऐसे ही हैं। गर्मियों में तो हालात और बिगड़ जाते हैं। अब हमें समझ नहीं आता कि कहां जाएं, किससे उम्मीद करें।       <br /><strong> -घासीलाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>पेयजल समस्या हमारे गांव की गंभीर समस्या है। हम इसे लेकर कई बार संबंधित विभागों को अवगत करा चुके हैं। पर इस ओर सरकार ने आजतक ध्यान नहीं दिया है। हम खुद चाहते हैं कि गांव की महिलाएं और बच्चे इस संकट से बाहर आएं। मैं प्रशासन से निवेदन करता हूं कि प्राथमिकता के आधार पर पीथपुर की पेयजल योजना को पूर्ण कराया जाए। <br /><strong>-कौशल किशोर, सरपंच, पीथपुर ग्राम पंचायत</strong></p>
<p>इस समस्या पर ध्यान दिया जाएगा। गांव में निरीक्षण कर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।<br /><strong>-रवि गुप्ता, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, छीपाबड़ौद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 18:11:35 +0530</pubDate>
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                <title>आम का आनंद लीजिए, लेकिन सतर्क रहकर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में गर्मियों का मतलब केवल चिलचिलाती धूप नहीं होता, बल्कि यह वह समय होता है, जब बाजार आमों से भर जाते हैं और घरों में आम से जुड़ी तमाम रेसिपियां बनने लगती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/enjoy-mangoes-but-be-cautious/article-113402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>भारत में गर्मियों का मतलब केवल चिलचिलाती धूप नहीं होता, बल्कि यह वह समय होता है, जब बाजार आमों से भर जाते हैं और घरों में आम से जुड़ी तमाम रेसिपियां बनने लगती हैं। आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि लोग साल भर इसके मौसम का इंतजार करते हैं, लेकिन बढ़ती मांग ने आम के उत्पादन और आपूर्ति को लेकर एक गंभीर समस्या को जन्म दिया है, जिससे न केवल उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। यह समस्या है रसायनों की मदद से आम पकाना, विशेष रूप से कैल्शियम कार्बाइड जैसे घातक रसायन का उपयोग करना। कैल्शियम कार्बाइड एक औद्योगिक रसायन है, जिसका मूल उपयोग वेल्डिंग और एसिटिलीन गैस बनाने में होता है। लेकिन कई फल व्यापारी इसका उपयोग फलों को जल्दी पकाने के लिए करते हैं, खासतौर से आम के मामले में। बाजार में समय पर आम पहुंचाने और अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में बहुत से व्यापारी प्राकृतिक पकने की प्रक्रिया का इंतजार नहीं करते और इन रसायनों का सहारा लेते हैं। </p>
<p>जब कैल्शियम कार्बाइड को नमी के संपर्क में लाया जाता है, तो यह एसिटिलीन गैस उत्पन्न करता है, जो प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले इथाइलीन हार्मोन की तरह काम करता है। यह गैस आम को तेजी से पकाती है और दो दिन के भीतर फल को पीला कर देती है। लेकिन यही प्रक्रिया स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती है। एसिटिलीन गैस के साथ कैल्शियम कार्बाइड से आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे हानिकारक तत्व भी निकलते हैं, जो फल में अवशिष्ट रूप से रह सकते हैं। इनसे मनुष्य के शरीर में तरह-तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे गले में खराश, जलन, चक्कर आना, प्यास लगना, उल्टी आना, त्वचा में अल्सर और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। यही कारण है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग पर पूर्णत प्रतिबंध लगा रखा है। </p>
<p>बावजूद इसके, इसका गैरकानूनी उपयोग आज भी जारी है। समय-समय पर छापेमारी कर इस तरह के आमों की जब्ती की खबरें सामने आती रहती हैं। मई 2024 में कोयंबटूर में 575 किलो आम जब्त किए गए थे, जिन्हें अवैध रूप से कैल्शियम कार्बाइड से पकाया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस रसायन का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है और जागरूकता की कमी के कारण उपभोक्ता अनजाने में स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि उपभोक्ता स्वयं सतर्क रहें और कुछ आसान तरीकों से पहचान कर सकें कि उनके द्वारा खरीदा गया आम प्राकृतिक ढंग से पका है या रसायन के जरिए। सबसे आसान तरीका है पानी परीक्षण। एक बाल्टी में आम डालें, अगर आम डूब जाए तो समझिए कि वह प्राकृतिक रूप से पका हुआ है, लेकिन अगर वह तैरे तो उसके रसायन से पकने की संभावना अधिक है। </p>
<p>दूसरा तरीका है उसका रंग और बनावट देखना। प्राकृतिक रूप से पके आमों का रंग एक समान पीला होता है, जबकि रसायन से पके आमों में कभी बहुत पीला, कभी हरा या काले धब्बे दिखाई देते हैं। उनके ऊपर अक्सर अनियमित रंगों के चकत्ते होते हैं। ऐसे आम को छूने से भी अंतर पता चलता है, प्राकृतिक आम थोड़ा ठोस होगा जबकि रसायन से पका आम अत्यधिक नरम और बेडौल हो सकता है। स्वाद के आधार पर भी अंतर महसूस किया जा सकता है। अगर आम खाने के तुरंत बाद गले में जलन हो या जीभ पर तीखापन महसूस हो तो यह संकेत हो सकता है कि उसमें हानिकारक रसायन मौजूद हैं। हालांकि यह तरीका वैज्ञानिक नहीं है, परंतु अनुभव के आधार पर कई बार सटीक साबित होता है। इन तमाम खतरों को देखते हुए उपभोक्ताओं को सजग रहना चाहिए। </p>
<p>बाजार से आम खरीदते समय हमेशा ध्यान दें कि वह किस स्रोत से आ रहे हैं। जब भी संभव हो, स्थानीय किसानों से सीधे आम खरीदने का प्रयास करें, जो बिना रसायनों के आम उगाते हैं। फल को अच्छी तरह धोकर और कुछ समय पानी में भिगोकर ही खाएं ताकि उसकी सतह पर लगे किसी भी अवशिष्ट रसायन को हटाया जा सके। इसके साथ ही सरकार और प्रशासन को भी इस पर कड़ी निगरानी बनाए रखने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नियमित जांच करनी चाहिए, जिससे बाजार में इस तरह के अवैध आम न पहुंच सकें। आम जनता को भी जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वह इस विषय को गंभीरता से लें और स्वस्थ फलों का चयन करें। आज जब स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, तब यह और भी जरूरी हो जाता है कि हम केवल स्वाद नहीं बल्कि सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें। आम का आनंद लीजिए, लेकिन सतर्क रहकर, ताकि यह मीठा फल आपके स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचाए।</p>
<p><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 May 2025 11:45:12 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गर्मी में अब प्यासे कंठों की बुझने लगी प्यास </title>
                                    <description><![CDATA[थोक फलसब्जी मंडी परिसर में वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-the-news---thirst-of-thirsty-throats-is-now-being-quenched-in-the-summer/article-112087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भीषण गर्मी के दौर में शहर की सबसे बड़ी थोक फलसब्जी मंडी में प्यासे भटक रहे ग्राहकों, मजूदरों व सब्जी विक्रेताओं को अब राहत मिल गई। मंडी प्रशासन ने यहां खराब पड़े तीन वाटर कूलरों को चालू करवा दिया है। वहीं चार प्याऊ भी शुरू कर दी गई। इसके अलावा ठेलों के माध्यम से भी मंडी परिसर में शीतल जल पिलाया जाने लगा है। इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसके बाद भी मंडी परिसर में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी। इससे मंडी में आने वाले किसान, मजदूर, ग्राहक और व्यापारी ठंडे पानी के लिए तरस रहे थे। अब पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था होने से सभी को काफी राहत मिली है।</p>
<p><strong>मंडी परिसर में घूमकर पिला रहे पानी</strong><br />थोक फलसब्जी मंडी परिसर में वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चार वाटर कूलर भी शोपीस बने हुए थे और प्याऊ का संचालन भी बंद था। अब मंडी प्रशासन ने चार में से तीन वाटर कूलरों को ठीक करवा दिया है। वहीं चौथे कूलर को भी ठीक करवाया जा रहा है। इसके अलावा परिसर में अलग-अलग स्थानों पर बनी हुई पक्की प्याऊ को भी शुरू कर दिया है। मंडी प्रशासन द्वारा तीन ठेलों द्वारा भी परिसर में घूमकर ग्राहकों और सब्जी विक्रेताओं को पानी पिलाने का कार्य भी शुरू कर दिया है। इसके लिए अलग से बर्फ का इंतजाम किया गया है, ताकि लोगों को शीतल जल उपलब्ध हो सके।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाई परेशानी तो हरकत में आया मंडी प्रशासन</strong><br />भीषण गर्मी के दौर में भी थोक फल मंडी परिसर में पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के सम्बंध में 19 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि मंडी परिसर में किसान, व्यापारी व मजदूर ठंडे पानी के लिए तरस रहे हैं। मंडी में चार वाटर कूलर लगे हुए हैं। काफी समय से इनकी मरम्मत नहीं हो पाई है। इस कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गर्मी के मौसम में लोगों का हलक तर नहीं हो पा रहा है। मंडी प्रतिदिन काफी संख्या में किसान व व्यापारी दूर दराज क्षेत्रों से आते है। वाटर कूलर खराब होने से उन्हें ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p>गर्मी के मौसम में मंडी परिसर में पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं होने से परेशानी हो रही थी। अब मंडी प्रशासन ने खराब वाटर कूलरों को ठीक करवा कर चालू करवा दिया है। इससे अब राहत मिली है।<br /><strong>- भीमाराम डांगी, श्रमिक</strong></p>
<p>मंडी में दोपहर तक कारोबार चलता है। इसके बावजूद पानी की व्यवस्था नहीं थी। बाहर से पानी लाना पड़ता था। अब सुबह से ठेले पर चलती फिरती प्याऊ चालू हो गई है। जिससे ठंडे पानी के लिए अब भटकना नहीं पड़ता है।<br /><strong>- नितेष सैनी, सब्जी विक्रेता</strong></p>
<p>मंडी परिसर में खराब पड़े वाटर कूलरों को ठीक करवा दिया है और चार प्याऊ भी संचालित कर दी है। इसके अलावा ठेलों में पानी के मटके रखकर परिसर में घुमाया जा रहा है ताकि किसी को पानी की दिक्कत नहीं आए। <br /><strong>- विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फलसब्जी मंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Apr 2025 15:33:28 +0530</pubDate>
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                <title>गर्मी ने दी दस्तक, पेयजल संकट गहराया </title>
                                    <description><![CDATA[पानी की समस्या के चलते कुओं व ट्यूबवेल से पानी लाना मजबूरी बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/summer-has-knocked--drinking-water-crisis-deepens/article-110551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)36.png" alt=""></a><br /><p>उन्हैल। छोटी सुनेल क्षेत्र के कर्माखेड़ी गांव में गागरोन नल परियोजना में 1 महीने से पानी नहीं आने के कारण ग्रामवासियों को 3 किलोमीटर दुर दराज गांव से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिसमे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को पेयजल संकट का दंश झेलना पड़ रहा है।  ग्रामीण सुरज सिंह, दुर्गा सिंह, धापु बाईं, कैलाश चन्द्र, सुरेश चन्द्र आदि ने बताया कि पानी की समस्या के चलते कुओं व ट्यूबवेल से पानी लाना मजबूरी बना हुआ है। जल्द से जल्द पेयजल समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। </p>
<p>गर्मी ने दस्तक दे दी है ऐसे में जब भीषण गर्मी होगी तो पानी की व्यवस्था कैसे हो पाएगी इसलिए पानी की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>- प्रकाश चन्द्र,ग्रामीण </strong></p>
<p>गर्मी के मौसम की शुरूआत में ही पेयजल व्यवस्था ठप हो गई है, समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>- जगन्नाथ, ग्रामीण  </strong></p>
<p>1 महीने से पानी की समस्या के चलते दूर दराज से पानी लाना पड़ रहा है। <br /><strong>- हरी सिंह, ग्रामीण </strong></p>
<p>पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है जिसको जल्द से जल्द ठीक करवा दिया जाएगा। <br /><strong>-जगदीश शर्मा, गागरिन नल अधिकारी  </strong></p>
<p>झालावाड़ डाक बंगला में पानी की समस्या को लेकर लिखित सूचना कर दी है।  <br /><strong>- नरेंद्र सिंह, सरपंच कर्माखेड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 17:04:38 +0530</pubDate>
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                <title>पेयजल संकट:अव्यवस्था के जाल से नहीं छूट रहा ‘अमृत’</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी के मौसम की शुरूआत में पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों को ट्यूबलेव, कुआ व हैण्डपम्प का सहारा लेना पड़ रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/drinking-water-crisis---amrit--is-not-getting-out-of-the-trap-of-disorder/article-110549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(3)22.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर।  गर्मी की दस्तक के साथ ही रायपुर में पेयजल संकट का ग्रामीणों को सामना करना पड़ रहा है। जानकारी अनुसार जल जीवन मिशन के तहत आजमपुर गांव में 2 साल से बनी पानी की टंकी शोपिस बनी हुई है। गांव में जल मिशन के ठेकेदारों ने कनेक्शन कर दिए तो ग्रामीणों को लगा की हमारे घरों में पानी घर तक आएगा, लेकिन 2 साल से घरों के बाहर लगे नलों के पाइप क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। गर्मी के मौसम की शुरूआत में पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों को ट्यूबलेव, कुआ व हैण्डपम्प का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन पानी के लिए ग्रामीणों को दूर दराज पानी लाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने कई बार इस पेयजल टंकी के बारे में अवगत करवाया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पानी की टंकी को लेकर जो भी समस्या है उनका निराकरण किया जाए ताकी ग्रामीणों को पानी की समस्या से निजात मिल सके ।<br /> <br />गांव की आबादी 2500 है लेकिन 2 साल से जेएमम में बनी टंकी में एक बूंद पानी तक नहीं आया। ग्रामीणों को कुओं से पानी लाना पड़ता है। कई बार जल मिशन योजना के अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन अधिकारियों ने मौके पर आक र नहीं देखा। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। <br /><strong>-रामगोपाल दांगी संरपच दुबलीया </strong></p>
<p>गांव में गर्मी के मौसम  में ग्रामीणों को पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकना पड़ता है। पानी की योजनाएं तो चल रही है लेकिन घर घर तक पानी नहीं पहुंचा। <br /><strong>- बाबूलाल बैरागी ग्रामीण </strong></p>
<p>पगारिया में पंप हाउस बन चुका है, लेकिन पंपसेट नहीं आने के कारण टंकियां में पानी नहीं पहुंच रहा है। जल्द से जल्द पानी की समस्या का हल किया जाना चाहिए। <br /><strong>- जगदीश शर्मा,  इंचार्ज जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट </strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत हर गांव के हर घर में नल लगाकर पानी पहुंचाने की योजना अधिकारियों की लापरवाही के कारण इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। <br /><strong>- मुकेश मेहर -संभाग सह मंत्री भारतीय किसान संघ  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 16:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहरिया बस्ती में 10 दिनों से जल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[पानी को लेकर बस्ती में तनाव का माहौल बनता जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis-in-sahariya-colony-since-10-days/article-110553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)33.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। क्षेत्र की राजपुर ग्राम पंचायत स्थित सहरिया बस्ती के लोग बीते 10 दिनों से गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। इस बस्ती का एकमात्र सहारा सरकारी ट्यूबवेल पिछले 10 दिनों से खराब पड़ा है। जिससे बस्तीवासियों को पीने तक के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। अरविंद, नारायण लाल सहरिया,  काशीलाल गणेशलाल सहरिया, जानकीलाल, लखन सहरिया, राजेंद्र सहरिया,सहित अन्य स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिम्मेदारों को इस समस्या की जानकारी दी लेकिन अब तक न तो कोई मिस्त्री आया और न ही ट्यूबवेल की मरम्मत के लिए कोई प्रयास किया गया। गर्मी के इस भीषण मौसम में जहां पारा तेजी से चढ़ रहा है, वहीं लोगों को अपनी बुनियादी जरूरत पानी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। बस्ती के वासियों ने बताया कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग रोजाना एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर पीने, नहाने और खाना बनाने की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पानी को लेकर बस्ती में तनाव का माहौल बनता जा रहा है।</p>
<p><strong>पंचायत की उदासीनता बनी परेशानी की वजह</strong><br />ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों को बार-बार सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो ट्यूबवेल की मरम्मत हुई और न ही वैकल्पिक जलापूर्ति की कोई व्यवस्था की गई है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की मांग</strong><br />बस्तीवासियों ने जिला प्रशासन और जलदाय विभाग से जल्द से जल्द इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर ट्यूबवेल की मरम्मत कराने और जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक टैंकर से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। यदि जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन की लापरवाही ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बन सकती है।</p>
<p><strong>जल्द करें समाधान</strong><br />बस्तीवासियों को पीने तक के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। जल्दी ही समस्या का समाधान करवाया जाए।<br /><strong>- मुन्ना सहरिया, बस्तीवासी। </strong></p>
<p>समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदारों को अवगत करा चुके है लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। <br /><strong>-रवि सहरिया, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>पर्याप्त मात्रा में नहीं है पानी</strong><br />गर्मी में दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। जिसमें अधिक समय पानी लाने में निकल जाता है और पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है। <br /><strong>- बसंती बाई सहरिया, अनारी सहरिया, बस्तीवासी।     </strong></p>
<p><strong>जल्द करवाएंगे समाधान</strong><br />सहरिया बस्ती में पानी की समस्या की जानकारी मिली है। शाहाबाद विकास अधिकारी को अवगत करा दिया है। इस मामले को लेकर जल्दी समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- जबर सिंह, एडीएम, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 15:41:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विदेशी तकनीक का उपयोग करें तो बुझ सकती है जंगल की आग, एआई तकनीक का भी हो सकता है उपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने संसाधन व निगम की दमकलों के भरोसे ही आग पर काबू पाने के प्रयास किए जा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/forest-fire-can-be-extinguished-if-foreign-technology-is-used/article-110191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कैली फार्निया, अमेजोन और आस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग को काबू पाने के लिए वहां जिस तरह से फिक्सड विंग एयरप्लेन व हैली कॉप्टर वाटर बम का उपयोग किया जा रहा है। उसी तरह से कोटा के आस-पास के जंगलों में लग रही आग पर काबू पाने के लिए भी उन विदेशी तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। जंगल में आग लगने पर इन तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो स्थायी रुप से आग से निजात मिल सकती है। हाल ही में एमेजोन व आस्ट्रेलियां के जंगलों में विशाल आग लगी थी। हालांकि आस्ट्रेलिया के जंगल में तो आग अभी भी लगी हुई है। यह काफी बड़े एरिया में फेल चुकी है। यहां आग से कई इलाके तबाह होने के साथ ही कई लोगों की जान तक जा चुकी है। उसके बावजूद वहां की सरकार व प्रशासन द्वारा आग को काबू करने के लिए हवाई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जिससे न तो वाहनों के जंगल में पहुंचने की समस्या है और न ही दमकलों के धंसने व फंसने की समस्या है। काफी ऊंचाई से पानी की बौछार कर आग पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इसी तरह से कैलीफार्नियां के जंगल में भी आग काफी बड़े एरिया में फेली थी। जिसे काबू पाने के लिए हैली कॉप्टर तकनीक का उपयोग किया गया था। साथ ही ड्रोन सिस्टम से पानी की बौछार कर आग पर काबृू पाजा जा सका था। उसी तरह की तकनीक व संसाधनों का कोटा व आस-पास के इलाकों के जंगल में लग रही आग को बुझाने में भी किया जा सकता है। लेकिन हालत यह है कि कोटा के लाड़पुरा और मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व का हजारों बीघा वन क्षेत्र होने के बावजूद वन विभाग के पास आग बुझाने के आधुनिक संसाधन तक नहीं है। अभी भी पुराने संसाधन व निगम की दमकलों के भरोसे ही आग पर काबू पाने के प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>यहां आए दिन खतरा</strong><br />शहर में हाल ही में मुकुन्दरा विहार क्षेत्र के जंगल में, जवाहर सागर डेम के जंगल में,झालीपुरा के फोरेस्ट एरिया में, कोलीपुरा घाटी के पास जंगल क्षेत्र में, जगपुरा समेत अन्य क्षेत्रों में आग लग रही है। जिसे बुझाने के लिए कोटा शहर से नगर निगम की दमकलों को भेजा जा रहा है। लेकिन वन क्षेत्र अंदरूनी इलाका होने से वहां तक दमकलों को पहुंचने में ही समस्या हो रही है। कई दमकलें रास्ते में धंस रही है तो किसी के टावर फट रहे है। कोई दमकल रास्ते में ही खराब हो रही है तो किसी जगह पर दमकलों से लम्बे पाइप के जरिय आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। </p>
<p><strong>एआई तकनीक का भी हो सकता है उपयोग</strong><br />जिस तरह से वर्तमान में हर जगह एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। उसी तरह से आग बुझाने के संसाधनों के रूप में भी एआई तकनीक का उपयोग किया सकता है। इस तकनीक से आग पर जल्दी और समय रहते काबू पाने में अधिक मदद मिल सकती है। </p>
<p><strong>गर्मी में रोजाना लग रही आग</strong><br />शहर में जिस तरह से तापमान 40 डिग्री से अधिक और 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में शहर के आस-पास चाहे रावतभाटा रोड हो या झालावाड़ रोड के नजदीकी जंगल व वन क्षेत्र की सूखी झाड़ियों में भीषण आग लग रही है। आग फेलने का कारण तेज हवा चलना भी है। सूखी घास व झाड़ी में आग तेजी से फेलने के साथ ही हवा से वह काफी बड़े एरिया तक फेल भी रही है। जिसे काबू पाना वन विभाग के अलावा नगर निगम के फायर अनुभाग के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। साथ ही आग बुझाने में समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>आधुनिक तकनीक हो तो सुविधाजनक</strong><br />कोटा में दो तरह का फोरेस्ट एरिया है। एक वाइल्ड लाइफ व दूसरा टेरीटोरियल। लाड़पुरा रैंज में टेरीटोरियल एरिया है। जहां सीमित संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास किया जाता है। साथ ही निगम की दमकलों से आग पर काबू पाया जाता है। वहीं आग को बढ़ने से रोकने के लिए जगह-जगह पर जेसीबी से गड्ढ़े किए जाते है। जंगल में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग तो हो सकता है लेकिन यह उच्च स्तर का मामला है। तकनीकी का उपयोग करने से आग बुझाना सुविधा जनक हो जाएगा। <br /><strong>- इंद्रेश यादव, आरओ लाड़पुरा</strong></p>
<p><strong>सज्जनपुरा व हिमाचल में हैली कॉप्टर का उपयोग</strong><br />जंगल में आग बुझाने जाने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके  लिए वन विभाग को अपने यहां आधुनिक संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। जिस तरह से हिमाचल व उत्तराखंड के जंगल में आग लगने पर और उदयपुर के सज्जनपुरा की  पहाड़ी में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए हैली कॉप्टर का उपयोग किया गया था। कोटा में भी विदेशी व आधुनिक तकनीक का उपयोग जंगल की आग बुझाने में किया जा सकता है। फोरेस्ट एरिया में वाटर लाइन सिस्टम बनाया जा सकता है। जिससे आग को फेलने से रोकने में मदद मिलेगी। <br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ नगर निगम दक्षिण</strong></p>
<p><strong>वन विभाग को जुटाने होंगे संसाधन</strong><br />फोरेस्ट एरिया में आग लगने पर निगम की दमकलों के भरोसे रहते हैं। जबकि दमकलों के पहुंचने में दिक्कत आती है। कोटा के जंगलों में अधिकतर ग्राउंड एरिया में आग लगती है। ऐसे में यहां हैली कॉप्टर तकनीक का उपयोग नहीं किया जा सकता। उससे हवा चलने पर आग फेलने का खतरा रहता है। कई साल पलहे सुझाव दिया था कि हर पंचायत मुख्यालय पर ट्रेैक्टर टैंकर रखा जाए। जिसके खेत व जंगल में धंसने की समस्या भी नहीं रहती । ट्रेक्टर आसानी से किसी भी एरिया में जा सकता है। साथ ही आधुनिक फायर वाटर सिस्टम का उपयोग कर जंगल की आग को बुझाया जा सकता है। <strong> - संजय शर्मा, सेवानिवृत्त सीएफओ </strong></p>
<p><strong>कोटा में भी आधुनिक संसाधनों की दरकार</strong><br />कोटा के आस-पास वन क्षेत्र और मुकुन्दरा के फोरेस्ट एरिया में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए विभाग की टीम लगी हुई है। फिलहाल आग को बढ़ने से रोकने के लिए आग वाली जगह से 50 से 60 फीट की दूरी  पर गड्ढ़े कर आग को ब्रेक किया जाता है। जिससे वह आगे नहीं फेल सके। उसके अलावा विभाग के फायर फाइटर्स सिस्टम का भी उपयोग किया जाता है। वैसे विभाग के पास थर्मल ड्रोन है जिसकी मदद से रात के समय भी फोरेस्ट में आग लगने पर उसका पता लगाया जा सकता है। जिससे टीम को वहां पहुंचने में सुविधा होती है। वैसे विदेशी व आधुनिक तकनीक का कोटा में जंगल की आग बुझाने में उपयोग हो सकता है। इसके लिए उच्च स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन हैली कॉप्टर का उपयोग अधिकतर क्राउन फायर में किया जाता है। जिसमें आग पेड़ से अधिक ऊंचाई तक हो। जबकि कोटा व राजस्थान में इस तरह की आग नहीं होकर अधिकतर ग्राउंड की आग लगती है। <br /><strong>- मुथु एस. डीएफओ मुकुन्दरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 14:41:04 +0530</pubDate>
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                <title>संकरे मार्केट और तंग गलियों में कैसे बुझेगी आग, नहीं मिली फायर बाइक</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के फायर अनुभाग में करोड़ों रुपए की बड़ी-बड़ी दमकलें हैं। वहां पिछले दो साल से फायर बाइक(बाइक दमकल) की आवश्यकता महसूस होने के बाद भी अभी तक नहीं मिली है। कता महसूस होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-will-fire-be-extinguished-in-narrow-markets-and-narrow-streets/article-106864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि, जहां काम आवे सुई, कहां करे तरवारि, अर्थात रहिम दास कहते हैं कि हर चीज का अपना महत्व होता है। जहां पर सुई काम करती है वहां पर तलवार काम नहीं कर सकती। ऐसा ही हाल कोटा नगर निगम में हो रहा है। कोटा शहर के फायर अनुभाग में करोड़ों रुपए की बड़ी-बड़ी दमकलें हैं। वहां पिछले दो साल से फायर बाइक(बाइक दमकल) की आवश्यकता महसूस होने के बाद भी अभी तक नहीं मिली है। जबकि एक बार फिर गर्मी का सीजन शुरु हो चुका है। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही यहां बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो रहा है। नए कोटा शहर में हो रहे विकास व वहां लगने वाली आग की संभावनाओं को देखते हुए उस पर काबू पाने के लिए तो नगर निगम के फायर अनुभाग के पास करोड़ों रुपए के संसाधन व बड़ी-बड़ी दमकलें हैं। बहुमंजिला इमारतों व हॉस्टल में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए 45 से 60 मीटर ऊंचाई तक की बड़ी दो हाइड्रोलिक लेडर दमकलें तक है। लेकिन मात्र लाखों की कीमत वाली फायर बाइक मिलने का इंतजार लम्बा होता जा रहा है।  अभी मार्च में ही जिस तरह से गर्मी अपने तेवर दिखाने लगी है। उसे देखते हुए आने वाले अप्रैल, मई और जून के तीन महीनों में अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। जिसमें आग लगने की घटनाएं भी हो सकती है। ऐसे में छोटी जगहों पर आग बुझाने के लिए फायर बाइक की आवश्यकता महसूस होगी। </p>
<p><strong>दोनों निगम क्षेत्रों के लिए 10 फायर बाइक</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि शहर के पुराने इलाके व मार्केट संकरे है। गर्मी के सीजन में अधिकतर घरों व दुकानों और शोरूम व मार्केट में एसी चलते है। ऐसे में कभी भी शॉर्ट सर्किट या गर्मी अधिक होने पर ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटनाएं हो सकती है। ऐसे में बड़ी दमकलों के वहां जाने और आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यास ने बताया कि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में 5-5 फायर बाइक की आवश्यकता है। इसकी डिमांड दो साल पहले स्वायत्त शासन विभाग व राज्य सरकार को भेजी गई थी। लेकिन पहले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता में और फिर सरकार बदलने के कारण यह मामला अटका हुआ है। अभी विधानसभा चल रही है। इसके बाद ही इस संबंध में डीएलबी में बात कर जानकारी ली जाएगी। </p>
<p><strong>चार फायर स्टेशन, 34 दमकलें</strong><br />कोटा के दोनों निगम क्षेत्रों में छोटी-बड़ी करीब 34 दमकलें हैं। जिनका व्यवस्था की दुष्टि से समान रूप से बंटावारा किया हुआ है। सब्जीमंडी, श्रीनाथपुरम्, भामाशाह मंडी व रानपुर समेत चार फायर स्टेशन है। पर्याप्त संख्या में फायर मेन व चालक भी है। कोटा दक्षिण में सिविल डिफेंस के स्वयं सेवकों को भी लगाया हुआ है।</p>
<p><strong>20 लीटर की टंकी, 10 लाख कीमत</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि फायर बाइक छोटी होने से संकरी जगहों पर आग बुझाने में काफी कारगर है। उस पर लगी पानी की टंकी 20 लीटर की रहती है। लेकिन उसमें फॉम व अन्य आग बुझाने के संसाधनों से लैस रहती है। साथ ही पानी की अधिक आवश्यकता होने पर नल से इसके पाइप को जोड़ने पर पानी उसी प्रेशर से फेकती है।  व्यास ने बताया कि इसकी उपयोगिता होने से इसकी कीमत करीब 10 से 12 लाख होगी। लेकिन ये फायर बाइक डीएलबी के स्तर पर ही क्रय कर कोटा भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि जयपुर व उदयपुर समेत कई शहरों में इस तरह की फायर बाइक फायर अनुभाग में हैं। </p>
<p><strong>इन इलाकों में पड़ती है जरूरत</strong><br />नए कोटा के साथ ही पुराना कोटा शहर भी है। पुराने शहर में बहुत सारे मार्केट व इलाके ऐसे हैं जो संकरे हैं और तंग गलियों से होकर गुजरते है। इनमें चाहे इंदिरा मार्केट हो या शास्त्री मार्केट। बजाज खाना हो या पाटनपोल । घंटाघर, चंद्रघटा, हिरण बाजार, श्रीपुरा, लाड़पुरा, करबला , मकबरा , चश्मे की बावड़ी समेत कई ऐसे इलाके हैं जहां जाने के रास्ते काफी संकरे हैं। अधिकतर क्षेत्रों में तो सिर्फ दो पहिया वाहन ही निकल पाते है। ऐसे में वहां आग लगने की घटनाएं होने पर  बड़ी दमकलें नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में दमकलों को दूर खड़ा कर लम्बे पाइप से आग बुझाना पड़ता है। पूर्व में ऐसे कई मामले हो चुके है। संकरे मार्केट और तंग इलाकों में आग लगने की घटनाओं पर उन पर काबू पाने के लिए छोटी और फायर बाइक की आवश्यकता है। इसके लिए दो साल पहले कांग्रेस सरकार के समय से मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक भी नहीं मिली है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:18:10 +0530</pubDate>
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                <title>मौसम हो रहा गर्म, वाटर नहीं हुआ कूल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में वाटर कूलर तो अब जगह-जगह पर हर थोड़ी दूरी पर लगे हुए हैं। लेकिन उनकी स्थिति काफी खराब है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/weather-is-getting-hot--water-is-not-getting-cool/article-106743"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में आने वाले समय में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ने वाला है। ऐसे में राहगीरों को पीने के लिए ठंडे पानी की जरूरत होगी। लेकिन हालत यह है कि सड़क किनारे मेन रोड पर जगह-जगह लगे अधिकतर वाटर कूलर या तो खराब हैं या बंद पड़े हुए हैं। जिससे उनका ठंडा पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। गर्मी का सीजन शुरु होने के साथ ही पहले शहर में जगह-जगह प्याऊ लगाई जाती थी।  नगर निगम की गौशाला के माध्यम से प्याऊ का संचालन किया जाता  था। लेकिन पिछले कई सालों से निगम ने प्याऊ लगाना तो बंद कर दिया। उनके स्थान पर अब वाटर कूलर लगने लगे हैं। नगर निगम के अलावा विधायक व सांसद कोष से और स्वयंसेवी संस्थाओं व समाज सेवियों के माध्यम से शहर में वाटर कूलर तो लगाए गए हैं। लेकिन हालत यह है कि उनमें से कई वाटर कूलर खराब या बंद हैं। </p>
<p><strong>करीब 500 से अधिक वाटर कूलर</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण क्षेत्र में करीब 500 से अधिक वाटर कूलर लगे हुए हैं। पार्क, मंदिर, धार्मिक स्थल, मेन रोड, मार्केट, बस स्टैंड समेत कई जगह पर वाटर कूलर लगे हुए हैं। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा पार्षदों की अनुशंसा पर और विधायक कोष से उनकी अनुशंसा पर नगर निगम के माध्यम से वाटर कूलर लगाए गए हैं। ये वाटर कूलर हर साल गर्मी के सीजन में काम में आते हैं।</p>
<p><strong>यह है वाटर कूलर की स्थिति</strong><br />शहर में वाटर कूलर तो अब जगह-जगह पर हर थोड़ी दूरी पर लगे हुए हैं। लेकिन उनकी स्थिति काफी खराब है। शहर में शॉपिंग सेंटर में बैंक के सामने वाटर कूलर ही गायब है। ऐसे में उसका ठंडा पानी लोगों को मिलना ही संभव नहीं है। फर्नीचर मार्केट में लगा वाटर कूलर बंद पड़ा हुआ है।  वहीं मल्टीपरपज स्कूल के कॉर्नर पर वाटर कूलर तो लगा हुआ है लेकिन वह बंद है। छावनी चौराहे पर एलआईसी बिल्डिंग के सामने वाटर कूलर का स्ट्रक्चर तो बना हुआ है। लेकिन वहां न पानी की टंकी है और न ही वाटर कूलर है। इसी तरह एक होटल के सामने लगा वाटर कूलर बंद पड़ा हुआ है। संजय नगर स्थित नए बस स्टैंड पर वाटर कूलर नाम मात्र व दिखावे है। यह स्थिति तो कुछ ही वाटर कूलर की है। पूरे शहर में ऐसे दर्जनों वाटर कूलर हैं जिनमें या तो नल गायब हैं या टंकी गायब है। किसी में चालू होने से पानी तो आ रहा है लेकिन उसका विद्युत कनेक् शन नहीं होने से गर्म पानी आ रहा है। नए कोटा शहर से लेकर भीमगंजमंडी तक इस तरह के कई वाटर कूलर देखे जा सकते हैं। </p>
<p><strong>नगर निगम करवाता सफाई व मेंटेनेंस</strong><br />सूत्रों के अनुसार वाटर कूलर चाहे नगर निगम ने लगवाएं हो या विधायक कोष से लगे हों। निगम क्षेत्र में लगे वाटर कूलरों की मेंटेंनस और पानी की टंकियों की सफाई नगर निगम द्वारा करवाई जाती है। जबकि संस्थाओं द्वारा संचालित कूलरों की सफाई उनके द्वारा ही करवाई जाती है। हालत यह है कि नगर निगम के विद्युत अनुभाग में तकनीकी स्टाफ की कमी होने से इन पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के निगम क्षेत्र में लगे वाटर कूलरों की मेंटेनेंस व टंकी की सफाई नगर निगम के माध्यम से करवाई जाती है। अभी गर्मी शुरु होने से पहले सभी की मेंटेनेंस करवाने के आदेश जारी कर दिए हैं। या तो वे सही हो गए होंगे या हो रहे होंगे। गर्मी तेज पड़ने से पहले सभी को सही करवा दिया जाएगा। जिससे लोगों को गर्मी में शीतल जल मिलता रहे। <br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 16:29:40 +0530</pubDate>
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                <title> छोटी कालीसिंध में पानी रीता, पेयजल संकट </title>
                                    <description><![CDATA[दो टंकियों से कस्बे में कई सालों से एक दिन छोड़ एक दिन पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/water-runs-out-in-chhoti-kali-sindh--drinking-water-crisis/article-106351"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। गंगधार कस्बे का मुख्य जलस्रोत छोटी काली सिंध नदी सुख चुकी है। नदी में मुश्किल से 10 से 12 दिनों का पानी शेष है, यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया तो आने वाले दिनों में पेयजल की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। गंगधार कस्बे का मुख्य जल स्रोत छोटी काली नदी में गर्मी की शुरूआत में ही पानी रीत गया है, जलदाय विभाग के नदी पर गुफा शरीफ के समीप लगे इंटेक से पानी एकत्र किया जाता है, यहां पानी बहुत कम बचा है, जो धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इंटेक के आसपास मात्र 10 से 12 दिन का पानी शेष है यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में गंगधार कस्बे में पेयजल संकट गहराया जा सकता है। जलदाय विभाग ने गंगधार कस्बे को 10 जोन में बाट रखा है, दो टंकियों से कस्बे में कई सालों से एक दिन छोड़ एक दिन पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। छोटी काली सिंध नदी के साथ-साथ गागरिन परियोजना का भी पानी लिया जाता है दोनों का पानी एकत्र कर जलापूर्ति की जाती है। छोटी काली सिंध नदी पर पुलिया के समीप छोटा एनीकेट बना हुआ है ग्रामवासियों का कहना है हर साल गर्मी के दिनों में पानी का संकट होता है इसके समाधान के लिए एनीकेट की ऊंचाई बढ़ाई जाए। जलदाय विभाग के सहायक अभियंता मोहनलाल मीणा का कहना है गंगधार में पेयजल संकट नहीं आने दिया जाएगा, नदी में गड्ढे कर पानी लिफ्ट किया जाएगा तथा गागरिन परियोजना का पानी भी बढ़वाया जाएगा, नदी में सिंचाई के लग रहे पंप सेट हटाने के लिए भी विद्युत विभाग को पत्र लिखा है सामूहिक रूप से कार्यवाही कर नदी में लगे पंप सेट हटाए जाएंगे। साथ ही आवश्यकता पढ़ने पर टैंकर भी डलवाए जाएंगे।</p>
<p>कालीसिंध नदी का गिरता जलस्तर भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा कर सकता है। साथ ही जल की कम उपलब्धि जल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगी। जलदाय विभाग को अभी से व्यवस्था के प्रति गंभीर होना होगा। <br /><strong>- दशरथ नंदन पांडे, पर्यावरण प्रेमी निवासी गंगधार</strong></p>
<p>पानी की व्यवस्था पर्याप्त हो सिंचाई के लिए भी पानी  की उपलब्धता पूर्ण हो  पीने के लिए पानी के लिए समय पर गेट लगाने की कार्रवाई हो, पानी की उपलब्धता के लिए नदी पर बने एनीकेट की ऊंचाई को भी बढ़ाया जाए। <br /><strong>- राजेश नीमा, पूर्व सरपंच गंगधार</strong></p>
<p>नदी में पानी कम होता जा रहा है, कस्बे में पेयजल संकट नहीं हो उसके लिए जलदाय विभाग को समय रहते इस ओर ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- दिलीप मोरी स्थानीय निवासी</strong><br /> <br />गंगधार कस्बे में पेयजल संकट नहीं आने दिया जाएगा, उसके लिए प्रयास जारी है, नदी में गड्ढे करवा कर पानी लिफ्ट किया जाएगा। आवश्यकता पढ़ने पर गागरिन परियोजना से भी पानी बढ़वाया जाएगा।<br /><strong>- मोहनलाल मीणा, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 15:06:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गर्मी शुरु होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में फिर लगेगी आग : दमकलों की बढ़ जाती है भागदौड़, अधिकतर खेतों में नौलाई में लगती है आग</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी अधिक होने पर शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। ग्रामीण  में आग अधिकतर खेतों  में नौलाई में लगती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fires-will-occur-again-as-soon-as-summer-starts--red-army-is-ready/article-105493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)73.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । गर्मी का सीजन शुरु होने पर जिस तरह से जलदाय विभाग का काम बढ़ जाता है। उसी तरह से फायर अनुभाग का काम भी अन्य दिनों से अधिक हो जाता है। गर्मी में आग लगने की घटनाएं अधिक होने से दमकलों की भागदौड़ बढ़ जाती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नौलाई में आग की घटनाएं अधिक होती है। सामान्य तौर पर गर्मी का सीजन अप्रैल से माना जाता है। लेकिन इस बार अभी से ही जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उससे स्पष्ट है कि इस बार मार्च से ही गर्मी का सीजन शुरु हो जाएगा। गर्मी अधिक होने पर शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। ग्रामीण  में आग अधिकतर खेतों  में नौलाई में लगती है। </p>
<p><strong>हर साल एक हजार से अधिक घटनाएं</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में हर साल गर्मी के सीजन में आग लगने की करीब एक हजार से अधिक घटनाएं होती है।  जिनमें शहर व ग्रामीण क्षेत्रों  में आग की घटनाएं शामिल है। शहर में जहां 15 अप्रैल के बाद तापमान में बढ़ोतरी अधिक होने पर आग लगती है। ये आग अधिकतर एसी में शॉर्ट सर्किट से लगती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मार्च में फसल कटाई के बाद खेतों में नौलाई को रखा जाता है। जिनमें भी कई बार गर्मी से तो कई बार किसानों द्वारा जानबूझकर उनमें आग लगाई जाती है। लेकिन हवा से यह आग अधिक फेल जाती है। उसके बाद सूचना मिलते ही दमकलें आग बुझाने के लिए दौड़ती रहती है। </p>
<p><strong>लगातार बढ़ रही घटनाएं</strong><br />शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं हर साल बढ़ रही है। नगर निगम कोटा उत्तर के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में जहां आग लगने की 278 घटनाएं हुई। इनमें से शहर में 258 व ग्रामीण में 20 घटनाएं थी। इनमें सबसे अधिक अप्रैल से जून के बीच रही। अप्रैल में 54, मई में 72 और जून में 23 घटनाएं हुई।  इसी तरह से वर्ष 2021-22 में 375 घटनाएं हुई। जिनमें से 346 शहरी क्षेत्र में व 29 ग्रामीण क्षेत्र की है। इस साल अप्रैल में 115, मई में 46 व जून में 37 घटनाएं हुई थी। वहीं वर्ष 2022-23 में 612 घटनाएं हुई। जिनमें से शहरी क्षेत्र में 593 व ग्रामीण में 19 घटनाएं हुई। इस साल अप्रैल में 171, मई में 182 व जून में 71 घटनाएं हुई। जबकि वर्ष 2023-24 में कुल564 घटनाएं हुई है। इसी तरह से कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में भी हर साल 500 से अधिक घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>24 घंटे कंट्रोल रूम तैयार</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि निगम के लायर अनुभाग का कंट्रोल रूम 24 घंटे तैयार रहता है। सूचना मिलते ही कम से कम समय में दमकलों को मौके पर पहुंचाना प्राथमिकता रहती है। 15 मार्च के बाद कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया जाता है।  </p>
<p><strong>नौलाई में आग लगाना अवैध, फिर भी जला रहे</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि मार्च में फसल कटाने  के बाद से ही खेतों में नौलाई में आग की घटनाएं होने लगती है। गर्मी के कारण तो आग कम लगती है। लेकिन अधिकतर किसान खुद ही नौलाई में आग लगा देते है। व्यास ने बताया कि नौलाई में आग लगाना अवैध घोषित किया हुआ है।  संबंधित थाने की पुलिस ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन उसके बाद भी हर साल नौलाई में आग की घटनाएं बढ़ रही है। व्यास ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही नगर निगम के फायर स्टेशनों से तुरंत दमकलों को रवाना किया जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र व खेत अधिक दूरी पर होने से दमकलों को पहुंचने में समय लगता है। कई बार खेत या रास्ता कच्चा होने से दमकलें बीच रास्ते में ही फंस जाती है। लेकिन फायर अनुभाग की प्राथमिकता आग को काबू करना रहता है।</p>
<p><strong>संसाधन व फायरमैन पर्याप्त</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि आग लगने की घटनाएं होने पर उन्हें तुरंत काबू करने के लिए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण मिलकर काम करता है। निगम के फायर अनुभाग में छोटी-बड़ी विभिन्न क्षमताओं की 32 दमकलें व 2 हाइड्रोलिक लेडर दमकलें हैं। चार फायर स्टेशन हैं जिनमें से एक उत्तर में सब्जीमंडी का और तीन दक्षिण में श्रीनाथपुरम्,   भामाशाह मंडी व रानपुर का। यहां दोनों जगह पर 45-45 फायरमैन व 25-25 ड्राइवर है। साथ ही कोटा दक्षिण में  सिविल डिफेंस के 20 स्वयंसेवक अधिक है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के अलावा दो अग् िनशमन अधिकारी व एक सहायक अग्निशमन अधिकारी भी है। वैसे कोटा उत्तर में देवेन्द्र मीणा को  मुख्य अग् िनशमन अधिकारी के पद पर लगाया गया है लेकिन उन्होंने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:32:07 +0530</pubDate>
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                <title>रामगंजमंडी में बार बार पेयजल संकट क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[रामगंजमंडी के लोगो को वर्षो पहले भीषण गर्मी के मौसम में चार माह तक पेयजल उपलब्ध नहीं होता था। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-is-there-a-frequent-drinking-water-crisis-in-ramganj-mandi/article-93029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(4)13.png" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी नगर में पेयजल संकट वर्षों पुराना है। वर्षों से ही यहां लोग पेयजल के लिए त्राहि त्राहि करते रहे है। आज भी यही हाल है जबकि यहाँ अलग अलग योजनाओं पर करोड़ो की राशि खर्च हो चुकी है। रावतभाटा रामगंजमंडी पेयजल योजना, रावतभाटा पचपहाड़ पेयजल योजना, इसके बाद नगर में पुनर्गठित पेयजल योजना आदि पर करोड़ों की राशि खर्च हो चुकी है, किंतु रामगंजमंडी जैसे मुख्यालय जहां राज्य के कैबिनेट मंत्री प्रतिनिधित्व करते है, वहां आज भी पेयजल के लिए कभी 96 घण्टे तो कभी120 घण्टे तक पानी नहीं मिल पा रहा है। हाल ही में नगर में 5-6 दिनों बाद घरों पर पानी सप्लाई हुआ। </p>
<p><strong>वर्षों से शहर के लोग पेयजल को तरसे </strong><br />रामगंजमंडी के लोगो को वर्षो पहले भीषण गर्मी के मौसम में चार माह तक पेयजल उपलब्ध नहीं होता था, पूर्व शिक्षा मंत्री हरिकुमार औदीच्य रावतभाटा पेयजल योजना को लाए थे,यह योजना पूर्व मंत्री रामकिशन वर्मा के कार्यकाल मे शुरू हुई ,तब से यहाँ 24 घण्टे में एक बार पेयजल आपूर्ति होती है। विधायक प्रहलाद गुंजल के समय एक ओर पेयजल योजना रावतभाटा पचपहाड़ पेयजल योजना शुरू हुई जो रामगंजमंडी आस पास गांवों सहित रामगंजमंडी में भी पेयजल सप्लाई होते हुए भवानीमंडी जा रही थी, आजकल यह योजना भी सिर्फ रामगंजमंडी तक ही सीमित है। भवानीमंडी में अलग पेयजल योजना वहां शुरू कर दी है, 2015-16 में रामगंजमंडी शहर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा रामगंजमंडी शहर में प्रतिदिन नल आए इसके लिए 11.50करोड़ की पुनर्गठित पेयजल योजना में यहाँ 3 पानी टैंक बनाए व सारी पुरानी पाइप लाइन व नई कोलोनी की पाइप लाइन जोड़ी गई, विभाग का फिर यही वादा था कि यहां प्रतिदिन नल आएंगे। लेकिन आज भी लोग 48 घण्टे के बाद पानी सप्लाई होता है।</p>
<p>नवरात्र और दशहरे के त्योहार पर आया, यह जल संकट रामगंज मंडी के इतिहास का सबसे बड़ा जल संकट था। घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो इसलिए सारे मामले की जांच कर दोषी ठेकेदार और कर्मचारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए। पाइपलाइन के रखरखाव रिपेरिंग के लिए विभाग ठेकेदार को प्रति माह मोटी राशि का भुगतान कर रहा है अभी घटित घटना लाइन टूटने फूटने दुर्घटनाग्रस्त होने जैसी आकस्मिक घटना नहीं थी बल्कि लाइन में एक लीकेज आया था, जिसे पूर्व तैयारी के साथ  सुधारा जाना था और इसके लिए 24 घंटे का समय पर्याप्त था पर विभाग ने अग्रिम सावधानी बरतते हुए 6 और 7 अक्टूबर दो दिन का सप्लाई ब्रेक ले लिया था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते इसमें चार दिन लग गए और बड़ा जल संकट खड़ा हो गया। विद्युत लाइन में फ्यूज उड़ना एवं फॉल्ट आना एक सामान्य प्रक्रिया है पानी आपूर्ति पंप जेसी अति आवश्यक लाइन का फ्यूज फाल्ट ठीक करने में विद्युत विभाग को 10 घंटे का समय लगा जो अत्यधिक लापरवाही है। यह यह भी जांच का विषय है की विद्युत विभाग को फाल्ट के बारे में समय पर बताया गया या नहीं बताया गया और यदि समय पर बताया गया तो विद्युत विभाग ने तुरंत ठीक क्यों नहीं किया जो भी दोषी है उसे पर कार्यवाही होनी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो ।</p>
<p><strong>जल संकट पर चला घटनाक्रम </strong><br />5 और 6 अक्टूबर को रावतभाटा रामगंजमंडी पेयजल योजना की लाइन में आए, लीकेज को ठीक करने की योजना बनी। 7 और 8 अक्टूबर को पानी आपूर्ति का ब्रेक लिया गया, लेकिन  9 और 10 अक्टूबर को भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र जैन के साथ शहर के लोग जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी कार्यालय पहुंचे और जवाब सवाल किए तो 11 अक्टूबर को सप्लाई चालू हुई और आधे से ज्यादा शहर में पानी पहुंचा, लेकिन रात को 9 बजे सप्लाई सेंटर अंबाकुई घाटे रावतभाटा में विद्युत लाइन में फाल्ट आ गया, जिससे 12 अक्टूबर को सुबह शेष आधे शहर में जो पानी की सप्लाई की जानी थी  वह नहीं  हुई, तो पालिका प्रतिपक्ष नेता महेंद्र समरिया और पूर्व पालिका अध्यक्ष विजय गौतम पानी की टंकी पर चढ़ गए, जिन्हें समझाइश कर नीचे उतर गया और विद्युत फाल्ट से उपजे संकट से अवगत करवाया गया कुछ मोहल्ले में टैंकर से आपूर्ति कर संतुष्ठ किया गया। इधर भाजपा नेता वीरेंद्र जैन और नगर मंडल अध्यक्ष कमलेश गोइन भी  दुबारा  कार्यालय पहुंचे और शनिवार शाम को 4 बजे बाद ही शहर में पानी की सप्लाई चालू करने के लिए अधिकारियों से चर्चा कर सप्लाई चालू करवाने की बात की। जिससे जनता को काफी राहत मिली। रविवार की जल आपूर्ति को जोड़कर समाचार लिखे जाने तक लगभग सभी मोहल्ले में व्यवधान आने के बाद दो-दो बार पानी की आपूर्ति हो चुकी है जो राहत की बात है। पर अब चिंता की बात यह है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति नहीं हो। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />कर्मचारियों की लापरवाही साफ दिख रही है।  समय पर लीकेज दुरुस्त नहीं करने वाले ठेकेदार और  विद्युत सप्लाई को समय पर चालू नहीं करने वाले दोषी कर्मचारियों पर सारे मामले की जांच कर  सख्त कार्यवाही होनी चाहिए ताकि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति और लापरवाही फिर नहीं हो ।<br /><strong>- वीरेन्द्र जैन, भाजपा नेता</strong></p>
<p>पाइप लाइन में फाल्ट सुधारने में हुई लेटलतीफी के मामले में ठेकेदार को नोटिस दिया जाएगा। जुर्माना भी लगाया जाएगा,भविष्य में लेटलतीफी न हो विभागीय कार्यवाही की जाएगी। विद्युत विभाग द्वारा भी फाल्ट सुधारने में की गई लेटलतीफी के मामले में भी विद्युत विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा,भविष्य में ऐसी गलती न हो विभाग के बड़े अधिकारियों को भी पत्र लिखा जाएगा,मामला ऊर्जा मंत्री के संज्ञान में डाल दिया है।विभाग नियमित पेयजल आपूर्ति के पूरे प्रयास कर रहा है।आज भी जिन वार्डो में सप्लाई नही हुई थी वहां भी सप्लाई की गई है शेष वार्डो में भी सप्लाई की जाएगी।<br /><strong>- अंकित सारस्वत अधिषासी अभियन्ता रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Oct 2024 17:14:55 +0530</pubDate>
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